DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू घटकर आधा हुआ; शेयरों पर रहेगी नजर

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी DLF ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 4.1% बढ़कर ₹793.9 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹762.7 करोड़ था।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 52.9% घटकर ₹1,280.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹2,716.7 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन रहा कमजोर

जून तिमाही में DLF का EBITDA 58.7% घटकर ₹150.3 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹364.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 13.4% से घटकर 11.7% पर आ गया।

इसके बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 51% रहा। तिमाही के दौरान DLF ने ₹1,317 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश फ्लो बनाया। इससे कंपनी की नेट कैश पोजिशन बढ़कर ₹15,200 करोड़ हो गई।

लॉन्च में देरी से घटी बिक्री

जून तिमाही में DLF की नई सेल्स बुकिंग ₹657 करोड़ रही। DLF ने कहा कि कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में देरी की वजह से यह आंकड़ा प्रभावित हुआ। कंपनी को उम्मीद है कि जरूरी मंजूरियां जल्द मिलेंगी और नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे।

कंपनी का कहना है कि मजबूत ब्रांड, ग्राहकों की लगातार मांग और आने वाले प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन के दम पर वह मध्यम अवधि के ग्रोथ लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

रेंटल कारोबार बना मजबूत

DLF का करीब 5 करोड़ वर्ग फुट का रेंटल पोर्टफोलियो 95% ऑक्यूपेंसी के साथ मजबूत बना हुआ है। कंपनी का फोकस लंबे समय में अपने रेंटल बिजनेस को और बढ़ाने पर है।

चालू वित्त वर्ष में DLF करीब 15 लाख वर्ग फुट के तीन नए रिटेल प्रोजेक्ट शुरू करेगी। इनमें DLF Midtown Plaza (नई दिल्ली), DLF Summit Plaza (गुरुग्राम) और DLF Promenade (गोवा) शामिल हैं।

DCCDL का प्रदर्शन भी मजबूत

DLF की सहयोगी कंपनी DLF Cyber City Developers Limited (DCCDL) का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,917 करोड़ रहा। EBITDA 9% बढ़कर ₹1,474 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 21% बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया।

DLF ने क्या कहा?

DLF का कहना है कि मजबूत लैंड बैंक, नए प्रोजेक्ट्स की बड़ी पाइपलाइन, मजबूत बैलेंस शीट और लगातार बढ़ता कैश फ्लो कंपनी को रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी का फायदा उठाने में मदद करेगा। कंपनी का फोकस आगे भी लाभदायक और टिकाऊ ग्रोथ पर रहेगा।

DLF का शेयर सोमवार को 0.62% की बढ़त के साथ ₹663 पर बंद हुआ।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Vijay Kedia Investment Tips: कई निवेशक हमेशा सिर्फ मल्टीबैगर स्टॉक खोजने की कोशिश करते हैं। इसके चक्कर में कई बार ऐसे शेयरों में भी पैसे लगा बैठते हैं, जहां भारी नुकसान हो जाता है। दिग्गज निवेशक विजय केडिया का कहना है कि बड़ी कमाई करने का राज अगला मल्टीबैगर शेयर ढूंढने में नहीं, बल्कि अच्छे बिजनेस में लंबे समय तक टिके रहने में है।

उन्होंने कहा, “जब लोग 10, 20 या 50 गुना रिटर्न देने वाले शेयरों की बात करते हैं, तो मैं कभी यह सोचकर शेयर नहीं खरीदता कि यह मल्टीबैगर बनेगा। मुझे पहले से ये पता नहीं होता।”

टॉर्च की रोशनी जैसा है निवेश

केडिया निवेश की तुलना रात में टॉर्च लेकर चलने से करते हैं। उनका कहना है, ‘टॉर्च सिर्फ 25 मीटर आगे तक रास्ता दिखाती है। आप पहले उतना चलते हैं, फिर अगले 25 मीटर दिखाई देते हैं। निवेश भी बिल्कुल ऐसा ही है।’

उनके मुताबिक, निवेश से पहले वह सिर्फ एक सवाल पूछते हैं, ‘क्या मैं इस कंपनी के शेयर को अगले 10 साल तक अपने पास रख सकता हूं?’

एक निवेश की कहानी

केडिया ने अपने एक सफल निवेश का उदाहरण भी दिया। उन्होंने 2005 में करीब ₹80 के भाव पर एक कंपनी के शेयर खरीदे। अगले कई सालों में शेयर कभी ₹250 पहुंचा, फिर ₹50-60 तक गिर गया। इसके बाद यह ₹600, ₹1,000 और ₹1,500 तक गया और फिर गिरा।

कोविड-19 के दौरान भी शेयर करीब ₹4,200 से गिरकर ₹1,700 तक आ गया। लेकिन उन्होंने अपने शेयर नहीं बेचे।

सिर्फ डिविडेंड से निकल गई लागत

केडिया के मुताबिक, 16 साल में कंपनी ने करीब ₹250 प्रति शेयर का कुल डिविडेंड दिया। यानी उन्हें खरीद कीमत से तीन गुना ज्यादा डिविडेंड मिल चुका था। उन्होंने कहा, “एक तरह से मेरे शेयर मुफ्त हो गए थे।”

बाद में कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर भी दिया। बोनस को शामिल करने के बाद केडिया ने करीब ₹16,400 प्रति शेयर के एडजस्टेड भाव पर अपना निवेश बेचा। यह उनके सबसे सफल निवेशों में शामिल रहा।

50-60% गिरावट भी झेली

केडिया का कहना है कि असली चुनौती मल्टीबैगर ढूंढना नहीं, बल्कि 50-60% की गिरावट के दौरान भी निवेश बनाए रखना है। उनके मुताबिक, “यही सबसे बड़ी समस्या है। ज्यादातर निवेशक गिरावट देखकर घबरा जाते हैं।”

ट्रेन यात्रा से समझाया निवेश

केडिया ने निवेश की तुलना मुंबई से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन से की। उन्होंने कहा, “अगर ट्रेन मुंबई से देर से निकले या दादर स्टेशन पर ज्यादा देर रुक जाए, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरी नजर मंजिल पर होती है, हर स्टेशन पर नहीं।”

उनका कहना है कि शेयर अगर 50% भी गिर जाए, लेकिन बिजनेस पर भरोसा कायम हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि जब शेयर फिर से खरीद कीमत तक लौटता है, तो उनका भरोसा और मजबूत हो जाता है।

केडिया के मुताबिक, मल्टीबैगर बनने का राज पहले से उसकी पहचान करना नहीं है, बल्कि सही बिजनेस में इतना लंबा टिके रहना है कि कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके।

Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: पाइप कंपनी को अमेरिका से ₹960 करोड़ का ऑर्डर मिला, 6 महीने में स्टॉक 121% चढ़ा

Stock in Focus: पाइप बनाने वाली कंपनी वेलस्पन कॉर्प को अमेरिका से करीब ₹960 करोड़ का नया ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।

यह ऑर्डर अमेरिका के लिटिल रॉक स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से कोटेड लाइन पाइप की सप्लाई के लिए मिला है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ऑर्डर बुक

इस नए ऑर्डर के बाद वेलस्पन कॉर्प की कुल ग्लोबल ऑर्डर बुक करीब ₹25,750 करोड़ (करीब 2.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गई है। कंपनी के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी ऑर्डर बुक है।

कंपनी का कहना है कि इससे आने वाले समय में रेवेन्यू की अच्छी तस्वीर दिखाई देती है। साथ ही, भारत और अमेरिका में मौजूद उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी होगा।

दो साल में पूरा होगा ऑर्डर

वेलस्पन कॉर्प ने बताया कि इस ऑर्डर को वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान पूरा किया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर उसकी लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूत करेंगे। साथ ही, वैश्विक पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में उसकी मौजूदगी भी और मजबूत होगी।

वेलस्पन कॉर्प के शेयर

सोमवार को वेलस्पन कॉर्प के शेयर 0.19% चढ़कर 1,599.90 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 121.64% चढ़ा है। इसने बीते 5 साल में 1,055.58% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 42.19 हजार करोड़ रुपये है।

क्या बनाती है कंपनी?

