पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

An image showing a scene of paying homage to Swami Vivekananda, accompanied by a message marking his death anniversary

Swami Vivekananda Life Story: भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, राष्ट्रनिर्माता और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि केवल उन्हें श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में अपनाने का भी संदेश देती है।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार

उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और सनातन दर्शन को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई तथा अपने ओजस्वी विचारों से करोड़ों लोगों को आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाया। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं, इसलिए उन्होंने युवाओं को आत्मबल, चरित्र निर्माण और कर्मयोग का संदेश दिया।

 

स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में जो कार्य किए, उनका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है। उन्होंने मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान बताया और शिक्षा, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक जागरण को समाज की उन्नति का आधार माना। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों, व्याख्यानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है, जहां उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है।

 

यदि आज भी युवा स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलें, तो वे न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं, बल्कि समाज और देश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि हर भारतीय के लिए आत्मचिंतन, प्रेरणा और राष्ट्रसेवा के संकल्प का विशेष अवसर मानी जाती है।

 

  • जन्म और प्रारंभिक जीवन:
  • रामकृष्ण परमहंस से मिलना:
  • शिकागो विश्व धर्म महासभा:
  • विशेषताएं और विचार:
  • स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:
  • स्वामी विवेकानंद का निधन:

 

आइए, जानते हैं स्वामी विवेकानंद के जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें:

 

जन्म और प्रारंभिक जीवन:

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उनका असली नाम था नरेन्द्रनाथ दत्त। वे एक सम्पन्न बंगाली परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त, एक प्रसिद्ध वकील थे और मां, भुवनेश्वरी देवी, धार्मिक विचारों वाली महिला थीं।

 

नरेन्द्रनाथ बचपन से ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। वे वेद, शास्त्र और भारतीय संस्कृति के बारे में गहरी रुचि रखते थे। उन्हें बचपन से ही योग और ध्यान में रुचि थी, और उनका मानसिक विकास बहुत तीव्र था।

 

रामकृष्ण परमहंस से मिलना:

स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से 1881 में पहली बार मुलाकात की, और वे उनके शिष्य बन गए। रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें आत्म-ज्ञान, भारतीय संस्कृति, और जीवन के उद्देश्य को समझने में मार्गदर्शन किया। स्वामी विवेकानंद ने उनकी शिक्षा के आधार पर आत्मा की शक्ति, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के विषय में गहरे विचार किए।ALSO READ: Swami Vivekananda Essay: स्वामी विवेकानंद पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

 

शिकागो विश्व धर्म महासभा:

स्वामी विवेकानंद की पहचान दुनियाभर में 1893 के शिकागो विश्व धर्म महासभा में उनके प्रसिद्ध भाषण से हुई। इस भाषण में उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और मानवता के महत्व पर जोर दिया। उनका उद्घाटन भाषण आज भी एक प्रेरणा का स्रोत है:

 

'आपका भारत, संसार को वह आध्यात्मिक दृष्टिकोण देगा, जिससे धर्म के प्रति असहिष्णुता, कट्टरवाद और अलगाव की भावना समाप्त होगी।'

यह भाषण आज भी धार्मिक और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

 

विशेषताएं और विचार:

 

स्वामी विवेकानंद के जीवन में कई विशेषताएँ और विचार थे जो उनके योगदान को अद्वितीय बनाते हैं:

 

1. आत्मविश्वास और स्वावलंबन: वे हमेशा आत्मविश्वास और स्वावलंबन के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और अपनी ताकत को पहचानना चाहिए।

 

2. समाज सुधार: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे जातिवाद, अंधविश्वास, और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना चाहिए। वे महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के पक्षधर थे।

 

3. योग और ध्यान: उन्होंने योग को जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना और यह सिखाया कि योग के माध्यम से आत्मा और शरीर का संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

 

4. धार्मिक सहिष्णुता: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि सभी धर्मों का मूल एक ही है, और हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, हर धर्म का अपना महत्व और उद्देश्य है, लेकिन सच्चाई एक ही है।

 

5. भारत के गौरव का पुनर्निर्माण: स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज को जागरूक किया कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझें और गर्व करें। उनका मानना था कि भारत का महान अतीत उसके भविष्य को रोशन कर सकता है।

 

स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हर आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। उनका जीवन न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

 

महत्वपूर्ण उद्धरण:

1. 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।'

2. 'अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाओ, यही सफलता की कुंजी है।'

3. 'आपका काम ही आपके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा प्रदर्शन है।'

4. 'जो कुछ भी तुम कर सकते हो, या सोच सकते हो कि तुम कर सकते हो, उसे शुरू करो। साहस में बुद्धिमत्ता और शक्ति है।'

 

स्वामी विवेकानंद का निधन:

उनका निधन 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में हुआ था। उनके अनुयायियों का मानना था कि स्वामी जी ने अंतिम समय में बेलूर मठ में ध्यान लगाते हुए अपनी इच्छा से महासमाधि प्राप्त कर ली थी तथा उनका अंतिम संस्कार, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की जगह पर यानी बेलूर में गंगा नदी के तट पर ही किया गया था। हालांकि उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचार और कार्य आज भी जीवित हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं।

 

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पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, होर्मुज की ‘आजादी’ के साथ इन मुद्दों पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्र के ताजा हालात और आगे की संभावित स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में बनी सहमति का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि सभी विवादों और लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए।

इन मुद्दों पर हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसका असर भारत समेत कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में हाल ही में तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद भारत, ईरान के साथ अपने मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए हुए है और दोनों देश उच्च स्तर पर लगातार संपर्क में हैं। साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

ईरान ने भेजा बुलावा 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान ने भारत को बुलावा भेजा है। इस कार्यक्रम में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा हिस्सा लेंगे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक समारोह 4 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा। इसी समय से आम लोगों के लिए भी कार्यक्रम स्थल खोल दिया जाएगा, ताकि वे श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत- ईरान के मजबूत रिश्ते

ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। इसके बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत बनाए रखे। इसके लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक और मानवीय स्तर पर लगातार बातचीत होती रही। प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से लेकर मंत्रियों की मुलाकातों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, भारत ने ईरान के साथ संवाद जारी रखा और सभी स्तरों पर संपर्क बनाए रखा। संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से दो बार फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

Guru Hargobind Jayanti 2026: गुरु हरगोविंद सिंह जयंती: जानें उनके बताए सिद्धांत, जो आज भी हैं प्रासंगिक

The image features Sri Guru Hargobind Singh- the sixth Guru of Sikhism- alongside Sri Akal Takht Sahib and the Golden Temple (Harmandir Sahib) of Amritsar

Sixth Sikh Guru Guru Hargobind: छठे सिख गुरु, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती या प्रकाश पर्व सिख इतिहास का एक ऐसा गौरवशाली पन्ना है, जिसने सिख कौम को एक नई दिशा दी। गुरु हरगोविंद सिंह जी ही थे जिन्होंने सिखों को संत के साथ-साथ 'सिपाही'/ संत-सिपाही बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने सिखाया कि धर्म केवल माला जपने में नहीं, बल्कि अत्याचार के खिलाफ तलवार उठाने में भी है।ALSO READ: Guru Amar Das Jayanti: गुरु अमरदास जयंती कैसे मनाएं, जानें जीवन परिचय, महत्व और योगदान

 

आज के इस आधुनिक और उथल-पुथल भरे दौर में भी गुरु हरगोविंद सिंह जी के जीवन मूल्य और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत बेहद प्रासंगिक हैं। 

 

आइए जानते हैं उनके ऐसे ही 5 बड़े सिद्धांत जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं:

 

1. 'मीरी' और 'पीरी' का सिद्धांत: अध्यात्म और शक्ति का संतुलन

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिख इतिहास में सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव करते हुए 'मीरी और पीरी' नामक दो तलवारें धारण कीं।

 

मीरी: सांसारिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति का प्रतीक है, जो समाज की रक्षा करती है।

 

पीरी: आध्यात्मिक शक्ति और गुरुता का प्रतीक है, जो आत्मा को शुद्ध करती है।

 

आज के दौर में प्रासंगिकता: यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन बेहद जरूरी है। इंसान को अंदर से शांत, दयालु और आध्यात्मिक होना चाहिए, लेकिन समय आने पर अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होकर डटने की क्षमता भी उसमें होनी चाहिए। केवल कोरी बातें नहीं, बल्कि एक्शन भी जरूरी है।

 

2. अकाल तख्त की स्थापना (स्वतंत्र विचार और न्याय)

गुरु जी ने अमृतसर में हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने 'श्री अकाल तख्त साहिब' (काल से रहित ईश्वर का सिंहासन) की नींव रखी। जहां हरिमंदिर साहिब अध्यात्म का केंद्र था, वहीं अकाल तख्त दुनिया के राजनीतिक और सामाजिक फैसलों का मंच बना।

 

* अकाल तख्त का संदेश था कि सच और न्याय किसी भी दुनियावी राजा या सरकार के अधीन नहीं होते। आज के समाज में यह सिद्धांत हमें स्वतंत्र सोच रखने, सच का साथ देने और किसी भी प्रकार की तानाशाही या गलत व्यवस्था के आगे न झुकने की प्रेरणा देता है।

 

3. 'संत-सिपाही' का निर्माण/ कमजोरों की रक्षा

अपने पिता और पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी की शहादत के बाद गुरु हरगोविंद सिंह जी ने महसूस किया कि केवल शांति से क्रूर शासकों का हृदय परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सिखों को शास्त्र विद्या, घुड़सवारी और आत्मरक्षा के गुर सिखाए।

 

* गुरु जी ने सेना का गठन किसी पर हमला करने या साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं, बल्कि कमजोरों, मजलूमों और धर्म की रक्षा के लिए किया था। आज के समाज में महिलाओं, बच्चों और समाज के पिछड़े वर्गों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा/ सेल्फ डिेफेंस और शारीरिक रूप से सक्षम होना कितना जरूरी है, यह गुरु जी सदियों पहले बता गए थे।

 

4. 'बंदी छोड़' दाता: मानवाधिकार और सबको साथ लेकर चलना

जब मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया था, तो बाद में गुरु जी की महानता को देखकर उसने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन गुरु जी ने अकेले जाने से मना कर दिया और शर्त रखी कि उनके साथ कैद सभी 52 हिंदू राजाओं को भी आजाद किया जाए। गुरु जी ने 52 कलियों वाला एक विशेष चोगा सिलवाया, जिसकी एक-एक कली पकड़कर सभी राजा जेल से बाहर आए। इसी याद में उन्हें 'बंदी छोड़ दाता' कहा जाता है।

 

आज के दौर में यह घटना सिखाती है कि सच्ची सफलता या आजादी वह है जिसमें हम स्वार्थी न बनें, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपने साथ लेकर आगे बढ़ें। यह सिद्धांत आज के वैश्विक मानवाधिकारों और सर्वधर्म समभाव का सबसे बड़ा उदाहरण है।

 

5. स्वाभिमान और निडरता से जीना

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिखों को आदेश दिया कि वे अब उनके पास धन-दौलत के बजाय अच्छे घोड़े और उत्तम हथियार भेंट स्वरूप लाएं। उन्होंने सिखों के अंदर से गुलामी की मानसिकता और डर को पूरी तरह निकाल फेंका और उन्हें राजाओं की तरह 'शाही ठाट' और स्वाभिमान से जीना सिखाया।

 

* आज के समय में जब लोग डिप्रेशन, मानसिक तनाव और हीनभावना का शिकार हो रहे हैं, गुरु जी का यह सिद्धांत याद दिलाता है कि ईश्वर ने हर इंसान को स्वतंत्र और संप्रभु बनाया है। अपनी पहचान पर गर्व करें, निडर रहें और किसी के सामने घुटने न टेकें।

 

संक्षेप में, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती पर उनका संदेश और जीवन हमें यही सिखाता है कि एक हाथ में माला/ अध्यात्म और दूसरे हाथ में समाज की रक्षा के लिए सामर्थ्य/ शक्ति होना जरूरी है। सच्चे अर्थों में धर्म वही है जो कायरता नहीं, बल्कि वीरता और करुणा दोनों एक साथ सिखाए। उन्होंने दुनिया को आध्यात्मिक शक्ति और सांसारिक उत्तरदायित्व के संतुलन का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

