Visa के कारण मां नहीं थीं साथ, रो पड़ा 40 साल का गोलकीपर, 90 मिनट में 50 हजार से 50 लाख पहुंचे Followers

Vozinha Cape Verde : FIFA World Cup 2026 में बड़े उलटफेर और रोमांचक मुकाबले तो देखने को मिल रहे हैं, लेकिन केप वर्डे (Cape Verde) के गोलकीपर वोजिन्हा (Vozinha) की कहानी ने दुनियाभर के फुटबॉल फैंस का दिल छू लिया है। Spain जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 0-0 का ऐतिहासिक ड्रॉ कराने वाले 40 वर्षीय गोलकीपर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बन गए। मैच शुरू होने से पहले जिन्हें मुश्किल से कुछ हजार लोग जानते थे, वही खिलाड़ी कुछ घंटों के अंदर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

 

 स्पेन के 27 हमले, लेकिन नहीं टूटी वोजिन्हा की दीवार

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अटलांटा में खेले गए मुकाबले में स्पेन ने लगातार आक्रमण किए। बॉल पजेशन से लेकर गोल पर शॉट्स तक लगभग हर आंकड़े में स्पेन आगे था। स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम बार-बार गोल करने के करीब पहुंची, लेकिन हर बार सामने वोजिन्हा खड़े थे। उन्होंने पूरे मैच में 7 शानदार सेव किए और स्पेन को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया। युवा स्टार Lamine Yamal के मैदान पर आने के बाद भी केप वर्डे का गोलपोस्ट सुरक्षित रहा। आखिरकार मुकाबला 0-0 पर समाप्त हुआ और यह नतीजा वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी Underdog कहानियों में शामिल हो गया।

 मैच के बाद छलक पड़े आंसू, मां स्टेडियम तक नहीं पहुंच सकीं

 

जैसे ही अंतिम सीटी बजी, वोजिन्हा भावुक हो गए। मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया। दरअसल, यह सिर्फ एक शानदार प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना था जिसका इंतजार उन्होंने करीब चार दशक तक किया था।

मैच के बाद बातचीत में वोजिन्हा ने बताया कि वह चाहते थे कि उनकी मां इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनें, लेकिन VISA और आर्थिक कारणों की वजह से वह अमेरिका नहीं पहुंच सकीं। टिकट बुक थे, तैयारी भी पूरी थी, लेकिन समय पर वीज़ा नहीं मिल पाया। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा भावुक कर रही थी।

 

दादी-दादा ने पाला, वहीं से मिला 'वोजिन्हा' नाम

 

बहुत कम लोग जानते हैं कि वोजिन्हा उनका असली नाम नहीं है। उनका पूरा नाम जोसिमार जोसे एवोरा डायस (Josimar José Évora Dias) है। बचपन में उनके पिता सेना में थे और मां काम में व्यस्त रहती थीं, इसलिए उनकी परवरिश मुख्य रूप से दादा-दादी ने की।

 

'वोजिन्हा' पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “छोटी दादी” या “दादी मां”। बचपन में साथी बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे कि हारने या रोने के बाद वह अपने दादा-दादी के पास शिकायत करने चले जाते हैं। इसी वजह से उन्हें 'वोजिन्हा' कहकर बुलाया जाने लगा। शुरुआत में उन्हें यह नाम पसंद नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया। आज यही नाम दुनिया भर में उनकी पहचान बन चुका है।

 

25 साल की उम्र में बने प्रोफेशनल, 40 में मिला वर्ल्ड कप का मंच

 

जहां अधिकांश फुटबॉल खिलाड़ी किशोरावस्था में ही प्रोफेशनल फुटबॉल खेलने लगते हैं, वहीं वोजिन्हा ने 25 साल की उम्र में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने अंगोला, मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल के क्लबों में खेलते हुए अपना सफर जारी रखा। 2012 में राष्ट्रीय टीम से जुड़े और कई बार रिटायरमेंट का भी विचार आया, लेकिन वर्ल्ड कप खेलने का सपना उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

40 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार वर्ल्ड कप में डेब्यू किया और इतिहास रच दिया। वह टूर्नामेंट में डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपरों में शामिल हो गए।

 

 कुछ घंटों में 50 हजार से पहुंच गए 50 लाख followers

 

स्पेन के खिलाफ मैच से पहले वोजिन्हा के Instagram पर करीब 50 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया ने उनकी शानदार गोलकीपिंग देखी, सोशल मीडिया पर उन्हें फॉलो करने वालों की बाढ़ आ गई। कुछ ही घंटों में उनकी फॉलोअर संख्या लाखों में पहुंच गई और बाद में 50 लाख के करीब जा पहुंची।

 

फुटबॉल स्टार्स, Experts और फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “केप वर्डे की चट्टान” और “वर्ल्ड कप का नया हीरो” कहने लगे।

 

 सपने पूरे होने में देर हो सकती है, लेकिन नामुमकिन नहीं

 

वोजिन्हा की कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सपनों की भी कहानी है। जिस खिलाड़ी ने 40 साल की उम्र में पहली बार वर्ल्ड कप खेला, उसने दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक को रोककर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शायद यही वजह है कि स्पेन के खिलाफ मिला यह ड्रॉ केप वर्डे के लिए किसी जीत से कम नहीं माना जा रहा।