Retirement Planning: आप रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो ये बातें जरूर जान लें

क्या रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपने पैसे जुटाने शुरू कर दिए हैं? अगर नहीं तो इसमें आपको देर नहीं करना चाहिए। लेकिन, इससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। यह सुनने में आसान लगता है लेकिन यह सवाल मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि आज आपको अपने लिए जितना फंड पर्याप्त लगता है, उसकी वैल्यू 10-15 साल बाद काफी कम रह जाएगी।

रिटायरमेंट बाद के खर्च का अंदाजा

कई लोग रिटायरमेंट बाद के खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना खर्च करते हैं, उतना रिटायरमेंट के बाद आपको खर्च करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। कुछ खर्च आपके बजट से निकल जाएंगे तो कुछ नए खर्च आपके बजट में शामिल हो जाएंगे। उदाहरण के लिए घर की EMI चुकाने की जरूरत आपको नहीं रह जाएगी। लेकिन मेडिकल केयर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

इनफ्लेशन से पैसे की वैल्यू घटती रहती है

इनफ्लेशन के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आज आपके परिवार का मंथली खर्च 45,000 रुपये है। 20 साल बाद आपको सेम लाइफ स्टाइल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा मंथली खर्च करना पड़ेगा। इसकी वजह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से पैसे की वैल्यू 6 फीसदी तक घटती जाती है।

कम से कम 25 साल के खर्च का इंतजाम जरूरी

दूसरा, लोगों को यह पता नहीं होता कि रिटायरमेंट बाद उन्हें कितने सालों तक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे उतने लंबे समय तक पैसे खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति 60 साल में रिटायर करता है तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च के बारे में सोचना चाहिए।

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निवेश के कई विकल्पों का कर सकते हैं इस्तेमाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करने के लिए निवेश के कई विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, म्यूचुअल फंड की स्कीम आदि शामिल हैं। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ भी शामिल होगा। आप जितना जल्द रिटारमेंट के लिए निवेश शुरू करेंगे, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश होगी। साथ ही लंबी अवधि में आपके पैसे पर कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलेगा।

प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड, लंबे समय में कौन आपको बनाएगा ज्यादा अमीर? 4 पॉइंट्स में समझिए कहां मिलेगा बंपर रिटर्न

Real Estate vs Mutual Funds: लॉंग टर्म के लिए निवेश कैसे करें? जमीन खरीदे या फिर म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए। भारत के निवेशकों के बीच लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए सालों से यह बहस चली आ रही है। वैसे दशकों तक हमारे देश में प्रॉपर्टी यानी जमीन या मकान खरीदना ही अमीर बनने और सुरक्षित भविष्य का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स एक बेहद जबरदस्त ऑप्शन के तौर पर उभरे हैं।

प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड, दोनों ने ही निवेशकों को अमीर बनाया है। लेकिन जब बात लंबे समय के लिए निवेश की हो, तो आपके लिए कौन सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा? आइए समझते हैं दोनों का पूरा नफा-नुकसान।

1- रियल एस्टेट: क्यों आज भी प्रॉपर्टी पर फिदा हैं लोग?

रियल एस्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक ‘टैंजिबल एसेट’ है, यानी इसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और खुद इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अन्य बड़े फायदे इस प्रकार हैं:

किराए से रेगुलर इनकम: प्रॉपर्टी से आपको हर महीने रेंटल इनकम मिल सकती है, जो महंगाई के साथ बढ़ती जाती है।

बड़ी ग्रोथ की संभावना: अगर किसी इलाके में नया हाईवे, मेट्रो या कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आ रहा है, तो वहां की जमीन के दाम रातों-रात आसमान छू सकते हैं।

छिपी हुई लागत: प्रॉपर्टी खरीदते समय लोग अक्सर इसके अतिरिक्त खर्चों को भूल जाते हैं। स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, सालाना प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस का खर्च आपके कुल मुनाफे को काफी कम कर देता है। इसके अलावा, अगर होम लोन लिया है, तो ब्याज का भारी बोझ भी जोड़ना पड़ता है।

2- लिक्विडिटी: सबसे बड़ा और मुख्य अंतर

रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क पैसे की जरूरत पड़ने पर दिखता है। प्रॉपर्टी को तुरंत बेचना नामुमकिन होता है। एक सही खरीदार ढूंढने, डील पक्की करने और कागजी कार्रवाई पूरी करने में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। मंदी के दौर में तो यह इंतजार और लंबा हो सकता है।

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म्यूचुअल फंड्स में लिक्विडिटी का कोई झंझट नहीं होता। आप जब चाहें अपने फंड्स को ऑनलाइन रिडीम कर सकते हैं और कुछ ही दिनों में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है।

3- म्यूचुअल फंड्स क्यों बन रहे हैं आम लोगों की पहली पसंद?

म्यूचुअल फंड्स ने निवेश की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान और सुलभ बना दिया है। जहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आपको एक साथ लाखों-करोड़ों रुपयों का इंतजाम करना पड़ता है या बड़ा लोन लेना पड़ता है, वहीं म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए हर महीने महज ₹500 जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं।

प्रॉपर्टी में निवेश करते समय आपका पूरा पैसा एक ही जगह ब्लॉक हो जाता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड आपका पैसा अलग-अलग कंपनियों और सेक्टर्स में लगाते हैं। इस डायवर्सिफिकेशन से रिस्क काफी कम हो जाता है।

4- वेल्थ क्रिएशन का ट्रैक रिकॉर्ड: कहां हुई ज्यादा कमाई?

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने क्या और कब खरीदा है।

रियल एस्टेट का गणित: एक बेहतरीन लोकेशन पर ली गई प्रॉपर्टी आपको रेंटल और कैपिटल एप्रिसिएशन यानी कीमत बढ़ना दोनों से तगड़ा रिटर्न दे सकती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि भारी उम्मीदों के बावजूद किसी इलाके में प्रॉपर्टी के दाम सालों तक एक ही जगह थमे रहते हैं।

म्यूचुअल फंड का गणित: शेयर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर म्यूचुअल फंड पर जरूर पड़ता है। लेकिन जो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना अपनी एसआईपी जारी रखते हैं, उन्हें लंबे समय में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का जबरदस्त फायदा मिलता है, जो वेल्थ को कई गुना बढ़ा देता है।

आपके लिए क्या हो सकता है बेस्ट?

अक्सर लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड में से किसी एक को ही चुनना होगा। लेकिन असलियत में कई सफल निवेशक दोनों में पैसा लगाते हैं। प्रॉपर्टी जहां आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और रेंटल इनकम देती है, वहीं म्यूचुअल फंड आपको लिक्विडिटी, डायवर्सिफिकेशन और तेजी से बढ़ने का मौका देते हैं।

निवेश करने से पहले यह न पूछें कि कौन सा एसेट क्लास बेहतर है, बल्कि यह देखें कि आपके वित्तीय लक्ष्य, आपकी जेब और आपकी जरूरत के हिसाब से आपके लिए कौन सा विकल्प सही बैठता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Emcure Pharma: नमिता थापर की कंपनी से 12 साल बाद बेन कैपिटल का एग्जिट, ₹352 करोड़ में बेचा हिस्सा; खरीदार कौन

प्राइवेट इक्विटी फर्म बेन कैपिटल ने 25 जून को NSE पर एक ब्लॉक डील में एमक्योर फार्मा में 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। खरीदार HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस म्यूचुअल फंड और आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर रहे। बेन कैपिटल ने 12 साल पहले पहली बार एमक्योर फार्मा में निवेश किया था। अब यह इस दवा कंपनी में बची हुई पूरी हिस्सेदारी बेचकर एग्जिट कर गई है।

बेन कैपिटल ने एमक्योर फार्मा के 19.4 लाख शेयर 352 करोड़ रुपये में बेचे। ब्लॉक डील के डेटा के मुताबिक, ये शेयर औसतन 1,817 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बेचे गए। दूसरी ओर HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस ने 130 करोड़ रुपये में 7.1 लाख शेयर खरीदे। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने 47.5 करोड़ रुपये में 2.6 लाख शेयर खरीदे।

एक्सिस म्यूचुअल फंड ने भी 50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। अन्य इंस्टीट्यूशनल खरीदारों में HSBC म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और BNP पारिबा शामिल थे, जिन्होंने 25-25 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जुलाई 2024 में लिस्ट हुई थी Emcure Pharma

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का नाता शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिख चुकीं नमिता थापर से है। वह इसमें होल टाइम डायरेक्टर हैं। नमिता के पिता सतीश रमनलाल मेहता कंपनी के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। एमक्योर फार्मा जुलाई 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,952.03 करोड़ रुपये का रहा था। कंपनी का मार्केट कैप 35600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1881.90 रुपये है।

एमक्योर फार्मा का शेयर एक साल में 40 प्रतिशत और 6 महीनों में 30 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ है। 2 सप्ताह में 12 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 77.87 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Stock Market Holiday: आज 26 जून को मुहर्रम पर BSE और NSE में छुट्टी, शेयरों में नहीं होगी ट्रेडिंग

कंपनी की वित्तीय सेहत

एमक्योर फार्मा का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,467.70 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 233.70 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,243.19 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 732.96 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Holiday: आज 26 जून को मुहर्रम पर BSE और NSE में छुट्टी, शेयरों में नहीं होगी ट्रेडिंग

आज शुक्रवार, 26 जून को शेयरों में ट्रेडिंग नहीं हो सकेगी क्योंकि शेयर बाजारों में छुट्टी है। कारण है- मुहर्रम। इस मौके पर BSE और NSE दोनों पर इक्विटी में ट्रेडिंग बंद रहने वाली है। दोनों स्टॉक एक्सचेंजों की हॉलिडे लिस्ट में यह छुट्टी मौजूद है। NSE में शुक्रवार को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी। वहीं इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी है।

BSE पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 26 जून को BSE में इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स के लिए ट्रेडिंग हॉलिडे है। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

बता दें कि घरेलू शेयर बाजार में हर शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है लेकिन इसके अलावा सार्वजनिक अवकाशों और कुछ दूसरे खास मौकों पर भी मार्केट बंद रहता है।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

14 सितंबर: गणेश चतुर्थी

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

ITR Filing 2026: विदेशी शेयर, बैंक अकाउंट या आय छिपाई तो लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्माना

कई लोगों को नौकरी के दौरान विदेश में काम करने का मौका मिलता है। कुछ समय बाद वे देश लौट आते हैं। लेकिन, विदेश में पोस्टिंग के दौरान वे वहां एसेट्स खरीद लेते हैं। इनकम टैक्स का नियम कहता है कि अगर किसी टैक्सपेयर का विदेश में एसेट्स है या किसी तरह की इनकम है तो उसे उसकी जानकारी इनकम टैक्स में रिटर्न में देनी होगी। अगर किसी व्यक्ति ने विदेशी कंपनी के शेयरों या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है तो भी उसे अपने रिटर्न में इस बारे में बताना होगा।

अब विदेश में एसेट्स या इनकम छुपाना मुश्किल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स की विदेश में एसेट्स और किसी तरह की इनकम पर करीबी नजर रखता है। डिपार्टमेंट को सीधे दूसरे देशों की सरकार और वहां के वित्तीय संस्थानों से इस बारे में जानकारी मिलती है। इसलिए विदेश में एसेट्स या विदेशी एसेट्स से होने वाली इनकम को अब छुपाना मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

विदेशी कंपनी के ईसॉप्स या शेयरों की भी देनी होगी जानकारी

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अगर एंप्लॉयीज के पास विदेशी कंपनी के ईसॉप्स, आरएसयू या शेयर हैं तो उसे इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी। साथ ही अगर इंडिया के बाहर से किसी तरह की इनकम होती है तो उसके बारे में भी रिटर्न में बताना होगा।” इनकम टैक्स के नियमों के तहत ऐसा करना अब अनिवार्य है।

विदेश में इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर 10 लाख तक की पेनाल्टी

विदेश में एसेट्स और इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। वह टैक्सपेयर के खिलाप ब्लैक मनी से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। टैक्सपेयर पर 10 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया तक का सामना करना पड़ सकता है।

विदेश में बैंक अकाउंट है तो भी उसकी जानकारी रिटर्न में देनी होगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्सपेयर्स के लिए विदेश में बैंक अकाउंट की डिटेल, रियल एस्टेट में निवेश, शेयर या म्यूचुअल फंड्स में निवेश या किसी दूसरे तरह के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के बारे में बताना जरूरी है।

फॉरेन इनकम बताना भूल गए तो फाइल कर सकते हैं रिवाइज्ड रिटर्न

अगर टैक्सपेयर विदेश में अपने एसेट्स या इनकम की जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में बताना भूल जाता है या वह गलत इनकम बता देता है तो उसके पास रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का विकल्प है। उसे अगले साल 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होगा। ऐसा करने पर वह इनकम टैक्स की कार्रवाई से बच सकता है।

Bajaj Auto Share Buyback: आज, 24 जून रिकॉर्ड डेट, वापस खरीदे जाएंगे ₹5633 करोड़ के शेयर; लेकिन किस भाव पर?

टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर मेकर Bajaj Auto Ltd शेयर बायबैक कर रही है। रिकॉर्ड डेट आज यानि 24 जून है। रिकॉर्ड डेट से पहले के क्लोजिंग डे पर जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। लेकिन याद रहे कि आज शेयर खरीदने वाले पात्र नहीं होंगे। बायबैक के तहत कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स से ₹10 प्रति शेयर फेस वैल्यू वाले 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी। शेयरों की यह संख्या कंपनी के कुल इक्विटी शेयरों का 1.68% है।

शेयर बायबैक की कीमत ₹12,000 प्रति शेयर तय की गई है। इस तरह बजाज ऑटो शेयर बायबैक के लिए कुल ₹5,633 करोड़ (₹5,632,80,00,000) खर्च करेगी। इस रकम में अन्य खर्च, ब्रोकरेज फीस और लागू टैक्स शामिल नहीं हैं।

कंपनी ने इस बायबैक की घोषणा 6 मई को तिमाही और सालाना नतीजे जारी करने के साथ की। इससे पहले बजाज ऑटो ने साल 2024 में शेयर बायबैक किया था। उस वक्त कंपनी ने शेयरहोल्डर्स से कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा ₹10,000 प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदा था।

टेंडरिंग विंडो की अवधि

बायबैक के तहत टेंडरिंग की अवधि 1 जुलाई, 2026 को शुरू होगी और 7 जुलाई, 2026 तक चलेगी। Bajaj Auto के प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों और कंपनी का कंट्रोल रखने वाले लोगों ने संकेत दिया है कि वे बायबैक में हिस्सा नहीं लेंगे। नतीजतन, एंटाइटेलमेंट रेश्यो की गणना करते समय उनकी होल्डिंग्स को शामिल नहीं किया जाएगा।

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Bajaj Auto का शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत चढ़ा

Bajaj Auto के शेयर की कीमत BSE पर 23 जून को 10015.45 रुपये पर बंद हुई। कंपनी का मार्केट कैप 2.79 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत और एक साल में 20 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 3 साल में शेयर की कीमत 117 प्रतिशत चढ़ी है। मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 55.01% हिस्सेदारी थी। बजाज ऑटो के अब लगभग 3 लाख खुदरा शेयरधारक हैं। पिछले दो सालों में कंपनी में म्यूचुअल फंड्स की शेयरहोल्डिंग 5.32% से बढ़कर 7.17% हो गई है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Index funds vs Active funds: इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड… 10 साल में ₹1 लाख से किसने बनाया ज्यादा पैसा?

Index funds vs Active funds: म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि में पैसा बढ़ाने का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन, कौन सा फंड ज्यादा बेहतर रिटर्न देता है? अब मान लीजिए कि दो दोस्त हैं। 10 साल पहले दोनों ने म्यूचुअल फंड में ₹1-1 लाख लगाए। पहले ने ज्यादा सोच-विचार नहीं किया और Nifty 50 Index Fund में पैसा लगा दिया। दूसरे को भरोसा था कि एक अच्छा फंड मैनेजर बाजार से बेहतर रिटर्न दिला सकता है, इसलिए उसने एक एक्टिव इक्विटी फंड चुना।

10 साल बाद पहले निवेशक का ₹1 लाख बढ़कर करीब ₹3.15 लाख हो गया। लेकिन दूसरे निवेशक के लिए नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कौन-सा फंड चुना था।

अगर उसने सही लार्ज कैप फंड चुना होता, तो उसकी रकम करीब ₹3.83 लाख हो सकती थी। लेकिन अगर फंड का चुनाव गलत हो जाता, तो वही ₹1 लाख सिर्फ ₹2.60 लाख तक पहुंचता। यानी इंडेक्स फंड से भी कम रिटर्न मिलता।

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फ्लेक्सी कैप फंड में और बड़ा अंतर

फ्लेक्सी कैप फंड्स में यह अंतर और ज्यादा बड़ा दिखता है। पिछले 10 साल में कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स ने ₹1 लाख को बढ़ाकर करीब ₹5.99 लाख कर दिया। वहीं कुछ फंड्स में यही रकम सिर्फ ₹2.53 लाख तक पहुंची।

यही इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क है। इंडेक्स फंड का मकसद बाजार जितना रिटर्न देना होता है, इसलिए इसमें रिटर्न का अंदाजा लगाना आसान होता है। दूसरी तरफ एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई का मौका भी होता है और कमजोर रिटर्न का जोखिम भी।

एक्टिव फंड ज्यादा रिटर्न कैसे दे सकते हैं?

Arthasadhana Investments की संस्थापक और QPFP®️ Namrata Singh कहती हैं कि एक्टिव फंड्स में बाजार से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है। खासकर उन कैटेगरी में, जहां फंड मैनेजर को अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश करने की आजादी होती है।

इंडेक्स फंड एक तय सूची के हिसाब से निवेश करते हैं। लेकिन एक्टिव फंड में फंड मैनेजर अपने हिसाब से फैसले ले सकता है। उसे अगर लगता है कि किसी सेक्टर में तेजी आने वाली है, तो वह वहां निवेश बढ़ा सकता है। अगर कोई सेक्टर महंगा लग रहा है, तो वहां निवेश कम कर सकता है। फ्लेक्सी कैप फंड्स में तो फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों के बीच भी आसानी से पैसा शिफ्ट कर सकता है।

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अनुभव मैनेजर पकड़ लेते हैं मौके

नम्रता सिंह का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में हालात लगातार बदलते रहते हैं। कभी कोई सेक्टर आगे निकल जाता है तो कभी दूसरा। ऐसे में अनुभवी फंड मैनेजर कई बार ऐसे मौके पकड़ लेते हैं, जो अभी इंडेक्स में पूरी तरह दिखाई नहीं देते।

यही वजह है कि इस अध्ययन में सबसे बेहतर फ्लेक्सी कैप फंड ने ₹1 लाख को करीब ₹6 लाख में बदल दिया। यह Nifty 50 Index Fund के रिटर्न से लगभग दोगुना है।

लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। जिस फ्लेक्सी कैप फंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, उसने 10 साल में ₹1 लाख को सिर्फ ₹2.53 लाख बनाया। वहीं सबसे कमजोर लार्ज कैप फंड की वैल्यू ₹2.60 लाख तक पहुंची। दोनों ही मामलों में रिटर्न Nifty 50 Index Fund से कम रहा। यानी एक्टिव फंड में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन-सा फंड चुना है।

नम्रता सिंह कहती हैं कि सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि फंड पैसा कैसे निवेश करता है, जोखिम को कैसे संभालता है और लंबे समय में उसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहा है।

फिर भी कई लोग इंडेक्स फंड क्यों चुनते हैं?

कई निवेशक फंड मैनेजर चुनने की झंझट में नहीं पड़ना चाहते। वे यह सोचकर निवेश करते हैं कि बाजार जितना रिटर्न मिल जाए, वही काफी है। ऐसे निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड एक आसान विकल्प बन जाते हैं। ये बाजार को हराने की कोशिश नहीं करते। इनका मकसद सिर्फ Nifty 50 जैसे किसी इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराना होता है।

इसके अलावा इंडेक्स फंड का खर्च भी आमतौर पर कम होता है और निवेशक को एक ही फंड के जरिए कई बड़ी कंपनियों में निवेश का मौका मिल जाता है।

नम्रता सिंह के मुताबिक, जो निवेशक सरल और नियम-आधारित निवेश पसंद करते हैं और फंड मैनेजर पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उनके लिए इंडेक्स फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वहीं जो लोग थोड़ा ज्यादा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं, वे अच्छे एक्टिव फंड्स पर विचार कर सकते हैं।

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Dividend Stocks: 5 लाख खुदरा निवेशकों को स्पेशल डिविडेंड देने की तैयारी, ऐलान पर बढ़ी इस FMCG स्टॉक की चमक

Dividend Stocks: दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले इंडिया के बोर्ड की अगले महीने 3 जुलाई को बैठक होने वाली है, जिसमें स्पेशल डिविडेंड के प्रस्ताव पर विचार होगा। इसके अलावा डिविडेंड का प्रस्ताव भी है। इससे कंपनी के 4 लाख से अधिक खुदरा निवेशकों के चेहरे खिल उठे और शेयर भी चमक गए। हालांकि शेयरों की तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया तो भाव नरम पड़े लेकिन अब भी यह ग्रीन जोन में है। फिलहाल बीएसई पर यह 0.37% की बढ़त के साथ ₹1420.60 (Nestle India Share Price) पर है। इंट्रा-डे में यह 1.02% उछलकर ₹1,429.85 तक पहुंच गया था।

Nestle India की क्या है योजना?

नेस्ले ने 19 जून को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि 3 जुलाई को बोर्ड की बैठक होनी है जिसमें 2026 के स्पेशल डिविडेंड के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके लिए रिकॉर्ड डेट वही है, जो वित्त वर्ष 2026 के फाइनल डिविडेंड के लिए फिक्स की गई है। कंपनी हर शेयर पर ₹5 का फाइनल डिविडेंड बांट रही है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई फिक्स की गई है। इसका पेमेंट 30 जुलाई 2026 को या इसके बाद किया जाएगा। एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2027 के कारोबारी नतीजे को लेकर बोर्ड की बैठक 22 जुलाई को होगी।

नेस्ले इंडिया में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

बीएसई पर मौजूद मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से कंपनी में 62.76% हिस्सेदारी प्रमोटर्स की है तो पब्लिक शेयरहोल्डिंग 37.24% है। पब्लिक शेयरहोल्डर्स में 4.24% होल्डिंग 51 म्यूचुअल फंड्स की है लेकिन इनमें से किसी की भी होल्डिंग 1% या इससे अधिक नहीं है। एलआईसी के पास इसके 11.84 करोड़ से अधिक शेयर हैं जोकि कंपनी की 6.14% होल्डिंग के बराबर है। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी को मिलाकर 30 इंश्योरेंस कंपनियों की नेस्ले इंडिया में 7.37% होल्डिंग है तो विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 9.74% है। ₹2 लाख तक के निवेश वाले निवेशकों यानी रिटेल शेयरहोल्डर्स की बात करें तो 4,68,638 निवेशकों के पास कंपनी के 15,64,58,392 शेयर हैं जोकि कंपनी की 8.11% होल्डिंग के बराबर है। एचएनआई की होल्डिंग 3.96% है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

नेस्ले इंडिया के शेयर पिछले साल 14 अगस्त, 2025 को बीएसई पर ₹1085.00 के भाव पर थे जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 9 महीने में यह 38.12% उछलकर पिछले महीने 11 मई, 2026 को ₹1498.60 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।