कल का मौसम: 12 सितंबर को इन 16+ राज्यों में बारिश का तांडव! बंगाल-बिहार से तमिलनाडु-आंध्र तक आंधी-तूफान का भी अलर्ट

September 12 Weather Forecast: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 12 सितंबर के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए देश के 16 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने वेदर सिस्टम्स की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां बेहद उग्र रहने वाली हैं। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर दक्षिण भारत के तटीय इलाकों तक भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक कई राज्यों में बिजली गिरने के साथ-साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की प्रबल आशंका जताई गई है।

देश के 16 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 12 सितंबर को मध्य भारत में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, जबकि पश्चिमी भारत में गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा और महाराष्ट्र के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर भारत में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का दौर बना रहेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण भारत के तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी भारी जलभराव और मूसलाधार पानी बरसने के आसार हैं।

तटीय आंध्र प्रदेश में थंडरस्क्वाल का खतरा, तमिलनाडु से विदर्भ तक तेज हवाएं

मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश के लिए विशेष रूप से गंभीर चेतावनी जारी की है, जहां अलग-अलग जगहों पर थंडरस्क्वाल आने का अनुमान है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी झोंके चल सकते हैं। दक्षिण और मध्य भारत के दूसरे हिस्सों में भी तूफानी हवाओं का असर रहेगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराइकल और विदर्भ में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

बिहार, झारखंड, बंगाल और राजस्थान में बिजली कड़कने और आंधी की आशंका

पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में भी आंधी-तूफान का असर देखा जाएगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, पूर्वी राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल व सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, कोंकण व गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, उत्तराखंड और पश्चिमी राजस्थान में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

आंध्र प्रदेश और केरल में उमस भरा मौसम, समुद्र में स्थिति खतरनाक

एक तरफ जहां देश के बड़े हिस्से में बारिश का तांडव देखने को मिलेगा, वहीं तटीय आंध्र प्रदेश और केरल व माहे के कुछ अलग-अलग जगहों पर टेंप्रेचर में उछाल के साथ गर्म और अत्यधिक उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। समुद्री क्षेत्रों में चक्रवाती हवाओं के जोर की वजह से स्थितियां खतरनाक बनी रहेंगी। अरब सागर में सोमालिया तट के साथ और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर के इलाकों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

बंगाल की खाड़ी में उत्तरी आंध्र प्रदेश तट और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके आने की आशंका है। खराब समुद्री स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने तटीय और गहरे समुद्र में जाने वाले मछुआरों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

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El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा