दतिया से टिकट कटने पर छलक आएं नरोत्तम मिश्रा के आँसू, आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में मंच पर हुए भावुक

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्म्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन सभा में पूर्व गृहमंत्री और दतिया से 15 साल विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा रो दिए। टिकट कटने के बाद पहली बार दतिया में चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पहले नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में पिछले 15 सालों में किए गए विकास कार्यों को गिनाया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा का दतिया से टिकट कटने का दर्द बाहर आ गया और उनका गला रुंध गया और भाषण खत्म-खत्म करते हुए वह रो दिए। 
 

नरोत्तम मिश्रा ने दतिया की जनता को संबोधित करते हुए “पार्टी ने बहुत दिया है, पार्टी ने 30 साल विधायक बनाकर रखा, जो पार्टी 15 साल तक मंत्री बनाकर रखेगी और क्या चाहिए पार्टी से। रात-दिन  भाजपा की सेवा करके एक कार्यकर्ता प्राण झोंक देगा आशुतोष भैय्या के लिए। प्राण झोंक दिए जाएंगे आशुतोष भैय्या के लिए। यह भ्रम और मुगालते में कोई नहीं रहे कि कोई कार्यकर्ता घर बैंठेगा। 16 जुलाई से स्वयं यहीं पर डेरा जमाएंगे सारे कार्यकर्ताओं  के साथ में। मेरे दतिया के मालिकों एक-एक दरवाजे पर अपना शीश नाऊंगा, एक-एक गांव के अंदर जाऊंगा और आशुतोष को जीताऊंगा”।

 

​पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ एशिया चैंपियन खिताब की भिड़ंत से पहले संग्राम सिंह ने भारत को गौरवान्वित करने का लिया संकल्प ! कहा तिरंगा लहराएगा

भारतीय कुश्ती के दिग्गज और अजेय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर संग्राम सिंह ने 19 जुलाई को कुआलालंपुर, मलेशिया में पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ होने वाली अपनी बहुप्रतीक्षित 'एशिया चैंपियन खिताब' की भिड़ंत से पहले पूरा आत्मविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय तिरंगा लहराने के एकमात्र उद्देश्य के साथ रिंग (केज) में उतर रहे हैं।

​इस मुकाबले से जुड़ी आधिकारिक प्री-फाइट प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के 'द ललित' होटल में आयोजित की गई। इस दौरान संग्राम सिंह, पीएमएमए (PMMA) मलेशिया के अध्यक्ष इस्माइल मरज़ुकी बिन, पीएमएमए के सीईओ मोहम्मद हाकिम बिन लुकमान अब्दुल्ला, आयोजन समिति के सदस्य, संग्राम की कोचिंग टीम के प्रतिनिधि और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

​भारत बनाम पाकिस्तान के इस मुकाबले ने कॉम्बैट स्पोर्ट्स (युद्धक खेलों) के प्रशंसकों के बीच पहले से ही भारी उत्साह पैदा कर दिया है, और इस मैच के विजेता को 'एशिया चैंपियन' का ताज पहनाया जाएगा।

​संग्राम सिंह का अब तक का सफर
​दो बार के राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) हेवीवेट कुश्ती चैंपियन और भारत के सबसे सम्मानित पेशेवर पहलवानों में से एक, संग्राम सिंह ने पेशेवर एमएमए (MMA) में कदम रखने के बाद से इतिहास रचा है।
​धमाकेदार शुरुआत: उन्होंने जॉर्जिया में पाकिस्तान के अली रज़ा नासिर को मात्र 90 सेकंड में हराकर अपने सफर की शानदार शुरुआत की थी।

​अजेय रिकॉर्ड: इसके बाद उन्होंने नीदरलैंड में ट्यूनीशिया के हाकिम ट्रैबेल्सी और अर्जेंटीना में फ्रांस के फ्लोरियन कौडियर पर जीत दर्ज की। वर्तमान में उनका पेशेवर एमएमए रिकॉर्ड 3-0 का है और वे अजेय हैं।
​ऐतिहासिक जीत: अर्जेंटीना में मिली उनकी जीत ने उन्हें अर्जेंटीना की धरती पर पेशेवर एमएमए मुकाबला जीतने वाला पहला भारतीय बना दिया।

​रिंग से इतर, संग्राम सिंह युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत 'फिट इंडिया आइकन' के रूप में काम करते हैं। उन्हें आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा 'स्वच्छ भारत और विकसित भारत' अभियानों के लिए ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया गया था। उनके इस अंतरराष्ट्रीय एमएमए अभियान को वैश्विक स्तर पर फिटनेस, स्वस्थ जीवन शैली और भारतीय एथलीटों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत फिट इंडिया, युवा मामले और खेल मंत्रालय का भी समर्थन प्राप्त है।

​संग्राम सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा:
“जब भी मैं केज (रिंग) में कदम रखता हूँ, तो मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि 145 करोड़ भारतीयों के लिए लड़ता हूँ। भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला हमेशा खास होता है, चाहे खेल कोई भी हो, और मैं इस मुकाबले से जुड़ी भावनाओं को पूरी तरह समझता हूँ। मैंने अपने प्रतिद्वंद्वी के प्रति पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ ट्रेनिंग की है, लेकिन एक बार जब केज बंद हो जाएगा, तो मेरा एकमात्र मिशन यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत का झंडा सबसे ऊपर लहराए। मेरा मानना है कि फिटनेस, समर्पण और मानसिक ताकत किसी भी एथलीट के सबसे बड़े हथियार होते हैं।”

​भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव (IPS) ने कहा:
“संग्राम सिंह उन मूल्यों के प्रतीक हैं जिन्हें भारतीय खेल बढ़ावा देना चाहते हैं—अनुशासन, लचीलापन, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता। एक कुशल पहलवान से एक अजेय पेशेवर एमएमए एथलीट बनने का उनका सफर इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि कड़ी मेहनत से क्या हासिल किया जा सकता है। हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि भारतीय खिलाड़ी वैश्विक मंच पर नए खेलों में अपनी पहचान बना रहे हैं। हम संग्राम को शुभकामनाएं देते हैं क्योंकि वे इस महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में देश की उम्मीदें लेकर जा रहे हैं। उनका यह सफर अनगिनत युवा भारतीयों को फिटनेस और खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा।”

​उम्र के बंधन को तोड़ते हुए संग्राम ने आगे कहा:
“लोग 40 साल की उम्र के बाद एमएमए शुरू करने के मेरे फैसले पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन मैं यह साबित करना चाहता था कि जुनून की कोई उम्र नहीं होती। मेरा उद्देश्य सिर्फ खिताब जीतना नहीं है, बल्कि युवा भारतीयों को जीवन जीने के तरीके के रूप में फिटनेस, अनुशासन और खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। मैं भारत सरकार, फिट इंडिया, युवा मामले और खेल मंत्रालय और उन सभी को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने मेरे इस सफर का समर्थन किया है।”

​उनके कोच भूपेश कुमार ने भारतीय फाइटर पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा:
“संग्राम ने अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले दो वर्षों में उनकी कुश्ती की पृष्ठभूमि, उनके स्ट्राइकिंग (प्रहार) करने के तरीके, कंडीशनिंग और मानसिक क्रूरता में जबरदस्त सुधार हुआ है। हम आबिद अली का सम्मान करते हैं, लेकिन संग्राम भारत के लिए एक और यादगार प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

​खेल के जरिए एकता का संदेश
​PMMA मलेशिया के अध्यक्ष, इस्माइल मरज़ुकी बिन ने एशियाई कॉम्बैट स्पोर्ट्स के बढ़ते कद की सराहना की:

“एशिया चैंपियन खिताब एशिया में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और पाकिस्तान में खेल को लेकर एक अलग ही जुनून है, और यह मुकाबला इस क्षेत्र से उभरती हुई बेहतरीन प्रतिभाओं को प्रदर्शित करेगा। हमें इस स्तर के एथलीटों को एक मंच पर लाने में गर्व और बेहद खुशी हो रही है।”

​PMMA के सीईओ मोहम्मद हाकिम बिन लुकमान अब्दुल्ला ने कहा कि यह आयोजन खेल के माध्यम से एकता का प्रतीक है:”कॉम्बैट स्पोर्ट्स में सम्मान, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा के जरिए देशों को एकजुट करने की अनूठी क्षमता होती है। हमें विश्वास है कि यह चैंपियनशिप एशिया की प्रमुख एमएमए प्रतियोगिताओं में से एक बनेगी, और हम संग्राम सिंह और आबिद अली जैसे विशिष्ट एथलीटों की भागीदारी की सराहना करते हैं।”

​आयोजकों के अनुसार, एशिया चैंपियन खिताब की यह भिड़ंत हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे बड़े कॉम्बैट स्पोर्ट्स मुकाबलों में से एक होने की उम्मीद है। यह एशियाई फाइटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी।

 यूरोप और दक्षिण अमेरिका में जीत का परचम लहरा चुके अजेय संग्राम सिंह अब पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ 'एशिया चैंपियन खिताब' के लिए भिड़ेंगे और अपने करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

International Physics Olympiad: इंटरनेशनल फिकक्स ओलंपियाड में बजा भारत का डंका, 8 साल बाद झटके 5 गोल्ड मेडल

International Physics Olympiad: भारत के नौनिहालों ने पूरी दुनिया में एक बार फिर नाम रोशन किया है। इस बार मंच 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड का था, जहां अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से भारत के 5 छात्रों ने स्वर्ण पदक झटके। खास बात यह है कि भारत को यह उपलबधि 2018 के बाद मिली है। इस ओलंपियाड प्रतियोगिता में भारत के इन छात्रों ने अपनी बुद्धिमानी का लोहा मनवाया है। इन छात्रों ने अपने जबरदस्त प्रदर्शन से न सिर्फ गोल्ड मेडल झटका, बल्कि अपने देश को मेडल टैली में सबसे ऊपर पहुंचा दिया।

यह एक वैश्विक प्रतियोगिता थी जिसमें 85 देशों के 381 छात्रों ने हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता कोलंबिया में 5 से 12 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। भारत ने इस बार चीन, रूस, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे दिग्गज देशों के साथ शीर्ष स्थान पर भी कब्जा जमाया है। फिजिक्स ओलंपियाड के मंच पर डंका बजाने का यह भारत के इतिहास में दूसरा मौका है। इससे पहले साल 2018 में भारत ने यह कमाल किया था, जब पूरी टीम के सभी पांचों सदस्य एक साथ गोल्ड मेडल लेकर स्वदेश लौटे थे।

देश के 5 ‘गोल्डन बॉयज’

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराने वाले पांचों छात्र भारत के अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें मुंबई के श्रेष्ठ सुरैया, पुणे के कनिष्ठ जैन, इंदौर के ऋद्धेश अनंत बेंदले, दिल्ली के ऋषित गर्ग और अहमदाबाद के स्वरित जोशी शामिल हैं। इन छात्रों ने दुनियाभर से आए 85 देशों के 381 दिग्गज छात्रों के बीच अपनी जगह बनाई। प्रतियोगिता में कुल 51 गोल्ड, 80 सिल्वर और 97 ब्रॉन्ज मेडल बांटे गए थे।

5 घंटे की मैराथन प्रतियोगिता

भारतीय छात्रों को जीत के ताज तक पहुंचने के लिए 5 घंटे का लंबा थ्योरी एग्जाम देना पड़ा। इसमें फिजिक्स के बेहद पेचीदा सवाल पूछे गए थे। इसमें पैरामैग्नेटिक कूलिंग की थर्मोडायनामिक्स, चाय के कप के अंदर रोशनी के रिफ्लेक्शन से बनने वाले पैटर्न (कॉस्टिक्स और कस्प्स), ओजोन का फोटोआयोनाइजेशन और इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन जोड़ों के मूवमेंट जैसे मुश्किल विषय शामिल थे। सिर्फ थ्योरी ही नहीं, भारतीय दल ने प्रैक्टिकल के मोर्चे पर भी तगड़ा स्कोर हासिल किया। 5 घंटे तक चले मैराथन प्रैक्टिकल (एक्सपेरिमेंटल) एग्जाम में भी भारतीय टीम ने अपना पूरा दम दिखाया।

काम आई होमी भाभा सेंटर की ट्रेनिंग

इस जीत के पीछे छात्रों की मेहनत के साथ-साथ उनके मेंटर्स का भी बड़ा हाथ रहा. भारतीय दल की अगुवाई मुंबई के होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBSCE) के अन्वेष मजूमदार और सेंट जेवियर्स कॉलेज की लीना जोशी कर रही थीं। वहीं कोलकाता के IISER से आनंद दासगुप्ता और रत्नागिरी के गोगटे-जोगलेकर कॉलेज की निशा केलकर साइंटिफिक ऑब्जर्वर के रूप में टीम के साथ थे। इन सभी ने मुंबई के होमी भाभा सेंटर में कई दिनों तक बेहद कठिन और स्पेशल ट्रेनिंग ली थी, जिसका नतीजा पूरी दुनिया के सामने है।

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पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

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मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

जेनी कामकी: एक Viral Reel और गांव की बेटी बन गई स्टार | Inspiring Story Of Geni Kamki

एक छोटे से गांव से निकली लड़की और आज करोड़ों लोगों की प्रेरणा बन चुकी है।
अरुणाचल प्रदेश की जेनी कामकी ने हॉस्टल के एक छोटे से कमरे और एक साधारण स्मार्टफोन से डांस रील्स बनानी शुरू की थीं। फिर उनकी एक 10 सेकंड की Viral Reel ने सब कुछ बदल दिया। इसके बाद India’s Got Latent के मंच पर उन्होंने अपने टैलेंट और सादगी से पूरे देश का दिल जीत लिया। आज उन्हें 2 मिलियन+ लोग सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं।
जेनी की कहानी बताती है कि सपने पूरे करने के लिए बड़ी जगह नहीं, बड़ा हौसला चाहिए। एक छोटी-सी शुरुआत भी आपकी ज़िंदगी बदल सकती है। :heart:

@luciidforyou

[Journey From Arunachal Pradesh To India’s Got Latent, Geni Kamki Inspiring Success Story,, Viral Instagram Reel Creator Geni Kamki, From Small Village To Social Media Star India]#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

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Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2

Lt Kashish Methwani: कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं, वो जहां कदम रखते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी का है। मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया शिखर पर बैठाने के लिए तैयार थी। लेकिन उनके मन में देश सेवा के सपने ने जन्म ले लिया था। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेजेंट्री हमेशा से उनका पैशन रहा, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर कभी नहीं था। उन्होंने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होना वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उनके सपनों को पूरी तरह से बदल दिया।

साल था 2023 का, और मंच मिस इंटरनेशनल इंडिया था। उस पैजेंट में उन्होंने विजेता का ताज अपने सिर पर सजाया। लेकिन कशिश के लिए, मॉडलिंग वो सफर नहीं था, जिस पर चलने के लिए उनके मन में बरसों पहले आस जगी थी। ये बस एक शौक था, जो अब पूरा हो चुका था। अब अगले सफर पर निकलने का समय था। उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास करने पर ध्यान देने का फैसला किया, और वहां भी वह विजेता बनीं। उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2 मिली।

उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला किया और यूनिफॉर्म में सेना जॉइन कर ली। चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में ग्यारह महीने की मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्हें 6 सितंबर को हुई पासिंग आउट परेड में इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। मेथवानी का यह कदम कई लोगों के लिए एक शॉक जैसा था ।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के हवाले से उन्होंने कहा, “रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट की ट्रॉफी लेना, इससे मुझे एक मकसद मिला। यह तय था कि आर्मी ही वह जगह है जहां मैं सच में होना चाहती हूं।” आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में उनकी पोस्टिंग बहुत अहम है क्योंकि यह रेजिमेंट भारत के ऑपरेशन सिंदूर में अहम काम कर रही थी।

लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी कौन हैं?

9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी मेथवानी एक सिंधी परिवार से हैं। बाद में वह पुणे के वाकड में बस गईं, जहा उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही कई एक्स्ट्रा करिकुलर इंटरेस्ट भी किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री पूरी की और फिर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस थीसिस की। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का भी ऑफर मिला, जो उनके शानदार एकेडमिक रिकॉर्ड को और दिखाता है।

परिवार का रोल काफी अहम रहा

लेफ्टिनेंट कशिश के पिता, डॉ. गुरमुख दास, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में सीनियर पोस्ट संभालने से पहले एक साइंटिस्ट के तौर पर काम करते थे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपडी में टीचर थीं। मेथवानी की भरतनाट्यम, डिबेट, एकेडमिक्स, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग जैसी अलग-अलग चीजों में दिलचस्पी रही है। सेना में शामिल होने से पहले, मेथवानी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज नाम का एक एनजीओ भी शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को अपना खून, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

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ढाका में दिखा भारत का गलत नक्शा, तो भारतीय ऑफिसर पूजा कुमारी झा ने भरी बैठक में लगा दी क्लास

India Protest Wrong Map Dhaka Seminar: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। इस सेमीनार में एक ऐसा वाकया हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेमिनार में जम्मू-कश्मीर (J&K) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाए जाने पर वहां मौजूद भारतीय उच्चायोग की सचिव पूजा कुमारी झा ने तुरंत कड़े शब्दों में इस पर अपना विरोध दर्ज कराया।

भारतीय राजनयिक ने मंच से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, और इस तरह के गलत नक्शों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद ढाका में ‘बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज’ (BIISS) द्वारा आयोजित एक विदेश मामलों के सेमिनार के दौरान शुरू हुआ। सेमिनार में बांग्लादेश के पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम अपना मुख्य भाषण दे रहे थे। भाषण के दौरान स्क्रीन पर एक स्लाइड दिखाई गई, जिसमें भारत के नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के क्षेत्र में दिखाया गया था।

दर्शक दीर्घा में मौजूद भारतीय उच्चायोग की अधिकारी पूजा कुमारी झा ने जैसे ही इस गलत नक्शे को देखा, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। पूजा झा ने कहा, ‘यहां दिखाया गया भारत का नक्शा पूरी तरह गलत है। जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है, और मेरा मानना है कि यहां प्रस्तुत नक्शा सही नहीं है।’

पूर्व राजदूत ने दी सफाई

भारत की कड़ी आपत्ति के बाद, पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम ने इस पर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस नक्शे का इस्तेमाल केवल ‘प्रस्तुतीकरण के उद्देश्य’ से किया गया था और इसका इरादा वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को प्रदर्शित करना या प्रोजेक्ट करना नहीं था।

नेपाल एयरलाइंस भी कर चुकी है ऐसी ही बड़ी गलती

अंतरराष्ट्रीय मंचों या विज्ञापनों में भारत के गलत नक्शे को दिखाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ महीने पहले नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी, नेपाल एयरलाइंस कॉरपोरेशन (NAC) को भी ऐसी ही एक हरकत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।

नेपाल एयरलाइंस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक प्रमोशनल रूट मैप और विज्ञापन शेयर किया था। इस ग्राफिक में एयरलाइंस ने भारत के केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के बजाय पाकिस्तान के क्षेत्र के रूप में रंग दिया था।

#BoycottNepalAirlines हुआ था ट्रेंड

यह इमेज सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई थी। भारतीय यूजर्स ने इसे नेपाल एयरलाइंस की ‘नक्शा आक्रामकता’ करार दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर #BoycottNepalAirlines ट्रेंड करने लगा था और भारतीय विदेश मंत्रालय से इस पर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराने की मांग की गई थी। बाद में नेपाल एयरलाइंस को इस बड़ी चूक के लिए सार्वजनिक रूप से औपचारिक माफी मांगनी पड़ी थी।

World Population Day 2026: विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम

The image conveys a message about realizing the hopes and aspirations of the youth on World Population Day- for both today and the future

World Population Day: हर वर्ष 11 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, शिक्षा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। तेजी से बढ़ती आबादी का प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे में विश्व जनसंख्या दिवस लोगों को जनसंख्या से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।

 

इस दिवस से जुड़ी तारीख, इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम की पूरी जानकारी यहां नीचे जानें…

 

विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा हर साल इस दिन के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है। वर्ष 2026 के लिए विश्व जनसंख्या दिवस की आधिकारिक थीम 'युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए' (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) तय की गई है।

 

थीम का मायने: इस साल की थीम पूरी तरह से युवा पीढ़ी पर केंद्रित है। यह इस बात पर जोर देती है कि दुनिया भर के युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और सही निर्णय लेने के अधिकार दिए जाएं। जब देश की युवा आबादी सशक्त होगी, तभी वैश्विक स्तर पर सतत विकास और जनसंख्या संतुलन की चुनौतियों से निपटा जा सकेगा।

 

क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

तेजी से बढ़ती आबादी के कारण दुनिया के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:

 

जागरूकता बढ़ाना: लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना।

 

संसाधनों पर दबाव: बढ़ती जनसंख्या का पर्यावरण, भुखमरी, गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं और पानी व भोजन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर क्या असर पड़ रहा है, इस ओर सरकारों और आम जनता का ध्यान आकर्षित करना।

 

अधिकारों की रक्षा: विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों को उनके प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े फैसले खुद लेने के अधिकार के प्रति सशक्त बनाना।

 

विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास

शुरुआत कब हुई: विश्व जनसंख्या दिवस की स्थापना 1989 में 'संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम' (UNDP) की तत्कालीन गवर्निंग काउंसिल द्वारा की गई थी। इस बार विश्व जनसंख्या दिवस 2026 11 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगा।

 

11 जुलाई को ही क्यों चुना गया: इसके पीछे एक ऐतिहासिक घटना है। 11 जुलाई 1987 को दुनिया की कुल आबादी का आंकड़ा 5 अरब (5 Billion) को पार कर गया था। इस दिन को 'फाइव बिलियन डे' (Five Billion Day) कहा गया। दुनिया की इतनी तेज रफ्तार से बढ़ती आबादी को देखते हुए लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस हुई और तय किया गया कि हर साल 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाया जाएगा। तथा आधिकारिक तौर पर पहला विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1990 को 90 से अधिक देशों में मनाया गया था।

 

विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का महत्व

वर्तमान में दुनिया की आबादी 8 अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना हुआ है। ऐसे समय में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

 

सतत विकास: यह दिन याद दिलाता है कि यदि जनसंख्या अनियंत्रित ढंग से बढ़ती रही, तो गरीबी उन्मूलन, भुखमरी और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा।

 

नीति निर्धारण: यह सरकारों और नीति निर्माताओं को डेटा के आधार पर स्वास्थ्य, रोजगार और शहरीकरण की बेहतर योजनाएं बनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

 

स्वास्थ्य और सुरक्षा: अवांछित गर्भधारण को रोकने और सुरक्षित मातृत्व के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने में यह वैश्विक अभियान बड़ी भूमिका निभाता है।

 

विश्व जनसंख्या दिवस- FAQs

 

1. विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 11 जुलाई को।

 

2. विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत कब हुई?

सन् 1989 में इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा की गई थी।

 

3. विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजते हुए प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की दिशा में जागरूकता फैलाना।

 

4. विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है?

परिवार नियोजन, जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए।

 

5. विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम क्या है?

युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए। (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) है। 

 

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GDA Plot Auction: दिल्ली-NCR में प्लॉट खरीदने का सुनहरा मौका! गाजियाबाद में 17 जुलाई को होगी महा-नीलामी, अप्लाई करने की ये है लास्ट डेट

GDA Mega Property Auction 2026: दिल्ली-एनसीआर में अपना घर बनाने, दुकान खोलने या नया कारोबार शुरू करने की चाहत रखने वालों के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) एक बेहद शानदार मौका लेकर आया है। जीडीए आगामी 17 जुलाई को एक बड़ी प्रॉपर्टी नीलामी आयोजित करने जा रहा है। इस महा-नीलामी में प्राधिकरण की 19 अलग-अलग योजनाओं के तहत आने वाले रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल भूखंडों की बोली लगाई जाएगी।

जीडीए की ओएसडी कनिका कौशिक के मुताबिक, इस नीलामी में छोटे खरीदारों से लेकर बड़े निवेशकों तक, सभी के लिए बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। नीलामी में शामिल होने के लिए 13 जुलाई तक आवेदन किया जा सकता है।

आवासीय से लेकर अस्पताल तक के प्लॉट उपलब्ध

इस मेगा ऑक्शन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर तरह की जरूरत के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। खरीदार और बड़े निवेशक एक ही मंच पर अपनी पसंद की प्रॉपर्टी चुन सकते हैं। नीलामी में निम्नलिखित श्रेणियों के भूखंड शामिल होंगे:

आवासीय और ग्रुप हाउसिंग: मकान या बड़े फ्लैट्स प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए।

व्यावसायिक और औद्योगिक: दुकान, होटल और इंडस्ट्री सेटअप करने के लिए।

संस्थागत: स्कूल, अस्पताल और कम्युनिटी सेंटर के निर्माण के लिए।

आवेदन की अंतिम तारीख 13 जुलाई, जानें कैसे करें अप्लाई?

जीडीए ने साफ किया है कि केवल वही लोग 17 जुलाई की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे, जिनका आवेदन समय पर जमा होगा। इच्छुक खरीदार 13 जुलाई तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अप्लाई कर सकते हैं:

ऑनलाइन माध्यम: आवेदक सीधे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

ऑफलाइन माध्यम: ऑफलाइन आवेदन करने के लिए खरीदारों को एचडीएफसी बैंक की आरडीसी, राजनगर (गाजियाबाद) शाखा में जाना होगा। वहीं से आवेदन फॉर्म प्राप्त किए जा सकते हैं और भरे हुए फॉर्म को दस्तावेज व जरूरी फीस के साथ उसी शाखा में जमा करना होगा।

जीडीए को भारी राजस्व की उम्मीद

जीडीए प्रशासन इस महा-नीलामी को लेकर बेहद उत्साहित है और सभी जरूरी तैयारियां समय से पूरी कर ली गई हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों हुई प्लॉटों की नीलामी से प्राधिकरण को करीब 213 करोड़ रुपये की मोटी कमाई हुई थी। इस बार प्रॉपर्टीज की लंबी चौड़ी लिस्ट और निवेशकों के भारी उत्साह को देखते हुए पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर के प्राइम लोकेशन पर जमीन के मालिक बनना चाहते हैं, तो 13 जुलाई से पहले अपना रजिस्ट्रेशन जरूर करा लें।

अफगानिस्तान के बाएं हाथ के पेसर का लंबी बीमारी के बाद निधन

अफगानिस्तान के प्रमुख बाएं हाथ के पेसर शापूर जदरान का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जादरान ने 2009 से 2020 के बीच अफगानिस्तान के लिए 44 एकदिवसीय और 36 टी20 मैच खेले।सलामी गेंदबाज होने के  बाद भी साल 2015 के एकदिवसीय विश्वकप में स्कॉटलैंड के खिलाफ उनके बल्ले से ही टीम को विजयी रन मिले। यह अफगानिस्तान की एकदिवसीय विश्वकप में पहली जीत थी। वह टीम के लिए टी-20 विश्वकप का भी हिस्सा थे।

वह एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी ‘हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस’ (HLH) से पीड़ित थे।एचएलएल एक ‘हाइपर-इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम’ है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है।

मंगलवार को अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने उनके निधन की घोषणा की।एसीबी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘बहुत दुख और अफसोस के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान के निधन पर शोक व्यक्त करता है।’’

एसीबी ने कहा कि लंबे-कद के गेंदबाज जादरान अफगानिस्तान की कई यादगार जीतों का हिस्सा रहे और ‘अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखने वाले खिलाड़ियों में से एक थे।’एसीबी ने कहा, ‘‘शापूर जादरान अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखने वाले खिलाड़ियों में से एक थे। उनके समर्पण, जुनून और अटूट प्रतिबद्धता ने हमारे देश में खेल के उत्थान और विकास में अहम भूमिका निभाई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह उन क्रिकेटरों में से एक थे जो अफगानिस्तान के शुरुआती क्रिकेट सफर का अहम हिस्सा रहे और उन्होंने उस रास्ते को बनाने में मदद की जिसने अफगान क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।’’

एसीबी ने कहा कि जादरान ना केवल अफगानिस्तान में बल्कि दुनिया भर के कई युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा के स्रोत थे।ACB ने लिखा, ‘‘अपने पूरे करियर के दौरान शापूर ने सम्मान, साहस और गर्व के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट की सेवा की। उनका योगदान और उपलब्धियां हमेशा अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास का अहम हिस्सा रहेंगी और राष्ट्रीय टीम की सेवा में उनके प्रयासों को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैदान पर अपनी उपलब्धियों के अलावा शापूर जादरान कई युवा अफगान क्रिकेटरों और दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए प्रेरणा के सच्चे स्रोत थे।’’

एसीबी ने कहा, ‘‘उनके लड़ने के जज्बे, दृढ़ संकल्प और खेल के प्रति प्यार ने कई लोगों को उम्मीद दी और एक पीढ़ी को बड़े सपने देखने और अफगानिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी कमी बहुत खलेगी और उनकी यादें हमेशा अफगानिस्तान के लोगों और क्रिकेट की दुनिया के दिलों में जिंदा रहेंगी।’’