Bhumi Pednekar: ‘आज हमारे… लिए एक बहुत बड़ा पल है’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भूमि पेडनेकर ने शेयर किया नोट

Bhumi Pednekar: एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और कहा कि यह पल एक मज़बूत और निष्पक्ष भारत की शुरुआत का प्रतीक है। एक्ट्रेस ने यह उम्मीद भी जताई कि यह अहम पल कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक सार्थक बदलाव लाएगा।

उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि इससे हमारा भारत और मज़बूत और बेहतर बनेगा। आज हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत अहम पल है। ऐसे नागरिक जिन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी लीडरशिप जिसने उनकी बात सुनी। युवाओं ने अपनी बात रखी; उनका पक्का इरादा, उनकी हिम्मत और बदलाव की ताकत में उनका भरोसा वाकई प्रेरणा देने वाला था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस मंच पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन आखिर में वही आवाज़ गूंजी जो छात्र सही मायने में चाहते थे। मेरे लिए, जवाबदेही का मतलब है असल और समाधान-केंद्रित बदलाव लाना। कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करना। ऐसा असली सुधार जो सच में हमारे छात्रों के भविष्य की चर्चा पर असर डाले। मुझे लगता है कि हर भारतीय के लिए—चाहे आप किसी सरकारी पद पर हों या आम नागरिक—देश, उसकी खुशहाली, उसके लोग और उसकी सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। जय हिंद।”

राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच हफ़्तों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों और लगातार जन-आंदोलन के बाद, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया। छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों, खासकर NEET-UG पेपर लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। उनका इस्तीफ़ा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद आया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और नाराज़ नागरिक बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर छात्रों का समर्थन करने के लिए उमड़ पड़े।

ये विरोध-प्रदर्शन दिल्ली से पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। 18 जुलाई की सुबह, सोनम वांगचुक को 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं।

NEET Protest में छाई ये ‘देसी मां’, पोस्टर पर लिखी एक लाइन पढ़कर इंटरनेट हुआ दीवाना

दिल्ली में NEET परीक्षा को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रदर्शन से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आंदोलन के गंभीर माहौल में भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। तस्वीर में दिखा एक अनोखा संदेश लोगों के दिलों को इस तरह छू गया कि देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से लेकर अन्य मंचों तक लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं और अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कई यूजर्स इसे भारतीय माताओं के स्नेह, सख्ती और सुरक्षा की भावना का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विरोध प्रदर्शन की सबसे यादगार और दिल छू लेने वाली तस्वीर कह रहे हैं। यही वजह है कि यह फोटो अब सिर्फ एक वायरल पोस्ट नहीं, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का खास विषय बन चुकी है।

एक तख्ती, जिसने जीत लिया इंटरनेट का दिल

इस तस्वीर को X (पहले ट्विटर) पर शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया, “Bro, whose mom is this?

योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ

Sarnath included in UNESCO World Heritage List

– यूपी की बौद्ध विरासत को मिली वैश्विक पहचान, बौद्ध स्थली सारनाथ बना चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

– 28 वर्षों के इंतजार के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा, बना देश का 45वां विश्व धरोहर स्थल

– आगरा से आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश का यूनेस्को विरासत मानचित्र, वैश्विक पहचान में शामिल हुई बौद्ध धरोहर

– यूनेस्को की मान्यता गौरवपूर्ण उपलब्धि,उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को मिलेगी नई वैश्विक गतिः जयवीर सिंह

Sarnath Uttar Pradesh News : लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिल गया है। योगी सरकार के प्रयास रंग लाए और अब सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
 

उल्लेखनीय है कि सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (संभावित सूची) में शामिल किया गया था। ऐसे में, लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य के तीनों विश्व धरोहर स्थल- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) तक सीमित थे। मगर, योगी सरकार के प्रयासों से सारनाथ भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। इससे उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है। इस कदम से राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मान्यता मिली है।

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चौखंडी और धामेक स्तूप

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति का प्रतीक है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये सभी मिलकर सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था और ज्ञान केंद्र के रूप में हुए विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।

 

बौद्ध धर्म सारनाथ क्यों महत्वपूर्ण?

सारनाथ, वह पावन धरती है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद मानवता को अपना प्रथम उपदेश देकर 'धर्मचक्र प्रवर्तन' का शुभारंभ किया था। योगी सरकार के प्रयास से अब यह विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट पहचान प्राप्त कर चुका है। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में 'ऋषिपत्तन' के नाम से वर्णित किया गया है।

यही वह ऐतिहासिक स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश समस्त मानवता तक पहुंचाया। आज यह गौरवशाली विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक प्रतिष्ठित हो गई है। उल्लेखनीय है कि करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यह स्थल आज भी बौद्ध मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का साक्षी है।

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28 वर्षों की प्रतीक्षा का प्रतिफल : जयवीर सिंह

योगी सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 'यह सम्मान प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सतत प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा, भगवान बुद्ध और रामायण की पावन भूमि उत्तर प्रदेश जैन, सूफी तथा अन्य आध्यात्मिक परंपराओं की भी समृद्ध विरासत समेटे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सभी आस्था और विरासत स्थलों के संरक्षण एवं विकास को समान प्राथमिकता दी है।
 

जयवीर सिंह ने ये भी कहा कि 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश का शांति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समावेशिता का संदेश दुनिया के अधिक व्यापक समुदाय तक पहुंचेगा।'

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'सारनाथ की पहचान स्मारकों से आगे'

सारनाथ के यूनेस्को नामांकन की तैयारी में अहम भूमिका निभाने वाली संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि 'सारनाथ की पहचान केवल इसके स्मारकों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यही वह पावन स्थली है जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम धर्मदेशना दी, बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध स्थापत्य की प्रारंभिक परंपराओं का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई हजार वर्षों से यहां बौद्ध तीर्थ परंपरा जीवित है, जो समग्र सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत सारनाथ को विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट बनाती है।'

 

हमारे सतत प्रयासों का परिणाम : अमृत अभिजात

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि 'सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसे योगी सरकार के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को बौद्ध तीर्थाटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सारनाथ की हमेशा केंद्रीय भूमिका रही है। राज्य सरकार ने बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार प्रमुखता से प्रस्तुत किया है। इसके लिए फैम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप), ट्रैवल ट्रेड सहभागिता, बौद्ध उत्सवों के आयोजन तथा पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष बल दिया गया।

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अमृत अभिजात ने आगे कहा कि अक्टूबर 2025 में लखनऊ को यूनेस्को की 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' की मान्यता मिलना भी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण है। अब सारनाथ को मिली विश्व धरोहर की मान्यता विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने, उनके प्रवास अवधि को विस्तार तथा उन्हें उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध सर्किट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नौकरी छोड़कर बना भारत का सबसे सम्मानित अभिनेता | Kay Kay Menon Story | Adarsh Bal Vidyalaya

9 साल की उम्र में… उनका पहला किरदार था एक Sunflower।
शायद तभी उन्हें अपना मंच मिल गया था।
केरल के तिरुवनंतपुरम से शुरू हुआ यह सफ़र उन्हें हर कुछ साल में एक नए शहर ले गया। लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली, थिएटर के लिए उनका प्यार।
Physics की पढ़ाई, MBA और एक सुरक्षित नौकरी… सब कुछ था। लेकिन सिर्फ़ एक महीने में उन्होंने नौकरी छोड़ दी, क्योंकि उनका दिल मंच पर था।
Naseeruddin Shah के Motley Theatre Group में शुरुआत हुई। रोल नहीं मिला, तो backstage से सीखा। इंतज़ार किया। मेहनत की। और फिर Black Friday, Sarkar, Shaurya जैसे किरदारों ने उन्हें भारत के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में शामिल कर दिया।
Kay Kay Menon की कहानी सिर्फ़ एक अभिनेता बनने की नहीं, बल्कि अपनी सही जगह चुनने की कहानी है।
क्या आपका भी कोई ऐसा काम है, जिसे करते हुए वक़्त का पता ही नहीं चलता?
@kaykaymenon02

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नौकरी छोड़कर बना भारत का सबसे सम्मानित अभिनेता | Kay Kay Menon Story | Adarsh Bal Vidyalaya

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Commonwealth Games में भारत का खाता खोलने वाले झंडू कुमार थे पोलियो से ग्रसित में बेची सब्जियां

Jhandu Kumar

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का खाता खोलने वाले पैरा भारोत्तोलक झंडु कुमार 5 साल से  पोलियो से ग्रसित थे। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम पॉवरलिफ्ट करके भारत को कांस्य पदक जिताया। वह खुद एक सब्जी बेचने वाले के बेटे हैं और कोविड काल के दौरान उन्होंने सब्जी बेचकर अपना घर खर्च चलाया लेकिन आज उनका संघर्ष रंग लाया।

28 वर्षीय झंडु कुमार का जन्म नालंदा के हरनौत में हुआ था। झंडु कुमार का शुरुआती जीवन कई संघर्षों में बीता। उन्होंने गुजर बसर के लिए ई रिक्शा चलाया वहीं खानदानी पेशा सब्जियां भी बेची। लेकिन अंतत जैसे उन्होंने निजी जिंदगी के संघर्षो से पार पाकर जीत हासिल की वैसे ही ग्लासगो में भी भारत का झंडा बुलंद किया।

झंडू कुमार ने 5 सालों में ही अपने पैरों की मजबूती गंवा दी थी। पोलियो के कारण उनको बैसाखी का सहारा लेना पड़ा। सब्जी बेचने के अलावा उन्होंने ई रिक्शा चलाया ताकि घर चल पाए लेकिन यह भी काम नहीं आया। नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपना ई रिक्शा भी बेचना पड़ा।झंडू कुमार ने गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक जैसे खेलों में अपना भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने पॉवरलिफ्टिंग चुना और आज देश का खाता खुलवा गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर उनको बधाई दी”झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन! उन्होंने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर #CWG2026 में भारत के लिए मेडल का खाता खोला है। उन्हें बधाई। उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और बरसों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। हर चुनौती का सामना करते हुए और इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके, उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है।”

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

-प्रो. संजय सिन्हा
neet exam controversy: पिछले कुछ दिनों में नीट परीक्षा को लेकर देश और प्रदेश में जो कुछ देखने को मिला, वह कई तरह के सवाल खड़े करता है। पहला तो यही कि क्या छात्रों की पढ़ाई-लिखाई या परीक्षा से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता संघर्ष का माध्यम बन गया है और इसी से जुड़ा सवाल यह भी है कि आखिर राजनीतिक दल क्यों इस आंदोलन को अराजकता की दिशा में ले जाना चाहते हैं? क्या यह वाकई अब छात्रों की लड़ाई रह गई है या फिर इसके बहाने मुद्दाविहीन विपक्ष द्वारा राजनीतिक जमीन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है? यह सवाल उद्वेलित करने वाले हैं। कोई संशय नहीं कि नीट पेपर का लीक होना एक आपराधिक घटना है, चिंता का विषय है लेकिन जब कोई संवेदनशील मुद्दा राजनीतिक मंच में बदल जाता है तो कहानी नया रंग ले लेती है।

 

दिल्ली की सड़कों और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करते हैं कि छात्रों की शिकायत को चेहरा बनाकर कुछ पार्टियां खासतौर पर सपा व कांग्रेस अपना खोया जनाधार हासिल करना चाहती हैं। विपक्षी दलों के बीच इस आंदोलन का नेतृत्व करने की होड़ मची है और इसका प्रमाण यह है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक धरना आयोजित हुआ, तो उसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने एक समानांतर प्रदर्शन खड़ा कर दिया। छात्रों के एक प्रतिनिधि आंदोलन पर राजनीतिक दल यह साबित करने की कोशिश में जुट गए कि उस पर उनका नेतृत्व है। इस बात की चिंता भी नहीं कि उनकी यह कोशिश उनकी प्राथमिकता को उजागर कर देगी कि उनके लिए महत्वपूर्ण क्या है, छात्रों का हित या राजनीतिक मंच। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा कांग्रेस के धरने पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया जाना इस बात का प्रमाण है कि विपक्षी खेमे में भी इस मुद्दे को लेकर आंतरिक कलह व खींचतान शुरू हो चुकी है।

प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय

इस प्रकरण के एक और पहलू को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ वीडियो में कई छात्र व अभिभावक यह बयान देते नजर आए कि वे नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में आए थे, लेकिन धरनास्थल पर उपस्थित राजनेताओं ने बातचीत का रुख अन्य दिशाओं में मोड़ दिया। जब किसी छात्र आंदोलन के भीतर से ऐसी आवाज़ें उठने लगें कि मूल मुद्दे से हटकर बातें हो रही हैं, तो यह प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय बनना चाहिए। एक आंदोलन जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा की पवित्रता बचाने के लिए शुरू हुआ था, अगर वह अलग-अलग राजनीतिक नारों और असंबद्ध विवादों में उलझने लगे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों को होगा, जिनके नाम पर यह सब खड़ा किया गया।

 

संसद परिसर के आसपास सुरक्षा को लेकर उपजी चिंता भी एक गंभीर विषय है। किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार बुनियादी है, लेकिन जब भीड़ किसी संवैधानिक संस्थान की सुरक्षा-सीमा के करीब पहुंचने की स्थिति पैदा करे, तो यह प्रशासन और आयोजकों दोनों के लिए एक गंभीर उत्तरदायित्व का प्रश्न बन जाता है। ऐसी स्थितियों में जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भीड़ को संयमित रखे, न कि उसे और उकसाए। लेकिन सपा व कांग्रेस नेता अराजकता को बढ़ावा देते दिखाई दिए। यदि आंदोलन को समर्थन देने वाले दलों ने सुरक्षा जोखिम की आशंका के बावजूद मार्च को प्रोत्साहित करना जारी रखा, तो यह सवाल वाजिब है कि क्या उनके लिए राजनीतिक लाभ, बच्चों की सुरक्षा से ऊपर है।

 यह कोई नई घटना नहीं

अब बात करते हैं मूल मुद्दे की। पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी निस्संदेह एक वास्तविक और गंभीर समस्या है। लेकिन, यह कोई नई घटना नहीं है। बीते वर्षों में विभिन्न राज्यों में, चाहे किसी भी दल का शासन रहा हो, प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अचरज की बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों के शासनकाल में बार-बार भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं, वही आज स्वयं को नैतिकता का सबसे बड़ा प्रहरी सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती, अधीनस्थ सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अनेक विवाद सामने आए। चयन आयोगों में जाति विशेष के लोगों को प्रमुख बनाने पर सवाल खड़े हुए। भाई-भतीजावाद व रिश्वतखोरी के मामले भी सामने आए। सपा आज तक इन आरोपों पर बगलें झांकने लगती है।

 

इसी तरह बिहार में शिक्षक नियुक्तियों और अन्य परीक्षाओं को लेकर प्रश्न उठे। राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा ही हुआ। पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। ऐसे उदाहरणों के बाद जनता छात्र आंदोलन में घुसे विपक्षी दलों से यह पूछने का अधिकार रखती है कि जब वे सत्ता में थे तब ऐसी घटनाओं को रोकने में क्यों विफल रहे। यदि पेपर लीक एक व्यवस्थागत समस्या है, जो अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग सरकारों के दौर में सामने आती रही है, तो इसका समाधान भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर खोजा जाना चाहिए।

 

यूपी में जहां 2017 से पहले की सरकारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं को संगठित माफिया के हवाले कर दिया था और नियुक्तियों को भाई-भतीजावाद तक सीमित कर रखा था, योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक के जरिये इन अनियमितताओं को दूर करने का प्रयास किया, जिसके तहत कड़े कानूनी प्रावधान किए गए। इनमें एक करोड़ रुपये तक जुर्माना व उम्रकैद तक शामिल है। छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना, और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना। यह किसी एक दल की नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है। जब कोई सरकार पेपर लीक के मामलों में जांच एजेंसियों को सक्रिय करती है, दोषियों पर कार्रवाई करती है, और नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रस्ताव लाती है, तो इसे स्वीकार करने के बजाय केवल विरोध के लिए विरोध करना, समस्या के समाधान में बाधा ही उत्पन्न करता है। जनता यह अपेक्षा करती है कि जब कोई गंभीर मुद्दा सामने आए, तो सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की दिशा में काम करें, न कि उसे चुनावी लाभ की दृष्टि से देखें।

 

पेपर लीक प्रकरण देश की शिक्षा व्यवस्था और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। इसे राजनीतिक क्रेडिट की लड़ाई में बदलना छात्रों के साथ अन्याय होगा। ज़रूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अधिक सुरक्षित और अधिक जवाबदेह बनाया जाए सभी राजनीतिक दलों की साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से। जब तक यह मूल उद्देश्य राजनीतिक बयानबाज़ी के शोर में दब कर रह जाएगा, तब तक न तो छात्रों को न्याय मिलेगा और न ही व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार संभव हो पाएगा। सपा और कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वे वास्तव में छात्रों के भविष्य की चिंता में खड़े हैं, या केवल एक अवसर की तलाश में सड़कों पर उतरे हैं। (लेखक श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल में डीन, स्किल फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च हैं)

 

सचिन तेंदुलकर ने आंदोलन पर रखी अपनी राय, छात्रों को दी यह सलाह

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और कप्तान सचिन तेंदुलकर ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक संदेश लिखते हुए कहा है कि ईमानदारी को प्रोत्साहन के साथ ही मेहनत को सम्मान मिलना और योग्यता की जीत सुनिश्चित होनी चाहिए।

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श्री तेंदुलकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा संदेश में लिखा , “उनके पिता एक प्रोफेसर थे और उन्होंने अनेक छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बचपन में उन्हें एक महत्वपूर्ण सीख दी थी कि “असफल होना स्वीकार्य है, लेकिन धोखा देना नहीं। कभी शॉर्टकट मत अपनाओ।”

उन्होंने कहा कि समाज के रूप में सभी की जिम्मेदारी है कि ऐसी संस्कृति विकसित की जाये , जिसमें परिणामों से अधिक मेहनत को महत्व मिले। यदि कोई समाज प्रयास के बजाय केवल परिणाम को प्राथमिकता देता है, तो वह योग्यता के बजाय शॉर्टकट का रास्ता अपनाने लगता है।

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि यदि छात्रों को यह महसूस हो रहा है कि उनकी मेहनत का उचित सम्मान नहीं हुआ है, तो उनकी निराशा समझी जा सकती है। सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में छात्रों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा वर्ग सपनों और ऊर्जा से भरपूर है तथा वही देश की सफलता की असली ताकत है। समाज के अभिभावकों, शिक्षकों, मित्रों, रिश्तेदारों, विद्यालयों और प्रशासकों सहित यह सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी है कि युवाओं का उत्साह और आत्मविश्वास बना रहे।

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उन्होंने कहा कि ऐसी संस्कृति विकसित करनी होगी, जिसमें मेहनत को सम्मान मिले, ईमानदारी को बढ़ावा दिया जाये और योग्यता की जीत हो। श्री तेंदुलकर ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी मिलकर ऐसे समाधान खोजेंगे, जो बच्चों के भविष्य को मजबूत करें और उनकी आकांक्षाओं की रक्षा करें।

कॉकरोच वाली पोस्ट डालकर विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत! अब मांगा जाएगा जवाब

CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में आरएएफ यानी रैपिड एक्शन फोर्स की एक अधिकारी विवादों में घिर गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की अधिकारी सोनिया सहरावत से उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर जल्द ही जवाब मांगा जा सकता है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद उनकी सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट और गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई थीं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में उनसे जल्द स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

न्यूज18 के रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सोशल मीडिया से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन के संकेत मिले हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सीआरपीएफ पहले सोनिया सहरावत से उनका पक्ष जानेगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च अधिकारी उनसे जवाब मांगेंगे और इसकी जानकारी उन्हें पहले ही दे दी गई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए न्यूज18 ने सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह और सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थीं सोनिया सहरावत

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) में तैनात सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान झड़प में घायल हो गई थीं। इसके बाद वह सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा सबसे चर्चित चेहरा बन गईं। उस दिन सोनिया सहरावत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात आरएएफ की टीम का हिस्सा थीं। झड़प के अगले दिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी तेजी से वायरल हो गई। इस पोस्ट की सीजेपी और कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की, जिसके बाद फोर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के दौरान सोनिया सहरावत के कंधे में चोट लगी और उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ। उनका इलाज किया गया, लेकिन 20 जुलाई के बाद से उन्होंने दोबारा ड्यूटी जॉइन नहीं की है। फिलहाल वह स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को सोनिया सहरावत अन्य घायल जवानों के साथ सीआरपीएफ मुख्यालय पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने भी उनसे मुलाकात की।

अब जांच के दायरे में अकाउंट

असिस्टेंट कमांडेंट  सोनिया सहरावत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6.28 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह यहां अक्सर अपनी निजी जिंदगी और कभी-कभी वर्दी में ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। हालांकि, हाल ही में वायरल हुई उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद अब उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां आधिकारिक जांच के दायरे में आ गई हैं। इस बीच, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बुधवार को सोनिया सहरावत और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अन्य सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मुश्किल हालात में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए जवानों की सराहना की और उनके काम की प्रशंसा की।

सीआरपीएफ की सोशल मीडिया नीति क्या कहती है?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने जवानों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, जवानों को किसी भी पोस्ट में तथ्य और निजी राय के बीच साफ अंतर रखना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया, ब्लॉग या किसी भी ऑनलाइन मंच पर साझा किए गए कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। जवानों को यह भी साफ लिखने की सलाह दी गई है कि उनकी निजी राय सरकार या सीआरपीएफ का आधिकारिक रुख नहीं है। सीआरपीएफ ने अपने कर्मियों को सरकारी नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने और सोशल मीडिया पर राजनीतिक या धार्मिक टिप्पणी करने से भी मना किया है। बल का कहना है कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों की सोशल मीडिया पोस्ट को संगठन के नेतृत्व ने उचित नहीं माना था।

बल की ओर से जारी सलाह में जवानों से यह भी कहा गया है कि वे अपने परिवार और दोस्तों को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में जागरूक करें, ताकि वे अनजाने में कोई संवेदनशील जानकारी साझा न कर दें। इसके अलावा, परिवार की निजता का ध्यान रखने, जरूरत न होने पर लोकेशन और जियो-टैगिंग बंद रखने, निजी अकाउंट की सेटिंग का इस्तेमाल करने और संवेदनशील या विवादित मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरी सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।

वर्ल्ड अपडेट्स:UNSC में सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को जवाब: कहा- सीमा पार आतंकवाद से सहयोग का आधार खत्म

भारत ने UNSC में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार खत्म कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास और सद्भावना के बिना सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। प्राकृतिक संसाधन शासन पर UNSC की हाई-लेवल ओपन डिबेट में पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए राजदूत हरीश पारवतननेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल “झूठा नैरेटिव” फैलाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत ने यह भी कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनी देता रहेगा और अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं को तेज करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: ऐसा करने वाला पहला EU देश फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। चीन का ताइवान स्ट्रेट में 2 दिन का लाइव-फायर ड्रिल: फुजियान के पास समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास
चीन ने गुरुवार से ताइवान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में 2 दिन का लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह ड्रिल दक्षिण-पूर्वी प्रांत फुजियान के तट के पास हो रही है। समुद्री अधिकारियों के नोटिस के मुताबिक, अभ्यास दोनों दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक डोंगशान द्वीप के आसपास होगा। यह इलाका गुआंगदोंग प्रांत की सीमा के पास है। यह ड्रिल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के एक दिन बाद शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच ताइवान समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार चीन के इस दावे को खारिज करती है। इससे पहले दिसंबर में चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। यह अभ्यास अमेरिका की ओर से ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की घोषणा के बाद हुआ था। उस समय चीन की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 10 घंटे के लाइव-फायर अभ्यास के दौरान ताइवान के उत्तर और दक्षिण में समुद्री इलाकों में रॉकेट दागे थे। अफ्रीका में बढ़ती गर्मी से ‘रेगिस्तान के जहाज’ भी बेहाल: हीट स्ट्रेस, पानी की कमी और बीमारियों से बढ़ रही मौतें
अफ्रीका में बढ़ते तापमान का असर अब रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर भी पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में ऊंट पालक अली उमेर के मुताबिक, तेज गर्मी से ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी आ रहा है और गर्म रेत से उनकी चमड़ी और बाल प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में उन्होंने गर्मी के कारण ऊंट के 8 बच्चों को खो दिया। वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, थकान, डिहाइड्रेशन और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पानी और वनस्पति की कमी के साथ छाया का घटता क्षेत्र भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। पड़ोसी देश सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत का संकट गंभीर है। जून में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 46% ऊंट पालने वाले परिवारों में सूखे से ऊंटों की मौत हुई। उत्तरी सोमालिया के सूल क्षेत्र में यह दर करीब 73% तक पहुंच गई। उत्तर-पूर्वी केन्या में भी पशु चिकित्सकों ने ऊंटों में अत्यधिक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की है। एक पशु चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गर्मी के कारण ऊंटों की मौत 15% से ज्यादा बढ़ी है। गर्मी के तनाव से ऊंटों में दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट सामान्य तौर पर करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को शरीर के तापमान में बदलाव, कम पसीना और पानी की कम खपत जैसे तरीकों से सहन कर सकते हैं। लेकिन सहारा के कई हिस्सों में गर्मियों का तापमान अब अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है।

भारत के स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर वर्ल्ड मीडिया:NYT ने लिखा- प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन झुके नहीं; गार्डियन बोला- छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पथराव भी हुआ। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को प्रमुखता से कवर किया है। पढ़िए, भारत के इस युवा आंदोलन पर विदेशी मीडिया ने क्या लिखा… न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे अडिग अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटे। अखबार के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाबदेही की मांग पर डटे रहे। अखबार ने लिखा कि संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समूहों के अनुसार, सोमवार की झड़प में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया। द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र आंदोलन जारी है। अखबार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर लौटे और आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 50 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। अखबार ने लिखा कि बाद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। द गार्डियन ने प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी चोटें आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 60 लोग घायल हुए, जबकि एक प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अखबार ने लिखा कि आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की। अल जजीरा: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन छात्र फिर सड़कों पर अल जजीरा ने लिखा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। रिपोर्ट में कहा गया कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। अल जजीरा ने घटनास्थल पर टूटे बैरिकेड, बिखरे सामान और संघर्ष के निशानों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर युवाओं में पिछले दो महीनों से नाराजगी है। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक आंदोलन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई। विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। BBC: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें कम से कम 60 लोग घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने 118 जवानों के घायल होने और 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बना मंच और अस्थायी टेंट भी हटा दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने BBC को बताया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। हालांकि, पुलिस और केंद्र सरकार ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। BBC ने अपनी रिपोर्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला।