स्मृति मंधाना के रिकॉर्ड 124 रन के आधे रन भी नहीं बना पाई हॉंगकॉंग की टीम

Smriti Mandhana

सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के तेजतर्रार शतक के बाद दीप्ति शर्मा की अगुआई में गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन से भारत ने महिला एशिया कप टी20 क्रिकेट टूर्नामेंट के ग्रुप ए मैच में बृहस्पतिवार को यहां हांगकांग पर 137 रन की एकतरफा जीत के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

भारत के 194 रन के कड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए हांगकांग की टीम ऑफ स्पिनर दीप्ति शर्मा (नौ रन पर तीन विकेट), तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा (छह रन पर दो विकेट), लेग लेग स्पिनर प्रेमा रावत (12 रन पर दो विकेट) और बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी (16 रन पर दो विकेट) की धारदार गेंदबाजी के सामने 16.2 ओवर में सिर्फ 56 रन पर ढेर हो गई।

 हांगकांग ने अपने अंतिम छह विकेट सिर्फ चार रन पर गंवाए।हांगकांग की ओर से कप्तान नताशा माइल्स ने सर्वाधिक 15 रन बनाए। उनके अलावा सिर्फ मरीना लैमप्लो (14) और यास्मिन दसवानी (11) की दोहरे अंक में पहुंच सकी। स्मृति ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी के दौरान 64 गेंद में 14 चौकों और सात छक्कों से 124 रन की पारी खेलने के अलावा शेफाली वर्मा (28) के साथ पहले विकेट के लिए आठ ओवर में 74 रन जोड़े जिससे भारत ने पांच विकेट पर 193 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया।

हांगकांग की ओर से ऑफ स्पिनर मरीना लैमप्लो सबसे सफल गेंदबाज रहीं जिन्होंने 46 रन देकर दो विकेट चटकाए। रुचिता वेंकटेश और जॉयलीन कौर ने भी एक-एक विकेट चटकाया।भारत अपना अंतिम ग्रुप मैच शनिवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।लक्ष्य का पीछा करने उतरे हांगकांग की शुरुआत बेहद धीमी रही और टीम पावर प्ले में मारिको हिल (00) का विकेट गंवाकर 16 रन ही बना सकी। मारिको को नंदिनी शर्मा ने बोल्ड किया।

पावर प्ले के छह ओवर में हांगकांग की ओर से सिर्फ दो बाउंड्री लगी जब यास्मिन ने छठे ओवर में श्री चरणी पर दो चौके मारे।नताशा ने सातवें ओवर में दीप्ति पर अपना पहला चौका जड़ा।दीप्ति ने दसवानी (11) को मिडविकेट पर भारती फुलमाली के हाथों कैच कराया जबकि प्रेमा ने नताशा (15) को विकेटकीपर ऋषा घोष के हाथों कैच कराके हांगकांग का स्कोर 10वें ओवर में तीन विकेट पर 31 रन किया।

लेग स्पिनर प्रेमा ने अपने अगले ओवर में कैरी चान (01) को भी शेफाली के हाथों कैच करा दिया।नंदिनी ने इसके बाद मरयम बिबी (07) को पवेलियन भेजा जिससे हांगकांग की आधी टीम 14वें ओवर में सिर्फ 52 रन तक पवेलियन लौट चुकी थी।श्री चरणी ने मरीना (14) को प्रतिका रावल के हाथों कैच कराके हांगकांग को छठा झटका दिया।

हांगकांग को अंतिम पांच ओवर में जीत के लिए 139 रन की दरकार थी और उसकी टीम इस स्कोर के आसपास भी नहीं पहुंच सकी।दीप्ति शर्मा ने एलिसन सियू (01) और इकरा सहर (00) को चार गेंद के भीतर आउट किया। इसी ओवर में जॉयलीन कौर (01) भी रन आउट हुईं।श्री चरणी ने शहजीन शहजाद (02) को ऋचा के हाथों के स्टंप कराके हांगकांग की पारी का अंत किया।

टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरे भारत को स्मृति और शेफाली की जोड़ी ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने पावर प्ले में 60 रन जोड़कर भारत के बड़े स्कोर का मंच तैयार किया।स्मृति ने पांचवें ओवर में तेज गेंदबाज मरयम बिबी पर तीन चौके मारे जबकि शेफाली ने मरीना लैमप्लो के अगले ओवर में दो चौके और दो छक्के जड़कर अपने तेवर दिखाए।स्मृति ने रुचिता वेंकटेश पर भी लगातार दो चौके मारे लेकिन इसी ओवर की अंतिम गेंद पर मरीना ने लॉन्ग ऑन पर शेफाली का शानदार कैच लपका। उन्होंने 17 गेंद की अपनी पारी में तीन चौके और दो छक्के मारे।

स्मृति ने इकरा सहर की लगातार गेंदों पर छक्के और चौके के साथ 40 गेंद में अर्धशतक पूरा किया और 11वें ओवर में टीम का स्कोर 100 रन के पार पहुंचाया।स्मृति ने कैरी चान पर भी छक्का जड़ा लेकिन प्रतिका रावल (10) ने तेज गेंदबाज जॉयलीन कौर की पहली ही गेंद पर प्वाइंट पर मरयम को कैच थमा दिया।ऑफ स्पिनर मरीना ने इसके बाद अपनी ही गेंद पर ऋचा घोष (11) का शानदार कैच लेकर भारत को तीसरा झटका दिया।

स्मृति ने मरीना पर चौके के साथ 57 गेंद में अपना दूसरा शतक पूरा किया। उन्होंने ऑफ स्पिनर रुचिता पर लगातार तीन छक्कों के साथ अपने करियर के पिछले सर्वश्रेष्ठ स्कोर को पीछे छोड़ा।कप्तान हरमनप्रीत कौर भी सिर्फ 10 रन बनाने के बाद मरीना की गेंद पर डीप स्क्वायर लेग पर जॉयलीन को कैच दे बैठीं।स्मृति भी पारी के अंतिम ओवर में स्ट्राइक पर आने के लिए तेजी से रन लेने की कोशिश में रन आउट हो गईं।

दीपोत्सव से सजेगी रामनगरी, 5 से 8 नवंबर तक होंगे भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

दीपोत्सव से सजेगी रामनगरी, 5 से 8 नवंबर तक होंगे भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

 

योगी सरकार में अपनी विशेष पहचान बना चुका अयोध्या का 10वां दीपोत्सव इस बार और भव्य होगा। दीपोत्सव और कार्तिंक पूर्णिमा मेला को भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों आयोजनों की विभागवार तैयारियों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

पांच से आठ नवंबर तक होंगे दीपोत्सव के प्रमुख आयोजन

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पांच नवंबर को गोवत्स द्वादशी, छह नवंबर को धनत्रयोदशी, सात नवंबर को मास शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली एवं हनुमान जयंती और आठ नवंबर को दीपावली के अवसर पर रामनगरी में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम होंगे। दीपोत्सव के दौरान साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा और झांकियां निकाली जाएंगी। इसके लिए ट्रॉली-ट्रक, मंच समेत अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। रामकथा पार्क के निकट हेलीपैड की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
 

रामकथा पार्क से राम की पैड़ी तक दिखेगी दीपोत्सव की छटा

रामकथा पार्क में श्रीराम-सीता स्वरूप की वंदना, प्रदर्शनी, लोकार्पण कार्यक्रम, रामलीला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। सरयू आरती स्थल पर मंच, सजावट, पुष्प एवं अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। राम की पैड़ी समेत प्रमुख स्थलों को दीपोत्सव की थीम पर सजाया जाएगा। स्वर्ग द्वार की पुताई, राम की पैड़ी की विशेष सफाई, धार्मिक स्थलों पर दीप सज्जा, फूलों की चेन, गमले, घाटों की रैलिंग और लाइटिंग की मरम्मत समेत विभिन्न कार्य कराए जाएंगे।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष जोर

देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परिवहन, विश्राम स्थल, चिकित्सा, पेयजल, शौचालय, सफाई और प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए फ्लोटिंग जोन, बैरियर, सीसीटीवी और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। मीडिया सेंटर और प्रेस पास की व्यवस्था भी की जाएगी।
 

18 नवंबर को चौदहकोसी, 20 को पंचकोसी परिक्रमा

परिक्रमा एवं कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए भी तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 नवंबर 2026 को चौदहकोसी परिक्रमा एवं अक्षय नवमी होगी। परिक्रमा 17/18 नवंबर की रात 1:10 बजे से शुरू होकर 18/19 नवंबर की रात 2:55 बजे तक चलेगी। 20 नवंबर को पंचकोसी परिक्रमा एवं एकादशी होगी। यह 20 नवंबर की रात 3:01 बजे से शुरू होकर 21 नवंबर की रात 2:37 बजे तक चलेगी।‌24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा स्नान एवं गुरु नानक जयंती का आयोजन होगा। स्नान का निर्धारित समय 23 नवंबर की रात 10:48 बजे से 24 नवंबर की रात 8:52 बजे तक रहेगा।

 

अतिरिक्त बसें और विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारी

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसों, अस्थायी बस स्टैंड और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्टेशन पर सफाई, पेयजल, प्रकाश और बैरियर की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। पार्किंग स्थलों का चयन कर यातायात और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। पुलिस विभाग पर्याप्त बल के साथ जल पुलिस, मोटर बोट, अग्निशमन दल और ट्रैफिक व्यवस्था संभालेगा। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि दीपोत्सव और परिक्रमा-कार्तिक पूर्णिमा मेला अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख आयोजन हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित कार्य समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबी हुई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूर्व से पहले शहर की धड़कनों में भक्ति का उल्लास और गहरा होता जा रहा है। मंदिरों की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और गलियों-चौराहों पर गूंजते राधे-कृष्णा के जयकारों के बीच आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।

 

शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को मनोहारी छटा दिखाई दी, मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु और स्थानीय लोग देर तक कलाकारों की प्रस्तुतियों में रमते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े तो मानो ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत सड़कों पर जीवंत हो उठी।

 

ढोल-मृदंग की थाप, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और कलाकारों के मनमोहक नृत्य ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। संगीत की लय बढ़ी तो श्रद्धालुओं के कदम भी थिरकने लगे। कोई हाथ उठाकर जयकारे लगा रहा था तो कोई कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच भक्ति में झूमता नजर आया। पूरे मार्ग पर बार-बार 'राधे-राधे' और 'श्रीकृष्ण' के जयघोष गूंजते रहे।

 

सड़कें बनीं ब्रज संस्कृति का मंच

 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान से आगे बढ़ी शोभायात्रा के दौरान ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा।

 

जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनता दिखाई दिया। भक्ति और संस्कृति के इस मिलन ने शोभायात्रा को महज धार्मिक आयोजन न रहकर ब्रज की जीवंत विरासत का उत्सव बना दिया।

 

जन्माष्टमी के लिए सज रही कृष्ण की नगरी

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रमुख मंदिरों, बाजारों और मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रात होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए शहर का दृश्य देखते ही बन रहा है।

 

हर तरफ कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता है, मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारियां चल रही हैं तो बाजार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से शहर का माहौल लगातार भक्तिमय होता जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट

 

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वृंदावन पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन और जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि जन्माष्टमी के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

 

हर ओर बस कृष्ण भक्ति का रंग

 

मथुरा में जन्माष्टमी का उल्लास अब केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक हर जगह कृष्ण भक्ति की छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा ने इस उत्साह को नई ऊंचाई दे दी।

 

ब्रज की लोक संस्कृति से सजे कलाकार, ढोल-मृदंग की थाप पर थिरकते श्रद्धालु और गूंजते जयकारों के बीच ऐसा लगा मानो पूरी मथुरा नगरी स्वयं कान्हा के स्वागत में निकल पड़ी हो। जन्माष्टमी से पहले ही कान्हा की नगरी में उत्सव का रंग गहरा हो चुका है, हर ओर भक्ति है, हर कदम पर उल्लास है और हर जुबां पर बस एक ही नाम है..श्रीकृष्णा, श्रीकृष्णा।

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है। ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना। भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई। इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है, 5 पॉइंट में समझें… तेल: भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और खरीद मुश्किल हो सकती है। चाबहार पोर्ट: ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की रणनीतिक और कारोबारी रुचि है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ सकता है। डॉलर में भुगतान: अगर ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगते हैं, तो डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी नियमों का पालन करना पड़ सकता है। कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने को कह सकता है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर फैसला करेगा। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्‍कृति विभाग के श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्‍मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।  

 

राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 

 

राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

 

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं। 

 

कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ-‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे। 

 

नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन-उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा। 

 

सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक-उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत-महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग-पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है। 

 

जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग-महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

 

प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग-श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा। 

 

1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी-‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।

 

 

Janmashtami 2026: 4 सितंबर को जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, जानें देश के अलग-अलग हिस्सों में क्या है जन्माष्टमी का पर्व मनाने का तरीका

Janmashtami 2026: हजारों साल पहले द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के भक्त श्रद्ध और उल्लास से उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन देश ही नहीं पूरी दुनिया के कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट, पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास करते हैं और अपने घरों में कृष्ण लीला की झांकियां सजाते हैं और मध्य रात्रि श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। वैसे इस पर्व को देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाने की अलग-अलग परंपरा है। आइए जानें इसके बारे में

मध्यरात्रि पूजा कृष्ण के जन्म का प्रतीक

जन्माष्टमी के त्योहार का सबसे अहम हिस्सा है मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था, जब उनके माता-पिता, देवकी और वासुदेव, राजा कंस द्वारा कैद किए गए थे। इसलिए भक्त दिन में व्रत रखते हैं और उनकेा जन्मोत्सव मनाते हैं। यह उत्सव मथुरा और वृंदावन में खास तौर पर बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

कृष्ण के चरण चिह्न से सजाते हैं घर

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लोग अपने घरों को साफ करते हैं और सजाते हैं। पूजा के कमरे की ओर जाने वाले दरवाजे से अक्सर चावल के आटे से छोटे पैरों के निशान बनाते हैं। छोटे पैर बाल कृष्ण के घर में आने को दिखाते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है, जिससे भक्त प्रभु के बाल स्वरूप की लीला का आनंद लेते हैं।

महाराष्ट्र में होती दही हांडी प्रतियोगिता

कृष्ण का मक्खन और दही के लिए प्रेम सभी जानते हैं। भारत के महाराष्ट्र राज्य में जन्माष्टमी के मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। दही हांडी में गोविंदा नाम के नौजवानों के ग्रुप ह्यूमन पिरामिड बनाते हैं और जमीन से बहुत ऊपर लटके एक मटके तक पहुंचकर उसे तोड़ते हैं। मटके में पारंपरिक रूप से दही, मक्खन, दूध और दूसरी चीजें होती हैं।

केरल में मटकी फोड़ने की है परंपरा

केरल में जन्माष्टमी पर्व पर मटकी फोड़ने की परंपरा है। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान, स्थानीय लोग उरियाडी मनाते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग प्रसाद से भरे मिट्टी के मटके को जमीन से ऊपर लटकाकर फोड़ने की कोशिश करते हैं। केरल में जन्माष्टमी पर्व को अष्टमी रोहिणी के नाम से जाना जाता है।

तमिलनाडु में कृष्ण का स्वागत छोटे पैरों और त्योहार के खाने से होता है

तमिलनाडु में, कृष्ण जन्माष्टमी को गोकुलाष्टमी या कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। इसमें घरों को कोलम से सजाया जाता है। यहां भी लोग अपने घरों में बाहर से अंदर आते हुए बाल कृष्ण के छोटे पैरों के निशान बना सकते हैं। साथ ही, इस दिन घरों में श्री कृष्ण के लिए पारंपरिक प्रसाद और भोग तैयार किया जता है।

जन्माष्टमी में छप्पन भोग का प्रसाद

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन का पर्व 56 भोग के बिना अधूरा है। छप्पन भोग, जिसका मतलब है 56 खाने की चीज़ें, कई परंपराओं में कृष्ण को चढ़ाई जाती हैं। इसमें मिठाई, नमकीन, फल और डेयरी से बनी चीजें शामिल हो सकती हैं। मक्खन स्वाभाविक रूप से एक खास जगह रखता है क्योंकि कृष्ण को माखन से बहुत प्यार है।

कृष्ण भक्ति के केंद्र मथुरा और वृंदावन

कुछ ही जगहें कृष्ण जन्माष्टमी से इतनी करीब से जुड़ी हैं जितनी मथुरा और वृंदावन। पारंपरिक रूप से मथुरा को कृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है, जबकि वृंदावन में कृष्ण की बाल लीलाओं और युवावस्था की ढेरों कहानियां मौजूद हैं। जन्माष्टमी के दौरान, ब्रज क्षेत्र के मंदिरों और सड़कों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है।

कृष्ण की कहानियों को मंच पर लाती है रास लीला

जन्माष्टमी सिर्फ मंदिर के रीति-रिवाजों के बारे में नहीं है। यह कहानी सुनाने का भी त्योहार है। रास लीला और कृष्ण लीला के प्रदर्शन में कृष्ण के जीवन के किस्से फिर से दिखाने के लिए संगीत, नृत्य, संवाद और शानदार वेशभूषा का इस्तेमाल किया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन क्षेत्र से जुड़ी है, जबकि कृष्ण-केंद्रित प्रदर्शन परंपराएं मणिपुर और असम जैसी जगहों पर भी महत्वपूर्ण हैं।

अरनमुला में बड़े शाकाहारी भोज के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है

केरल के अरनमुला में, जन्माष्टमी अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में अष्टमी रोहिणी वल्ला सद्या से जुड़ी है। सांपों वाली नावें, जिन्हें पल्लियोडम कहा जाता है, मंदिर पहुंचती हैं, जहां नाविक केले के पत्तों पर परोसे गए बड़े शाकाहारी भोजन में शामिल होने से पहले रस्मों में हिस्सा लेते हैं। नाविक वांची पाट्टू गाते हैं, और सामूहिक भोजन दिन के बड़े उत्सव का हिस्सा बन जाता है।

एक त्योहार, मनाने के कई तरीके

जन्माष्टमी का पर्व मनाने का पूरे भारत में एक कारण है। लेकिन यह देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है। कृष्ण का जन्मदिन लोगों को अलग-अलग तरीकों से एक साथ लाता रहता है। परंपराएं राज्य दर राज्य बदल सकती हैं, लेकिन कृष्ण का स्वागत करने की खुशी उन सभी के केंद्र में रहती है।

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आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

Yogi adityanath

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के लगभग लगभग पांच लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बड़ी सौगात दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद अब नियोक्ता द्वारा न आउटसोर्स कर्मियों का शोषण हो पाएगा और न ही उनके साथ अन्याय हो पाएगा। पहली बार सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही इससे सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। पांच साल में रिवीजन होगा। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में नियोक्ता का मनमानापन भी नहीं चल पाएगा। 

मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी कॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की। यूपी कॉस पोर्टल से आउटसोर्स निगमकर्मियों को बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके जरिए ऑनलाइन माध्यम से भर्ती व जॉइनिंग प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी। समय पर मानदेय व सरकारी लाभ के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की पूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे उपस्थिति की सटीक जानकारी व छुट्टी का प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यहां शिकायत और समाधान की भी सुविधा होगी। समय पर ईपीएफ अंशदान व ईएसआईसी का लाभ सुनिश्चित होगा। पोर्टल पर विभाग, एजेंसी और आउटसोर्सकर्मियों के लिए एक ही मंच होगा। 

एमओयू का किया गया हस्तांतरण

भारतीय स्टेट बैंक के साथ आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाले लाभ व सामाजिक सुरक्षा के लिए एसबीआई के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। 

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए चेक 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी वितरित किए। इस दौरान लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सीएम के हाथों इन्हें मिला चेक- 

  • रोहित कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • कसिन खान- रात्रि चौकीदार- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • सरिता-सफाई कर्मी- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • आशु कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • अरविंद कुमार यादव- वाहन चालक- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • रामकुमार- माली- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • जितेंद्र प्रसाद- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
  • राजू कन्नौजिया- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • हंसराज सिंह- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • दिलीप कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • अंजनी कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
  • नरेंद्र तिवारी- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ ।

बेटियों की प्रतिभा को मंच, सपनों को पंख दे रही योगी सरकार

बेटियों की प्रतिभा को मंच, सपनों को पंख दे रही योगी सरकार

प्रदेश की बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को लखनऊ के खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में राज्य स्तरीय युवा महोत्सव हौसलों की उड़ान-2026 का आयोजन किया गया। 

 

बेटियों के आत्मविश्वास को मिल रहा सरकार का संबल

 

इस दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने छात्राओं से संवाद कर उनकी प्रतिभा एवं उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों में प्रतिभा के साथ आत्मविश्वास भी भरपूर है। शिक्षा के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी बढ़ती भागीदारी इसका प्रमाण है। बेटियां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार हैं। 

 

अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की राह हुई आसान

 

योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत माध्यम बन रही है। खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में संचालित अभ्युदय योजना के तहत अब तक 80 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन हो चुका है। यह उपलब्धि योजना के प्रभाव और छात्राओं की मेहनत दोनों को दर्शाती है।

 

अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब से मिलेगा डिजिटल संसाधनों का लाभ

 

मंत्री असीम अरुण ने घोषणा की कि अभ्युदय कोचिंग को और प्रभावी बनाने के लिए कॉलेज में जल्द ही अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं छात्राओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट और डिजिटल रिसर्च जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधन भी उपलब्ध हों, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भर बन सकें।

किसी ने 12वीं के साथ किया नीट, किसी ने नीट और जेईई मैन्स दोनों, प्रतिभा देख प्रभावित हुए सीएम डॉ. मोहन यादव

किसी ने 12वीं के साथ किया नीट, किसी ने नीट और जेईई मैन्स दोनों, प्रतिभा देख प्रभावित हुए सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल। स्कूली छात्रों के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद खास रहा। इन छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इतना प्रभावित किया कि वे बच्चों की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। इन स्कूली छात्रों की प्रतिभा देख लोग हैरान थे और हर बात पर तालियों से उनका स्वागत कर रहे थे। सीएम डॉ. यादव जिन छात्रों से मिले, उनमें से कुछ बच्चों ने तो 12वीं के साथ-साथ नीट और जेईई मैन्स भी क्लीयर कर लिया था। ये सुनकर प्रदेश के मुखिया ने खुद बच्चों के लिए तालियां बजवाईं।

मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित 'प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना' कार्यक्रम का। कार्यक्रम के तहत सीएम डॉ. यादव ने 12वीं में 75% से ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया। उन्होंने 1 लाख 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़  रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की। इस तरह हर विद्यार्थी के खाते में 25-25 हजार रुपये आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप प्रदान किए। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सीएम डॉ. यादव ने विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन क्लिक करवाकर रुपये ट्रांसफर कराए।

 

गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर ही विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि मैं राजनेता बनना चाहता हूं। इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह भी हमारे लिए जरूरी है। बच्चे राजनेता बनकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में बुंदेला ने कहा कि मैंने लोगों की परेशानी देखी है। एक राजनेता उन परेशानियों को दूर कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब मैंने देखा कि कोई राजनीति नहीं करना चाहता, तो मैंने फैसला किया कि मैं वो करूंगा जो कोई नहीं करना चाहता। मैं देश का विकास करना चाहता हूं। उसके बाद सीएम डॉ. मोहन ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन-कौन किसान बनना चाहता है।

उन्होंने छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद कहा कि हमारी जड़ खेती-किसानी है। बच्चे कहते हैं डॉक्टर बनेंगे, वकील बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, लेकिन कोई नहीं कहता कि मैं किसान बनना चाहता हूं। आप बताइए खेती के बिना काम चलेगा क्या। उन्होंने कहा कि किसान अगर मेहनत करके अन्न नहीं उगाएगा, तो क्या होगा। इसी तरह अगर हम राजनीति करने के लिए खड़े नहीं होंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि मैं शुरूआत एयर होस्टेस बनकर करना चाहती हूं, लेकिन मेरा अंतिम उद्देश्य एंटरप्रिन्योर बनना है। आज कॉम्पटीशन ज्यादा है। इसलिए अपना काम करना ही उचित होगा। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि इसे सरल भाषा में कहा जाता है कि हम नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे। इस बीच पूरा हॉल हिमांशी की उस बात पर ठहाकों से गूंज उठा, जब उसने कहा कि मैंने इस दृश्य को सपने में देखा है। मैंने देखा था कि इसी तरह का हॉल है और मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर हूं। 

 

बच्चे छोटे, लेकिन सपने और प्रयास बड़े हैं-छात्रा मान्यता साहू ने कहा कि मैं इस लैपटॉप से बहुत काम करूंगी। ये लैपटॉप मेरी बहुत मदद करेगा। अरिमा इमरान ने कहा कि मैं नीट का एग्जाम दूंगी और मेरा उद्देश्य डॉक्टर बनना है। मैं गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। उसके बाद कीर्ति ने माइक हाथ में थामा। उसके हाथ में लगी मेहंदी देखकर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि मैं भी मेहंदी लगा लेता हूं। अपनी बहन को मैं ही मेहंदी लगाता था। कीर्ति ने कहा कि मैं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट में करियर बनाना चाहती हूं।

इसके बाद तन्वी ने माइक थामा। उसके माइक पकड़ते ही सीएम डॉ. मोहन ने सभी को बताया कि तन्वी 12वीं की पढ़ाई करते-करते मेडिकल कॉलेज भी पहुंच गई है। उसने नीट भी क्लीयर कर लिया। पहली बार में ही दोनों एग्जाम क्लीयर कर लिए। तन्वी ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। याशी ने 75 फीसदी नहीं लाने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उसने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है। उसके बाद ओम चौकसे ने बताया कि मैंने 12वीं के साथ-साथ नीट-जेईई मैन्स-सीयूएलटी भी क्लीयर किया है। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि आदमी छोटा लेकिन छलांग बड़ी है। ओम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। सीएम डॉ. मोहन ने बताया कि ओम के पिता जी बैग बनाकर दुनिया चलाते हैं। उनके पास दुकान भी नहीं है। अभिषेक ने बताया कि वह इसरो का साइंटिस्ट बनना चाहता है। 

 

असफलता को न लगाएं दिल से-कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है विद्यार्थी अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त कर परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाते हैं। सफलता को कभी स्वयं पर हावी नहीं होने देना है। अगर जीवन में कभी असफलता मिले तो उसे कभी दिल पर नहीं लगाना। हम जहां हैं, वहीं सामान्य बने रहें और हमेशा मन में आगे बढ़ने का जज्बा कायम रखें। हमें अपनी पिछली गलतियों से सबक भी लेना चाहिए, क्योंकि एक अच्छा इंसान कागज पर मिले नंबरों से नहीं बनता, अच्छा इंसान मन के अंदर से बनता है। देश युवाओं को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है।

मध्यप्रदेश सरकार भी इस विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर साथ चल रही है। आपकी नॉलेज (ज्ञान) और स्किल (कौशल) ही सफलता के दो मित्र हैं। नॉलेज जीवन का साथी है और स्किल जीवन में दक्षता लाती है। दोनों हमारे जीवन में सदैव मददगार सिद्ध होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना अंतर्गत पहले वर्ष 473 बच्चों को लैपटॉप दिए थे। पिछले साल लगभग 92 हजार और इस वर्ष स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए हैं। मप्र बोर्ड की परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से आते हैं। सीमित संसाधनों के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग ने उत्कृष्ट कार्य कर दिखाया है। इसके लिए सभी अधिकारी और शिक्षक बधाई के पात्र हैं।

 

बेहतर शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिलाने वाले शासकीय स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्मानित किया है। इनके कार्यों के स्कूल शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार गौरवान्वित होती है और सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हम अपनी समृद्धि और अतीत का गौरवशाली पृष्ठ दोबारा खोलने जा रहे हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें अपने मन में संकल्प और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता है। बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए परिश्रम करें।

दुनिया में भारत का बढ़ता सम्मान हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरका स्कूल शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, साइकिलें, लैपटॉप और स्कूटी भी प्रदान की जा रही हैं। लेकिन, प्रदेश के स्कूलों में कभी वह दौर भी था, जब बच्चों को स्कूलों में बैठने तक के इंतजाम नहीं हुआ करते थे। हमारी सरकार ने तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खोलने प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में आजादी के बाद 55 साल में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब हमारी सरकार में निजी और शासकीय मिलाकर कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। राज्य में अभी साढ़े 6 हजार से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं। दो साल में हमने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोले। इनमें यूजी के लिए 2400 सीटें बढ़ गईं। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी सीटों का लक्ष्य तय किया है।

 

सरकारी में शून्य हुआ ड्रॉप आउट-स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था बेहतर हो रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लैपटॉप राशि दी जा रही है। पिछले साल भी लगभग 92 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए थे। माता-पिता और बच्चों का परिश्रम तथा शिक्षकों का बेहतर प्रबंधन के कारण ही इस वर्ष 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थी लैपटॉप प्राप्त करने के लिए पात्र बने हैं। यह लैपटॉप विद्यार्थियों की कॉलेज की पढ़ाई को सरल और डिजिटल करेगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित किया गया है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई साल में लगभग पौने 3 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि वितरित की है। लैपटॉप खरीदने के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक कुल साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए विद्यार्थियों के खातों में भेजे गए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल में प्रवेश दर बढ़ती जा रही है। हमारी सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। स्कूलों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। हमारे स्कूलों में 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। राज्य सरकार लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चे हमारे देश का भविष्य और प्रदेश की आशा हैं। हमारे बच्चे 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे।