कनाडा का अमेरिकी सामान पर 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ:ट्रम्प ने 50% टैरिफ का ऐलान किया था, दोनों देशों के बीच तीन दिन की बातचीत फेल

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा कि कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा। यह फैसला अमेरिका की ओर से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद लिया गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी शुक्रवार को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। कनाडा का जवाबी टैरिफ स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अमेरिकी सामान पर लगेगा। किन-किन उत्पादों पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी पूरी जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी। दोनों देशों के बीच 3 दिन चली बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। अमेरिका बोला- अच्छा ऑफर दिया था, उन्होंने मौका गंवाया दोनो देशों के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ पार्टनशिप का बहुत अच्छा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, उन्होंने कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले सबसे अच्छा ऑफर दिया था। लेकिन कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से यह डील नहीं हो पाई। USTR ने आगे कहा कि अगर यह डील होती तो इससे एयरोस्पेस में सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन, गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने के लिए जरूरी कदम, खनिजों पर सहयोग, और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) बातचीत की घोषणा जैसे नतीजे सामने आते। अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की ट्रेड पॉलिसी अमेरिकी कार कंपनियों को कनाडा के बाजार में बराबर मौका नहीं देती। अमेरिका चाहता है कि उसकी कारों और दूसरे सामान के लिए कनाडा का बाजार ज्यादा खुले। कनाडा ने बदले में अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत मांगी थी। लेकिन अमेरिका इन टैरिफ को हटाने पर तैयार नहीं हुआ। 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन कनाडा अपने डेयरी बाजार को विदेशी कंपनियों और सस्ते डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम लागू करता रहा है। अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिले। लेकिन कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर ज्यादा रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। अमेरिका इसे अपने सामान के साथ भेदभाव के तौर पर देखता है। अमेरिका चाहता है कि उसकी शराब को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने की इजाजत मिले। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आने वाली लकड़ी पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है। ————— यह खबर भी पढ़ें… भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…

‘अमेरिका बदल गया है…’, ट्रंप के टैरिफ से कनाडा नाराज, अब 8 सितंबर से अमेरिका पर लगाएगा जवाबी टैरिफ

US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर यानी व्यापार विवाद और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी समय में हुई बातचीत से कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है। वहीं, जवाब में कनाडा ने भी 8 सितंबर से अमेरिका के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाने की घोषणा की है।

बता दें कि अमेरिका के नए टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका को होने वाले सालाना निर्यात के लगभग 5% हिस्से पर पड़ेगा और इसमें हॉकी के सामान, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ओटावा ने बातचीत के दौरान कई रियायतें दीं, लेकिन वॉशिंगटन की उन मांगों को ठुकरा दिया जिन्हें उन्होंने जरूरत से ज्यादा बताया।

उन्होंने X पर लिखा, “एक साल से ज्यादा समय से, कनाडा ने अमेरिका के साथ एक नई और व्यापक व्यापार डील पर बातचीत करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। हमने व्यावहारिक, धैर्यवान और लगातार प्रयास करने वाला रवैया अपनाया है। हमारा मकसद हमेशा कनाडाई लोगों के लिए सबसे अच्छी डील हासिल करना रहा है, न कि किसी भी कीमत पर या किसी भी समय-सीमा में डील करना। कल देर शाम मैंने अपने वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। हम अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते और न ही हम उनकी मांगी गई चीजें देंगे।”

कनाडा डॉलर-के-बदले-डॉलर के हिसाब से टैरिफ लगाकर जवाब देगा

कार्नी ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ लागू होने के बाद कनाडा भी जवाबी टैरिफ लगाएगा। इन उपायों में स्टील, डेयरी, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प और पेपर, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।

कार्नी ने कहा, “आने वाले दिनों में हम इन नए टैरिफ उपायों की जानकारी जारी करेंगे, जो लेबर डे के बाद आने वाले मंगलवार से लागू होंगे।”

कनाडा ने बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर वॉशिंगटन अपने टैरिफ में काफी कमी करता है, तो वह अमेरिकी स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल पर लगे अपने बाकी जवाबी टैरिफ हटा लेगा। ओटावा ने यह भी संकेत दिया था कि प्रांत अमेरिकी शराब उत्पादों को अपने बाजार में वापस आने की इजाजत दे सकते हैं।

