El Nino Impact: अल नीनो का कहर! 2026 बन सकता है अब तक का सबसे गर्म साल, रिकॉर्ड गर्मी से क्या बदलेगा बारिश का पैटर्न?

El Nino & Monsoon update: प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनोके असर से साल 2026 के इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की संभावना बेहद बढ़ गई है। अमेरिका के नॉन प्रॉफिट रिसर्च ग्रुप बर्कले अर्थ के ग्लोबल वेदर के मंथली एनालिसिस के मुताबिक अल नीनो के शक्तिशाली रूप लेने के कारण 2026 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना जुलाई में दर्ज 12 फीसदी से बढ़कर अगस्त में सीधे 69 फीसदी पर पहुंच गई है। रिसर्चर्स का मानना है कि इसके अलावा साल 2027 में गर्मी के नए रिकॉर्ड बनने की पूरी उम्मीद है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक बर्कले अर्थ के चीफ साइंटिस्ट रॉबर्ट रोडे ने इसे लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले एक साल या उससे थोड़े अधिक समय में हम कुछ बहुत ही नाटकीय बदलाव देख सकते हैं। यह हमें ऐसी मौसमी स्थितियां देगा जिसकी उम्मीद हम आम तौर पर एक दशक या उससे अधिक समय बाद करते हैं। यह एक बहुत बड़ी घटना साबित होने वाली है।

क्या होता है अल नीनो और कैसे बदलेगा बारिश का पैटर्न?

अल नीनो महीनों तक चलने वाला एक रिकरिंग वेदर फेज है। इसके ग्लोबल लेबल पर गंभीर असर होते हैं। अल नीनो के असर से दुनिया के कई हिस्सों में सूखा पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर भारत, पश्चिमी और दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में देखने को मिलता है। अल नीनो की वजह से इन इलाकों में बारिश की कमी हो जाती है। वहीं दूसरी ओर अल नीनो की वजह से कुछ दूसरे क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होती है। उदाहरण के लिए इसके असर से दक्षिणी अमेरिका के इलाकों में भारी बारिश की संभावना बढ़ जाती है।

कितना शक्तिशाली है यह अल नीनो?

वैज्ञानिक पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के एक विशिष्ट क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान से अल नीनो की ताकत का आकलन करते हैं। अनुमान बताते हैं कि प्रशांत महासागर के उस विशिष्ट हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस तक असाधारण रूप से अधिक बढ़ जाएगा। इसकी तुलना में 2015 से 2016 के अल नीनो के दौरान समुद्र का तापमान सामान्य से 2.75 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ा था। इससे यह साफ पता चल रहा है कि मौजूदा अल नीनो कितना खतरनाक है।

यह अल नीनो इस साल जून में शुरू हुआ था। हालांकि इस साल देर वसंत और शुरुआती गर्मियों में पड़ी भीषण गर्मी के लिए अल नीनो जिम्मेदार नहीं था क्योंकि तब तक इसका असर इतना तेज नहीं हुआ था।

जून-जुलाई में टूटे गर्मी के रिकॉर्ड

बर्कले अर्थ के मुताबिक प्रमुख जलवायु डेटासेट के मुताबिक बीता जुलाई का महीना अब तक दर्ज किया गया सबसे गर्म या दूसरा सबसे गर्म जुलाई रहा। जुलाई के महीने में भीषण गर्मी की वजह से फ्रांस और स्पेन में विनाशकारी जंगलों की आग भड़क उठी जबकि अमेरिका के कई हिस्से हीट डोम की वजह से झुलस गए। अमेरिका के मुख्य भूभाग में जुलाई का औसत अधिकतम तापमान 90 साल पुराने उस रिकॉर्ड को तोड़ गया जो डस्ट बाउल के दौर में बना था। वैज्ञानिक रोडे ने चुटकी लेते हुए कहा कि दुनिया का इतना बड़ा हिस्सा झुलस रहा है कि उन जगहों का नाम लेना आसान है जो गर्म नहीं हैं, अंटार्कटिका में इस बार बहुत ही अत्यधिक ठंड वाली सर्दियां रही हैं।

ग्लोबल इकॉनमी और व्यापार पर अल नीनो की मार

कई देशों विशेष रूप से उभरते बाजारों में अल नीनो द्वारा लाई गई भीषण गर्मी और मूसलाधार बारिश ईरान युद्ध के कारण उपजे आर्थिक संकट को और बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए समुद्र के पानी के गर्म होने की वजह से पेरू में एंकोवी मछली के शिकार/पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लग गई है।

ग्रीनहाउस गैसों का स्थायी असर

बर्कले अर्थ के वैज्ञानिक ज़ेक हॉसफादर ने अल नीनो की तुलना एक बड़े हथौड़े से करते हुए कहा कि अल नीनो एक विशाल हथौड़े की तरह है जिससे जलवायु पर प्रहार होता है इसलिए यह बहुत सी अलग-अलग चीजों को अस्त-व्यस्त कर देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि अल नीनो किसी एक महीने या साल के तापमान को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकता है लेकिन ग्रीनहाउस गैसों के प्रदूषण से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग हमेशा मौजूद रहती है और लगातार बढ़ रही है।

NSA अजीत डोभाल ने खोला पहलगाम हमले के दिन का सबसे बड़ा राज! प्लेन से उतरते ही पीएम मोदी ने उनसे पूछा था ये पहला सवाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुरंत प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हमले के बाद पीएम मोदी भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई तय करने से पहले यह जानना चाहते थे कि इस हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने ये बातें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बनने वाली डिस्कवरी की नई डॉक्यूमेंट्री में कही हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के कई बड़े राजनीतिक नेताओं, सेना के अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के बयान शामिल किए गए हैं। ये सभी लोग  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीधे तौर पर जुड़े थे।

अजीत डोभाल ने बताई ये बात

‘एक्स’ पर शेयर की गई इस सीरीज की क्लिप में अजीत डोभाल ने बताया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर भारत लौटे थे। भारत पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों से हमले की पूरी जानकारी मांगी। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री के भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही बैठक हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने सबसे पहले घटना से जुड़े सभी तथ्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पूछा कि पहलगाम हमले के पीछे कौन है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उस समय साफ कर दिया था कि भारत हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

अजीत डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जल्द ही यह साफ हो गया था कि पहलगाम हमले के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की खुफिया एजेंसियों ने बहुत अच्छा काम किया। उनकी मदद से कम समय में हमले के जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति साफ हो गई और भारत इस नतीजे तक पहुंच सका कि इसके पीछे कौन था।

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’

अजीत डोभाल ने यह भी बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी है, तो इसका मतलब क्या है। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री का संदेश साफ है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक आखिरी आतंकवादी का भी सफाया नहीं हो जाता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपने पहले बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” इसे पाकिस्तान के लिए भारत का कड़ा संदेश माना गया था। इसका मतलब था कि भारत किसी भी आतंकी हमले को गंभीरता से लेगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। अजीत डोभाल के बयान से यह भी पता चलता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला किस तरह लिया था।

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की गई थी जान

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के पीछे पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों का हाथ बताया गया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस कार्रवाई में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर अभियान चलाया। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों और हमले की तैयारी वाले स्थानों पर कार्रवाई की गई। भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। करीब चार दिनों तक दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बना रहा। आखिरकार 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी। यह सहमति तब हुई, जब पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया।

Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 17 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 14 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुए हैं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 70.71 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 78,009.25 पर और निफ्टी 29.85 अंक या 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,366 पर बंद हुआ। आज लगभग 1855 शेयरों में बढ़त हुई,2244 शेयरों में गिरावट आई और 174 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में अपोलो हॉस्पिटल्स,भारती एयरटेल,अदाणी एंटरप्राइजेज,अदाणी पोर्ट्स और विप्रो शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल,जियो फाइनेंशियल,ONGC,हिंडाल्को और SBI शामिल रहे।

सेक्टरों की बात करें तो ऑटो,एनर्जी,FMCG,मेटल,फार्मा और रियल्टी में 0.3-1% की गिरावट आई,जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया में लगभग 1% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि आज मार्केट में कम उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशक की नजर एनर्जी की कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड के आउटलुक पर लगी हुई है। हालांकि,कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन स्टॉक्स की अगुवाई में मार्केट दिन के निचले स्तरों से रिकवरी हुआ, जिसे बेहतर डिमांड ट्रेंड्स का भी सपोर्ट मिला।

इस तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजों और घरेलू सपोर्टिव फैक्टर्स(जिनसे FY27 के अर्निंग अनुमानों में बढ़ोतरी हो सकती है) की वजह से बॉटम-अप स्टॉक सिलेक्शन अप्रोच के लिए मौके बन रहे हैं।

इसके अलावा,रुपये में स्थिरता,भारत की 10-साल की बॉन्ड यील्ड में गिरावट और FII की खरीदारी में धीरे-धीरे सुधार से घरेलू मैक्रो-एनवायरनमेंट को सपोर्ट मिल रहा है और महंगाई की स्थिति भी बेहतर हो रही है।

17 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी में एक और दिन सुस्त ट्रेडिंग देखने को मिली। ट्रेडर्स वीकेंड से पहले किसी खास दिशा में पोजीशन लेने से बचते दिखे। निफ्टी थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ,लेकिन 20EMA के ठीक ऊपर रहा और मोटे तौर पर अपनी शॉर्ट-टर्म मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहा।

मोमेंटम इंडिकेटर RSI और कमजोर होने लगा है और बेयरिश क्रॉसओवर ओवरसोल्ड जोन की ओर बढ़ रहा है। कुल मिलाकर,सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है और 24,180 के स्तर तक और गिरावट की संभावना है। ऊपरी स्तर पर 24,400 का लेवल निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड ,सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24500-24550 के जोन में नजर आ रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 24700 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 24850 तक जा सकता है। नीचे की तरफ,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24230-24200 के जोनन में है,जो 100 डे EMA के लेवल के पास ही है।

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि शुक्रवार को मार्केट में एक छोटे दायरे में उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन का दौर जारी रहा। अंत में निफ्टी 29 अंक गिरकर बंद हुआ। ओवरऑल चार्ट पैटर्न से पता चलता है कि पिछले 9 सेशन से मार्केट में धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ती जा रही है।

पिछले हफ्ते हाई लेवल पर डोजी टाइप का वीकली पैटर्न बनने के बाद इस हफ्ते निफ्टी के वीकली चार्ट पर एक साफ नेगेटिव कैंडल बनी है। यह 24500-24600 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के पास ऊपर की ओर एक फॉल्स ब्रेकआउट का संकेत है।

पिछले कुछ महीनों में लगातार हायर बॉटम बनते हुए देखे गए हैं। अभी दिख रही कमजोरी नए हायर बॉटम बनने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है। इसलिए,आने वाले सेशन में कुछ और कंसोलिडेशन की संभावना है। अगर यहां से और कमजोरी आती है तो निफ्टी जल्द ही 24200-24000 के अगले निचले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है। फिलहाल 24500 के लेवल पर तत्काल रेजिस्टेंस दिख रहा है।

बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह ने कहा बैंक निफ्टी ने शुरुआती कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बनाई,लेकिन 57,681 के आसपास उसे रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और फिर यह नीचे गिरकर 57,380 के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गया। सेशन के दूसरे हिस्से में निचले स्तरों से आई रिकवरी ने इंडेक्स को अपने शुरुआती नुकसान की कुछ भरपाई करने में मदद की और बैंक निफ्टी 0.25% की गिरावट के साथ 57,491 पर बंद हुआ।

इंडेक्स ने दोनों तरफ विक्स वाली एक छोटी बॉडी वाली कैंडल बनाई। यह बाजार में अनिश्चितता का संकेत है। फ्लैट RSI और ADX मजबूत डायरेक्शनल मोमेंटम और उतार-चढ़ाव की कमी का संकेत देते हैं,जिससे पता चलता है कि इंडेक्स अभी भी कंसोलिडेशन के दौर में है।

आगे की बात करें तो बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57900-58000 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी का यह पुलबैक 58400 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58800 तक बढ़ सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57100-57000 के जोन में है।

 

Trading plan: बाजार कह रहा है कुछ दिन ट्रेडिंग ना करें, एकदम पक्का भरोसा मिले तभी करें ट्रेड

 

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अफ्रीका में भारत का गौरव! गुजरात के भाई-बहन ने केन्या पुलिस को कराया ऐतिहासिक योग, बना दिया नया विश्व कीर्तिमान

अफ्रीका में भारत का गौरव! गुजरात के भाई-बहन ने केन्या पुलिस को कराया ऐतिहासिक योग, बना दिया नया विश्व कीर्तिमान

जब पूरा भारत 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मना रहा था, उसी समय अफ्रीका की धरती पर भी भारतीय संस्कृति और योग की गूंज सुनाई दे रही थी। ह्रिम योगशाला, संतरामपुर की संस्थापक राजवी शैलेष मेहता (युवा योगिनी) एवं सह-संस्थापक राज शैलेष मेहता (युवा उद्यमी, संस्कृति प्रचारक एवं विश्व के सबसे युवा ऑटोमोबाइल कंपनी के संस्थापक) ने केन्या में विशाल योग सत्र आयोजित कर भारत का गौरव बढ़ाया।

 

योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में केन्या गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय डॉ. विलियम रूटो के नेतृत्व में केन्या पुलिस सेवा द्वारा प्रथम सत्र में लगभग 4000 पुलिस अधिकारियों को लगातार 72 मिनट तक योग कराया गया। इसके बाद दूसरे सत्र में 260 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (नैरोबी सिटी काउंटी अधिकारी) को 150 मिनट तक योगाभ्यास करवाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। इसके साथ ही योग के माध्यम से भारतीय परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर राज शैलेष मेहता ने भारतीय पारंपरिक परिधान धोती धारण कर भारतीय संस्कृति एवं वेशभूषा का भी प्रचार-प्रसार किया।

 

राजवी शैलेष मेहता और राज शैलेष मेहता सगे भाई-बहन हैं। दोनों मूल रूप से गुजरात के छोटे से कस्बे संतरामपुर के निवासी हैं। उच्य शिक्षा के लिए वे अहमदाबाद में बस गए, लेकिन अपनी भारतीय संस्कृति और योग की परंपरा को विश्वभर में पहुँचाने का संकल्प निरंतर निभा रहे हैं।

राज शैलेष मेहता ने बताया कि जैसा की आदरणीय मोदी जी ने लगातार 12 वर्षो से अधिक भारतवर्ष मे योगा के प्रति अलख जगाई उसी प्रकार हमने उन पुलिस अधिकारियों को योग कराया जो दिन-रात समाज की सुरक्षा के लिए अनेक मानसिक तनाव और चुनौतियों का सामना करते हैं। योग उनके मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से हमने अफ्रीका की धरती पर लगभग 3,27,000 मिनट के सामूहिक योग अभ्यास का यह ऐतिहासिक आयोजन किया, जिसमें सभी अधिकारी अपनी आधिकारिक यूनिफॉर्म में शामिल हुए। ओर इस तरीके के आयोजनो से दोनों देशो के मध्य रिश्ते ओर मजबूत होंगे ओर हमारा लक्ष्य है की वैश्विक स्तर पर रक्षा दलो को कुल 60 लाख मिनिट का योग समर्पित करना है। 

 

इस आयोजन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग की महत्ता को नई पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और “योग से विश्व कल्याण” के संदेश को भी पूरी दुनिया तक पहुँचाने का कार्य किया। भाई-बहन की इस उपलब्धि पर भारत और गुजरात के लोगों में गर्व और हर्ष का वातावरण है।

RBI का लोन प्राइसिंग प्रपोजल: कर्ज लेने वालों पर इसका क्या हो सकता है असर?

RBI loan pricing proposal: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन प्राइसिंग के लिए एक नया फ़्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका मकसद छोटे लोन के लिए फ़्लोटिंग इंटरेस्ट रेट, स्प्रेड और कुल लागत में बदलाव को उधार लेने वालों के लिए ज़्यादा पारदर्शी बनाना है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (लोन और एडवांस पर इंटरेस्ट रेट) निर्देश, 2026 का ड्राफ़्ट कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों, ऑल-इंडिया फ़ाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) – जिनमें हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं उनपर लागू होगा। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल, 2027 से लागू होने वाले हैं।

यहां वे मुख्य प्रस्ताव दिए गए हैं जिनके बारे में कर्ज लेने वालों को पता होना चाहिए।

फ़्लोटिंग लोन रेट के लिए साफ रीसेट फ़्रेमवर्क

प्रस्तावित फ़्रेमवर्क के तहत, लेंडर को फ़िक्स्ड और फ़्लोटिंग-रेट लोन की कीमत तय करने के लिए इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क के साथ रिस्क-बेस्ड स्प्रेड का इस्तेमाल करना होगा। बेंचमार्क, रीसेट फ़्रीक्वेंसी और रीसेट की तारीख लोन एग्रीमेंट में बताई जानी चाहिए।

फ़्लोटिंग-रेट लोन के लिए, बेंचमार्क रीसेट की अवधि तीन महीने से ज़्यादा नहीं हो सकती। हालांकि, यह जरूरत कुछ छोटी रेगुलेटेड संस्थाओं(जिनमें बेस लेयर की NBFCs शामिल हैं) के लिए अनिवार्य नहीं होगी।

इजी होम फाइनेंस के चीफ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर विकास कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित फ़्रेमवर्क से फ़्लोटिंग-रेट पर लोन लेना ज़्यादा अनुमान लगाने लायक हो सकता है। मिश्रा ने कहा, “हर फ़्लोटिंग रेट को ज़्यादा से ज़्यादा तीन महीने के रीसेट साइकल वाले साफ़ बेंचमार्क से जोड़ने से उन उधार लेने वालों के लिए ज़रूरी अनुमान लगाने की सुविधा मिलती है जिन्होंने पहले असमान ट्रांसमिशन देखा है।”

कर्ज लेने वालों के लिए, इसका मतलब यह नहीं है कि EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। फ़्लोटिंग-रेट लोन तब भी महंगा हो सकता है जब बेस बेंचमार्क बढ़ता है। इसके बजाय, प्रस्तावित नियमों का मकसद बेंचमार्क और रीसेट मैकेनिज़्म को ज़्यादा साफ़ बनाना है।

लेंडर के लिए लोन स्प्रेड बदलने पर सीमाएं

RBI ने इस बात पर पाबंदियां प्रस्तावित की हैं कि लेंडर बेंचमार्क पर लिए जाने वाले स्प्रेड में कैसे बदलाव कर सकते हैं।

स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिज़नेस स्ट्रैटेजी से जुड़ी बातें शामिल हो सकती हैं। क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में तब बदलाव किया जा सकता है जब उधार लेने वाले का क्रेडिट प्रोफाइ बदलता है, बशर्ते उसकी समीक्षा की जाए। हालांकि, फ़्लोटिंग-रेट लोन पर स्प्रेड के अन्य हिस्सों में तीन साल तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। तीन साल की अवधि की गिनती पहली बार लोन की रकम मिलने या पिछली बार स्प्रेड में बदलाव होने (जो भी बाद में हुआ हो)से की जाएगी। मिश्रा ने कहा कि ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स में तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता से कर्जदाता के लिए EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो सकता है।

उन्होंने कहा, “लोन स्प्रेड पर तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता एक अहम बदलाव है।” “लोन मिलने या उसमें बदलाव के बाद ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स को तीन साल के लिए फिक्स करने से अनिश्चितता कम होनी चाहिए और EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो जाना चाहिए।”

JSA एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर सिद्धार्थ मनचंदा ने भी ‘स्प्रेड’ से जुड़े प्रावधान को ड्राफ्ट के अहम हिस्सों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि तीन साल की अवधि के दौरान स्प्रेड के नॉन-क्रेडिट-रिस्क वाले हिस्से को बढ़ाने की इजाज़त नहीं होगी, जबकि इसमें कटौती बिना किसी भेदभाव के करनी होगी।

₹50,000 तक के लोन के लिए APR की एक तय सीमा (सीलिंग) हो सकती है

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में छोटे लोन (स्मॉल-टिकट बॉरोइंग) के लिए भी एक खास प्रावधान है। RBI चाहता है कि लेंडर माइक्रोफाइनेंस लोन और कम रकम वाले लोन के लिए सालाना ब्याज दर (APR) की एक तय सीमा (सीलिंग) लागू करें। APR में ब्याज दर के साथ-साथ बाकी सभी चार्ज और फीस भी शामिल होंगे। कम रकम वाले लोन का मतलब ₹50,000 तक का पर्सनल लोन है।

इससे लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना आसान हो सकता है, खासकर तब जब फीस और दूसरे चार्ज लागत का एक बड़ा हिस्सा हों। मनचंदा ने कहा कि छोटे लोन के मामले में, बताई गई ब्याज दर (हेडलाइन इंटरेस्ट रेट) से हमेशा उधार लेने वाले की कुल लागत का पता नहीं चलता।

उन्होंने कहा, “उस सेगमेंट में हेडलाइन रेट कभी भी असल बात नहीं होती थी। असल बात फीस का पूरा ढांचा होती थी। सब कुछ एक ही नंबर में समेटना ही वह बदलाव है जिसे असल में महसूस किया जाएगा।”

ब्याज की गणना का तरीका होगा एक जैसा

RBI ने ब्याज की गणना के लिए एक कॉमन तरीका भी सुझाया है। ज़्यादातर लोन के लिए, ब्याज हर महीने के आधार पर लिया जाएगा और इसकी गणना ‘एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन’ का इस्तेमाल करके रोजाना कम होते बैलेंस पर की जाएगी। खेती से जुड़े लोन के लिए कुछ खास छूट होंगी। इस कदम से रेगुलेटेड लेंडर्स (कर्ज़ देने वाली संस्थाओं) के बीच ब्याज की गणना का तरीका एक जैसा हो जाएगा।

मौजूदा लोन 2029 तक नए फ्रेमवर्क में आ जाएंगे

सुझाए गए बदलावों का असर आखिरकार मौजूदा बेंचमार्क-लिंक्ड लोन पर भी पड़ेगा। RBI ने सुझाव दिया है कि इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े सभी मौजूदा लोन को 1 अप्रैल 2029 तक एक बार की मैपिंग प्रक्रिया के ज़रिए नए फ्रेमवर्क में बदल दिया जाए। इस बदलाव के लिए उधार लेने वाले की मंज़ूरी ज़रूरी होगी।

बदली हुई ब्याज दर, बदलाव से ठीक पहले लागू दर से ज़्यादा नहीं हो सकती, और लेंडर्स बदलाव के लिए कोई फ़ीस नहीं ले सकते।

मिश्रा ने कहा कि नए लोन के लिए प्रस्तावित लागू होने की तारीख और मौजूदा लोन के लिए बदलाव की समय-सीमा के बीच दो साल का समय लेंडर्स को अपने सिस्टम और कम्युनिकेशन प्रोसेस को अपडेट करने का मौका देता है। उन्होंने कहा, “समय-सीमा भी महत्वपूर्ण है। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से नए लोन पर लागू करने का प्रस्ताव है, जबकि सभी मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन के 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में बदलने की उम्मीद है।”

NBFC लोन अपने-आप रेपो-लिंक्ड नहीं होंगे

ड्राफ़्ट में सभी लेंडर्स के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क का इस्तेमाल करना ज़रूरी नहीं है।

कमर्शियल बैंकों को फ्लोटिंग-रेट पर्सनल लोन और फ्लोटिंग-रेट MSME लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना होगा। NBFC, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए, एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ना वैकल्पिक रहेगा।

इसलिए, NBFC से फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वालों को यह नहीं सोचना चाहिए कि लोन अपने-आप RBI रेपो रेट से जुड़ जाएगा। ड्राफ़्ट अभी फ़ाइनल नहीं है। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं, बशर्ते RBI फ्रेमवर्क को फ़ाइनल कर ले।

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51 साल पहले भारत ने जीता था हॉकी विश्वकप, 1971 से 2023 तक ऐसा रहा है सफर

भारत को हॉकी विश्वकप जीते हुए 51 साल हो गए हैं। पिछले संस्करण में भारत मेजबान था और आशा थी कि वह इंतजार खत्म होगा लेकिन न्यूजीलैंड की टीम ने पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारत को विश्वकप से बाहर कर दिया था। ओलंपिक में भारत ने सबसे ज्यादा मेडल इस खेल में जीते हों लेकिन विश्वकप में संघर्ष करना पड़ा है क्योंकि जब विश्वकप शुरु हुआ तब भारतीय हॉकी का स्तर ढलान पर था और एस्टरो टर्फ के आने के बाद भारतीय टीम कभी खड़ी ही नहीं हो पाई। जान लेते हैं कि भारतीय हॉकी टीम का सफर कैसा रहा-  

1971 बार्सीलोना

भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में FIH परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली। पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ।

पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने FIH के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया।ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा। सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2-1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता। भारत ने कीनिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता।

1973 एम्सटर्डम :

एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4-2 से हराकर खिताब जीता ।भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा।सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया। फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2-2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया।

1975 कुआलालम्पुर :

भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराया।फाइनल में पाकिस्तान ने बढत बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया। पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी। तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था।

1978 ब्यूनस आयर्स :

गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा। पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7.0 से मिली हार शामिल थी। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3-2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला।

1982 मुंबई :

अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा। पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम पर फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3-1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता। भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे।

1986 लंदन :

इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया। ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा।

1990 लाहौर :

राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला। भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण FIH ‘फेयरप्ले’ पुरस्कार भारतीय टीम को मिला।नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1994 सिडनी:

जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा। मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही।

2002 कुआलालम्पुर :

पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा। भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा।

2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :

दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2010 दिल्ली :

दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4-1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया। आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

 2014 द हेग :

पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये । आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6-1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 भुवनेश्वर :

हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा। मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

2023 भुवनेश्वर और राउरकेला:

लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा। क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

Falguni Pathak: मुंबई में फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि शो का टिकट प्राइस 2.04 लाख, फैंस बोले-‘ये तो खुल्लम-खुल्ला लूट’

Falguni Pathak: मुंबई में नवरात्रि का माहौल अभी से बनने लगा है, लेकिन इस बार सिर्फ़ फाल्गुनी पाठक का गरबा म्यूज़िक ही चर्चा में नहीं है। सिंगर के ‘नवरात्रि उत्सव 2026’ के टिकट की कीमतों ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है। टिकट की कीमत 2,200 से शुरू होकर 2.04 लाख तक है। नौ रातों तक चलने वाला यह इवेंट मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक होगा।

कई फ़ैन्स के लिए, फाल्गुनी पाठक के मशहूर गरबा गानों पर डांस करने का उत्साह इवेंट में शामिल होने की लागत की वजह से थोड़ा कम हो गया है। हालांकि टिकट की कई कैटेगरी मौजूद हैं, लेकिन प्रीमियम कीमतों ने सोशल मीडिया यूजर्स को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे नवरात्रि सेलिब्रेशन पर कितना खर्च करना चाहते हैं।

फाल्गुनी पाठक नवरात्रि उत्सव 2026 के टिकट की कीमतें

BookMyShow के अनुसार, सभी नौ रातों के लिए ‘फेज 1 अर्ली-बर्ड सीजन पास’ की कीमत 16,000 प्रति व्यक्ति थी, जबकि ‘फेज 2 सीजन पास’ की कीमत ₹18,000 थी। मौजूदा सीजन पास की कीमत ₹20,000 प्रति व्यक्ति है। जो लोग सिर्फ एक रात के लिए शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए ‘फेज 1 सिंगल-डे टिकट’ की कीमत ₹2,200 (टैक्स के बिना) से शुरू हुई थी।

कीमतों के मामले में दूसरी तरफ ‘POD पैकेज’ है, जिसकी कीमत एक रात के लिए 2.04 लाख है। इसमें 12 लोग शामिल हो सकते हैं और यह सिर्फ उसी खास दिन के लिए मान्य है। इसमें ₹10,000 का फ़ूड और बेवरेज कूपन भी शामिल है, जिससे यह इवेंट का सबसे महंगा ऑप्शन बन जाता है।

महंगी टिकटों पर लोगों की प्रतिक्रिया

बुकिंग शुरू होते ही टिकट की कीमतें ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गईं। कई यूजर्स ने इतनी ज़्यादा कीमत देखकर हैरानी जताई। बहुत से लोगों ने ऑर्गनाइज़र के इंस्टाग्राम कमेंट सेक्शन में अपनी निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, “मुझे फाल्गुनी पाठक बहुत पसंद हैं और मैं नवरात्रि का इंतज़ार सिर्फ़ उनके गरबा शो में शामिल होने के लिए करती हूँ। लेकिन जियो कन्वेंशन सेंटर जैसी जगह चुनने से कई मिडिल-क्लास परिवारों के लिए इस अनुभव का खर्च उठाना बहुत मुश्किल हो जाता है। नवरात्रि और गरबा लोगों को एक साथ लाने के लिए होने चाहिए, न कि ज़्यादा खर्च की वजह से उन्हें अलग-थलग महसूस कराने के लिए। मुझे उम्मीद है कि भविष्य के इवेंट्स में लोगों की जेब का भी ध्यान रखा जाएगा।”

एक और इंस्टाग्राम यूज़र ने कमेंट किया, “हमेशा की तरह ‘बुक माय शो’ पर कैसा मजाक है… इवेंट कंपनियां बड़ी संख्या में पास बुक कर लेती हैं और फिर हमें ब्लैक में बेचती हैं, जबकि पास की शुरुआती कीमत ही 16,000 रुपये है।”

एक यूज़र ने कहा, “मैडम, जब आप बोरीवली आती थीं, तो 30,000 लोग आपके गानों पर नाचते थे। नवरात्रि में आपके संगीत का मजा लेने के लिए हमें जियो या किसी महंगे एसी वाले वेन्यू की ज़रूरत नहीं है। हमें बस आपकी परफॉर्मेंस, आपका संगीत और सस्ते पास चाहिए ताकि हर कोई उन्हें खरीद सके और आपको लाइव परफॉर्म करते हुए देख सके! अगर 9 दिनों के लिए 23,000 रुपये देने हों, तो हम पार्किंग, पास की कीमत और खाने-पीने का खर्च कैसे उठाएंगे? किसी भी ऑर्गनाइजर के साथ जुड़ने से पहले कृपया अपने फ़ैसले पर विचार करें – आपके एक बहुत बड़े फ़ैन की ईमानदार गुज़ारिश।”

एक इंस्टाग्राम यूज़र ने फाल्गुनी पाठक की पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, “फालू, आप बहुत महंगी हो गई हैं!” एक और यूज़र ने कहा, “अब, 365 दिनों के लिए 23,000 रुपये चार्ज कर रहे हैं… वे सच में पास से जितना हो सके उतना पैसा वसूल रहे हैं… जल्द ही, वे 9 दिनों का ऑप्शन भी नहीं देंगे… आने वाले सालों में… अगर वे इसी तरह खुली लूट जारी रखते हैं।”

नवरात्रि उत्सव 2026 से क्या उम्मीद करें

फाल्गुनी पाठक फ़ेस्टिवल के सभी नौ दिनों में लाइव परफॉर्म करेंगी। नौ दिनों का यह इवेंट ‘ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट’ (TribeVibe Entertainment) और ‘अल्फ़ोंसो स्टूडियोज़’ (Alphonso Studios) द्वारा आयोजित किया जाएगा, और ‘वेस्ट एवेन्यू रियल्टी’ (West Avenue Realty) इसका टाइटल स्पॉन्सर होगा। टिकट बुकिंग की शुरुआत 12 अगस्त को उन मेहमानों के लिए एक खास प्री-सेल के साथ हुई जो पिछले साल के इवेंट में शामिल हुए थे, और आम लोगों के लिए बिक्री 13 अगस्त को शुरू हुई।

फाल्गुनी पाठक के बारे में

फाल्गुनी पाठक भारत की सबसे मशहूर पॉप आर्टिस्ट में से एक हैं, जो अपने इंडिपेंडेंट और पारंपरिक संगीत के काम के लिए जानी जाती हैं। वह कई दशकों से नवरात्रि उत्सवों से जुड़ी रही हैं। ‘गरबा क्वीन’ के नाम से मशहूर फाल्गुनी 90 के दशक में तब लोकप्रिय हुईं, जब उन्होंने ‘चूड़ी जो खनकी हाथों में’, ‘मैंने पायल है छनकाई’ और ‘याद पिया की आने लगी’ जैसे हिट गाने रिलीज़ किए।

फाल्गुनी पाठक अपनी खास आवाज़, स्टेज पर अपनी मौजूदगी और गुजरात के संगीत से जुड़ाव के लिए मशहूर हैं। उन्होंने नवरात्रि उत्सव को अपनी सालाना परंपरा बना लिया है, जिसे वे खास तौर पर मुंबई में बहुत धूमधाम से मनाती हैं।

Tata Steel केवल ₹100 में बेचेगी जमशेदपुर फुटबॉल क्लब, चर्चिल क्लब है बायर

टाटा स्टील अपने 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (JFSPL) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है। यह बिक्री 100 रुपये के मामूली अमाउंट पर चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड को की जाएगी। टाटा स्टील ने शुक्रवार को इस बारे में शेयर बाजार को जानकारी दी। कंपनी ने बताया है कि उसके बोर्ड की ओर से गठित निदेशकों की समिति ने इस बिक्री को मंजूरी दी।

JFSPL में टाटा स्टील के पास मौजूद 10 रुपये फेस वैल्यू के 4.08 करोड़ शेयर चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड (चर्चिल) को ट्रांसफर किए जाएंगे। समिति की मंजूरी के बाद टाटा स्टील और चर्चिल ने एक शेयर खरीद समझौता किया है। जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड का वित्त वर्ष 2025-26 में कारोबार 32.23 करोड़ रुपये का रहा।

चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड, ‘चर्चिल ब्रदर्स FC’ नाम से एक क्लब चलाती है। यह क्लब गोवा का है और 1988 में शुरू हुआ था। घरेलू फुटबॉल में इसका रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। यह क्लब इंडियन सुपर लीग में खेलता है। जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की नेटवर्थ 5.8 करोड़ रुपये है। यह ट्रांजेक्शन रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन नहीं है।

चर्चिल क्लब को 12 खिलाड़ी और 2 कोच भी होंगे ट्रांसफर

टाटा स्टील ने एक बयान में कहा कि JFSPL में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के नियमों के अनुसार की जा रही है। इस ओनरशिप ट्रांसफर में जमशेदपुर फुटबॉल क्लब का इंडियन सुपर लीग (ISL) स्पोर्टिंग लाइसेंस, और 12 खिलाड़ियों व 2 कोच का ट्रांसफर शामिल है। चर्चिल ब्रदर्स सितंबर 2026 से जमशेदपुर फुटबॉल क्लब के सभी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के कॉन्ट्रैक्ट अपने हाथ में ले लेगी। साथ ही उन्हें ISL में अपना प्रोफेशनल फुटबॉल करियर जारी रखने का मौका देगी।

स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बरकरार रखेगी Tata Steel, बनाएगी और बेहतर

टाटा स्टील में कॉर्पोरेट सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट डी. बी. सुंदरा रामम का कहना है कि चर्चिल ब्रदर्स भारतीय फुटबॉल में एक शानदार इतिहास वाला क्लब है। इस समझौते से हमारे खिलाड़ियों और कोचों को क्लब फुटबॉल खेलना जारी रखने का मौका मिलेगा। टाटा स्टील ग्रासरूट और युवा स्तर पर फुटबॉल पर ध्यान देना जारी रखेगी। आगे कहा कि कंपनी अपने स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बरकरार रखेगी और बेहतर बनाएगी। इसे ग्रासरूट फुटबॉल और एथलीट डेवलपमेंट के लिए नए सिरे से इस्तेमाल किया जाएगा। AIFF के साथ मिलकर यूथ सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा, उसमें निवेश किया जाएगा, उसकी क्षमता को और बढ़ाया जाएगा।

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

Drug Smuggler Virendra Singh Basoya

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने UAE से भगोड़े ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर बताया। ALSO READ: सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

 

अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और एक कठोर दृष्टिकोण के साथ उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नष्ट कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए, एनसीबी ने यूएई से भगोड़े ड्रग सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की है। 'ऊपर से नीचे' और 'नीचे से ऊपर' के दृष्टिकोण से अपराधी का पता लगाकर, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। ALSO READ: Census 2027: पहली बार जाति भी पूछेगी सरकार, बैंक अकाउंट से कोविड वैक्सीन तक होंगे ये 40 सवाल

कौन है ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया?

ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से दिल्ली लाया जा चुका है। वह दिल्ली, गुजरात और पंजाब से बरामद की गई 13 हजार करोड़ की ड्रग्स बरामदगी मामले में आरोपी है। उसे इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है। गिरफ्तारी से पहले ही बसोया दुबई भाग गया। इसके बाद, एनसीबी में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

 

वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया को भी पुलिस ने अक्टूबर 2024 में ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी कार से करीब 1.096 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी। वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी इस नेटवर्क में सामने आया है। वीरेंद्र को जून 2026 में इंटरपोल के नोटिस के आधार पर यूएई में गिरफ्तार किया गया था।