Stock Market Trend : मार्केट ट्रेंड अभी भी निगेटिव, कमजोर बाजार में कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

Stock Market Trend :आज के शुरुआती कारोबार में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सपाट नजर आ रहे हैं। फिलहाल सेंसेक्स 172 अंक यानी 0.24 प्रतिशत बढ़कर 72,700 के आसपास और निफ्टी 7.70 अंक या 0.03 प्रतिशत बढ़कर 22,723 के आसपास कारोबार कर रहा है। निफ्टी पर TCS, इंटरग्लोब एविएशन, HCL टेक्नोलॉजीज, जियो फाइनेंशियल और HUL प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल हैं। जबकि डॉ. रेड्डीज लैब्स, HDFC बैंक, हिंडाल्को, JSW स्टील और SBI लाइफ इंश्योरेंस गिरावट वाले शेयरों में हैं। सेक्टरों की बात करें तो IT, मीडिया, ऑयल एंड गैस और PSU बैंक में प्रत्येक में 1% की बढ़त देखी गई है। जबकि रियल्टी इंडेक्स में 0.3% की गिरावट आई है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1-1% की बढ़त है।

आज के लिए रणनीति पर बात करते हुए manasjaiswal.com के मानस जायसवाल ने कहा कि मार्केट का ट्रेंड तो अभी भी नेगेटिव है कहीं पर भी कोई रिवर्सल के साइन नहीं है। ये जरूर है कि कल लोअर लेवल पर निफ्टी में एक छोटी सी रिकवरी देखने को मिली है जिसकी वजह से निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों में एक हैमर पैटर्न जैसा बना है। लेकिन फिर भी अभी भी आपकी अप्रोच सतर्क रहने की होनी चाहिए।

निफ्टी पर रणनीति

मानस जायसवाल ने कहा कि केवल आज की बात करें तो अगर निफ्टी 22900 के ऊपर ट्रेड करना शुरू करेगा तभी खरीदारी करने की सलाह होगी। अगर निफ्टी ₹22,900 के ऊपर ट्रेड करना शुरू करेगा तो शायद ₹23,200 तक के रिकवरी के चांस हो सकते हैं। ऐसे में खरीदारी करें तो 22900 के ऊपर करें और 22750 के स्टॉप लॉस रखे। लेकिन अगर ऐसा होता नहीं है और वापस से निफ्टी 22,650 के नीचे ट्रेड करना शुरू करे तो फिर से एक शॉर्ट कॉल लेना है। जहां आपके स्टॉप लॉस 22,800 के ऊपर रहेंगे और टारगेट 22,350 के आसपास के रहेंगे। अभी तक का ट्रेंड नेगेटिव है। इसलिए आपकी अप्रोच सतर्क बने रहने की होनी चाहिए।

बैंक निफ्टी पर मानस जायसवाल की राय

बैंक निफ्टी में भी ध्यान रखिए। यहां पर भी आज खरीदारी तभी करें जब यह 55,000 के ऊपर सस्टेन करे। अगर उसके ऊपर सस्टेन नहीं करेगा तो शायद वापस बिकवाली देखने को मिल सकती है। अभी तक का ट्रेंड नेगेटिव है और अगर बैंक निफ्टी वापस 54,000 के नीचे फिसलेगा तो आप उम्मीद कर सकते हैं कि 53,250 तक के लेवल्स देखने को मिल सकते हैं।

मानस जायसवाल की स्टॉक रिकमेंडेशन

आज के लिए इनकी दो रिकमेंडेशन है। दोनों शॉर्ट साइड पे है। इनमें से पहला है हीरो मोटो (Hero Motocopp)। इस स्टॉक ने आखिरी के आधे 1 घंटे में अपने 200 डे मूविंग एवरेज को ब्रेक कर दिया। ऐसे में यहां पर एक सेल ट्रेड है। इसमें 5326 रुपए के स्टॉप लॉस से सेल ट्रेड लेंगे। इसमें 5100 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

दूसरा स्टॉक वोल्टॉस (VOLTAS) का है। यहां पर भी सेल रेमेंडेशन है। कल इसमें एक छोटा सा पुलबैक देखने को मिला। लेकिन यह स्टॉक 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर सस्टेन नहीं हो पाया। वापस वहां पर सेलिंग प्रेशर देखने को मिल रहा है। ऐसे में इसमें भी एक सेल रेमेंडेशन है। 116 के स्टॉप लॉस से बिकवाली करेंगे। 1070 तक के टारगेट्स पॉसिबल हैं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IndiGo Share Price: खास वजहों से इंडिगो पर गोल्डमैन बुलिश, इस भाव तक चढ़ेगा शेयर

IndiGo Share Price: इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों आज बिकवाली की आंधी में खुद को संभाल लिया और ग्रीन जोन में पहुंच गए। इसके शेयरों को गोल्डमैन सैक्स के रुझान से सपोर्ट मिला है, जिसके एनालिस्ट्स ने खरीदारी की रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹5900 फिक्स किया है। इसने इंडिगो के शेयरों में जोश भरा और यह ऊपर भागा। फिलहाल बीएसई पर यह 0.34% की बढ़त के साथ ₹4881.85 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.63% उछलकर ₹4,895.90 तक चढ़ गया था।

IndiGo पर Goldman ने क्यों लगाया दांव

इंडिगो के ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर गोल्डमैन काफी पॉजिटिव है। इसकी वजह इंडिगो की मार्केट में लगातार बढ़ते दबदबे, इंडस्ट्री की कैपेसिटी से जुड़ी अच्छी स्थिति, कॉस्ट लीडरशिप और एयरलाइन कंपनी के इंटरनेशनल बिजनेस की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पोटेंशियल है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इंडिगो का मार्केट शेयर वित्त वर्ष 2020 में लगभग 50% से बढ़कर अगस्त 2026 में लगभग 65% हो गया है और उम्मीद जताई है कि यह बढ़त बनी रहेगी, क्योंकि दूसरे नंबर की एयरलाइन कंपनी को लिक्विडिटी की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गोल्डमैन सैक्स को यह भी उम्मीद है कि मीडियम टर्म में इंडस्ट्री के फ्लीट यानी जहाजों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे यील्ड यानी कमाई को सपोर्ट मिल सकता है। इसके अलावा इंडिगो की कॉस्ट लीडरशिप से मुनाफे में सुधार होने की उम्मीद है। गोल्डमैन को इंडिगो के इंटरनेशनल बिजनेस में भी ग्रोथ की काफी गुंजाइश दिख रही है, जिसमें विस्तार की काफी लंबी संभावनाएं हैं। गोल्डमैन के मुताबिक महंगा तेल नियर टर्म में चिंता का विषय बना हुआ है लेकिन वित्त वर्ष 2028 में मुनाफे में काफी सुधार की उम्मीद है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

इंडिगो के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 27 नवंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹5,958.75 पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 4 महीने में यह 34.64% टूटकर 23 मार्च 2026 को ₹3,894.80 पर पहुंच गया था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। अब आगे की बात करें तो इसे कवर करने वाले 26 में 21 एनालिस्ट्स ने खरीदारी की रेटिंग दी है तो 3 ने होल्ड और 2 ने सेल रेटिंग।

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Congo Plane Crash: कांगो में बड़ा विमान हादसा, सेना के 2 सीनियर अधिकारी समेत 14 लोगों की मौत

Congo Plane Crash: कांगो में शुक्रवार को हुए एक विमान हादसे में सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों समेत कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में सेना के इन दो वरिष्ठ अधिकारियों में मिलिट्री कोर्ट के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुटोम्बो कातालायी टिएंडे और सशस्त्र बलों के ऑडिटर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल बाकुमी लिकुलिया शामिल थे।

घटना की जानकारी देते हुए कांगो की सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल एफोमी एकेन्गे ने एक बयान में कहा, “इन दो जनरल अधिकारियों के अलावा, प्रतिनिधिमंडल के बारह सदस्यों और क्रू मेंबर्स की भी इस हादसे में मौत हो गई।”

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि विमान दक्षिण-पश्चिमी शहर किक्विट से राजधानी किंशासा लौट रहा था। इसी दौरान विमान में तकनीकी खराबी आ गई और वह केंगे में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई।

वहीं, एकेन्गे ने कहा कि दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

सिविल एविएशन अथॉरिटी के बोर्ड के चेयरमैन ट्राइफॉन किन-की मुलुम्बा ने बताया कि फिलहाल विमान हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि कांगो की सेना पिछले साल से पूर्वी इलाके में कई विद्रोही गुटों से लड़ रही है। इन गुटों में रवांडा का समर्थन पाने वाला M23 विद्रोही गुट भी शामिल है, जिसने कई बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया था।

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एयर इंडिया के पायलट को स्विट्जरलैंड में उतारा गया

नई दिल्ली। एयर इंडिया का एक और पायलट नशे में पाया गया है। नशे में होने की वजह से उसे स्विट्जरलैंड में ही जहाज से उतार लिया गया। एय़र इंडिया की यह उड़ान ज्यूरिख से नई दिल्ली की थी। उड़ान से पहले होने वाले अनिवाकर्य अल्कोहल टेस्ट में उसके नशे में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद एयर इंडिया ने पायलट को स्विट्जरलैंड में उतार दिया और उसे निलंबित कर दिया। जांच पूरी होने तक पायलट का निलंबन जारी रहेगा।

बताया गया है कि यह मामला छह सितंबर का है। खबरों के मुताबिक विमान के टेकऑफ से पहले ग्राउंड स्टाफ को पायलट से शराब की गंध आई थी। उन्होंने अधिकारियों को उसकी सूचना दी, जिसके बाद पायलट को विमान से उतार दिया गया। उसे उसी फ्लाइट से भारत भेजा गया था। स्विस फेडरल ऑफिस ऑफ सिविल एविएशन ने इस मामले की पुष्टि की है। उसके मुताबिक, पायलट पर स्विस नियमों के तहत कार्रवाई की गई और इसकी जानकारी भारत के विमानन निदेशालय को दी गई।

एयर इंडिया में पायलटों से जुड़े नियमों के उल्लंघन का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले चार अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही उड़ान के कमांडर पायलट का ड्रग टेस्ट दो बार पॉजिटिव आया था। गौरतलब है कि फुकेट से दिल्ली की फ्लाइट अचानक तीन सौ फीट नीचे आ गई थी। विमान में 145 लोग सवार थे। इनमें 20 से ज्यादा यात्री और चालक दल के चार सदस्य घायल हुए थे। बाद में जांच में पायलट के नशीले पदार्थ का सेवन करने की पुष्टि हुई थी।

अदाणी और GMR के लिए खुल सकता है एयरलाइन कारोबार का रास्ता, सरकार नियम बदलने पर कर रही विचार

भारत सरकार दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटरों के लिए एयरलाइन कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ये ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार इस पाबंदी को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है।

इस कदम का मकसद देश के एविएशन मार्केट में IndiGo और Air India के दबदबे को कम करना है। दोनों एयरलाइंस मिलकर देश के करीब 90% घरेलू यात्रियों को संभालती हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है।

दिल्ली और मुंबई में अलग है नियम

बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट के लिए अपनी एयरलाइन शुरू करने पर ऐसी रोक नहीं है। लेकिन दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेशन और मैनेजमेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त है, जो इनके ऑपरेटरों को किसी एयरलाइन पर नियंत्रण रखने से रोकती है।

नायडू ने कहा कि इस नियम में बदलाव पर विचार चल रहा है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। Bloomberg News ने सबसे पहले जुलाई में इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी।

Adani और GMR के लिए खुल सकता है रास्ता

अगर यह पाबंदी हटती है तो Adani Group और GMR Airports के लिए एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता खुल सकता है। Adani Group मुंबई समेत आठ एयरपोर्ट ऑपरेट करता है। वहीं, GMR Airports दिल्ली समेत पांच एयरपोर्ट का संचालन करता है।

यानी नियम बदलने के बाद ये कंपनियां किसी एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती हैं या एयरलाइन कारोबार में उतरने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

सरकार चाहती है कम से कम पांच बड़ी एयरलाइंस

एविएशन मिनिस्टर ने कहा कि भारत को कम से कम पांच एयरलाइंस की जरूरत है। इनमें से हर एयरलाइन के पास कम से कम 100 विमान होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार नई एयरलाइन शुरू करने के लिए आवेदन करने वाले किसी भी खिलाड़ी के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है।

कैसे बढ़ा IndiGo और Air India का दबदबा?

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एविएशन मार्केट में कई बड़े बदलाव हुए हैं। Jet Airways और Go Airlines बंद हो गईं। दूसरी तरफ Vistara और AirAsia India का Tata Group की एयरलाइंस में विलय हो गया।

इसके बाद बाजार में IndiGo और Air India की पकड़ काफी मजबूत हो गई। Akasa Air अभी नई एयरलाइन है। SpiceJet भी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके अलावा कुछ छोटी क्षेत्रीय एयरलाइंस हैं, लेकिन उनकी बाजार हिस्सेदारी काफी कम है।

ऐसे में सरकार ज्यादा बड़ी एयरलाइंस खड़ी करना चाहती है। अगर दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से जुड़ा नियम बदलता है तो Adani Group और GMR जैसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर भी इस बाजार में बड़े खिलाड़ी के तौर पर उतर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका ने सभी ईरानी एयरलाइंस बंद कराने की धमकी दी:कहा- जो कंपनियां इनकी मदद करेंगी, उन्हें डॉलर सिस्टम से बाहर करेंगे

अमेरिका ने ईरान की सभी एयरलाइंस को बंद कराने की धमकी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 23 सितंबर से ईरानी विमानों को ईंधन, लैंडिंग की सुविधा या टिकट देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी कंपनियों को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। यानी अमेरिका सिर्फ ईरानी एयरलाइंस पर दबाव नहीं डाल रहा, बल्कि उन विदेशी कंपनियों को भी निशाना बना रहा है जो इन एयरलाइंस को चलाने में मदद करती हैं। डॉलर सिस्टम से बाहर करने का क्या मतलब? अमेरिका जिस डॉलर सिस्टम की बात कर रहा है, उसका मतलब अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था से है। किसी कंपनी पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद उसके लिए अमेरिकी बैंकों के जरिए डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। यानी अगर कोई विदेशी कंपनी ईरानी एयरलाइन को ईंधन या दूसरी सुविधाएं देती है, तो उसे अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक अपनी पहुंच खोने का खतरा रहेगा। विदेश जाने वाली उड़ानों पर पड़ सकता है असर अमेरिकी कार्रवाई का असर ईरान की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है। एविएशन डेटा कंपनी सिरियम के मुताबिक, सितंबर में ईरान से हर हफ्ते करीब 70 हजार इंटरनेशनल सीटें उपलब्ध हैं। अगस्त में यह संख्या करीब 55,700 सीटें प्रति हफ्ते थी। अगस्त में महान एयर और सेफेहरान एयरलाइंस ईरान से इंटरनेशनल सीटों की क्षमता के मामले में सबसे बड़े स्थानीय ऑपरेटरों में थीं। महान एयर के पास हर हफ्ते करीब 15,600 और सेफेहरान एयरलाइंस के पास करीब 10,500 सीटें थीं। 8 सितंबर को 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाया था अमेरिका पहले भी ईरान की एयरलाइंस के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 8 सितंबर को 27 ईरानी एयरलाइंस समेत कुल 36 कंपनियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपनी एयरलाइंस और उनसे जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल हथियार, लोगों और दूसरे प्रतिबंधित सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए करता है। UN महासभा में पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका की यह नई चेतावनी ऐसे समय आई है, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अराघची UN की बैठकों में ईरान का पक्ष रखेंगे और दूसरे देशों के अधिकारियों व विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। —————- ये खबर भी पढ़ें… UN में आज ट्रम्प का भाषण, जनरल डिबेट शुरू होगी: 2025 में टेलीप्रॉम्प्टर खराब होने पर भड़के थे संयुक्त राष्ट्र यानी UN की जनरल डिबेट आज से शुरू हो रही है। यह 28 सितंबर तक चलेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Trading Ideas : NSE IPO के पूरा होने के बाद सेंकेंडरी मार्केट पर फिर बढ़ेगा फोकस, आज इन दो शेयरों में बन सकता है अच्छा पैसा

Trading Ideas : भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया है। लेकिन निफ्टी 23450 पर अब भी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। सुबह 09:30 बजे के आसपास सेंसेक्स 90.69 अंक या 0.12 प्रतिशत बढ़कर 74,949.68 पर और निफ्टी 36.65 अंक या 0.16 प्रतिशत बढ़कर 23,450.95 पर था। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में कोल इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स और अपोलो हॉस्पिटल्स शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, HCL टेक, सिप्ला, TCS और मैक्स हेल्थकेयर शामिल हैं। सेक्टरों की बात करें तो IT को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे है। रियल्टी इंडेक्स में 1% की बढ़त दिख रही है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका के 10-साल के बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी आने से यूएस इक्विटी मार्केट में रिस्क-ऑन सेंटीमेंट (जोखिम लेने का उत्साह) बढ़ा है। इस सकारात्मक बदलाव का असर दूसरे इक्विटी मार्केट पर भी दिखेगा। भारत में, NSE IPO के पूरा होने और रिफंड मिलने शुरू होने के साथ सेकेंडरी मार्केट पर फिर से फोकस होगा,जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।

अब सही कीमत वाले लार्ज-कैप शेयरों की ओर फोकस बढ़ाने का समय आ गया है। HDFC बैंक के शेयर में मजबूती के साथ इसके शुरुआती संकेत भी मिल रहे हैं। लेकिन इसे एक ट्रेंड बनने में समय लगेगा। बेहतर ग्रोथ की संभावना और मोमेंटम SMID (स्मॉल और मिड-कैप) शेयरों के पक्ष में हैं।

कीमती धातुओं की कीमतें स्थिर होने और फिक्स्ड इनकम से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होने के कारण,निवेशक अब मल्टी-एसेट स्ट्रैटेजी चुन सकते हैं। यह अभी एक अच्छा विकल्प होगा क्योंकि इससे ग्रोथ की संभावनाओं और उतार-चढ़ाव से सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहेगा,जिससे ठीक-ठाक लेकिन स्थिर रिटर्न मिलेगा।

चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर की राय है कि ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। अमेरिकी शेयरों में अच्छी बढ़त देखी गई है और एशियाई बाजार भी ज़्यादातर पॉज़िटिव हैं। साथ ही,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर कुछ दबाव कम हुआ है। यह बाजार के लिए अच्छा संकेत है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 23478-23517 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23569-23607-23649 पर है। इसके लिए पहला बेस 23300-23361 पर और बड़ा बेस 23210-23256 पर है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 56621-56770 पर और बड़ा रजिस्टेंस 56927-57044-57291 पर है। इसके लिए पहला बेस 56044-56209 पर और बड़ा बेस 55600-55810 पर है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Mantri FinMart के अरुण कुमार मंत्री। इनकी आज LAURASLAB में 2013 रुपए के आसपास, 1992 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 2055 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। INDIGO में भी इनकी 4940 रुपए के आसपास, 4898 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 5021 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Market Insight : EMS और पावर इक्विपमेंट शेयरों पर रखें नजर, निफ्टी में ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस के साथ रहें लॉन्ग

 

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ईरान के आसमान में फिर UFO दिखने का दावा:1976 में भी दिखा था; पीछा करने वाले फाइटर जेट के सिस्टम फेल हो गए थे

ईरान की राजधानी तेहरान के आसमान में चमकती अलग-अलग रंगों की लाइट वाला एक ऑब्जेक्ट दिखाई देने का दावा किया गया है। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो सामने आए हैं। लोग दावा कर रहे हैं की यह UFO हो सकता है। 50 साल पहले 19 सितंबर 1976 में भी तेहरान के आसमान में ऐसा ही एक चमकीला ऑब्जेक्ट दिखने की घटना सामने आई थी। इस ऑब्जेक्ट की जांच के लिए ईरान ने F-4 फाइटर जेट भेजे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, एक फाइटर जेट जब ऑब्जेक्ट के करीब पहुंचा तो उसके कुछ सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था। पायलट पीछे हटा तो सिस्टम फिर सामान्य हो गया। आधिकारिक रिकॉर्ड में यह साबित नहीं हुआ कि वह चीज आखिर थी क्या। बाद में यह घटना UFO पर रिसर्च करने वाले लोगों के बीच काफी चर्चित हो गई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर सामने आया यह वीडियो रविवार 20 सितंबर का बताया जा रहा है। एक पोस्ट में दावा किया गया कि इसे तेहरान के आजादेगान एक्सप्रेसवे के पास देखा गया। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ऑब्जेक्ट वास्तव में किस जगह था, कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा था, उसकी रफ्तार कितनी थी और उसका आकार कितना बड़ा था। ईरानी अधिकारियों ने भी इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। उन्होंने यह भी नहीं बताया है कि यह ऑब्जेक्ट क्या था या इससे कोई खतरा था। ड्रोन से लेकर पतंग तक के दावे वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग तरह के अनुमान लगा रहे हैं। कुछ लोगों ने अमेरिका के साथ चल रही जंग के कारण कहा कि यह कोई सैन्य ड्रोन हो सकता है। कुछ ने एक साथ उड़ रहे कई ड्रोन होने की बात कही। वहीं, कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि दूर से देखने पर ये लाइट किसी पतंग की भी हो सकती हैं। साइबर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी इनमें से किसी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी रिकॉर्ड में भी 1976 की घटना का जिक्र 1976 की घटना अमेरिकी सरकार के रिकॉर्ड में भी मौजूद हैं। अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के आर्काइव में इस घटना से जुड़ी जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ की रिपोर्ट, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की रिपोर्ट और अमेरिकी डिफेंस की रिपोर्ट शामिल हैं। इन दस्तावेजों से इतना जरूर पता चलता है कि 1976 में तेहरान में ऑब्जेक्ट देखे जाने की घटना की आधिकारिक रिपोर्ट बनी थी और इसकी जांच की गई थी। हालांकि, ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि वह ऑब्जेक्ट और इस हफ्ते तेहरान में रिकॉर्ड किए गए वीडियो का आपस में कोई संबंध है। ईरान की US को धमकी- नए ठिकानों पर हमला करेंगे ये वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को अमेरिका को चेतावनी दी। IRGC ने कहा कि अगर अमेरिका के साथ तनाव और बढ़ता है तो ईरान नए हथियार और नई सैन्य रणनीति इस्तेमाल करेगा। साथ ही उन जगहों को भी निशाना बनाया जाएगा, जहां पहले हमला नहीं किया गया है। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरान लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार है। अगर लड़ाई और बढ़ती है तो ईरान अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई के तरीके में बड़े बदलाव करेगा। अमेरिका की ईरानी एयरलाइंस पर कार्रवाई की धमकी अमेरिका ईरानी एयरलाइंस के लिए विदेशों में उड़ान भरना मुश्किल बनाने की कोशिश कर रहा है। US ने ईरानी एयरलाइंस की 23 सितंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रोकने की धमकी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि बुधवार से ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में बंद करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अमेरिका ने एयरपोर्ट, फ्यूल सप्लायर और दूसरी एविएशन कंपनियों को भी चेतावनी दी कि अगर ये कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को ईंधन, लैंडिंग सुविधा या टिकट बिक्री जैसी सेवाएं देती हैं तो उन पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

दशहरा-दिवाली पर फ्लाइट टिकट ने बिगाड़ा बजट! दिल्ली-बेंगलुरु रूट का किराया देख यात्रियों के उड़े होश

दशहरा और दिवाली का मौसम आते ही देशभर में घर लौटने की हलचल बढ़ जाती है। दूर शहरों में रहने वाले लोग महीनों पहले से टिकट बुक करने लगते हैं, ताकि त्योहार पर परिवार के साथ कुछ सुकून भरे पल बिता सकें। लेकिन इस बार हवाई सफर का बढ़ता किराया कई यात्रियों की चिंता बढ़ा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग घरेलू उड़ानों की कीमतों को लेकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि कुछ लोकप्रिय रूट्स पर टिकट पिछले वर्षों की तुलना में काफी महंगे नजर आ रहे हैं।

दिल्ली-बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूट का उदाहरण देते हुए एक यूजर ने दावा किया कि दो साल पहले दिवाली के दौरान जहां राउंड ट्रिप करीब 13 हजार रुपये में हो जाती थी, वहीं अब यही सफर 20 हजार रुपये से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में त्योहार पर घर जाने की खुशी के साथ यात्रियों को बढ़ते यात्रा खर्च का भी हिसाब लगाना पड़ रहा है।

दिल्ली-बेंगलुरु का किराया बना चर्चा का कारण

मामला तब चर्चा में आया, जब Arnav नाम के एक यूजर ने दिल्ली-बेंगलुरु फ्लाइट के किराये को लेकर पोस्ट शेयर की। उन्होंने दावा किया कि करीब दो साल पहले दिवाली के दौरान इस रूट का राउंड ट्रिप लगभग 13 हजार रुपये में मिल जाता था, जबकि अब यही सफर आसानी से 20 हजार रुपये से ऊपर पहुंच रहा है।

उनकी पोस्ट के बाद कई यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ लोगों ने बताया कि त्योहार के समय टिकट बुक करना उनके लिए सामान्य दिनों की तुलना में काफी महंगा साबित हो रहा है।

सोशल मीडिया पर यात्रियों की अलग-अलग राय

महंगे किरायों को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ शिकायतें ही नहीं, बल्कि इसकी वजह पर भी चर्चा हो रही है। कुछ यूजर्स का कहना है कि घरेलू उड़ानों के किराये लंबे समय से ऊंचे बने हुए हैं। एक यूजर ने तो यहां तक कहा कि कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा घरेलू उड़ान से सस्ती पड़ती दिखाई देती है। हालांकि, किसी भी फ्लाइट का किराया कई चीजों पर निर्भर करता है। यात्रा की तारीख, बुकिंग का समय, सीटों की उपलब्धता और रूट के हिसाब से कीमतों में काफी अंतर हो सकता है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं टिकट के दाम?

सोशल मीडिया यूजर्स ने बढ़ते किरायों के पीछे कई संभावित कारण गिनाए हैं। इनमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमत, एयरलाइनों का ऑपरेशनल खर्च, सीमित प्रतिस्पर्धा, डॉलर-रुपये की विनिमय दर और त्योहारों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग शामिल हैं। कुछ यात्रियों ने यह सवाल भी उठाया कि अगर ईंधन की कीमतों में बदलाव होता है, तो उसका असर टिकट की कीमतों पर कितना और किस तरह पड़ता है।

सबसे ज्यादा असर किस पर?

महंगे हवाई टिकटों का असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो नौकरी या पढ़ाई के लिए अपने परिवार से दूर दूसरे शहरों में रहते हैं। त्योहार पर घर जाना उनके लिए सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि अपनों के साथ समय बिताने का मौका होता है। ऐसे में टिकट का खर्च बढ़ने पर कई परिवारों को फ्लाइट और ट्रेन या बस जैसे दूसरे विकल्पों के बीच फैसला करना पड़ सकता है।

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