रांका, सौरव को नहीं मिली जमानत

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की विजयादशमी तिहाड़ जेल में ही मनेगी। दोनों को सोमवार को जमानत नहीं मिली। सौरव और रांका को सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, एसईएम के सामने पेश किया गया। वहां पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। पुलिस की मांग पर मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया। अब उन्हें बुधवार को फिर पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। एसईएम कोर्ट ने उन्हें 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा था। दोनों को रविवार, 18 अक्टूबर को अदालत में पेश किया जाना था। लेकिन उससे पहले मजिस्ट्रेट ने कहा कि इन दोनों की रिहाई के लिए उनको धमकी भरे मैसेज मिल रहे हैं। सोमवार को भी सुनवाई में ज्यादा समय धमकी भरे मैसेज पर ही चर्चा हुई।

कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में जान बूझकर देरी की जा रही है। सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा, ‘रविवार को जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचे’। उनका आरोप है कि दोनों नेताओं की रिहाई पर सुनवाई करने की बजाय मजिस्ट्रेट को मिले धमकी भरे संदेश पर चर्चा की गई।

रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि इस तरह के मैसेज का दोनों नेताओं की जमानत से क्या संबंध है? उन्होंने कहा कि सीजेपी ने मैसेज भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सीजेपी का यह भी आरोप है कि दोनों नेताओं के जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच में देरी की गई। उनके मुताबिक, चार जमानतदारों को साफ वजह बताए बिना खारिज कर दिया गया। जमानत के लिए बैंक की मुहर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद को दोबारा मंजूरी के लिए पेश करने पर भी पार्टी ने सवाल उठाए। उधर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए जमानत की प्रक्रिया में देरी की जा रही है। पार्टी ने कहा कि वह दोनों की रिहाई के लिए आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ेगी।

CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने दो दिन बढ़ाई न्यायिक हिरासत

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। फिलहाल दोनों नेता फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। इससे पहले 14 अक्टूबर को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) में पेश किया गया था। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और जंतर-मंतर में बिना अनुमति प्रवेश करने का आरोप है। जंतर-मंतर को पहले ही विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था।

दो दिन तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कानूनी टीम ने जमानत से जुड़े दस्तावेज जमा करने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करने की मांग की। इससे पहले, जमानतदार नहीं मिलने के कारण दोनों नेताओं को जेल भेज दिया गया था। सोमवार को पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया।

13 अक्टूबर को लिया था हिरासत में

सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार सुबह 13 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों ने बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर बिना अनुमति किसी जगह में घुसने, प्रतिबंधों का उल्लंघन करने, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और एक सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं।

साइन किया था बॉन्ड

सूत्रों के अनुसार, शनिवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था। ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन संगठनों ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

कॉजपा नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ायी गयी

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और दोनों को और दो दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम कॉजपा के उन आरोपों के बीच हुआ, जिनमें कहा गया है कि इस मामले में जमानत की कार्यवाही जानबूझकर विलंबित की जा रही है, ताकि इसके दो सह-संयोजकों की रिहायी रोकी जा सके। इससे पहले दोनों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लगाई गई पाबंदियों का उल्लंघन करने के बाद 13 अक्टूबर को शुरुआती तौर पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

दोनों को कथित तौर पर ताला लगे गेट को फांदकर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर-मंतर को इससे पहले निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।

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अन्य कॉजपा कार्यकर्ताओं के साथ दास और राकां ने उस दिन घटनास्थल पर राष्ट्र ध्वज प्रदर्शित किया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

दोनों को बाद में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था और मजिस्ट्रेट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दो और दिनों के लिए जेल भेज दिया। उन्होंने बताया कि दास और रांका को अब बुधवार को पेश किया जाएगा।

रविवार को, दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अज्ञात लोगों द्वारा धमकी दिए जाने का दावा किया, जिसके बाद पुलिस ने एक गैर-संज्ञेय मामला दर्ज किया।

कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, था सरकार जानबूझकर आशु (आशुतोष) और सौरव की अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींच रही है। वह अदालती कार्यवाही विलंबित करने और उनकी रिहाई को रोकने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है।

कॉजपा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नेताओं की रिहाई के लिए दी गई जमानतदारों की गारंटी को ‘अस्पष्ट’ आधारों पर खारिज कर दिया गया।

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इजराइल से ऑस्ट्रिया जा रही फ्लाइट को बम की धमकी:फाइटर जेट की निगरानी में इमरजेंसी लैंडिंग; 6 क्रू मेंबर समेत 57 लोग सवार थे

इजराइल से ऑस्ट्रिया जा रही ऑस्ट्रियन एयरलाइंस की फ्लाइट को बम की धमकी के बाद बुल्गारिया में उतारा गया। एयरबस A320 रविवार रात तेल अवीव से वियना जा रहा था। खतरे की सूचना के बाद बुल्गारिया की वायुसेना ने विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए MiG-29 लड़ाकू विमान भेजा। विमान में 51 यात्री और छह क्रू सदस्य सवार थे। सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। फ्लाइट तीन घंटे बाद बुल्गारिया में लैंड हुई फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस की फ्लाइट रविवार शाम 6:46 बजे तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट से रवाना हुई थी। विमान जब रोमानिया के ऊपर था तब इसे बुल्गारिया की राजधानी सोफिया की ओर मोड़ा गया। करीब तीन घंटे बाद 9:10 बजे यह सोफिया के वासिल लेव्स्की एयरपोर्ट पर उतरा। बुल्गारिया के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, अलर्ट मिलने के करीब 30 मिनट बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू हुई। बुल्गारिया और इजराइली मीडिया ने बताया कि विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ऑस्ट्रियन एयरलाइंस ने भी खतरे की पुष्टि की है, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी। 6 दिन पहले भी इजराइल जा रही फ्लाइट को बम की धमकी मिली थी अमेरिका के न्यूयॉर्क से तेल अवीव पहुंची डेल्टा एयरलाइंस की फ्लाइट को भी 13 अक्टूबर को बम की धमकी मिली। विमान खाली कराकर तलाशी ली गई, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। इससे एक दिन पहले इंडोनेशियाई पायलट के कारण इजराइल ने इथियोपियन एयरलाइंस के कार्गो विमान को उतरने की मंजूरी नहीं दी थी। पायलट बदलने के बाद विमान को अनुमति मिली। दरअसल सितंबर में फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हादसे के बाद इजराइल ने सुरक्षा नियम सख्त कर 11 देशों के पायलटों और क्रू पर रोक लगा दी है। इनमें अफगानिस्तान, अल्जीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, नाइजर, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया और वेनेजुएला शामिल हैं। इन देशों के इजराइल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। पिछले महीने फ्लाईदुबई की फ्लाइट हाईजैक हुई थी 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के पायलट ने विमान को हाईजैक कर लिया था। उसने दूसरे पायलट पर चाकू से हमला कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर विमान को इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर गिराने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, कई यात्रियों ने बीच में आकर उसे रोक दिया और फाइटर जैट्स की निगरानी में विमान की सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग कराई गई। फ्लाइदुबई की फ्लाइट का रूट देखें… इजराइली न्यूज चैनल 12 के मुताबिक, फ्लाईदुबई पर हमले के अगले दिन इजराइल के परिवहन मंत्रालय ने एयरलाइंस को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि दुश्मन देशों के नागरिकों को इजराइल जाने वाली उड़ानों में पायलट, क्रू मेंबर या यात्री के तौर पर सफर करने की अनुमति न दी जाए। ——————- यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में सैन्य अड्डे पर धमाका, 4 सैनिकों की मौत:रक्षा मंत्री बोले- ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा; यहां 1300 कर्मचारी तैनात थे कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में सैन्य अड्डे पर शनिवार को जोरदार धमाके के बाद आग लग गई। हादसे में 4 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रविवार को इसकी पुष्टि की। पूरी खबर पढ़ें…

बेल बॉन्ड भर कर छूटे दीपके

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को जमानत मिल गई। उनको शुक्रवार की शाम को राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में बिना अनुमति तिरंगा मार्च निकालने के प्रयास में हिरासत में लिया गया था। शनिवार को उनको सब डिवीजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने उनको जमानत दे दी। जमानत की शर्तों के मुताबिक उनको 50 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भी भरना पड़ा। उसके बाद वे रिहा हुए।

पिछले आठ दिन में दीपके के खिलाफ यह दूसरी बार कार्रवाई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था। अगले दिन वे बॉन्ड भर कर रिहा हो गए थे। उस समय उनके साथ हिरासत में लिए गए पार्टी के दो अन्य नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को भी छोड़ दिया गया था। लेकिन 13 अक्टूबर को दोनों को फिर गिरफ्तार किया गया और उसके बाद से वे तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके ऊपर बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है।

बहरहाल, शनिवार को अभिजीत दीपके को लेकर सुबह में कई घंटे तक ड्रामा चलता रहा। सीजेपी की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने दावा किया कि पुलिस दीपके की लोकेशन नहीं बता रही है। हालांकि बाद में वे दीपके के वकील पुष्प शर्मा के साथ मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। वहां एसईएम कोर्ट में दीपके को पेश किया गया। इससे पहले शुक्रवार को दीपके के साथ ही हिरासत में ली गईं छात्र नेता नेहा बोरा को पुलिस ने देर रात रिहा कर दिया था। बहरहाल, शनिवार को किसी भी संगठन की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन का आयोजन नहीं किया गया था। फिर भी कई हिस्से में छोटी छोटी रैलियां हुईं और सेंट्रल दिल्ली में कई जगह पहले से की गई बैरिकेडिंग लगी रही।

अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
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अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को मिली जमानत

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार शाम विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कुछ शर्तों पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

उन्हें यहां कनॉट प्लेस में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के आह्वान के दौरान शुक्रवार को निवारक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस मार्च से पहले हिरासत में लिए गए श्री दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। श्री दिपके के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया।

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पुलिस के अनुसार सुश्री बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद रिहा किया गया। इससे पहले शुक्रवार को सीजेपी ने दावा किया था कि श्री दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। संगठन के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने शुक्रवार देर रात कहा था कि उन्हें हिरासत में लिए जाने के आठ घंटे से अधिक समय बाद भी उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी गई और उन्हें वकील या पार्टी टीम से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। सर्वश्री दास, रांका और 12 अन्य लोगों को मंगलवार (13 अक्टूबर) की सुबह जंतर-मंतर के बंद द्वार पर चढ़कर परिसर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर मंतर को हाल ही में विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थल सूची से बाहर कर दिया गया था। बाद में सीजेपी के अजिंक्य शिंदे और 11 अन्य लोगों को रिहा कर दिया गया था।

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ट्रम्प ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी को हटाया:वकील होने के दावे पर सवाल उठे, पहली ब्रीफिंग में जुबान लड़खड़ाईं थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…