हालांकि, कार्नी ने कहा कि अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव कनाडा की स्वीकार करने की क्षमता से कहीं अधिक थे।

अमेरिका का दावा- कनाडा ने बेहतर डील ठुकराई

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने वॉशिंगटन के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के लिए अहम उत्पादों – जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल और लकड़ी – पर रियायतें देने की पेशकश की थी।

ग्रीर ने कहा, “हम ऐसे कदम उठा रहे हैं जो कनाडा की जवाबी कार्रवाई का जवाब देंगे।”

उन्होंने तर्क दिया कि कनाडा को बेहतर शर्तें ऑफर की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

आखिरी समय की मांगों की वजह से बातचीत टूट गई

कार्नी के मुताबिक, अमेरिका की आखिरी मांगों में ऐसी शर्तें शामिल थीं जिनसे कनाडा में बनी गाड़ियों पर टैरिफ में मिलने वाली छूट कम हो जाती, दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करने की कनाडा की क्षमता सीमित हो जाती और भाषा, संस्कृति व संप्रभुता से जुड़ी सुरक्षा पर असर पड़ता।

कार्नी ने इन मांगों को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि कनाडा अब अमेरिका के साथ पहले जैसे रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं जाएगा।

बातचीत टूटने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि वे किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं।

USMCA के भविष्य पर सवाल

बढ़ते विवाद ने यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के भविष्य पर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड पैक्ट इन तीनों देशों के बीच होने वाले व्यापार के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है।

अमेरिका पहले ही मैक्सिको के साथ इस समझौते में बदलाव को लेकर बातचीत शुरू कर चुका है, लेकिन कनाडा के साथ अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता यह विवाद लंबे समय से सहयोगी रहे इन दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पिछले साल अमेरिका और कनाडा के बीच लगभग 880 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं एक्सचेंज की गईं, जिससे वे व्यापार के लिए एक-दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

पुराने सहयोगी देशों के रिश्तों में बढ़ा तनाव

टैरिफ को लेकर यह ताजा विवाद वॉशिंगटन और ओटावा के बीच महीनों से बढ़ते तनाव के बाद शुरू हुआ है। ट्रंप ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बार-बार टैरिफ लगाने पर जोर दिया है और कनाडा के अमेरिका का 51वां राज्य बनने के बारे में विवादित बातें भी कही हैं।

कार्नी ने दोनों देशों के रिश्तों में आ रहे बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कनाडा ने यह समझ लिया है कि “अमेरिका बदल गया है” और दोनों देश “अपने पुराने रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।”

बता दें कि कनाडा अपने सामान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अमेरिका को निर्यात करता है, इसलिए यह विवाद कनाडाई कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है।

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के जवाब का समर्थन किया है। उन्होंने “टैरिफ के बदले टैरिफ और डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही और कहा कि “सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।”

ट्रंप ने नए टैरिफ के लिए 1930 के ट्रेड लॉ का इस्तेमाल किया

ये नए टैरिफ US टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 338 पर आधारित हैं। इस नियम के तहत US राष्ट्रपति उन देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 50% तक टैरिफ लगा सकते हैं, जिन्होंने अमेरिकी कारोबारों के साथ भेदभाव किया हो।

यह नियम ‘महामंदी’ (Great Depression) के दौर का है और पहले कभी भी इस तरह से टैरिफ लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इन नए कदमों से वह ट्रेड विवाद और गहरा हो गया है, जिसने दुनिया के सबसे करीबी आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों में से एक पर पहले ही तनाव पैदा कर दिया है। फिलहाल आगे कोई बातचीत तय नहीं है, इसलिए दोनों देश अब टैरिफ विवाद के अगले दौर की तैयारी कर रहे हैं।

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Compaq की धमाकेदार वापसी! लॉन्च किया 11,000mAh बैटरी वाला QTab Ultra लॉन्च, जानें कीमत

कभी PC की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाला Compaq अब करीब दो दशक बाद नए अंदाज में वापसी कर रहा है। साल 2002 में HP के अधिग्रहण के बाद लगभग गायब हो चुका यह ब्रांड अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस मार्केट में अपनी दूसरी पारी शुरू करने की तैयारी में है। इस बार Compaq की नजर एंट्री-लेवल Android डिवाइसेस पर है और कंपनी ने इसी कड़ी में Compaq QTab Ultra 12.6 Android Tablet लॉन्च किया है।

Compaq QTab Ultra की खूबियां

लेटेस्ट Compaq QTab Ultra में 12.6 इंच की InCell AMOLED डिस्प्ले दी गई है। इसका रेजोल्यूशन 1600 x 2560 पिक्सल है। बड़ी स्क्रीन की वजह से इस टैबलेट पर वीडियो देखने और गेमिंग का मजा तो लिया ही जा सकता है, साथ ही यह पढ़ाई, ड्रॉइंग और ऑफिस के काम के लिए भी काफी उपयोगी हो सकता है।

कॉम्पैक का यह टैब Android 15 पर रन करता है, जो 5GHz Wi-Fi, Bluetooth 5.0, GPS और USB-C सपोर्ट के साथ आता है। इस टैब को कंपनी ने 11,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च किया है, जो 500 घंटे तक स्टेंडबाय टाइम का बैकअप ऑफर करता है। यह टैब 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

इसके अलावा, इस टैब में स्टायलस पेन और प्रोटेक्टिव केस भी मिलेगा। साथ ही इसमें एक्सटर्नल कीबोर्ड का भी सपोर्ट दिया गया है। यह टैब 12GB RAM और 512 GB की इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। टैब में microSD कार्ड का स्लॉट भी दिया गया है, जो 2TB तक स्टोरेज सपोर्ट करता है।

Compaq QTab Ultra की कीमत

कीमत की बात करें तो, Compaq QTab Ultra 12.6 को फिलहाल मैक्सिको में MXN 8,499 (करीब 48,000 रुपये) की कीमत पर लॉन्च किया गया है। कंपनी टैबलेट के साथ प्रोटेक्टिव केस, स्टायलस, पावर अडैप्टर और चार्जिंग केबल भी दे रही है। हालांकि, अभी Compaq ने दूसरे देशों के बाजार में इस टैबलेट की लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

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प्रदेश में पर्याप्त चीनी, आमजन परेशान न हों : CM योगी

प्रदेश में पर्याप्त चीनी, आमजन परेशान न हों : CM योगी

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसलिए आम नागरिक कतई परेशान न हों। प्रदेश की चीनी मिलों में वर्तमान में 179.38 लाख क्विंटल चीनी का भंडार उपलब्ध है। चीनी मिलों ने दो महीने (जून-जुलाई) में 235 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री की है। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर चीनी मिलें 15 अक्टूबर से संचालित की जाएं।

15 अक्टूबर से संचालित की जाए चीनी मिलें 

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि सहकारी चीनी मिलों में 23.60 लाख क्विंटल, निगम की चीनी मिलों में 5.28 लाख क्विंटल और निजी चीनी मिलों में 150.50 लाख क्विंटल (कुल 179.38 लाख क्विंटल) चीनी प्रदेश में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त जून व जुलाई में चीनी मिलों ने 235 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री की है, इसमें से अधिकांश चीनी अभी भी खुले बाजार में उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर 15 अक्टूबर से चीनी मिलों को संचालित किया जाए।

भ्रम फैलाने व कालाबाजारी करने वालों पर करें कार्रवाई 

सीएम योगी ने आमजन से अपील की कि चीनी की कमी बताकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि चीनी की कालाबाजारी और भ्रम फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें। उन्होंने भारत सरकार के निर्देश के क्रम में कहा कि कोई भी डीलर 30 दिन से अधिक चीनी स्टॉक का भंडारण नहीं करेगा और वे एक समय में 400 टन से ज्यादा स्टॉक भी नहीं रख सकते। बल्क कंज्यूमर्स (10 मीट्रिक टन प्रतिमाह खपत) भी 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकते। चीनी मिलें भी अपने मासिक कोटे के अंतर्गत विक्रित चीनी को विक्रय की तिथि से 7 दिन से अधिक अवधि तक गोदाम में नहीं रोकेंगी। 

सीएम ने दिया निर्देश- भौतिक सत्यापन कराएं जिलाधिकारी

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद की समस्त पंजीकृत चीनी मिलों, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन कराते हुए उपलब्ध स्टॉक की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्राप्त करें। निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक धारित करने अथवा जमाखोरी पर कठोर कार्रवाई की जाए। जनपद में चीनी की उपलब्धता एवं मूल्य पर सतत निगरानी रखते हुए किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी अथवा मूल्यवृद्धि की स्थिति में तत्काल शासन को अवगत कराएं।

48 लाख किसानों को किया गया 32,554 करोड़ का भुगतान 

बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए 28.14 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल संभावित है। इससे 90 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना है। उत्तर प्रदेश में प्रतिमाह अनुमानित चीनी खपत लगभग 4 लाख टन है। पेराई सत्र 2025-26 में 48 लाख किसानों को 32,554 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया गया है।

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां देने जा रही हैं बोनस शेयर, डिविडेंड देने का भी प्लान

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां बोनस शेयर और डिविडेंड देने जा रही हैं। इनमें मोल्ड-टेक पैकेजिंग और मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। दोनों कंपनियों ने 21 अगस्त को इसका ऐलान किया। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। मोल्ड-टेक के शेयर कारोबार के अंत में शेयर 3.60 फीसदी चढ़कर बंद हुए। मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज के शेयर 1.21 फीसदी चढ़कर 191.35 रुपये पर बंद हुए।

FY26 के लिए होगा डिविडेंड का ऐलान 

Mold-Tek Packaging और Mold-Tech Technologies के बोर्ड की बैठक 26 अगस्त यानी बुधवार को होगी। इस मीटिंग में फाइनल डिविडेंड देने के बारे में भी फैसला होगा। यह डिविडेंड 31 मार्च, 2026 को खत्म फाइनेंशियल ईयर के लिए होगा। दोनों कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंजों को इस बारे में 21 अगस्त को बता दिया।

बोर्ड की बैठक में एजीएम की तारीख का फैसला

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का बोर्ड अगर बोनस इश्यू के प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग के बाद यह पहला बोनस इश्यू होगा। इससे पहले कंपनी ने फरवरी 2016 में अपने शेयरों को स्प्लिट किया था। दोनों कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों को अलग जानकारी में यह भी बताया है कि उनके बोर्ड की बैठक में एनुअल जनरल मीटिंग की तारीख और समय के बारे में भी फैसला होगा। इसके अलाव रिकॉर्ड डेट पर भी विचार होगा।

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का जून तिमाही में अच्छा प्रदर्शन

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का प्रदर्शन जून तिमाही में अच्छा रहा। ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 24.9 फीसदी बढ़कर 300.45 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 19.1 फीसदी बढ़कर 56.43 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का टैक्स से पहले प्रॉफिट 13.9 फीसदी बढ़कर 34.17 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 30.01 करोड़ रुपये था।

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का प्रॉफिट बढ़कर 10 करोड़ हुआ

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का प्रदर्शन भी जून तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान कंपनी की नेट सेल्स 45.52 फीसदी बढ़ी। नेट प्रॉफिट बढ़कर 10.03 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 0.59 करोड़ रुपये था। EBITDA 14.92 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2.34 करोड़ रुपये था।

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बीते छह महीने में दोनों शेयरों में अच्छी तेजी 

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का शेयर बीते 6 महीनों में 44 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान मोल्ड-टेक पैकेजिंग का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। 21 अगस्त को इन दोनों कंपनियों के शेयरों में तब अच्छी तेजी आई, जब शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।

तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, 1.28 लाख रिंग का वर्क ऑर्डर जारी

तमिलनाडु सरकार ने नवजात बच्चों के लिए शुरू की जाने वाली ‘मामा गोल्ड रिंग योजना’ के तहत करीब 1.28 लाख सोने की अंगूठियां बनवाने का ऑर्डर दिया है। इन अंगूठियों पर करीब 220 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार ने इसके लिए दो बड़ी ज्वेलरी रिटेल चेन को काम सौंपा है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

इस योजना के तहत चार महीने के दौरान एक लाख से ज्यादा नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी दी जाएगी। सरकार इस कल्याणकारी योजना की शुरुआत 15 सितंबर से करने जा रही है। इसी दिन द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता सीएन अन्नादुरई की जयंती भी है।

बता दें कि नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का यह वादा टीवीके (TVK) के चुनावी घोषणापत्र में शामिल था।

22 जून से अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ

इस स्कीम का फायदा उन नवजात बच्चों को मिलेगा जो 22 जून को सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का जन्मदिन भी है।

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, लगभग 128.5 किलोग्राम वजन वाली 1,28,499 अंगूठियों (22-कैरेट) की लागत 220 करोड़ रुपये होगी और तमिलनाडु सरकार ने कुल 4,41,667 अंगूठियों (एक साल के लिए) की सप्लाई के लिए 755.83 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

हालांकि, अंगूठियों के शुरुआती बैच की अंतिम लागत में बदलाव हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने मौजूदा बाजार दरों पर सोने का भुगतान करने का जिम्मा लिया है।

गोल्ड रिंग सप्लाई का जिम्मा दो कंपनियों को मिला

अंगूठियां बनाने और सप्लाई करने में जॉयअलुक्कास (Joyalukkas) को 70 फीसदी और कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers) को 30 फीसदी हिस्सा मिला है। इसके तहत जॉयअलुक्कास करीब 89,949 अंगूठियां, जबकि कल्याण ज्वेलर्स 38,550 अंगूठियां तैयार करेगा।

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में आज की बाजार दर के हिसाब से, इस स्कीम के तहत एक सोने की अंगूठी की लागत सरकार को लगभग 14,850 रुपये प्रति ग्राम पड़ेगी।

सरकार ने शुक्रवार देर रात बताया कि तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (TNMSC) ने जून से सितंबर तक लाभार्थियों के लिए जरूरी 1,28,499 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के लिए जोयालुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में वर्क ऑर्डर जारी किए हैं।

सीएम विजय ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का किया था ऐलान

बता दें कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का ऐलान किया था, जिसका लाभ सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा। इस योजना का मकसद सरकारी अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देना है।

सरकार की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, “एक-एक ग्राम वजन वाली 4,41,667 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के सरकारी आदेश के बाद, 11 कंपनियों ने 14 जुलाई को तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के टेंडर में हिस्सा लिया और TN टेंडर्स पोर्टल के जरिए अपनी कीमत की जानकारी जमा की।”

जॉयअलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर सिर्फ 0.01 रुपये की सबसे कम बोली लगाई। इसमें प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्टेशन और BIS हॉलमार्किंग जैसे सभी अतिरिक्त खर्च शामिल थे।

सरकार ने बताया कि जब संबंधित कानूनों के तहत 10 अन्य बोलीदाताओं को जीतने वाली कीमत के बारे में बताया गया, तो कल्याण ज्वैलर्स ने भी उसी कीमत की बोली लगाई।

सरकार ने कहा, “थाईमामन गोल्ड रिंग स्कीम को तमिलनाडु सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा बढ़ाने, सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चे के जन्म को यादगार बनाने और मातृत्व की खुशी व महत्व का जश्न मनाने के लिए लागू किया जा रहा है।”

1 पैसे की बोली पर विधानसभा में हंगामा

इस हफ्ते विधानसभा में इस स्कीम के टेंडर को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्षी पार्टियों DMK और AIADMK ने खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और “टेंडर के बहुत ही अजीब नतीजे” के बारे में पूछा, क्योंकि सफल बोली लगाने वाले ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹0.01 (एक पैसा) की बोली लगाई थी।

विपक्षी पार्टियों के अनुसार, दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹410.97 से लेकर ₹15,000 से ज्यादा तक की बोली लगाई थी।

जॉयलुक्कास ने एक बयान में कहा: “इस टेंडर की कीमत लगभग 755 करोड़ रुपये है, जिसमें सोने की कीमत कुल खरीद मूल्य का मुख्य हिस्सा है।” कंपनी ने कहा कि उसने “मौजूदा सोने की कीमत से सिर्फ 1 पैसा ज्यादा का सांकेतिक सर्विस चार्ज” कोट किया था।

वहीं, विपक्ष ने सवाल उठाया कि यह खरीद तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के जरिए क्यों की गई और तर्क दिया कि TNMSC को सिर्फ दवाइयां, मेडिकल उपकरण खरीदने और हेल्थकेयर बिल्डिंग बनाने के लिए बनाया गया था।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह योजना राज्य की हेल्थकेयर सेवाओं में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है।

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Awarapan 2 Budget vs Collection: 45 करोड़ के बजट में बनी ‘आवारापन 2’, इमरान हाशमी की फिल्म ने 3 गुना कमाया मुनाफा

Awarapan 2 Budget vs Collection: ‘आवारापन 2’ ठीक वही कर रही है, जिसकी उम्मीद इसके मेकर्स ने की थी – यानी लोगों को सिनेमाघरों तक वापस लाना। जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इमरान हाशमी के लीड रोल वाली इस सीक्वल फिल्म ने शुरुआती दो दिनों में ही 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था, जबकि प्रोड्यूसर विशेष भट्ट का कहना है कि टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

कितना है फिल्म का बजट

जानकारी के मुताबिक फिल्म का बजट 30 से 45 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। हालांकि ये आंकड़े ऑफिशियल नहीं हैं। फिल्म प्रोड्यूसर विशेष भट्ट ने बताया थी कि उनकी फिल्म पर कोई भरोसा नहीं कर रहा था। हर किसी को फिल्म के फ्लॉप हो जाने का डर सता रहा था। टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

फिल्म ने कितनी कमाई की

2007 की फिल्म ‘आवारापन’ बेशक बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, लेकिन इसका म्यूजिक और कहानी आज भी लोगों के जुबान पर चढ़े हैं। इसी का फायदा ‘आवारापन 2’ को पूरी तरह से मिला है। सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘आवारापन 2’ ने 21.50 करोड़ के नेट कलेक्शन के साथ ओपनिंग की थी। भारत में ग्रॉस कलेक्शन 25.80 करोड़ रुपये रहा था। जबकि वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 27.80 करोड़ से ओपनिंग की थी।

वहीं 8वें दिन फिल्म ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है। फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।

पहले दिन का कलेक्शन-22 करोड़

दूसरे दिन का कलेक्शन-33.75 करोड़

तीसरे दिन का कलेक्शन-26 करोड़

चौथे दिन का कलेक्शन-9.25 करोड़

पांचवें दिन का कलेक्शन-9.75 करोड़

छठवें दिन का कलेक्शन-6.75 करोड़

सातवें दिन का कलेक्शन-6 करोड़

आठवें दिन का कलेक्शन-5.75 करोड़

India Net (Sacnilk): 119.00 crore

India Gross (Sacnilk): 142.21 cr

Worldwide Gross: 169.17 crore

कितना कमाया मुनाफा

‘आवारापन 2’ ने 45 करोड़ के बजट के मुकाबले 74 करोड़ से 78.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट (164% से 175% रिटर्न) कमाया है, जो अपने एक बड़ा आंकड़ा है। फिल्म साल की तीसरी बिग ओपनर बनकर उभरी है। इससे पहले यशराज की ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाया था।

यह फ़िल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ से टक्कर के बावजूद अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रही। लेकिन रिलीज़ से पहले कहानी कुछ और ही थी। ‘ज़ूम’ के साथ एक इंटरव्यू में, विशेष भट्ट – जिन्होंने बिलाल सिद्दीकी के साथ मिलकर इस फ़िल्म की कहानी भी लिखी है – ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर इस फ़िल्म को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उनके मुताबिक, दिलचस्पी न दिखाने की वजह से ही उन्हें नहीं लगता कि ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ जल्दी पैसे कमाने के मकसद से बनाई गई फ़िल्म है।

उन्होंने कहा, “अगर आप ‘आवारापन’ जैसी फ़िल्में देखना चाहते हैं, तो आपको सिनेमाघरों में जाकर उन्हें सपोर्ट करना होगा। वरना मुझे कैसे पता चलेगा कि आपको इसमें दिलचस्पी है? अगर मुझे पता होगा, तो मैं भी अपनी मेहनत की कमाई लगाकर फ़िल्म बनाऊंगा ताकि पैसे कमा सकूं। मैं आपको बता दूं, ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए बनाई गई फ़िल्म नहीं है।”

इस म्यूचुअल फंड ने ₹1 लाख के निवेश को ₹46 लाख बना दिया, जानिए इस स्कीम के बारे में

म्यूचुअल फंड में निवेश से जोरदार रिटर्न में फंड सेलेक्शन का बड़ा हाथ है। अगर निवेश के लिए सही फंड का चुनाव हो जाए तो फिर पैसे बढ़ना तय है। आईसीआईसीआई एएमसी के फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस फंड का नाम आईसीआआईसीआई वैल्यू प्रूडेंशियल फंड है। इस फंड ने सिर्फ 1 लाख रुपये के निवेश को 22 साल में 46.6 लाख रुपये बना दिया है।

इस फंड ने एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को किया मालामाल

ICICI Prudential Asset Management Company ने अपने इस फंड के बारे में बताया है। ICICI Prudential Value Fund की शुरुआत 22 साल पहले हुई थी। इस फंड ने शुरुआत में पैसे लगाने वाले एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को मालामाल किया है। इसका कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 19.11 फीसदी है। इसने Nifty Total Return Index (TRI) के मुकाबले काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। इस अवधि में निफ्टी 50 टीआरआई का सीएजीआर 14.63 फीसदी है।

वैल्यू इनवेस्टिंग की स्ट्रेटेजी का करता है इस्तेमाल 

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू फंड की शुरुआत 16 अगस्त, 2004 को हुई थी। इस फंड ने हाल ही में 22 साल पूरे किए हैं। यह फंड वैल्यू ओरिएंटेड इक्विटी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। इस फंड का फोकस उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर होता है, जिनमें उनके इंटिनसिक वैल्यू से कम पर ट्रेडिंग हो रही होती है। ऐसी कंपनी छोटी या बड़ी हो सकती है।

तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी अच्छा रिटर्न 

इस फंड का रिटर्न तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी बहुत अच्छा है। यह क्रमश: 13.44 फीसदी और 16.05 फीसदी है। अगर किसी निवेशक ने इस फंड की शुरुआत के समय इसमें हर महीने 10,000 रुपये का सिप शुरू किया होता तो उसका पैसा बढ़कर 2.37 करोड़ रुपये हो गया होता। यह 17.04 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न है। 31 जुलाई को इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 61,102.29 करोड़ रुपये था।

93 फीसदी पैसे का निवेश शेयरों में, फाइनेंशियल कंपनियों में ज्यादा निवेश 

इस फंड ने अपना 93.31 पैसा शेयरों में निवेश किया है। सबसे ज्यादा 38.10 फीसदी निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। इसके बाद 9.08 फीसदी का निवेश हेल्थकेयर सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। उसके बाद 9 फीसदी का निवेश एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में है। इस फंड ने 2022 में अपने बेंचमार्क को निफ्टी 500 वैल्यू 50 टीआरआई से बदलकर निफ्टी 500 टीआरआई कर दिया था।

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निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें

अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देख भविष्य में उसके रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। निवेशक को रिस्क लेने की अपनी क्षमता, निवेश की अवधि और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रख निवेश का फैसला करना चाहिए।

Lumino Industries IPO: ₹700 करोड़ का एक और इश्यू, 27 अगस्त को ओपनिंग; ग्रे मार्केट में अभी से 56% चढ़ा शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹700 करोड़ का एक और IPO खुलने जा रहा है। कंपनी है- ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज। IPO की ओपनिंग 27 अगस्त को होगी। इसमें करीब ₹500 करोड़ के 6.10 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही लगभग ₹200 करोड़ के 2.44 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर देवेंद्र गोयल और जय गोयल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। इश्यू में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹78-₹82 प्रति शेयर है। लॉट साइज 182 शेयर है। IPO 31 अगस्त को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 1 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 3 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। एंकर निवेशक 25 अगस्त को बोली लगा सकेंगे।

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है। इसका फोकस पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए कंडक्टर, पावर केबल, इलेक्ट्रिकल वायर और खास तरह के प्रोडक्ट बनाने और उनकी सप्लाई करने पर है। कंपनी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-टेंपरेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर भी बनाती है।

इसके मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में एल्युमीनियम कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं। वहीं EPC बिजनेस में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशनए HTLS री-कंडक्टरिंग, EHV सबस्टेशन, सोलर पावर प्रोजेक्ट और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल हैं। ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज अपने प्रोडक्ट भारत की बड़ी EPC कंपनियों को सप्लाई करती है और इंटरनेशनल ग्राहकों को भी सेवाएं देती है।

IPO में कितना हिस्सा ​किसके लिए रिजर्व

इस IPO के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, JM फाइनेंशियल और मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल लिमिटेड, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है। IPO में 10 करोड़ रुपये के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी बचे इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Lumino Industries कैसे इस्तेमाल करेगी IPO के पैसे

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों में से एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। इसके अलावा मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए उपकरणों और मशीनरी की खरीद, सिविल वर्क और इंटीरियर डेवलप करने के लिए भी इन पैसों का इस्तेमाल होगा। बाकी बचे पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए रहेंगे।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,089.31 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹1,946.68 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹124.59 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹384.16 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर अभी से 56.10 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bank Holidays: अगले हफ्ते 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जरूरी काम सोमवार को जरूर निपटा लें

अगले हफ्ते अगर आपको बैंक का कोई काम है तो उसे सोमवार यानी 24 अगस्त को निपटा लेना ठीक रहेगा। 25 अगस्त से 30 अगस्त के बीच सरकारी और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं अवकाश के कारण बंद रहेंगी। हालांकि, बैंकों के एटीएम खुले रहेंगे। नेट बैंकिंग सुविधाएं भी जारी रहेंगी। इससे ग्राहक जरूरी काम ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे।

हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में छुट्टी

बैंकों में हर रविवार को छुट्टी रहती है। इसके अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं। बैंकों को छुट्टी के मामले में आरबीआई के नियमों का पालन करना पड़ता है। ये नियम सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की शाखाओं पर एक समान तरह से लागू होते हैं।

आज चौथा शनिवार की वजह से बैंक की शाखाएं बंद हैं

आज चौथा शनिवार है, जिससे बैंकों की शाखाएं बंद हैं। कल यानी 23 अगस्त को रविवार है, जिससे बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। 24 अगस्त को बैंक खुलेंगे। सोमवार को आम तौर पर बैंक की शाखाओं में कामकाज का दबाव ज्यादा होता है। खासकर उस हफ्ते में ज्यादा दबाव देखने को मिलता है, जिस हफ्ते में बैंकों में शनिवार और रविवार की छुट्टी होती है।

25 अगस्त को कई राज्यों और इलाकों में बैंक बंद रहेंगे

अगले हफ्ते मंगलवार यानी 25 अगस्त को कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में मिलाद-उन-नबी, फर्स्ट ओणम और मिलाद-ए-शरीफ के मौके पर बैंकों में छुट्टी रहेगी। हालांकि, दूसरे जगहों पर बैंक की शाखाएं खुली रहेंगी। 26 अगस्त को ज्यादातर इलाकों में बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। इनमें बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, नागपुर, मुंबई, दिल्ली, रांची, रायपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। उस दिन ईद-ए-मिलाद, बरावफात, मिलाद-उन-नबी के मौके पर छुट्टी रहेगी।

28 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर कई राज्यों में छुट्टी

28 अगस्त को भी रक्षा बंधन और कुछ क्षेत्रीय त्योहारों के चलते कई इलाकों में बंद रहेंगे। इनमें अहमदाबाद, भोपाल, जयपुर, कानपुर, कोच्चि जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रक्षा बंधन का त्योहार उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार शुक्रवार यानी 28 अगस्त को मनाया जा रहा है।

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29 अगस्त को शनिवार के दिन भी बैंकों में कामकाज होगा

29 अगस्त को शनिवार है। लेकिन, बैंकों की शाखाएं उस दिन खुली रहेंगी। इसकी वजह यह है कि उस दिन इस महीने का पांचवां शनिवार होगा। बैंकों की शाखाएं सिर्फ महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहती हैं। हालांकि, 30 अगस्त को रविवार की वजजह से बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। रविवार को हर राज्य में बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं। उस दिन कोई काम नहीं होता है।