ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर लगी मुहर

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। 

व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज शाम फ्रांस के वर्सेल्स में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर से ठीक पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान समझौता ज्ञापन प्राप्त हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने बुधवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करते हुए और कूटनीति के लिए रास्ता खोलते हुए वह हासिल किया है, जिसे कई लोग असंभव मानते थे।

श्मिट ने कहा कि ईरान ने पहली बार परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता भरोसे के बजाय सत्यापन के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।

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अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ ईरान की शुरुआती शांति व्यवस्था तेहरान के लिए लेबनान में हिज्बुल्लाह की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का मार्ग खोल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के बाद ईरान को अनफ्रीज किए गए फंड और तेल सौदों से धन प्राप्त होना शुरू हो सकता है।

अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क पोस्ट ने न्यूज एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि इस एमओयू के तहत, ईरान को युद्ध के बाद के निवेश, प्रतिबंधों से राहत और अनफ्रीज्ड फंड से सैकड़ों अरबों का फायदा होगा। ऐसे में ईरान रिकंस्ट्रक्शन फंड का इस्तेमाल लेबनान में अपने बुरी तरह से तबाह हो चुके टेरर प्रॉक्सी को सहारा देने के लिए करेगा।

दो क्षेत्रीय राजनयिकों और दो वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को जल्द वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिससे समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।

हिज्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने पुष्टि की है कि ईरान संगठन को सार्वजनिक रूप से समर्थन देता है। अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष लगभग एक ​​बिलियन डॉलर का ट्रांसफर भी इसमें शामिल था। कार्यालय ने कहा कि ईरान का समर्थन जारी रहेगा, चाहे फंड की वापसी से जुड़ी व्यवस्थाएं कुछ भी हों।

अमेरिका ने कहा है कि ईरान अपने अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समझौते का उल्लंघन होने पर धनराशि को फिर से फ्रीज किया जा सकता है।

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होर्मुज खुला, लेकिन सिर्फ 60 दिन फ्री रहेगा:अमेरिका ₹28 लाख करोड़ देगा, बदले में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा; समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

वर्ल्ड अपडेट्स:बेकाबू घोड़ागाड़ी से गिरकर भारतीय युवक की मौत, न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में हादसा

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित सेंट्रल पार्क में घोड़ा-गाड़ी दुर्घटना में 18 वर्षीय भारतीय पर्यटक रोमांच महाजन की मौत हो गई। बुधवार दोपहर करीब 3 बजे घोड़ा अचानक बेकाबू होकर दौड़ पड़ा, जिससे गाड़ी पलट गई और युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोमांच महाजन तीन अन्य यात्रियों के साथ घोड़ा-गाड़ी में सवार थे। ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (TWU) के अनुसार, गाड़ी चालक यात्रियों की तस्वीर लेने के लिए कुछ देर के लिए गाड़ी से दूर गया था। इसी दौरान घोड़ा बेकाबू होकर दौड़ पड़ा। हादसे के दौरान दो यात्रियों ने चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। रोमांच गाड़ी से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। अन्य यात्रियों ने उपचार लेने से इनकार कर दिया। घटना के बाद सेंट्रल पार्क की घोड़ा-गाड़ी व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में एक अन्य घोड़ा काम के दौरान गिरकर मर गया था। सेंट्रल पार्क कंजर्वेंसी ने इस हादसे को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए घोड़ा-गाड़ी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और ‘राइडर्स लॉ’ को लागू करने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू, G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने बुधवार को इसकी घोषणा की। इस समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर हुए थे। दोनों नेताओं की फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी। यानी कारोबारियों को नई व्यवस्था की तैयारी के लिए 28 दिन मिलेंगे। पीएम मोदी ने इसे भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। भारतीय कपड़े, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा। भारतीय कुशल प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में काम के दौरान दोहरे सोशल सिक्योरिटी योगदान से राहत मिलेगी। यह राहत 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने तक होगी। भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 40% होगा। ऑटोमोबाइल पर शुल्क कोटा के तहत 100% से घटकर 10% होगा। टेक्सास में हाईवे पर क्रैश हुआ प्राइवेट जेट, 1 की मौत 5 घायल अमेरिका के टेक्सास में एक प्राइवेट जेट इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हाईवे पर क्रैश हो गया। हादसे में विमान में सवार 6 लोगों में से एक की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य घायल हो गए। हालांकि, हाईवे पर मौजूद किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, NetJets Cessna 680 Citation Latitude विमान मैक्सिको के लॉस काबोस से ऑस्टिन (टेक्सास) जा रहा था। उड़ान के दौरान आपात स्थिति घोषित किए जाने के बाद विमान को लारेडो इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया था।
हादसा विमान की लैंडिंग के दौरान एयरपोर्ट से करीब 4 किलोमीटर दक्षिण में हुआ। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई द्वीपों पर बर्ड फ्लू का कहर: 75% से ज्यादा बेबी सील्स की मौत
ऑस्ट्रेलिया के दूरदराज स्थित हर्ड और मैकडोनाल्ड द्वीपसमूह में H5N1 बर्ड फ्लू ने वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक नए अध्ययन के अनुसार, दक्षिणी एलिफेंट सील के 17 हजार से ज्यादा बच्चों में से 13 हजार से अधिक की मौत हो चुकी है, जबकि किंग और जेंटू पेंगुइनों में भी सामान्य से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। शोध के मुताबिक, हर्ड द्वीप पर दक्षिणी एलिफेंट सील के 17,364 बच्चों में से 13,359 की मौत हो चुकी है। यह कुल आबादी का 75% से अधिक हिस्सा है। कुछ इलाकों में मृत्यु दर 97% तक दर्ज की गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि अंतिम सर्वेक्षण के दौरान भी सील के बच्चे मर रहे थे। वैज्ञानिकों ने अक्टूबर और जनवरी में ड्रोन सर्वे तथा जमीनी निरीक्षण के दौरान नौ प्रजातियों के नमूने जुटाए। इनमें से छह प्रजातियों में H5N1 संक्रमण की पुष्टि हुई। प्रभावित प्रजातियों में दक्षिणी एलिफेंट सील, किंग पेंगुइन, जेंटू पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील शामिल हैं। अध्ययन में कई सौ वयस्क किंग पेंगुइनों की मौत भी दर्ज की गई। हालांकि यह उनकी कुल आबादी का छोटा हिस्सा है, लेकिन सामान्य वर्षों की तुलना में यह संख्या अधिक है। अध्ययन की प्रमुख लेखक डॉ. जूली मैकिन्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के बाहरी क्षेत्र में H5N1 का यह पहला मामला है। स्टोनहेंज से 5 किमी दूर मिला उसका ‘सरल रूप’: 5,000 साल पुरानी संरचना सूर्य की दिशा से जुड़ी थी
ब्रिटेन के प्रसिद्ध स्टोनहेंज स्मारक से करीब 5 किलोमीटर दूर पुरातत्वविदों को एक 5,000 साल पुरानी संरचना के अवशेष मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्टोनहेंज का शुरुआती और बेहद सरल रूप हो सकता है, जो ग्रीष्मकालीन सूर्योदय और शीतकालीन सूर्यास्त के दौरान सूर्य की दिशा के अनुरूप बनाया गया था। बुलफोर्ड गांव में मिली इस संरचना में पत्थरों की जगह केवल दो बड़े लकड़ी के खंभे थे। हालांकि लकड़ी समय के साथ नष्ट हो चुकी है, लेकिन जमीन में मौजूद गड्ढों से उनकी स्थिति का पता चला। दोनों खंभे करीब 120 मीटर की दूरी पर स्थित थे और उनकी अनुमानित ऊंचाई 2 से 4 मीटर थी। खुदाई का नेतृत्व करने वाले पुरातत्वविद फिल हार्डिंग ने बताया कि रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि यह संरचना लगभग 5,000 वर्ष पुरानी है। यह स्टोनहेंज के पत्थर लगाए जाने से करीब 500 वर्ष पहले की है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभव है स्टोनहेंज के शुरुआती निर्माण से जुड़े लोग इसी क्षेत्र में रहते या एकत्रित होते रहे हों। खुदाई के दौरान सजावटी मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, चकमक पत्थर के औजार, जानवरों की हड्डियां और एक दुर्लभ डिस्क आकार का नवपाषाणकालीन चाकू भी मिला है। फिनलैंड ने हटाई परमाणु हथियारों पर रोक: NATO न्यूक्लियर तैनाती का रास्ता खुला
फिनलैंड की संसद ने देश में परमाणु हथियारों के आयात, ट्रांजिट और भंडारण पर लगी लंबे समय से चली आ रही रोक को समाप्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि इससे फिनलैंड और NATO की सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि आलोचकों का दावा है कि इससे देश रूस के संभावित परमाणु निशाने पर आ सकता है। बुधवार को संसद ने न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट और क्रिमिनल कोड में संशोधन के पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट दिए। संशोधन के बाद अब फिनलैंड में परमाणु हथियारों के आयात, आपूर्ति, परिवहन और भंडारण की अनुमति होगी। रक्षा मंत्री एंटी हक्कानेन ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक सुधार फिनलैंड और NATO दोनों की सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब फिनलैंड NATO में शामिल होने के बाद अपनी सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव कर रहा है। 2023 में NATO की सदस्यता लेने के बाद रूस और फिनलैंड के संबंधों में तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच करीब 1,340 किलोमीटर लंबी सीमा है। रूस ने पहले ही इस कदम को लेकर चेतावनी दी थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि यदि फिनलैंड अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती की अनुमति देता है, तो इससे यूरोप में तनाव बढ़ सकता है और रूस उचित जवाबी कदम उठाएगा। UAE में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध: ऐसा करने वाला पहला अरब देश
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एक प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम आयु 15 वर्ष तय कर दी है। इसके साथ ही UAE ऐसा नियम लागू करने वाला पहला अरब देश बन गया है। UAE सरकार के मीडिया कार्यालय के अनुसार, नए नियम के तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, इस आयु वर्ग के बच्चों की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सभी सुविधाओं तक पहुंच भी सीमित रहेगी। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर चुके हैं। वहीं ब्रिटेन और मलेशिया ने भी नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने संबंधी कानून पारित किए हैं। कई अन्य देशों में भी इस दिशा में कानून या प्रस्तावों पर काम चल रहा है।

ट्रम्प बोले- ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका:हमने टारगेट से ज्यादा हासिल किया, 60 दिन में समझौता नहीं हुआ तो फिर बम बरसाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने तय लक्ष्यों से भी ज्यादा हासिल किया है। फ्रांस में G7 समिट से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा कि ईरान का नेतृत्व अब पहले जैसा नहीं रहेगा और वह आगे अलग तरीके से व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता तो युद्ध जारी रख सकता था, लेकिन आर्थिक तबाही से बचने के लिए शांति का रास्ता चुना। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर देगा। उन्होंने कहा, “हम कभी नहीं चाहेंगे कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। जरूरत पड़ी तो दोबारा हमला करेंगे।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही का भरोसा: ईरान और ओमान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। 2. ट्रम्प बोले- हिजबुल्लाह से सीरिया निपट सकता है: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर इजराइल हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में आम लोगों की मौत नहीं रोक पा रहा है, तो सीरिया यह जिम्मेदारी संभाल सकता है। 3. लेबनान में जंग खत्म करने की मांग: ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि सिर्फ ईरान में संघर्ष रुकना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो और इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत पर चीन की चेतावनी: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मौजूदा सहमति अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा चरण पहले से ज्यादा मुश्किल होगा और स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को लगातार प्रयास करने होंगे। 5. कुछ दिनों में पूरा ईरान समझौता सार्वजनिक होगा: ट्रम्प ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते को शब्द-दर-शब्द पढ़कर भी सुनाएंगे, ताकि उसकी सही जानकारी सामने आ सके। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

वर्ल्ड अपडेट्स:रूस का बॅाम्बर विमान क्रैश, चारों पायलट सुरक्षित, इंजन फेल होने की आशंका

रूस का Tu-22M3 बॉम्बर विमान सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट (पैराशूट के जरिए बाहर निकल) हो गए और उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में जमीन पर भी किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव ने बताया कि विमान कामेंका गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। शुरुआती जांच में इंजन फेल होना हादसे की वजह माना जा रहा है। Tu-22, जिसे NATO ने Backfire कोडनेम दिया है, सोवियत काल का एक सुपरसोनिक बॉम्बर विमान है। रूस इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान कर चुका है। Tu-22M3 इसका आधुनिक संस्करण है, जो Kh-22 क्रूज मिसाइलों और हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्रिटेन में 16 साल की उम्र से पहले बच्चे नहीं चला सकेंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव से 10 में से 9 अभिभावक खुश ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जानमाल के नुकसान की जानकारी नहीं इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के पास मंगलवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 42 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। फिलहाल जान-माल के नुकसान या सुनामी की कोई अलर्ट नहीं । नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बेटे को रेप केस में 4 साल की जेल
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी (29) को ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रेप, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए 4 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मेटे-मैरिट भी दिवंगत अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से अपने पुराने संबंधों को लेकर विवादों में हैं। अदालत ने होइबी को दो रेप मामलों में दोषी ठहराया, जबकि दो अन्य रेप आरोपों से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच उन्होंने कई महिलाओं का यौन शोषण किया, जिनमें कुछ महिलाएं सो रही थीं या प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं थीं। होइबी, क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट और क्राउन प्रिंस हाकोन के साथ शाही माहौल में बड़े हुए हैं। हालांकि, उनके पास कोई शाही उपाधि नहीं है और वे राजपरिवार की ओर से कोई आधिकारिक भूमिका नहीं निभाते। अदालत ने उन्हें अपनी पूर्व प्रेमिका के साथ दुर्व्यवहार, दूसरी साथी पर हमला, ड्रग्स से जुड़े अपराध और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी दोषी पाया। होइबी ने रेप के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन कोकीन के इस्तेमाल और मारपीट की बात स्वीकार की थी। भारत दौरे के बाद चीन पहुंचे नेपाल के विदेश मंत्री
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत दौरे के कुछ दिनों बाद चीन पहुंचकर शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की। मार्च में सत्ता में आई नई सरकार के गठन के बाद यह उनका पहला चीन दौरा है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने कहा कि चीन हमेशा नेपाल को अपनी पड़ोसी कूटनीति में प्राथमिकता देता है और उसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रयासों का समर्थन करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में नई दिल्ली दौरे के दौरान खनाल ने कहा था कि नई सरकार अतीत के राजनीतिक बोझ से मुक्त है और भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, चीन नेपाल को लगभग 31 करोड़ डॉलर का कर्ज दे चुका है। वहीं चीनी कंपनियों ने ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में 1.12 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल के हालिया राजनीतिक बदलावों ने चीन के लिए नई चुनौती पैदा की है। ऐसे में बीजिंग नेपाल के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्र में अपना प्रभाव कायम रखने की कोशिश कर रहा है। इजराइली मंत्री बेन-गवीर पर EU में नहीं बनी सहमति: प्रतिबंध प्रस्ताव अटका
यूरोपीय संघ (EU) इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर सहमति बनाने में विफल रहा। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने सोमवार को कहा कि कई सदस्य देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, लेकिन सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। बेन-गवीर हाल ही में गाजा की ओर जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं। फ्लोटिला को इजराइली सैनिकों ने रोककर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें बेन-गवीर कथित तौर पर हाथ बंधे हुए और जमीन पर बैठे कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते दिखाई दिए। इस घटना के बाद कई यूरोपीय देशों में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। हालांकि EU स्तर पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। यूरोपीय संघ इजराइल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले वर्ष इजराइल के कुल वस्तु व्यापार में उसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक रही थी। थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार का दोहराया समर्थन
थाईलैंड ने वियना में आयोजित व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) के 66वें सत्र में परमाणु हथियारों के परीक्षण और परमाणु तकनीक के सैन्य इस्तेमाल का विरोध दोहराया। देश ने परमाणु अप्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थन किया। थाईलैंड के ऑफिस ऑफ एटम्स फॉर पीस (OAP) ने कहा कि देश CTBTO की वैश्विक निगरानी और सत्यापन प्रणाली का सक्रिय समर्थक है। OAP के अनुसार, CTBTO नेटवर्क से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भूकंप निगरानी, सुनामी चेतावनी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पर्यावरण निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता है। सत्र में थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। देश ने चिकित्सा, ऊर्जा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पोलैंड में रूसी कलाकार और पुतिन आलोचक की हत्या: पार्किंग में मारीं 5 गोलियां
पोलैंड में रूसी कलाकार और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक सेम्योन स्क्रेपेत्स्की की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बियाला पोडलास्का शहर में सोमवार सुबह हुई इस वारदात के बाद पुलिस और अभियोजन एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। मामले में दो बेलारूसी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। ल्यूबलिन जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की का वास्तविक नाम रॉबर्ट कुजोवकोव था। 44 वर्षीय कलाकार पर एक अज्ञात हमलावर ने पार्किंग क्षेत्र में हमला किया। आरोपी ने पहले दो गोलियां चलाईं और पीड़ित के गिरने के बाद उसके पास जाकर तीन और गोलियां दाग दीं। कलाकार को सिर, सीने और पीठ में गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल बेलारूस के वाणिज्य दूतावास से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। जांचकर्ताओं को वहां से पांच खोखे और 9 मिमी की एक गोली बरामद हुई है। स्क्रेपेत्स्की अपने राजनीतिक व्यंग्यचित्रों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और चेचन नेता रमजान कादिरोव पर कई आलोचनात्मक चित्र बनाए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वे सार्वजनिक रूप से रूस की वर्तमान नीतियों की आलोचना भी करते थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की 2021 में पोलैंड आकर बस गए थे। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमॉर्टम बुधवार को किया जाएगा और हत्या के पीछे की वजहों की जांच जारी है। चीन में 6.3 तीव्रता का भूकंप: 1 की मौत, 4 घायल; कोयला खदानों से सभी मजदूरों को निकाला गया
चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रांत चिंगहाई में मंगलवार शाम 6.3 तीव्रता का भूकंप आया। सरकारी मीडिया के मुताबिक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 5:06 बजे हाइक्सी प्रीफेक्चर के ऊंचाई वाले इलाके में आया। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। सरकारी मीडिया ने बताया कि भूकंप के केंद्र के पास मौजूद कोयला खदानों से सभी कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर बाहर निकाल लिया गया है। अधिकारी अभी जनहानि और संपत्ति के नुकसान का आकलन कर रहे हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राहत और बचाव दल फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही भूकंप के बाद संभावित द्वितीयक आपदाओं के खतरे का भी आकलन किया जा रहा है। चीन के भूकंप प्रशासन ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्मट एक्टिव कर दिया है। मुख्य झटके के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए, जिनमें एक की तीव्रता 4.9 मापी गई।

