Rashifal Today: आज के दिन किस मूलांक के लोगों की चमकेगी किस्मत, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म की तारीख का हमारे जीवन पर खास प्रभाव माना जाता है। हर मूलांक के लिए आज आज आर्थिक स्थिति में कुछ परेशानियां आ सकती हैं। दोस्तों या सहकर्मियों के साथ पैसों से जुड़े लेन-देन में सावधानी रखें। बड़े निवेश से पहले अच्छी तरह सोचें, क्योंकि नुकसान की संभावना है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में बदलाव देखने को मिल सकता है। पैसों से जुड़े फैसले मजबूत होंगे और निवेश के नए विकल्प मिल सकते हैं। नई योजना शुरू करने का समय अच्छा है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखें। भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही फैसला लें।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आपका ध्यान पैसों से जुड़े मामलों पर रहेगा। आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, इसलिए सावधानी जरूरी है। निवेश करने से पहले उसके लंबे समय के असर के बारे में सोचें। बेवजह खर्च करने से बचें और धैर्य से फैसले लें।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति के लिए दिन अच्छा रहेगा। समझदारी से किया गया निवेश फायदा दे सकता है। कारोबार में नए अवसर और सौदे मिल सकते हैं। आमदनी के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। हालांकि बजट का ध्यान रखें और फालतू खर्च से बचें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा।।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। गैर-जरूरी खरीदारी से बचें और खर्चों पर नजर रखें। अगर निवेश की योजना बना रहे हैं तो जल्दबाजी न करें। परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त की सलाह लेना लाभदायक हो सकता है। आर्थिक स्थिरता के लिए धैर्य से काम लें।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक नुकसान का खतरा हो सकता है। जल्दबाजी में लिया गया कोई वित्तीय फैसला या समझौता आगे चलकर परेशानी दे सकता है। इसलिए किसी भी निवेश या नए प्लान पर अच्छी तरह विचार करें। खर्चों को सीमित रखें और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए अपनी योजनाओं को दोबारा व्यवस्थित करें।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। आप अपनी समझदारी और योजना बनाने की क्षमता से खर्चों को नियंत्रित कर सकते हैं। नए निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में परिवार और दोस्तों से चर्चा करना भी अच्छा रहेगा। अचानक आने वाले खर्चों के लिए तैयार रहें और अपने बड़े आर्थिक लक्ष्यों पर ध्यान दें।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज धन कमाने के नए मौके मिल सकते हैं। निवेश के लिए दिन अच्छा है, लेकिन सोच-समझकर ही कदम उठाएं। बातचीत में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे कारोबार में अच्छे सौदे हो सकते हैं। मेहनत का फल मिलेगा और अचानक धन लाभ भी हो सकता है। फिर भी फालतू खर्च से बचें और बजट बनाकर चलें।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है। निवेश में नुकसान का डर है, इसलिए जोखिम भरे फैसलों से बचें। हाल में लिया गया कोई बड़ा आर्थिक फैसला है तो उसकी दोबारा समीक्षा करें। कारोबार में लेन-देन करते समय सतर्क रहें और किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी शर्तें ध्यान से पढ़ें।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति में कुछ परेशानियां आ सकती हैं। दोस्तों या सहकर्मियों के साथ पैसों से जुड़े लेन-देन में सावधानी रखें। बड़े निवेश से पहले अच्छी तरह सोचें, क्योंकि नुकसान की संभावना है। बेवजह खर्च न करें और छोटे-छोटे बचत प्लान पर ध्यान दें। अचानक आने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड रखना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Pakistan-Balochistan Conflict: ‘सेना हटाओ, हथियार यहीं छोड़कर जाओ..’; बलूचिस्तान का पाकिस्तान को फिर अल्टीमेटम

Pakistan-Balochistan Conflict: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर बड़े स्तर पर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान को नया अल्टीमेटम जारी करते हुए क्षेत्र से सभी पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की भी अपील की है।

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में पाकिस्तान की सेना पर बलूचिस्तान में अवैध रूप से तैनात होने और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों तथा खनिजों के दोहन का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी से बलूचिस्तान के लोगों की जान, संपत्ति और कारोबार को खतरा है।

पाकिस्तानी सेना को बताया ‘कब्जा करने वाली ताकत’

बयान में बलूचिस्तान की ओर से पाकिस्तानी सेना को एक आक्रमणकारी और कब्जा करने वाली ताकत करार दिया है। मीर यार बलूच ने दावा किया कि क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी स्थानीय लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने पाकिस्तान से केवल सैनिकों को वापस बुलाने की मांग नहीं की, बल्कि सैन्य उपकरण भी बलूचिस्तान में छोड़ने को कहा है।

‘हथियार और उपकरण यहीं छोड़कर जाएं’

मीर यार बलूच ने मांग की है कि पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान से वापस जाते समय अपने युद्धक विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, भारी तोपखाने, नौसैनिक पोत और अन्य सैन्य उपकरण बलूच बलों को सौंपे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद ये सैन्य संसाधन कथित तौर पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से हासिल धन से खरीदे गए हैं। इसलिए पाकिस्तान को इन्हें अपने साथ ले जाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

1947 और 1971 का किया जिक्र

अपने बयान में मीर यार बलूच ने साल 1947 में ब्रिटिश शासन के भारत छोड़ने और 1971 में बांग्लादेश के युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह ब्रिटेन भारत छोड़ते समय सैन्य हथियार और उपकरण भारत को सौंपकर गया था, उसी तरह 1971 में युद्ध के बाद पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश में अपनी सैन्य संपत्ति वहां की सेनाओं के हवाले की थी।

उन्होंने इसी तर्ज पर पाकिस्तान से बलूचिस्तान से सेना हटाने की तारीख और डेडलाइन घोषित करने की मांग की। बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी सेना को वापस जाते समय कथित तौर पर एक भी गोली साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, बलूच नेता का यह दावा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में जमीनी युद्ध हार चुका है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।

1971 के बांग्लादेश युद्ध से की तुलना

मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति की तुलना 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से की है। उन्होंने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोग कथित अत्याचारों को नहीं भूलेंगे और पाकिस्तान को उनके मुताबिक निरर्थक युद्ध जारी रखने के बजाय अपनी सेनाएं वापस बुला लेनी चाहिए।

इंटरनेशनल समुदाय से ‘स्वतंत्र देश’ की मांग

बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की गई। साथ ही पाकिस्तान की सैन्य वापसी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया गया। मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की रक्षा, सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और खनिज संसाधनों की निगरानी से जुड़े बलों के अलावा पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना की मौजूदगी खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात गैर-बलूच पाकिस्तानी नागरिकों से भी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों से क्षेत्र छोड़ने की अल्टीमेटम दिया।

‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का ऐलान

यह बयान ऐसे समय आया है जब 11 अगस्त को बलूच अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के गठन की घोषणा करने का दावा किया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की पाकिस्तान से स्वतंत्रता को मान्यता देने की अपील की थी। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

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अलगाववादी संगठन पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग करते हैं और इस्लामाबाद पर राजनीतिक उपेक्षा तथा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का आरोप लगाते हैं। वहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) समेत अलगाववादी समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी दफ्तरों पर हमलों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा अभियान तेज किए हैं।

मेरे पिता ने प्रॉपर्टी मुझे गिफ्ट में दी थी, क्या बहनें इसमें हिस्सा मांग सकती हैं?

प्रॉपर्टी के ओनरशिप के मामले काफी जटिल होते हैं। अगर प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो मामला और पेचीदा हो जाता है। एक व्यक्ति ने मनीकंट्रोल से पिता से गिफ्ट में मिली प्रॉपर्टी पर बहनों के मालिकाना हक से जुड़ा एक सवाल पूछा है। गाजियाबाद के रहने वाले मुकेश साहनी ने बताया है कि 2024 में निधन से पहले उनके पिता ने अपनी कुछ पुश्तैनी प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए उन्हें उपहार में दे दी थी। उनका सवाल है कि क्या उनकी बहनें इस प्रॉपर्टी में हिस्सा मांग सकती हैं?

मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा। उन्होंने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के प्रावधानों के तहत अगर 17 जून, 1956 के बाद किसी हिंदू व्यक्ति को प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो वह सिर्फ उस व्यक्ति की प्रॉपर्टी होगी। हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 17 जून, 1956 को लागू हुआ था।

उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति इस प्रॉपर्टी के साथ जो चाहे वह कर सकता है। किसी हिंदू व्यक्ति को मिली ऐसी प्रॉपर्टी स्वत: (automatically) हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की प्रॉपर्टी नहीं हो जाती है। लेकिन, अगर कोई पुश्तैनी प्रॉपर्टी इस तारीख (17 जून, 1956) से पहले विरासत में मिली है तो वह एचयूएफ की प्रॉपर्टी हो जाती है, जिस पर दूसरे सदस्यों का भी हक बनता है।

जैन ने कहा कि चूंकि मुकेश साहनी के मामले में पिता से उन्हें कब प्रॉपर्टी मिली थी, यह नहीं बताया गया है, जिससे उनके सवाल का जवाब उन्हें प्रॉपर्टी मिलने की तारीख पर निर्भर करेगा। अगर उन्हें पिता से प्रॉपर्टी 17 जून, 1956 के बाद गिफ्ट में मिली है तो फिर इस पर सिर्फ उनका हक होगा। अगर पिता से प्रॉपर्टी इस तारीख से पहले मिली है तो फिर गिफ्ट में मिली इस प्रॉपर्टी पर सिर्फ उनका हक नहीं होगा। इस पर उनकी बहनों का भी बराबर हक होगा।

हिंदू सक्सेशन एक्ट में संसोधन के बाद बेटियां भी एचयूएफ के कोपार्सनर (coparceners) बन गई हैं। इसका मतलब है कि बेटियां भी एचयूएफ के सदस्य के रूप में प्रॉपर्टी की सहभागी बन गई हैं। यह संसोधन 9 सितंबर, 2005 से लागू हुआ था। इस हिसाब से मुकेश की बहनें एचयूएफ प्रॉपर्टीज में अपना हिस्सा मांग सकती हैं। वे प्रॉपर्टी में हिस्सा के लिए कोर्ट में केस फाइल कर सकती हैं।

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के उद्घाटन एवं दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जापान और भारत के प्रमुख उद्योग समूहों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बताया। समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन जापान और स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में अपने निवेश, साझेदारी के अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को साझा किया।
दोनों उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रदेश में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन, बड़े बाजार, निवेश-अनुकूल नीतियों और सरकार के सहयोग को औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।

 

कुबोटा ने कहा- यूपी में निवेश दीर्घकालिक विश्वास का प्रतीक

समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन, जापान के प्रेसिडेंट एवं सीईओ शिंगो हानाडा ने नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की ग्राउंड ब्रेकिंग को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन बताते हुए कहा कि इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में कुबोटा की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और साझेदारी को एक नया विस्तार मिल रहा है। उन्होंने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, इन्वेस्ट यूपी और उन सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके समर्थन और सहयोग से यह महत्वपूर्ण पड़ाव संभव हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश में कुबोटा का निवेश प्रदेश की क्षमता में कंपनी के दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की प्रगति और भारत को एक विकसित एवं मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों में उद्योग जगत भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है।

 

135 साल से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मिशन पर कुबोटा

कुबोटा सीईओ ने कहा कि 135 वर्षों से अधिक समय से कुबोटा लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज में योगदान देने के उद्देश्य से काम कर रहा है। कंपनी की फिलॉसफी के अनुरूप वह बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए लोगों के हित में काम करती रहेगी। उन्होंने भारत में कुबोटा की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कंपनी की मौजूदगी उसकी मजबूत साझेदारियों के कारण लगातार सुदृढ़ हुई है। उन्होंने नंदा परिवार और उनकी संस्था का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिवार ने दशकों से भारत की सेवा की है और देश में कृषि के मशीनीकरण में अग्रणी भूमिका निभाई है। नंदा परिवार के नेतृत्व के साथ कुबोटा की साझेदारी आगे भी और मजबूत होती रहेगी। कुबोटा और उसके भारतीय साझेदारों की साझी महत्वाकांक्षा भविष्य के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट बेस तैयार करना है। जापान की विश्वस्तरीय तकनीक और भारतीय साझेदारों की स्थानीय समझ एवं क्षमता मिलकर इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।

 

स्पार्क मिंडा की यूपी में 40 वर्षों से अधिक की मौजूदगी, अब बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी

समारोह में आकाश मिंडा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में कंपनी की मौजूदगी और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज संभावनाओं और नए अवसरों का प्रदेश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश उद्योग और निवेश को प्राथमिकता देने वाला राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि निवेशकों और उद्योग जगत के बीच इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और इंडस्ट्रियल कॉन्फिडेंस भी तैयार कर रहा है।

 

एक्सप्रेसवे, कॉरिडोर और वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक्स ने बदला औद्योगिक परिदृश्य

आकाश मिंडा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिकीकरण के लिए मजबूत फाउंडेशन तैयार हुआ है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, स्किल्ड मैनपावर और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने हाल में संचालित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसी कई योजनाओं और परियोजनाओं को हकीकत में बदलते हुए देखा गया है, जो कुछ समय पहले तक केवल एक परिकल्पना मात्र थीं।

 

उत्तर प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

आकाश मिंडा ने बताया कि वह स्पार्क मिंडा ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कंपनी ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की उत्तर प्रदेश में 40 वर्षों से अधिक समय से मौजूदगी है और वर्तमान में प्रदेश में 9,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्पार्क मिंडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और कंपनी यहां अपनी मौजूदगी को कहीं बड़े स्तर पर विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

एडवांस टेक्नोलॉजी से ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ेगा निवेश

आकाश मिंडा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में एडवांस टेक्नोलॉजी, मोटर पार्ट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजाइन एवं डेवलपमेंट सेंटर जैसे क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी डीपर लोकलाइजेशन और बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है। निवेश विस्तार के साथ कंपनी प्रदेश में करीब 6,000 से 8,000 अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहती है।

 

जापान की तकनीक और यूपी की क्षमता का संयोजन बनेगा ताकत

स्पार्क मिंडा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने जापान और दुनिया भर के उद्योगों को उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।।जापान वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी, ग्लोबल क्वालिटी और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग लेकर आता है, जबकि उत्तर प्रदेश स्केल, टैलेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी सपोर्ट, बड़ा मार्केट और बिजनेस फ्रेंडली इनवॉयरमेंट उपलब्ध कराता है। भारतीय कंपनियां स्थानीय क्षमताओं, ग्राहकों की जरूरतों की बेहतर समझ और आगे बढ़ने की इच्छा लेकर आती हैं। इन सभी क्षमताओं का संयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

 

कारोबार के साथ रोजगार और विकसित भारत में योगदान है लक्ष्य

आकाश मिंडा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश का उद्देश्य केवल बिजनेस ग्रोथ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। कंपनी का लक्ष्य प्रदेश में अपनी औद्योगिक उपस्थिति का विस्तार करने के साथ रोजगार सृजन और विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देना है।  

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

जापान और उत्तरप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की निवेश संभावनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध लंबे समय से विश्वास पर आधारित रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा जापान के बीच बढ़ती साझेदारी इस विश्वास को और मजबूत करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया और कहा कि जापान के उद्योग जगत के लिए उत्तर प्रदेश में तेजी से अवसर खुल रहे हैं।

 

भारत की आर्थिक सोच को चार स्तंभों में समझाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर समझा जा सकता है। इनमें सोशल, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, समावेशी विकास, मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन और कानूनों तथा नियमों का सरलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से लगभग 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि के दौर में है। इसके साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। इससे भारत को आने वाले वर्षों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास की मजबूत क्षमता मिली है।

 

जापान के निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। इस विकास यात्रा में रेलवे, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृषि समेत लगभग हर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जापान के उद्योग जगत से भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से बदल रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है- भारत में निवेश करें, उत्तर प्रदेश में निवेश करें। सरकार निवेशकों की सहायता और सुविधा के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेशकों की सफलता ही भारत और उत्तर प्रदेश की सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

Dog Mask Video: कुत्ते का मास्क पहनकर खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी! कुत्तों की नसबंदी में भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, अनोखे प्रोटेस्ट का वीडियो वायरल

Dog Mask Video: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन में नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक मुल्लू राठौर मंगलवार (18 अगस्त) को जनसुनवाई में एक ऐसे व्यक्ति को लेकर पहुंचे। खास बात यह है कि उस शख्स ने कुत्ते का मुखौटा पहन रखा था। उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। नगर निगम कार्यालय में हुए इस प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के विरोध में सख्स कुत्ते का मास्क पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया। सुरक्षाकर्मियों ने शुरू में उनके अजीब पहनावे के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका। लेकिन विपक्ष के नेताओं के दखल देने के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया

राठौर ने नगर निगम पर कुत्तों की नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निगम के कोष और आवारा कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान नसबंदी अभियान में कथित लापरवाही की ओर आकर्षित किया गया है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ गए।

आवारा कुत्तों के नाम पर खर्च पर उठाए सवाल

दीपक राठौर ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर पिछले चार सालों में करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है।

राठौर ने नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों के नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लाखों रुपये वास्तव में कुत्तों की नसबंदी पर खर्च किए गए हैं, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या कम क्यों नहीं हुई? उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में 13,225 कुत्ते के काटने के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

‘मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा’

राठौर ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नसबंदी अभियान पर बड़ी रकम खर्च की गई है, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ने की वजह क्या है?

ADM को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग

नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने इस मामले को लेकर अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) काशीराम बड़ोले को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में नसबंदी अभियान से जुड़े कई बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।

इनमें टेंडर आवंटन प्रक्रिया, नियुक्त एजेंसी की पात्रता, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और जमीन पर नसबंदी किए गए कुत्तों का भौतिक सत्यापन शामिल है। राठौर ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में फर्जी बिलिंग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

‘नसबंदी के नाम पर सरकारी फंड का दुरुपयोग’

राठौर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “अगर नसबंदी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।” अतिरिक्त कलेक्टर काशीराम बडोले ने पत्रकारों को बताया कि कुछ लोग कुत्ते के मुखौटे पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे। इस दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए जारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आवेदन दिए।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी गई है। बडोले ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी और तथ्यों का पता लगाया जाएगा। राठौर ने कहा, इस विरोध का मकसद नगर निगम के आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के प्रयासों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर करना था।”

उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइज़ेशन) के लिए नगर निगम द्वारा लगभग 40 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद, आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में कुत्ते के काटने के 13,225 मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

ADM ने दिया जांच का भरोसा

मामले पर ADM काशीराम बड़ोले ने शिकायत की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान जो मामला सामने रखा गया है। उसकी पूरी जांच की जाएगी। ADM के मुताबिक, अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में कुत्ते का मुखौटा पहनकर किया गया विरोध लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा को बड़ी उड़ान, दीक्षा पर यूपी के 27 लाख से अधिक उपयोगकर्ता

योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा को बड़ी उड़ान, दीक्षा पर यूपी के 27 लाख से अधिक उपयोगकर्ता

DIKSHA App UP Users: किताब, ब्लैकबोर्ड और कक्षा से आगे बढ़कर जब पढ़ाई मोबाइल, कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास तक पहुंचती है, तो ज्ञान की पहुंच भी व्यापक होती है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को इसी व्यापक पहुंच से जोड़ते हुए दीक्षा (DIKSHA) के उपयोग और डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार पर जोर दिया है। इसका परिणाम प्रदेश में बने 27.01 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के बड़े आधार के रूप में सामने आया है, जो देश के कुल पंजीकृत दीक्षा उपयोगकर्ताओं का लगभग 12 प्रतिशत है। वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन औसतन 17,597 सक्रिय उपयोगकर्ता दीक्षा से जुड़े रहे, जबकि इसी अवधि में 49,789 नए उपयोगकर्ता भी इस डिजिटल मंच से जुड़े।

योगी सरकार की पहल से गांव-गांव पहुंच रही डिजिटल पढ़ाई

डिजिटल शिक्षा को शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश ने दीक्षा पर 16 हजार से अधिक क्यूआरलिंक्ड शिक्षण वीडियो उपलब्ध कराए हैं। संबंधित पाठ में दिए क्यूआर कोड के माध्यम से शिक्षक और विद्यार्थी शिक्षण वीडियो तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इससे विद्यालयों में उपलब्ध पाठ्य सामग्री को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने और बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। इसके साथ गेम आधारित आकलन, प्री लोडेड स्मार्ट क्लास सामग्री और बहुभाषी पाठ्य सामग्री जैसे नवाचार भी डिजिटल शिक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनाए गए हैं। इससे शिक्षकों को विषयों को समझाने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन मिल रहे हैं और बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और रोचक बनाया जा रहा है।  

समावेशी शिक्षा को भी मिला डिजिटल सहारा

योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा पहल में समावेशिता पर भी ध्यान दिया गया है। दीक्षा पर भारतीय सांकेतिक भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराया गया है, जिससे विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए भी डिजिटल शिक्षण संसाधनों की पहुंच बेहतर हो सके। वहीं दीक्षा पॉकेट बुकलेट जैसे प्रयासों के माध्यम से डिजिटल संसाधनों के उपयोग को विद्यालय स्तर पर अधिक सहज बनाने की दिशा में काम किया गया है।

हर दिन हजारों उपयोगकर्ता कर रहे इस्तेमाल

वर्ष 2025-26 में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 17,597 सक्रिय उपयोगकर्ताओं का दीक्षा से जुड़े रहना इसके नियमित उपयोग को दर्शाता है। इसी अवधि में 49,789 नए उपयोगकर्ताओं का जुड़ना भी प्रदेश में डिजिटल शिक्षा के बढ़ते आधार की तस्वीर सामने रखता है। यानी दीक्षा के माध्यम से उपलब्ध शिक्षण सामग्री का उपयोग लगातार नए शिक्षकों और अन्य उपयोगकर्ताओं तक पहुंच रहा है।

सिर्फ अनुपात से नहीं दिखती पूरी तस्वीर

केवल प्रति हजार उपयोगकर्ताओं के अनुपात को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश की दीक्षा उपलब्धि का आकलन करने से तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आती। प्रदेश की बड़ी आबादी और व्यापक विद्यालयी पहुंच को देखते हुए 27.01 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ताओं का आधार डिजिटल शिक्षा की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। देश के कुल पंजीकृत उपयोगकर्ताओं में लगभग 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश ने दीक्षा पर मजबूत डिजिटल शिक्षा आधार तैयार किया है।

डिजिटल संसाधनों से मजबूत होगी बच्चों की सीख

योगी सरकार का प्रयास डिजिटल संसाधनों को केवल तकनीकी सुविधा के रूप में उपलब्ध कराने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें शिक्षक और विद्यार्थी के नियमित शिक्षण-अधिगम अनुभव से जोड़ना है। क्यूआरलिंक्ड वीडियो से लेकर स्मार्ट-क्लास सामग्री, गेम-आधारित आकलन, बहुभाषी कंटेंट और भारतीय सांकेतिक भाषा की सामग्री तक, विभिन्न माध्यमों से डिजिटल शिक्षा को अधिक उपयोगी और समावेशी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

 

राज्य के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के मुताबिक, दीक्षा के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को प्रदेश के हर बच्चे और शिक्षक तक पहुंचाना योगी सरकार की प्राथमिकता है। लाखों उपयोगकर्ताओं की भागीदारी डिजिटल शिक्षा की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। हमारा लक्ष्य तकनीक के माध्यम से बच्चों की सीख को और बेहतर बनाना है।

बांग्लादेशी नेता बोला- हिंदुओं को आसानी से मार सकते हैं:अल-कायदा से जुड़े हारून इजहार का बयान सोशल मीडिया पर वायरल

बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े नेता हारुन इजहार का हिंदुओं को लेकर धमकी वाला वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहा है कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। चटगांव में एक कार्यक्रम के दौरान इजहार हिंदुओं को आसानी से मारे जाने की बात कहता सुनाई दे रहा है। वह यह भी कहता है कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होगी, उसके समर्थक ही ऐसा करने के लिए काफी हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों और भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह बयान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है। हारुन इजहार कौन है? हारुन इजहार बांग्लादेश के चटगांव का कट्टरपंथी इस्लामी नेता है और हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। वह संगठन की केंद्रीय समिति में शिक्षा और सांस्कृतिक मामलों का सचिव भी रह चुका है। उसके पिता मुफ्ती इजहारुल इस्लाम भी चटगांव के एक प्रभावशाली इस्लामी नेता और मदरसा संचालक रहे हैं। हारुन का नाम पहली बार नहीं बल्कि लंबे समय से कट्टरपंथ और हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। 2013 में चटगांव के लालखान बाजार स्थित मदरसे में विस्फोट हुआ था। इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने विस्फोटक बनाने की सामग्री, तेजाब और बिना फटे ग्रेनेड बरामद किए थे। इस मामले में हारुन और उसके पिता समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था। अल-कायदा से कनेक्शन का क्या मामला है? हारुन इजहार को लेकर अल-कायदा और दूसरे जिहादी नेटवर्क से संबंधों के आरोप पुराने हैं। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टों में उसके पिता के मदरसे को प्रतिबंधित संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। एक रिपोर्ट में उसके पिता के ओसामा बिन लादेन और तालिबान नेता मुल्ला उमर से संपर्क होने के दावे भी किए गए थे। हालांकि इन दावों को खबर में आरोप या सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के तौर पर ही लिखना बेहतर होगा। 2025 की एक रिपोर्ट में इंडिया टुडे ने भी हारुन इजहार को कट्टरपंथी संगठन हेफाजत-ए-इस्लाम का वरिष्ठ नेता बताते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क से कथित संबंधों का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां उसे प्रभावशाली कट्टरपंथी व्यक्ति मानती हैं। 2021 में भी हिंसा के मामले में नाम आया मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान चटगांव और दूसरे इलाकों में हिंसा हुई थी। हारुन इजहार को इन हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 2021 में उसने अदालत के सामने हिंसा के मामले में अपना बयान भी दिया था। पुलिस के मुताबिक, उसने पूछताछ के दौरान हिंसा में अपनी भूमिका स्वीकार की और उन लोगों के नाम भी बताए, जिन्होंने हिंसा भड़काने में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी। उसके खिलाफ ढाका, चटगांव और राजशाही में कई मामले दर्ज थे। 2023 में वह चटगांव सेंट्रल जेल से जमानत पर बाहर आया। पुलिस के मुताबिक, उस समय उसके खिलाफ दर्ज 11 मामलों में उसे जमानत मिल गई थी और पुलिस ने कहा था कि वह निगरानी में रहेगा। 2025 में फिर चर्चा में आया दिसंबर 2025 में भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी हारुन इजहार का नाम सामने आया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में भारतीय हितों को निशाना बनाकर हुए प्रदर्शनों के बाद वह एक पुलिस स्टेशन पहुंचा था और वहां भारतीय राजनयिक मिशन पर हमले के आरोपियों के मामले में हस्तक्षेप करता नजर आया। —————- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे:जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे:जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा

बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले। गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था।

समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी। इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं – 1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा। आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल समझौता हुआ। इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें…

LIVE: कोलकाता में भीषण आग, 9 मौतें, ट्रंप ने होर्मुज़ पर कब्ज़े का दावा दोहराया, ईरान ने उड़ाया मज़ाक

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ईरान और अमेरिका के बीच लगभग छह महीने से चल रहा युद्ध, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से हुई थी, अब एक तनावपूर्ण गतिरोध में बदल गया है। जिसका नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। ट्रंप इस जलमार्ग पर बार बार दावा ठोक रहे हैं और ईरान कह रहा है कि ये जलमार्ग ईरान का था, ईरान का ही रहेगा। अब ताजा घटनाक्रम में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने होर्मुज़ (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर अपना दावा करने के बीच का फ़ासला, अमेरिका की राजधानी और होर्मुज के बीच की 7,000 मील की दूरी से भी ज़्यादा है। 

कोलकाता के होटल में लगी भयानक आग, 9 लोगों की मौत : कोलकाता से एक बेहद ही दर्दनाक खबर सामने आई है। कोलकाता में मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर बने एक होटल में भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर 9 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक होटल में आग आज देर रात दो बजे के बाद लगी। इस होटल के ज्यादातर लोग बांग्लादेश के सीमावर्ता इलाके के रहने वाले थे और बांग्लादेश से इलाज के लिए कोलकाता आए थे। रात के तीन बजे के बाद घटनास्थल से 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कहा जा रहा है कि होटल के खिलाफ आरोप है कि होटल पर आग बुझाने का कोई व्यवस्था नहीं था। कम से कम 2 घंटे के कोशिश के बाद आग पर अभी काबू पा लिया गया है।

सपा नेता आज़म ख़ान के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी : समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान के ठिकानों पर आज अहले सुबह से ईडी की छापेमारी जारी है। ईडी की ये छापेमारी जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में काले धन के इस्तेमाल को लेकर दर्ज मामले में कार्रवाईसे संबंधित है। आज़म खान के ख़िलाफ़ दर्ज करीब कई दर्जन मामलों की लिस्ट ED से साथ शेयर हुई थी। जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर भी छापेमारी की जा रही है। आजम खान के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली सहित कुल 10 ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई जारी है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के लखनऊ ज़ोनल ऑफ़िस ने आज मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। यह जांच सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के फंड को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के ज़रिए दूसरी जगह लगाने और बाद में उनके इस्तेमाल (जिसमें यूनिवर्सिटी/ट्रस्ट के लिए संपत्ति बनाना भी शामिल है) से जुड़ी है।