Chavda Infra: बोनस शेयर और डिविडेंड की सिफारिश, विस्तार के लिए निवेश बढ़ाने का प्लान

Chavda Infra: इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनी चावड़ा इंफ्रा लिमिटेड के बोर्ड ने बोनस शेयर जारी करने और डिविडेंड देने की सिफारिश की है। यह फैसला 3 अगस्त की बोर्ड मीटिंग में हुआ।

कंपनी ने बताया कि यह प्रस्ताव जरूरी रेगुलेटरी और शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लागू होगा। कंपनी का कहना है कि यह फैसला शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने और लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन की रणनीति का हिस्सा है।

₹89.45 करोड़ का नया प्रोजेक्ट मिला

चावड़ा इंफ्रा को हाल ही में ADI Shantigram Abode LLP से ₹89.45 करोड़ का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) मिला है। इसके तहत अहमदाबाद के अदाणी शांतिग्राम टाउनशिप में प्रस्तावित हाई-राइज रेजिडेंशियल बिल्डिंग का कोर और शेल निर्माण किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट अगले 24 महीनों में पूरा किया जाना है। कंपनी का दावा है कि इससे उसके प्रीमियम प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूती मिलेगी।

FY26 में मजबूत रही ग्रोथ

वित्त वर्ष 2025-26 में चावड़ा इंफ्रा का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 22.6% बढ़कर ₹320.6 करोड़ पहुंच गया। वहीं, मार्च तिमाही (Q4 FY26) में रेवेन्यू 49.8% की सालाना बढ़त के साथ ₹167.6 करोड़ रहा। कंपनी ने बताया कि रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मजबूत कामकाज की वजह से यह ग्रोथ हासिल हुई।

विस्तार पर फोकस

चावड़ा इंफ्रा का बड़े और हाई-राइज प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने का प्लान है। इसके लिए एडवांस्ड एल्युमीनियम फॉर्मवर्क सिस्टम में निवेश किया है। कंपनी का कहना है कि इससे निर्माण की रफ्तार बढ़ेगी और गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

कंपनी ने यह भी बताया कि उसने वित्त वर्ष 2026 में अवनी आयाम, अभिषेक, राजश्री रेगलिया, मोंडील वन, राजुल ग्रीन्स और मनाली रीडेवलपमेंट जैसे कई प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इसके अलावा कंपनी AA+ कॉन्ट्रैक्टर क्लासिफिकेशन हासिल करने की प्रक्रिया में भी है। इससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थागत प्रोजेक्ट्स के लिए उसकी पात्रता बढ़ेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

मैनेजिंग डायरेक्टर महेशकुमार चावड़ा ने कहा कि कंपनी का फोकस ऑपरेशनल एक्सीलेंस, मजबूत प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर है।

उन्होंने कहा कि हालिया प्रोजेक्ट के साथ बोनस शेयर और डिविडेंड का प्रस्ताव कंपनी की मजबूत कारोबारी स्थिति और शेयरधारकों के साथ ग्रोथ का लाभ साझा करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू घटकर आधा हुआ; शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT को अहम BIS सर्टिफिकेशन मिला, सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई का रास्ता खुला

स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को प्रीमियम TMT ग्रेड के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का सर्टिफिकेशन मिल गया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी का दावा है कि इससे उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और बाजार पहुंच मजबूत होगी।

प्रीमियम TMT ग्रेड बनाने की मिली मंजूरी

Rhetan TMT को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार बनाने के लिए BIS लाइसेंस मिला है। इस मंजूरी के बाद Rhetan TMT अब देशभर में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम ग्रेड TMT बार की सप्लाई कर सकेगी। इससे कंपनी के लिए नए बाजार खुलेंगे और उसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का भी विस्तार होगा।

सोलर प्रोजेक्ट से घटेगी बिजली की लागत

Rhetan TMT ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी को GEDA रजिस्ट्रेशन और NHAI समेत सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगस्त 2026 के पहले सप्ताह के अंत तक बिजली उत्पादन शुरू कर देगा। कंपनी का मानना है कि इससे ऊर्जा लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा टिकाऊ बनेगी।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि कंपनी पिछले कुछ वर्षों से क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर लगातार निवेश कर रही है। उनके मुताबिक, BIS सर्टिफिकेशन से प्रीमियम स्टील सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी। वहीं, सोलर पावर प्रोजेक्ट से उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा कुशल बनेगी और लंबे समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Rhetan TMT का कारोबार

Rhetan TMT, TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल रिहायशी, कमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होता है। कंपनी का कहना है कि वह आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक, गुणवत्ता और क्षमता विस्तार पर लगातार फोकस कर रही है, ताकि भारत के बढ़ते स्टील और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Magnus Steel Q1 Results: प्रॉफिट और रेवेन्यू में तगड़ा उछाल, अब स्टील और इंफ्रा सेक्टर के नए मौकों पर फोकस

Magnus Steel & Infra ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू सालाना आधार पर 273.7% बढ़कर 7.30 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 1.95 करोड़ रुपये था।

कंपनी का नेट प्रॉफिट 490.6% बढ़कर 2.41 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह 41 लाख रुपये था। टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) भी 2.41 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 41 लाख रुपये से करीब पांच गुना ज्यादा है।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA 400.7% बढ़कर 2.41 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 48 लाख रुपये था। वहीं अर्निंग्स पर शेयर (EPS) बढ़कर 7.13 रुपये हो गई, जो एक साल पहले 1.21 रुपये थी। कंपनी ने कहा कि बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन और लागत पर नियंत्रण की वजह से मुनाफे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

टाटा मोटर्स प्रोजेक्ट से मिला बड़ा मौका

कंपनी ने बताया कि उसे गुजरात और महाराष्ट्र में Tata Motors के प्रस्तावित ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरशुदा स्टील सप्लायर के रूप में शामिल किया गया है। प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्टर RIECO Industries के जरिए कंपनी ने स्टील की सप्लाई भी शुरू कर दी है और कई खरीद ऑर्डर हासिल किए हैं। कंपनी का दावा है कि इससे उसकी ऑर्डर बुक मजबूत होगी और आने वाले समय में ग्रोथ को रफ्तार मिलेगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

Magnus Steel के चेयरमैन और डायरेक्टर कैरॉन नरेश बजाज ने कहा कि पहली तिमाही का प्रदर्शन कंपनी की मजबूत रणनीति और ऑपरेशनल क्षमता का नतीजा है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नए अवसरों का फायदा उठाकर शेयरधारकों के लिए लंबी अवधि में बेहतर मूल्य सृजित करने पर फोकस कर रही है।

FY26 में भी रहा अच्छा प्रदर्शन

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 22.58 करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 4.51 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस दौरान कंपनी का EPS 13.33 रुपये प्रति शेयर रहा।

SRF Share Price : कमजोर गाइडेंस के बाद वायदा के टॉप लूजर में शामिल हुआ शेयर, जानिए अब क्या हो निवेश रणनीति

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: दो इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: शेयर बाजार में बुधवार, 8 जुलाई को दो इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर निवेशकों की करीबी नजर रहेगी। एक कंपनी को पावर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा नया ऑर्डर मिला है। दूसरी कंपनी को 158 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीवरेज प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाला (L-1) घोषित किया गया है।

Advait Energy Transitions

पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Advait Energy Transitions Ltd को दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (DGVCL) से 51.62 करोड़ रुपये का टर्नकी ऑर्डर मिला है। कंपनी 11KV 55mm² AAAC मीडियम वोल्टेज कवर्ड कंडक्टर (MVCC) की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम करेगी।

इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन 15 महीने है। पिछले महीने कंपनी की सब्सिडियरी Advait BESS Bhesaan Pvt Ltd ने Gujarat Urja Vikas Nigam Ltd (GUVNL) के साथ 150 MW/300 MWh क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया था। यह प्रोजेक्ट गुजरात में बनेगा।

Advait Energy Transitions Ltd का शेयर मंगलवार को 1.59% की गिरावट के साथ 2,148 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक तकरीबन फ्लैट रहा। वहीं, 1 साल में इसने करीब 20.80% का रिटर्न दिया है।

EMS

वॉटर और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी EMS Ltd को दिल्ली जल बोर्ड से करीब 158.29 करोड़ रुपये के सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए L-1 घोषित किया गया है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के टिकरी कलां इलाके में सीवर नेटवर्क बिछाने का है। कंपनी को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) मिलने के बाद ऑर्डर फाइनल होगा। इस प्रोजेक्ट को 15 महीने में पूरा किया जाएगा।

इससे पहले अप्रैल 2026 में भी EMS को UP Jal Nigam (Urban) से वाराणसी के दो सीवरेज प्रोजेक्ट मिले थे। इनकी कुल अनुमानित कीमत 208.6 करोड़ रुपये (GST छोड़कर) थी। इन प्रोजेक्ट्स में सीवर नेटवर्क, हाउस कनेक्शन, सर्वे, डिजाइन और टर्नकी आधार पर निर्माण का काम शामिल है।

EMS Ltd का शेयर मंगलवार को 3.84% गिरकर 402.70 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 24.87% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में इसमें करीब 34% की गिरावट आई है।

AI Stocks: AI शेयरों में मची बिकवाली, Netweb से Black Box तक 10% टूटे; जानिए क्या है वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook: ‘बाजार का सबसे बुरा दौर खत्म’, Quant Mutual Fund ने कहा- अब सही स्टॉक्स चुनने का समय

Market Outlook: Quant Mutual Fund के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीप टंडन का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब अपने सबसे कमजोर दौर से बाहर निकल चुका है। उनके मुताबिक, अगले दो तिमाहियों में पूरे बाजार के बजाय चुनिंदा शेयर बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

संदीप टंडन का कहना है कि विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी से भारत दूसरे बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, यूटिलिटीज और चुनिंदा एनर्जी कंपनियां निवेश के लिहाज से पसंदीदा सेक्टर बने रहेंगे।

इंफ्रा और पावर पर सबसे ज्यादा भरोसा

संदीप टंडन का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर उनकी सबसे पसंदीदा थीम बनी हुई है। इसकी वजह सरकार और निजी कंपनियों का बढ़ता कैपेक्स है।

उनके मुताबिक, पोर्ट, एयरपोर्ट, सड़क, पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, यूटिलिटीज, टेलीकॉम और चुनिंदा डिफेंस कंपनियों में अच्छे मौके हैं। ऐसे शेयरों पर फोकस करना चाहिए, जिनके फंडामेंटल मजबूत हों। कैश फ्लो अच्छा हो। लेकिन अभी उन पर बाजार की ज्यादा नजर न गई हो।

FII की वापसी से मिलेगा सहारा

संदीप टंडन का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगभग खत्म हो चुकी है। अब FII धीरे-धीरे भारतीय बाजार में लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में गिरावट आती है, तो भारत और आकर्षक बन सकता है।

बैंकिंग और IT पर क्या राय?

संदीप टंडन का कहना है कि प्राइवेट बैंकों में रिकवरी जारी रह सकती है। लेकिन यह तेजी बहुत लंबी चलेगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

आईटी सेक्टर को लेकर उनका नजरिया पहले से बेहतर हुआ है। कमजोर प्रदर्शन के बाद अब वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी इस सेक्टर में आक्रामक खरीदारी का समय नहीं है। Quant Mutual Fund ने सिर्फ चुनिंदा आईटी शेयरों में खरीदारी शुरू की है।

FMCG और स्मॉलकैप में कहां हैं मौके?

उनके मुताबिक, FMCG सेक्टर में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वैल्यूएशन अभी भी ऊंचे हैं। इसलिए यहां भी चुनिंदा शेयरों में निवेश करना बेहतर रहेगा।

संदीप टंडन का मानना है कि मिडकैप के मुकाबले स्मॉलकैप और माइक्रोकैप में ज्यादा अवसर हैं। हालांकि, निवेश से पहले मैनेजमेंट की गुणवत्ता और कैश फ्लो की जांच जरूर करनी चाहिए।

IPO बाजार पर भी भरोसा

संदीप टंडन आने वाले बड़े IPO को लेकर भी सकारात्मक हैं। उन्होंने SBI Funds, NSE और Jio के संभावित IPO का जिक्र किया। उनका कहना है कि भारतीय बाजार अब इतने बड़े इश्यू को संभालने में सक्षम है। हालांकि, कंपनियों का उचित वैल्यूएशन पर आना जरूरी होगा।

संदीप टंडन का कहना है कि अगले कुछ महीनों में स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति ज्यादा काम आएगी। इसलिए निवेशकों को इंडेक्स के बजाय मजबूत कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

Eternal Share Price: नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है इटनरल, मोतीलाल ओसवाल ने दिया 34% तेजी का अनुमान

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Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Railway Stocks: पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि अगले 4-5 साल में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें लाई जाएंगी। इसके साथ ही दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन घोषणाओं के बाद रेलवे सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं।

Titagarh Rail

अगर कोलकाता मेट्रो के विस्तार की बात करें तो टीटागढ़ रेल का नाम सबसे आगे नजर आता है। कंपनी मेट्रो कोच और रेलवे रोलिंग स्टॉक बनाने में माहिर है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी पश्चिम बंगाल में हैं। अभी तक नए ऑर्डर का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मेट्रो के लिए बड़ी संख्या में नई ट्रेनें खरीदी जानी हैं। इसलिए टीटागढ़ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कंपनी पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिए स्टेनलेस स्टील मेट्रो कोच बना चुकी है। इस प्रोजेक्ट की वैल्यू करीब 350 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पुणे मेट्रो के लिए 34 ट्रेनसेट की डिलीवरी पूरी करने के बाद उसे 12 और एल्युमीनियम ट्रेनसेट का 430 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी मिला था। FY26 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 27,540 करोड़ रुपये रही, जिसमें 10,600 करोड़ रुपये का हिस्सा पैसेंजर रेल बिजनेस से जुड़ा है।

RVNL

रेलवे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तभी हकीकत बनती हैं जब जमीन पर काम शुरू होता है। यही काम सरकारी रेल कंपनी RVNL करती है। कंपनी ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग, स्टेशन री-डेवलपमेंट और दूसरी रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।

पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, RVNL को नए काम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक फिलहाल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की है। FY26 में उसका रेवेन्यू 20,412 करोड़ रुपये रहा। हालांकि बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा 32.6% घटकर 871 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने FY27 में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है और हाल में कई नए कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं।

IRFC

सरकारी कंपनी IRFC रेलवे सेक्टर की फाइनेंसिंग करने वाली सबसे अहम सरकारी कंपनी है। रेलवे जितना ज्यादा खर्च करेगा, उतनी ही ज्यादा फंडिंग की जरूरत होगी और इसका फायदा IRFC को मिल सकता है।

FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 7.8% बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने 35,000 करोड़ रुपये के लोन वितरित किए, जो उसके लक्ष्य से ज्यादा थे। इसका AUM बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी 2026 में सरकार ने OFS के जरिए अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेची थी। वहीं कंपनी के बोर्ड ने FY27 में 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी है, जिससे रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग जारी रखी जा सके।

IRCON

दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद IRCON भी चर्चा में है। कंपनी रेलवे, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण का लंबा अनुभव रखती है। अगर यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो बड़े पैमाने पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन बनाने का काम होगा। इसमें IRCON जैसी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक 24,984 करोड़ रुपये की है, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा सबसे बड़ा है। FY26 में उसका रेवेन्यू 9,071 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ 592 करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त है। इससे उसे भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने की वित्तीय ताकत मिलती है।

आपको इन शेयरों पर क्यों रखनी चाहिए नजर

अगर आप रेलवे सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो इन शेयरों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं से रेलवे वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी ज्यादातर परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं। इसलिए ऑर्डर और कमाई पर असर दिखने में समय लग सकता है। ऐसे में Titagarh Rail, RVNL, IRFC और IRCON जैसे शेयरों पर आगे होने वाले घटनाक्रमों के साथ नजर रखना बेहतर हो सकता है।

Stock in Focus: सरकारी डिफेंस कंपनी को मिले ₹1081 करोड़ के ऑर्डर, स्टॉक पर रहेगी नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।