‘हम हर फ्रंट पर तैयार…’, सिंधु के पानी पर बिलावल भुट्टो ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव अपने चरम पर है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाक के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस मामले पर पाकिस्तान कई बार गीदड़भभकी दे चुका है। अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने जहर उगला है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का फिर वही पुराना राग अलापा है। भारत को गीदड़ भभकी देते हुए बिलावल ने कहा कि, “पाकिस्तान कभी भी सिंधु नदी पर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। हम हर फ्रंट पर तैयार हैं।”

बिलावल ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर

बिलावल ने कहा किस पाकिस्तान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और सिंधु नदी के पानी पर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा। हम इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।” वहीं, पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित रहेगी।

पाकिस्तान पहले भी दे चुका है धमकी 

बता दें कि, सिंधु जल समझौता, वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे के नियम तय करता है। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले पर यही पुराना राग अलापा था। उन्होंने कहा कि यह समझौता अब भी पूरी तरह वैध और लागू है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए भारत पर निशाना साधने की कोशिश की है।

बता दें कि, यह पहले मौका नहीं है जब भारत के खिलाफ बिलावल भुट्टो की बौखलाहट सामने आई है। इससे पहले बिलावल भुट्टो ने कहा था कि अगर भारत सिंधु जल संधि को स्थगित रखता है और उसपर बांध बनाता है तो भारत के खिलाफ युद्ध होगा।

Agniveer Bharti 2026: अग्निवीरों को मिल सकती है बड़ी राहत! 25% नहीं, अब 50% से 75% तक को स्थायी नौकरी देने की तैयारी

Agniveer Bharti 2026: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि इस साल पूरी होने वाली है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मौजूदा 25% सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना 75% तक और सेना तथा वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बड़ा बदलाव जल्द ही संभव है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के केवल 25% अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब तीनों सेनाएं इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच चर्चा के चरण में है। सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या हो सकता है नया प्रस्ताव?

  • भारतीय नौसेना लगभग 75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की सिफारिश कर सकती हैं।
  • चार वर्षों की सेवा के दौरान अग्निवीर आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और फील्ड ऑपरेशन का अनुभव हासिल करते हैं।
  • सैन्य योजनाकारों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को अधिक संख्या में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।

स्पेशल यूनिटों में ज्यादा मौका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कुल रिटेंशन सीमा नहीं भी बढ़ती है, तब भी कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स जैसे सेना की नई भैरव बटालियन में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अधिक रखी जा सकती है,। जबकि अन्य यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की तैनाती जारी रहेगी। फिलहाल अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

भर्ती भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ट्रेनिंग के दौरान करीब 70,000 अग्निवीरों ने सेना में हिस्सा लिया। अगले भर्ती में लगभग 90,000 पदों पर भर्तियां निकाली जा सकती हैं। इसके अलावा सेना अगले दो वर्षों में करीब 1.8 लाख कर्मियों की कमी को भी अग्निवीर भर्ती के जरिए पूरा करने की योजना बना रही है। अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विचाराधीन प्रस्ताव है।

सेवा निधि पैकेज क्या है और कितना मिलता है? (Seva Nidhi Package)

4 साल की सेवा पूरी होने के बाद, जो 75% अग्निवीर बाहर आएंगे (या जो परमानेंट भी होंगे), उन्हें एकमुश्त सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। यह फंड इस तरह तैयार होता है:-

  • अग्निवीर का कुल 4 साल का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • सरकार का बराबर का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • कुल जमा राशि (ब्याज सहित): लगभग ₹11.71 लाख

सबसे बड़ा फायदा: यह ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Income Tax Free) होता है। इस पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।

अतिरिक्त भत्ते (Allowances): इस फिक्स सैलरी के अलावा अग्निवीरों को उनकी पोस्टिंग के हिसाब से रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता (Risk & Hardship Allowance), राशन भत्ता, यूनिफॉर्म भत्ता और यात्रा भत्ता (Travel Allowance) भी मिलता है।

परमानेंट होने पर मिलने वाले फायदे (Permanent Salary & Benefits)

चार साल पूरे होने के बाद, बैच के 25% अग्निवीरों (जिसके बढ़ने की संभावना पर सेना विचार कर रही है) को भारतीय सेना के रेगुलर कैडर में शामिल किया जाएगा। परमानेंट होने के बाद उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:-

नियमित सैलरी और रैंक: परमानेंट होते ही वे भारतीय सेना के फुल-टाइम सैनिक बन जाएंगे। उनका पे-स्केल (Pay Scale) रेगुलर सैनिकों जैसा हो जाएगा, जिसमें बेसिक पे, डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य सभी मिलिट्री अलाउंस शामिल होंगे।

पेंशन का अधिकार (Pension Benefits): 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान पेंशन नहीं मिलती। लेकिन परमानेंट कैडर में चुने जाने के बाद, जब वे अपनी अगली 15 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, तो वे पूरी लाइफटाइम पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे।

मेडिकल और कैंटीन की सुविधा: परमानेंट होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को ECHS (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) के तहत आजीवन मुफ्त इलाज और CSD कैंटीन की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोशन और सर्विस: वे सेना में नियमित रूप से प्रमोशन (जैसे लांस नायक, नायक, हवलदार, जेसीओ) पा सकेंगे और उनके पास आगे अधिकारी (Officer) बनने के लिए विभागीय परीक्षाएं देने का मौका भी होगा।

अन्य लाभ (Other Security Benefits)

4 साल की सर्विस के दौरान सभी अग्निवीरों को ये सुरक्षा कवर भी दिए जाते हैं:-

लाइफ इंश्योरेंस: ₹48 लाख का गैर-अंशदायी (Non-contributory) जीवन बीमा कवर।

शहादत पर मुआवजा: ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर परिवार को ₹44 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia), बचे हुए कार्यकाल की पूरी सैलरी और सेवा निधि पैकेज समेत कुल ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती है।

दिव्यांगता मुआवजा (Disability): सेवा के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने पर ₹44 लाख (100% दिव्यांगता पर), ₹25 लाख (75% पर) और ₹15 लाख (50% दिव्यांगता पर) एकमुश्त दिए जाते हैं।

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PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की 2 फोटो… कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन करने वाले संगठन JAAC के बारे में जानिए 5 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य JAAC ने सोशल मीडिया पर PoK के 10 जिलों की अनुमानित आबादी का आंकड़ा साझा किया। संगठन के मुताबिक, यदि प्रत्येक जिले से 50 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हों तो कुल संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उसका कहना है कि उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि प्रदर्शन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है। पिछले महीने हिंसा में 30 की मौत हुई थी 8 जून को PoK में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। भारत ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की मांग की थी PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान पर फेक न्यूज और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से लगातार झूठी खबरें और वीडियो फैलाने का पैटर्न देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की हताश कोशिश है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। PoK में 27 जुलाई को चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

वर्ल्ड अपडेट्स:लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने की तैयारी, संसद में प्रस्ताव पेश

रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा।

चीन हो या पाकिस्तान… अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा ‘100 किमी की चक्रव्यूह’ दीवार

भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।

भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिला बड़ा सबक

कुछ महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अब छोटे लेकिन स्मार्ट हथियारों पर फोकस

भारत अब ऐसे हथियार खरीद रहा है जो सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत जवाब देने की क्षमता देंगे। इनमें शामिल हैं-

एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम

शोल्डर-फायर्ड एंटी-टैंक मिसाइलें

शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम

कामिकाज़े ड्रोन

हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS)

इनका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, टैंक, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को तुरंत रोकना है।

पाकिस्तान और चीन…दो अलग-अलग चुनौतियां

भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन जैसी दो अलग-अलग सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, टैंक, तोपखाने और घुसपैठ का खतरा रहता है। चीन के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी, लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम और आधुनिक ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। इसी वजह से भारत तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ड्रोन बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा

आज के युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल चलाना आर्थिक रूप से सही नहीं माना जाता। इसलिए दुनिया भर की सेनाएं अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अपना रही हैं, जो ड्रोन के संचार और नेविगेशन को जाम करके उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा भारत की सुरक्षा ढाल

सरकार एक राष्ट्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से पूरे देश की सुरक्षा करना है। इसमें लंबी दूरी की S-400, मध्यम दूरी की MR-SAM, छोटी दूरी की मिसाइलें और एंटी-ड्रोन सिस्टम मिलकर कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रदान करेंगे।

आकाश तरंग सिस्टम क्या है?

आकाश तरंग एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिसाइल चलाकर ड्रोन को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसकी रेडियो और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन अपना नियंत्रण खो देता है, वापस लौट जाता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। भविष्य के युद्धों में यह भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जा रहा है।

MR-SAM की ताकत

मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) लगभग 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बना सकती है। यह भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इन सबको मिलाकर देखें तो खरीद की यह लिस्ट यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध के बारे में भारत की समझ कैसे बदल रही है। मिलिट्री प्लानर्स का मानना ​​है कि भविष्य के युद्ध का फैसला सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने वाले फाइटर जेट या महाद्वीपों के बीच मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से नहीं होगा। इसका फैसला सैकड़ों सस्ते ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बिना पायलट वाले विमानों और टैक्टिकल लेवल पर स्मार्ट हथियार लिए सैनिकों से भी होगा।

कम दूरी के हथियार क्यों जरूरी हैं?

एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और पनडुब्बी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बने हुए हैं। हालांकि, कई मिलिट्री एनालिस्ट का तर्क है कि भविष्य की टैक्टिकल लड़ाइयों का नतीजा तय करने वाले हथियार छोटे, सस्ते और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले होंगे। आधुनिक एंटी-टैंक मिसाइल से लैस एक सैनिक करोड़ों रुपये की बख्तरबंद गाड़ी को नष्ट कर सकता है।

सस्ते ड्रोन का एक झुंड एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण बिना एक भी गोली चलाए ड्रोन को बेकार कर सकते हैं। पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें दुश्मन के विमानों को युद्ध के मैदान में आजादी से काम करने से रोक सकती हैं। इससे पता चलता है कि DAC की कई मंजूरियां सैकड़ों किलोमीटर के बजाय कुछ 10 किलोमीटर के दायरे में काम करने वाले सिस्टम पर क्यों केंद्रित हैं।

सिर्फ रणनीतिक क्षमताओं में निवेश करने के बजाय भारत उस चीज को भी मजबूत कर रहा है जिसे मिलिट्री प्लानर अक्सर ‘टैक्टिकल एज’ (युद्ध के मैदान में बढ़त) कहते हैं। भारत की मिलिट्री प्लानिंग अनोखी है क्योंकि उसे दो बिल्कुल अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए तैयारी करनी होती है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान एक तेजी से बदलने वाला युद्ध का मैदान बनाता है, जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने, ड्रोन और सीमा पार से घुसपैठ जैसी चीजें शामिल हैं।

वहीं, उत्तरी सीमा पर चीन की चुनौती ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध, एडवांस्ड सर्विलांस क्षमताएं, लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी और तेजी से बेहतर हो रहे बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि इलाके बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों मोर्चों पर एक जरूरत समान है। लगातार निगरानी, ​​तेजी से टारगेट का पता लगाना और हवाई खतरों से कई स्तरों पर सुरक्षा। यही वजह है कि DAC की मंजूरी में एक साथ कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा, इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को बिहार से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 में जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दोषी करार देते हुए चार साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। इस घटना में दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी के दौरान डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी मानते हुए चार साल की सजा सुनाई। इसके अलावा हथियार के लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की अतिरिक्त कैद की सजा भी दी गई।

बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा

सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के लिए दो महीने की कैद की सजा दी जाती है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राजू कुमार सिंह पीड़िता के पति को मुआवज़े के रूप में 25 लाख रुपये देंगे। अगर वह यह रकम नहीं देते हैं, तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। 56 वर्षीय राजू कुमार सिंह को पिछले महीने इस मामले में दोषी ठहराया गया था। यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई थी, जब हर्ष फायरिंग में 45 वर्षीय डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी।

इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने अदालत से उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने की अपील की।  उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और साफ रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। उनके वकील नंदिता राव ने अदालत में कहा कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और लगातार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं। वह एक शिक्षित व्यक्ति हैं और पहले कभी किसी मामले में दोषी नहीं ठहराए गए। इसलिए उनके साथ नरमी बरतते हुए उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए।

राजू कुमार सिंह की ओर से वकील राजीव मोहन ने भी अदालत से कहा कि भले ही उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना गया है, लेकिन सजा तय करते समय यह भी देखा जाना चाहिए कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और लापरवाही कितनी गंभीर थी। वहीं, सरकारी वकील चिरंजीत सिंह ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामले में प्रोबेशन दिया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा, खासकर जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं को लेकर। उन्होंने यह भी बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाली डॉक्टर अर्चना गुप्ता 45 साल की थीं और उनकी 12 साल की बेटी ने पूरी घटना अपनी आंखों के सामने देखी थी। उनके परिवार को जो सदमा पहुंचा, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

Alpha Alia Bhatt Movie Review: मिसफिट आलिया भट्ट….तो स्पाई फिल्म में ग्लैमर डॉल बनकर रह गईं शरवरी वाघ, बॉबी देओल ने बचा ली थोड़ी इज्जत

फिल्म- ऐल्फा

निर्देशक- शिव रवैल

कलाकार- आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल

रेटिंग-2/5

Alpha Alia Bhatt Movie Review: जब यशराज ने फिल्म ऐल्फा का ऐलान किया था तो फैंस का एक्साइटमेंट और उम्मीदें काफी बढ़ी थीं। इसके बाद फिल्म की स्टार कास्ट का ऐलान हुआ तो आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर का नाम सुनकर हर किसी की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन फिल्म देखकर आप ठगा हुआ सा महसूस करने वाले हैं।

कहानी

शिव रावेल की डायरेक्ट की गई फिल्म ऐल्फा में आलिया का किरदार ‘सीता’ आपको फुल एक्शन में नजर आती हैं। वह अजेय है, उससे कोई गलती नहीं होती, वह मौत को कई बार टक से छूकर वापस आती हैं। वहीं हवा में उछलकर ऐसे दुश्मनों को ढेर कर देती हैं जैसे ग्रेवटी से उनका लेना देना ही न हो। उसे ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ के तौर पर बढ़ा किया जाता है। घर-परिवार प्यार से कोसों दूर होती है।

प्यार और हमदर्दी क्या होती है उसे नहीं पता है। उसे अपने इमोशंस भी जाहिर करने में भी काफी मुश्किल होती है। इसीलिए, जब वह अपनी अलग हो चुकी जुड़वां बहन दुर्गा के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताती है, तो खुश होती है नया एहसास करती है। लेकिन आलिया पर उनका ये किरदार उतना जच नहीं रहा है। ‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध पर बेस्ड है, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ था। बढ़ते खतरों के बीच भारत को अजेय बनाने के पक्के इरादे के साथ, कर्नल फतेह सिंह लखावत वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज की मदद से एक खास टास्क फोर्स बनाने के लिए एक ‘बेहतरीन और एडवांस्ड प्रोग्राम’ तैयार करते हैं। जल्द ही, कुछ युवा पुरुषों को ‘अल्फा’ नाम का सीरम दिया जाता है, जिसे सुपरह्यूमन बनाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था।

यह सीरम देखने की क्षमता, रिफ्लेक्स, फेफड़ों की क्षमता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे सुनने की क्षमता तेज हो जाती है और पानी के अंदर आठ मिनट तक सांस रोके रखने की काबिलियत मिलती है। लेकिन जल्द ही, सीरम के खतरनाक साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। इस बात से अनजान, लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रांत कौल अपनी पत्नी जानकी को यह सीरम दे देते हैं, जब प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।

नतीजा? एक बच्ची को जन्म देने के बाद जानकी की ऑपरेशन टेबल पर ही मौत हो जाती है। उस बच्ची को फतेह सिंह चुपके से बदल देते हैं और उसे एक ‘ऐल्फा’ सोल्जर के तौर पर पालते-पोसते हैं। दुनिया से दूर, राजस्थान की एक फैसिलिटी में कैद और किसी एक्सपेरिमेंट की तरह लगातार निगरानी में पली-बढ़ी सीता एक हथियार बन जाती है। लेकिन फतेह सिंह असल में वो नहीं हैं जो होने का दावा करते हैं। और इसी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में एंट्री होती है उसकी जुड़वां बहन दुर्गा की, जो उससे अलग हो गई थी।

डायरेक्शन

बात अगर डायरेक्टर शिव रवैल की करें, जिन्होंने ऐल्फा को निर्देशित किया है। एक तरह से कहा जा सकता है कि शिव ने स्पाई थ्रिलर को स्टाइलिश थिलर बना दिया है। फिल्म को देखकर आपको बोरियत होने लगती है। एक सीन भी आपके अंदर एक्साइटमेंट नहीं जगाता है। फिल्म के कई सीन अधूरेपन का शिकार है। वहीं कई जगह आप को एक्शन देख ऐसा लगेगा कि ये आखिर क्यों हो रहा है?

एक्टिंग

फिल्म ऐल्फा का लीड किरदार आलिया भट्ट हैं। बाकी पूरी कास्ट को यशराज ने सपोर्टिंग रोल में रखा है। फिल्म की कहानी आलिया के ईर्द-गिर्द ही घूमती हैं। फिल्म देख आपको बस एक ही सवाल खाए जाता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी, जो आलिया ने इस फिल्म को हां कहा। जिगरा के बाद आलिया के करियर में एक और बुरी फिल्म एड हो गई है ‘ऐल्फा’। आलिया भट्ट जैसी दमदार एक्ट्रेस की फिल्म से हर किसी को काफी उम्मीदें रहती हैं। उन्होंने हाईवे, गंगूबाई बाई जैसी शानदार फिल्में दी हैं।

अब बात करते हैं शरवरी वाघ की। यशराज ने शरवरी को फिल्मी दुनिया में लॉन्च किया है। यशराज के अलावा वे और भी फिल्मों में शानदार काम के साथ नजर आई हैं। हाल में रिलीज हुई उनकी मैं वापस आउंगा हो या फिर महाराज दोनों ही फिल्मों में एक्ट्रेस का इतना शानदार है कि उनसे भी काफी उम्मीदें रहती हैं। लेकिन अफसोस निर्देशक एक्ट्रेस के टैलेंट का यूज न कर सके। फिल्म ऐल्फा में शरवरी को बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है। वहीं उनका रोल फिल्म के लिए जरूरी भी नहीं लगता है। अगर वह फिल्म में न होती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

फिल्म की इज्जत थोड़ी बहुत बॉबी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से बचा ली है। लेकिन बेतुक कमजोर कहानी ने उनका काम भी खराब किया है। वहीं अनिल कपूर भी अपने रोल के हिसाब से फिट हैं। फिल्म में ऋतिक के कबीर वाले कौमियो ने फिल्म को थोड़ी बहुत हाईप दिलाई है।

फिल्म को देखें या नहीं

फिल्म को न देखना कहना जायज नहीं होता है। एक फिल्म बनाने में कई लोगों की मेहनत होती है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी भी हाल में टॉलरेट करना मुश्किल होता है। ऐल्फा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप लीड कास्ट के जबरा फैन हैं…यानी उनकी शक्ल देख चेन मिल जाता है, तो आप इसे देख सकते हैं। बाकि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं।

Baby Do Die Do Review: क्राइम, सस्पेंस और इमोशन से भरपूर है ‘बी डू डाई डू’ , हुमा कुरैशी का कतिलाना अंदाज जीत लेगा दिल

फिल्म- बेबी डू डाई डू

कलाकार- हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह

निर्देशक- नचिकेत सामंत

निर्माता- साकिब सलीम

रेटिंग- 3.5/5

Baby Do Die Do Review: क्राइम थ्रिलर फिल्मों में अक्सर बदले की कहानी देखने को मिलती है, लेकिन ‘बेबी डू डाई डू’ उसी पुराने विषय को नए अंदाज में पेश करती है। फिल्म की नायिका न सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है, बल्कि वह बोल और सुन भी नहीं सकती। यही बात इस फिल्म को बाकी थ्रिलर्स से अलग बनाती है। फिल्म में सस्पेंस, एक्शन, रोमांस और डार्क ह्यूमर का बैलेंस्ड मिक्चर देखने को मिलता है।

कहानी

फिल्म की शुरुआत एक दर्दनाक हादसे से होती है। बचपन में बेबी और उसकी जुड़वा बहन एक सुनसान होटल में एक मर्डर देख लेती हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराधी बेबी की बहन की जान ले लेता है। इस घटना के बाद बेबी का पूरा जीवन बदल जाता है।

वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन जाती है और पीएम जैन के मार्गदर्शन में सुपारी किलर के रूप में काम करने लगती है। उसकी पहचान उसका अलग अंदाज है, जिसमें वह छाते को हथियार बनाकर अपने टारगेट खत्म करती है। हालांकि उसके लिए हर हत्या सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि अपनी बहन के कातिल तक पहुंचने का रास्ता भी है। कहानी आगे बढ़ते हुए कई ट्विस्ट लेकर आती है और क्लाइमेक्स तक दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।

अभिनय

हुमा कुरैशी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिना संवादों के अभिनय करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए हर भावना को बखूबी दर्शाया है। बदले की आग, प्रोफेशनल किलर की ठंडक और निजी रिश्तों की संवेदनाएं- तीनों रूपों में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है।

सिकंदर खेर ने अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। चंकी पांडे अपने अलग अंदाज से चौंकाते हैं, जबकि सीमा पाहवा अपने अनुभव के दम पर हर दृश्य को विश्वसनीय बनाती हैं। विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें इमोशनल लेयर भी जोड़ी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले तेज है और कहानी बिना भटके आगे बढ़ती है। डार्क ह्यूमर और सस्पेंस का इस्तेमाल भी संतुलित तरीके से किया गया है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के माहौल को प्रभावी ढंग से पेश करती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है और एक्शन सीक्वेंस स्टाइलिश लगते हैं। एडिटिंग की वजह से फिल्म कहीं भी जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस नहीं होती।

फाइनल वर्डिक्ट

‘बेबी डू डाई डू’ एक प्रयोगधर्मी और मनोरंजक क्राइम थ्रिलर है, जो अपनी कहानी, सस्पेंस और दमदार परफॉर्मेंस की वजह से अलग पहचान बनाती है। हुमा कुरैशी का अभिनय इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है, जबकि फिल्म का अनएक्सपेक्टेड क्लाइमेक्स इसे यादगार बनाता है। अगर आप कुछ नया और रोमांच से भरपूर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत के बीच लगातार तीसरे सेशन में गिरे क्रूड के दाम, $71 के नीचे आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price: ईरान और अमेरिका के बीच पॉजिटिव बातचीत की खबरों से कच्चे तेल में लगातार तीसरे सेशन में नरमी देखने को मिल रहा। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की शिपमेंट बढ़ी और US और ईरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत में प्रोग्रेस के संकेत दिखे।

सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड पिछले दो सेशन में 3% से ज़्यादा गिरने के बाद $71 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $68 प्रति बैरल के आसपास था।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ब्लूमबर्ग ने US अधिकारी के हवाले से कहा कि स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट बढ़कर 10 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज़्यादा हो गया है, जो समुद्री ट्रैफिक को रोकने की ईरान की घटती क्षमता को दिखाता है। इस बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही बातचीत में हुई प्रोग्रेस का स्वागत किया।

कतर ने कहा कि अगले राउंड की बातचीत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी, जो लड़ाई शुरू होने पर एक एयर स्ट्राइक में मारे गए थे। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि ये सेरेमनी 4 जुलाई से शुरू होंगी और कई दिनों तक चलेंगी।

2020 के बाद से तिमाही में सबसे बड़ी गिरावट के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का शिपमेंट – जो फारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है – वीकेंड में हुई झड़पों के बावजूद बिना रुके जारी रहा। हालांकि कुल सप्लाई कुछ हद तक सीमित है, यूनाइटेड अरब अमीरात ने अल्टरनेटिव लॉजिस्टिक्स के ज़रिए एक्सपोर्ट को लड़ाई से पहले के लेवल पर वापस ला दिया है, जबकि अमेरिकी तेल की कमज़ोर मांग के बीच अमेरिका के बड़े कच्चे तेल के बेंचमार्क डिस्काउंट पर आ गए हैं।

कतर में बातचीत से पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पर कंट्रोल बनाए रखने के अपने इरादे को फिर से पक्का किया, और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम और लेबनान में लड़ाई सहित कुछ खास रुकावटों पर ज़ोर दिया, जो 60-दिन के सीज़फ़ायर पीरियड के दौरान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वर्जीनिया में रिपोर्टर्स से बात करते हुए दोहराया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

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ईरान 6 अरब डॉलर के फ्रीज-फंड से जरूरी सामान खरीदेगा:अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप; डील का उल्लंघन न हो, इसकी निगरानी कमेटी करेगी

ईरान ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) के तहत जारी होने वाली 6 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का एक हिस्सा जरूरी सामान खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक में सहमति बनी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ बैठक में तय हुआ कि ईरान अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीदेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने लेबनान में युद्ध रोकने समेत समझौते की कुछ शर्तों का पालन नहीं किया। बैठक में यह भी फैसला हुआ कि समझौते के उल्लंघन की निगरानी के लिए गुरुवार तक एक अलग कमेटी बनाई जाएगी, जहां किसी भी उल्लंघन की आधिकारिक शिकायत दर्ज की जा सकेगी। गरीबाबादी ने साफ किया कि दोहा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हुई। बातचीत कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अलग-अलग हुई। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान पर बातचीत सही दिशा में बढ़ रही: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। 2. इजराइल का ऐलान- लेबनान, सीरिया और गाजा से सेना नहीं हटेगी: इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में सेना की तैनाती जारी रहेगी। जब तक हिजबुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता, सैनिक वापस नहीं बुलाए जाएंगे। 3. ईरान का दावा- खामेनेई के अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोग पहुंचेंगे: ईरान ने कहा कि अंतिम संस्कार में 2 करोड़ तक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 30 देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचेंगे और तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 4. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य हुई: समुद्री निगरानी कंपनी केप्लर के मुताबिक मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे। युद्ध के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य हो रही है। 5. अमेरिका-ईरान समझौते की 5 शर्तों पर अब भी अटकी बात
MoU पर हस्ताक्षर के दो हफ्ते बाद भी फ्रीज फंड जारी होने, तेल निर्यात में राहत, होर्मुज में सामान्य आवाजाही, लेबनान में युद्धविराम और परमाणु मुद्दे जैसे अहम मामलों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…