ट्रम्प बोले-ईरान को ₹28 लाख करोड़ देने की बात फर्जी:यह झूठ विपक्ष ने फैलाया; नेतन्याहू पर कहा- मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए देने की बात को फर्जी बताया है। उन्होंने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स की तरफ से फैलाई गई झूठी खबर है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि समझौता होने पर अमेरिका, ईरान को आर्थिक मदद के तौर पर करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देगा। वहीं, ट्रम्प ने फ्रांस में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से मुलाकात में भी बताया कि अमेरिका अभी ईरान में कोई पैसा नहीं लगा रहा है। उन्होंने कहा, हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य में कभी भी वहां जाकर निवेश करने का अधिकार है। साथ ही, ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान मुद्दे पर ज्यादा जिम्मेदारी दिखाने की सलाह दी है। ट्रम्प ने कहा, “मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता। किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के लिए उतना नहीं किया, जितना मैंने किया है”। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान शर्तें पूरी करे तभी राहत मिलेगी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल किसी भी तत्काल आर्थिक राहत से इनकार किया है। 2. इजराइल ने डील से किनारा किया: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी साफ किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटेगी। 3. मैक्रों ने यूरेनियम पर शर्त रखी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर IAEA की निगरानी में रखा जाना चाहिए, ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए न हो सके। 4. ईरान ने समझौते को अपनी जीत बताया: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ‘जीत का दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल की नाराजगी ही साबित करती है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा। 5. दुनियाभर के देशों ने समझौते का स्वागत किया: UAE, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अमेरिका के कैलिफोर्निया में B-52 बॉम्बर क्रैश:8 लोगों की मौत; अधिकारी बोले- कंट्रोल सिस्टम या इंजन में खराबी की आशंका

अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस पर सोमवार सुबह B-52 बॉम्बर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, विमान में सवार सभी 8 लोगों के मारे गए हैं। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, विमान नियमित परीक्षण उड़ान पर था। सुबह करीब 11.20 बजे टेकऑफ के तुरंत बाद विमान नीचे गिरा और उसमें आग लग गई। मृतकों में वायुसेना के जवान और विमान परीक्षण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे। फिलहाल दुर्घटना की वजह साफ नहीं है। अनुमान है कि विमान का कंट्रोल सिस्टम, इंजन या टेस्टिंग किए जा रहे किसी उपकरण में खराबी आई होगी। अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि क्या विमान में हथियार मौजूद थे। हादसे के बाद एयरफील्ड को बंद कर दिया गया है और आने वाले विमानों को दूसरे एयरबेस की ओर भेजा जा रहा है। क्रैश की 4 तस्वीरें… कंट्रोल सिस्टम में खराबी की आशंका विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जेफ गुजेटी ने कहा कि विमान जिस तरह उड़ान भरने के तुरंत बाद गिरा, उससे शुरुआती तौर पर फ्लाई कंट्रोल सिस्टम में खराबी की आशंका लगती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गुजेटी के मुताबिक, यह मेंटेनेंस के बाद नियंत्रण प्रणाली में गड़बड़ी, इंजन की गंभीर खराबी या किसी परीक्षण उपकरण के फेल होने का मामला भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षण उड़ानें सामान्य उड़ानों की तुलना में अधिक जोखिम भरी होती हैं। एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस पर होती है टेस्टिंग एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस लॉस एंजिलिस से करीब 161 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यह अमेरिकी वायुसेना के विमान परीक्षण और विकास का प्रमुख केंद्र है। यहां नए विमानों, हथियार प्रणालियों, सॉफ्टवेयर और उपकरणों का परीक्षण किया जाता है। 21 मई: अमेरिका में EA-18G दो फाइटर जेट क्रैश हुए अमेरिका में 21 मई को दो EA-18G ग्रोलर फाइटर जेट क्रैश हो गए थे। हादसा इडाहो स्थित माउंटेन होम एयरफोर्स बेस पर एयर शो के दौरान हुआ। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक दोनों विमानों में सवार सभी 4 क्रू मेंबर हादसे से कुछ सेकेंड पहले सुरक्षित बाहर निकल गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी चार पैराशूट दिखे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ……………. यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में F-16 फाइटर जेट क्रैश: कुछ सेकेंड पहले पायलट सुरक्षित निकला, इस साल 8वीं बार क्रैश हुआ F-16 अमेरिका में गुरुवार को US एयरफोर्स का एक F-16 लड़ाकू विमान क्रैश हो गया। हादसे से कुछ सेकेंड पहले पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया, जिससे उसकी जान बच गई। पूरी खबर पढ़ें…

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका के कैलिफोर्निया में B-52 बॉम्बर प्लेन क्रैश, उड़ान भरते ही अमेरिकी एयर फोर्स बेस के पास हादसा

अमेरिका के कैलिफोर्निया में सोमवार को एक B-52 बॉम्बर विमान उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के पास हुआ। अमेरिकी वायुसेना ने बताया कि विमान सुबह करीब 11:20 बजे क्रैश हुआ। हादसे के बाद तुरंत राहत और बचाव दल को मौके पर भेजा गया। फिलहाल किसी के घायल होने या मौत की जानकारी सामने नहीं आई है। B-52 विमान में आमतौर पर पांच लोग सवार होते हैं, लेकिन हादसे के समय विमान में कितने लोग थे, यह नहीं बताया गया है। एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस लॉस एंजिलिस से करीब 161 किलोमीटर दूर है। हादसे की वजह अभी साफ नहीं हुई है। मामले की जांच की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्रिटेन का रूसी तेल टैंकर पर छापा, कब्जे में लिया; 38 वर्षीय भारतीय गिरफ्तार ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने रूसी शैडो फ्लीट से जुड़े तेल टैंकर SMYRTOS पर कार्रवाई के दौरान 38 वर्षीय भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है। उस पर रूस से जुड़े प्रतिबंधों के उल्लंघन का संदेह है। यह कार्रवाई 14 जून को इंग्लिश चैनल में रॉयल मरीन कमांडो, NCA अधिकारियों और ब्रिटिश सशस्त्र बलों ने मिलकर की। NCA ने बताया कि गिरफ्तार भारतीय नागरिक से पूछताछ की जा रही है, लेकिन उस पर लगे आरोपों की जानकारी अभी नहीं दी गई है। एजेंसी के मुताबिक जहाज पर मौजूद 24 भारतीय और जॉर्जियाई-भारतीय क्रू सदस्य जांच में सहयोग कर रहे हैं। टैंकर फिलहाल इंग्लैंड के डॉर्सेट तट के पास लंगर डाले हुए है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इसे रूस के लिए बड़ा झटका बताया। वहीं रक्षा मंत्री डैन जार्विस ने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध के लिए फंड जुटाने में शैडो फ्लीट का इस्तेमाल करता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार रूस की 700 से ज्यादा जहाजों वाली शैडो फ्लीट प्रतिबंधित तेल का 75% परिवहन करती है। ब्रिटेन अब तक 500 से अधिक ऐसे जहाजों पर प्रतिबंध लगा चुका है। पाकिस्तान में एयरफोर्स का विमान क्रैश, दोनों पायलटों की मौत पाकिस्तान का एक मिलिट्री ट्रेनिंग प्लेन रविवार को क्रैश हो गया। यह हादसा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मरदान जिले में कटलंग रोड के पास हुआ। हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई। मृत पायलटों की पहचान कैप्टन कासिम और कैप्टन तलहा के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, प्लेन नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था, लेकिन उड़ान के दौरान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने घटना की जानकारी ली और बताया कि प्लेन क्रैश में तीन अन्य लोग भी घायल हुए हैं। फिलहाल हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। जेलेंस्की को दिया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस ले सकता है पोलैंड पोलैंड के राष्ट्रपति कारो्ल नावरोत्स्की ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी (UPA) के सम्मान को वापस लेने की मांग की है। पोलैंड का आरोप है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान UPA ने हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। वारसॉ ने संकेत दिया है कि जवाब नहीं मिलने पर जेलेंस्की को मिला सर्वोच्च पोलिश सम्मान भी वापस लिया जा सकता है। विवाद तब शुरू हुआ जब जेलेंस्की ने एक विशेष कमांडो यूनिट का नाम “UPA के नायकों” के नाम पर रखा। UPA, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ यूक्रेनियन नेशनलिस्ट्स (OUN) की सैन्य शाखा थी। पोलैंड का कहना है कि OUN और UPA ने जातीय रूप से एकरूप यूक्रेनी राष्ट्र की विचारधारा को बढ़ावा दिया और पोलिश नागरिकों के खिलाफ हिंसक अभियान चलाए। पोलिश अधिकारियों के अनुसार, UPA ने वर्तमान पश्चिमी यूक्रेन क्षेत्र में करीब एक लाख पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। पोलैंड इन घटनाओं को जनसंहार के रूप में मान्यता देता है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने जेलेंस्की को 2023 में दिया गया ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस लेने की पहल का समर्थन किया है। यह पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यूक्रेन में UPA और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मान दिया जाता है, जबकि पोलैंड इन्हें पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जोड़कर देखता है। यूक्रेन को दिए हथियारों का हिसाब मांगेगा स्लोवाकिया
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो ने घोषणा की है कि उनका देश यूक्रेन को दान किए गए सैन्य उपकरणों के बदले यूरोपीय संघ (EU) से मुआवजे की मांग करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री एडुआर्ड हेगर की सरकार ने इस समझौते को लेकर स्लोवाक जनता को गुमराह किया था। फित्सो ने रविवार को फेसबुक पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि वह अगले सप्ताह होने वाले EU शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाएंगे। उनके मुताबिक, पिछली सरकार ने यूक्रेन को लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम देकर देश की सुरक्षा क्षमता को कमजोर कर दिया। रूस-यूक्रेन संघर्ष तेज होने के बाद 2022 और 2023 के दौरान स्लोवाकिया ने यूक्रेन को सोवियत दौर के टैंक, इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल, MiG-29 लड़ाकू विमान और S-300 एयर डिफेंस सिस्टम समेत बड़ी मात्रा में सैन्य उपकरण दिए थे। उस समय यह समझौता हुआ था कि यूक्रेन को दिए गए उपकरणों की भरपाई पश्चिमी देशों के आधुनिक सैन्य साजोसामान से की जाएगी। फित्सो लंबे समय से रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ की नीतियों के आलोचक रहे हैं। वह यूक्रेन को सैन्य सहायता और रूस पर प्रतिबंधों का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि इन नीतियों का आर्थिक नुकसान यूरोपीय देशों को ही उठाना पड़ रहा है, खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में। रूसी हमले में यूक्रेन के 5 की मौत 13 घायल, कीव के प्रसिद्ध चर्च में लगी आग
रूस ने सोमवार को यूक्रेन पर हमला किया, जिसमें खार्किव में 5 बचावकर्मियों की मौत हो गई। वहीं,राजधानी कीव में 13 लोग घायल हो गए। हमले में यूक्रेन के प्रमुख धार्मिक स्थल कीव-पेचेर्स्क लावरा भी प्रभावित हुआ। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस परिसर के डॉर्मिशन कैथेड्रल की छत में आग लग गई। यूक्रेन के गृह मंत्री इहोर क्लिमेंको के अनुसार, खार्किव में बचावकर्मी पहले हमले के बाद लगी आग बुझा रहे थे। इसी दौरान रूस ने दूसरा हमला कर दिया, जिसमें 5 बचावकर्मियों की मौत हो गई। वहीं, कीव में भी कई जोरदार धमाके हुए। रूस ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया, जिसके बाद लोगों को बंकरों और अन्य सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी। कीव सिटी मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने बताया कि राजधानी में 13 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि शैवचेंकिव्स्की जिले में 30 मिनट के भीतर 5 हमले हुए। इन हमलों में 25 अपार्टमेंट, एक बाजार और कई किराना स्टोर में आग लग गई। तकाचेंको ने आरोप लगाया कि रूस ने जानबूझकर रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया। अमेरिका में विमान हादसा: 11 स्काइडाइवर और पायलट समेत 12 की मौत
अमेरिका के मिसौरी राज्य में रविवार को एक स्काइडाइविंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 11 स्काइडाइवर और एक पायलट समेत सभी 12 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक विमान उड़ान भरने के बाद पर्याप्त ऊंचाई हासिल नहीं कर पाया और एयरपोर्ट के पास ही क्रैश हो गया। बेट्स काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट के अनुसार, विमान ने स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11:20 बजे उड़ान भरी थी। यह विमान एक स्काइडाइविंग कंपनी द्वारा लीज पर लिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि टेकऑफ के बाद विमान ऊंचाई नहीं पकड़ सका। इसके बाद उसने अचानक बाईं ओर तेज मोड़ लिया और बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट से करीब 200 गज दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शेरिफ के मुताबिक यह कोई कमर्शियल एयरलाइन नहीं थी, बल्कि स्थानीय एयरपोर्ट से संचालित एक छोटा विमान था। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने विमान की पहचान Pacific Aerospace P750 के रूप में की है। शार्क हमले के बाद सिडनी का कूजी बीच फिर खुला: ड्रोन, जेट-स्की और लाइफगार्ड की निगरानी बढ़ी
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित कूजी बीच को शनिवार को हुए शार्क हमले के बाद सोमवार को दोबारा खोल दिया गया। हालांकि प्रशासन ने यहां सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। घटना में 35 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हुई थी और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार महिला शनिवार सुबह किनारे से करीब 30 मीटर दूर तैर रही थी, तभी 3 से 4 मीटर लंबी शार्क ने उस पर हमला कर दिया। हमले में उसके हाथों और बाएं पैर में गंभीर चोटें आईं। कूजी बीच सिडनी के सबसे लोकप्रिय समुद्र तटों में से एक है। यह बॉन्डी बीच के दक्षिण में स्थित है और हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया में शार्क हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। पिछले सप्ताह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक मछुआरे की शार्क हमले में मौत हो गई थी। इससे पहले क्वींसलैंड और पर्थ के पास भी दो घातक हमले दर्ज किए गए थे। जनवरी में सिडनी समेत पूर्वी तट के कई समुद्र तटों को चार शार्क हमलों के बाद अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। घटना के बाद न्यू साउथ वेल्स सरकार ने हवाई निगरानी व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। स्टार्मर ने सोमवार को कहा कि पूर्ण प्रतिबंध ही सही विकल्प है। उनके अनुसार इससे बच्चों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उन्हें पढ़ाई, खेलकूद तथा सामाजिक गतिविधियों के लिए अधिक समय मिलेगा। प्रस्तावित प्रतिबंध टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, यूट्यूब और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लागू होगा। हालांकि, WhatsApp और Signal जैसी मैसेजिंग सेवाएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी। सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए लाइव-स्ट्रीमिंग और अजनबियों से संवाद की सुविधा देने वाले कुछ गेमिंग फीचर्स पर भी सख्त नियंत्रण लागू करेगी। ब्रिटिश सरकार ने बताया कि वह ऑस्ट्रेलिया के मॉडल का अनुसरण करेगी। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले वर्ष 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया था और ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। सरकार के अनुसार इस वर्ष के अंत तक आवश्यक नियम तैयार कर लिए जाएंगे और अगले वर्ष वसंत तक प्रतिबंध लागू किया जा सकता है। नई नीति से पहले सरकार ने शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं से व्यापक परामर्श किया। 1.16 लाख से अधिक प्रतिक्रियाओं में 83% अभिभावकों ने माना कि सोशल मीडिया के जोखिम उसके लाभों से अधिक हैं, जबकि 90% ने 16 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा का समर्थन किया। नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बेटे को 4 साल जेल: दो रेप मामलों में दोषी करार; दो आरोपों से बरी
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी को ओस्लो जिला अदालत ने दो बलात्कार मामलों में दोषी ठहराते हुए चार साल की जेल की सजा सुनाई है। 29 वर्षीय होइबी को कई अन्य अपराधों में भी दोषी पाया गया, हालांकि अदालत ने उन्हें दो अन्य रेप मामलों में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष ने अदालत से 7 साल 7 महीने की सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने 18 महीने की सजा की दलील दी थी। बचाव पक्ष को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। अदालत ने पाया कि होइबी ने दो महिलाओं के साथ उस समय यौन संबंध बनाए, जब वे या तो सो रही थीं या प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं थीं। इनमें एक मामला 2018 का है, जबकि दूसरा 2024 का। हालांकि, अदालत ने दो अन्य बलात्कार मामलों में होइबी को बरी कर दिया। इनमें एक मामला ओस्लो के होटल और दूसरा लोफोटेन द्वीप समूह में कथित घटना से संबंधित था। होइबी को अपनी पूर्व प्रेमिका और नॉर्वेजियन इन्फ्लुएंसर नोरा हाउकलैंड के साथ दुर्व्यवहार के मामले में भी दोषी पाया गया। अदालत ने उन्हें चार महिलाओं को कुल 6.40 लाख नॉर्वेजियन क्रोनर का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पीएम मोदी को स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान:‘द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस’ से नवाजे गए; दोनों देशों के बीच 11 समझौते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ से नवाजा गया है। राजधानी ब्रातिस्लावा में उन्हें सम्मानित किया गया। पीएम मोदी यहां दो दिन के दौरे पर आए थे। सम्मान मिलने पर पीएम मोदी ने X पोस्ट में लिखा – वह इसके लिए स्लोवाकिया की सरकार और वहां के लोगों के आभारी हैं। यह सम्मान भारत के 140 करोड़ लोगों का है और इसे भारत-स्लोवाकिया की मजबूत एवं स्थायी दोस्ती को समर्पित करते हैं। इससे पहले मोदी और स्लोवाकियन पीएम रॉबर्ट फिको के बीच बातचीत के बाद द्विपक्षीय डिफेंस और ट्रेड डील हुई। ब्रातिस्लावा के महल में स्लोवाकिया के पीएम रॉबर्ट फिको से मुलाकात के बाद मोदी ने फिको को भारत आने का न्योता भी दिया। भारत और स्लोवाकिया ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक साझेदारी’ (कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप) के स्तर तक अपग्रेड करने का फैसला किया। दोनों देशों के बीच प्रवासन, डिजिटल प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ब्रातिस्लावा में मोदी के स्वागत की 7 तस्वीरें… जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी के बयान की 5 बातें स्लोवाकिया में 9 हजार से ज्यादा भारतीय स्लोवाकिया में 9,200 से ज्यादा भारतीय रहते हैं। स्लोवाकिया में भारतीय आईटी सेवाओं, डेवलपमेंट सेंटर्स और तकनीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। स्लोवाकिया के शेंगेन (यूरोपी देशों का समूह जहां एस वीजा से एंट्री मिलती है) देश होने की वजह से भारतीयों को एक ही वीजा पर 26 देश घूमने की सुविधा मिलती है। 2025 में भारत-स्लोवाकिया के बीच ₹17 हजार करोड़ का व्यापार मोदी-मैक्रों की द्विपक्षीय बैठक, 13 बड़े समझौते हुए रविवार को फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्पेस और शिक्षा पर बात हुई। दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत की है। इससे पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ प्रोग्राम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के पास स्थित विला केरीलोस घुमाने ले गए। यह फ्रांस की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। मैक्रों ने यहां पीएम के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इनोवेशन प्रोग्राम में PM बोले- दोनों देशों का विजन एक, 5 बड़ी बातें मैक्रों बोले- दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है, 5 बड़ी बातें फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में राफेल के मुद्दे पर खास चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर है। भारत चाहता है कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइनिंग से लेकर विमान बनाने तक का सारा काम दोनों देश मिलकर करें। इनमें सबसे अहम वायु सेना के लिए 114 रफाल की डील है। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है। जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है। भारत और फ्रांस बना सकते हैं एआई का ओपन सोर्स मॉडल अभी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दो बड़े मॉडल हैं। पहला- अमेरिकी, जो पूरी तरह से निजी कॉर्पोरेट्स के मुनाफे पर टिका है और दूसरा चीनी, जो सरकारी नियंत्रण पर आधारित है। लेकिन, भारत और फ्रांस दुनिया को तीसरा यानी ओपन सोर्स मॉडल देने की तैयारी में हैं। मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत को दुनिया एक ‘टेक्नोलॉजी अडॉप्टर’ मानती थी, लेकिन आज भारत ‘टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर’ (समाधान देने वाला) बन चुका है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को बताते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार करता है, जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर बराबर हैं। PM का फ्रांस दौरा, 5 तस्वीरें… G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था। ……………………

ट्रम्प बोले- ईरान से डील पूरी:दुनिया के जहाजों, तेल बहने दो; पाकिस्तान PM ने कहा- 19 जून को स्विट्जरलैंड में साइनिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी डील पूरी हो गई है। ट्रम्प ने लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाने की अनुमति देने की भी बात कही। अपनी पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो। हालांकि पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि ईरान के साथ हुई डील में क्या-क्या शामिल है। यह भी साफ नहीं किया गया कि यह व्यवस्था कब से लागू होगी। वहीं, ईरान ने डील को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन कहा है कि पहले अमेरिका भरोसा दिखाए, फिर आगे की बातचीत होगी। डील के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पोस्ट में लिखा- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। डील को लेकर ईरान की तीन मांगे डील पर ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर खामेन घरीबाबादी ने कहा- हम 60 दिन की बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले अमेरिका को अपने वादे पूरे करने होंगे। ईरान की तीन मुख्य मांगें शहबाज बोले- अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद शहबाज शरीफ ने कहा कि लंबी और गहन बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए रोकने पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। शरीफ ने अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कतर के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की और सऊदी अरब व तुर्किये के नेतृत्व को भी समझौते तक पहुंचने में अहम योगदान के लिए धन्यवाद दिया। शरीफ कहा कि अब मध्यस्थ इस सप्ताह कई बैठकों का आयोजन करेंगे, जिनमें समझौते को लागू करने की तैयारी और तकनीकी स्तर की बातचीत का आधार तैयार किया जाएगा। ट्रम्प ने पहले कहा था- ईरान से पीस डील कुछ घंटों के लिए टली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमले से ईरान के साथ पीस डील की साइनिंग कुछ घंटों के लिए टल गई। एक्सिओस से बातचीत में ट्रम्प ने कहा- इजराइली हमले ने मामला हिला दिया। इससे साइनिंग कुछ घंटे लेट हो गई। अभी तक समझौता हो जाना चाहिए था, लेकिन अब यह कुछ घंटे बाद होगा। ट्रम्प के मुताबिक, जब उनके सलाहकारों ने उन्हें बेरूत पर हमले की जानकारी दी तो वह हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “यह बहुत बुरा था। हम डील पर हस्ताक्षर करने से सिर्फ एक घंटे दूर थे।” रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने इस मुद्दे पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रति भी नाराजगी जताई। हालांकि ट्रम्प ने भरोसा जताया कि समझौता अब भी पटरी पर है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित डील ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगी, उसके परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी सुनिश्चित करेगी और अचानक निरीक्षण की अनुमति देगी। ईरान सभी कारोबारी जहाजों के लिए होर्मुज तुरंत खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू करेगा। अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में भी छूट देगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…