Monsoon arrived in Delhi: दिल्ली पहुंचा मानसून, जानिए सैटेलाइट तस्वीरों में क्या-क्या दिखा, IMD ने बारिश-आंधी पर ये अलर्ट दिया

Monsoon Watch 2nd July: दिल्लीवालों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। झुलसाती गर्मी और शुष्क जून के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 2 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। मानसून अपने सामान्य आगमन की तारीख (27 जून) से 5 दिन की देरी से दिल्ली पहुंचा है। इसके आते ही राजधानी के कई हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर शुरू हो गया है। इससे फिलहाल मौसम सुहावना हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक साल 2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून ने जुलाई के महीने में दिल्ली में प्रवेश किया है।

पिछले 5 सालों में सबसे देरी से पहुंचा मानसून

मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में मानसून के दिल्ली पहुंचने का पैटर्न कुछ ऐसा रहा है:-

2026: 2 जुलाई (5 दिन की देरी)

2025: 29 जून

2024: 28 जून

2023: 25 जून

2022: 30 जून

2021: 13 जुलाई

2021 में मानसून काफी देरी से 13 जुलाई को आया था। इसके बाद अब 2026 में इसने जुलाई के महीने में दस्तक दी है। मौसम विभाग ने आज दिन भर दिल्ली के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने का पूर्वानुमान जताया है।

दिल्ली के लिए IMD का वेदर अलर्ट: तेज हवाओं के साथ होगी बौछारें

मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए तात्कालिक अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में गरज-चमक और आकाशीय बिजली के साथ बहुत हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।

ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महासागर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DS सैटेलाइट से बुधवार को जारी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में मानसून की एक बेहद हैरान करने वाली और नाटकीय प्रगति देखी गई है। सैटेलाइट तस्वीरों में पश्चिम बंगाल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई लगभग 1500 किलोमीटर लंबी एक लगातार सक्रिय रेन बैंड यानी बादलों की विशाल पट्टी दिखाई दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के बादल छितराए हुए नहीं हैं बल्कि वे एक लंबी कतार में आपस में जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। यह सक्रिय मानसून परिसंचरण की शुरुआत का सीधा संकेत है। ये विशाल बादल अपने साथ भारी मात्रा में नमी लेकर चल रहे हैं। ये एक साथ कई राज्यों में भारी बारिश कराने में सक्षम हैं।

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तस्वीरों से पता चलता है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों तरफ से आने वाली नमी से लदी हवाएं उत्तर भारत के ऊपर आकर आपस में मिल रही हैं। इसके साथ ही मानसून की ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति की ओर खिसकने लगी है। इससे मैदानी इलाकों में लगातार बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

उत्तर भारत में मानसून की रफ्तार तेज

देश के सबसे सूखे जून महीनों में से एक के बाद मानसून ने उत्तर भारत में जोरदार वापसी की है। इस बढ़ी हुई मानसूनी सक्रियता की वजह से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से ही व्यापक बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, व्यापक बारिश और आंधी-तूफान के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ इलाकों में आगे बढ़ चुका था।

इसके बाद अगले 24 घंटों के भीतर मानसून ने तेजी से उत्तर की ओर रुख किया, जिसके परिणामस्वरूप बुधवार रात से गुरुवार दोपहर के बीच दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और हरियाणा व पंजाब के कई और हिस्सों में मानसूनी हवाएं और शुरुआती गरज-चमक के साथ बारिश का दौर चल रहा है।

जेवर एयरपोर्ट से इन 9 नए रूट पर इंडिगो ने फ्लाइट का किया ऐलान, Noida International airport से अब टोटल 15 रूट पर हवाई सेवा

Noida Airport News: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) से हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइंस कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अपने नेटवर्क का बड़ा विस्तार करते हुए 9 नए शहरों के लिए उड़ानों की घोषणा की है। इस नए विस्तार के बाद नोएडा एयरपोर्ट से सीधे तौर पर जुड़ने वाले शहरों की कुल संख्या अब 15 हो जाएगी। एयरलाइन ने बुधवार 1 जुलाई को इन नई सेवाओं की शुरुआत की। इनमें जयपुर, जोधपुर, धर्मशाला, भोपाल, देहरादून, बरेली, किशनगढ़ (अजमेर), पंतनगर और जम्मू शामिल हैं।

एयरलाइन ने 15 जून से नोएडा एयरपोर्ट पर बिजनेस ऑपरेशन शुरू किया था। उद्घाटन उड़ान लखनऊ से नोएडा के बीच संचालित हुई थी। इसके बाद से एयरलाइन बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए प्रतिदिन उड़ानें चला रही है। इंडिगो का यह विस्तार केवल उड़ानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बल्कि इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर भारत के एक प्रमुख एविएशन हब के रूप में तेजी से विकसित होगा। यात्रियों, कारोबार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था सभी को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

नेटवर्क और मजबूत होगा

1 जुलाई से शुरू हुई नई सेवाओं के बाद नोएडा एयरपोर्ट से इंडिगो द्वारा जुड़े शहरों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। इसी दिन से बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए भी नोएडा से उड़ान सेवाएं शुरू होंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो जहां अधिकांश शहरों के लिए डेली फ्लाइट का संचालन करेगी। वहीं, बरेली के लिए सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उड़ानें संचालित की जाएंगी। इसके अलावा किशनगढ़ (अजमेर) के लिए मंगलवार, गुरुवार और रविवार को फ्लाइट उपलब्ध रहेगी।

इन नए शहरों के लिए शुरू होंगी उड़ानें

इंडिगो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नए जोड़े गए रूटों में देश के कई प्रमुख और पर्यटन शहर शामिल हैं:-

जयपुर, जोधपुर और देहरादून

धर्मशाला, बरेली और किशनगढ़ (अजमेर)

देहरादून, पंतनगर और चंडीगढ़

अधिकांश शहरों के लिए डेली फ्लाइट

इंडिगो अधिकांश नए शहरों के लिए रोजाना उड़ानें संचालित करेगी। हालांकि, बरेली के लिए उड़ानें सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेंगी। जबकि किशनगढ़ (अजमेर) के लिए उड़ानें मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को उपलब्ध होंगी।

10 जुलाई से श्रीनगर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट

इंडिगो 10 जुलाई से नोएडा-श्रीनगर के बीच सीधी उड़ान सेवा भी शुरू करेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि फिलहाल नवी मुंबई और श्रीनगर के लिए उड़ानें चंडीगढ़ के रास्ते संचालित की जा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी तैयारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस वर्ष के अंत तक कस्टम और इमिग्रेशन सुविधाएं तैयार कर लेगा। इसके बाद एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू किए जाने की उम्मीद है।

नई किराया कैटेगरी ‘IndiGo Lite Fare’

इसी बीच इंडिगो ने यात्रियों के लिए ‘IndiGo Lite Fare’ नाम से नई एंट्री-लेवल इकोनॉमी किराया श्रेणी शुरू की है। इसमें केवल केबिन बैगेज शामिल होगा और सीट चयन पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस किराए में फ्री चेक-इन बैगेज शामिल नहीं है। जिन यात्रियों को चेक-इन बैगेज की जरूरत होगी, उन्हें इसके लिए अलग से शुल्क देना होगा।

अकासा एयर के बाद इंडिगो की बड़ी तैयारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून को अकासा एयर (Akasa Air) ने अपनी कमर्शियल उड़ानें शुरू की थीं, जो वर्तमान में मुंबई और बेंगलुरु के लिए सेवाएं दे रही हैं। इसी कड़ी में अब इंडिगो ने भी लखनऊ से नोएडा के बीच अपनी उद्घाटन उड़ान के साथ परिचालन का विस्तार कर दिया है। इसके अलावा कंपनी बेंगलुरु, हैदराबाद, जम्मू और अमृतसर के लिए भी दैनिक उड़ानें चला रही है।

नवी मुंबई और श्रीनगर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट

एनआईए (NIA) के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि 10 जुलाई से नवी मुंबई के लिए सीधी उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। इसके साथ ही श्रीनगर के लिए भी सीधी हवाई सेवा जल्द शुरू की जाएगी। वर्तमान में एयरलाइन के पास नोएडा-जयपुर-मुंबई रूट का लेओवर (Layover) विकल्प है। जबकि नोएडा से नवी मुंबई और नोएडा से श्रीनगर की उड़ानें चंडीगढ़ होकर रूट की जाएंगी।

इंडिगो के नोएडा एयरपोर्ट से 9 नए रूट शुरू होने के प्रमुख फायदे

यात्रियों को अधिक विकल्प: नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को अब कई शहरों के लिए सीधे या बेहतर कनेक्टिविटी वाली उड़ानें मिलेंगी। इससे दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।

समय की बचत: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और एनसीआर के आसपास के लोगों को दिल्ली एयरपोर्ट तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों घटेंगे।

पर्यटन को बढ़ावा: जयपुर, धर्मशाला, देहरादून, जम्मू और श्रीनगर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन उद्योग को लाभ मिलेगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा: नए हवाई संपर्क से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेशकों के लिए नोएडा तथा आसपास का क्षेत्र अधिक आकर्षक बनेगा।

रोजगार के अवसर: उड़ानों की संख्या बढ़ने से एयरपोर्ट, एयरलाइन, होटल, टैक्सी और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

क्षेत्रीय विकास: बरेली, पंतनगर और किशनगढ़ जैसे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने से उनका आर्थिक और औद्योगिक विकास तेज होगा।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारी: कस्टम और इमिग्रेशन सुविधाएं शुरू होने के बाद नोएडा एयरपोर्ट से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने का रास्ता साफ होगा, जिससे विदेश यात्रा भी अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

सस्ती यात्रा का विकल्प: इंडिगो की नई IndiGo Lite Fare योजना के तहत केवल केबिन बैगेज के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को कम किराए में टिकट मिलने की संभावना रहेगी।

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El Nino को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट, PM मोदी ने मंत्रालयों को आपात योजना बनाने के दिए निर्देश

देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और बारिश की बढ़ती कमी को लेकर चिंता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को ‘अल नीनो’ (El Nino) के संभावित असर से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाओं के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत पर ‘अल नीनो’ के संभावित असर का आकलन करते हुए यूरोप में बढ़ते तापमान जैसी चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों की समीक्षा की। बता दें कि यह समीक्षा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ऐसे समय में की गई है, जब देश के कई इलाकों में बारिश में 40% से अधिक की कमी देखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे मानसून की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखें और खेती, जल संसाधनों, बिजली आपूर्ति और अन्य अहम क्षेत्रों पर पड़ने वाले किसी भी बुरे असर से निपटने के लिए तैयारी सुनिश्चित करें।

बारिश के पैटर्न में हो सकते हैं बदलाव

वहीं, सरकार का आकलन है कि अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कुछ इलाकों में बहुत कम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ और पानी की कमी का खतरा एक साथ बढ़ सकता है।

फिलहाल, तैयारी को मजबूत करने के लिए, जल शक्ति, कृषि, बिजली, रेलवे और अन्य अहम विभागों सहित कई मंत्रालयों को अपने-अपने सेक्टर के हिसाब से आपातकालीन योजनाएं बनाने का निर्देश दिया गया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत से ही नियमित बैठकों के जरिए देश की ‘अल नीनो’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।

इसके अलावा, बदलते हालात पर लगातार नजर रखने के लिए 10 मंत्रालयों के प्रतिनिधियों वाला एक अंतर-मंत्रालयी समूह भी बनाया गया है। गृह मंत्रालय इस समूह के लिए नोडल मंत्रालय के तौर पर काम करेगा और अलग-अलग विभागों के बीच तैयारी और उससे निपटने के उपायों में तालमेल बिठाएगा।

समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि El Nino से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए “पूरी सरकार मिलकर काम करे” और सभी विभाग मिलकर समन्वय में काम करें।

बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जुलाई में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। यह अनुमान तब आया है जब जून 2026, 1901 के बाद से भारत का पांचवां सबसे सूखा जून रहा। इस दौरान देश में बारिश लंबे समय के औसत से 39% कम दर्ज की गई। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि जून में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 92% से भी कम रह सकती है।

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खेत में उतरे-बोया धान, किसानों से इस अंदाज में सीएम डॉ. मोहन ने की ‘दिल की बात’

भोपाल। 'खेत में उतरे, धान बोया, हाथ में लेकर खाना खाया और किसानों से आत्मीय संवाद किया,' मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी जिले में अनोखे अंदाज में नजर आए। उन्होंने जनता को एक बार फिर बताया कि वे भी आम इंसान ही हैं। वे लगातार जनकल्याण का सोचते हैं। उनकी सादगी किसानों और आम लोगों को भा गई। लोग उनसे बातचीत करके उत्साहित नजर आए।

सीएम डॉ. मोहन ने बुधवार को सिवनी के लिए खजाना खोल दिया। उन्होंने सिवनी में धान महोत्सव में शिरकत की, कोदो कुटकी बोनस का वितरण किया और विकास कार्यों की सौगात दी। सीएम डॉ. यादव ने सिवनी में 349.33 करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण और 144.8 करोड़ के भूमि-पूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन और कन्या पूजन किया। इसके अलावा सीएम यादव ने बालाघाट से सिवनी फोर लेन सड़क निर्माण, सिवनी के चमारा विकासखंड में शासकीय महाविद्यालय और स्टेडियम सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धान की फसल को जीआई टैग मिला है। मां लक्षमी की कृपा से रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आज प्रदेश के 3941 किसानों को 1000 रुपए मान से कोदो कुटकी बोनस के रूप में 282.99 करोड़ राशि दी गई है। राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू हुआ है। इसके साथ ही आज मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदेश के 16,754 श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की है। 

 