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जेवर में 6,785 करोड़ का बड़ा निवेश! इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में 6,785 करोड़ रुपये के निवेश से अंबर एंटरप्राइजेज एवं कोरिया सर्किट्स के ज्वाइंट वेंचर ‘एसेंट के सर्किट्स’ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट क्षेत्र में रोजगार व नए उद्योगों को गति प्रदान करेगा। उन्होंने यूपी के प्रोजेक्ट्स को त्वरित स्वीकृति मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार भी प्रकट किया। सीएम ने कहा कि कभी जंगलराज के लिए जाना जाने वाला जेवर क्षेत्र अब मंगलराज की पहचान बना है। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 6,785 करोड़ रुपये से अधिक का यह निवेश क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और कई एंकर यूनिट्स की स्थापना में योगदान देगा। यह प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा। उत्तर प्रदेश पहले ही एमएसएमई का सबसे बड़ा हब है, जहां लगभग 96 लाख इकाइयां कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से शुरू हुई 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना ने प्रदेश के उत्पादों को देश व दुनिया में नई पहचान दिलाई है।

 

देश के 55 प्रतिशत मोबाइल नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बन रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी जी के विजन का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। देश में बनने वाले 55 प्रतिशत मोबाइल फोन नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निर्मित हो रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का भी 55 से 60 प्रतिशत उत्पादन यहीं हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंबर ग्रुप और कोरिया सर्किट का यह संयुक्त उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होगा और उत्तर प्रदेश के माध्यम से भारत को नई उड़ान देगा।

 

केंद्र से यूपी के प्रोजेक्ट्स को मिलती है त्वरित स्वीकृति

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश से संबंधित किसी प्रस्ताव को केंद्र सरकार में आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को फोन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रस्ताव केंद्र सरकार तक पहुंचते ही सूचना मिल जाती है कि उसे अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और आप कार्य को आगे बढ़ाएं। ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। जब अपनत्व का भाव हो, देश के प्रति जज्बा हो, तब ये चीजें देखने को मिलती हैं। मैं इस स्वीकृति के लिए पीएम मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार प्रकट करता हूं।

 

कोरिया से उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक व आत्मीय संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का कोरिया से बहुत पुराना संबंध है। इतिहास में यह मान्यता है कि कोरिया की रानी क्वीन हो वस्तुत: अयोध्या की राजकुमारी रत्ना थीं, जो जलमार्ग से कोरिया पहुंची थीं। कोरिया की प्रथम महिला के उत्तर प्रदेश आगमन पर अयोध्या में एक पार्क का निर्माण कराया गया था। कोरिया के राजदूत भी अयोध्या आए थे और उस ऐतिहासिक संबंध को स्मरण करते हुए भावुक हुए थे। यही आत्मीय संबंध भारत व कोरिया को और अधिक निकट लाता है। कोरिया इस बात का उदाहरण है कि आक्रामक रणनीति, अनुशासन और समर्पण के बल पर कोई देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था नए प्रतिमान स्थापित कर रही है।

 

हर नागरिक के कर्तव्य से साकार होगा विकसित भारत का सपना

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और खुशहाल राष्ट्र बनाना है। इस संकल्प की शुरुआत प्रदेश, जनपद, नगर, गांव और प्रत्येक नागरिक से होती है। प्रधानमंत्री जी ने भी नागरिक कर्तव्य पर विशेष बल दिया है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से कार्य करेगा तो विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। इस प्रकार के निवेश उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाते हैं, युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराते हैं, नए स्टार्टअप्स के लिए मंच तैयार करते हैं, निर्यात क्षमता को मजबूत करते हैं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को गति प्रदान करते हैं।

 

जंगलराज नहीं, अब मंगलराज बना जेवर की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी जंगलराज के रूप में पहचाना जाने वाला जेवर आज आक्रामक रणनीति और मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व के कारण मंगलराज का प्रतीक बन चुका है। आज जब वह जेवर एयरपोर्ट पर उतरे तो उन्हें मोदी जी के कर कमलों से मिले शानदार एयरपोर्ट की सौगात दिखाई दी। अब यहां से कमर्शियल फ्लाइट्स भी शुरू हो चुकी हैं और लगातार निवेश के नए प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं।

 

निवेशकों की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था, लेकिन आज प्रदेश अपनी नई पहचान के साथ देश-दुनिया के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार, सेक्टोरल पॉलिसियों और 75 हजार एकड़ के विशाल लैंड बैंक के कारण हर क्षेत्र के निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश सबसे उपयुक्त बन चुका है। सरकार प्रत्येक क्षेत्र के लिए स्पष्ट नीति लेकर आई है। कोई भी निवेशक इन नीतियों के दायरे में आकर निवेश कर सकता है। सरकार समय पर इंसेंटिव देती है, सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के निवेश की पूरी प्रक्रिया संपन्न होती है। इसका परिणाम यह है कि प्रदेश के युवाओं को तेजी से रोजगार मिल रहा है।

 

कानपुर व झांसी के बीच बन रही इंडस्ट्रियल सिटी

सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार कानपुर व झांसी के बीच 56 हजार एकड़ क्षेत्र में बीडा के रूप में एक बड़े इंडस्ट्रियल सिटी का निर्माण कर रही है। इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रस्ताव भारत सरकार के पास भेजा गया था। प्रस्ताव जब केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जी के पास गया तो उन्होंने तत्काल सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा करते हुए इसकी स्वीकृति दी और फोन करके अवगत भी कराया। केंद्र व राज्य सरकार के बीच इसी प्रकार का समन्वय और त्वरित निर्णय देश के विकास को नई गति प्रदान करता है। मैं विश्वास करता हूं कि इस परियोजना को भी हम समय-सीमा में पूरा कर प्रधानमंत्री जी के विजन को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

 

सेमीकंडक्टर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी का सानिध्य उत्तर प्रदेश की जनता को प्राप्त हुआ था। सेमीकंडक्टर आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है और भारत को इसी ताकत का केंद्रबिंदु बनना है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में देश को स्थापित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे। जो चीजें विभिन्न देशों से आयात होती हैं, वे भारत में बनें और दुनिया को निर्यात हों।

 

इस अवसर पर केंद्रीय रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव,  यूपी के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, प्रभारी मंत्री ब्रजेश सिंह, सांसद महेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह नागर, विधायक धीरेंद्र सिंह, तेजपाल सिंह नागर, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, नगर अध्यक्ष महेश चौहान, अंबर ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष जसवीर सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर दलजीत सिंह, सीईओ कोरिया सर्किट चो यांग-हो आदि मौजूद रहे। Edited by : Sudhir Sharma

5 लाख की आबादी वाला देश केप वर्डे पहले ही FIFA World Cup में पहुंचा नॉकआउट राउंड में

FIFA World Cup

केप वर्डे ने शनिवार को अपने आखिरी ग्रुप एच मैच में सऊदी अरब को गोल-रहित ड्रॉ पर रोककर फीफा विश्वकप के नॉकआउट चरण में जगह बना ली।इस तरह से विश्व कप फुटबॉल के नॉकआउट राउंड में पहुंचने वाला सबसे छोटा देश बन गया।अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित छोटा द्वीपीय राष्ट्र केप वर्डे फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर पहली बार खेल रहा है।इस 5,00,000 से कुछ अधिक आबादी वाले देश ने कुछ असंभव बाधाओं को पार करते हुए राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई।

NRG स्टेडियम में खेले गये मुकाबले में अफ्रीकी देश केप वर्डे के लिए ग्रुप एच में स्पेन के बाद दूसरे स्थान पर रहने के लिए एक अंक काफी था। स्पेन ने ग्रुप के दूसरे मैच में उरुग्वे को 1-0 से हराया था। सऊदी अरब, जिसे टूर्नामेंट में बने रहने के लिए जीत की जरूरत थी, तीसरे स्थान पर रहने के बाद बाहर हो गया। केप वर्डे अब राउंड ऑफ 32 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना का सामना करेगा, जो वर्ल्ड कप में पहली बार खेल रही इस टीम के लिए एक यादगार मुकाबला होगा।

मैच के दौरान सऊदी अरब ने लंबे समय तक गेंद पर कब्जा बनाए रखा, लेकिन वे केप वर्डे के अनुशासित रक्षापंक्ति को नहीं भेद पाए। केप वर्डे इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन करने वाली टीमों में से एक बनकर उभरा है।

ब्रेक के बाद केप वर्डे अधिक आक्रामक लग रही थी। सऊदी गोलकीपर मोहम्मद अल ओवैस ने सब्स्टीट्यूट लारोस डुआर्टे के शॉट को शानदार ढंग से रोका, जबकि डिफेंडर अली अल अमरी ने वैगनर पिना के करीब से किए गए शॉट को अहम तरीके से ब्लॉक किया। पहली बार खेल रही इस टीम ने स्टॉपेज टाइम में एक शानदार जीत के साथ ग्रुप स्टेज का समापन लगभग कर ही लिया था। गिल्सन रोड्रिग्स ने तेज़ी से जवाबी हमला किया और सब्स्टीट्यूट नूनो दा कोस्टा को गेंद पास की, लेकिन गोल करने का खुला मौका मिलने के बावजूद नूनो का शॉट बाहर चला गया।

सऊदी अरब ने दूसरे हाफ में नए खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा, जिसमें कप्तान सलेम अल-दौसारी की जगह मोहम्मद अबू अल-शमत को लाना शामिल थे, इन बदलावों से उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी। पूरे मैच के दौरान केप वर्डे का डिफेंस संगठित रहा, जिससे सऊदी अरब के अटैकर्स परेशान रहे। उन्होंने आसानी से पांच मिनट का अतिरिक्त समय निकाला और मैच खत्म होने की सीटी बजते ही जश्न मनाया।

केप वर्डे ने बिना कोई मैच हारे ग्रुप स्टेज का अभियान पूरा किया; इससे पहले उन्होंने स्पेन और उरुग्वे दोनों के साथ मैच ड्रॉ खेले थे और फिर सऊदी अरब के खिलाफ़ एक और पॉइंट हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें पहली ही कोशिश में राउंड ऑफ 32 में ऐतिहासिक जगह दिलाई। सऊदी अरब के लिए, इस ड्रॉ का मतलब उनके वर्ल्ड कप अभियान का अंत था, जबकि केप वर्डे अब नॉकआउट चरण में अर्जेंटीना के खिलाफ अपने फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े मैच की तैयारी कर रहा है।

World Cup 2026 का नया हीरो बना Alex Baena! एक गोल ने Spain को बनाया ग्रुप चैंपियन, Uruguay बाहर

FIFA World Cup 2026 में अगर किसी एक खिलाड़ी ने रातों-रात दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है तो वह हैं Alex Baena। 24 वर्षीय इस स्पेनिश स्टार ने Uruguay के खिलाफ ऐसा गोल दागा, जिसने सिर्फ मैच का नतीजा ही नहीं बदला, बल्कि Spain को ग्रुप H का चैंपियन भी बना दिया। Alex Baena के इस गोल की बदौलत Spain ने Uruguay को 1-0 से हराकर नॉकआउट में शानदार अंदाज में प्रवेश किया, जबकि Marcelo Bielsa की टीम का World Cup सफर यहीं खत्म हो गया। अब फुटबॉल फैंस के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी नए स्पेनिश हीरो की हो रही है।

 

World Cup में दूसरा मैच, पहला गोल और बन गए मैच विनर

Uruguay के खिलाफ मुकाबले का 42वां मिनट Alex Baena के करियर का सबसे यादगार पल बन गया। उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाया, जिसे Uruguay के अनुभवी गोलकीपर Fernando Muslera सही तरीके से पकड़ नहीं पाए। गेंद सीधे गोल में चली गई और यही मैच का इकलौता गोल साबित हुआ। मैच के बाद Alex Baena ने कहा कि यह उनके करियर के सबसे खुशी देने वाले गोलों में से एक है, क्योंकि दोनों टीमें अपने-अपने लक्ष्य के लिए पूरी ताकत से लड़ रही थीं।

 

Roquetas de Mar से World Cup के मंच तक का सफर

20 जुलाई 2001 को Roquetas de Mar (Spain) में जन्मे Alex Baena ने अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत CD Roquetas से की थी। इसके बाद वह Villarreal की प्रसिद्ध अकादमी से जुड़े, जहां करीब आठ वर्षों तक उन्होंने खुद को निखारा। 2018 में उन्होंने क्लब के लिए सीनियर डेब्यू किया और 2020 में पहली टीम का हिस्सा बने।

 

Villarreal के लिए पांच सीजन में Alex Baena ने 148 मैच खेले, 26 गोल किए और 40 असिस्ट दिए। 2021-22 सीजन में वह Girona के लिए लोन पर भी खेले। पिछले साल उन्होंने Atletico Madrid के साथ पांच साल का अनुबंध किया। अपने पहले सीजन में उन्होंने 46 मैच खेले, दो गोल किए और तीन असिस्ट दिए।

 

Olympic फाइनल से World Cup तक लगातार चमक रहे हैं Alex Baena

Alex Baena सिर्फ क्लब फुटबॉल तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने Paris Olympics 2024 के फाइनल में भी गोल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। इसके बाद Spain के कोच Luis de la Fuente ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में लगातार मौके दिए। 2023 में UEFA Euro क्वालीफायर के दौरान उन्हें पहली बार सीनियर टीम में बुलाया गया था। अब तक वह Spain के लिए 19 मैच खेल चुके हैं और तीन गोल कर चुके हैं।

 

 

 

 

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Spain ने दिखाया दम, Uruguay नहीं कर सका वापसी

मैच में Uruguay ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और Lamine Yamal को रोकने की पूरी कोशिश की। Federico Valverde और Darwin Nunez ने बराबरी का मौका बनाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरे हाफ में भी Uruguay ने लगातार दबाव बनाया, मगर Spain के गोलकीपर Unai Simon ने शानदार बचाव करते हुए टीम की बढ़त कायम रखी।

 

मैच के आखिर में Ferran Torres का शॉट क्रॉसबार से टकराया, जबकि इंजरी टाइम में Agustin Canobbio को Pau Cubarsi पर खतरनाक टैकल के लिए रेड कार्ड दिखाया गया। इसके साथ ही Uruguay का World Cup अभियान समाप्त हो गया।

 

Spain ग्रुप H में नंबर-1, Uruguay की विदाई

इस जीत के साथ Spain ने दो जीत और एक ड्रॉ के दम पर सात अंक हासिल किए और ग्रुप H में पहला स्थान अपने नाम किया। वहीं Cape Verde ने दूसरा नॉकआउट टिकट हासिल किया। Uruguay सिर्फ दो अंकों के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया और World Cup में उसका सफर उम्मीद से पहले ही समाप्त हो गया।

100 से ज्यादा महिला क्रिकेटर्स है Trolling से परेशान, ICC के बचाव कार्यक्रम से जुड़ी

 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के सोशल मीडिया मंचों पर ‘Trolling’ के बचाव से जुड़े ‘Player Protection Programme’ में 100 से अधिक महिला क्रिकेटरों ने पंजीकरण कराया है।ICC ने इसके लिए कृत्रिम मेधा Artificial Intelligence से संचालित ‘Moderator’ Freedom to hear के साथ साझेदारी की है जिसने मौजूदा महिला T20I विश्वकप के दौरान लगभग 60,000 ‘हानिकारक सामग्री’ को हटाया है।ICC ने एक विज्ञप्ति में कहा कि टूर्नामेंट की शुरुआत से अब तक 50 से अधिक नए खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह सेवा ICC के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। ICC Women T20I World Cup 2026 में भाग ले रही 12 में से सात टीम की खिलाड़ी इससे जुड़ी हैं। इसके अलावा अंपायर और प्रसारकों ने भी पंजीकरण कराया है।’’

टी20 विश्व कप के पहले सप्ताह के बाद इस ‘टूल’ ने लगभग 250,000 टिप्पणियों की समीक्षा की और लगभग 60,000 हानिकारक सामग्री को हटा दिया।ICC ने कहा, ‘‘बार-बार अपराध करने वालों में से 2,000 से अधिक लोगों की गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए गए और 370 उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक कर दिया गया।’’

भारत की बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव ने कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में कहा, ‘‘ सोशल मीडिया मेरे लिए दुनिया भर में दोस्तों, परिवार और प्रशंसकों के साथ बातचीत करने का अच्छा मंच साबित हो सकता है लेकिन यह ट्रोलिंग के कारण विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए मुसीबत भी बन गया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘‘इस बारे में खुलकर बात करना और समस्या का समाधान ढूंढना महत्वपूर्ण है, इसीलिए मैंने आईसीसी के ‘प्लेयर प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ में पंजीकरण कराया।’’

S S Rajamouli: एस.एस. राजामौली के मुरीद हुए ‘वाराणसी’ स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन, जानें क्या बोले एक्टर

S S Rajamouli: ‘बाहुबली द बिगिनिंग’, ‘बाहुबली 2 द कन्क्लूजन’ और ‘RRR’ जैसी ग्लोबल सक्सेस हासिल करने वाली फिल्मों के बाद फिल्ममेकर एस.एस. राजामौली अब अपनी अगली फिल्म ‘वाराणसी’ के साथ एक और ऐतिहासिक सिनेमाई सफर के लिए तैयार हैं। यह फिल्म एक बार फिर भारतीय सिनेमा को दुनिया के मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने आ रही है।

‘वाराणसी’ इस वक्त बन रही भारत की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा चर्चित फिल्मों में से एक है। मशहूर निर्देशक एस.एस. राजामौली के निर्देशन में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल सिनेमाघरों में रिलीज होगी। महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनस और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे बड़े सितारों से सजी यह फिल्म राजामौली के भव्य विजन और बड़े पैमाने की कहानी को पर्दे पर पेश करने वाली है।

हाल ही में फिल्म के अहम कलाकार पृथ्वीराज सुकुमारन ने ‘वाराणसी’ में काम करने का अपना अनुभव साझा किया और एस.एस. राजामौली की मेहनत और काम के प्रति उनके समर्पण की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी किसी को उसी जुनून और लगन के साथ काम करते देखना अपने आप में खास अनुभव है।

‘वाराणसी’ के सेट पर अपने अनुभव को साझा करते हुए पृथ्वीराज सुकुमारन ने कहा, “जब आप ‘वाराणसी’ के सेट पर जाते हैं और एस.एस. राजामौली सर को कैमरे, मॉनिटर या कलाकारों के साथ काम करते देखते हैं, तो किसी ऐसे इंसान को लगेगा जो उन्हें नहीं जानता कि वह कोई नया निर्देशक है, जिसे 20-30 साल बाद अपनी पहली फिल्म बनाने का मौका मिला हो। वह अपने काम को लेकर इतनी ऊर्जा और उत्साह दिखाते हैं। उनसे सीखने वाली सबसे बड़ी बात यही है। मैंने उनसे ज्यादा मेहनती फिल्ममेकर के साथ कभी काम नहीं किया। अगर वह कहते हैं कि सुबह 7 बजे पहला शॉट होगा, तो महेश, प्रियंका और मेरे सेट पर पहुंचने से पहले ही वह जिम, रिहर्सल और असिस्टेंट्स के साथ सारी तैयारी पूरी कर चुके होते हैं। वह कलाकारों का इंतजार करते हैं और सेट छोड़ने वाले आखिरी शख्स भी वही होते हैं। हमारे लंच ब्रेक सिर्फ 20 मिनट के होते हैं।”

पृथ्वीराज सुकुमारन ने आगे राजामौली के फिल्ममेकिंग के प्रति जुनून की तारीफ करते हुए कहा, “मेरे लिए वह ऐसे फिल्ममेकर हैं जैसे कोई युवा निर्देशक अपनी पहली फिल्म बना रहा हो। मुझे नहीं लगता कि उन्हें खुद भी एहसास है कि उन्होंने कितनी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। एस.एस. राजामौली से सीखने वाली यह सबसे बड़ी बात है। मैंने केरल में कई लोगों से भी यही कहा है कि उनके बारे में आपकी जो भी राय हो, उसे एक तरफ रखिए और उनके काम करने के तरीके को देखिए। इतना कुछ हासिल करने के बाद भी किसी को इस तरह काम करते देखना सच में एक सौभाग्य है।”

फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है क्योंकि ‘वाराणसी’ से महेश बाबू के रुद्र अवतार, पृथ्वीराज सुकुमारन के कुंभ लुक और प्रियंका चोपड़ा जोनस के मंदाकिनी अवतार की झलक पहले ही सामने आ चुकी है। इन लुक्स ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है और देशभर में फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। इन दमदार झलकियों के बाद दर्शकों का इंतजार अब चरम पर पहुंच गया है और हर कोई इस भव्य सिनेमाई प्रस्तुति का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो 7 अप्रैल 2027 को बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी।