तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

An image featuring sharp satire on the country's economy and rising inflation

साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, बस और क्या चाहिए? यह वाक्य सुनने में जितना सरल लगता है, उतना ही भयावह है। दरअसल यह कोई संतोष का वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का मृत्युलेख है जिसने करोड़ों लोगों की पूरी जिंदगी को सिर्फ रोटी तक सीमित कर दिया। जिस देश ने चंद्रयान भेज दिया, डिजिटल क्रांति कर दी, जीडीपी के ग्राफ आसमान तक पहुँचा दिए, उसी देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी सुबह उठकर यह तय नहीं कर पाता कि शाम को चूल्हा जलेगा भी या नहीं।

 

एक तरफ कांच की ऊंची इमारतों में बैठे लोग वर्क फ्रॉम होम करते हुए एवोकाडो टोस्ट और ग्रीन टी के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल पर वेबिनार कर रहे हैं, दूसरी तरफ शहर के किसी नाले किनारे बैठा रिक्शेवाला अपनी पत्नी से पूछ रहा है आज आटा बचेगा या फिर बच्चों को कहानी सुनाकर सुला दें?

 

यह वही देश है जहां भूख अब आं तों से कम और भाषणों में अधिक पाई जाती है। यहां रोटी पेट से ज्यादा राजनीति में फूलती है। चुनाव आते ही हर दल गरीब की थाली में उतर आता है। कोई कहता है मुफ्त राशन देंगे, कोई कहता है पोषण देंगे, कोई कहता है सब्सिडी देंगे, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि ऐसी व्यवस्था देंगे जहां आदमी खुद अपनी रोटी सम्मान से कमा सके। क्योंकि आत्मनिर्भर गरीब राजनीति के लिए उतना उपयोगी नहीं होता जितना राशन कार्ड वाला गरीब।

 

अब रोटी भी वर्ग देखकर परोसी जाती है। अमीर आदमी की थाली में मल्टीग्रेन, लो कार्ब, ग्लूटन फ्री, ऑर्गेनिक रोटियां हैं। गरीब की थाली में रोटी नहीं, समझौता रखा होता है। आधी जली हुई दो बासी रोटियाँ, नमक-मिर्च और बच्चों को यह समझाने की कोशिश कि आज भूख कम लग रही होगी। अमीर के यहां डाइट प्लान बनते हैं, गरीब के यहां रोटी प्लान। वहां लोग वजन घटाने के लिए खाना छोड़ते हैं, यहां लोग पैसे बचाने के लिए।

 

देश की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। हर महीने कोई नया आंकड़ा आता है जो बताता है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला है। मगर अजीब बात है कि यह अर्थव्यवस्था हमेशा गरीब की थाली के ऊपर से छलांग लगाकर निकल जाती है। स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है तो मजदूर की कमर और झुक जाती है। सेंसेक्स को देखकर कॉर्पोरेट जगत मुस्कुराता है, लेकिन दिहाड़ी मजदूर रोज सुबह इस डर से उठता है कि आज काम मिला तो रोटी मिलेगी, नहीं मिला तो लोकतंत्र का भाषण पीकर सोना पड़ेगा।

 

बिहार का मजदूर राजस्थान में ईंट ढो रहा है। उड़ीसा का युवक पंजाब की मंडियों में धूप सेंक रहा है। बुंदेलखंड का किसान दिल्ली में निर्माणाधीन इमारतों पर सीमेंट मल रहा है। और इन सबका सपना क्या है? कोई बंगला नहीं, कोई कार नहीं बस इतना कि घर में चूल्हा जलता रहे। ये लोग इस देश की अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक देवता हैं, लेकिन व्यवस्था इन्हें अनस्किल्ड लेबर कहती है, जैसे भूख मिटाने के लिए डिग्री जरूरी हो।

 

महंगाई अब आर्थिक समस्या नहीं रही, वह एक संगठित साजिश जैसी लगती है। प्याज अब सब्जी कम, भावनात्मक हथियार अधिक हो गया है। टमाटर कभी आम आदमी की पहुंच से बाहर जाकर अचानक वीआईपी व्यवहार करने लगता है। गैस सिलेंडर की कीमत सुनकर गृहिणी रोटी बेलने से पहले बजट बेलती है। अब रसोई में मसाले कम और गणित अधिक पकता है। महीने के अंतिम सप्ताह में घर की महिलाएँ वैज्ञानिकों की तरह प्रयोग करती हैं कि बची हुई दाल से कितने दिन और लोकतंत्र चलाया जा सकता है।

 

सरकारें कहती हैं डिजिटल इंडिया बन रहा है। बिल्कुल बन रहा है। अब भूख भी डिजिटल हो गई है। राशन चाहिए तो आधार लिंक कराइए। अंगूठा लगाइए। ओटीपी डालिए। सर्वर डाउन हो तो भूखे रहिए। गरीब आदमी अब रोटी से पहले नेटवर्क खोजता है। सरकारी पोर्टल कहता है भोजन की गारंटी। गांव वाला कहता है साहब, यहां तो नेटवर्क ही नहीं आता। ऐसा लगता है मानो अब पेट भी ऐप डाउनलोड करके ही भरेगा।

 

शिक्षा और भूख का रिश्ता भी बड़ा विचित्र है। गांव के स्कूलों में बच्चे ज्ञान लेने कम, मध्यान्ह भोजन लेने अधिक आते हैं। शिक्षक उपस्थिति दर्ज करते समय जानते हैं कि बच्चे गणित से पहले खिचड़ी गिनना सीख रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा का सपना उन घरों में भेजा गया जहां मोबाइल से ज्यादा जरूरी आटा था। जिन बच्चों के घर में बिजली नहीं, उनसे कहा गया- डिजिटल बनो। यानी इस देश में गरीब से कहा जा रहा है कि वह भूखे पेट आधुनिक हो जाए।

 

राजनीति भूख की सबसे पुरानी व्यापारी रही है। हर चुनाव में गरीब की थाली कैमरे के सामने परोसी जाती है। नेता रोटी खाते हुए फोटो खिंचवाते हैं, फिर पांच साल तक गरीब लाइन में खड़ा होकर वही रोटी मांगता रहता है। पिछली सरकार कहती है हमने राशन दिया। वर्तमान सरकार कहती है हमने मुफ्त अनाज बढ़ाया। अगली सरकार शायद कहे हमने गरीब को खाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी करोड़ों लोग मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों हैं।

 

सबसे भयावह दृश्य सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। किसी भूखे बच्चे की वीडियो वायरल होती है। लोग दुखी इमोजी भेजते हैं, मानवता पर लंबी पोस्ट लिखते हैं, फिर अगले ही क्षण किसी सेलिब्रिटी की शादी या क्रिकेट मैच में व्यस्त हो जाते हैं। भूख अब ट्रेंडिंग कंटेंट है। गरीब की पीड़ा अब एल्गोरिद्म के भरोसे चलती है।

 

और इस पूरी व्यवस्था का सबसे क्रूर पक्ष यह है कि अब रोटी भी इज्जत मांगती है। भूखा होना अपराध नहीं माना जाता, लेकिन रोटी मांगना अपमान बना दिया गया है। लोग दान तो करते हैं, पर इस अंदाज़ में कि सामने वाले को उसकी गरीबी का पूरा अहसास हो जाए। अब रोटी पेट नहीं भरती, आत्मसम्मान भी तोड़ती है।

 

सवाल यह नहीं कि देश में अनाज की कमी है। गोदाम भरे पड़े हैं। सवाल यह है कि व्यवस्था की संवेदना खाली क्यों है। एक तरफ शादी-ब्याह में टनों खाना कूड़ेदान में फेंका जाता है, दूसरी तरफ कोई मां अपने बच्चे को पानी पिलाकर सुला देती है ताकि उसे भूख कम लगे। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, सभ्यता की असफलता है।

 

आज दो जून की रोटी कोई साधारण आवश्यकता नहीं रही। यह एक युद्ध है महंगाई और मजदूरी के बीच, भूख और व्यवस्था के बीच, इंसान और उपभोक्ता के बीच। आदमी अब रोटी नहीं खा रहा, वह अपनी जिंदगी किस्तों में चुका रहा है।

 

और शायद इस समय का सबसे बड़ा व्यंग्य यही है कि जिस लोकतंत्र में रोटी सबसे बड़ा मुद्दा हो, वहां भूखा आदमी आंकड़ा कहलाता है और भरी थाली वाला राष्ट्रवाद समझाता है।

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ईरान युद्ध से अमेरिका का सुपर पॉवर तमगा डगमगाया

Iran US War: अहंकार की लड़ाई जब दो व्यक्तियों में हो तो दो परिवार प्रभावित या बरबाद होते हैं, लेकिन जब ये दो देशों के बीच हो तो समूचा विश्व प्रभावित होता है और टकराने वाले दोनों ही देश बरबाद हो सकते हैं। रूस-यूक्रैन में टकराव तो 2014 से ही प्रारंभ हो गया था, किंतु पूर्णकालिक युद्ध 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ, जिसमें सीधे दोनों ने मैदान पकड़ लिया है, जिसमें अभी तक कोई कमजोर पड़ता नहीं दिखाई देता। इसी तरह से अमेरिका-वियतनाम के बीच 1955 में शुरू हुआ युद्ध 1975 में समाप्त हो सका था, वह भी अमेरिका सेना के पीछे हट जाने से। पीछे तो उसे अफगानिस्तान से भी हटना पड़ा, लेकिन फटे में टांग अड़ाने का अब भी कोई मौका वह नहीं छोड़ता। ऐसा ही है ईरान के साथ अमेरिका व इजराइल का हालिया पंगा, जो गले की हड्‌डी बन अटका है।

 

इस समय पूरी दुनिया में एक ही चर्चा है कि मध्य पूर्व एशिया में हाल-फिलहाल शांति हो पायेगी या अमेरिका-इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चलता रहेगा? इस लाख टके के सवाल का अभी तो एक भी सही जवाब देने का माद्दा किसी में नहीं है। इन युद्धरत देशों में भी। फिर भी अभी तक के हालात के परिप्रेक्ष्य में यह तो कहा ही जा सकता है कि ईरान ने ऐंठ दिखाकर और अमेरिका ने युद्ध छेड़कर अक्लमंदी तो नहीं की। इजराइल तो आजीवन युद्धरत रहा है तो उसकी तो दिनचर्या ही ऐसी हो चुकी है। फिर भी, वह भी तीसमारखां तो नहीं बन पाया। इतिहास इस कालखंड का जब निर्मम, बेबाक और वास्तविक तथ्यों पर आधारित विश्लेषण करेगा, तब समूची दुनिया के लिए वे ऐसे सबक होंगे, जो आगामी काल के लिए निर्णायक और विषम परिस्थितियों में सटीक फैसले लेने में सहायक होंगे।

 

कोई माने या न माने, यह अटल सत्य है कि सुपर पॉवर का तमगा लिए दुनिया के सामने इतराने वाले अमेरिका की बुरी गत हुई है। यह न तो उसके लिए न शेष विश्व के लिए अच्छा संकेत है। जिस आतंकवाद से समूची दुनिया थर्राती आई है, उसे नकेल डालने में जो भूमिका अमेरिका निभा सकता था, यह उस पर संशय खड़े करता है। हालांकि यह भी उतना ही बड़ा सच है कि विश्व में आतंकवाद को पल्लवित करने में अमेरिका का प्रमुख हाथ रहा है। भले ही वह अपनी हथियार लॉबी की ब्लैकमेलिंग या ताकत के आगे झुककर फैसले लेते रहा हो। इक्कीसवीं सदी में अब जो आगे होगा, वह अमेरिका के एकाधिकार के खात्मे का इतिहास बनेगा। इसके लिए निर्विवाद रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ही दोषी करार दिए जाएंगे। 

 

बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में अभी तक इतना भ्रमित, विचलित, विवादास्पद, सनकी और तानाशाही के मिश्रित चरित्र वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर ठप्पा लगेगा कि उन्होंने अमेरिका के सुपर पॉवर की छवि वाली बंद मुट्‌ठी को अंगुलियां मरोड़कर खोल दिया। यह कोई मामूली बात नहीं है कि उनके अपने देश में 60 लाख लोग उनकी युद्ध नीति के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। वे भले ही कार्यकाल पूरा करें, लेकिन इतना तय जान लीजिए कि वे जितने समय व्हाइट हाउस में काबिज रहेंगे, उतना अधिक अमेरिका गर्त की ओर लुढ़केगा।

 

अब, जबकि कुछ दिन शांति के मिले हैं, तब दुनिया यह विश्लेषित करने में जुटी है कि आखिरकार इस युद्ध के भड़कने के कारण क्या थे? हम यह तो नहीं कह सकते कि ईरान निर्दोष है या ट्रम्प एकतरफा गलत हैं, लेकिन विभीषिका के इस स्वरूप की जरूरत तो बिल्कुल नहीं थी। जिन मुद्दों पर सीधे मिसाइलें दाग दी गईं, वे हलवे की तरह चट कर जाने वाले नहीं हैं। ईरान के पास परमाणु हथियारों के होने का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है और न उसने किसी ऐसी वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली घटना को अंजाम दिया था, जो उसके खिलाफ जंग का एलान करवा दे। जो गलती अमेरिका ने अतीत में इराक के पास रासायनिक हथियार होने का कारण बताकर वहां अमेरिकी फौजें उतार कर की थी, वही उन्होंने ईरान के साथ करना चाहा। यह पासा इसलिए उलटा पड़ा कि ईरान के पास अस्त्र-शस्त्र का ऐसा विरल भंडार भरा था, जिसकी कल्पना अमेरिका समेत दुनिया में शायद ही किसी को रही होगी। यह तो अब पता चला कि उसने ऑइल मनी को चीन, रूस से हथियारों का जखीरा जमा करने के लिए उपयोग किया था। चूंकि दोनों ही देश अमेरिका के खिलाफ हैं तो स्वाभाविक रूप से ईरान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना फायदेमंद ही रहना था। हो सकता है, होर्मुज के सामरिक व आर्थिक महत्व से भी वे परिचित रहे हों।

 

अमेरिका-ईरान के बीच पहली शांति वार्ता असफल होने के बाद दूसरी, तीसरी, चौथी होती रही, जो बेनतीजा ही कही जाएगी। ईरान-अमेरिका दोनों ही अब भी मोल-तौल करने की स्थिति में है। युद्ध विराम करने के बदले भी ईरान ने 10 सूत्री मांग पत्र थमाया था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं है। इसमें चार मांगें बेहद खास हैं, जिन पर ईरान अड़ा है और अमेरिका कतई तैयार नहीं है। ईरान खाड़ी देशों (सउदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन व जॉर्डन) से 25 लाख करोड़ रुपए का मुआवजा चाहता है, जिस पर अभी तो कोई सहमत नहीं।

 

दूसरा, वह होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर टोल चाहता है तो दूसरी तरफ अमेरिका होर्मुज पर खुद कब्जा चाहता है। अमेरिका ने सैन्य नाकाबंदी भी की, लेकिन चीन समेत अन्य जहाज वहां से सुरिक्षत निकल चुके हैं। तीसरा, ईरान परमाणु कार्यक्रम 5 साल तक रोकेगा, जबकि अमेरिका 20 साल तक इसे रोकना चाहता है। चौथा, युद्ध विराम में लेबनान भी शामिल रहेगा, जिस पर इजराइल को आपत्ति है। अब देखना दिलचस्प है कि बाजुओं का जोर दिखाने में किसकी रुचि है और कौन हाथ मिलाने को तैयार है।

 

इस युद्ध ने दुनिया के सामने एक और पहलू पर ध्यान दिलाया है। अब लड़ाई के लिए तोप-मिसाइलें, जल-थल-नभ सेना की मजबूती ज्यादा मायने नहीं रखती। यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) का है, जिससे ड्रोन संचालित होते हैं। ये युद्ध की समूची दिशा बदलने में सक्षम है, जो ईरान ने कर दिखाया। यूक्रेन भी इसी बूते रूस को पानी पिला रहा है। अमेरिका-इजराइल की सबसे बड़ी चूक यही हुई कि वे मिसाइल हमले रोकने की व्यूह रचना करते रहे और ईरान ने छोटा बम, बड़ा धमाका की तर्ज पर ड्रोन हमले कर बड़े लक्ष्य भेद डाले। खाड़ी देशों में ईरानी ड्रोन ने जो कहर बरपाया है, उस नुकसान से उबरने में इन्हें 3 से 5 साल तक लगेंगे और अरबों डॉलर का खर्च होगा, वह अलग। ड्रोन हमलों की मार यूक्रैन दिखा चुका है, जिसने महाशक्ति रूस को नाको चने चबवा रखे हैं।

 

इस युद्ध से एक और तस्वीर साफ हुई कि अब अमेरिका अकेला सब कुछ नहीं कर सकता। जिस तरह से नाटो देशों ने उसका साथ देने से स्पष्ट इनकार किया, वह दुनिया के सामने बड़ी चेतावनी है। इसका संदेश साफ है कि प्रत्येक देश अब अपने हित-अहित पहले देखेगा, फिर पंचायत में उलझेगा। ट्रम्प की खीज ने यह बताया है कि वे मुगालते में थे कि मित्र देश ईरान पर टूट पड़ेंगे। यदि वाकई ऐसा होता तो रूस-यूक्रेन (5 वर्ष हो चुके हैं) की तरह यह भी अनिश्चित काल चलता रहता और रूस व चीन को भी हस्तक्षेप का मौका मिल जाता, जो पूरी दुनिया की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था को तहस-नहस करने की ओर ले जाता। इसकी विभीषिका तीसरे विश्व युद्ध के समान होती, जिसमें क्या-क्या गुल खिलते, कोई नहीं कह पाता।

 

सबसे प्रमुख बात-इसमें भारत की क्या स्थिति रही? उसने निष्पक्ष रहकर स्वयं को सुरक्षित रखा। जिसका नतीजा यह हुआ कि चलते युद्ध में गैस व तेल से भरे टैंकर आते रहे, वह ईरान से ही सात साल के लिए तेल खरीदने का समझौता कर सका और चीन के साथ उसके मालवाहक जहाज निकलते रहे। यह लड़ाई हमारी किसी भी तरह से नहीं थी, बावजूद इसके कि ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने पाकिस्तान को ड्रोन व हथियार दिए थे। इसके उलट हमारा तंत्र ईरान के समानांतर लोगों से बात करता रहा, जिसे ईरान ने सकारात्मक माना। भविष्य में इसके वास्तविक संदेश नजर आएंगे और काफी हद तक वे भारत के पक्ष में रहेंगे।

 

एक जो सबसे चिंताजनक बात उभरी है, वह यह कि ट्रम्प इसे गली-मोहल्ले के दादा-पहलवानों की तरह लड़ रहे हैं और पल-पल में उनकी बदलती रीति-नीति ने उलझनों को बढ़ाया ही है। वे कभी अपने हित साधने वाले व्यापारी हो जाते हैं तो कभी तानाशाह। कभी दुनिया को कदमों तले मानकर पेश आते हैं तो कभी जादूगर की तरह डमरू बजाकर मसले हल करने का दावा करते हैं। उनके विरोधाभासी चरित्र को यूं तो दुनिया ने टैरिफ लागू करते हुए बखूबी देख ही लिया है, लेकिन युद्ध जैसे संवेदनशील व दूरगामी मसलों में उनका रवैया बचकाना रहा, जो विश्व के लिये बड़े खतरे का आगाज है। उन्हें रोका नहीं गया तो इस दुनिया को ज्वालामुखी के लावे की तरह बहते देखना भी नसीब हो जाएगा।

चीन-तुर्की की मदद से विनाशक तैयारियों में जुटा पाकिस्तान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली उसकी चाल, मिले ये सबूत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपनी सैन्य ताकत और मॉडर्न वारफेयर का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पाकिस्तान का हाल बेहाल कर दिया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई अहम एयर बेस, एयर डिफेंस सिस्टम और रणनीतिक संसाधनों को निशाना बनाकर पाक सेना ऐसा हाल किया था कि पूरी दुनिया के सामने उसकी पोल खुल गई थी। भारत के मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। अब वह अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए चीन और तुर्की जैसे देशों की मदद से सेना के मॉर्डनाइजेशन पर काम कर रहा है। स्टील्थ लड़ाकू विमान, लंबी दूरी की मिसाइलें, आधुनिक ड्रोन, लेज़र हथियार और नए एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल करने की तैयारी की जा रही है।

सेना को तेजी से मजबूत कर रहा है पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी सेना को तेजी से मजबूत करने में जुट गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और आधुनिक हथियारों पर बड़ा निवेश कर रहा है। इसके लिए उसे चीन और तुर्की का सबसे ज्यादा सहयोग मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान तुर्की से 1,000 से अधिक आधुनिक ड्रोन (यूएवी) खरीदने की तैयारी कर रहा है। साथ ही ड्रोन और टारगेट पर हमला करने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

चीन से मिलेगा स्टील्थ फाइटर प्लेन 

पाकिस्तानी सेना अपनी 5 आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना) को मिसाइल रेजिमेंट में बदलने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा देश का एयर डिफेंस नेटवर्क भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान को 2026 के आखिर तक चीन से 40 जे-35 स्टील्थ फाइटर प्लेन मिलने की उम्मीद है। वहीं, चीनी तकनीक की मदद से हाई-एनर्जी लेज़र हथियार भी विकसित किए जा रहे हैं।

अटैक हेलीकॉप्टर को कर रहा अपग्रेड

इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के 29 कोबरा अटैक हेलीकॉप्टरों को अपग्रेड किया जाएगा और 30 से ज्यादा जेड-10 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल करने की भी योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पाकिस्तान को 200 से अधिक एसएच-15 तोपें भी उपलब्ध करा चुका है। कुल मिलाकर पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रहा है।

आकाश शर्मा की रिपोर्ट

पाकिस्तान बोला- हमारा पानी रोका तो हाथ काट देंगे:सिंधु जल संधि अब भी लागू, भारत इसे एकतरफा खत्म नहीं कर सकता

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर एक बार फिर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो हम उन हाथों को काट देंगे। उन्होंने दावा किया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकना चाहता है। मुसादिक मलिक ने सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में एक नल है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। जो हमारे हिस्से के पानी पर दावा करेंगे, उनके हाथ काट दिए जाएंगे। वहीं अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके मुताबिक, भारत इसे न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न रद्द कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है। सिंधु जल संधि पर सेमिनार करेगा पाकिस्तान पाकिस्तानी मंत्रियों ने बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें कानूनी एक्सपर्ट, जल एक्सपर्ट्स और विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी। डॉन के मुताबिक, तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी साफ कर चुके हैं कि पानी हमारी जीवनरेखा है और यह हमारी रेड लाइन भी है। 21 जून को PAK रक्षा मंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 21 जून को सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाकिस्तान के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। सिंधु जल समझौता स्थगित करने का पाकिस्तान पर असर पाकिस्तान में खेती की 90% जमीन यानी 4.7 करोड़ एकड़ एरिया में सिंचाई के लिए पानी सिंधु नदी प्रणाली से मिलता है। पाकिस्तान की नेशनल इनकम में एग्रीकल्चर सेक्टर की हिस्सेदारी 23% है और इससे 68% ग्रामीण पाकिस्तानियों की जीविका चलती है। ऐसे में पाकिस्तान में आम लोगों के साथ-साथ वहां की बेहाल अर्थव्यवस्था और बदतर होने लगी है। पाकिस्तान के मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम को पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे पाकिस्तान के बिजली उत्पादन में 30% से 50% तक की कमी आ सकती है। साथ ही औद्योगिक उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ेगा। —————– ये भी पढ़ें… सिंधु नदी का पानी न मिलने से पाकिस्तान परेशान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रच रहे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका, तो पाकिस्तान की परेशानियां बढ़ गई हैं। पाकिस्तान ने यह मसला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी लेकिन वहां भी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भारत को जंग छेड़ने की धमकी दे रहे हैं। वहीं, आर्मी चीफ आसिम मुनीर जंग की साजिश रचने में जुटे हैं। नियंत्रण रेखा यानी LoC पर पाकिस्तानी सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाकिस्तान ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प बोले- आज कतर में अमेरिका-ईरान की बातचीत होगी:अपने खास दूत विटकॉफ को भेजा; तेहरान ने बातचीत से इनकार किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत होगी। ट्रम्प का कहना है कि ईरान ने खुद इस बैठक का अनुरोध किया था। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ दोहा के लिए रवाना हो चुके हैं। हालांकि, यह साफ नहीं किया गया कि ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर उनके साथ यात्रा कर रहे हैं या नहीं। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई राजनीतिक वार्ता तय नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया कि ईरान केवल एक एक्सपर्ट प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजेगा, जो MoU को आगे बढ़ाने और कतर में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे तकनीकी मुद्दों पर काम करेगा। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को कुल 29 मालवाहक जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि रविवार को यह संख्या घटकर सिर्फ 12 रह गई। 2. होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान की मीटिंग: ईरान और ओमान ने सोमवार को मस्कट में जॉइंट होर्मुज कमेटी की पहली बैठक की। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को चलाने को लेकर चर्चा हुई। 3. खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होगा इंडियन डेलिगेशन: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल जनरल सैयद हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल हो सकते हैं। 4. ईरान बोला- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर जल्द मिलेंगे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि कतर में फंसी ईरान की 12 अरब डॉलर की राशि में से 6 अरब डॉलर जल्द जारी कर दिए जाएंगे। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Guru Hargobind Jayanti 2026: गुरु हरगोविंद सिंह जयंती: जानें उनके बताए सिद्धांत, जो आज भी हैं प्रासंगिक

The image features Sri Guru Hargobind Singh- the sixth Guru of Sikhism- alongside Sri Akal Takht Sahib and the Golden Temple (Harmandir Sahib) of Amritsar

Sixth Sikh Guru Guru Hargobind: छठे सिख गुरु, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती या प्रकाश पर्व सिख इतिहास का एक ऐसा गौरवशाली पन्ना है, जिसने सिख कौम को एक नई दिशा दी। गुरु हरगोविंद सिंह जी ही थे जिन्होंने सिखों को संत के साथ-साथ 'सिपाही'/ संत-सिपाही बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने सिखाया कि धर्म केवल माला जपने में नहीं, बल्कि अत्याचार के खिलाफ तलवार उठाने में भी है।ALSO READ: Guru Amar Das Jayanti: गुरु अमरदास जयंती कैसे मनाएं, जानें जीवन परिचय, महत्व और योगदान

 

आज के इस आधुनिक और उथल-पुथल भरे दौर में भी गुरु हरगोविंद सिंह जी के जीवन मूल्य और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत बेहद प्रासंगिक हैं। 

 

आइए जानते हैं उनके ऐसे ही 5 बड़े सिद्धांत जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं:

 

1. 'मीरी' और 'पीरी' का सिद्धांत: अध्यात्म और शक्ति का संतुलन

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिख इतिहास में सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव करते हुए 'मीरी और पीरी' नामक दो तलवारें धारण कीं।

 

मीरी: सांसारिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति का प्रतीक है, जो समाज की रक्षा करती है।

 

पीरी: आध्यात्मिक शक्ति और गुरुता का प्रतीक है, जो आत्मा को शुद्ध करती है।

 

आज के दौर में प्रासंगिकता: यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन बेहद जरूरी है। इंसान को अंदर से शांत, दयालु और आध्यात्मिक होना चाहिए, लेकिन समय आने पर अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होकर डटने की क्षमता भी उसमें होनी चाहिए। केवल कोरी बातें नहीं, बल्कि एक्शन भी जरूरी है।

 

2. अकाल तख्त की स्थापना (स्वतंत्र विचार और न्याय)

गुरु जी ने अमृतसर में हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने 'श्री अकाल तख्त साहिब' (काल से रहित ईश्वर का सिंहासन) की नींव रखी। जहां हरिमंदिर साहिब अध्यात्म का केंद्र था, वहीं अकाल तख्त दुनिया के राजनीतिक और सामाजिक फैसलों का मंच बना।

 

* अकाल तख्त का संदेश था कि सच और न्याय किसी भी दुनियावी राजा या सरकार के अधीन नहीं होते। आज के समाज में यह सिद्धांत हमें स्वतंत्र सोच रखने, सच का साथ देने और किसी भी प्रकार की तानाशाही या गलत व्यवस्था के आगे न झुकने की प्रेरणा देता है।

 

3. 'संत-सिपाही' का निर्माण/ कमजोरों की रक्षा

अपने पिता और पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी की शहादत के बाद गुरु हरगोविंद सिंह जी ने महसूस किया कि केवल शांति से क्रूर शासकों का हृदय परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सिखों को शास्त्र विद्या, घुड़सवारी और आत्मरक्षा के गुर सिखाए।

 

* गुरु जी ने सेना का गठन किसी पर हमला करने या साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं, बल्कि कमजोरों, मजलूमों और धर्म की रक्षा के लिए किया था। आज के समाज में महिलाओं, बच्चों और समाज के पिछड़े वर्गों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा/ सेल्फ डिेफेंस और शारीरिक रूप से सक्षम होना कितना जरूरी है, यह गुरु जी सदियों पहले बता गए थे।

 

4. 'बंदी छोड़' दाता: मानवाधिकार और सबको साथ लेकर चलना

जब मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया था, तो बाद में गुरु जी की महानता को देखकर उसने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन गुरु जी ने अकेले जाने से मना कर दिया और शर्त रखी कि उनके साथ कैद सभी 52 हिंदू राजाओं को भी आजाद किया जाए। गुरु जी ने 52 कलियों वाला एक विशेष चोगा सिलवाया, जिसकी एक-एक कली पकड़कर सभी राजा जेल से बाहर आए। इसी याद में उन्हें 'बंदी छोड़ दाता' कहा जाता है।

 

आज के दौर में यह घटना सिखाती है कि सच्ची सफलता या आजादी वह है जिसमें हम स्वार्थी न बनें, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपने साथ लेकर आगे बढ़ें। यह सिद्धांत आज के वैश्विक मानवाधिकारों और सर्वधर्म समभाव का सबसे बड़ा उदाहरण है।

 

5. स्वाभिमान और निडरता से जीना

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिखों को आदेश दिया कि वे अब उनके पास धन-दौलत के बजाय अच्छे घोड़े और उत्तम हथियार भेंट स्वरूप लाएं। उन्होंने सिखों के अंदर से गुलामी की मानसिकता और डर को पूरी तरह निकाल फेंका और उन्हें राजाओं की तरह 'शाही ठाट' और स्वाभिमान से जीना सिखाया।

 

* आज के समय में जब लोग डिप्रेशन, मानसिक तनाव और हीनभावना का शिकार हो रहे हैं, गुरु जी का यह सिद्धांत याद दिलाता है कि ईश्वर ने हर इंसान को स्वतंत्र और संप्रभु बनाया है। अपनी पहचान पर गर्व करें, निडर रहें और किसी के सामने घुटने न टेकें।

 

संक्षेप में, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती पर उनका संदेश और जीवन हमें यही सिखाता है कि एक हाथ में माला/ अध्यात्म और दूसरे हाथ में समाज की रक्षा के लिए सामर्थ्य/ शक्ति होना जरूरी है। सच्चे अर्थों में धर्म वही है जो कायरता नहीं, बल्कि वीरता और करुणा दोनों एक साथ सिखाए। उन्होंने दुनिया को आध्यात्मिक शक्ति और सांसारिक उत्तरदायित्व के संतुलन का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

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टेक्सास डेटा सेंटर, 47 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट:चीन से होड़ में ट्रंप; सुरक्षा की अनदेखी से साइट पर 8,000 वर्कर्स को खतरा

दुनिया की एआई रेस अब सिर्फ टेक कंपनियों और सुपरपावर देशों की लड़ाई नहीं रही। इसकी कीमत निर्माण साइटों पर काम कर रहे वर्कर्स भी चुका रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास स्थित एबिलीन में बन रहा स्टारगेट डेटा सेंटर 500 अरब डॉलर (47.18 लाख करोड़ रुपए) का मेगा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसे ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे दिग्गज मिलकर बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसे अमेरिका की एआई ताकत का बड़ा दांव बता चुके हैं। मकसद है चीन को एआई रेस में पीछे छोड़ना। लेकिन टाइम की ग्राउंड पड़ताल इस चमकदार प्रोजेक्ट की दूसरी तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से निर्माण की इस अंधी दौड़ में मजदूरों की जान और सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रोजेक्ट साइट पर 8,000 मजदूरों के साथ कई हादसे सामने आए हैं। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था के मुताबिक 2025 में कई मजदूरों की टांगों में फ्रैक्चर हुआ। एक मजदूर एक्सकेवेटर के नीचे दबा। एक सीढ़ी से गिरा। एक पर 1,400 पाउंड वजन वाले कांच के पैनल गिर गए। एक मजदूर पोर्टा-पॉटी में मृत मिला। दिसंबर 2024 से साइट से 911 पर 14 इमरजेंसी कॉल दर्ज हुईं। इनमें चोट, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी शामिल थीं। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं दो ठेकेदार कंपनियों पर अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। ग्राउंड जीरो से खुलासा… वर्कर्स को पानी और पंखे तक के लिए ‘लग्जरी’ बता तरसाया गया वर्कर्स ने साइट के अंदर के हालात को काफी कठिन बताया। एक इलेक्ट्रिशियन ने आरोप लगाया कि टेक्सास की तेज गर्मी में भी साइट पर पीने का पानी आसानी से उपलब्ध नहीं है। वर्कर्स से कहा गया कि ठंडा पानी ‘लग्जरी’ है, अधिकार नहीं। पंखे भी वापस ले लिए गए। एक वर्कर्स के मुताबिक कूलिंग स्टेशन में ज्यादा समय बिताने पर लिखित चेतावनी दी गई। एक कर्मी ने कहा कि कई को पैनिक अटैक भी आ चुको हैं। निर्माण की स्पीड बनाए रखने में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। 3 मामलों से समझें… रफ्तार में नियम कैसे छूटे केस 1 – ट्रक ड्राइवर डेनियल गोंजालेज बिजली उपकरणों वाला कंक्रीट बॉक्स उतार रहे थे। शोर में कम्युनिकेशन कमजोर था, वॉकी-टॉकी नहीं थे। तभी ऊपर से फेंकी गई चेन उनके सिर पर लगी। वे बेहोश हो गए। उन्होंने मुकदमा दायर किया है। केस 2 – 23 मई 2025 को एक मजदूर मिनी एक्सकेवेटर को रास्ता दिखा रहा था। जरूरी सुरक्षा न होने से वह ट्रैक के नीचे दब गया। उसके टखने और रीड की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था ने पाया कि मजदूर को ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। केस 3 – एक कर्मचारी कांच के पैनल खोल रहा था। तभी 650 किलो वजन के तीन पैनल उसके पैर पर गिर पड़े। जांघ की हड्डी टूट गई और कई सर्जरी करानी पड़ी। जांच में माना गया कि उस कर्मी को काम जल्दी खत्म करने का दबाव था। गोपनीयता समझौते ताकि वर्कर शिकायत नहीं करें कई मजदूरों ने पहचान छिपाकर बात की, क्योंकि उनसे गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए थे। आरोप है कि ऐसे समझौते साइट की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोक रहे हैं। उन्हें डर रहता है कि खुलकर बोलने पर नौकरी जा सकती है या आगे काम मिलने में दिक्कत होगी। स्टारगेट – अमेरिकी एआई रेस में सबसे बड़ा हथियार स्टारगेट अमेरिका का मेगा एआई इंफ्रा प्रोजेक्ट है। यह सामान्य डेटा सेंटर नहीं, बल्कि एआई मॉडल चलाने और ट्रेन करने के लिए जरूरी विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे नाम जुड़े हैं। इसका लक्ष्य चीन से आगे रहने की क्षमता विकसित करना है। रेस जीतनी है, प्रोजेक्ट जल्दी बनाना होगा – ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प स्टारगेट को एआई रणनीति का बड़ा हिस्सा बता चुके हैं। ओपनएआई के सैम, ओरेकल के लैरी व सॉफ्टबैंक के सन के साथ इसकी घोषणा हुई थी। ट्रम्प ने कहा था कि रेस जीतनी है, इसे जल्दी बनाना होगा।

पाकिस्तान का दावा- अफगानिस्तान में तीन ठिकानों पर हमले किए:TTP कमांडर समेत 29 आतंकी मारे; एक दिन पहले कराची में आतंकी हमला हुआ था

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तीन ठिकानों पर अटैक करने का दावा किया है। पाकिस्तान के मुताबिक, पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में जमीनी ऑपरेशन किया गया। इसके बाद सीमा पार अफगानिस्तान के भीतर तीन आतंकियों के ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों में 29 आतंकियों को मार गिराया हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने X पर लिखा- यह ऑपरेशन देश में हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया। इसमें जमात-उल-अहरार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाया गया। TTP का कमांडर खान फरोश भी मारा गया। इससे एक दिन पहले पाकिस्तान के कराची में सिंध रेंजर्स के हेडकॉर्टर पर हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने हमला किया था। इसमें चार रेंजर्स जवान मारे गए थे। वहीं, छह हमलावर मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी। बाजौर में 4, अफगानिस्तान में 25 आतंकी मारे अताउल्लाह तरार ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने पर बाजौर जिले में ऑपरेशन शुरू किया गया। इसमें खान फरोश समेत चार आतंकी मारे गए। खैबर पख्तूनख्वा का बाजौर, अफगानिस्तान से लगा जिला है। इसके बाद अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में तीन अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए गए। वहां 25 आतंकी मारे गए। इन ठिकानों पर रखा हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट कर दिया गया। पाकिस्तान बोला- नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे तरार ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान पिछले साल से अफगान सीमा और उसके भीतर कई बार हमले कर चुका है। उसका कहना है ये हमले TTP और दूसरे आतंकी संगठनों के ठिकाने किए गए हैं। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP के आतंकियों को पनाह देती है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के पिछले दो बड़े हमले…. 10 जून: पाकिस्तानी मिसाइल हमले में 13 की मौत, इनमें 11 बच्चे थे पाकिस्तान ने 10 जून को अफगानिस्तान के कई इलाकों में मिसाइल हमले किए थे। अफगान तालिबान सरकार के मुताबिक इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 बच्चे थे। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया। कुनार, खोस्त तथा पक्तिका प्रांतों में आम लोगों के घरों पर बमबारी की। वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमला किया। पूरी खबर पढ़ें… 16 मार्च: पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक में 400 की मौत, 250 घायल
पाकिस्तान ने 16 मार्च की रात को अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक किया था। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी था। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 250 से ज्यादा घायल हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए। पूरी खबर पढ़ें… ——————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर आतंकी हमला:4 सुरक्षाकर्मियों और 6 आतंकियों की मौत; तालिबान से जुड़े जमात-उल-अहरार ने जिम्मेदारी ली पाकिस्तान के कराची में शनिवार रात आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमला रात करीब 8.30 बजे गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में हुआ। इसमें चार रेंजर्स की मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में छह आतंकी मारे गए, जबकि एक आतंकी को घायल हालत में गिरफ्तार कर लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान का दावा- अफगानिस्तान में तीन ठिकानों पर हमले किए:TTP कमांडर समेत 29 आतंकी मारे; एक दिन पहले कराची में आतंकी हमला हुआ था

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तीन ठिकानों पर अटैक करने का दावा किया है। पाकिस्तान के मुताबिक, पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में जमीनी ऑपरेशन किया गया। इसके बाद सीमा पार अफगानिस्तान के भीतर तीन आतंकियों के ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों में 29 आतंकियों को मार गिराया हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने X पर लिखा- यह ऑपरेशन देश में हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया। इसमें जमात-उल-अहरार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाया गया। TTP का कमांडर खान फरोश भी मारा गया। इससे एक दिन पहले पाकिस्तान के कराची में सिंध रेंजर्स के हेडकॉर्टर पर हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने हमला किया था। इसमें चार रेंजर्स जवान मारे गए थे। वहीं, छह हमलावर मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी। बाजौर में 4, अफगानिस्तान में 25 आतंकी मारे अताउल्लाह तरार ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने पर बाजौर जिले में ऑपरेशन शुरू किया गया। इसमें खान फरोश समेत चार आतंकी मारे गए। खैबर पख्तूनख्वा का बाजौर, अफगानिस्तान से लगा जिला है। इसके बाद अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में तीन अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए गए। वहां 25 आतंकी मारे गए। इन ठिकानों पर रखा हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट कर दिया गया। पाकिस्तान बोला- नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे तरार ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान पिछले साल से अफगान सीमा और उसके भीतर कई बार हमले कर चुका है। उसका कहना है ये हमले TTP और दूसरे आतंकी संगठनों के ठिकाने किए गए हैं। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP के आतंकियों को पनाह देती है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के पिछले दो बड़े हमले…. 10 जून: पाकिस्तानी मिसाइल हमले में 13 की मौत, इनमें 11 बच्चे थे पाकिस्तान ने 10 जून को अफगानिस्तान के कई इलाकों में मिसाइल हमले किए थे। अफगान तालिबान सरकार के मुताबिक इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 बच्चे थे। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया। कुनार, खोस्त तथा पक्तिका प्रांतों में आम लोगों के घरों पर बमबारी की। वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमला किया। पूरी खबर पढ़ें… 16 मार्च: पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक में 400 की मौत, 250 घायल
पाकिस्तान ने 16 मार्च की रात को अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक किया था। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी था। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 250 से ज्यादा घायल हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए। पूरी खबर पढ़ें… ——————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर आतंकी हमला:4 सुरक्षाकर्मियों और 6 आतंकियों की मौत; तालिबान से जुड़े जमात-उल-अहरार ने जिम्मेदारी ली पाकिस्तान के कराची में शनिवार रात आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमला रात करीब 8.30 बजे गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में हुआ। इसमें चार रेंजर्स की मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में छह आतंकी मारे गए, जबकि एक आतंकी को घायल हालत में गिरफ्तार कर लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका ने ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हमला किया:ट्रम्प बोले- ईरान ने सीजफायर तोड़ा; एक दिन पहले कार्गो शिप पर ड्रोन अटैक हुआ था

अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर करीब एक घंटे तक हमला किया। अमेरिकी सेना ने मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने सीजफायर तोड़ा, इसलिए जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप एमवी एवर लवली पर ड्रोन हमला किया था। एयरस्ट्राइक से पहले ट्रम्प ने कहा, ‘उन्होंने कल एक नहीं, चार बार हमला किया।’ जब उनसे पूछा गया कि बातचीत जारी रहने के बावजूद हमला क्यों किया गया, तो उन्होंने कहा- ईरान थोड़ा अलग है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान के नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को उसके नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि यह सीजफायर का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीजफायर मैनेजमेंट है। हिजबुल्लाह बोला- इजराइल बिना शर्त लेबनान छोड़े हिजबुल्लाह ने इजराइल से लेबनान से पूरी सेना वापस बुलाने की मांग की है। हिजबुल्लाह चीफ कासिम नईम ने कहा कि इजराइली सैनिकों को लेबनान की जमीन का एक-एक इंच खाली करना होगा। कासिम ने शुक्रवार को टीवी पर प्रसारित अपने संबोधन में यह बात कही। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की मध्यस्थता में लेबनान और इजराइल के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत एक और दिन के लिए बढ़ा दी गई है, ताकि किसी समझौते पर पहुंचा जा सके। हालांकि युद्धविराम लागू होने के बाद लेबनान पर इजराइल के हमले पहले के मुकाबले कम हुए हैं, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। इजराइल ने नबतियेह अल-फौका कस्बे पर हवाई हमला किया। इससे पहले मायफदून कस्बे पर हुए हमले में दो लोगों की मौत की खबर सामने आई। इसके अलावा इजराइली सेना ने दक्षिणी शहर मंसूरी में पर्चे गिराकर लोगों से इलाका खाली करने को कहा। यह जानकारी लेबनान के सरकारी मीडिया ने दी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. NATO देशों पर ईरान का निशाना- ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के हमले में साथ देने वाले NATO सदस्य देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन देशों को बताना चाहिए कि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। 2. होर्मुज में जहाज पर हमला, समुद्री सुरक्षा पर फिर संकट- ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियार से हमला हुआ। जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने 11 हजार नाविकों को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया। 3. लेबनान में फिर बढ़ा तनाव- इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी इलाके में लोगों को घर खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान की पूरी जमीन से बिना शर्त हटना होगा और संगठन किसी भी हाल में इजराइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा। 4. ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा में बढ़ी बातचीत- अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता पूरी हुई। दोनों देशों ने चार संयुक्त कमेटियां बनाने और 60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। रूस ने भी कहा कि अंतिम समझौता होने पर वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका समर्थन करेगा। 5. परमाणु कार्यक्रम और तेल बाजार दोनों पर नजर- IAEA ने कहा कि उसकी टीम जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करेगी। दूसरी ओर, होर्मुज में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जबकि भारत ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटाकर आपूर्ति सामान्य करने का फैसला लिया।