Monsoon Rain Update: 7000 किलोमीटर लंबी बारिश की पट्टी दिखी! क्या उत्तर भारत में फिर एक्टिव होगा मानसून? IMD ने जारी किया नया अलर्ट

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के अपने सबसे एक्टिव स्टेज में पहुंचने के बाद देश के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश हो रही है। असम सहित कई इलाकों में बाढ़ जानलेवा हो गई है। इस बीच उपग्रह से कुछ ऐसी तस्वीरें शामने आई हैं जो इशारा कर रही हैं कि बारिश की इंटेसिटी और बढ़ने वाली है। असल में इन तस्वीरों में एशिया महाद्वीप के ऊपर 7000 से 10000 किलोमीटर लंबी बारिश की एक विशाल पट्टी (Rain Band) दिखाई दी है।

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह विशाल मानसूनी प्रणाली उत्तर भारत से शुरू होकर हिमालय, चीन और दक्षिण कोरिया तक फैली हुई है। ये आने वाले दिनों में भारत के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश का संकेत दे रही है।

इस क्लाउड स्ट्रक्चर को ‘मानसून कन्वर्जेंस जोन’ कहा जाता है। हिंद महासागर से आने वाली नमी से भरी हवाओं और पूरे एशिया में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के बीच टकराव की वजह से ये बनते हैं। इसी वजह से फिलहाल हजारों किलोमीटर के दायरे में बारिश लाने वाले बादलों का नया कॉरिडोर लगातार बन रहा है।

सामान्य से 170-180% अधिक हुई बारिश

मौसम की इस णाली के सक्रिय होने से पूरे देश में मानसूनी गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में दर्ज की गई बारिश दैनिक सामान्य औसत से करीब 170 से 180 प्रतिशत अधिक रही है। यह इस सीजन का अब तक का सबसे मजबूत और आक्रामक बारिश का स्पेल साबित हो रहा है। इस मानसूनी दौर की वजह से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहले से ही भारी बारिश दर्ज की जा रही है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्रों की वजह से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है।

फसलों और जल स्तर को मिलेगा भारी फायदा

आपको बता दें कि मानसून के असमान शुरुआती दौर की वजह से देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन बारिश का यह ताजा दौर मौसमी प्रदर्शन में बड़ा सुधार लाएगा। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बारिश से उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी में काफी कमी आएगी। इसके अलावा जलाशयों का जल स्तर सुधरेगा और खरीफ की फसलों को भी इससे बड़ा फायदा पहुंचेगा।

बाढ़ और भूस्खलन का बढ़ा खतरा

लगातार हो रही भारी बारिश के फायदों के साथ-साथ प्रशासन इसके खतरों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। पूर्वानुमान बताते हैं कि मानसून का यह सक्रिय चरण इस पूरे सप्ताह जारी रहने की संभावना है। ऐसे में अचानक बाढ़ की स्थिति, शहरी क्षेत्रों में जलभराव, भूस्खलन और नदियों के जल स्तर में तेज बढ़ोतरी का खतरा बड़ा हो गया है। खासकर पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इन खतरों को देखते हुए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पूरे एशिया से जुड़ी है भारतीय मानसून प्रणाली

सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि भारत का मानसून पूरे एशिया में फैले एक बहुत बड़े वायुमंडलीय तंत्र का हिस्सा है। वर्तमान परिसंचरण अरब सागर से लेकर पूर्वी एशिया तक फैला हुआ है, जो कई देशों की मौसमी प्रणालियों को आपस में जोड़ता है और एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र में बारिश को प्रभावित कर रहा है।

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Delhi Weather Today: राजधानी में आज हो सकती है हल्की से मध्यम बारिश, 50 Kmph की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

Delhi Weather Today: दिल्ली में गुरुवार की शुरुआत सुहावने लेकिन उमस भरे मौसम के साथ हुई। इस दौरान सुबह का न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिन के दौरान राजधानी में कुछ जगहों पर बहुत हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, पूरे दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है। वहीं, हवा में नमी का स्तर 80% से 95% के बीच रहने की संभावना है, जिसके चलते तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद लोगों को उमस का एहसास होगा।

IMD ने गुरुवार को आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। हालांकि, दिल्ली के लिए मौसम से जुड़ी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

आने वाले दिनों हल्की बारिश की संभावना

आने वाले कुछ दिनों तक मौसम काफी हद तक ऐसा ही रहने की उम्मीद है। 24 जुलाई को दिल्ली में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है, जबकि 25 जुलाई से 28 जुलाई के बीच शहर में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और अधिकतम तापमान 33°C से 34°C के बीच रहेगा। वहीं, आने वाले दिनों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

बता दें कि बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में बारिश हुई, जिनमें लुटियंस दिल्ली, जंतर-मंतर, सफदरजंग और संगम विहार शामिल हैं। जिस कारण अधिकतम तापमान गिरकर 33.6 डिग्री सेल्सियस हो गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री कम है।

वहीं, दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्र, सफदरजंग ऑब्जर्वेटरी ने सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 12mm बारिश दर्ज की। आया नगर में सबसे ज्यादा 20.1mm बारिश हुई, इसके बाद पालम (18.7 मिमी), सफदरजंग (12 मिमी) और लोधी रोड (9.8 मिमी) का नंबर रहा, जबकि रिज में बहुत कम बारिश दर्ज की गई।

अन्य मौसम केंद्रों में, पालम में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम था। इसके बाद रिज में 33.2 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 0.8 डिग्री कम), लोधी रोड में 33.1 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 0.9 डिग्री कम) और आया नगर में 32 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 2.8 डिग्री कम) तापमान दर्ज किया गया।

IMD ने शहर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और शाम व रात के समय आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश, बिजली कड़कने के साथ आंधी-तूफान और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है।

वहीं, शाम के समय हवा में नमी (रिलेटिव ह्यूमिडिटी) 100% दर्ज की गई।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 65 रहा, जो “संतोषजनक” श्रेणी में आता है। CPCB के AQI पैमाने के मुताबिक, 0 से 50 के बीच की रीडिंग को “अच्छा”, 51-100 को “संतोषजनक”, 101-200 को “मध्यम”, 201-300 को “खराब”, 301-400 को “बहुत खराब” और 401-500 को “गंभीर” माना जाता है।

कमजोर मानसून का असर: खरीफ बुवाई पिछले साल से 6% पीछे, दालों-तिलहन की खेती पर पड़ा ये इंपैक्ट

Weak Monsoon Impact: देश के कई प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की भारी कमी और बारिश में देरी का सीधा असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। मनी कंट्रोल के ईशान गेरा की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत पीछे चल रहा है। किसानों ने इस अवधि तक 65.82 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई की है जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 70.05 मिलियन हेक्टेयर था। बारिश की इस लगातार बनी हुई कमी से सबसे ज्यादा मार दालों, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की खेती पर पड़ी है। आइए जानते हैं कि मानसून की सुस्ती ने किस फसल की बुवाई को कितना प्रभावित किया है और देश में पानी के जलाशयों का क्या हाल है.

दालों की बुवाई में आई सबसे बड़ी गिरावट (15.1% की कमी)

खरीफ फसलों में दालों की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से 15.1 प्रतिशत घटकर अब 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर की बुवाई में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 2.48 मिलियन हेक्टेयर पर आ गई है। मूंग का रकबा 11 प्रतिशत घटकर 2.398 मिलियन हेक्टेयर रहा। उड़द की बुवाई में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है और यह 1.351 मिलियन हेक्टेयर दर्ज की गई।

क्यों चिंताजनक है यह गिरावट?

दालों की बुवाई में यह कमी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत घरेलू उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए पहले से ही आयात पर निर्भर रहता है।

धान, मोटे अनाज, तिलहन और कपास का क्या है हाल?

राहत की बात यह है कि धान की बुवाई पर मानसून की कमी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। यह 16.64 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि के 16.78 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है। मोटे अनाज के रकबे में 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। यह पिछले साल के 13.41 मिलियन हेक्टेयर से गिरकर 11.9 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें बाजरा की बुवाई में 18.5 प्रतिशत और मक्का की बुवाई में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तिलहन का रकबा 5.5 प्रतिशत घटकर 14.71 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कपास की बुवाई में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून में 24% की कमी, इन राज्यों में गंभीर सूखा

1 जून से 19 जुलाई के बीच भारत में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत कम है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का यह घाटा अलग अलग है-

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 27 प्रतिशत की कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 23 प्रतिशत की कमी
  • मध्य भारत: 14 प्रतिशत की कमी

राज्यों के स्तर पर बारिश का घाटा

कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण कई राज्यों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है। झारखंड में 41 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पंजाब में ये कमी 41 प्रतिशत की है। केरल में 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तेलंगाना में 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। तटीय कर्नाटक में 31 फीसदी कम बारिश देखने को मिली है।

जलाशयों का जलस्तर पिछले साल से 39% नीचे

कम बारिश की वजह से देश के जलाशयों में पानी का भंडारण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 34.46 प्रतिशत पानी ही बचा है। यह उपलब्ध पानी पिछले साल की इसी अवधि के जलस्तर का सिर्फ 60.84 प्रतिशत ही है। यानी 39 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत स्तर से भी 1.8 प्रतिशत नीचे चला गया है।

एक दिन देर से ही सही पूरे देश में छा तो गया मानसून पर बारिश के ये 3 आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले, IMD का बिग अपडेट

Monsoon Rain Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को एक बड़ा अपडेट शेयर किया है। इसके मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ते हुए पूरे देश को कवर कर लिया है। पूरे देश में मानसून के छाने में सामान्य तिथि (8 जुलाई) के मुकाबले इस बार महज एक दिन की देरी हुई है। भले ही मानसून पूरे भारत में पहुंच चुका है लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए बारिश के तीन आंकड़े देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। देश में इस समय कुल मिलाकर बारिश की कमी बनी हुई है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियों का उभरना इसके पीछे का एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अल नीनो की स्थिति भारत में कम बारिश की वजह बनती है। आइए जानते हैं मौसम विभाग के वे 3 आंकड़े जो चिंता बढ़ा रहे हैं:

चिंता बढ़ाने वाले बारिश के 3 बड़े आंकड़े

IMD के डेटा के मुताबिक मानसूनी सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक बारिश के आंकड़ों में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। इसे नीचे बिंदुवार समझा जा सकता है-

1- जून महीने में 40% की भारी कमी

भारत में इस साल जून के महीने में करीब 40 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इसमें सबसे बुरी मार मध्य भारत पर पड़ी। यहां जून में 50.4 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई। इतना ही नहीं देश में इस साल जून के दौरान साल 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश दर्ज की गई है।

2- ओवरऑल सीजनल डेफिसिट अभी भी 14% पर

भले ही जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश दिख रही है लेकिन IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 9 जुलाई की अवधि के लिए देश में कुल मिलाकर बारिश की कमी अभी भी 14 प्रतिशत पर बनी हुई है।

3- जुलाई महीने का सूखा अनुमान (94% LPA)

मौसम विभाग ने 30 जून को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में बताया था कि जुलाई के पहले 7 से 10 दिनों में देश भर में बारिश होगी (जो वर्तमान में दिख भी रही है) लेकिन इसके साथ ही विभाग ने आगाह किया है कि पूरा जुलाई महीना सामान्य से अधिक सूखा रहेगा। जुलाई में देश भर में होने वाली बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।

क्या होता है LPA?

एलपीए (Long-Period Average) का मतलब किसी दिए गए समय (जैसे एक महीना या सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई बारिश के उस औसत से होता है जो आम तौर पर 30 से 50 वर्षों की एक लंबी अवधि का निकाला जाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी बारिश का एलपीए (LPA) 87 सेमी है।

जुलाई के शुरुआती 9 दिनों में रहा बड़ा सरप्लस

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सिर्फ जुलाई महीने के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो भारत ने अब तक बारिश का एक बड़ा सरप्लस (अधिकता) देखा है। जहां जुलाई के पहले 9 दिनों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 73.8 मिमी होता है, वहीं देश में इस अवधि में अब तक 101.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इस साल सामान्य से कम रह सकती है कुल मानसूनी बारिश

केरल में इस साल मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई थी जिसने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) की शुरुआत की थी। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को दस्तक देता है। मौसम विभाग के कुल पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल पूरे मानसून सीजन में होने वाली कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) की सिर्फ 90 प्रतिशत होने की संभावना है। इसमें 4 प्रतिशत का मॉडल एरर शामिल है। अल नीनो की स्थिति के चलते इस कमी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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मानसून भी नहीं रोक पाएगा आपकी ट्रैवल प्लानिंग, बारिश से हटकर कुछ खास जुलाई में घूमने की टॉप 6 लोकेशन!

जुलाई का महीना भारत में मानसून का मौसम लेकर आता है, लेकिन अगर आप बारिश से बचते हुए घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो देश में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां इस समय भी मौसम सुहावना रहता है। इन डेस्टिनेशंस पर कम बारिश होने के कारण आप बिना किसी परेशानी के प्राकृतिक नज़ारों, एडवेंचर और संस्कृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं जुलाई में मॉनसून से बचने के लिए भारत की 6 बेहतरीन घूमने लायक जगहों के बारे में:

लाहौल घाटी-हिमालयी शांत वादी

PHOTOS: हिमाचल का स्वर्ग है स्पीति घाटी, हर साल आते हैं बड़ी संख्या में सैलानी

हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी जुलाई में मॉनसून से बचकर घूमने के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यह भी रेन शैडो क्षेत्र में आती है, इसलिए यहां बारिश बहुत कम होती है और मौसम सुहावना बना रहता है। सिस्सू, सूरज ताल, बारालाचा ला और गोंधला किला जैसी जगहें यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को और खास बनाती हैं। बर्फ से ढकी चोटियां, साफ नदियां और शांत वातावरण नेचर लवर को बेहद पसंद आता है। रोड ट्रिप, ट्रेकिंग, कैंपिंग और फोटोग्राफी के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं है।

जैसलमेर-सुनहरी रेगिस्तान नगरी

Rajasthan - Sharvil Holidays

राजस्थान का गोल्डन सिटी जैसलमेर जुलाई में भी घूमने के लिए एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि यहां बारिश बहुत कम होती है। मानसून के दौरान मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो जाता है और टूरिस्ट की भीड़ भी कम रहती है। जैसलमेर किला, पटवों की हवेली, गड़ीसर झील और सैम सैंड ड्यून्स यहां काअट्रैक्शन हैं। रेगिस्तान में ऊंट की सवारी, डेजर्ट सफारी, लोक संगीत और ट्रेडिशनल राजस्थानी संस्कृति का एक्सपीरियंस आपकी जर्नी को यादगार बना देता है। अगर आप रेगिस्तान की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं, तो जुलाई का समय भी अच्छा साबित हो सकता है।

हम्पी-पुरानी खंडहर नगरी

Uragas Immigrated in India Seems an Unproved Hypothesis – Raigar.net

अगर आप हिस्ट्री और आर्किटेक्चर में इंटरेस्ट रखते हैं, तो कर्नाटक का हम्पी जुलाई में घूमने के लिए शानदार डेस्टिनेशन है। हल्की बारिश के कारण यहां का वातावरण हरा-भरा और सुहावना हो जाता है, जिससे प्राचीन मंदिरों और खंडहरों की सुंदरता और बढ़ जाती है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह शहर विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर, लोटस महल और मातंगा हिल जैसी ऐतिहासिक जगहों के लिए प्रसिद्ध है। यहां साइकिल से घूमना, सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखना और विरासत से जुड़ी कहानियों को जानना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है।

स्पीति घाटी-बर्फीला रेगिस्तान

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हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी उन लोगों के लिए स्वर्ग है जो प्रकृति, रोमांच और शांति का आनंद लेना चाहते हैं। रेन शैडो क्षेत्र में होने के कारण यहां जुलाई में बहुत कम बारिश होती है, जिससे रोड ट्रिप और दर्शनीय जगहों की सैर आसान हो जाती है। की मठ, चंद्रताल झील, हिक्किम, कोमिक और धंकर मठ जैसी जगहें यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं। बंजर पहाड़, नीला आसमान और प्राचीन बौद्ध संस्कृति इस घाटी को एक अलग पहचान देते हैं। ट्रेकिंग, बाइकिंग और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

पुडुचेरी-फ्रेंच कोस्टल शांति

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अगर आप समुद्र किनारे सुकून भरी छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो पुडुचेरी एक बेहतरीन ऑप्शन है। जुलाई में यहां दक्षिण-पश्चिम मानसून का असर थोड़ा कम रहता है, जिससे मौसम घूमने के लिए फ्रेंडली बना रहता है। फ्रेंच वास्तुकला, रंग-बिरंगी गलियां, प्रोमेनेड बीच, ऑरोविल और श्री अरविंद आश्रम यहां के मेन अट्रैक्शन हैं। यहां बीच पर सैर, कैफे हॉपिंग, साइकिलिंग और मेडिटेशन का आनंद लिया जा सकता है। शांत वातावरण और खूबसूरत समुद्री नजारे इसे कपल्स और फैमिली ट्रिप दोनों के लिए खास बनाते हैं।

लेह-हिमालय का जादुई स्वर्ग

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अगर आप जुलाई में मॉनसून से दूर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां नीला आसमान, बर्फ से ढके पहाड़ और शांत झीलें आपका स्वागत करें, तो लेह आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है। यह क्षेत्र रेन शैडो ज़ोन में आता है, इसलिए यहां बारिश बेहद कम होती है। जुलाई में पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी, खारदुंग ला, शांति स्तूप और लेह पैलेस जैसी जगहों की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। यहां बाइक ट्रिप, रिवर राफ्टिंग, कैंपिंग और मठों की सैर जैसी एक्टिविटीज आपकी ट्रिप को यादगार बना देती हैं। हालांकि, अधिक ऊंचाई के कारण पहले दिन आराम करना और पानी पीना जरूरी होता है।

अगर आप जुलाई में बारिश से दूर और आरामदायक ट्रिप की तलाश में हैं, तो भारत में ये सभी जगहें शानदार हैं। आप अपनी पसंद और सुविधा से सही डेस्टिनेशन चुनकर मानसून के मौसम में भी यादगार छुट्टियों का आनंद ले सकते हैं। सही प्लानिंग के साथ यह ट्रिप आपके लिए बेहद खास और यादगार साबित होगी।

El Nino को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट, PM मोदी ने मंत्रालयों को आपात योजना बनाने के दिए निर्देश

देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और बारिश की बढ़ती कमी को लेकर चिंता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को ‘अल नीनो’ (El Nino) के संभावित असर से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाओं के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत पर ‘अल नीनो’ के संभावित असर का आकलन करते हुए यूरोप में बढ़ते तापमान जैसी चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों की समीक्षा की। बता दें कि यह समीक्षा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ऐसे समय में की गई है, जब देश के कई इलाकों में बारिश में 40% से अधिक की कमी देखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे मानसून की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखें और खेती, जल संसाधनों, बिजली आपूर्ति और अन्य अहम क्षेत्रों पर पड़ने वाले किसी भी बुरे असर से निपटने के लिए तैयारी सुनिश्चित करें।

बारिश के पैटर्न में हो सकते हैं बदलाव

वहीं, सरकार का आकलन है कि अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कुछ इलाकों में बहुत कम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ और पानी की कमी का खतरा एक साथ बढ़ सकता है।

फिलहाल, तैयारी को मजबूत करने के लिए, जल शक्ति, कृषि, बिजली, रेलवे और अन्य अहम विभागों सहित कई मंत्रालयों को अपने-अपने सेक्टर के हिसाब से आपातकालीन योजनाएं बनाने का निर्देश दिया गया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत से ही नियमित बैठकों के जरिए देश की ‘अल नीनो’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।

इसके अलावा, बदलते हालात पर लगातार नजर रखने के लिए 10 मंत्रालयों के प्रतिनिधियों वाला एक अंतर-मंत्रालयी समूह भी बनाया गया है। गृह मंत्रालय इस समूह के लिए नोडल मंत्रालय के तौर पर काम करेगा और अलग-अलग विभागों के बीच तैयारी और उससे निपटने के उपायों में तालमेल बिठाएगा।

समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि El Nino से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए “पूरी सरकार मिलकर काम करे” और सभी विभाग मिलकर समन्वय में काम करें।

बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जुलाई में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। यह अनुमान तब आया है जब जून 2026, 1901 के बाद से भारत का पांचवां सबसे सूखा जून रहा। इस दौरान देश में बारिश लंबे समय के औसत से 39% कम दर्ज की गई। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि जून में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 92% से भी कम रह सकती है।

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Monsoon Watch 1 July: पंजाब और हरियाणा में भी हुई मानसून की एंट्री पर दिल्ली में नहीं! अब IMD ने जारी किया ये नया अनुमान

Progress of SW Monsoon: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। 1 जुलाई को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए इलाकों में धमाकेदार एंट्री मार ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब पंजाब और हरियाणा के भी कुछ हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली को इसने अभी थोड़ा तरसाया है। वैसे दिल्लीवालों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दस्तक देने को लेकर बेहद राहत भरा नया अनुमान जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा समेत इन राज्यों में बढ़ा मानसून, जानें कहां से गुजर रही सीमा

IMD के मुताबिक एक जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बचे हुए हिस्सों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में मानसून ने अपनी पहुंच दर्ज करा दी है। अभी मानसून की उत्तरी सीमापोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान

भले ही 1 जुलाई की एंट्री में दिल्ली का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा लेकिन मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 2 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूरे हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए मौसम का सिस्टम पूरी तरह तैयार है। यानी अगले 48 घंटों में दिल्ली में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो जाएगी।

पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय, सामान्य से 6 दिन की देरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर है कि बुधवार को मानसून ने पूरे राज्य को आधिकारिक तौर पर कवर कर लिया है। हिमाचल में मानसून का यह आगमन सामान्य तारीख से 6 दिन की देरी से हुआ है। 1 जुलाई को मानसून ने शिमला जिले (शिमला शहर सहित), सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और कांगड़ा के बचे हुए हिस्सों को कवर कर लिया।

इसके साथ ही सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों में भी मानसून पूरी तरह फैल गया है। राज्य में इस पूरे हफ्ते व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे हिमाचल समेत पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

जुलाई महीने के लिए पूरे देश का ओवरऑल वेदर आउटलुक

मौसम विभाग ने जुलाई 2026 के महीने के लिए देश भर में होने वाली औसत बारिश का भी एक अनुमान जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है।

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1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई में देश भर में वर्षा का लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) लगभग 280.4 मिमी हो सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है लेकिन उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है।

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा