World Drug Free Day 2026: विश्व नशा मुक्ति दिवस क्यों मनाना है जरूरी, जानें खास तथ्य

Scenes related to staying away from drugs and awareness, resolution and drug-free society on International Anti-Drug Day

International Day Against Drug Abuse: हर साल 26 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 1987 में हुई थी। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि एक वैश्विक अलार्म है। आज के समय में नशा सिर्फ एक व्यक्ति की बुरी आदत नहीं, बल्कि पूरे समाज, अर्थव्यवस्था और युवा पीढ़ी को खोखला करने वाली एक गंभीर महामारी बन चुका है। 

 

आइए जानते हैं कि इस दिन को मनाना क्यों बेहद जरूरी है और इससे जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं? 

 

इसे मनाना क्यों जरूरी है?

1. युवा पीढ़ी और परिवारों को बचाना

नशा सबसे पहले किसी घर के चिराग को बुझाता है। आज स्कूल और कॉलेज के छात्र अनजाने में या दोस्तों के दबाव में आकर ड्रग्स, स्मैक, और सिंथेटिक नशों के जाल में फंस रहे हैं। यह दिन समाज को जागरूक करता है ताकि माता-पिता और शिक्षक बच्चों में बदल रहे व्यवहार को पहचान सकें और उन्हें समय पर बचा सकें।

 

2. अपराध और अवैध तस्करी पर लगाम लगाना

नशीली दवाओं का अवैध कारोबार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराधों को फंडिंग देता है। जब तक ड्रग्स की डिमांड कम नहीं होगी, तब तक इसका अवैध नेटवर्क नहीं टूटेगा। यह दिन सरकारों को सख्त कानून बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।

 

3. 'नशेड़ी' नहीं, 'मरीज' के रूप में देखना

इस दिन का एक बड़ा मकसद समाज की सोच को बदलना भी है। जो लोग नशे की लत का शिकार हो चुके हैं, वे अपराधी नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हैं। उन्हें डांट या बहिष्कार की नहीं, बल्कि सही इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की जरूरत होती है।

 

नशा और तस्करी से जुड़े कुछ खास तथ्य

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की रिपोर्ट्स और वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, दुनिया में नशे की स्थिति बेहद चिंताजनक है:

 

तथ्य का विषय वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़े

प्रभावित आबादी: दुनिया भर में 29 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।

 

गंभीर बीमारी: इनमें से लगभग 4 करोड़ लोग 'ड्रग यूज डिसऑर्डर' (गंभीर लत और मानसिक बीमारी) से पीड़ित हैं, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है।

 

भारत की स्थिति: एम्स (AIIMS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, और 3 करोड़ से अधिक लोग भांग, गांजा, और ओपियोइड्स (अफीम, हेरोइन) जैसे खतरनाक नशों के आदी हैं।

 

सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा: पिछले कुछ सालों में प्रयोगशालाओं में बनने वाले केमिकल ड्रग्स (जैसे मेथम्फेटामाइन और फेंटानिल) का चलन तेजी से बढ़ा है, जो पारंपरिक नशों से 50 गुना ज्यादा जानलेवा हैं।

 

इस दिन हम क्या योगदान दे सकते हैं?

नशे के खिलाफ यह लड़ाई अकेले सरकार या पुलिस की नहीं है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम तीन छोटे कदम उठा सकते हैं:

 

बातचीत करें: अपने बच्चों और दोस्तों से खुलकर बात करें। उन्हें मानसिक तनाव या डिप्रेशन के वक्त नशे का सहारा लेने के बजाय अपनों से बात करने की सलाह दें।

 

लक्षणों को पहचानें: अगर कोई अचानक गुमसुम रहने लगे, आंखों के नीचे काले घेरे आ जाएं, चोरी करने लगे या उसका वजन तेजी से घटे, तो यह नशे के लक्षण हो सकते हैं।

 

मदद लें: सरकार द्वारा जारी नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 (भारत सरकार का टोल-फ्री नंबर) पर कॉल करके मुफ्त काउंसलिंग और मदद ली जा सकती है।

 

याद रखें: नशा कुछ पल का भ्रम और पूरी जिंदगी का दर्द है। इस अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर खुद को और अपने समाज को इस धीमे जहर से मुक्त कराने का संकल्प लें।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

24 जून: मध्य प्रदेश में आज मनेगा रानी दुर्गावती गौरव दिवस, जानें उनके बलिदान की कहानी

A scene depicting the courage, self-respect, and dignity of the heroic Queen Durgavati on the day of her martyrdom

Rani Durgavati Martyrdom Day 24 June: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी भारतीय इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। जब मुगल सम्राट अकबर के सेनापति आसफ खान ने गोंडवाना पर आक्रमण किया, तब रानी दुर्गावती ने आत्मसमर्पण करने के बजाय युद्ध का रास्ता चुना। उनके बलिदान की 3 सबसे खास बातें, जो उन्हें अन्य शासकों से अलग और महान बनाती हैं, इस प्रकार हैं:ALSO READ: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

1. स्वाभिमान बनाम गुलामी: मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से साफ इनकार

मुगल सम्राट अकबर की सेना बहुत विशाल और आधुनिक हथियारों से लैस थी। अकबर चाहता था कि रानी दुर्गावती उसकी अधीनता स्वीकार कर लें और टैक्स/ खिराज दें। रानी के मंत्रियों ने भी उन्हें समझौता करने की सलाह दी थी। लेकिन रानी का मानना था कि 'अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा है गरिमा के साथ मर जाना।' उन्होंने झुकने के बजाय लड़कर मरने का रास्ता चुना। सीमित संसाधनों और छोटी सेना के बावजूद उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय दिया और अंतिम क्षण तक रणभूमि में डटी रहीं।

 

2. अद्भुत युद्ध रणनीति (War Strategy) और नेतृत्व

रानी ने केवल महल में बैठकर आदेश नहीं दिए, बल्कि खुद युद्ध के मैदान में उतरीं। उनकी सबसे खास बात थी उनकी युद्ध रणनीति। उन्होंने जबलपुर के पास 'नरई नाला' के इलाके को युद्ध के लिए चुना, जो चारों तरफ से जंगलों, पहाड़ों और नदियों से घिरा था। इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर उन्होंने पहली दो लड़ाइयों में अकबर की बेहद आधुनिक और बड़ी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।

 

3. बंदी बनने के बजाय अपने प्राण त्यागना

24 जून 1564 को जब रानी युद्ध के मैदान में गंभीर रूप से घायल हो गईं और जब एक तीर उनकी आंख में और दूसरा उनकी गर्दन में लगा और उनका घोड़ा भी थक चुका था, तब उन्हें समझ आ गया कि अब जीतना असंभव है। दुश्मन सेना उन्हें जिंदा पकड़ना चाहती थी। मुगलों के हाथों बंदी बनने और अपमानित होने के बजाय, रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंप ली और वीरगति को प्राप्त हुईं।

 

रानी दुर्गावती का यह कदम दिखाता है कि उनके लिए देश और नारी का आत्मसम्मान उनकी जान से कहीं ज्यादा कीमती था। यही कारण है कि आज भी उनका बलिदान दिवस 'गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाता है। स्वाभिमान की रक्षा के लिए दिया गया उनका यह सर्वोच्च बलिदान है। 

 

आज, 24 जून को मध्य प्रदेश में वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस को गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस अवसर पर जबलपुर के मदन महल तथा मंडलासहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रानी दुर्गावती के प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करके उनके शौर्य, स्वाभिमान और साहस को याद किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन मध्य प्रदेश सरकार तथा सामाजिक संगठनों द्वारा रैलियों व गोष्ठियों के माध्यम से विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करके उनके बलिदान को याद किया जाता है।

 

रानी दुर्गावती का बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि साहस, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरक संदेश है। यही कारण है कि आज भी उन्हें भारत की महानतम वीरांगनाओं में गिना जाता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

होर्मुज में फंसे 11,000 नाविकों का रेस्क्यू शुरू:US-ईरान मिलकर काम कर रहे; अमेरिकी विदेश मंत्री पीस डील पर UAE को मनाने पहुंचे

संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने कहा है कि होर्मुज में फंसे करीब 11 हजार सीफेयरर्स, यानी नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यह बड़ा अभियान अमेरिका, ईरान, खाड़ी इलाके के तटीय देशों, शिपिंग कंपनियों की मदद से चलाया जाएगा। इस दौरान यह भी सुनिश्चित कर लिया गया है कि जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकें। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंच गए हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को उन देशों के सामने रखना है, जो इस समझौते को लेकर सबसे ज्यादा संदेह में माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE, बहरीन और कुवैत को इस समझौते की कुछ बातों पर चिंता है। उन्हें लगता है कि इससे होर्मुज में ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी कोई स्पष्ट शर्त नहीं रखी गई है। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए के फंड में खाड़ी देशों से मदद मांगे जाने की संभावना है। ऐसे में अमेरिका इन देशों को भरोसा दिलाने और समझौते के समर्थन के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर चर्चा हुई। 2. भारत से जुड़े 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया: अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। 3. होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 4. इजराइल अपने हथियार खुद बनाएगा: इजराइली PM ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करनी होगी और खुद हथियार बनाना सीखना होगा। 5. ट्रम्प ने ईरान को फिर से धमकी दी: ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

सिंधु नदी के पानी को तरसा पाकिस्तान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रचने में जुटे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात

भारत ने सिंधु नदी का पानी रोक कर पाकिस्तान को तरसा दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में छेड़े ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सिंधु का पानी रोकने से पाक की कमर टूट गई है। पानी के लिए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी मुंह की खाने के बाद जहां पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जंग छेड़ने की भभकियां दे रहे हैं। वहीं, जंग का मंसूबा पाले आर्मी चीफ आसिम मुनीर साजिश रचने में जुटे हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर पाक सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाक ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पाकिस्तान ने हाल में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर ड्रोन ग्रिड भी तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से 5 बटालियन को इस महीने की शुरुआत में ही मूव करा कर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। बता दें कि इन्हीं जगहों से पाक भारत में आतंकियों की घुसपैठ भी करता रहा है। चीन 5वीं जेनरेशन का फाइटर जेट देगा ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने पाक को 36 मल्टी रोल जे-सीरीज फाइटर जेट की सप्लाई की है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एफ-35 जेट का चीनी वर्जन जे-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिलने वाला है। इस जेट की टेस्ट फ्लाइट्स हो चुकी हैं। तुर्किये ड्रोन प्लांट लगा रहा है, MILGEM सबमरीन भी देगा पाक को ड्रोन सप्लाई करने के बाद अब तुर्किये कराची के पास साझा कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट भी लगाया है। यहां हर साल 700 ड्रोन बनेंगे। पाकिस्तान ने इन ड्रोन को बांग्लादेश को एक्सपोर्ट करने का एमओयू भी किया है। तुर्किये पाक के लिए मिलजैम क्लास पनडुब्बी भी बना रहा है। पाकिस्तान को इस पनडुब्बी की साल के अंत तक डिलीवरी भी मिल जाएगी। दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षामंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला: हमारे मामलों में दखल न दें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

सिंधु नदी के पानी को तरसा पाकिस्तान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रचने में जुटे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात

भारत ने सिंधु नदी का पानी रोक कर पाकिस्तान को तरसा दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में छेड़े ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सिंधु का पानी रोकने से पाक की कमर टूट गई है। पानी के लिए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी मुंह की खाने के बाद जहां पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जंग छेड़ने की भभकियां दे रहे हैं। वहीं, जंग का मंसूबा पाले आर्मी चीफ आसिम मुनीर साजिश रचने में जुटे हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर पाक सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाक ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पाकिस्तान ने हाल में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर ड्रोन ग्रिड भी तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से 5 बटालियन को इस महीने की शुरुआत में ही मूव करा कर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। बता दें कि इन्हीं जगहों से पाक भारत में आतंकियों की घुसपैठ भी करता रहा है। चीन 5वीं जेनरेशन का फाइटर जेट देगा ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने पाक को 36 मल्टी रोल जे-सीरीज फाइटर जेट की सप्लाई की है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एफ-35 जेट का चीनी वर्जन जे-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिलने वाला है। इस जेट की टेस्ट फ्लाइट्स हो चुकी हैं। तुर्किये ड्रोन प्लांट लगा रहा है, MILGEM सबमरीन भी देगा पाक को ड्रोन सप्लाई करने के बाद अब तुर्किये कराची के पास साझा कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट भी लगाया है। यहां हर साल 700 ड्रोन बनेंगे। पाकिस्तान ने इन ड्रोन को बांग्लादेश को एक्सपोर्ट करने का एमओयू भी किया है। तुर्किये पाक के लिए मिलजैम क्लास पनडुब्बी भी बना रहा है। पाकिस्तान को इस पनडुब्बी की साल के अंत तक डिलीवरी भी मिल जाएगी। दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षामंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला: हमारे मामलों में दखल न दें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

An image featuring Rani Durgavati, the brave ruler of Gondwana and a symbol of self-respect and patriotism

Gondwana Queen Rani Durgavati: भारतीय इतिहास में अनेक वीर योद्धाओं और वीरांगनाओं ने अपने साहस, त्याग और देशभक्ति से अमिट छाप छोड़ी है। ऐसी ही महान वीरांगनाओं में रानी दुर्गावती का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल अपने राज्य की रक्षा के लिए शत्रुओं का डटकर सामना किया, बल्कि मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दे दिया।ALSO READ: Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस हमें उनके अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की याद दिलाता है। आज भी उनका जीवन देश की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

 

आइए, उनके इस शौर्य दिवस पर जानते हैं मध्य प्रदेश के गोंडवाना साम्राज्य की इस महान रानी की वीरता और बलिदान की अमर गाथा…

 

चंदेल राजवंश की बेटी, गोंडवाना की रानी

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के यहां हुआ था। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। विवाह के कुछ वर्षों बाद ही राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया। उस समय उनका बेटा नारायण केवल 5 वर्ष का था। ऐसे कठिन समय में रानी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने छोटे बेटे को सिंहासन पर बैठाकर खुद गोंडवाना की कमान संभाली और जबलपुर को अपना केंद्र बनाकर शासन किया।

 

एक कुशल और न्यायप्रिय शासिका

रानी दुर्गावती केवल युद्ध कौशल में ही माहिर नहीं थीं, बल्कि एक बेहद दूरदर्शी शासिका भी थीं। उनके शासनकाल में गोंडवाना बेहद समृद्धशाली बना:

 

* धार्मिक सहिष्णुता: वे हिंदू धर्म की अनुयायी थीं, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में जैन और अन्य संप्रदायों के विकास के लिए भी खुलकर दान दिया।

 

* जल संरक्षण: उन्होंने अपने राज्य में पानी की कमी को दूर करने के लिए कई तालाबों का निर्माण कराया, जिनमें जबलपुर का प्रसिद्ध 'चेरीताल' और 'आधारताल' आज भी उनके नाम की गवाही देते हैं।

 

* मजबूत सेना: उन्होंने एक विशाल और अनुशासित सेना तैयार की, जिसमें 20,000 से अधिक घुड़सवार, हजारों हाथी और बड़ी संख्या में पैदल सैनिक शामिल थे।ALSO READ: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

 

अकबर की सेना से ऐतिहासिक टकराव

गोंडवाना की समृद्धि और एक महिला के बढ़ते प्रभाव को देखकर मुगल सम्राट अकबर विचलित हो उठा। उसने अपने सिपहसालार आसफ खान को एक विशाल सेना के साथ गोंडवाना पर आक्रमण करने के लिए भेजा। मुगल सेना आधुनिक हथियारों और तोपों से लैस थी, जबकि रानी की सेना संख्या में कम थी। इसके बावजूद रानी दुर्गावती ने खुद युद्ध का नेतृत्व किया।
 

 

1. नरई नाला का मोर्चा

रानी ने जबलपुर के पास 'नरई नाला' नामक स्थान पर मोर्चा संभाला, जो एक तरफ पहाड़ों और दूसरी तरफ उफनती नदी से घिरा था। इस रणनीतिक बढ़त के कारण मुगलों को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने पर मजबूर हो गए।

 

2. रात के हमले का प्रस्ताव

रानी मुगलों को संभलने का मौका नहीं देना चाहती थीं। उन्होंने रात में ही मुगल कैंप पर हमला करने की योजना बनाई, लेकिन उनके सेनापतियों ने रात में युद्ध करने से मना कर दिया। यह देरी भारी पड़ी और अगली सुबह आसफ खान ने बड़ी तोपें मंगवा लीं।

 

3 अंतिम सांस तक संघर्ष (24 जून 1564)

अगले दिन भयंकर युद्ध हुआ। रानी का बेटा वीर नारायण घायल हो गया, लेकिन रानी लड़ती रहीं। तभी एक तीर रानी की आंख में और दूसरा उनकी गर्दन में आकर लगा। रानी ने होश खोने से पहले स्थिति को भांप लिया।

 

4 बलिदान (अमर शहादत)

जब रानी को लगा कि वे चारों तरफ से घिर चुकी हैं और बंदी बना ली जाएंगी, तो उन्होंने अपने वफादार सैनिक से खुद पर तलवार चलाने को कहा। सैनिक के मना करने पर रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंपकर मातृभूमि के लिए प्राण त्याग दिए।

 

मुगल सेना से घिर जाने पर अपनी अंतिम सांसों के दौरान रानी दुर्गावती के शब्द थे- 'जब तक जीवित हूं, कलंक का टीका नहीं लगाऊंगी। अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा है गरिमा के साथ मर जाना।'

 

5. विरासत और सम्मान

रानी दुर्गावती का यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय महिलाओं के आत्मसम्मान और वीरता का प्रतीक बन गया। जबलपुर के पास स्थित 'बरेला' में आज भी उनकी समाधि बनी हुई है, जहां लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते हैं।

 

उनके सम्मान में मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय' किया। देश उनके बलिदान दिवस पर इस महान वीरांगना के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को शत-शत नमन करता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

‘मैं एक प्रॉब्लम सॉल्वर हूं, जल्द ‘बीबी’ का मामला भी…’, लेबनान पर हमले को लेकर PM नेतन्याहू के दो टूक जवाब पर अब ट्रंप की आई प्रतिक्रिया

अमेरिकी और ईरान के बीच हुए समझौते पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई। नेतन्याहू ने साफ-साफ कहा था कि शांति समझौते हो ना हो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा। अब ने

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Asian markets today: एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी 1.5% टूटा, जापान बॉन्ड यील्ड में बढ़त

Asian Markets Today: मंगलवार, 23 जून की सुबह एशियाई बाजार ज़्यादातर हरे निशान पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि US के ईरान पर सेंक्शन हटाने के बाद तेल की कीमतों में सुधार हुआ। साथ ही, इन्वेस्टर्स इस बढ़ती उम्मीद पर भी ध्यान दे रहे थे कि फेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में महंगाई पर ज़्यादा अग्रेसिव रुख अपना सकता है।

एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज, MSCI का बेंचमार्क इंडेक्स भी सावधानी भरे सेंटिमेंट के बीच नीचे आया। जापान के बाज़ार में 0.5% की गिरावट आई, जबकि S&P 500 ई-मिनी फ्यूचर्स 0.2% नीचे आए। इस बीच, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $78.03 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

एशियाई बाज़ार

तेल की कीमतों में फिर से मज़बूती आने और ब्याज़ दर बढ़ने की उम्मीद बढ़ने से एशियाई बाज़ारों में ज़्यादातर गिरावट रही। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.5% गिरा। जापान का निक्केई 225 0.36% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.44% गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.54% गिरा, जबकि कोसडैक 3.43% गिरा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने बढ़त के साथ खुलने का संकेत दिया।

गिफ़्ट निफ्टी 24,149 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 26 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए हल्की पॉज़िटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट सोमवार को मिला-जुला रहा, मेगाकैप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में गिरावट के कारण दबाव में रहा।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 148.01 पॉइंट्स या 0.29% बढ़कर 51,712.71 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 27.79 पॉइंट्स या 0.37% गिरकर 7,472.79 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 351.33 पॉइंट्स या 1.32% गिरकर 26,166.60 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 0.97% गिरी, AMD के शेयर 2.65% बढ़े, ब्रॉडकॉम के शेयर 4.67% गिरे, एप्पल के स्टॉक की कीमत 0.34% कम हुई, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 3.18% गिरे, अमेज़न के शेयर 4.75% गिरे, अल्फाबेट के शेयर 5.08% गिरे, टेस्ला के स्टॉक की कीमत 1.14% बढ़ी, जबकि स्पेसएक्स के शेयर 16.43% गिरे।

US-ईरान शांति वार्ता

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना, ग्लोबल इकॉनमिक नतीजों की चिंताओं से ज़्यादा ज़रूरी है, जिसमें दुनिया भर में मंदी का खतरा भी शामिल है। इससे पहले, US ने ईरान को 60-दिन का लाइसेंस दिया था, जिससे इस्लामिक रिपब्लिक इंटरनेशनल मार्केट में तेल बेच सकता था।

जापान PMI

जापान के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जून में अच्छी ग्रोथ रही। S&P ग्लोबल फ्लैश जापान मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई के 54.5 से बढ़कर जून में 54.9 हो गया, जो अप्रैल के 55.1 के करीब पहुंच गया, जो जनवरी 2022 के बाद सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी।

जापान बॉन्ड यील्ड

येन की कमज़ोरी को दूर करने के लिए रेट बढ़ाने की अटकलों के बीच जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड बढ़ी। दो साल की यील्ड 0.5 bps बढ़कर 1.41% हो गई, जबकि पांच साल की यील्ड 0.5 bps बढ़कर 1.91% हो गई। बेंचमार्क 10-साल की JGB यील्ड सेशन में पहले 1 bp बढ़कर 2.680% होने के बाद फ्लैट रही।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान शांति वार्ता को लेकर उम्मीद कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.19% बढ़कर $78.05 प्रति बैरल और US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.39% बढ़कर $74.15 प्रति बैरल हो गया।

आज का सोने का रेट

सोने की कीमतें स्थिर रहीं क्योंकि इन्वेस्टर्स US-ईरान शांति वार्ता का अंदाज़ा लगा रहे थे, जबकि दिसंबर में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों ने मेटल पर दबाव डाला। स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,191.09 प्रति औंस पर स्थिर रही, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,208.40 हो गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.4% गिरकर $64.92 प्रति औंस हो गईं।

डॉलर

US डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 101.04 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले साल मई के बाद से अपने सबसे ऊंचे लेवल के करीब है। जापानी येन डॉलर के मुकाबले 161.55 येन पर फ्लैट था, जबकि ब्रिटिश पाउंड $1.3247 पर फ्लैट था।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil price: बिकवाली के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट में फ्लो में प्रगति का इंतजार, ब्रेंट $78 प्रति बैरल पर

Crude Oil price: पिछले सेशन में तेज़ गिरावट के बाद मंगलवार को तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसे US-ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत को लेकर उम्मीद की वजह से सपोर्ट मिला। मार्केट पार्टिसिपेंट्स होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल का फ्लो फिर से शुरू होने की संभावना से जुड़े डेवलपमेंट पर भी नज़र रखे हुए थे।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 24 सेंट या 0.38% बढ़कर $78.15 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 33 सेंट या 0.46% बढ़कर $74.19 प्रति बैरल हो गया।

सोमवार को तेल की कीमतों में 3% से ज़्यादा की गिरावट आई, जब अमेरिका ने शांति बातचीत के शुरुआती दौर के बाद ईरान को 60 दिन के लिए बैन से छूट दी। इस गिरावट को उन रिपोर्टों से और बल मिला, जिनमें बड़े समझौते के तहत लेबनान में लड़ाई रुकने का संकेत दिया गया था।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, US और ईरानी अधिकारियों ने फरवरी के आखिर में शुरू हुए संघर्ष को खत्म करने के लिए एक लंबे समय का समझौता करने के मकसद से बातचीत के शुरुआती दौर में अच्छी प्रगति की सूचना दी। हालांकि, मतभेद बने हुए हैं, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि ईरान देश में न्यूक्लियर इंस्पेक्टरों को आने देने के लिए मान गया है—एक दावा जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया है।

इस छूट से लगभग सभी खरीदार, जिसमें US रिफाइनर भी शामिल हैं, ईरानी कच्चा तेल खरीद सकते हैं और उसका पेमेंट कर सकते हैं, हालांकि कुछ संभावित जोखिमों के कारण सावधान रह सकते हैं। इस बीच, हाल के हफ्तों में फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई बढ़ी है, क्योंकि कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने एक्सपोर्ट बनाए रखने के दूसरे तरीके ढूंढ लिए हैं। ईरान ने पिछले हफ्ते 30 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल भी भेजा है।

सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान हथियारों के इंस्पेक्शन की इजाज़त देगा, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि जिसे उन्होंने “न्यूक्लियर ईमानदारी” कहा है।

इस बीच, शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि लगभग 2 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे दो कच्चे तेल के टैंकर सोमवार को होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुज़रे, जो रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच रविवार को कम मूवमेंट के बाद समुद्री ट्रैफिक में सुधार का संकेत है।

एक अलग डेवलपमेंट में, US डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी के सोमवार को जारी डेटा से पता चला कि स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व में कच्चे तेल का स्टॉक पिछले हफ़्ते घटकर 331.2 मिलियन बैरल रह गया, जो जून 1983 के बाद सबसे कम लेवल है, क्योंकि US-ईरान लड़ाई के बाद सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।