वेलस्पन कॉर्प स्टील पाइप और पाइपलाइन सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनी है। कंपनी तेल और गैस, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बड़े व्यास (Large Diameter) वाले पाइप बनाती है। भारत के अलावा अमेरिका में भी इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और यह दुनिया के कई देशों में अपने उत्पादों की सप्लाई करती है।

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट कंपनी का मुनाफा 44% गिरा, डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान

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VA Tech Wabag Share: रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो वाला ये इंफ्रा सेक्टर का स्टॉक ऑर्डर मिलने के बाद 6% दौड़ा, जानें डिटेल

VA Tech Wabag Share Price: इंफ्रा सेक्टर की दिग्गज कंपनी और रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो वाला स्टॉक, VA Tech Wabag के शेयर बुधवार, 1 जुलाई को इंट्राडे में 6 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। शेयर में यह तेजी उस वक्त आई जब कंपनी ने बताया कि उसे ऑस्ट्रिया के वियना में डोनौइंसेल वॉटर वर्क्स के विस्तार के लिए एक “बड़ा” ऑर्डर मिला।

VA Tech Wabag का शेयर प्राइस ₹2,010.75 के पिछले बंद भाव के मुकाबले ₹2,039.95 पर खुला और सुबह के सेशन में 6.30% उछलकर ₹2,137.45 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। हालांकि, स्टॉक ने जल्द ही बढ़त कम कर दी और सुबह 11.20 बजे के आसपास 3.37% बढ़कर ₹2,075 पर ट्रेड करता नजर आया।

VA Tech Wabag को ऑस्ट्रिया में ऑर्डर मिला

बुधवार, 1 जुलाई को मार्केट खुलने से पहले, कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे वियना शहर, म्युनिसिपल डिपार्टमेंट MA 31 – वीनर वासर से ऑस्ट्रिया के वियना में डोनौइंसेल वॉटर वर्क्स को बढ़ाने के लिए एक बड़ा ऑर्डर मिला है। ऑर्डर की वैल्यू ₹250 से ₹600 करोड़ के बीच होने की उम्मीद है।

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, पूरी फैसिलिटी 2030 में पूरी होने और चालू होने वाली है, जिसके बाद एक्सेप्टेंस माइलस्टोन तय किए जाएंगे। कंपनी ने कहा, “Wabag के लिए, यह प्रोजेक्ट ऑस्ट्रिया में एक फ्लैगशिप रेफरेंस है और यूरोप पर ग्रुप के स्ट्रेटेजिक फोकस को दिखाता है।”

कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट वियना शहर की ‘वीनर वासर 2050’ स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा कि इसकी डिज़ाइन कैपेसिटी 1,000 लीटर प्रति सेकंड है, जो लगभग 86 MLD के बराबर है।

डोनौइनसेल वॉटर वर्क्स के विस्तार से वियना के पीने के पानी के सिस्टम की मज़बूती बढ़ेगी, क्योंकि इससे शहर के मशहूर अल्पाइन स्प्रिंग वॉटर सप्लाई के साथ एक कंट्रोल किया जा सकने वाला ग्राउंडवॉटर-बेस्ड सप्लाई पिलर जुड़ जाएगा। यह प्लांट सुरक्षित कुओं के खेतों से ग्राउंडवॉटर को ट्रीट करेगा और वियना के वॉटर सप्लाई सिस्टम में अच्छी क्वालिटी का पीने का पानी देगा।

VA टेक वबाग के CEO-यूरोप क्लस्टर, महमूत गेडेक ने कहा, “डोनौइनसेल वॉटर वर्क्स का विस्तार वियना की लंबे समय तक चलने वाली पीने के पानी की सप्लाई के लिए एक मील का पत्थर है और कंपनी की टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञता का एक मज़बूत सबूत है।”

22 मई को CNBC-TV18 के साथ बातचीत में, VA टेक वबाग के चेयरमैन और MD, राजीव मित्तल ने कहा कि कंपनी के लिए पश्चिम एशिया प्रोजेक्ट का काम जारी है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में एग्जीक्यूशन 20% गाइडेंस को पार कर सकता है, जबकि इसका मीडियम-टर्म रेवेन्यू गाइडेंस 15% से 20% के बीच और इसका EBITDA 13% से 15% के बीच बना रहेगा।

रेखा झुनझुनवाला का एक पोर्टफोलियो स्टॉक

जानी-मानी इन्वेस्टर रेखा झुनझुनवाला की पिछली तिमाही में VA Tech Wabag में 8% से ज़्यादा हिस्सेदारी थी। FY25 की मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न डेटा के अनुसार, रेखा झुनझुनवाला के पास VA Tech Wabag में 50,00,000 शेयर थे, जो 8.02% हिस्सेदारी के बराबर है।

मार्च तिमाही के आखिर तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के पास कुल मिलाकर 1,03,44,924 शेयर या कंपनी में 16.60% हिस्सेदारी थी।

VA Tech Wabag एक मल्टीबैगर स्टॉक है

इस स्टॉक ने लंबे समय में मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। BSE डेटा के अनुसार, VA Tech Wabag के शेयर तीन साल और पांच साल में क्रमशः 325% और 500% बढ़े हैं।

पिछले एक साल में, स्टॉक ने 46% का रिटर्न दिया है। इस साल 27 जनवरी को ₹1,033.95 के 52-हफ़्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, स्टॉक 25 जून को ₹2,188.95 के 52-हफ़्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Multibagger Stocks: शेयर बाजार में सफल निवेश सिर्फ शेयर की कीमत या बाजार की चाल देखने से नहीं होता। अनुभवी निवेशकों का मानना है कि किसी कंपनी की असली ताकत उसके फाइनेंशियल नतीजों में छिपी होती है।

Motilal Oswal Group के चेयरमैन और दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने The Alpha Bets में ऐसे 10 फाइनेंशियल इंडिकेटर के बारे में बताया है, जिन्हें देखकर निवेशक किसी कंपनी की मजबूती का बेहतर आकलन कर सकते हैं। इससे मल्टीबैगर स्टॉक्स मिलने की संभावना भी बेहतर हो जाती है।

1. मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी

सिर्फ बिक्री बढ़ना काफी नहीं है। कंपनी का मुनाफा भी लगातार बढ़ना चाहिए। इससे पता चलता है कि कंपनी खर्च पर नियंत्रण रखते हुए बेहतर कमाई कर रही है।

2. कम कर्ज

कर्ज से कारोबार बढ़ सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज जोखिम बढ़ा देता है। कम कर्ज वाली कंपनियां मुश्किल समय में भी बेहतर स्थिति में रहती हैं।

3. मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो

ऑपरेटिंग कैश फ्लो बताता है कि कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार से कितना नकद कमा रही है। इसे मुनाफे के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें हेरफेर करना आसान नहीं होता।

4. लगातार बढ़ता रेवेन्यू

रेवेन्यू यानी कंपनी की बिक्री से होने वाली कमाई। अगर किसी कंपनी का रेवेन्यू कई साल तक लगातार बढ़ रहा है, तो यह अच्छी बात मानी जाती है। इससे पता चलता है कि उसके प्रोडक्ट या सर्विस की मांग बनी हुई है।

5. ऊंचा ROE

रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बताता है कि कंपनी शेयरधारकों के पैसे का कितना बेहतर इस्तेमाल कर रही है। ऊंचा ROE मजबूत मैनेजमेंट और बेहतर बिजनेस का संकेत माना जाता है।

6. बढ़ता प्रॉफिट मार्जिन

मार्जिन बताता है कि हर रुपये की बिक्री में से कंपनी के पास कितना मुनाफा बच रहा है। अगर मार्जिन बढ़ रहा है, तो इसका मतलब कंपनी पहले से ज्यादा कुशल तरीके से काम कर रही है।

7. मजबूत फ्री कैश फ्लो

फ्री कैश फ्लो वह रकम होती है, जो सभी खर्च और निवेश के बाद कंपनी के पास बचती है। इससे कंपनी विस्तार, डिविडेंड, कर्ज चुकाने या नए निवेश जैसे फैसले आसानी से ले सकती है।

8. प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी

अगर प्रमोटर्स लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, तो यह कंपनी के भविष्य पर उनके भरोसे का संकेत माना जाता है। हालांकि, अगर उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही हो, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।

9. पूंजी का सही इस्तेमाल

अच्छी कंपनी सिर्फ मुनाफा नहीं कमाती, बल्कि उस मुनाफे का सही इस्तेमाल भी करती है। बेहतर मैनेजमेंट पूंजी को सही जगह निवेश करता है, कर्ज संभालता है और जरूरत पड़ने पर शेयरधारकों को भी फायदा पहुंचाता है।

10. लगातार बढ़ती कमाई

बेहतरीन कंपनियां सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि मुश्किल दौर में भी कमाई बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। लगातार बढ़ती आय मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रतिस्पर्धी बढ़त का संकेत देती है।

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Vijay Kedia Stock: विजय केडिया की इस लॉजिस्टिक्स कंपनी में एंट्री, एक साल में 350% से ज्यादा चढ़ चुका है स्टॉक

Vijay Kedia Stock: दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने SME लॉजिस्टिक्स कंपनी Iware Supplychain Services में 6% हिस्सेदारी खरीदी है। उन्होंने 3% हिस्सेदारी व्यक्तिगत पोर्टफोलियो से और 3% अपनी कंपनी Kedia Securities Pvt Ltd के जरिए ली है। यह निवेश प्रेफरेंशियल इश्यू के तहत हुआ है। इसमें कंपनी ने करीब ₹20 करोड़ जुटाने के लिए ₹254.09 प्रति शेयर के भाव पर नए शेयर जारी किए हैं।

क्या करती है कंपनी?

2018 में बनी Iware Supplychain Services वेयरहाउसिंग, थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और रेल रेक हैंडलिंग जैसी सेवाएं देती है। कंपनी के पास 7 राज्यों में फैले 11 वेयरहाउस हैं। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 8 लाख वर्ग फुट है और मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹391 करोड़ है।

ग्रोथ मजबूत, सवाल भी

Iware Supplychain का रेवेन्यू FY21 के ₹19 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹258 करोड़ पहुंच गया। इसी दौरान EBITDA ₹2 करोड़ से ₹29 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹1 करोड़ से ₹15 करोड़ हो गया। पिछले पांच वर्षों में रेवेन्यू, EBITDA और मुनाफे की CAGR क्रमशः 69%, 71% और 72% रही है।

हालांकि, इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा FY26 में आया, जब रेवेन्यू ₹86 करोड़ से बढ़कर ₹258 करोड़ हो गया। यानी तेज ग्रोथ के पीछे एक साल का बड़ा योगदान है।

मार्जिन, कैश फ्लो और कर्ज पर नजर

FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 20% था, जो FY26 में घटकर 11% रह गया। वहीं FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव रहा। वेयरहाउस और गाड़ियों पर निवेश के कारण फ्री कैश फ्लो भी दबाव में रहा।

कंपनी का कर्ज FY25 के ₹30 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹70 करोड़ हो गया। साथ ही डेटर डेज 60 से बढ़कर 85 हो गए। इससे कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

पॉजिटिव पहलू यह है कि FY26 में कंपनी का ROCE 28% और ROE 42% रहा। कंपनी ने पहला डिविडेंड भी घोषित किया है। 18 जून को यह करीब 2% के उछाल के साथ 352 रुपये पर बंद हुआ। मई 2025 में लिस्ट हुआ यह शेयर एक साल में 350% से ज्यादा चढ़ चुका है। इसका 52-वीक का दायरा 90 रुपये से 395 रुपये तक है।

ऐसे में विजय केडिया की एंट्री भरोसे का संकेत जरूर है, लेकिन निवेशकों को ग्रोथ के साथ कैश फ्लो, कर्ज और मार्जिन पर भी नजर रखनी चाहिए।

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