यमुना के बाढ़ क्षेत्र को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के सभी आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग मुक्त, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के सभी आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग मुक्त, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्त्वपूर्ण एवं निर्णायक निर्णय के साथ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिष्ठित 2016 वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को लेकर लगभग एक दशक से चले आ रहे मीडिया ट्रायल और निराधार आरोपों का पटाक्षेप हो गया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए उससे संबंधित सभी परिणामी अंतरिम कार्रवाइयों को भी समाप्त कर दिया है।

निर्णय का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल से यमुना के बाढ़ क्षेत्र को किसी प्रकार की पर्यावरणीय क्षति नहीं हुई थी।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा जमा की गई 5 करोड़ की राशि उसे पूर्णतः वापस की जानी चाहिए। इस राशि को अनुचित रूप से ‘जुर्माना’ के रूप में प्रचारित किया गया था, जिसका उद्देश्य संस्था की प्रतिष्ठा को धूमिल करना था।

2016 का वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल एक ऐतिहासिक वैश्विक आयोजन था, जिसमें 155 से अधिक देशों की सहभागिता रही और लगभग 35 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से इसमें सम्मिलित हुए। इस विराट आयोजन की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सी. लाहोटी ने की थी। संयुक्त राष्ट्र के छठे महासचिव दिवंगत डॉ. बुतरस बुतरस-घाली भी इस आयोजन के सह-अध्यक्ष बनने वाले थे, किंतु दुर्भाग्यवश आयोजन से एक माह पूर्व ही उनका निधन हो गया।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात आर्ट ऑफ लिविंग के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा: “निहित स्वार्थों से प्रेरित कुछ लोगों द्वारा उस संस्था पर निराधार आरोप लगाने का यह दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद प्रयास अब पूरी तरह उजागर हो गया है, जो स्वयं लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करती आ रही है।”

Rahul Gandhi: ‘आप किसी की नहीं, खुद की हैं’, महिलाओं की पहचान और आजादी पर बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत और संपत्ति हैं। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं को केवल पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें पारंपरिक पारिवारिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

गांधी ने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” होती हैं और उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत आकांक्षाओं, अनुभवों और महत्वाकांक्षाओं को देश की एक बड़ी ताकत बताया।

गांधी ने कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हूं। भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की 70 करोड़ महिलाओं की अनूठी यात्राएं, अनूठी कल्पनाएं और अनूठे सपने हैं जिन्हें वे जी रही हैं।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ अपने रिश्तों से मिली पहचान से परे अपनी पहचान बनाने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बेटी, पत्नी या मां होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

गांधी ने कहा, “जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, तो पाता हूं कि महिलाओं को अक्सर सिर्फ तीन श्रेणियों में रखा जाता है: बेटी, पत्नी या मां।”

उन्होंने आगे कहा, “इनमें से किसी भी पहचान में कोई बुराई नहीं है। लेकिन ये आपकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं।”

रिश्तों से आगे महिलाओं की अपनी पहचान जरूरी: राहुल गांधी

गांधी ने कहा कि महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी होती हैं, लेकिन अक्सर उनकी पहचान को पुरुषों के साथ उनके रिश्तों तक ही सीमित कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि परिवार से जुड़ी ये तीन आम पहचानें ही महिलाओं को किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते के जरिए परिभाषित करती हैं। यानी एक महिला को उसकी अपनी पहचान रखने वाले एक व्यक्ति के बजाय बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखा जाता है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की राहुल गांधी की बातें

कांग्रेस ने भी ‘CONTROL’ (नियंत्रण) थीम के तहत X पर गांधी की ये बातें साझा कीं और महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि समाज उन पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है।

राहुल गांधी ने कहा, “किसी को नियंत्रित करने के चार तरीके होते हैं- 1. हिंसा, 2. अपमान, 3. समय और 4. कंट्रोल।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने की इस कोशिश को अक्सर उनकी सुरक्षा और भलाई की चिंता के नाम पर सही ठहराया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, “इस दबाव को चिंता का नाम दे दिया जाता है। कहा जाता है- ‘हमें आपकी बहुत चिंता है, इसलिए हमें आपको नियंत्रित करने की जरूरत है।’”

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में महिलाओं की आवाजाही, फैसले लेने की आजादी, आर्थिक स्थिति और अवसरों तक पहुंच से जुड़े कुछ आंकड़े भी शेयर किए।

पोस्ट के मुताबिक, 60% महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं, जबकि 45% महिलाएं शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि सिर्फ 8% महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक है।

राहुल गांधी ने गिनाए महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप

गांधी ने हिंसा के उन तीन रूपों के बारे में भी बात की जो महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं – शारीरिक हिंसा, “मौके से जुड़ी हिंसा” (opportunity violence) और “आर्थिक हिंसा”।

शारीरिक हिंसा के तहत, कांग्रेस ने हर साल 4.5 लाख बेटियों के भ्रूण हत्या का शिकार होने, 80% महिलाओं के उत्पीड़न, 29% महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा और 6% महिलाओं के साथ बलात्कार का जिक्र किया।

“मौके से जुड़ी हिंसा” के बारे में पोस्ट में कहा गया है कि सुरक्षा के नाम पर 50% महिलाओं को शिक्षा या नौकरी से वंचित कर दिया जाता है।

“आर्थिक हिंसा” के तहत, कांग्रेस ने महिलाओं के लिए सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल 17,500 रुपये के अतिरिक्त खर्च का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र किया

इसके बाद गांधी ने महिलाओं की आजादी पर अपनी बात रखते हुए मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मनुस्मृति में लिखा है कि महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

अपनी मूल बातों में, गांधी ने मनुस्मृति के एक अंश का भी हवाला दिया: “बचपन में, महिला अपने पिता के अधीन होती है। जवानी में, वह अपने पति के अधीन होती है। पति की मृत्यु के बाद, वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

गांधी ने कहा, “यह मनुस्मृति का सीधा उद्धरण है, और ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ये शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे।”

इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सोच रखते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए, अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए और अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा, “मेरा मानना है कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत यही है कि हमारी महिलाएं स्वतंत्र हों, अपने लिए खड़ी हों और खुद पर भरोसा रखें।”

राहुल गांधी ने साफ किया कि महिलाओं की आजादी का मतलब यह नहीं है कि उनके परिवार से रिश्ते नहीं हो सकते। उनका कहना था कि ये रिश्ते किसी महिला की पहचान तय नहीं करने चाहिए और न ही इसका मतलब यह होना चाहिए कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति है।

उन्होंने कहा, “आपके पिता, भाई, पति या बेटे के साथ रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन आप उनकी नहीं हैं। आप खुद की हैं।”

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं अपने पिता, भाई, पति और बेटों के साथ रिश्ते निभाते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रख सकती हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद ले सकती हैं।

महिलाओं को अपने फैसलों की आजादी

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिला सशक्तिकरण को सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व या पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महिलाओं की आने-जाने की आजादी, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अधिकार, सुरक्षा और अपनी पसंद से फैसले लेने की स्वतंत्रता को भी उतना ही जरूरी बताया।

उनकी बातों में सामाजिक नियंत्रण और सुरक्षा की भाषा के बीच संबंध भी दिखाया गया। कांग्रेस की पोस्ट में कहा गया कि महिलाओं को हिंसा, अनादर, समय की पाबंदी और नियंत्रण के जरिए सीमित किया जाता है, जबकि ऐसी पाबंदियों को उनकी सुरक्षा की चिंता के तौर पर पेश किया जा सकता है।

गांधी ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” बताया और साथ ही यह भी कहा कि महिलाएं भारत की ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी 70 करोड़ महिलाओं की “अनोखी यात्राएं”, “अनोखी कल्पनाएं” और “अनोखे सपने” देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। साथ ही, उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे पारिवारिक रिश्तों या सामाजिक अपेक्षाओं को अपनी पहचान का एकमात्र आधार न बनने दें।

पुणे में राहुल गांधी के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि महिलाएं बेटी, पत्नी और मां बने रहने के साथ-साथ प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी हो सकती हैं – और राहुल गांधी के शब्दों में, आखिरकार “खुद की अपनी” हो सकती हैं।

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श्रीलंका के कप्तान धनंजय टेस्ट टीम की इस कमी से हैं परेशान

श्रीलंका के कप्तान धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि टीम के पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार से गेंदबाज़ी करने वाले कम से कम “दो या तीन गेंदबाज़” होने चाहिए।धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास चुनने के लिए ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ हों, और वह मौजूदा तेज़ गेंदबाज़ों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

असिता फ़र्नांडो पिछले कुछ वर्षों में अपने बेहतर प्रदर्शन के कारण श्रीलंका के प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ बन गए हैं। हालांकि वह 130 किमी प्रति घंटे के आसपास की रफ़्तार से लगातार सटीक लाइन-लेंथ और तीव्रता के साथ गेंदबाज़ी करते हैं। श्रीलंका आम तौर पर दूसरे छोर से अधिक रफ़्तार वाले गेंदबाज़ के ज़रिए बल्लेबाज़ों को परेशान करने की कोशिश करता है।

असिता के साथ यह भूमिका फ़िलहाल लहिरू कुमारा निभाते हैं, जिनके नाम 36 टेस्ट में 36.38 की औसत से 106 विकेट हैं। भारत के ख़िलाफ़ गॉल टेस्ट में उन्होंने 175 रन देकर सिर्फ़ दो विकेट लिए थे। इसके अलावा चोटों ने भी उनके करियर का बड़ा हिस्सा प्रभावित किया है।

दूसरे टेस्ट से पहले डीसिल्वा ने कहा, “हमने लहिरू कुमारा को चोट-मुक्त रखने के लिए बहुत मेहनत की है। फ़िलहाल हमारे संसाधनों को देखते हुए असिता के साथ खेलने के लिए वही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। असिता की लाइन और लेंथ बेहतरीन है और लहिरू कुमारा के पास रफ़्तार है। अभी हमारे पास यही सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।”

हालांकि डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ों के विकल्प हों। श्रीलंका के पास दुश्मंता चमीरा, दिलशान मदुशंका और मथीशा पथिराना जैसे गेंदबाज़ भी हैं। मदुशंका तो गॉल टेस्ट के लिए श्रीलंका की टेस्ट टीम का हिस्सा भी थे, लेकिन बाद में उन्हें घरेलू टी 20 खेलने के लिए रिलीज़ कर दिया गया और एसएससी टेस्ट के लिए भी टीम में जगह नहीं मिली।

चमीरा ने अपने करियर में 12 टेस्ट खेले हैं, लेकिन उनका आख़िरी टेस्ट 2021 में आया था। चोटों के इतिहास और सीमित ओवरों की टीम में उनकी अहमियत को देखते हुए श्रीलंका ने उन्हें सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट के लिए सुरक्षित रखा है।

चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने अभी तक बहु-दिवसीय क्रिकेट के लिए तेज़ गेंदबाज़ों का दायरा बढ़ाने की कोई गंभीर योजना नहीं बनाई है। डीसिल्वा ने कहा, “मैं यह भी चाहता हूं कि हमारे पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार वाले दो या तीन गेंदबाज़ हों, लेकिन दुर्भाग्य से टेस्ट सेटअप में अभी हमारे पास सिर्फ़ एक ही ऐसा गेंदबाज़ है। फ़िलहाल मुझे इस बारे में कोई बड़ी योजना नहीं बताई गई है कि टेस्ट टीम में किन खिलाड़ियों को लाया जा सकता है। उम्मीद है कि भविष्य में हम ऐसे और क्रिकेटर तैयार करेंगे।”

डीसिल्वा की कप्तानी में आक्रमण में दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाना एक नियमित रणनीति रही है। पूर्व कोच क्रिस सिल्वरवुड और सनथ जयसूर्या भी तेज़ गेंदबाज़ी प्रतिभा को विकसित करने पर ज़ोर देते रहे हैं। 2010 के दशक के उत्तरार्ध में श्रीलंका घरेलू मैदानों पर स्पिन पर इतना निर्भर हो गया था कि वह अक्सर सिर्फ़ एक तेज़ गेंदबाज़ के साथ खेलता था।

डीसिल्वा ने कहा, “मेरी कप्तानी में खेले गए हर मैच में हमने दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाए हैं, जबकि पहले सिर्फ़ एक गेंदबाज़ होता था। मेरा मानना है कि श्रीलंका में भी तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका है। अगर आपके तेज़ गेंदबाज़ यहां विकेट ले सकते हैं तो वे दुनिया में कहीं भी विकेट ले सकते हैं। यह बात हमें जल्दी सीखनी होगी।”

पिछले 15 वर्षों में श्रीलंका में सिर्फ़ एक श्रीलंकाई तेज़ गेंदबाज़ ने पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। नुवान प्रदीप ने 2017 में भारत के ख़िलाफ़ 132 रन देकर छह विकेट लिए थे। इसी अवधि में 14 विदेशी तेज़ गेंदबाज़ों ने श्रीलंका में पांच विकेट लिए हैं। मिचेल स्टार्क और जुनैद ख़ान ने यह उपलब्धि तीन-तीन बार हासिल की है।

डीसिल्वा ने कहा, “उदाहरण के लिए गॉल में विदेशी तेज़ गेंदबाज़ पांच विकेट ले चुके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हमारे किसी सीमर ने गॉल या एसएससी में ऐसा नहीं किया है। हमारे तेज़ गेंदबाज़ों में उस तरह का आत्मविश्वास नहीं है। अगर वे अपने खेल में कुछ प्रतिशत भी सुधार कर लें तो हम एक टीम के रूप में कहीं बेहतर आगे बढ़ सकते हैं।”

एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, अधिकारियों ने बैठक कर बनाई रणनीति

एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, अधिकारियों ने बैठक कर बनाई रणनीति

NCR Air Pollution: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए है। अभी हाल ही में मुख्य सचिव ने पराली प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

बैठक में विशेष रूप से पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों और कृषि मशीनरी की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को पराली प्रबंधन में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए आवश्यक बेलर एवं अन्य कृषि मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खेत स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए और किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाए। इसके साथ ही पराली प्रबंधन के उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच की जाए तथा नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

बैठक में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिए गए कि संबंधित प्रत्येक विभाग द्वारा नोडल अधिकारी नामित किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण की रोकथाम से जुड़े कार्यों की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

 

मुख्य सचिव ने धान की पराली (पैडी स्ट्रॉ) के प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं। पराली प्रबंधन में उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए बेलर एवं अन्य आवश्यक कृषि मशीनों की व्यवस्था हेतु टेंडर प्रक्रिया समय से पूर्ण कराई जाए, ताकि फसल अवशेषों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सड़क विकास एवं रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि रोड रिडेवलपमेंट तथा रोड डस्ट की रोकथाम से संबंधित आवश्यक टेंडर समय से कराकर कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए। उन्होंने गड्ढों (पॉटहोल्स) की मरम्मत तथा क्षतिग्रस्त फुटपाथों के पुनर्स्थापन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए।

 

मुख्य सचिव ने कहा कि लोक निर्माण, नगर निकायों/स्थानीय निकायों, हाउसिंग एवं अर्बन से जुड़े विभागों की क्षतिग्रस्त सड़कों की सूचना संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य समयबद्ध रूप से कराया जा सके। वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक उपकरण स्थापित करने हेतु निर्देशित किया जाए। उन्होंने ईवी सिटी बसों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक ईवी चार्जिंग पॉइंट्स की संभावित लोकेशन तत्काल चिन्हित कर नेडा को उपलब्ध कराने को कहा, जिससे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाई जा सके।

 

बैठक में विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए प्रत्येक संबंधित विभाग द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि पवन पोर्टल पर संबंधित विभागों द्वारा सही, पूर्ण एवं अद्यतन डेटा अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों की वास्तविक प्रगति का प्रभावी आकलन किया जा सके। उन्होंने एंड टू एंड वाहनों को जब्त किए जाने की कार्रवाई में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अपेक्षित प्रगति न करने वाले जनपदों के जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए तथा कार्यों की नियमित समीक्षा के लिए मासिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। जनजागरूकता के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाएं।

 

UP Board Exams 2027: यूपी बोर्ड 29 अक्टूबर तक फाइनल करेगा परीक्षा केंद्रों की लिस्ट, ऑनलाइन प्रक्रिया से चुने जाएंगे केंद्र

UP Board Exams 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में हाईस्कूल (10वीं कक्षा) और इंटरमीडिएट (12वीं कक्षा) की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, बोर्ड ने पहले जारी शेड्यूल में भी बदलाव किया है। बोर्ड की वेबसाइट पर स्कूल अपने संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विवरण 24 अगस्त तक अपलोड कर सकेंगे। स्कूल की सुविधाओं का प्रत्यक्ष सत्यापन, आपत्ति मांगने और उनका निपटारा करने और परीक्षा केंद्रों को फाइनल करने की तारीखें भी बढ़ा दी गई हैं।

बोर्ड सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी किए गए बदले हुए कार्यक्रम के अनुसार, प्रिंसिपल द्वारा बोर्ड पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी को डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा बनाई गई तहसील स्तर की कमेटियां 3 सितंबर तक प्रत्यक्ष रूप से सत्यापित करेंगी। डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स (DIOS) के लिए बोर्ड की वेबसाइट पर वेरिफिकेशन रिपोर्ट अपलोड करने की आखिरी तारीख 12 सितंबर तय की गई है। तारीखों में यह बदलाव उन रिपोर्ट्स के बाद किया गया है, जिनमें कहा गया था कि कई डीआईओएस कार्यालयों ने 647 स्कूलों से जुड़े वेरिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स निर्धारित समयसीमा के अंदर अपलोड नहीं किए थे।

चुने गए परीक्षा केंद्रों की सूची, स्कूल-वाइज छात्र आवंटन के साथ, जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीस समिति द्वारा स्क्रूटनी के लिए 21 सितंबर को ऑनलाइन दिखाई जाएगी। प्रिंसिपल 28 सितंबर तक लिस्ट की जांच कर सकेंगे और आपत्ति दे सकेंगे।

जिला स्तरीय समिति इन आपत्तियों पर विचार करेगी और उनका निपटारा करेगी और 8 अक्टूबर तक डीआईओएस के जरिए अपनी अप्रूवल रिपोर्ट भेजेगी। रिवाइज्ड लिस्ट बाद में 17 अक्टूबर को सार्वजनिक सूचना के लिए पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे सभी पक्ष आगे ऑब्जेक्शन उठा सकेंगे। यूपी बोर्ड केंद्रों को फाइनल करने से पहले इन आपत्तियों की जांच करेगा। छात्र आवंटन सहित अंतिम सूवी 29 अक्टूबर को बोर्ड वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।

यूपी बोर्ड हर साल बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 2027 में भी परीक्षा केंद्रों का निर्धारण ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। सॉफ्टवेयर के माध्यम से केंद्रों के चयन की प्रक्रिया पूरी होने से मनमाने तरीके से परीक्षा केंद्र बनाए जाने की आशंका कम होगी। बोर्ड का मकसद परीक्षा को निष्पक्ष और नकल विहीन तरीके से कराना है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में 1 साल के PG कोर्स के लिए 5857 सीटें जुड़ीं, जानें 4-साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का नियम

Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Sawan Putrada Ekadashi Date and Muhurat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हिंदू कैलेंडर के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत जब सावन माह में होता है, तो श्री हरि के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा का भी संयोग प्राप्त होता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त रविवार के दिन पड़ रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में स्वास्थ्य या करियर से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश होता है और संतान सुख एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

खास बात यह है कि सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि रविवार के दिन पुत्रदा एकादशी का पड़ना भी एक बड़ा संयोग है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण समय

व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा।

हरि और हर की पूजा का दुर्लभ संयोग

सावन की आखिरी एकादशी में भगवान शिव की आराधना के साथ पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि इस दिन शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना को लेकर धार्मिक आस्था और भी बढ़ जाती है।

संतान इच्छुक दंपति जरूर रखें व्रत

पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान इच्छुक दंपत्ति इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हो सकती है और संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय

MLA Salary: कार, बंगला और लाखों के भत्ते! जानिए किस राज्य के विधायक कमाते हैं सबसे ज्यादा पैसा

MLA Salary: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सभी 234 विधायकों को सरकारी गाड़ी और हर महीने अतिरिक्त भत्ता देने के फैसले के बाद अब विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली दूसरी सुविधाएं चर्चा में हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि विधायकों को वेतन के अलावा और क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं।

नई व्यवस्था के तहत तमिलनाडु के हर विधायक को एक सरकारी गाड़ी मिलेगी। इसके अलावा गाड़ी, पेट्रोल-डीजल और मेंटेनेंस के खर्च के लिए हर महीने 75,000 रुपये और एक सहायक (असिस्टेंट) के लिए 25,000 रुपये दिए जाएंगे। यानी हर विधायक को वेतन के अलावा हर महीने कुल 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार ने विधायकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी बढ़ा दिया है।

इस फैसले के बाद देशभर में विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग राज्यों में विधायकों की बेसिक सैलरी, भत्तों और दूसरी सुविधाओं में काफी अंतर देखने को मिलता है।

यह राज्यों का विषय है

सांसदों की सैलरी और भत्ते संसद तय करती है, लेकिन विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं राज्य सरकार के दायरे में आती हैं। हर राज्य की विधानसभा अपने विधायकों के वेतन और भत्तों से जुड़े नियम और कानून तय करती है।

विधायकों के लिए कोई एकसमान राष्ट्रीय वेतन संरचना नहीं है। उनकी कमाई में सिर्फ बेसिक सैलरी ही शामिल नहीं होती। राज्य सरकारें विधायकों को विधानसभा क्षेत्र के खर्च, ऑफिस और स्टाफ, यात्रा, रहने, फोन और कम्युनिकेशन, इलाज और दूसरे आधिकारिक खर्चों के लिए अलग-अलग भत्ते भी देती हैं।

पीआरएस विधायी अनुसंधान के अनुसार, अधिकांश राज्यों में, विधायक कानून के माध्यम से अपने वेतन और भत्ते स्वयं निर्धारित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्यों में मूल वेतन और समग्र वेतन पैकेज दोनों में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है।

किस राज्य में विधायकों को सबसे अधिक वेतन मिलता है?

2025 में द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना राज्य में विधायकों को सबसे अधिक वेतन 2.75 लाख रुपये दिया जाता था। के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के दौरान सभी भत्तों सहित यह वेतन 1.25 लाख रुपये से बढ़कर 2.75 लाख रुपये हो गया था।

किस राज्य में विधायकों का वेतन सबसे कम है?

पीआरएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के विधायकों का मासिक वेतन 70,000 रुपये है, जो देश के सबसे कम वेतन पाने वाले विधायकों में से एक है। उनके मासिक वेतन में 2,000 रुपये का निश्चित भत्ता, 25,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 20,000 रुपये का न्यूनतम मासिक यात्रा भत्ता, 11,000 रुपये का टेलीफोन भत्ता, 4,000 रुपये का सूचना भत्ता और 8,000 रुपये का उपभोग भत्ता शामिल है। उन्हें राज्य के भीतर यात्रा के लिए 1,000 रुपये और केरल के बाहर यात्रा के लिए 1,200 रुपये का दैनिक भत्ता भी मिलता है।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कम वेतन वाले राज्य में विधायकों को कम सुविधाएं मिलती हैं। इन्हें आवास, सरकारी आवास, इलाज, यात्रा खर्च की भरपाई, स्टाफ सपोर्ट और दूसरी सुविधाएं अलग से दी जाती हैं।

विधायकों को वेतन के अलावा और क्या मिलता है?

विधायक का मासिक वेतन राज्य द्वारा विधायक पर किए जाने वाले कुल व्यय का केवल एक हिस्सा है।

सामान्य सुविधाओं और भत्तों में शामिल हैं:

  • निर्वाचन क्षेत्र के कार्यों से संबंधित खर्चों के लिए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
  • कर्मचारियों और प्रशासनिक खर्चों के लिए सेक्रेटेरियल या ऑफिस भत्ता
  • सरकारी यात्राओं के लिए यात्रा और परिवहन भत्ता
  • विधानसभा सत्रों और समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए दैनिक भत्ता
  • राज्य की राजधानी में आवास
  • विधायक और कुछ राज्यों में परिवार के सदस्यों के लिए मेडिकल सुविधाएं
  • टेलीफोन और संचार भत्ता
  • वाहन सुविधाएं या वाहन भत्ता
  • कार्यालय उपकरण और स्टेशनरी भत्ता
  • विधानसभा छोड़ने के बाद पेंशन और अन्य लाभ, जो राज्य के नियमों पर निर्भर करते हैं
  • हरियाणा में आवास और कार सुविधा
  • कुछ राज्य पारंपरिक वेतन-भत्ते मॉडल से परे भी लाभ प्रदान करते हैं।

हरियाणा में विधायकों को सिर्फ सैलरी और भत्ते ही नहीं, बल्कि घर और गाड़ी खरीदने के लिए 1 करोड़ रुपये तक का लोन लेने की सुविधा भी मिलती है। यह लोन घर, मोटर कार या दोनों के लिए लिया जा सकता है।

इसके अलावा, विधायकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा भी दी जाती है। राज्य सरकार घर में बदलाव कराने और उसकी मरम्मत के लिए भी विधायकों को एडवांस राशि उपलब्ध कराती है।

ओडिशा का विधायक विकास कोष

एक और महत्वपूर्ण अंतर विधायक द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्राप्त लाभों और उनके निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े कोषों के बीच है।

ओडिशा की विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 से हर विधानसभा क्षेत्र को 5 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इस राशि को सामान्य विकास, शिक्षा और सड़क से जुड़े कामों के लिए बांटा जाता है।

हालांकि, इस राशि को विधायक का वेतन या व्यक्तिगत लाभ नहीं माना जाना चाहिए। यह सार्वजनिक धन है जो विधायक द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए निर्धारित किया गया है।

विधायकों के वेतन में इतना अंतर क्यों होता है?

इस अंतर के पीछे कई कारण हैं:

  • आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों के पास उच्च वेतन देने की वित्तीय क्षमता अधिक हो सकती है, हालांकि राजनीतिक प्राथमिकताएं भी मायने रखती हैं।
  • उच्च जीवन यापन और परिचालन लागत वाले राज्यों के विधायकों को अधिक भत्ते मिल सकते हैं।
  • अगर किसी विधायक का क्षेत्र बहुत बड़ा, दूर-दराज या कई इलाकों में फैला हुआ है, तो उसका यात्रा खर्च भी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में उसे ज्यादा यात्रा भत्ता मिल सकता है
  • कई बार राज्य सरकारें और विधानमंडल विधायकों की मांगों के बाद समय-समय पर वेतन और भत्तों में संशोधन करते हैं।

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28 अगस्त को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण, इन 4 राशियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर, जानें जानें ज्योतिषीय संकेत और उपाय

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। हालांकि यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से देश में इसकी वजह से पारंपरिक तौर पर लगने वाला सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद हिंदू ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण काल को आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक इस चंद्र ग्रहण का असर अलग-अलग राशियों पर देखने को मिल सकता है, लेकिन 4 विशेष राशियों वृषभ, कर्क, सिंह और वृश्चिक को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

चंद्र ग्रहण का समय और भारत में स्थिति

ग्रहण की तारीख : 28 अगस्त 2026

प्रारंभ समय : सुबह 8:04 बजे

चरम काल : सुबह 9:43 बजे

समापन समय : सुबह 11:22 बजे

इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

वृषभ राशि : वृषभ राशि के जातकों को इस चंद्र ग्रहण के दौरान अपनी बोली और वित्तीय मामलों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। वाद-विवाद से बचें, अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें और किसी को भी पैसा उधार देने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आपके रिश्तों में खटास ला सकता है या आर्थिक परेशानी खड़ी कर सकता है।

कर्क राशि : कर्क राशि का स्वामी स्वयं चंद्रमा है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण का प्रभाव इस राशि पर अधिक माना जाता है। इस अवधि में कर्क राशि के लोगों को तनाव से बचने, अनावश्यक चिंताओं से दूर रहने, परिवार के सदस्यों के साथ धैर्यपूर्वक बातचीत करने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी जाती है।

सिंह राशि : सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, जिसका चंद्रमा के साथ महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संबंध होता है। ग्रहण काल के दौरान सिंह राशि के जातकों को अपने वर्कप्लेस पर व्यवहार ठीक बनाए रखना चाहिए। अपने सीनियर्स के साथ बेवजह की बहस से बचें और कोई भी महत्वपूर्ण बयान या निर्णय लेने से पहले गहराई से विचार करें।

वृश्चिक राशि : वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि को चंद्रमा की नीच राशि से जोड़ा जाता है। इसलिए ज्योतिषियों ने वृश्चिक राशि के जातकों को वित्त, पारिवारिक मामलों और भरोसे के संदर्भ में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। पैसों से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचें और किसी भी व्यक्ति पर अंधाधुंध भरोसा न करें।

चंद्र ग्रहण के दौरान करें ये ज्योतिषीय उपाय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कमजोर चंद्रमा को मजबूत करने और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए कुछ ऐसे उपाय हैं जो फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना करने से चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। अपनी माता का आदर-सत्कार करें और उनका आशीर्वाद लें। दूध, चावल या अन्य सफेद चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए चंद्रमा से जुड़े मंत्रों का जाप और ध्यान करें।

आपको बता दें कि 28 अगस्त को होने वाला यह चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जबकि इसके आध्यात्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन परंपराओं को मानने वाले लोगों के लिए इस दौरान शांत रहना, जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना और सकारात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना लाभदायक माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Parivartan Yog 2026: बुध के नक्षत्र अश्लेषा में पहुंचकर गुरु ने एक्टिव किया परिवर्तन योग, 31 अक्टूबर तक इन 5 राशियों पर मेहरबान रहेंगे लक्ष्मी

Parivartan Yog 2026: देवगुरु बृहस्पति का ज्योतिष शास्त्र में अहम स्थान है। इस ग्रह की स्थिति जातक के जीवन में बड़े बदलाव का कारण बनती है। बृहस्पति ग्रह वर्तमान में कर्क राशि में गोचर कर रहा है। कर्क गुरु की उच्च राशि है और इस वजह से गुरु इस समय अतिचारी होकर विचरण कर रहे हैं। इसी अवस्था में उन्होंने ग्रहों के राजकुमार बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में गोचर किया है।

ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, वृद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना गया है। वहीं, बुध बुद्धि, व्यापार और संचार के देवता हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति ने 20 अगस्त को अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश किया है। ज्ञान के कारक बृहस्पति के अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश का बेहद शुभ और सकारात्मक प्रभाव 31 अक्टूबर तक कई राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। अश्लेषा नक्षत्र में गुरु और बुध के एक साथ होने से परिवर्तन योग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस योग से किन 5 राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।

मेष राशि : मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा। अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। आय के नए स्रोत खुलेंगे। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता, पदोन्नति या मनचाहा इंक्रीमेंट मिल सकता है।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए बुध के नक्षत्र में गुरु का आना भाग्य में वृद्धि लेकर आएगा। जो लोग बिजनेस में हैं, उन्हें नए सौदे और बड़ा मुनाफा हासिल हो सकता है। आपकी बौद्धिक क्षमता और वाणी का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे समाज और परिवार में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के स्वामी स्वयं बुध देव हैं, इसलिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से रुकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को शुभ समाचार प्राप्त होगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक शांति और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी करेगा। नया मकान, वाहन या भूमि खरीदने के प्रबल योग बन रहे हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है।

कन्या राशि : कन्या राशि के स्वामी भी बुध हैं, जिससे गुरु का यह गोचर आपके लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा। पहले किए गए निवेश का बेहतरीन रिटर्न मिलेगा। आर्थिक तंगी दूर होगी। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।

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Shani Nakshtra Gochar 2026: शनि का नक्षत्र परिवर्तन आज, वृषभ, मिथुन और मकर राशियों को करियर और कारोबार में मिलेगी अपार सफलता

Sawan Purnima 2026 Date: 27 या 28 अगस्त, कब किया जाएगा श्रावण पूर्णिमा का व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Purnima 2026 Date: सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

यह श्रावण माह का अंतिम दिन होता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान होता है, जो पूर्णिमा के दिन जलाभिषेक और विशेष पूजा के साथ पूर्ण होता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन जनेऊ धारण करने वाले (द्विज) गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करके पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं और नया जनेऊ धारण करते हैं। इसे ‘श्रावणी’ या ‘उपाकर्म’ कहा जाता है। साथ ही, अमरनाथ में पवित्र छड़ी मुबारक की रस्म भी श्रावण पूर्णिमा के दिन ही अमरनाथ गुफा पहुंचती है और वार्षिक यात्रा का समापन होता है।

श्रावण पूर्णिमा 2026: सही तारीख

दृक पंचांग के मुताबिक श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9:08 बजे आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मानी जाएगी।

स्नान और दान की सही तिथि

सावन पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने के कारण स्नान और दान जैसे कार्य इस दिन सूर्योदय के बाद किए जाएंगे। व्रत और पूजा की तारीख स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

पूर्णिमा तिथि का समय

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे तक

स्नान-दान और पूजन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:28 बजे से सुबह 05:12 बजे तक

प्रातःकाल स्नान-दान मुहूर्त : सूर्योदय से लेकर सुबह 09:48 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

चंद्र ग्रहण व भद्रा का प्रभाव

चंद्र ग्रहण : 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है, परंतु यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं रहेगा। इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, जिससे आप बिना किसी रुकावट के पूजा, स्नान, दान व रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।

भद्रा काल : 27 अगस्त की रात में ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त को पूरे दिन रक्षाबंधन एवं धार्मिक कार्यों के लिए भद्रा दोष नहीं रहेगा।

सावन पूर्णि 2026: पूजा विधि

स्नान व दान : इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

सत्यनारायण कथा : पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चंद्र देव की पूजा : रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

Putrada Ekadashi 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी पर इन 5 बातों का रखें खास ध्यान, वर्ना नहीं मिलेगा व्रत और पूजा का पूरा फल