अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के मुताबिक, इससे दुनिया को लंबे समय तक भरोसा रहेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA के अधिकारी फिर से ईरान में तैनात किए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह 2015 के परमाणु समझौते जैसी व्यवस्था की वापसी होगी, जिससे ट्रम्प ने 2018 में अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित कर दी थी। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार से जुड़े सबसे कठिन मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए। 2. अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी: ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया। 3. ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है। 4. होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी: करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। 5. स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस पर तबाही मचाने लाली ब्रह्मोस मिसाइल ग्लोबल सेंसेशन बन गई है। दुनिया के कई देश भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है। कुछ दिनों पहले भारत और वियतनाम की बीच BrahMos मिसाइल सप्लाई की बड़ी डिफेंस डील पर सहमती बनी है। वहीं अब इस मिसाइल को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत और UAE के बीच रक्षा क्षेत्र में नई बातचीत शुरू हुई है। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE भारत की ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है।
UAE ने दिखाई दिलचस्पी
यूएई पश्चिम एशिया में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करना चाहता है। बताया गया है कि अबू धाबी ने भारत के कई रक्षा उपकरणों और हथियार प्रणालियों में रुचि दिखाई है। हालांकि यह बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। ईरान-इजराइल जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। इसी वजह से UAE अपनी सैन्य ताकत मजबूत कर रहा है।
दोनों देशों के बीच चल रही है बातचीत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि यूएई ने भारत के कई आधुनिक रक्षा उपकरणों में रुचि दिखाई है। इनमें ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली प्रमुख हैं। सूत्र ने कहा कि भारत और यूएई के बीच इस विषय पर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत और रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र और लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। वहीं, आकाशतीर एक स्वदेशी वायु रक्षा कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भारतीय सेना के साथ मिलकर तैयार किया है। यह प्रणाली हवाई खतरों की निगरानी और उनसे निपटने में सेना की मदद करती है।
यूएई लगातार मजबूत कर रहा अपनी सुरक्षा
हाल के क्षेत्रीय तनाव और ईरान के हमलों के बाद यूएई अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है। साथ ही वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है। यह समुद्री मार्ग यूएई के ऊर्जा निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल की शुरुआत में अबू धाबी ने दक्षिण कोरिया के साथ 35 अरब डॉलर से अधिक के रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। संघर्ष और सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाली संस्था ‘आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा’ की दक्षिण एशिया विशेषज्ञ पर्ल पांड्या ने कहा कि अलग-अलग देशों से रक्षा उपकरण खरीदने से यूएई को रणनीतिक रूप से अधिक स्वतंत्रता मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंधों का एक फायदा यह भी है कि इससे अमेरिका को कोई आपत्ति नहीं होती, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच भी अच्छे सहयोगी संबंध हैं।
Gurudwara Clash Nihang Sikh: उत्तराखंड में रुदप्रयाग जिले के नगरासू स्थित एक गुरुद्वारे में कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं ने जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं मैनेजमेंट को बंधक बनाते हुए गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। आरोप है कि पंजाब से आए कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं ने रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे पर हंगामा करने के बाद डायरेक्ट कब्जा कर लिया। उन्होंने वहां मौजूद एक सेवादार को बंधक बना लिया। ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुद्वारे की छत पर खड़े कुछ लोग हथियार लहराते भी नजर आए, जिससे इलाके में चिंता का माहौल है।
पुलिस ने बताया कि इस घटना में शामिल निहंग श्रद्धालु 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में एक घटना के बाद गिरफ्तार किए गए निहंगों को छोड़े जाने की मांग कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, निहंग गुरुद्वारे के मैनेजमेंट को भी अपने साथ ले गए और उनके पास भाला, तलवार, कुल्हाड़ी और कृपाण जैसे हथियार हैं।
भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
पुलिस ने बताया कि मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। निहंग श्रद्धालुओं से बात कर उन्हें नीचे आने के लिए मनाने के प्रयास जारी हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं।
श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में 16 जून को मत्था टेककर वापस आ रहे कुछ निहंग सिखों का कर्णप्रयाग बाजार में कृष्णा पैलेस होटल के पास वाहन खड़ा करने को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से तलवार से हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया।
8 से 10 निहंग सिख गुरुद्वारे में मौजूद
पुलिस के मुताबिक, झड़प में एक सिख श्रद्धालु भी चोटिल हुआ था। घटना के संबंध में पंजाब के मोहाली जिले के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार भी किया गया था। जानकारी के अनुसार, शनिवार को पंजाब से आए कुछ निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग की घटना में एकतरफा कार्रवाई के विरोध में रविवार को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नगरासू गुरुद्वारे के प्रबंधकों से सहयोग की अपील की थी।
निहंगो ने अपेक्षा के अनुरूप सहयोग न मिलने पर शनिवार शाम को नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान तोड़फोड़ के बाद मैनेजमेंट को लेकर गुरुद्वारे की छत पर चढ़े तथा नारेबाजी करने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, 8 से 10 निहंग सिख गुरुद्वारे में मौजूद है। वे गुरुद्वारे के छत पर खड़े होकर हथियार लहरा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि निहंग सिखों की शिकायत ये है कि गुरुद्वारा मैनेजमेंट ने कर्णप्रयाग की घटना पर खुलकर निहांगो का स्टैंड नहीं लिया।
Around 8 to 10 Nihangs have taken over the Nagrasu Gurudwara in Rudraprayag. DM and SP are on site. This lawlessness is a massive threat to Uttarakhand. Why is mainstream media silent on this? https://t.co/qEe5Mc7pZ3 pic.twitter.com/zpANhortpK
— Himalayan Hindu (@himalayanhindu) June 21, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर फिर एक बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि जी-7 समिट के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कम हो रही है। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह ईरान को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोकने में इटली की कथित असफलता हो सकती है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि मेलोनी ने उस समय अमेरिका का साथ नहीं दिया, जब ईरान को परमाणु हथियारों तक पहुंचने से रोकने की बात हो रही थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा इटली से प्यार करता है और उसकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहता है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि नाटो ने भी इटली की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने मेलोनी पर साधा निशाना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के साथ तनाव के दौरान इटली ने अमेरिका को अपने एयरबेस और रनवे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, इटली सरकार का कहना था कि अमेरिका ने इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत पहले से मंजूरी नहीं ली थी। ट्रंप ने कहा, “मेलोनी ने हमें इटली के रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप का इस्तेमाल नहीं करने दिया। इससे हमारे कामकाज और जरूरी व्यवस्थाओं में काफी परेशानी हुई। यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और नाटो के दूसरे सहयोगी देशों की सुरक्षा पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उनके साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रही थीं। उनके अनुसार, मेलोनी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने के लिए अमेरिका और उनके साथ नजदीकियां दिखाना चाहती थीं। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ट्रंप और मेलोनी के बीच बयानबाजी तेज
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अब जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। ट्रंप ने लिखा, “अब वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्त बनना चाहती हैं। नहीं, धन्यवाद!” वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी।
मेलोनी ने कहा कि ट्रंप की यह बात पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही एक सहयोगी देश के बारे में इस तरह की बातें क्यों कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ट्रंप के लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी बातें दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं हैं।
NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी 2026 पुन:परीक्षा का आयोजन कल, 21 जून 2026 को पूरे देश में बने परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों तक छात्रों को सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के पहुंचाने के लिए कई राज्यों ने मुफ्त बस यात्रा और रेल सेवा सुविधा देने की घोषणा की है। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी सेंटर्स में पीने का पानी, बिना रुकावट बिजली की सप्लाई, बैकअप जनरेटर, फर्स्ट-एड की सुविधा, एम्बुलेंस और ज़रूरत पड़ने पर पोर्टेबल टॉयलेट मौजूद हों। डायबिटीज से पीड़ित छात्रों के लिए परीक्षा के दौरान हल्का नाश्ता भी देने का प्रबंध किया गया है। इसके अलावा कुछ परीक्षा केंद्रों के आसपास के दायरे में निषेधाज्ञा लागू करने की भी जानकारी है।
कई राज्यों में फ्री बस यात्रा की घोषणा
कल नीट यूजी री-एग्जाम में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने परीक्षा केंद्र तक जाने वाले छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन सपोर्ट की घोषणा की है। छात्र अपना एडमिट कार्ड दिखाकर बसों में मुफ्त सफर कर सकते हैं।
NEET UG 2026 | 50% Fare Concession
Under the directions of @UPGovt, Uttar Pradesh State Road Transport Corporation will provide a 50% fare concession to NEET UG 2026 candidates travelling on 20 & 21 June 2026 across all UPSRTC bus services.
Candidates must carry their valid… pic.twitter.com/OBOKjotlKG
— UPSRTC (@UPSRTCHQ) June 19, 2026
ये राज्य दे रहे अलग सुविधाएं भी
- बिहार में राज्य सरकार, जिला प्रशासन, धार्मिक संस्थाओं और एनजीओ के साथ मिल कर रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और मुख्य ट्रांजिट पॉइंट्स पर छात्रों और उनके माता-पिता के लिए पीने का पानी, सत्तू और दूसरी रिफ्रेशमेंट्स देने की तैयारी की है।
- उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने छात्रों को बस किराए में 50% छूट के साथ ही जिला प्रशासन को परीक्षार्थियों के लिए अस्थायी रहने की जगह का इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है।
- दिल्ली सरकार ने नीट परीक्षा केंद्रों के पास कूलिंग जोन बनाने का ऐलान किया है। इनमें कूलिंग जोन में बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ पीने का पानी, नींबू पानी (शिकंजी) और दूसरी जरूरी सुविधाए भी मिलेंगी।
Subject: Free travel facility in DTC and DoT buses for candidates appearing in the NEET (UG) 2026 re-examination on 21.06.2026 (Sunday) – regarding. pic.twitter.com/CAz5t5UrSK
— Delhi Transport Corporation (@dtchq_delhi) June 18, 2026
- मुंबई का सबअर्बन रेलवे नेटवर्क 21 जून, रविवार को अपने रेगुलर संडे मेंटेनेंस ब्लॉक रोक देगा। सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे दोनों ने बिना संडे ब्लॉक के काम करने का फैसला किया है।
परीक्षा केंद्र के पास निषेधाज्ञा लागू
कई जगहों पर परीक्षा केंद्रों के आसपास 500 गज के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 (द.प्र.सं. की धारा 144) के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश दिया गया है। इसके तहत परीक्षा केंद्रों के पास 5 या 5 से अधिक व्यक्ति एक साथ एकत्रित नहीं रहीं होंगे। कोई भी व्यक्ति घातक हथियार लेकर नहीं चलेंगे।
सेना के हेलीकॉप्टर से प्रश्न पत्र पहुंचाए जाएंगे
भारतीय सेना के एक हेलीकॉप्टर ने हाल ही में तमिलनाडु में हाई-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत क्वेश्चन पेपर्स पहुंचाने के प्लान के तहत ड्राई रन किया। इस व्यवस्था के तहत, पेपर्स दिल्ली से मदुरै लाए जाएंगे और फिर हथियारों की सुरक्षा में तिरुनेलवेली पहुंचाए जाएंगे।
सुरक्षा के सख्त इंतजाम
परीक्षा केंद्रों पर दूसरे सुरक्षा उपायों में एआई मॉनिटरिंग के साथ चार-स्तर की सीसीटीवी सर्विलांस, एंट्री से पहले बायोमेट्रिक और फेशियल रिकग्निशन-बेस्ड वेरिफिकेशन, कई राउंड की तलाशी और मल्टी-लेवल ओवरसाइट शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा की ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा प्रक्रिया पर भी सबसे ऊंचे लेवल पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
NEET UG Re-exam 2026: नागपुर के छात्र को दे डाला अबु धाबी में परीक्षा केंद्र, राहुल गांधी ने एक्स पर उठाया मुद्दा तो एनटीए ने दिया गलती सुधारने का भरोसा

21 June World Yoga Day : ज़िंदगी की भागदौड़, तनाव और अंतहीन चिंताएं अक्सर हमारे मन को दुखों से भर देती हैं। जब यह दुख परमानेंट ठिकाना बना ले, तो डिप्रेशन और माइग्रेन जैसी अनचाही कड़वाहटें ज़िंदगी में घुलने लगती हैं। अगर आप भी सिरदर्द की इस टीस और उदासी के साए से परेशान हैं, तो इस योग दिवस पर खुद को एक नया मौका दें। अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें ये 5 जादुई योग टिप्स और पाइए एक सुकून भरी मुस्कुराती हुई ज़िंदगी।
1. सांसों का संतुलन: तीन खास प्राणायाम
मन को शांत और सिर को हल्का करने के लिए चंद्रभेदी, सूर्यभेदी और भ्रामरी प्राणायाम को अपना हमसफ़र बना लीजिए। इन्हें सीखना बेहद आसान है, लेकिन इनका असर सीधा आपके मानसिक तनाव को जड़ से मिटाने पर होता है।
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2. आसनों से जगाएं ऊर्जा
शरीर और मस्तिष्क में नई ऊर्जा का संचार करने के लिए योग मैट बिछाइए। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, पवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन या ब्रह्ममुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं। अगर वक्त की कमी है, तो इन सब की जगह रोज़ाना कुछ चक्र सूर्य नमस्कार के कर लेना ही काफी है।
3. ध्यान: मानसिक डिटॉक्स
अगर आप आसनों के चक्रव्यूह में नहीं पड़ना चाहते, तो कोई बात नहीं। रोज़ाना बस 10 मिनट के लिए मौन होकर ध्यान (Meditation) में बैठ जाएं। यह आपके दिमाग के सारे क्लटर (कबाड़) को साफ कर देगा।
4. डीप ब्रीदिंग: सांसों का गणित
व्यस्तता के बहाने छोड़िए और सांस लेने का यह सिंपल फॉर्मूला आज़माइए। पेट तक एक गहरी लंबी सांस अंदर खींचें, फिर उसे दोगुने समय के लिए अंदर ही रोक कर रखें (कुंभक), और फिर धीरे-धीरे पूरी सांस बाहर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार दोहराएं। यह डिप्रेशन के लिए इंस्टेंट रिलीफ का काम करता है।
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5. योग निद्रा: सुकून का रामबाण इलाज
तनाव भगाने का सबसे रिलैक्सिंग तरीका है योग निद्रा। रोज़ाना सिर्फ 20 मिनट के लिए योग निद्रा की मुद्रा में लेट जाएं और बैकग्राउंड में अपना पसंदीदा शांत संगीत चलाकर उसमें खो जाएं। साथ ही 5 मिनट का ध्यान और भ्रामरी प्राणायाम इसमें जोड़ लें, तो यह माइग्रेन और डिप्रेशन के खिलाफ आपके लिए सबसे अचूक और रामबाण हथियार साबित होगा।
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ईरान ने कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। अगर समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में दिया। इधर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन इजराइली कब्जे को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम है। संगठन लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और विदेशी दबदबे को खारिज करता है। कासिम ने कहा, अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता टली: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली पहली औपचारिक वार्ता टाल दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में लगातार इजराइली हमलों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। 2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 लोगों की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर रात से हुए इजराइली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ी: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है। हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। 4. ट्रम्प बोले- ईरान को एक पैसा भी नहीं मिलेगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका मजबूरी में बातचीत की मेज पर नहीं आया, बल्कि ईरान खुद आया है। उन्होंने कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका से एक पैसा भी नहीं मिलेगा। 5. पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और अगले दौर की बातचीत को कूटनीति और संवाद के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाएंगी। आदिवासी समाज के साथ ही पूरे देश के लिए द्रौपदी मुर्मु प्रेरणास्रोत हैं। हालांकि, जीवन यात्रा के दौरान दो जवान बेटे उनकी आंखों के सामने दुनिया को छोड़कर चले गए। बाद में जीवनसाथी की भी मौत हो गई। समय बार-बार उनका इम्तिहान ले रहा था। यह गम ऐसा था, जो किसी को भी अंदर से तोड़ सकता था लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास और हौसलों के साथ इन हालातों का सामना किया और खुद को मजबूत किया। अध्यात्म के सहारे खुद को इतना सबल बनाया कि मुश्किलें उनके सामने सिर झुकाने लगीं। देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन की कहानी सच में प्रेरणादायक है।
ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं था। खासकर सीमित संसाधन, सामाजिक चुनौतियां और कठिन हालात में उन्होंने जिस तरह शिक्षा को अपना हथियार बनाया और आगे बढ़ती रहीं, वह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति का उदाहरण है। अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली छात्रा से लेकर राष्ट्रपति बनने तक उनका सफर भी लोकतंत्र की ताकत को दिखाता है।
द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के दूरस्थ मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उपरबेड़ा प्राथमिक विद्यालय में हुई। अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से और शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से वे 8वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर गईं। वह मैट्रिक की परीक्षा पास करने और कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली अपने गांव की पहली बालिका बनीं। उन्होंने साल 1979 में भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1980 में उनकी शादी श्यामचरण मुर्मु से हुई, जो एक बैंक अधिकारी थे।
उनके प्रारंभिक जीवन को संघर्ष, धैर्य और उनके परिवार से मिले मजबूत नैतिक मूल्यों से आकार मिला। उन्होंने अनेक सामाजिक और वित्तीय कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना किया और वे आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। इन प्रारंभिक संघर्ष भरे वर्षों में उनकी सार्वजनिक सेवा और नेतृत्वशीलता से प्राप्त उपलब्धियों की नींव रखी गई।
एक समय ऐसा आया जब 2009 में द्रौपदी मुर्मु डिप्रेशन में चली गई थीं। 25 साल की उम्र में उनके बेटे की असमय मौत हो गई थी, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा था और वे डिप्रेशन में जा चुकी थीं। खुद को हिम्मत देने के लिए उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना और वे ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ जुड़ गईं। वह धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आ ही रही थीं लेकिन समय ने उनकी एक और परीक्षा ले ली। दुख का पहाड़ ऐसा टूटा था कि सिर्फ चार साल के बाद 2013 में एक अन्य दुर्घटना में द्रौपदी मुर्मु के दूसरे बेटे का भी निधन हो गया था।
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दोनों बेटों का निधन उनके लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था लेकिन दुखों का यह दौर यहीं समाप्त नहीं हुआ। दूसरे बेटे की मृत्यु के कुछ दिनों बाद ही उनकी मां और उनके भाई का निधन हो गया था। वे इस गम को भुला पातीं, उसके पहले 2014 में पति श्यामचरण मुर्मु भी दुनिया को छोड़कर चले गए। इस तरह कुछ वर्षों में ही धीरे-धीरे परिवार के कई सदस्य उनको छोड़कर चले गए। हालांकि, उन्होंने आध्यात्म के साथ योग शुरू किया, ताकि खुद डिप्रेशन से बाहर आ सकें। उन्होंने इसके खिलाफ तब तक लड़ाई लड़ी जब तक उन्होंने उसे हरा नहीं दिया।
अपने कष्टसाध्य व्यक्तिगत जीवन के बावजूद द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरे समर्पण से कार्य किया है, जिससे उनकी समय के अनुसार ढल जाने की असाधारण क्षमता का पता चलता है। उनकी दृढ़ता और उद्देश्यपूर्ण यात्रा से ऐसे समावेशी और सशक्त भारत बनाने की प्रेरणा मिलती रहेगी जहां हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान हो और सबको आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों।
द्रौपदी मुर्मु जमीनी स्तर पर लोकतंत्र से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने समावेश, प्रतिसंवेदना और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति दृढ़ संकल्प रखते हुए शासन के तीनों स्तरों पर अपनी सेवाएं दी हैं।
मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया। 2000 में, वह ओडिशा में भाजपा-बीजेडी गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री बनीं। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा की ओर से सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए पंडित ‘नीलकंठ दास-सर्वश्रेष्ठ विधायक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वह ओडिशा के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार (2000 और 2009) विधायक रहीं। 2009 के चुनावों में जब बीजेडी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और सीएम नवीन पटनायक ने बड़ी जीत हासिल की, तब भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।
द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार के परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों का कामकाज संभाला। वह ओडिशा में भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष रहीं। मुर्मू को 2010 में भाजपा की मयूरभंज (पश्चिम) इकाई का जिला अध्यक्ष चुना गया और 2013 में वह फिर से चुनी गईं। उसी साल उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) का सदस्य भी बनाया गया। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी नेता बनीं।
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Defence Stock: घरेलू डिफेंस भारत फोर्ज की डिफेंस यूनिट Kalyani Strategic Systems Ltd (KSSL) ने अमेरिकी आर्मी के लिए गाड़ियां बनाने वाली कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित Eurosatory डिफेंस एक्सपो के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
दोनों कंपनियों का लक्ष्य दुनिया भर की सेनाओं को मोबाइल आर्टिलरी गन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। फोकस 155mm आर्टिलरी सिस्टम पर रहेगा। इन्हें अलग-अलग इलाकों और हर तरह के मौसम में आसानी से तैनात किया जा सकेगा।
क्या बनाएंगी दोनों कंपनियां?
इस साझेदारी के तहत AM General ने अमेरिकी सेना के Mobile Tactical Cannon (MTC) प्रोग्राम के लिए प्रस्ताव भी जमा किया है।
इस प्रस्ताव में KSSL के Mounted Artillery Gun (MArG) प्लेटफॉर्म पर आधारित 155mm Mobile Tactical Cannon सिस्टम विकसित करने की योजना है। अगर अमेरिकी सेना इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसकी डिलीवरी 2027 में शुरू हो सकती है।
MArG सिस्टम की खासियत क्या है?
दोनों कंपनियों के मुताबिक MArG प्लेटफॉर्म में 52-कैलिबर की 155mm तोप लगी है। इसमें रिकॉइल कम करने वाली तकनीक दी गई है। साथ ही ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और ऑल-वेदर फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है।
यह सिस्टम 40 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक स्टैंडर्ड हाई-एक्सप्लोसिव गोले दाग सकता है। इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि यह 20 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल और प्रोपेलेंट चार्ज अपने साथ ले जा सकता है।
Bharat Forge ने क्या कहा?
Bharat Forge के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि AM General के साथ यह साझेदारी कंपनी की एडवांस्ड आर्टिलरी तकनीक और क्षमताओं पर भरोसे को दिखाती है।
उन्होंने कहा कि कंपनी आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक तकनीक विकसित करने और युद्ध में परखे गए समाधान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
AM General ने क्या कहा?
AM General के प्रेसिडेंट और CEO जॉन चैडबोर्न ने कहा कि KSSL के साथ यह साझेदारी मित्र देशों और उनके सैनिकों को बेहतर सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के आधुनिक प्लेटफॉर्म का मेल युद्धक्षेत्र में बड़ा फायदा दे सकता है। इससे सेनाओं को नई और अधिक प्रभावी क्षमता मिलेगी।
वैश्विक बाजार पर नजर
दोनों कंपनियों का कहना है कि इस साझेदारी का मकसद MArG प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच बढ़ाना है। साथ ही दुनिया भर में मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की बढ़ती मांग को पूरा करना भी इसका लक्ष्य है।
कंपनियों को उम्मीद है कि यह प्लेटफॉर्म मित्र देशों और साझेदार देशों की सेनाओं के बीच अच्छी मांग हासिल कर सकता है।
शेयर का क्या रहा हाल?
Bharat Forge का शेयर 18 जून को NSE पर 0.85% की गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 43.32% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में करीब 55% रिटर्न दिया है। इसका मार्केट कैप 96.67 हजार करोड़ रुपये है।
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संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पर्वतीय रिसॉर्ट में बैठक की योजना बना रहे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह बैठक उनके समझौते को लागू करने के लिए शुरुआती बातचीत के तौर पर होगी।
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का वह स्वागत करता है। यह क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फिलहाल बैठक के एजेंडे और अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी जा सकती।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ हुए इस समझौते का जोरदार बचाव किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बताया, जिसके कारण मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका टल गई, होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोका जा सका।
फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।
ट्रंप ने कहा रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।
ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ शर्तों के साथ अमेरिका ईरान के सिविलियन परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार कर सकता है। यह अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक माना जा रहा है कि वॉशिंगटन आगे ईरान के साथ बातचीत को किस दिशा में ले जा सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान नए समझौते का पालन करता है, तो क्या उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, तो ट्रंप ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है।
उन्होंने कहा मैं उनसे हमेशा कहता रहा हूं कि दुनिया में आपके पास शायद तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर आपको परमाणु ऊर्जा की जरूरत ही क्या है?
उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन के लिए कुछ हद तक परमाणु ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है।
ट्रंप ने कहा कि वह लंबे समय से ईरान के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि देश के पास पहले से ही तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं।
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