गरीबों का ध्यान रख रही राज्य सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने गरीब-जरूरतमंदों को कभी संबल योजना का नाम नहीं दिया। संबल योजना में सरकार दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और अपंगता आने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करती है। श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक के फ्री इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। राज्य सरकार हर वर्गों के गरीब, वंचित और आखिरी पंक्ति में बैठे लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे सभी पात्र लोगों को आवास देने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज सिवनी जिले के समग्र विकास के लिए 349.33  करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 144.8 करोड़ के 43 कार्यों के भूमि-पूजन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का को गरीबों की फसल कहा जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना शुरू कर देश-दुनिया में इसका मान बढ़ाया। श्रीअन्न में मौजूद तत्व सबसे जल्दी पचता है। राज्य सरकार ने पिछले साल से श्रीअन्न खरीदने की शुरुआत की है। इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें। 

 

किसानों को कई योजनाओं का लाभ दे रही सरकार- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 3941 किसानों को 2829 मीट्रिक टन कोदो कुटकी के लिए 1000 रुपए मान से 2 हजार 83 लाख रुपए बोनस राशि दी गई है। राज्य में कोटो कुटकी के ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए भी काम जारी हैं। डिंडोरी की सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगनी अरहर को जीआई टैग मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष में अन्नदाता को अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना के माध्यम से लाभ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में धान की फसल के लिए भी भावांतर योजना लागू की जाएगी। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार खेत से लेकर बाजार तक हर क्षेत्र में मूल्य संवर्धन पर काम कर रही है।

Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

Market Outlook: पिछले करीब तीन महीने से भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। कभी हल्की तेजी तो कभी हल्की गिरावट, लेकिन कोई बड़ा मूव देखने को नहीं मिला। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या जुलाई का महीना बाजार के लिए कुछ नया लेकर आएगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा साबित हुआ है। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात भी बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

जुलाई का रिकॉर्ड क्या कहता है?

SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट जहोल प्रजापति का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़े जुलाई के पक्ष में इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘साल 2001 से 2025 के बीच 25 साल में निफ्टी 50 ने जुलाई में 18 बार बढ़त दर्ज की है। यानी करीब 72% बार बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान औसत रिटर्न 2.19% रहा। दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई निफ्टी के लिए तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला महीना रहा है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने ट्रेंड देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। लेकिन जुलाई में हर साल कुछ ऐसे फैक्टर देखने को मिलते हैं, जो बाजार को सपोर्ट देते हैं। इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी शामिल हैं।

मौजूदा हालात भी बाजार के लिए अच्छे

जहोल प्रजापति का कहना है कि इस समय कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकते हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद है।
  • कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
  • इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
  • साल की शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया अब संभलता दिख रहा है।
  • विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे बाजार में भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है, तो ये सभी बातें भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती हैं।

चार्ट क्या बता रहे हैं?

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धामेजा का कहना है कि 1 जुलाई को निफ्टी ने अच्छी मजबूती दिखाई और बुलिश कैंडल बनाई। इंडेक्स ने 23,850-23,900 के सपोर्ट जोन को बचाए रखा। यही इलाका हालिया ब्रेकआउट एरिया और 50-DEMA के आसपास भी है। हालांकि, 24,000 के ऊपर पहुंचने के बावजूद निफ्टी को 100-DEMA के पास मजबूत रुकावट मिल रही है। यही वजह है कि बाजार अभी भी एक छोटी रेंज में फंसा हुआ है।

उन्होंने बताया कि RSI अब धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और फिलहाल 55.13 पर है। जब तक RSI 50 से ऊपर रहेगा, तब तक बाजार का रुख पॉजिटिव माना जाएगा। हालांकि, असली तेजी का संकेत तभी मिलेगा, जब निफ्टी मौजूदा रेजिस्टेंस के ऊपर निकल जाएगा। धामेजा ने यह भी कहा कि India VIX 2.63% गिरकर 13.24 पर आ गया है। इसका मतलब है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है और निवेशक फिलहाल ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं।

क्या 24,200 तक जा सकता है निफ्टी?

LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि 1 जुलाई को भी निफ्टी अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज से बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ सत्रों से इंडेक्स 24,000 के आसपास ही घूम रहा है, जिससे साफ है कि बाजार को अभी नई दिशा नहीं मिली है।

हालांकि, उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी की उम्मीद कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह सपोर्ट नहीं टूटता है, तो आने वाले दिनों में निफ्टी धीरे-धीरे 24,200 और उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। 1 जुलाई को निफ्टी 50 में 0.59% की तेजी आई और यह 24,005.85 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 0.58% चढ़कर 76,922.64 के स्तर पर पहुंच गया।

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Monsoon Watch 1 July: पंजाब और हरियाणा में भी हुई मानसून की एंट्री पर दिल्ली में नहीं! अब IMD ने जारी किया ये नया अनुमान

Progress of SW Monsoon: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। 1 जुलाई को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए इलाकों में धमाकेदार एंट्री मार ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब पंजाब और हरियाणा के भी कुछ हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली को इसने अभी थोड़ा तरसाया है। वैसे दिल्लीवालों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दस्तक देने को लेकर बेहद राहत भरा नया अनुमान जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा समेत इन राज्यों में बढ़ा मानसून, जानें कहां से गुजर रही सीमा

IMD के मुताबिक एक जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बचे हुए हिस्सों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में मानसून ने अपनी पहुंच दर्ज करा दी है। अभी मानसून की उत्तरी सीमापोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान

भले ही 1 जुलाई की एंट्री में दिल्ली का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा लेकिन मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 2 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूरे हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए मौसम का सिस्टम पूरी तरह तैयार है। यानी अगले 48 घंटों में दिल्ली में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो जाएगी।

पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय, सामान्य से 6 दिन की देरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर है कि बुधवार को मानसून ने पूरे राज्य को आधिकारिक तौर पर कवर कर लिया है। हिमाचल में मानसून का यह आगमन सामान्य तारीख से 6 दिन की देरी से हुआ है। 1 जुलाई को मानसून ने शिमला जिले (शिमला शहर सहित), सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और कांगड़ा के बचे हुए हिस्सों को कवर कर लिया।

इसके साथ ही सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों में भी मानसून पूरी तरह फैल गया है। राज्य में इस पूरे हफ्ते व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे हिमाचल समेत पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

जुलाई महीने के लिए पूरे देश का ओवरऑल वेदर आउटलुक

मौसम विभाग ने जुलाई 2026 के महीने के लिए देश भर में होने वाली औसत बारिश का भी एक अनुमान जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है।

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1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई में देश भर में वर्षा का लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) लगभग 280.4 मिमी हो सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है लेकिन उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है।

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

An image providing information on preparing hot, spicy, and special recipes for rainy days

Monsoon Special Recipes: रिमझिम बारिश की बूंदें, ठंडी हवा और खिड़की से आती मिट्टी की सोंधी खुशबू… मानसून का मजा तब तक अधूरा है, जब तक किचन से गरमा-गरम और चटपटी चीजों की महक न आए। मानसून का मौसम केवल ठंडी हवाओं और सुहाने मौसम का ही नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने का भी होता है। इस सुहाने मौसम का लुत्फ दोगुना करने के लिए यहां मानसून की 5 सबसे बेहतरीन और सदाबहार रेसिपीज दी गई हैं, जिन्हें देखते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा:

 

1. कड़क चाय के साथ 'चीज़ी ब्रेड पकौड़ा'

ब्रेड पकौड़ा तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन इस बार बारिश में इसे एक ट्विस्ट दें। आलू के चटपटे मसाले के साथ ब्रेड के बीच में मोज़ेरेला या स्लाइस चीज़/Cheese रखें। इसे बेसन के गाढ़े घोल में डुबोकर सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। जब आप इसे बीच से काटेंगे, तो पिघलता हुआ चीज़ और आलू का तीखापन मानसून का मजा बढ़ा देगा।

 

2. गरमा-गरम 'कॉर्न भजिया'

बारिश के मौसम में भुट्टा (स्वीट कॉर्न) हर गली-नुक्कड़ पर मिलता है। इस बार भुट्टे को उबालकर खाने के बजाय इसके क्रिस्पी भजिए बनाएं। ताजे मक्के के दानों को दरदरा पीस लें, फिर इसमें थोड़ा बेसन, चावल का आटा (क्रिस्पी बनाने के लिए), हरी मिर्च, बारीक कटा प्याज और हरा धनिया मिलाएं। तैयार गरमा-गरम मक्के के भजिए हरी चटनी के साथ लाजवाब लगते हैं।

 

3. मुंबई स्टाइल 'कांदा भजी' (चटपटी प्याज के पकौड़े)

अगर कुछ बेहद क्रिस्पी और झटपट खाने का मन है, तो लच्छेदार प्याज के पकौड़े (कांदा भजी) से बेहतर कुछ नहीं। प्याज को लंबा और पतला काटें, उसमें नमक डालकर 5 मिनट छोड़ दें ताकि प्याज पानी छोड़ दे। अब उसी पानी में बेसन, अजवाईन, कुटी हुई लाल मिर्च और थोड़ा सा गरम तेल डालकर बिना पानी के गूंथ लें और कुरकुरा होने तक तलें। तली हुई हरी मिर्च के साथ इसका स्वाद लाजवाब आता है।

 

4. सूजी का हलवा या 'गुलगुले' (मीठे पकौड़े)

चटपटे के बाद कुछ मीठा हो जाए! उत्तर भारत में बारिश के दिनों में 'गुलगुले', जो कि गेहूं के आटे और गुड़ से बने मीठे पकौड़े बनाने की पुरानी परंपरा है। अगर वो न बनाना चाहें, तो देसी घी में भुना हुआ गरमा-गरम सूजी का शीरा या हलवा बनाएं। इलायची की खुशबू और ड्राई फ्रूट्स से सजा यह हलवा बारिश के मौसम में आत्मा को तृप्त कर देता है।

 

5. चटपटा वेज सूप

बारिश में जब थोड़ी ठंडक बढ़ने लगती है, तो कुछ गरमा-गरम और हेल्दी पीने का मन करता है। ऐसे में स्पाइसी 'हॉट एंड सॉर सूप' या 'क्लियर सूप' एक बेहतरीन विकल्प है। ढेर सारी सब्जियां- जैसे गाजर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च और अदरक-लहसुन के तड़के के साथ बना यह सूप न सिर्फ आपके मुंह का स्वाद बदलेगा, बल्कि मानसून की बीमारियों से भी बचाएगा।

 

मानसून स्पेशल टिप: इन सभी रेसिपीज के साथ अदरक, इलायची और लौंग वाली कड़क मसाला चाय बनाना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि इसके बिना हर मानसून रेसिपी अधूरी है!

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: jharkhand recipe: झारखंड का पारंपरिक पकवान ओकोपोको, जानिए कैसे बनता है यह व्यंजन

 

India Heavy Rain Alert: दिल्ली से यूपी तक भारी बारिश, IMD ने इन 20+ राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, 7 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

India Heavy Rain Alert: देश भर में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 जुलाई को जारी अपने ताजा बुलेटिन में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मुंबई (कोंकण) सहित देश के 20 से अधिक राज्यों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में आगामी 7 जुलाई तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा।

तेजी से आगे बढ़ा मानसून, दिल्ली-राजस्थान में अगले 2 दिन अनुकूल

IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख के बचे हुए हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मानसून ने दस्तक दे दी है। 1 जुलाई को मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल और गुरदासपुर से होकर गुजर रही है। अगले 2 दिनों के दौरान मानसून के दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-यूपी में आंधी और भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए 1 से 7 जुलाई तक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है।

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: इन राज्यों में 2 से 7 जुलाई के बीच व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 1 जुलाई को छिटपुट बारिश का अनुमान है। 2 से 4 जुलाई और 6 से 7 जुलाई को पंजाब में जबकि 2 से 7 जुलाई के दौरान दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है। इन क्षेत्रों में 1 से 7 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) से तेज हवाएं और आंधी चलने की आशंका है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 और 2 जुलाई को व्यापक बारिश होगी जबकि 3 से 7 जुलाई तक छिटपुट से लेकर सामान्य बारिश की संभावना है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 6 व 7 जुलाई को व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी यूपी में 1 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश हो सकती है जबकि दोनों क्षेत्रों में 1 से 3 जुलाई और 6-7 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। 1 और 2 जुलाई को यहां 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान आ सकता है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: दोनों पहाड़ी राज्यों में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 1 से 3 जुलाई के दौरान और हिमाचल में 2-3 जुलाई व 5-6 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: यहां 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है। 1 से 3 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 5 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश और 3-4 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान में 1 से 7 जुलाई तक छिटपुट बारिश के साथ ही 3 से 5 जुलाई के बीच धूल भरी आंधी चलने की आशंका है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश में बिजली कड़कने और ‘थंडरस्क्वाल’ की चेतावनी

मध्य प्रदेश: पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 1 से 7 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश दर्ज की जाएगी। 1 जुलाई को पूरे मध्य प्रदेश में मध्यम से तीव्र गति से बिजली कड़कने की गतिविधि देखी जाएगी। इसके साथ ही 1 जुलाई को दोनों हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (भीषण आंधी) आने की चेतावनी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 और 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 1 से 7 जुलाई तक और विदर्भ में 1 से 5 जुलाई व 7 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। विदर्भ में 1 से 3 जुलाई और छत्तीसगढ़ में 1-2 जुलाई के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

पश्चिम भारत: मुंबई, कोंकण और गुजरात में आफत की बारिश का अनुमान

पश्चिम भारत के तटीय और मैदानी इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जैसा अनुमान है:

कोंकण, गोवा और गुजरात: गुजरात क्षेत्र, कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 1 से 7 जुलाई तक मूसलाधार और व्यापक बारिश का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र और कोंकण व गोवा में 1 से 5 जुलाई के दौरान जबकि मध्य महाराष्ट्र में 2 से 5 जुलाई के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की बड़ी चेतावनी दी गई है।

सौराष्ट्र और कच्छ: यहां 4 से 6 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जबकि 1 से 5 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा और बिहार में कैसा रहेगा मौसम?

बिहार और झारखंड: बिहार में 1 जुलाई को व्यापक बारिश और 2 से 7 जुलाई तक छिटपुट बारिश होगी। वहीं झारखंड में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। बिहार में 1 से 4 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा: गंगीय पश्चिम बंगाल में 5 से 7 जुलाई तक बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि ओडिशा में 1 से 6 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 1 जुलाई को गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड में तीव्र बिजली कड़कने की संभावना है।

पूर्वोत्तर राज्य: अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में जुलाई के शुरुआती दिनों में व्यापक बारिश होगी जो बाद के दिनों में छिटपुट हो जाएगी। असम, मेघालय और अरुणाचल में 2 से 5 जुलाई के दौरान मौसम गर्म और उमस भरा रहने की भी संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

तटीय और आंतरिक कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 1 से 7 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। मौसम विभाग ने 1 व 2 जुलाई और फिर 5 से 7 जुलाई के दौरान तटीय कर्नाटक में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ ही कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 7 जुलाई तक बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश: केरल और लक्षद्वीप में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जहां केरल में 1 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। तेलंगाना में 1-2 जुलाई को व्यापक बारिश और 4 से 7 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी: समुद्र में न जाने की सलाह

खराब मौसम और तेज हवाओं के मद्देनजर मौसम विभाग ने मछुआरों को 1 से 6 जुलाई 2026 के बीच समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी है:

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तटों, उससे सटे मध्य-पूर्वी व उत्तर-पूर्वी अरब सागर, सोमालिया और ओमान तटों के साथ-साथ केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में 1 से 5/6 जुलाई तक मछुआरों को न जाने के लिए कहा गया है।

बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, श्रीलंका तट, ओडिशा तट, गंगीय पश्चिम बंगाल और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के साथ-साथ पूरे अंडमान सागर में 6 जुलाई तक मछुआरों के जाने पर पाबंदी रहेगी।

घूमिये जरा हटके! वायरल होने से पहले घूम आए भारत के 5 अनदेखे कोने, जहां प्रकृति करती है बातें

भारत में कुछ ऐसी शानदार जगहें भी हैं जो अभी तक सोशल मीडिया की भीड़ से दूर हैं। यहां आपको नेचुरल ब्यूटी, शांति, स्थानीय संस्कृति और अनोखे एक्सपीरियंस मिलेंगे, लेकिन टूरिस्ट की भीड़ कम मिलेगी। अगर आप ऑफबीट ट्रैवल पसंद करते हैं, तो ये 7 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए:

1. Mechuka (अरुणाचल प्रदेश)– बादलों और पहाड़ों के बीच बसा स्वर्ग

Waterfalls, Hills & Lakes: Top Tourist Places In Yercaud Hill Station in Tamil Nadu 2024

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मेचुका समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर बसा एक खूबसूरत घाटी क्षेत्र है। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे घास के मैदान और बहती सियॉम नदी इस जगह को किसी विदेशी डेस्टिनेशन जैसा बनाते हैं।

यहां की सबसे खास बात यह है कि अभी भी यह जगह बड़े पैमाने पर टूरिस्ट से अछूती है। आप यहां ट्रेकिंग, स्थानीय जनजातीय संस्कृति को जानने और शांत वातावरण का आनंद ले सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय घाटी का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। 2 दिन ट्रिप के लिए दिल्ली से Dibrugarh या Guwahati के लिए फ्लाइट लें। वहां से Aalo तक सड़क मार्ग और फिर टैक्सी से मेचुका पहुंचा जा सकता है।

2. Mawlynnong (मेघालय)– एशिया का सबसे स्वच्छ गांव

Discover Shillong – Best Attractions, Food, Stays & Things to Do

मेघालय का मावलिन्नोंग अपनी साफ-सफाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस गांव को कई बार एशिया के सबसे स्वच्छ गांवों में गिना गया है। यहां की हर सड़क, हर घर और हर बगीचा बेहद व्यवस्थित दिखाई देता है।

बांस से बने स्काई वॉक से आप आसपास के जंगलों और बांग्लादेश के मैदानों का शानदार नजारा देख सकते हैं। इसके अलावा पास के जीवित जड़ों से बने पुल (लिविंग रूट ब्रिज) प्रकृति और मानव कौशल का अद्भुत उदाहरण हैं। 1 दिन वाली इस ट्रिप के लिए दिल्ली से Shillong या Guwahati तक फ्लाइट लें। शिलॉन्ग से मावलिन्नोंग लगभग 3 घंटे की टैक्सी राइड पर है।

3. Gandikota (गंडिकोटा)- आंध्र प्रदेश का शानदार और एडवेंचरस नज़ारा

File:Gandikota Canyon.jpg - Wikimedia Commons

गंडिकोटा भारत के खूबसूरत यात्रा स्थल में से एक है जिसे “ग्रैंड कैन्यन” भी कहा जाता है। यह स्थान पेन्ना नदी के किनारे स्थित गहरी घाटियों और लाल चट्टानों के लिए जाना जाता है। यहां बना प्राचीन किला इतिहास की झलक दिखाता है और सूर्योदय-सूर्यास्त का दृश्य बेहद मनमोहक होता है। गंडिकोटा पहुंचने के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन कडप्पा है, जहां से यह लगभग 90–100 किलोमीटर दूर है और आगे टैक्सी या बस से पहुंचा जा सकता है।

4. Lakir Valley (लैकीर वैली)- लद्दाख के ट्रेकिंग रूट्स

nubra-valley-46 - Vargis Khan

यह लद्दाख की एक शांत और बेहद खूबसूरत घाटी है, जहां ऊंचे पहाड़, खुला नीला आसमान और ट्रैकिंग के शानदार रास्ते मिलते हैं। यह जगह भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण नेचर लवर्स और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन मानी जाती है। लैकीर वैली पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले दिल्ली से लेह जाना होगा, जो हवाई मार्ग से सबसे आसान तरीका है। लेह एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वहां से टैक्सी या लोकल कैब लेकर लगभग 1–2 घंटे में लिकिर क्षेत्र और आसपास की घाटी तक पहुंचा जा सकता है।

5. Gokarna (कर्नाटक)– गोवा जैसा एक्सपीरियंस, लेकिन कम भीड़

1,200+ Gokarna Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock | Gokarna beach

गोकर्ण को अक्सर गोवा का शांत विकल्प कहा जाता है। यहां के समुद्र तट साफ-सुथरे, शांत और थोड़े कम भीड़ वाले हैं। ओम बीच, हाफ मून बीच और पैराडाइज बीच जैसे तट नेचुरल ब्यूटी से भरपूर हैं।

यहां आप समुद्र किनारे आराम कर सकते हैं, बीच ट्रेकिंग कर सकते हैं और लोकल कर्नाटक संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं। जो लोग भीड़भाड़ से दूर समुद्री छुट्टियां बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह शानदार ऑप्शन है। लगभग 6–8 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Goa या Hubballi तक फ्लाइट लें। वहां से टैक्सी या ट्रेन द्वारा गोकर्ण पहुंचा जा सकता है।

6. Mandu (मध्य प्रदेश)– इतिहास और प्रेम कहानियों का शहर

Here's why Madhya Pradesh's Mandu is an architectural marvel | TimesTravel

मध्य प्रदेश का मांडू अपने प्राचीन किलों, महलों और रोमांटिक इतिहास के लिए जाना जाता है। यह जगह Baz Bahadur और Rani Roopmati की प्रेम कहानी से भी जुड़ी हुई है।

मानसून के दौरान मांडू की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बादलों से घिरे महल और हरियाली से ढके खंडहर इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं है। इंदौर से लगभग 100 किमी दिल्ली से Indore तक फ्लाइट या ट्रेन लें। इंदौर से मांडू लगभग 2–3 घंटे की सड़क यात्रा पर है।

7. Yercaud (तमिलनाडु)– दक्षिण भारत का शांत हिल स्टेशन

Yercaud's winding mountain road features motorcycles traversing multiple hairpin curves through green and dry terrain. Static aerial view captures the serpentine asphalt road from directly overhead.

तमिलनाडु का यरकौड नीलगिरि और ऊटी जैसे पॉपुलर हिल स्टेशनों की तुलना में कम चर्चित है, लेकिन इसकी सुंदरता किसी भी तरह कम नहीं है। कॉफी के बागान, झीलें और ठंडा मौसम इसे बेहद खास बनाते हैं।

यहां आप ट्रेकिंग, बोटिंग और प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं। शांत वातावरण और कम भीड़ इसे परिवारों और कपल्स के लिए आइडियल डेस्टिनेशन बनाती है। लगभग 5–7 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Salem या Chennai के लिए फ्लाइट लें। सलेम से यरकौड लगभग 30 किमी दूर है और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

क्यों हैं ये जगहें खास?

इन सभी जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आपको भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट डेस्टिनेशन से ज्यादा शांति, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का एक्सपीरियंस मिलता है। ये स्थान अभी भी बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया ट्रेंड्स से दूर हैं, इसलिए यहां का माहौल ज्यादा सुकून भरा महसूस होता है।

अगर आप ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहां नेचर, संस्कृति और शांति का अनोखा मेल मिले, तो ये 7 छिपे हुए भारतीय डेस्टिनेशन आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। अगली बार छुट्टियों की योजना बनाते समय सिर्फ पॉपुलर डेस्टिनेशन ही नहीं, बल्कि इन अनदेखी जगहों को भी अपनी लिस्ट में शामिल करें। हो सकता है आपकी सबसे यादगार ट्रिप किसी ऐसी जगह पर हो, जिसके बारे में आपने सोशल मीडिया पर बहुत कम सुना हो।

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा