जबलपुर रॉयल लायंस के Player Development Program के खिलाड़ी वेदांत अवस्थी MPL 3 में चमके

Vedant Awasthi

लगातार चार मैचों में अजेय रहने वाली जबलपुर रॉयल लायंस (JRL) की टीम ने यह साबित कर दिया है कि मध्य प्रदेश क्रिकेट लीग के 'प्लेयर डेवलपमेंट प्रोग्राम' (PDP) के माध्यम से जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को चुनना टीम के लिए एक बड़ा फायदेमंद सौदा साबित हुआ है। अनुभवी खिलाड़ियों और ऊर्जावान नए चेहरों के बेहतरीन मिश्रण वाली जेआरएल की टीम ने लीग को वेदांत अवस्थी के रूप में एक होनहार नया खिलाड़ी दिया है। वेदांत एक शानदार हिटर साबित हुए हैं और उन्होंने टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रन बनाए हैं।

चौथे मैच में, जब टीम 224 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही थी, तब वेदांत ने मात्र 34 गेंदों में 60 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। प्लेयर डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से टीम में चुने गए वेदांत ने इंदौर और जबलपुर में आयोजित चयन ट्रायल्स के 4 चरणों को पार करके जेआरएल टीम में अपनी जगह बनाई है। वेदांत और प्रिंस वाधवानी, दोनों ही पीडीपी (PDP) के खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टीम में जगह बनाकर राज्य स्तरीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है।

प्लेयर डेवलपमेंट प्रोग्राम से मिले फायदे के बारे में बात करते हुए वेदांत अवस्थी ने कहा: “मेरे जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए जमीनी स्तर से अपनी पहचान बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, और हमारे लिए पीडीपी जैसे कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। चयन प्रक्रिया बहुत कठिन थी, जिसमें कई दौर के ट्रायल्स शामिल थे, लेकिन अगर आपमें काबिलियत है, तो आपको मौका जरूर मिलता है। जेआरएल का हिस्सा बनना मेरे लिए एक शानदार अहसास है। मुझे खुशी है कि मैं टीम के लिए योगदान दे पाया हूँ, खासकर बड़े रनों का पीछा करते समय।”

जबलपुर रॉयल लायंस के डायरेक्टर लव मलिक ने कहा: “जेआरएल स्थानीय प्रतिभाओं को टीम का हिस्सा बनने का अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह लगातार दूसरा सीजन है जब हमने प्लेयर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत राज्य के खिलाड़ियों के लिए ट्रायल्स आयोजित किए हैं। क्षेत्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तलाशने और उन्हें राज्य स्तरीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका देने की यह एक बेहतरीन पहल है। कई खिलाड़ियों के लिए यह उनके करियर की शुरुआत है। हमारे पिछले सीजन के कई खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय लीग में अच्छे प्रदर्शन के बाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में चुना गया है। इन युवा खिलाड़ियों का समर्थन करके हमें बेहद खुशी हो रही है।”

Visa के कारण मां नहीं थीं साथ, रो पड़ा 40 साल का गोलकीपर, 90 मिनट में 50 हजार से 50 लाख पहुंचे Followers

Vozinha Cape Verde : FIFA World Cup 2026 में बड़े उलटफेर और रोमांचक मुकाबले तो देखने को मिल रहे हैं, लेकिन केप वर्डे (Cape Verde) के गोलकीपर वोजिन्हा (Vozinha) की कहानी ने दुनियाभर के फुटबॉल फैंस का दिल छू लिया है। Spain जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 0-0 का ऐतिहासिक ड्रॉ कराने वाले 40 वर्षीय गोलकीपर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बन गए। मैच शुरू होने से पहले जिन्हें मुश्किल से कुछ हजार लोग जानते थे, वही खिलाड़ी कुछ घंटों के अंदर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

 

 स्पेन के 27 हमले, लेकिन नहीं टूटी वोजिन्हा की दीवार

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अटलांटा में खेले गए मुकाबले में स्पेन ने लगातार आक्रमण किए। बॉल पजेशन से लेकर गोल पर शॉट्स तक लगभग हर आंकड़े में स्पेन आगे था। स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम बार-बार गोल करने के करीब पहुंची, लेकिन हर बार सामने वोजिन्हा खड़े थे। उन्होंने पूरे मैच में 7 शानदार सेव किए और स्पेन को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया। युवा स्टार Lamine Yamal के मैदान पर आने के बाद भी केप वर्डे का गोलपोस्ट सुरक्षित रहा। आखिरकार मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ और यह नतीजा वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी Underdog कहानियों में शामिल हो गया।

 मैच के बाद छलक पड़े आंसू, मां स्टेडियम तक नहीं पहुंच सकीं

 

जैसे ही अंतिम सीटी बजी, वोजिन्हा भावुक हो गए। मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया। दरअसल, यह सिर्फ एक शानदार प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना था जिसका इंतजार उन्होंने करीब चार दशक तक किया था।

मैच के बाद बातचीत में वोजिन्हा ने बताया कि वह चाहते थे कि उनकी मां इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनें, लेकिन VISA और आर्थिक कारणों की वजह से वह अमेरिका नहीं पहुंच सकीं। टिकट बुक थे, तैयारी भी पूरी थी, लेकिन समय पर वीज़ा नहीं मिल पाया। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा भावुक कर रही थी।

 

दादी-दादा ने पाला, वहीं से मिला 'वोजिन्हा' नाम

 

बहुत कम लोग जानते हैं कि वोजिन्हा उनका असली नाम नहीं है। उनका पूरा नाम जोसिमार जोसे एवोरा डायस (Josimar José Évora Dias) है। बचपन में उनके पिता सेना में थे और मां काम में व्यस्त रहती थीं, इसलिए उनकी परवरिश मुख्य रूप से दादा-दादी ने की।

 

'वोजिन्हा' पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “छोटी दादी” या “दादी मां”। बचपन में साथी बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे कि हारने या रोने के बाद वह अपने दादा-दादी के पास शिकायत करने चले जाते हैं। इसी वजह से उन्हें 'वोजिन्हा' कहकर बुलाया जाने लगा। शुरुआत में उन्हें यह नाम पसंद नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया। आज यही नाम दुनिया भर में उनकी पहचान बन चुका है।

 

25 साल की उम्र में बने प्रोफेशनल, 40 में मिला वर्ल्ड कप का मंच

 

जहां अधिकांश फुटबॉल खिलाड़ी किशोरावस्था में ही प्रोफेशनल फुटबॉल खेलने लगते हैं, वहीं वोजिन्हा ने 25 साल की उम्र में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने अंगोला, मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल के क्लबों में खेलते हुए अपना सफर जारी रखा। 2012 में राष्ट्रीय टीम से जुड़े और कई बार रिटायरमेंट का भी विचार आया, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का सपना उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

40 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार वर्ल्ड कप में डेब्यू किया और इतिहास रच दिया। वह टूर्नामेंट में डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपरों में शामिल हो गए।

 

 कुछ घंटों में 50 हजार से पहुंच गए 50 लाख followers

 

स्पेन के खिलाफ मैच से पहले वोजिन्हा के Instagram पर करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया ने उनकी शानदार गोलकीपिंग देखी, सोशल मीडिया पर उन्हें फॉलो करने वालों की बाढ़ आ गई। कुछ ही घंटों में उनकी फॉलोअर संख्या लाखों में पहुंच गई और बाद में 50 लाख के करीब जा पहुंची।

 

फुटबॉल स्टार्स, Experts और फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “केप वर्डे की चट्टान” और “वर्ल्ड कप का नया हीरो” कहने लगे।

 

 सपने पूरे होने में देर हो सकती है, लेकिन नामुमकिन नहीं

 

वोजिन्हा की कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सपनों की भी कहानी है। जिस खिलाड़ी ने 40 साल की उम्र में पहली बार वर्ल्ड कप खेला, उसने दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक को रोककर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शायद यही वजह है कि स्पेन के खिलाफ मिला यह ड्रॉ केप वर्डे के लिए किसी जीत से कम नहीं माना जा रहा।

वैभव सूर्यवंशी के कारण India A Tour को मिला ब्रॉडकास्टिंग पार्टनर

वैभव सूर्यवंशी की दीवानगी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल रही है और ऐसा लगता है कि इसने प्रसारक को अपनी रणनीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इंडिया ए टीम में उनके शामिल होने से लोगों में काफ़ी दिलचस्पी जागी है, जिसके चलते अधिकारियों ने श्रीलंका में होने वाली आगामी त्रिकोणीय श्रृंखला (जिसमें भारत, अफ़गानिस्तान और मेज़बान टीम शामिल हैं) का टीवी पर प्रसारण करने का फ़ैसला किया है।

इंडिया ए टीम की कप्तानी तिलक वर्मा कर रहे हैं, लेकिन इस सीरीज़ का आकर्षण 15 साल के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी हैं। उन्होंने हाल ही में खत्म हुए आईपीएल में ऑरेंज कैप की दौड़ में 776 रन बनाकर धूम मचा दी थी। उनकी मौजूदगी ने इस त्रिकोणीय श्रृंखला का रुतबा बढ़ा दिया है और अधिकारियों को इस पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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यह त्रिकोणीय श्रृंखला 9 से 21 जून तक चलेगी और इसका प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स और सोनी लिव पर किया जाएगा। श्रीलंका क्रिकेट के आधिकारिक प्रसारक पार्टनर के तौर पर, सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के पास श्रीलंका में खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों के प्रसारण के अधिकार हैं। नेटवर्क के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस टूर्नामेंट का सीधा प्रसारण पूरे कवरेज के साथ किया जाएगा। हाल के दिनों में सोनी क्रिकेट के मैचों से दूर रहा था। ऐसे में सोनी ने क्रिकेट जगत में छाए सूर्यवंशी के क्रेज़ का फ़ायदा उठाने का फ़ैसला किया है।

ज़ाहिर है, इंडिया और श्रीलंका के बीच होने वाली द्विपक्षीय सीरीज़ के प्रसारण के अधिकार भी सोनी के पास ही हैं। क्रिकबज की 18 मई की रिपोर्ट के अनुसार, यह सीरीज अगस्त महीने के दूसरे पखवाड़े में खेली जाएगी।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए सोनी नेटवर्क ने घोषणा की, “सूर्यवंशी एक्सप्रेस आ रही है, जो एक ज़बरदस्त ट्राई-सीरीज़ के मंच पर अपनी चमक बिखेरेगी।” यह एक दिवसीय त्रिकोणीय श्रृंखला होगी, जिसका आयोजन दाम्बुला में किया जाएगा। इस बीच, उन तीन टी 20 मैचों को लेकर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है, जिनके दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ में जोड़े जाने की उम्मीद है।

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हालाँकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और एसएलसी के बीच चल रही चर्चाओं से परिचित लोगों का मानना है कि तीन मैचों की टी 20 सीरीज़ को मंज़ूरी मिलने की संभावना काफ़ी ज़्यादा है। फ़िलहाल, इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है। हाल ही में, बीसीसीआई ने घोषणा की कि ऋतुराज गायकवाड़ उप-कप्तान रियान पराग की जगह लेंगे, जो अभी चोट से उबर रहे हैं।

सूर्यकुमार की छुट्टी? ‘रेडीमेड कप्तान है यह खिलाड़ी, 2022 से 2026 तक… हर बड़े मैच का हीरो

33 गेंद… 93 रन… 5 चौके… 9 आसमानी छक्के… और 281.81 का खतरनाक स्ट्राइक रेट!

धर्मशाला की ठंडी रात में रजत पाटीदार ने ऐसा तूफान उठाया कि गुजरात टाइटंस की पूरी टीम उड़ गई। आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-1 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान ने सिर्फ मैच नहीं जीता, बल्कि टीम इंडिया के दरवाजे पर जोरदार दस्तक दे दी। RCB लगातार दूसरी बार और कुल चौथी बार आईपीएल फाइनल में पहुंच चुकी है, और इस सफर के सबसे बड़े हीरो बने हैं रजत पाटीदार। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उन्हें टीम इंडिया में मौका मिलना चाहिए या नहीं… सवाल ये है कि क्या भारत को सूर्यकुमार यादव के बाद अपना अगला टी20 कप्तान मिल चुका है?

 

रजत सिर्फ रन नहीं बना रहे, वो मैच की दिशा बदल रहे हैं। जिस तरह उन्होंने विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल के आउट होने के बाद दबाव को मौके में बदला, उसने बता दिया कि ये खिलाड़ी बड़े मंच के लिए बना है। यही वजह है कि अब क्रिकेट एक्सपर्ट्स से लेकर फैंस तक हर कोई कह रहा है—“रजत पाटीदार को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

 

 


 

 1. मिडिल ऑर्डर का सबसे खतरनाक मैच फिनिशर

 

टीम इंडिया लंबे समय से ऐसे बल्लेबाज की तलाश में है जो नंबर 4 या 5 पर आते ही मैच का टेम्पो बदल दे। रजत पाटीदार वही खिलाड़ी साबित हो रहे हैं।

 

आईपीएल 2026 में उनका स्ट्राइक रेट 200 के करीब रहा। वो उन बल्लेबाजों में नहीं हैं जो 30-40 गेंदें खेलकर सेट होते हैं। रजत आते ही गेंदबाजों पर हमला बोलते हैं। गुजरात के खिलाफ 33 गेंदों में नाबाद 93 रन की पारी हो, मुंबई के खिलाफ 20 गेंदों में 53 रन, लखनऊ के सामने 31 गेंदों में 61 या राजस्थान के खिलाफ 63 रन—हर बार उन्होंने दिखाया कि दबाव उन्हें डराता नहीं, बल्कि और खतरनाक बना देता है।

 

सबसे खास बात ये है कि वो पावरप्ले की आक्रामकता को मिडिल ओवर्स तक खींच ले जाते हैं। आधुनिक टी20 क्रिकेट में यही सबसे बड़ी कला मानी जाती है।

 

 

 2. कप्तानी में शांत दिमाग, फैसलों में आक्रामक सोच

 

आईपीएल जैसी हाई-प्रेशर लीग में कप्तानी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब सामने विराट कोहली जैसी बड़ी मौजूदगी हो। लेकिन रजत पाटीदार ने पूरे सीजन जिस परिपक्वता से आरसीबी को संभाला, उसने सबको प्रभावित किया। आरसीबी का बैक-टू-बैक फाइनल में पहुंचना सिर्फ बल्लेबाजी का नहीं, बल्कि शानदार नेतृत्व का भी परिणाम है। रजत मैदान पर ज्यादा शोर नहीं मचाते, लेकिन उनके फैसले बहुत कुछ बोलते हैं। गेंदबाजी बदलाव हो या फील्ड सेटिंग, उन्होंने हर मौके पर मैच पढ़ने की क्षमता दिखाई।

 

टीम इंडिया फिलहाल ऐसे कप्तान की तलाश में है जो शांत भी हो और निडर भी। रजत दोनों बॉक्स टिक करते हैं। यही वजह है कि उन्हें “रेडीमेड कप्तानी विकल्प” कहा जा रहा है।

 

 

 

 3. बड़े मैचों के खिलाड़ी, दबाव में और खतरनाक

 

हर खिलाड़ी लीग मैचों में रन बना सकता है, लेकिन असली सुपरस्टार वही होता है जो नॉकआउट में चमके। रजत पाटीदार बार-बार यही साबित कर चुके हैं।

 

IPL 2022 Eliminator में उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 54 गेंदों में नाबाद 112 रन ठोके थे। उस पारी ने पहली बार पूरे देश को एहसास कराया था कि आरसीबी को एक एक्स-फैक्टर बल्लेबाज मिल चुका है। अब आईपीएल 2026 के क्वालिफायर में 33 गेंदों में 93 रन की विस्फोटक पारी ने साबित कर दिया कि 2022 कोई फ्लूक नहीं था। जब मंच बड़ा होता है, तब रजत का खेल और बड़ा हो जाता है। यही वो क्वालिटी है जो किसी खिलाड़ी को सिर्फ अच्छा बल्लेबाज नहीं, बल्कि मैच विनर और लीडर बनाती है।

 4. स्पिन के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा हथियार

 

मौजूदा समय में भारतीय बल्लेबाज विदेशी स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष करते नजर आते हैं। लेकिन रजत पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत ही स्पिन अटैक को तहस-नहस करना है। वो फ्रंट फुट पर निकलकर छक्के मारते हैं, बैकफुट पर कट खेलते हैं और मिडिल ओवर्स में रनरेट कभी गिरने नहीं देते।

धर्मशाला में कागिसो रबाडा की ऑफ स्टंप के बाहर पड़ी गुड लेंथ गेंद को कवर स्टैंड के ऊपर पहुंचाना उनकी रेंज और आत्मविश्वास दिखाने के लिए काफी था।

 

टी20 क्रिकेट अब सिर्फ तकनीक का नहीं, इंटेंट का खेल बन चुका है। और रजत का इंटेंट हर गेंद पर दिखाई देता है।

 

 अब और इंतजार क्यों?

 

रजत पाटीदार कोई “वन सीजन वंडर” नहीं हैं।

वो भारत के लिए टेस्ट (3) और वनडे (1) खेल चुके हैं। घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश को रणजी ट्रॉफी जिताने में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। आईपीएल में लगातार असर छोड़ रहे हैं। कप्तानी का अनुभव भी है और बड़े मैचों का टेंपरामेंट भी। सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टी20 क्रिकेट को नई दिशा दी, लेकिन अब टीम इंडिया को अगले टी20 वर्ल्ड कप और ओलंपिक साइकल के लिए नया चेहरा तैयार करना होगा।

 

और अगर मौजूदा फॉर्म, कप्तानी, मैच-विनिंग क्षमता और दबाव झेलने की ताकत को देखा जाए…

तो शायद भारतीय क्रिकेट के पास जवाब पहले से मौजूद है

 

नाम है… रजत पाटीदार।