अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीति की प्रभावशाली आवाज टकर कार्लसन फिर चर्चा में हैं। कभी उनकी लोकप्रियता फिल्मी सितारों जैसी थी। अब वे राष्ट्रपति ट्रम्प से मतभेद और नई राजनीतिक पार्टी के विचार को लेकर सुर्खियों में हैं। कार्लसन लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और मीडिया की सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी आवाजों में गिने जाते हैं। इमिग्रेशन विरोध, श्वेत पहचान और राष्ट्रवादी मुद्दों पर उनके आक्रामक विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वे वर्षों तक रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रबल समर्थक रहे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रम्प ने अपने चुनावी वादों के विपरीत कदम उठाया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट पर यह स्वीकार भी किया कि ट्रम्प को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में तीसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार सामने रखकर हलचल पैदा कर दी। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर भी सवाल उठा चुके हैं। ट्रम्प द्वारा अल्लाह शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में प्रस्तुत करने की भी उन्होंने आलोचना की। गौरतलब है कि अमेरिका में मुख्य रूप से दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था (टू-पार्टी सिस्टम) है, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहता है।
58 वर्षीय कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन मीडिया जगत से जुड़े रहे। इतिहास में स्नातक करने के बाद टकर ने पत्रिकाओं और अखबारों में काम किया तथा 1995 में पीबीएस से टीवी करियर की शुरुआत की। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ से मिली। यह शो औसतन करीब 30 लाख दर्शकों तक पहुंचता था और कार्लसन अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके नाम वाली टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रम्प से जुड़े उत्पादों से भी अधिक बताई गई। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक 2020-21 के दौरान कंजरवेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा प्रभाव रखने वाला शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति था।
हालांकि उनकी पहचान विवादों से भी जुड़ी रही। उन्होंने इमिग्रेशन, नस्ल और पहचान की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। वे बार-बार यह दावा करते रहे कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन विवादों के चलते डिज्नी और लेक्सस जैसी कंपनियों ने उनके शो से विज्ञापन हटा लिए थे। 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद उन्होंने अपना स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया। आज भी वे अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादास्पद आवाजों में शामिल हैं।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शनिवार को तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। छह दिन तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार के पहले दिन ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में सुबह से ही लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे कार्यक्रम में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। खामेनेई का ताबूत ईरानी झंडे में लपेटकर मंच पर रखा गया था। उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत भी रखे गए। ताबूत देखते ही कई लोग रो पड़े और कई श्रद्धालु फूट-फूटकर बिलखते नजर आए। इस दौरान भीड़ लगातार ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजराइल पर खुदा का कहर’ के नारे लगाती रही। कई लोग बदला लेने की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। अंतिम यात्रा 6 जुलाई को तेहरान से निकलेगी। इसके बाद पार्थिव शरीर 7 जुलाई को कोम, 8 जुलाई को इराक के नजफ और करबला और 9 जुलाई को मशहद ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. अंतिम संस्कार में 100 ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे: अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए। 2. तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा और लोगों के लिए विशेष इंतजाम: अंतिम संस्कार को देखते हुए सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई। मेट्रो और सरकारी बसें मुफ्त रहीं, होटलों में 50% तक छूट दी गई, 5,000 से ज्यादा स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई और दूसरे शहरों से विशेष ट्रेनें चलाई गईं। 3. खामेनेई की अंतिम यात्रा 5 शहरों से गुजरेगी: अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर क़ोम, इराक के करबला और नजफ होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 4. ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकी, परमाणु ठिकानों के निरीक्षण से भी इनकार: अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका-ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल रोक दी गई है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ट्रम्प का दावा- ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडे्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को अधिकारी “सदी का अंतिम संस्कार” बता रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 1.2 करोड़ से लेकर 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक शोक समारोह बन गया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए इस छह दिवसीय कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ रही है और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसी बीच यह भी सामने आया है कि खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार समारोह में शामिल नहीं होंगे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अभूतपूर्व तैयारियां और कड़ी सुरक्षा
इस बार की तैयारियां किसी भी सरकारी कार्यक्रम से कहीं ज्यादा बड़ी बताई जा रही हैं। पूरे आयोजन की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” संभाल रही है। तेहरान से लेकर अन्य शहरों तक सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
दुनिया भर की नजरें
तेहरान में होने वाला यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मंच भी बन गया है। दर्जनों देशों से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और संसद अध्यक्ष जैसे नेता शामिल हो रहे हैं। करीब 800 विदेशी पत्रकार इस पूरे कार्यक्रम की कवरेज कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है।
भीड़ प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था
अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। खामेनेई का पार्थिव शरीर ऊंचे मंच पर रखा गया है, जहां लोग 15-20 मिनट के भीतर दर्शन कर बाहर निकल रहे हैं। जमकारान मस्जिद जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जनाजे की नमाज और अन्य रस्में भी आयोजित की जा रही हैं।
छह दिनों का पूरा कार्यक्रम
अंतिम संस्कार कई शहरों में चरणबद्ध तरीके से हो रहा है:
- 4–6 जुलाई: तेहरान में अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि
- 7 जुलाई: कोम में धार्मिक कार्यक्रम
- 8 जुलाई: इराक के नजफ और कर्बला में जुलूस
- 9 जुलाई: मशहद में अंतिम दफन
इसके बाद पूरे देश में 40 दिनों तक शोक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम चलेंगे।
प्रतीकात्मक संदेश
आयोजन का नारा “We Must Rise” रखा गया है, जिसे मुट्ठी भींचे हाथ के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक ताकत और शिया दुनिया में उसके प्रभाव का प्रदर्शन भी है।
वैश्विक शोक और ऐतिहासिक भीड़
तेहरान की सड़कें लाखों लोगों से भर चुकी हैं। काले कपड़ों में उमड़ी भीड़, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा घेराबंदी ने पूरे शहर को शोक के विशाल मंच में बदल दिया है। यह आयोजन न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना बन चुका है।
Ayatollah Khamenei Funeral Schedule: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ईरानी सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के मुताबिक एक अघोषित और औचक कार्यक्रम के तहत शहीद नेता अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को उसी स्थान पर ले जाया गया जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के दौरान वे शहीद हुए थे। इस बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बात कर ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की शहादत पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक होने जा रही है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का अनुमान है कि इस अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच सकती है।
क्या है अंतिम संस्कार का पूरा शेड्यूल?
खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार शनिवार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होकर मंगलवार 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाने के साथ संपन्न होगा। इस पूरे 6 दिन का शेड्यूल कुछ ऐसा है-
शनिवार (4 जुलाई): तेहरान के इमाम खमेनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए खामेनेई का पार्थिव शरीर रखा जाएगा।
रविवार (5 जुलाई): सुबह के समय अंतिम संस्कार की विशेष नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा।
सोमवार (6 जुलाई): तेहरान की सड़कों से होते हुए एक बड़ा जनाजा जुलूस गुजरेगा।
मंगलवार (7 जुलाई): पवित्र शहर कौम में अंतिम संस्कार के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बुधवार (8 जुलाई): जनाजे के जुलूस और कार्यक्रमों का सिलसिला पड़ोसी देश इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला तक पहुंचेगा।
गुरुवार (9 जुलाई): खामेनेई के पार्थिव शरीर को वापस ईरान लाया जाएगा और मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ ही इस 6 दिवसीय राजकीय शोक और विदाई समारोह का समापन होगा।
भारत से कौन-कौन पहुंचेगा ईरान?
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत से कई आधिकारिक प्रतिनिधि, राजनेता और आध्यात्मिक गुरु ईरान जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेता 3 जुलाई को ईरान के लिए रवाना हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विंग के प्रमुख पवन खेड़ा को भी यक्रमों में शामिल होने का न्यौता भेजा है।
ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इनवाइट किया है। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर इस राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए तेहरान पहुंच चुके हैं।
लेबनान के अमल मूवमेंट के एक प्रतिनिधिमंडल सहित कई देशों के वीआईपी तेहरान पहुंचने लगे हैं। अमल मूवमेंट ने अंतिम संस्कार से पहले ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालबाफ से मुलाकात की है।
सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा
ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हाकिम इलाही ने बताया कि इजरायली धमकियों और सर्विलांस (निगरानी) के खतरों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने मोजतबा को सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम में शामिल न होने की सलाह दी है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।
तेहरान में महाजुटान के लिए प्रशासन की भारी तैयारी
आईआरजीसी की तेहरान कमान के कमांडर और अंतिम संस्कार आयोजन समिति के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हसन हसनजादेह ने बताया कि तेहरान में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीतियां तैयार की गई हैं। तेहरान की कोई भी एक सड़क इतनी भारी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालने में सक्षम नहीं है। इसलिए अधिकारियों ने एक सिंगल रूट की जगह पूरी राजधानी में एक विस्तृत कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। समारोह क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
जहां खामेनेई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा वहां परिवार के लिए अलग से बैठने की जगह बनाई गई है। मुख्य मंच को ऊंचाई पर बनाया गया है ताकि भीड़ को स्पष्ट रूप से दर्शन हो सकें। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कुरान पाठकों, धार्मिक कवियों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी। तेहरान की मेट्रो और बस सेवाएं पूरी क्षमता के साथ चलाई जाएंगी। शहर के चारों तरफ ट्रैफिक कंट्रोल जोन और पांच समर्पित सर्विस सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर लोगों को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता सुविधाएं और प्रार्थना स्थल उपलब्ध कराएंगे।
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Japan PM Sanae Takaichi: भारत और जापान के बीच हमेशा से ही गहरे और मजबूत रणनीतिक संबंध रहे हैं। लेकिन नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान यह रिश्ता एक नए और बेहद आत्मीय मोड़ पर पहुंच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद जापान की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को अपनी ‘छोटी बहन’ कहकर संबोधित किया।
पीएम मोदी ने ताकाइची को एक दूरदर्शी और ‘जापान फर्स्ट प्रधानमंत्री’ बताया। वैश्विक मंच पर जब चीन की आक्रामकता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में एक महिला नेता के हाथ में जापान की कमान होना और भारत के साथ उनका यह तालमेल बेहद अहम माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची आखिर कौन हैं और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है।
कौन हैं सनाए ताकाइची?
सनाए ताकाइची का जन्म 1961 में जापान के नारा प्रांत में हुआ था। वह जापान की राजनीति में एक बेहद कद्दावर, प्रखर और राष्ट्रवादी नेता के रूप में जानी जाती हैं। जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) से जुड़ी ताकाइची ने रूढ़िवादी और पुरुष-प्रधान माने जाने वाले जापानी राजनीतिक परिदृश्य में अपनी एक अलग और बेहद मजबूत पहचान बनाई है। वह जापान के पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे की बेहद करीबी और उनकी नीतियों की प्रबल समर्थक रही हैं।
रॉक बैंड से लेकर पीएम की कुर्सी तक का सफर
ताकाइची की शख्सियत काफी दिलचस्प और बहुआयामी है। राजनीति में आने से पहले अपने कॉलेज के दिनों में वह एक हेवी मेटल रॉक बैंड में ड्रम बजाती थीं और उन्हें मोटरबाइक्स चलाने का बेहद शौक रहा है। उन्होंने कोबे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और बाद में प्रतिष्ठित ‘मात्सुशिता इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नमेंट एंड मैनेजमेंट’ से राजनीति की बारीकियां सीखीं। उन्होंने अमेरिका में कांग्रेसनल फेलो के रूप में भी काम किया है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय राजनीति का गहरा अनुभव मिला।
जापान की राजनीति में ‘आयरन लेडी’ की छवि
सनाए ताकाइची को जापान की ‘आयरन लेडी’ भी कहा जाता है। वह अपनी स्पष्टवादिता और मजबूत आर्थिक व रक्षा नीतियों के लिए जानी जाती हैं। वह जापान की सैन्य ताकत को मजबूत करने और रक्षा बजट को बढ़ाने की वकालत करती रही हैं। शिंजो आबे की तरह ही वह भी ‘इकोनॉमिक्स’ और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक के विजन को आगे बढ़ा रही हैं।
पीएम मोदी से जुड़ाव और भारत-जापान का नया अध्याय
शिखर वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सनाए ताकाइची की यह भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रही है। दोनों देशों ने साफ संकेत दिया है कि उनकी यह ऐतिहासिक साझेदारी अब केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में भारत और जापान मिलकर रक्षा, अत्याधुनिक तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन और ग्रीन एनर्जी जैसे अहम और रणनीतिक मोर्चों पर एक साथ मिलकर कदम बढ़ाएंगे।
Maruti Suzukicar plant in Haryana: ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे। यह भारत में मारुति सुजुकी का चौथा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जिसे देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खरखौदा प्लांट में मारुति सुजुकी कंपनी और उससे जुड़े सप्लायर नेटवर्क सहित कुल निवेश करीब 35,000 करोड़ रुपये का है। यह देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है।
यह उद्घाटन भारत और जापान के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी को भी दिखाता है, क्योंकि मारुति सुजुकी भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जापानी निवेश के सबसे सफल उदाहरणों में से एक है। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।
10 लाख वाहनों की होगी बढ़ोतरी
‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह चालू होने पर यह प्लांट मारुति सुजुकी की सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 10 लाख गाड़ियों तक बढ़ा देगा, जिससे यह कंपनी के सबसे बड़े प्रोडक्शन सेंटर्स में से एक बन जाएगा। यह प्लांट आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं से लैस होगा। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।
यह उद्घाटन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है। भारत ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के लिए ग्लोबल प्रोडक्शन बेस बनने का लक्ष्य रख रहा है। उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष की मौजूदगी भारत-जापान के बीच इंडस्ट्रियल सहयोग, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी के क्षेत्र में रणनीतिक महत्व को भी उजागर करती है।
21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद
इस परियोजना से 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। जबकि ऑटो कंपोनेंट, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और अन्य सहायक उद्योगों में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत और जापान के बीच आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। मारुति सुजुकी को भारत में जापानी निवेश की सबसे सफल कहानियों में गिना जाता है। यह नया प्लांट दोनों देशों के सहयोग को और नई ऊंचाई देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरखौदा प्लांट के शुरू होने से भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी इससे बड़ा बल मिलेगा। जानकारों का कहना है कि यह नया प्लांट न केवल हरियाणा में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि वैश्विक ऑटोमोबाइल मार्केट में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।
जापान की प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े।
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तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने PM मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की।

बेल्जियम ने FIFA World Cup के इतिहास में सबसे शानदार वापसी करते हुए 86वें मिनट के बाद तीन गोल कर सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज करते हुए टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। जिसमें 125वें मिनट में रिकॉर्ड-तोड़ पेनल्टी भी शामिल थी।
ल्यूमेन फील्ड में गुरुवार सुबह खेले गये फीफा विश्वकप के राउंड ऑफ 32 में बेल्जियम आखिरी समय में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज की। मैच के ज़्यादातर समय 2-0 से पीछे रहने के बाद बेल्जियम बाहर होने की कगार पर था, लेकिन उन्होंने अद्भुत वापसी की। उन्होंने एक लगभग हारी हुई बाजी को पलटते हुए टूर्नामेंट की सबसे यादगार नॉकआउट जीतों में से एक में बदल दिया। सब्स्टीट्यूट रोमेलु लुकाकू ने 86वें मिनट में गोल करके वापसी की शुरुआत की और तीन मिनट बाद कप्तान यूरी टिएलेमैन्स ने हेडर से बराबरी का गोल करके मैच को अतिरिक्त समय में पहुंचा दिया।
मैच के ज़्यादातर समय दबदबा बनाने के बाद सेनेगल की शानदार जीत तय लग रही थी। हबीब डियारा ने 25वें मिनट में गोल करके खाता खोला और लगातार हमले के दबाव का फायदा उठाते हुए बेल्जियम को पीछे कर दिया। अफ्रीकी टीम ने 51वें मिनट में अपनी पकड़ और मज़बूत की, जब इस्माइला सार ने शानदार फिनिशिंग के साथ बढ़त को दोगुना कर दिया, जिससे बेल्जियम के जल्दी बाहर होने का खतरा मंडराने लगा।
मैच में बेल्जियम अधिकतर समय सेनेगल के अनुशासित रक्षापंक्ति को तोड़ने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन लुकाकू के मैदान पर आने से मैच का रुख बदल गया। स्ट्राइकर के 86वें मिनट में करीब से किए गए गोल ने बेल्जियम का हौसला बढ़ाया, और कुछ ही देर बाद टिएलेमैन्स ने लिएंड्रो ट्रॉसार्ड के क्रॉस पर शानदार हेडर से गोल करके स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और सेनेगल के समर्थकों को हैरान कर दिया।
अतिरिक्त समय में और भी रोमांच देखने को मिला क्योंकि दोनों टीमें निर्णायक गोल की तलाश में थीं। बेल्जियम जीत के बहुत करीब पहुंच गया था जब डोडी लुकेबाकियो ने अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ के अंत में क्रॉसबार पर शॉट मारा, जबकि सेनेगल ने काउंटर-अटैक में कुछ मौके बनाए लेकिन फिर से बढ़त हासिल करने में नाकाम रहे।
Action packed from start to finish #FIFAWorldCup pic.twitter.com/EcxO1z8IJv
— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) July 2, 2026
निर्णायक पल आखिरी सेकंड में आया। लंबे VR Review के बाद, रेफरी हेक्टर मार्टिनेज ने बेल्जियम को पेनल्टी दी। उन्होंने फैसला सुनाया कि शेख कमारा ने पेनल्टी एरिया के अंदर टिएलेमैन्स को फाउल किया था, जब वे एक लो क्रॉस को क्लियर करने की कोशिश कर रहे थे। इस फैसले के बाद सेनेगल के खिलाड़ियों ने जोरदार विरोध किया, जिससे स्पॉट-किक लेने में काफी देर हो गई।
मैच का सारा दारोमदार अपने कंधों पर होने के बावजूद, टिएलेमैन्स ने संयम बनाए रखा और गोलकीपर मोरी डियाव को छकाते हुए 125वें मिनट में पेनल्टी को गोलपोस्ट के ऊपरी-दाएं कोने में पहुंचाकर एक अद्भुत वापसी पूरी की। आधिकारिक तौर पर 124 मिनट और 44 सेकंड पर हुए इस गोल ने फीफा विश्वकप कप के इतिहास में मैच जिताने वाले सबसे देर से किए गए गोल का रिकॉर्ड बनाया। इस रोमांचक जीत ने बेल्जियम को राउंड ऑफ़ 16 में पहुंचा दिया है, जहां वे सिएटल लौटकर अमेरिका का सामना करेंगे।
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— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) July 1, 2026
सेनेगल के लिए, उनके शानदार प्रदर्शन का अंत दिल तोड़ने वाला रहा। 80 मिनट से ज़्यादा समय तक मैच पर पकड़ बनाए रखने और दो गोल की बढ़त के साथ जीत पक्की लग रही थी, लेकिन बेल्जियम ने मैच के आखिर में अविश्वसनीय वापसी करते हुए फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अब तक की सबसे बेहतरीन वापसी की कहानियों में से एक लिख दी।

– मुख्यमंत्री योगी ने सहारनपुर के 5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का किया सम्मान
– मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्नों का कराया अन्नप्राशन, कक्षाओं में जाकर बच्चों से किया संवाद
– प्रदर्शनी का अवलोकन कर मुख्यमंत्री योगी ने जाना बच्चों का नवाचार
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों किताब-कॉपी, बैग, स्टेशनरी किट पाकर नौनिहालों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि स्कूल आओगे, इस पर सभी बच्चों ने मुस्कुराकर स्कूल आने का वादा किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर बच्चों के नवाचार को भी जाना। मुख्यमंत्री ने मंच से प्रदर्शनी में शामिल बच्चों के आत्मविश्वास की भी सराहना की। परिषदीय विद्यालयों की बच्चियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी स्थल और मंच पर बच्चों से संवाद किया तथा उन्हें चॉकलेट भी दीं।
भोजन मंत्र के उपरांत बच्चों ने किया भोजन
कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने हाथ से भोजन परोसा। इसमें प्रदेश सरकार के मंत्रियों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री योगी का साथ दिया। बच्चों ने भोजन ग्रहण करने से पहले मंत्रपाठ किया। प्रदेश के मुखिया को अपने लिए भोजन परोसते देखकर बच्चे आह्लादित हो उठे।
मुख्यमंत्री योगी ने नन्हे-मुन्नों से किया परिचय
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री योगी क्लासरूम पहुंच गए। उन्होंने यहां एक-एक कर सभी बच्चों से नाम पूछा और उनसे बातचीत की। बच्चे भी मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर खुशी से उनसे बातचीत करते रहे। बच्चों ने मुख्यमंत्री के प्रश्नों के बालसुलभ निश्छल उत्तर दिए तो सभी खिलखिला उठे। मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रशंसा कर उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें चॉकलेट भी दीं।
बच्चों का कराया अन्नप्राशन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आए नन्हे-मुन्नों का अन्नप्राशन भी कराया। विपरीत मौसम के कारण क्लास रूम में ही यह आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों को चंदन/टीका लगाकर खीर खिलाई और उपहारस्वरूप उन्हें खिलौने भी दिए। जिन बच्चों का अन्नप्राशन हुआ, वे मुख्यमंत्री की गोद में भी खेले।
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मुख्यमंत्री के हाथों 5 बच्चों को मिली कॉपी-किताबें, बैग व स्टेशनरी किट
साक्षी – कक्षा-1, पीएम श्री विद्यालय, बडढ़ा खेड़ा विकास क्षेत्र सरसावा
आरव – कक्षा-1, मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय, सढौली हरिया विकास क्षेत्र रामपुर मनिहारान
लव्यांश – कक्षा-1, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इस्माइलपुर विकास क्षेत्र पुंवारका
अस्मिता – कक्षा-1, प्राथमिक विद्यालय, पानसर विकास क्षेत्र मुजफ्फराबाद
रविंद्र – कक्षा-4, पीएम श्री विद्यालय, दलहेडी विकास क्षेत्र नानौता
5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का सम्मान
मुख्यमंत्री योगी ने सहारनपुर के 5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का भी सम्मान किया। सम्मान पाने वालों में निम्न प्रधानाध्यापक शामिल रहे।
इंदु बेस – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर लबडोला विकास क्षेत्र नागल
कुलदीप अरोड़ा – प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, सरसावा नंबर-1 विकास क्षेत्र सरसावा
अश्वनी कुमार शर्मा – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, तबर्रकपुर विकास क्षेत्र गंगोह
राज सिंह – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, घान्ना खंडी विकास क्षेत्र पुंवारका
मोहिनी पाल – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – कंपोजिट विद्यालय, खिड़का जुनारदार विकास क्षेत्र मुजफ्फराबाद

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच चल रही बयानबाजी और तल्खी अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। इस विवाद में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता अरुण यादव की भी एंट्री हो गई है। इसके साथ कांग्रेस के सीनियर नेता सत्यवत चतुर्वेदी की बेटी और पार्टी की महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है।
पूर्व मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे हस्तक्षेप करने और प्रदेश संगठन में एकता कायम करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर अरुण यादव ने लिखा कि माननीय राहुल गांधी जी, मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत उन कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे है, इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का होश मिलजुल कर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर पाएगा ऐसी स्थिति में जवाबदार लोग ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे तो वह समयोचित नहीं होगी । कृपा कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से संघर्षशील कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाएं तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करवाने की कृपा करें।
पुत्र मोह में फंसे दिग्विजय सिंह-वहीं प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर 'दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार' नाम से एक लेख लिखा है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “अपनों के ही इस घातक बाण से कब मुक्त होगी मध्य प्रदेश कांग्रेस? उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास के मामले में सच क्या है और झूठ क्या, कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है। आज हर सच्चे कांग्रेसी का सिर शर्म से झुक गया है। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जिस प्रकार मोर्चा खोला वह निंदनीय है।
इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो वरिष्ठ और मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह उन्हें आमने-सामने बैठकर या फ़ोन करके बता सकते थे। उनके पास दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी के तमाम आंतरिक मंच उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी बात रख सकते थे. लेकिन इन सब मर्यादाओं को दरकिनार कर हाथ में फ़ाइल लेकर उज्जैन जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बात को उछालने का क्या औचित्य है? इस तरह सरेआम मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना, जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. आखिर यह सारी कवायद क्यों की गई।
निधि चतुर्वेदी का कहना है “दिग्विजय सिंह की यह छटपटाहट, यह गुस्सा और यह अमर्यादित आचरण और कुछ नहीं, बल्कि 'पुत्र-मोह' में उठाया गया बेहद अशोभनीय, पीड़ादायक और निंदनीय कदम है। अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में वे भूल चुके हैं कि पार्टी का अनुशासन क्या होता है। जब देशभर में राहुल गांधी भाजपा और संघ की जनविरोधी विचारधारा के खिलाफ सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, तब पार्टी के एक शीर्ष नेता द्वारा इस तरह की बयानबाज़ी करना कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर करारा तमाचा है।

Swami Vivekananda Life Story: भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, राष्ट्रनिर्माता और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि केवल उन्हें श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में अपनाने का भी संदेश देती है।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार
उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और सनातन दर्शन को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई तथा अपने ओजस्वी विचारों से करोड़ों लोगों को आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाया। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं, इसलिए उन्होंने युवाओं को आत्मबल, चरित्र निर्माण और कर्मयोग का संदेश दिया।
स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में जो कार्य किए, उनका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है। उन्होंने मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान बताया और शिक्षा, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक जागरण को समाज की उन्नति का आधार माना। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों, व्याख्यानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है, जहां उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है।
यदि आज भी युवा स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलें, तो वे न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं, बल्कि समाज और देश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि हर भारतीय के लिए आत्मचिंतन, प्रेरणा और राष्ट्रसेवा के संकल्प का विशेष अवसर मानी जाती है।
- जन्म और प्रारंभिक जीवन:
- रामकृष्ण परमहंस से मिलना:
- शिकागो विश्व धर्म महासभा:
- विशेषताएं और विचार:
- स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:
- स्वामी विवेकानंद का निधन:
आइए, जानते हैं स्वामी विवेकानंद के जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें:
जन्म और प्रारंभिक जीवन:
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उनका असली नाम था नरेन्द्रनाथ दत्त। वे एक सम्पन्न बंगाली परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त, एक प्रसिद्ध वकील थे और मां, भुवनेश्वरी देवी, धार्मिक विचारों वाली महिला थीं।
नरेन्द्रनाथ बचपन से ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। वे वेद, शास्त्र और भारतीय संस्कृति के बारे में गहरी रुचि रखते थे। उन्हें बचपन से ही योग और ध्यान में रुचि थी, और उनका मानसिक विकास बहुत तीव्र था।
रामकृष्ण परमहंस से मिलना:
स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से 1881 में पहली बार मुलाकात की, और वे उनके शिष्य बन गए। रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें आत्म-ज्ञान, भारतीय संस्कृति, और जीवन के उद्देश्य को समझने में मार्गदर्शन किया। स्वामी विवेकानंद ने उनकी शिक्षा के आधार पर आत्मा की शक्ति, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के विषय में गहरे विचार किए।ALSO READ: Swami Vivekananda Essay: स्वामी विवेकानंद पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में
शिकागो विश्व धर्म महासभा:
स्वामी विवेकानंद की पहचान दुनियाभर में 1893 के शिकागो विश्व धर्म महासभा में उनके प्रसिद्ध भाषण से हुई। इस भाषण में उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और मानवता के महत्व पर जोर दिया। उनका उद्घाटन भाषण आज भी एक प्रेरणा का स्रोत है:
'आपका भारत, संसार को वह आध्यात्मिक दृष्टिकोण देगा, जिससे धर्म के प्रति असहिष्णुता, कट्टरवाद और अलगाव की भावना समाप्त होगी।'
यह भाषण आज भी धार्मिक और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
विशेषताएं और विचार:
स्वामी विवेकानंद के जीवन में कई विशेषताएँ और विचार थे जो उनके योगदान को अद्वितीय बनाते हैं:
1. आत्मविश्वास और स्वावलंबन: वे हमेशा आत्मविश्वास और स्वावलंबन के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और अपनी ताकत को पहचानना चाहिए।
2. समाज सुधार: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे जातिवाद, अंधविश्वास, और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना चाहिए। वे महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के पक्षधर थे।
3. योग और ध्यान: उन्होंने योग को जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना और यह सिखाया कि योग के माध्यम से आत्मा और शरीर का संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
4. धार्मिक सहिष्णुता: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि सभी धर्मों का मूल एक ही है, और हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, हर धर्म का अपना महत्व और उद्देश्य है, लेकिन सच्चाई एक ही है।
5. भारत के गौरव का पुनर्निर्माण: स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज को जागरूक किया कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझें और गर्व करें। उनका मानना था कि भारत का महान अतीत उसके भविष्य को रोशन कर सकता है।
स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:
स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हर आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। उनका जीवन न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।
महत्वपूर्ण उद्धरण:
1. 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।'
2. 'अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाओ, यही सफलता की कुंजी है।'
3. 'आपका काम ही आपके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा प्रदर्शन है।'
4. 'जो कुछ भी तुम कर सकते हो, या सोच सकते हो कि तुम कर सकते हो, उसे शुरू करो। साहस में बुद्धिमत्ता और शक्ति है।'
स्वामी विवेकानंद का निधन:
उनका निधन 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में हुआ था। उनके अनुयायियों का मानना था कि स्वामी जी ने अंतिम समय में बेलूर मठ में ध्यान लगाते हुए अपनी इच्छा से महासमाधि प्राप्त कर ली थी तथा उनका अंतिम संस्कार, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की जगह पर यानी बेलूर में गंगा नदी के तट पर ही किया गया था। हालांकि उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचार और कार्य आज भी जीवित हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं।
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