Dollar Vs INR : रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब रुपया, एक्सपर्ट्स से जानें आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। जानकारों का मानना ​​है कि इस गिरावट की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,विदेशी निवेश में कमी,डॉलर की मजबूत मांग और अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल असंतुलन जैसे कई कारण हैं। 20 मई को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, आज शुक्रवार को यह 96.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर से सिर्फ 0.55 प्रतिशत दूर दिख रहा है।

रुपए की हालिया गिरावट ने 5 जून के बाद हुई करेंसी की रिकवरी को खत्म कर दिया है,जिससे रुपया इस महीने एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो गया है।

तेल की कीमतों में उछाल से अर्थव्यवस्था की स्ट्रक्चरल कमजोरियां सामने आईं

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के कोर एनालिटिकल ग्रुप के डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये के कमजोर होने में एक ट्रिगर का काम किया है,लेकिन यह इसकी मुख्य वजह नहीं है। नियोगी के मुताबिक,मज़बूत अमेरिकी डॉलर,टैरिफ की वजह से एक्सपोर्ट में आ रही मुश्किलें, चीन की आक्रामक डंपिंग और कमजोर ग्लोबल आउटलुक, इन सभी का असर रुपये पर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि करीब एक दशक तक भारत को कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा मिला,जिससे इन दबावों को झेलने में मदद मिली। लेकिन,हाल ही में तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने यह सहारा छीन लिया और अर्थव्यवस्था को कई मौजूदा ढ़ाचागत कमजेरियां उभर कर सामने आ गईं।

बंधन AMC के सीनियर इकोनॉमिस्ट श्रीजीत बालासुब्रमण्यन का कहना है कि रुपए में हाल में आई गिरावट को भारत के स्ट्रक्चरल करंट अकाउंट डेफिसिट के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। असल में भारत करंट अकाउंट डेफिसिट वाला देश है। हम एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई कि तुलना में इंपोर्ट पर ज्यादा खर्च करते हैं,और जब हमें बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में सरप्लस मिलता भी है,तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैपिटल इनफ्लो करंट अकाउंट डेफिसिट से ज़्यादा होता है। उन्होंने आगे कहा कि ढ़ाचागत रूप से,पिछले 10-15 सालों में रुपये की कीमत में सालाना लगभग 3-4 प्रतिशत की गिरावट आई है।

डॉलर की आवक में कमजोरी, इसकी निकासी की भरपाई करने में रही नाकाम

RBI के 5 जून के उपायों ने (जिनमें फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक (FCNR-B) डिपॉजिट के लिए इंसेंटिव भी शामिल थे) शुरुआत में बाजार का मूड बेहतर किया था। हालांकि,डॉलर की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। यह उम्मीद से कम ही रही।

आरित्या ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड में रिसर्च हेड गौरव अरोड़ा ने बताया कि इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से 36 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाली है,जो पिछले साल की निकासी से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपिटल तेजी से AI और सेमीकंडक्टर-आधारित बाज़ारों,जैसे कि अमेरिका,ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर शिफ्ट हो रहा है।

गौरव अरोड़ा ने जून में भारत के 30.43 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की ओर भी इशारा किया। यह घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल,इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात के कारण हुआ। साथ ही इसमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर कोई खास जल्दबाजी न दिखाने का भी असर रहा।

बार्कलेज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक FCNR(B) के तहत केवल 5-6 अरब डॉलर का ही विदेशी निवेश आया है,जो शुरुआती अनुमानों से काफी कम है। इससे रुपये को मिलने वाला शॉर्ट टर्म सपोर्ट कम हो गया है।

डॉलर की बढ़ती मांग ने बनाया दबाव

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP में ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉलर की मांग बढ़ने के मुख्य कारणों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के अलावा,रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने को लेकर बनी नई चिंताएं,विदेशी पोर्टफोलियो से पैसे की निकासी,रक्षा भुगतान,सरकारी कर्ज की अदायगी और विदेशों में कंपनियों के अधिग्रहण भी शामिल हैं।

भंसाली ने आगे कहा कि करेंसी में डॉलर का इनफ्लो बहुत कम है,जबकि एक्सपोर्टर अपनी डॉलर की कमाई को रोककर रख रहे हैं और इंपोर्टर तत्काल पेमेंट के लिए डॉलर खरीद रहे हैं और रुपया मजबूत होने पर फ़ॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक कर रहे हैं। इससे रुपए पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा भारत में महंगाई बढ़ने लगी है,जबकि अमेरिका में महंगाई कम हुई है। इससे रुपये को पहले जो वैल्यूएशन का फायदा मिल रहा था,वह अब खत्म हो गया है।

उधर बालासुब्रमण्यन ने कहा कि मार्केट की स्थिति ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि जब मार्केट को उम्मीद होती है कि रुपया कमजोर होगा तो एक्सपोर्टर कम हेजिंग करते हैं क्योंकि कमजोर करेंसी से उन्हें फायदा होता है। जबकि दूसरी तरफ इम्पोर्टर ज्यादा आक्रामक तरीके से हेजिंग करते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और एक ऐसा चक्र बन जाता है जो रुपये पर और दबाव डालता है।

आगे का आउटलुक

जानकारों का मानना ​​है कि नियर टर्म दबाव के बावजूद आने वाले महीनों में FCNR(B) के तहत आने वाले फंड में बढ़ोतरी से रुपये को सहारा मिलेगा। बालासुब्रमण्यन को उम्मीद है कि ज्यादातर फंड अगस्त और सितंबर के दौरान आएगा,जिससे भारत को सितंबर तिमाही में बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स में सरप्लस हासिल करने में मदद मिलेगी।

नियोगी ने कहा कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होते हैं तो FCNR(B) और दूसरे कैपिटल फ्लो की वजह से रुपये में मजबूती आ सकती है और यह साल के बाकी समय में औसतन 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे आ सकता है।

द वेल्थ कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रैटेजी हेड,अक्षय चिंचालकर ने कहा कि रुपये के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.96 से सुधरकर 94.14 पर आने से बाजार की घबराहट तो कम हुई है,लेकिन इससे मेन ट्रेंड में कोई बदलाव नहीं आया है। डेली,वीकली और मंथली चार्ट पर टेक्निकल सेटअप मजबूती से डॉलर के पक्ष में बना हुआ है और एक साल तक एक ही दायरे में रहने के बाद डॉलर इंडेक्स का ऊपर की ओर बढ़ना (अपसाइड ब्रेकआउट) एक बहुत बड़ा सपोर्ट साबित हो रहा है।

चिंचालकर के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के आस-पास अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर को फिर से छू सकता है। गिरावट का यह ट्रेंड तभी खत्म होगा जब रुपया 94.96 के स्तर से ऊपर मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि अगर रुपया 97 के आसपास कोई सपोर्ट नहीं बना पाता है तो इसका अगला टारगेट 98 के आसपास हो सकता है। अगर रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से नीचे गिरता है तो यह 98.70 के स्तर तक जा सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP Calculator: नो टेंशन स्कीम! रोज बचाएं सिर्फ ₹100-200 और तैयार करें ₹40 लाख तक का फंड, यहां देखिए पूरा कैलकुलेशन

Daily Mutual Fund SIP Calculator: हम अक्सर सोचते हैं कि निवेश शुरू करने के लिए बहुत बड़ी रकम की जरूरत होती है। लेकिन असलियत यह है कि आपकी छोटी-छोटी दैनिक बचत भी लंबी अवधि में आपको लखपति बना सकती है। चाय-नाश्ते या जेब खर्च के ₹100 या ₹200 रोज बचाकर अगर आप म्यूचुअल फंड की डेली एसआईपी में डालते हैं, तो अगले 10 से 15 सालों में आपके पास एक बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

आइए समझते हैं कि रोजाना ₹100 और ₹200 की डेली एसआईपी से 10 और 15 साल में कितना पैसा बनेगा।

1. रोजाना ₹100 की डेली एसआईपी का गणित

अगर आप प्रतिदिन ₹100 बचाते हैं, तो महीने के 30 दिन के हिसाब से आपका कुल मासिक निवेश ₹3,000 होगा।

10 साल के निवेश पर कुल जमा राशि: ₹3,60,000

12% सालाना रिटर्न पर: 10 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹6,97,017 होगी। इसमें ₹3,37,017 का फायदा होगा।

15% सालाना रिटर्न पर: 10 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹8,35,968 होगी। इसमें ₹4,75,968 का फायदा होगा।

15 साल के निवेश पर कुल जमा राशि: ₹5,40,000

12% सालाना रिटर्न पर: 15 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹15,14,272 होगी। इसमें ₹9,74,272 का फायदा।

15% सालाना रिटर्न पर: 15 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹20,17,631 (यानी ₹20 लाख से ज्यादा) होगी। इसमें ₹14,77,631 का फायदा होगा।

2. रोजाना ₹200 की डेली एसआईपी का गणित

अगर आप अपनी बचत को थोड़ा बढ़ाकर रोजाना ₹200 करते हैं, तो आपका मासिक निवेश ₹6,000 हो जाएगा।

10 साल के निवेश पर कुल जमा राशि: ₹7,20,000

12% सालाना रिटर्न पर: 10 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹13,94,034 होगी। (फायदा: ₹6,74,034)

15% सालाना रिटर्न पर: 10 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹16,71,936 होगी। (फायदा: ₹9,51,936)

15 साल के निवेश पर कुल जमा राशि: ₹10,80,000

12% सालाना रिटर्न पर: 15 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹30,28,544 होगी। (फायदा: ₹19,48,544)

15% सालाना रिटर्न पर: 15 साल बाद कुल वैल्यू करीब ₹40,35,262 (यानी ₹40 लाख से ज्यादा) होगी। (फायदा: ₹29,55,262)

₹100-₹200 की डेली SIP का पूरी कैलकुलेशन

रोज बचाएं सिर्फ ₹100-200 और तैयार करें ₹40 लाख तक का फंड, यहां देखिए पूरा कैलकुलेशन

छोटी बचत और डेली एसआईपी के फायदे

रोजाना ₹100 या ₹200 बचाना किसी भी छात्र, नौकरीपेशा या छोटे दुकानदार के लिए बहुत आसान है। इससे बजट पर कोई दबाव नहीं पड़ता। जेब पर कम बोझ होने पर आप इसे लंबे समय तक जारी रख सकते हैं। क्योंकि 10 साल के मुकाबले 15 साल में फंड लगभग दोगुना से भी ज्यादा हो जाता है। आप जितना लंबा समय देंगे, आपका पैसा उतनी ही तेजी से बढ़ेगा।

रोज निवेश करने से ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा मिलता है। इसका मतलब है कि जब बाजार गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और चढ़ने पर कम, जिससे आपका औसत निवेश सुरक्षित रहता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tech Mahindra Share Price: मुनाफा 28% बढ़ने के बाद शेयर 4% तक चढ़ा, अब क्या हो निवेशकों की स्ट्रैटेजी?

IT कंपनी टेक महिंद्रा के शेयरों में 17 जुलाई को अच्छी तेजी है। दिन में शेयर BSE पर पिछले बंद भाव से 3.8 प्रतिशत तक चढ़कर 1569.65 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 1.53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। अच्छे तिमाही नतीजों के चलते शेयर खरीद बढ़ी है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 28.4 प्रतिशत बढ़कर 1465.1 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1140.6 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 17.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15712 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 13351.2 करोड़ रुपये था। EBIT 2264 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBIT मार्जिन 14.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) डील 1.078 अरब डॉलर की रहीं। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 33.3 प्रतिशत ज्यादा है।

जून 2026 तिमाही में डॉलर के लिहाज से टेक महिंद्रा का रेवेन्यू 166 करोड़ डॉलर रहा। यह तिमाही आधार पर 2.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या तिमाही आधार पर 863 घटकर 1,46,760 कर्मचारी रह गई।

Tech Mahindra के शेयर पर ब्रोकरेज की राय

HSBC ने टेक महिंद्रा के शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 1,635 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। मार्जिन में बढ़ोतरी सही दिशा में चल रही है और मैनेजमेंट का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक 15 प्रतिशत EBIT मार्जिन हासिल करना है। कंपनी की ग्रोथ अपने साथियों की तुलना में बेहतर है, जो इसके शेयर की प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराती है।

नोमुरा ने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस 1,600 रुपये दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि टेक महिंद्रा ने मुख्य ऑपरेटिंग पैमानों पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और FY27 के लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है। जेफरीज ने तिमाही नतीजों के बाद FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों को 6-8 प्रतिशत बढ़ा दिया है। लेकिन 1,260 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि शेयर की वैल्यूएशन काफी ऊंची बनी हुई है।

Reliance Industries Share Price: Q1 नतीजों से पहले शेयर 2% उछला, तिमाही आधार पर 4% बढ़ सकता है EBITDA

टेक महिंद्रा के शेयर के लिए ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1780 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की जून तिमाही परफॉर्मेंस शानदार रही है। कंपनी के मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 में कॉम्पिटीटर्स के औसत से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने के अपने भरोसे को दोहराया है। साथ ही 15 प्रतिशत EBIT मार्जिन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

उम्मीद से बेहतर काम-काज, ग्रोथ की बेहतर संभावनाओं और मजबूत डील मोमेंटम को देखते हुए प्रभुदास लीलाधर ने FY27E/FY28E के लिए कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ अनुमानों को बढ़ाकर 6.0%/5.4% कर दिया है। पहले अनुमान 4.8%/5.8% की रेवेन्यू ग्रोथ के थे। EBIT मार्जिन अनुमानों को भी 14.5%/15.0% से बढ़ाकर 14.8%/15.1% कर दिया है। FY27E और FY28E दोनों के लिए प्रति शेयर अर्निंग्स में 2.2% बढ़ोतरी की उम्मीद है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Polycab India Share Price: अपने हाई से 12% से ज्यादा टूटा शेयर, Q1 नतीजों के बाद आज 4% गिरा, क्या निवेश का है ये सही मौका

Polycab India Share Price: वायर्स एंड केबल्स कंपनी पॉलीकैब इंडिया (Polycab India) के शेयर शुक्रवार को लगभग 4 फीसदी गिरा है, जिससे लगातार तीसरे सेशन में नुकसान बढ़ा। कंपनी ने उम्मीद से बेहतर फाइनेंशियल पहली तिमाही की कमाई बताई। ब्रोकरेज जेफरीज और HSBC ने स्टॉक पर अपनी बुलिश रेटिंग बनाए रखी।

दोपहर के ट्रेड में पॉलीकैब के शेयर 3.96 परसेंट गिरकर 8,850 रुपये पर आ गए, जिससे यह स्टॉक NSE मिडकैप 50 पर टॉप लूजर बन गया। गुरुवार को 1.2 फीसदी गिरने के बाद, स्टॉक अब शुक्रवार समेत तीन सेशन में 7.2 फीसदी गिर चुका है।

हालिया करेक्शन के बावजूद, पॉलीकैब के शेयर 2026 में अब तक 15.5 फीसदी ऊपर हैं । कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.33 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है।

यह गिरावट तब आई जब पॉलीकैब ने जून तिमाही के नतीजे बताए जो सभी ज़रूरी पैरामीटर पर स्ट्रीट की उम्मीदों से बेहतर थे। रेवेन्यू साल-दर-साल 39 फीसदी बढ़कर 8,209 करोड़ रुपये हो गया, जो CNBC-TV18 पोल के 7,902 करोड़ रुपये के अनुमान से ज़्यादा है। पिछले साल इसी तिमाही में रेवेन्यू 5,906 करोड़ रुपये था।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

कमाई के बाद कॉन्फ्रेंस कॉल में, मैनेजमेंट ने कहा कि उसका घरेलू वायर्स और केबल्स (W&C) बिज़नेस साल-दर-साल 43% बढ़ा, जबकि कुल W&C रेवेन्यू 38% बढ़ा, जो स्ट्रीट की लगभग 35% की उम्मीदों से ज़्यादा है। कंपनी ने कहा कि वॉल्यूम ग्रोथ हाई बेस पर लो-टू-मिड सिंगल डिजिट में रही, जिसमें वायर्स ने केबल्स से बेहतर परफॉर्म किया।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल दिक्कतों के कारण एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 12% की गिरावट आई, जिससे सेल्स में उनका योगदान एक साल पहले के 5.2% से घटकर 3.3% हो गया।

पॉलीकैब ने अपने मीडियम-टर्म EBITDA मार्जिन गाइडेंस 11-13% को दोहराया और कहा कि उसका फास्ट-मूविंग इलेक्ट्रिकल गुड्स (FMEG) बिज़नेस FY30 तक 8-10% मार्जिन हासिल करने के लिए ट्रैक पर है। उसे यह भी उम्मीद है कि भारतनेट प्रोजेक्ट का काम तेज़ी से पूरा होगा, और FY27 में ₹800-1,000 करोड़ का रेवेन्यू मिलने की संभावना है।

शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय

नतीजों के बाद, जेफरीज ने अपनी ‘Buy’ रेटिंग दोहराई और अपना टारगेट प्राइस ₹10,920 से बढ़ाकर ₹11,100 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से लगभग 25% की बढ़त होगी।

ब्रोकरेज ने FY27 और FY28 के अपने कमाई के अनुमान 2-3% बढ़ा दिए हैं और FY26-FY29 के दौरान 22% EPS CAGR की उम्मीद है, पॉलीकैब को भारत के पावर और कैपिटल खर्च साइकिल पर एक दांव के तौर पर बताया है।

वहीं HSBC ने भी ₹10,160 के टारगेट प्राइस के साथ ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है, जिसका मतलब है कि इसमें लगभग 14% की बढ़त हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि वायर और केबल बिज़नेस में मजबूत रियलाइज़ेशन और FMEG के मज़बूत परफॉर्मेंस की वजह से कमाई में लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई, जबकि डिमांड, कैपेसिटी बढ़ाने और FMEG स्केल-अप से FY26-FY29 के दौरान 21% EPS CAGR की उम्मीद है। इसने कॉपर और एल्युमीनियम की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मुख्य रिस्क बताया।

पॉलीकैब पर कवरेज करने वाले 34 एनालिस्ट में से 23 ने “Buy” रेटिंग दी है, 9 ने “Hold” रेटिंग दी है और दो ने “Sell” रेटिंग दी है।

सुबह 13.22 बजे तक स्टॉक 3.72% गिरकर ₹8,872 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले साल इसमें लगभग 29% की बढ़त हुई है।  पिछले तीन महीनों में इसमें 48 फीसदी की ज़बरदस्त तेज़ी आई थी। स्टॉक 22 जून, 2026 को ₹10,126 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। अपने हाई से स्टॉक 12.5 परसेंट नीचे आ चुका है। 12 अगस्त, 2025 को यह 52 हफ़्ते के सबसे निचले स्तर ₹6,620 पर पहुंच गया।

Jio Financial share price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 4% दौड़ा, अब खरीदें, बेचें या रहें बने, जानिए क्या कहते है बाजार जानकार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Reliance Industries Share Price: Q1 नतीजों से पहले शेयर 2% उछला, तिमाही आधार पर 4% बढ़ सकता है EBITDA

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे आज, 17 जुलाई को जारी होने वाले हैं। पहले बोर्ड मीटिंग में इन पर चर्चा की जाएगी और इन्हें मंजूरी दी जाएगी। मीटिंग खत्म होने के बाद रिजल्ट जारी किए जाएंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ-साथ रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के तिमाही नतीजे भी सामने आएंगे। तिमाही परफॉरमेंस की घोषणा से पहले RIL के शेयर में तेजी है। दिन में BSE पर शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से लगभग 2.5 प्रतिशत तक उछलकर 1323.80 रुपये के हाई तक गई।

एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि कंपनी का अलग-अलग क्षेत्रों में फैला कारोबार, रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूती और पेट्रोकेमिकल कारोबार से बेहतर मुनाफा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के असर को कम करने में मदद करेगा। CNBC-TV18 के एक पोल के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज जून 2026 तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले 3.7 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 3.05 लाख करोड़ रुपये की आय दर्ज कर सकती है। EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 46,000 करोड़ रुपये हो सकता है। मार्जिन 15 प्रतिशत पर स्थिर रह सकता है।

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत बढ़कर 298621 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी के मालिकों के लिए शुद्ध मुनाफा 12.5 प्रतिशत की कमी के साथ 16971 करोड़ रुपये रहा था।

देश की मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी है RIL

RIL इस वक्त देश की मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी है। BSE के मुताबिक, इसका मार्केट कैप 17.86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 50.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर साल 2026 में अब तक 16 प्रतिशत नीचे आया है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,611.20 रुपये और एडजस्टेड लो 1,253.65 रुपये है।

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जियो फाइनेंशियल के कैसे रहे नतीजे

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने जून 2026 तिमाही के नतीजे एक दिन पहले यानि कि 16 जुलाई को जारी किए थे। तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 227.28 प्रतिशत बढ़कर 2,004.47 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 612.46 करोड़ रुपये था। शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा एक साल पहले से 155.7 प्रतिशत बढ़कर 830.25 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में मुनाफा 324.66 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Disclaimer:मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio Financial share price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 4% दौड़ा, अब खरीदें, बेचें या रहें बने, जानिए क्या कहते है बाजार जानकार

Jio Financial share price: रिलायंस ग्रुप का शेयर Jio Financial Services शुक्रवार, 17 जुलाई को 4 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। हालांकि शेयर आज सुबह के काराबोर में 6 फीसदी चढ़ा था। शेयर में यह तेजी कंपनी के जून तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद देखने को मिली। जून तिमाही में कंपनी का टैक्स के बाद प्रॉफ़िट (PAT) पिछले साल के 325 करोड़ से 156% बढ़कर ₹830 करोड़ हो गया। यह कंसोलिडेटेड बेसिस पर पिछली तिमाही के ₹272 करोड़ से 205% ज़्यादा था।

वहीं प्री-प्रोविज़निंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के 366 करोड़ से 38% और लगातार ₹327 करोड़ से 54% ज़्यादा है। पहली तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) या कोर इनकम बढ़कर ₹544 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹264 करोड़ से 106% और पिछली तिमाही के ₹345 करोड़ से 58% ज़्यादा है।

जून तिमाही में इसके NBFC बिजनेस का ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 163% बढ़कर ₹30,667 करोड़ हो गया। इस बीच, इसका तिमाही डिस्बर्समेंट ₹11,250 करोड़ को पार कर गया।

क्या है स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ पर “Buy” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 315 रुपये का टारगेट दिया है जो मौजूदा स्तर से इसमें 34 फीसदी की बढ़त दिखाता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ ने एक अच्छी तिमाही दर्ज की, जिसमें जियो क्रेडिट बढ़ा और साथ ही इसका AUM 30,000 करोड़ को पार कर गया। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि इसके दूसरे बिज़नेस में भी लगातार तरक्की हुई है, जिसमें पेमेंट्स बिज़नेस में प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार और इसके इंश्योरेंस और AMC फ्रेंचाइजी में लगातार बढ़ोतरी शामिल है।

हालांकि, नए बिजनेस को इनक्यूबेट करने और मौजूदा ऑपरेशन को बढ़ाने में चल रहे इन्वेस्टमेंट के कारण इसका ऑपरेटिंग खर्च ज़्यादा बना हुआ है।

ब्रोकरेज ने मौजूदा बिजनेस में इन्वेस्टमेंट की वजह से ज़्यादा ऑपेक्स को ध्यान में रखते हुए FY27 और FY28 के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमान में क्रमशः 4% और 6% की कटौती की है।स्टॉक FY27 के अनुमानित प्राइस-टू-बुक वैल्यू के 1x पर ट्रेड कर रहा है। मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि यह FY26-28 के दौरान 46% की कंसोलिडेटेड PAT कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का मॉडल बनाता है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि इसके सम-ऑफ-द-पार्ट्स में इंश्योरेंस मैन्युफैक्चरिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, ब्रोकिंग और मार्केटप्लेस जैसे बिज़नेस के वैल्यूएशन को शामिल नहीं किया गया है, जो अभी भी अपने इनक्यूबेशन फेज में हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके क्रेडिट स्कोर को कैसे प्रभावित करती है?

आपका क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड बहुत बड़ा रोल निभाता है. ऐसे में ये समझना कि लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके स्कोर पर कैसे असर डालती है, आपके पैसे से जुड़े फैसलों को बेहतर करने और अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने में मदद कर सकता है.  

क्रेडिट हिस्ट्री में आपके अब तक लिए गए सभी लोन शामिल होते हैं. आपका सबसे पुराना क्रेडिट अकाउंट कितना पुराना है, ये इसमें बड़ा फैक्टर है और आपके स्कोर को प्रभावित करता है. लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री यानी आपके अलग-अलग क्रेडिट अकाउंट्स का एवरेज पीरियड, जो उनके शुरू होने की डेट से कैलकुलेट किया जाता है.

क्रेडिट हिस्ट्री क्या होती है?

क्रेडिट हिस्ट्री आपके सारे लोन या क्रेडिट का रिकॉर्ड है. इसमें आपके क्रेडिट कार्ड्स, लोन और बाकी डेट की जानकारी होती है. ये रिकॉर्ड दिखाता है कि आप क्रेडिट को कितनी जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं, जैसे कि आपका कर्ज कितना है और आप पेमेंट्स कितनी जल्दी करते हैं. आपका क्रेडिट स्कोर, जो ये बताता है कि आप क्रेडिट के लिए कितने भरोसेमंद हैं, इसी हिस्ट्री से बनता है.

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क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड: क्यों है ये जरूरी?

क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके क्रेडिट स्कोर को तय करने में एक अहम हिस्सा है. ये आपके क्रेडिट अकाउंट्स के टोटल पीरियड को दिखाता है. आमतौर पर, पुराना क्रेडिट रिकॉर्ड आपके स्कोर के लिए अच्छा होता है. आइए समझते हैं क्यों:

  • क्रेडिट मैनेज करने की स्किल दिखाता है: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड लेंडर्स को बताता है कि आप क्रेडिट को कितनी अच्छी तरह मैनेज करते हैं. ये आपके लंबे वक्त की फाइनेंशियल हैबिट्स की पूरी तस्वीर देता है. अगर आपने लंबे समय तक क्रेडिट को अच्छे से हैंडल किया है, तो नए लेंडर्स के लिए ये अच्छा सिग्नल है.
  • हाई क्रेडिट स्कोर बनाने में मदद: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड ज्यादा डेटा देता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाता है. क्रेडिट स्कोर मॉडल्स इस पुराने डेटा की मदद से आपकी क्रेडि वर्थिनेस को और सही तरीके से जज करते हैं.

शॉर्ट क्रेडिट हिस्ट्री के नुकसान

  • कम जानकारी: अगर आपका क्रेडिट रिकॉर्ड पुराना नहीं है, तो स्कोरिंग मॉडल्स के पास जज करने के लिए कम डेटा होता है. इससे आपका क्रेडिट स्कोर नीचे जा सकता है, क्योंकि मॉडल्स को आपकी क्रेडिटवर्थिनेस समझने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती.
  • ज्यादा रिस्क: क्रेडिट हिस्ट्री आपकी फाइनेंशियल आदतों को दिखाती है. कम पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों को लेंडर्स ज्यादा रिस्की मान सकते हैं. इससे क्रेडिट या अच्छे इंटरेस्ट रेट्स पाना मुश्किल हो सकता है.
  • ज्यादा इंटरेस्ट रेट: अगर आपका क्रेडिट रिकॉर्ड ज्यादा पुराना नहीं है, तो लेंडर्स आपको हाई रिस्क बॉरोअर मान सकते हैं. इससे आपको ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स, कम क्रेडिट लिमिट या कम अच्छे टर्म्स वाले क्रेडिट प्रोडक्ट्स मिल सकते हैं.

मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री: कैसे बनाएं रखें?

  • जल्दी शुरू करें: क्रेडिट हिस्ट्री बनाने की शुरुआत जल्द से जल्द करें. छोटा सा क्रेडिट कार्ड या आसान लोन लेकर भी आप क्रेडिट रिकॉर्ड बिल्ड करना शुरू कर सकते हैं.
  • बिल्स में देरी न करें: अपने बिल्स हमेशा टाइम पर पे करें. लेट पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
  • पुराने अकाउंट्स चालू रखें: अगर आपके पास पुराने क्रेडिट कार्ड्स हैं, तो उन्हें एक्टिव रखना अच्छा है. पुराने अकाउंट्स बंद करने से आपकी लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री कम हो सकती है और स्कोर पर असर पड़ सकता है. लेकिन, इनके मेंटेनेंस कॉस्ट को चेक करें. जैसे, अगर आपके पास लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है, तो इसे चालू रखने में कोई हर्ज नहीं.
  • क्रेडिट का समझदारी से यूज करें: क्रेडिट का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें. सारे क्रेडिट कार्ड्स को एक साथ यूज करने से बचें, क्योंकि इससे आपका क्रेडिट यूसेज परसेंटेज कम हो सकता है. अपनी क्रेडिट लिमिट का थोड़ा सा हिस्सा ही यूज करें.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलर चेक करें और उसमें कोई गलती न हो, ये इंश्योर करें. फ्रॉड या गलत जानकारी आपके क्रेडिट स्कोर और रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा सकती है. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.

पुराना और डिटेल्ड क्रेडिट रिकॉर्ड क्यों जरूरी?

पुराना और डिटेल्ड क्रेडिट रिकॉर्ड आपकी फाइनेंशियल रिलायबिलिटी की सही तस्वीर दिखाता है. ये सिर्फ पुराना रिकॉर्ड रखने की बात नहीं, बल्कि इसका संबंध लगातार और जिम्मेदारी से क्रेडिट यूज करने से है. लेंडर्स को ऐसा रिकॉर्ड पसंद आता है, जो दिखाए कि आप लंबे वक्त तक क्रेडिट को अच्छे से मैनेज कर सकते हैं.

लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके क्रेडिट स्कोर को तय करने में अहम रोल निभाती है. क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड और जिम्मेदारी से क्रेडिट मैनेज करने का ट्रैक आपके स्कोर को बेहतर करता है, जबकि कम पुराना रिकॉर्ड स्कोर को नीचे ला सकता है.  क्रेडिट रिकॉर्ड के महत्व को समझकर और इसे बिल्ड व मेंटेन करने के तरीके अपनाकर आप अपनी क्रेडिटवर्थिनेस को बढ़ा सकते हैं और बेहतर फाइनेंशियल रिजल्ट्स पा सकते हैं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकते हैं, तो अपने क्रेडिट प्रोफाइल पर नजर रखना न भूलें.

Silver Price Today: 4 दिनों में ₹12,500 सस्ती हुई चांदी, आज भी गिरे दाम, जानिए आपके अपने शहर में क्या है भाव

Silver Price Today:  देश में चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। आज 17 जुलाई को  चांदी का सितंबर वायदा भाव आज सुबह 10 बजे 858  रुपये गिरावट के साथ 2,15,335 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,16,013 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। इसके अलावा लगातार प्रॉफिट-बुकिंग के कारण भी इसकी कीमतें नीचे आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.79 डॉलर प्रति औंस है।

आपके शहर में क्या है कीमते

बुलियन्स के अनुसार चांदी की कीमत घटकर 2,16,040 रुपये प्रति किलो हो गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार शुक्रवार सुबह तक 2,17,434 रुपये किलो हो गया। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर है। उधर अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार दिल्ली में चांदी टूटकर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) के स्तर पर आ गई।

ऐसे में अगर आप चांदी के गहने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में चल रहे ताजा रेट जरूर चेक कर लें।

 

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2350₹23500₹235000
मुंबई₹2350₹23500₹235000
अहमदाबाद₹2,349₹23,4902,34,900
चेन्नई₹2400₹24000₹240000
पटना₹2350₹23500₹235000
अयोध्या₹2350₹23500₹235000
लखनऊ₹2350₹23,500₹2,35,000
कानपुर₹2350₹23,500₹2,35,000
मेरठ₹2350₹23500₹235000
गाजियाबाद₹2350₹23500₹235000
नोएडा₹2350₹23500₹235000
गुरुग्राम₹2350₹23500₹235000
चंडीगढ़₹2350₹23500₹235000
जयपुर₹2350₹23500₹235000
लुधियाना₹2350₹23500₹235000
गुवाहाटी₹2350₹23500₹235000
इंदौर₹2350₹23500₹235000

पिछले दिन क्या रहा चांदी का भाव

दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को वैश्विक बाजार में सुस्ती के कारण चांदी में 1,500 रुपये की गिरावट आई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार चांदी लगातार चौथे दिन दबाव में रही और 1,500 रुपये टूटकर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) के स्तर पर आ गई, जो 2 सप्ताह से अधिक का निचला स्तर है।

4 दिन में ₹12,500 टूटी चांदी

पिछले चार दिन में इसमें 12,500 रुपये यानी 5.3 फीसदी की गिरावट आई है। 10 जुलाई को इसका भाव 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। वैश्विक बाजार में, हाजिर चांदी 1.7 प्रतिशत टूटकर 56.79 डॉलर प्रति औंस रह गई। वहीं बुधवार को यह 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। चांदी का भाव आखिरी बार 29 जून को इस स्तर के आसपास था, जब यह 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

चांदी की शुद्धता

चांदी की शुद्धता की बात करें तो 999 फाइन सिल्वर (99.9%) सबसे शुद्ध माना जाता है। जबकि 925 स्टर्लिंग सिल्वर (92.5%) का इस्तेमाल सबसे ज्यादा आभूषण और घरेलू सामान बनाने में होता है। खरीदारी के समय ग्राहकों को BIS हॉलमार्क और शुद्धता का निशान (999 या 925) जरूर जांचना चाहिए। ताकि असली चांदी की पहचान सुनिश्चित हो सके।

गिरावट से खरीदारी का मौका

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ा रही है जिसके कारण कमोडिटी बाजार में गिरावट देखी जा रही है। लेकिन आम खरीदारों और रिटेल निवेशकों के लिए यह बेहतर खरीदारी का मौका हो सकता है। परिवारों में शादी ब्याह और ऐसे ही अन्य लोगों के लिए सोना चांदी खरीदा जाता है तो वह इस समय खरीदारी करके पैसा बचा सकते हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: आज 17 जुलाई को Wipro, Tech Mahindra, RIL, Ceat समेत ये शेयर फोकस में, बड़ी उठापटक के आसार

शुक्रवार, 17 जुलाई को विप्रो, टेक महिंद्रा, सिएट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पीसी ज्वेलर, कोल इंडिया, टाटा टेक्नोलोजिज समेत कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने एक दिन पहले तिमाही नतीजे जारी किए थे। वहीं कुछ कंपनियां आज वित्तीय नतीजे जारी करने वाली हैं। कई कंपनियों ने एक दिन पहले नई डील, कॉन्ट्रैक्ट्स और अन्य तरह के ​डेवलपमेंट्स की जानकारी दी थी। इन पर बाजार शुक्रवार को प्रतिक्रिया देगा। इसके अलावा 60 से ज्यादा कंपनियों के शेयर 17 जुलाई को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है…

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजे

रिलायंस इंडस्ट्रीज, हैवेल्स इंडिया, JSW स्टील, टाटा टेक्नोलोजिज, पूनावाला फिनकॉर्प, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, फेडरल बैंक, RBL बैंक, तत्व चिंतन फार्मा केम, ग्लोबस स्पिरिट्स, ओबेरॉय रियल्टी, टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस और विविमेड लैब्स

18 जुलाई को इन कंपनियों के नतीजे

HDFC बैंक, ICICI बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, IDBI बैंक, यस बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडिया सीमेंट्स, JK सीमेंट, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलिमर्स, कैन फिन होम्स और रोसारी बायोटेक

आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

Wipro: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर ₹3,356.3 करोड़ हो गया। IT सर्विस रेवेन्यू 10.7% बढ़कर ₹24,452.9 करोड़, IT सर्विस डॉलर रेवेन्यू 1% बढ़कर $261.45 करोड़ रहा। IT सर्विस ऑपरेटिंग मार्जिन 130 bps घटकर 16% रहा। कंपनी ने Q2 में IT सर्विस डॉलर रेवेन्यू $257.4-262.7 करोड़ रहने का अनुमान जताया है।

Tech Mahindra: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 31.7% बढ़कर ₹1,486.3 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 17.7% बढ़कर ₹15,711.9 करोड़ हो गया। डॉलर रेवेन्यू 6.1% बढ़कर $166 करोड़ और EBIT मार्जिन 330 bps बढ़कर 14.4% रहा।

WeWork India Management: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर ₹4.3 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 27.7% बढ़कर ₹683.8 करोड़ हो गया।

Ceat: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 96.4% घटकर ₹4 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 22.4% बढ़कर ₹4,318 करोड़ हो गया। एक्सेप्शनल लॉस बढ़कर ₹7 करोड़ हो गया।

Piramal Finance: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा एक साल पहले से 66.8% उछलकर 461 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 27.6% बढ़कर 3,368.3 करोड़ रुपये हो गया।

Borosil Renewables: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 86.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले कंपनी 166.6 करोड़ रुपये के नुकसान में थी। रेवेन्यू 17% बढ़कर 405.7 करोड़ रुपये रहा।

5paisa Capital: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 0.2% बढ़कर 11.6 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 13.7% बढ़कर 88.3 करोड़ रुपये हो गया।

Coal India: कंपनी को गुजरात के खावड़ा में 300 MW के सोलर पावर प्रोजेक्ट में से 200 MW सोलर पावर क्षमता के लिए गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) से कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिला है।

PC Jeweller: कंपनी के बोर्ड ने एक या एक से ज्यादा राउंड में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए इक्विटी शेयर जारी करके 1,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दी है।

Maruti Suzuki India: कंपनी रायपुर के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के 14 जुलाई के आदेश को चुनौती देगी। कमीशन ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह एक ग्राहक की गाड़ी को नए E20-कम्पैटिबल मॉडल से बदले। ग्राहक ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की थी। कंपनी ने कहा कि इस मामले में शामिल गाड़ी पहले से ही E20-कम्पैटिबल थी और E20 फ्यूल पर चलने में पूरी तरह सक्षम थी, जैसा कि ओनर मैनुअल में बताया गया है। यह कार ग्राहक को जून 2024 में बेची गई थी, लेकिन इसे जनवरी 2023 में बनाया गया था।

मारुति सुजुकी का यह भी कहना है कि ग्राहक की गाड़ी से लिए गए फ्यूल में मिलावट के सबूत मिले थे और कई अन्य जरूरी बातें कमीशन के आदेश में शामिल नहीं की गईं।

बल्क डील्स

Laser Power and Infra: निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने 44.22 करोड़ रुपये के दो ट्रांजेक्शंस के जरिए लेजर पावर एंड इंफ्रा में अतिरिक्त 16.95 लाख शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। बॉयंट अपॉर्चुनिटीज स्ट्रैटेजी और बॉयंट अपॉर्चुनिटीज़ स्ट्रैटेजी-III ने 53.8 करोड़ रुपये में 20 लाख शेयर खरीदे हैं। BofA सिक्योरिटीज यूरोप SA ने 23.63 करोड़ रुपये के 9 लाख शेयर खरीदे, जबकि बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड ने 24.83 करोड़ रुपये में 9.43 लाख शेयर खरीदे।

Ramkrishna Forgings: स्मॉलकैप वर्ल्ड फंड ने 74.01 करोड़ रुपये में 12.89 लाख शेयर बेचे हैं।

Nilkamal: सुनील सिंघानिया की कंपनी अबाकस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने 37.39 करोड़ रुपये में 2.8 लाख शेयर खरीदे हैं।

Asian Market Today: चिप शेयरों में फिर तेज हुई बिकवाली, एशियाई बाजार कमजोर, निक्केई करीब 4% टूटा

आज ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

HCL टेक्नोलोजिज

श्री सीमेंट

कोटक महिंद्रा बैंक

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स

डाबर इंडिया

20 माइक्रॉन्स

3M इंडिया

अपोलो पाइप्स

अतुल

ल्यूपिन

अवध शुगर एंड एनर्जी

बजाज इलेक्ट्रिकल्स

बालकृष्ण इंडस्ट्रीज

भारत सीट्स

ब्रिस्क टेक्नोविजन

कमिंस इंडिया

धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स

ग्रेटेक्स कॉर्पोरेट सर्विसेज

गुजरात पॉली इलेक्ट्रॉनिक्स

भाटिया कम्युनिकेशंस एंड रिटेल (इंडिया)

बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल

ब्लू स्टार

धानुका एग्रीटेक

डंकन इंजीनियरिंग

एल्गी इक्विपमेंट्स

गुजरात होटल्स

मगध शुगर एंड एनर्जी

MRF

किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज

हैप्पिएस्ट माइंड्स टेक्नोलोजिज

हनीवेल ऑटोमेशन इंडिया

इंडियन ह्यूमे पाइप कंपनी

जेके लक्ष्मी सीमेंट

जुबिलेंट फूडवर्क्स

LMW

मंगलम ग्लोबल एंटरप्राइज

न्यूजेन सॉफ्टवेयर टेक्नोलोजिज

नारायण हृदयालय

पंजाब केमिकल्स एंड क्रॉप प्रोटेक्शन

राजरतन ग्लोबल वायर

फाइजर

स्काई इंडस्ट्रीज

सोमा टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज

पॉलीकेम

प्रूडेंट कॉर्पोरेट एडवाइजरी सर्विसेज

सफारी इंडस्ट्रीज इंडिया

सीलमैटिक इंडिया

सुंदरम ब्रेक लाइनिंग्स

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक

शांति गियर्स

TTK हेल्थकेयर

यूनिफोस एंटरप्राइजेज

सोनाटा सॉफ्टवेयर

सुमितोमो केमिकल इंडिया

सिम्फनी

ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

UPL

वीडोल कॉर्पोरेशन

V-मार्ट रिटेल

जाइडस वेलनेस

VA टेक वाबाग

वालचंद पीपुलफर्स्ट

वेंड्ट (इंडिया)

जेंसर टेक्नोलोजिज

ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

इंडियन टोनर्स एंड डेवलपर्स

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Home Loan: सिर्फ सस्ते घर नहीं, आसान होम लोन भी जरूरी; एक्सपर्ट बोले- तभी बढ़ेगा हाउसिंग सेक्टर

Home Loan: भारत में घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज मंजूरियों पर अक्सर चर्चा होती है। लेकिन इन सबसे पहले एक सवाल आता है। क्या आम परिवार के पास घर खरीदने के लिए आसान और समय पर लोन उपलब्ध है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।

होम लोन सिर्फ फाइनेंशियल प्रोडक्ट भर नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। यह आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा देता है। लेकिन यह सपना तभी पूरा होता है, जब सही समय पर लोन मिल सके। इसलिए हाउसिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मकानों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों तक क्रेडिट की पहुंच है।

तेजी से बढ़ सकता है होम लोन बाजार

CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है। FY25 से FY30 के बीच इसके 15-16% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। इस रफ्तार से बाजार का आकार ₹77 लाख करोड़ से ₹81 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

हालांकि, यह ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट कर्मचारियों से नहीं आएगी। अगली बड़ी मांग छोटे शहरों, स्वरोजगार करने वालों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों से आने की उम्मीद है, जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं।

असली चुनौती लोन तक पहुंच

देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता है। लेकिन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में उन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वजह साफ है। बैंक लंबे समय तक सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और स्थायी नौकरी को ही सबसे बड़ा आधार मानते रहे हैं।

इस कारण छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग लोन से वंचित रह जाते हैं। जबकि उनकी आय और भुगतान क्षमता मजबूत हो सकती है।

AI और डिजिटल डेटा बदल रहे हैं तस्वीर

अब लोन देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। फाइनेंस कंपनियां और बैंक डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भुगतान क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि ग्राहक के फाइनेंशियल व्यवहार और लेनदेन का भी आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जिन लोगों के लिए लोन लेना मुश्किल था, उनके लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा भी जरूरी

डिजिटल प्रक्रिया ने लोन लेना आसान बनाया है। फिर भी पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। दस्तावेज, नियम, EMI और दूसरी शर्तें कई बार लोगों को उलझन में डाल देती हैं।

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ भरोसेमंद सलाहकारों की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। सही सलाह मिलने से ग्राहक बेहतर फैसला ले पाते हैं और पूरे लोन प्रोसेस को आसानी से समझते हैं।

सफलता का असली पैमाना क्या?

हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितना लोन बांटा गया। असली सफलता इस बात में होगी कि कितने नए परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पाए।

जब ज्यादा लोगों तक आसान होम लोन पहुंचेगा, तो इसका फायदा सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रियल एस्टेट, निर्माण, रोजगार और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि आसान और समावेशी क्रेडिट एक्सेस को भारत की अगली हाउसिंग ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।

(यह आर्टिकल मनीकंट्रोल हिंदी के लिए अतुल मोंगा ने लिखा है, जो बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ हैं)

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