पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। यह करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। इन बैलिस्टिक मिसाइलों का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन बुधवार सुबह थाईलैंड पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट पर पिछले 9 महीनों से 5 हजार सैनिक तैनात हैं। लंबे सैन्य अभियान के बाद अब उन्हें पटाया में करीब 5 दिन की छुट्टी मिलेगी।
USS अब्राहम लिंकन के साथ अमेरिकी नौसेना के दो और जहाज भी पहुंचे हैं। लाम चाबांग पोर्ट पर उतरने के बाद सैनिकों को बसों से करीब 96 किमी दूर पटाया ले जाया जाएगा। हालांकि पटाया पहुंचने से पहले ही थाई पुलिस ने शहर में देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, पुलिस ने पिछले वीकेंड में छापेमारी कर 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया। शहर के समुद्र तट और नाइटलाइफ वाले इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस पटाया में अमेरिकी नौसेना के बड़ी संख्या में जवानों और मरीन के आने से पहले पुलिस ने शहर में छापेमारी और जांच बढ़ा दी है। बार, समुद्र तट और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर पुलिस खास नजर रख रही है। इसी दौरान पब्लिक प्लेस पर ग्राहकों की तलाश करने के आरोप में कम से कम 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। इनमें थाईलैंड के साथ लाओस और युगांडा की महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग कार्रवाइयों में 40 से 50 लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अमेरिकी जवानों के आने से पहले शहर में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अमेरिकी नौसैनिकों को भी ड्रग्स और गांजा बेचने वाली दुकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्हें नाइटलाइफ वाली जगहों पर जाने से नहीं रोका गया है, लेकिन देर रात तक बार और मनोरंजन की जगहों पर रुकने से बचने को कहा गया है। कारोबारियों को बड़ी कमाई की उम्मीद अमेरिकी नौसैनिकों के पटाया पहुंचने से शहर के कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। करीब 5 हजार अमेरिकी जवानों के आने से होटल, रेस्तरां, बार, शॉपिंग और दूसरे पर्यटन कारोबारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर नाइटलाइफ़ और मनोरंजन से जुड़े कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ऐसे समय में बड़ा मौका है, जब पर्यटन कारोबार में पहले जैसी तेजी नहीं है। हजारों अमेरिकी जवान कुछ दिनों के लिए शहर में रहेंगे और इस दौरान खाने-पीने, होटल में ठहरने, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर पैसा खर्च करेंगे। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटल और रेस्तरां तक कई तरह के कारोबारों को फायदा मिल सकता है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक अमेरिकी नौसैनिक रोजाना करीब 1,000 (₹2800) से 3,000 (₹8500) थाई बाहत तक खर्च कर सकता है। इस हिसाब से अगर करीब 5 हजार नौसैनिक शहर में आते हैं तो उनके खर्च से स्थानीय कारोबार में करोड़ों थाई बाहत का पैसा आ सकता है। पटाया और अमेरिकी सेना का पुराना कनेक्शन पटाया शहर का अमेरिकी सेना से रिश्ता 1960 और 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के समय से है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक छुट्टियां मनाने और आराम करने के लिए यहां आते थे। इससे स्थानीय होटल, बार, रेस्तरां और दूसरे कारोबार तेजी से बढ़े। धीरे-धीरे यह छोटा मछुआरा गांव दुनिया भर के पर्यटकों के बीच मशहूर शहर बन गया। यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड क्यों आया? यूएसएस अब्राहम लिंकन हाल ही में वेस्ट एशिया में लंबी तैनाती पूरी करके लौटा है। यह अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जिसने नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताया। इस दौरान यह ईरान से जुड़े तनाव के बीच वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक सेहत और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं। अब थाईलैंड में पांच दिन के इस पड़ाव के दौरान जहाज को जरूरी सप्लाई दी जाएगी, रखरखाव का काम होगा और हजारों नौसैनिकों को लंबे समय बाद आराम का मौका मिलेगा।
नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।
नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
जहां 15 साल की उम्र में ज्यादातर किशोर पढ़ाई, दोस्त व सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमेरिका के वरमोंट का छात्र डीन रॉय अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। डीन अभी न वोट दे सकते हैं, न अकेले कार चला सकते हैं, पर नवंबर में होने वाले चुनाव में उनका नाम वरमोंट के गवर्नर पद के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में बैलेट पेपर पर होगा। इतनी कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरकर उन्होंने सभी का ध्यान खींच लिया है। डीन रॉय ने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों की पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर अपनी एक नई पार्टी बनाई है… ‘फ्रीडम एंड यूनिटी पार्टी’। वे मानते हैं कि बुजुर्ग राजनेताओं ने युवा पीढ़ी की बुनियादी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। डीन का कहना है, ‘हमारा मकसद चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि ऐसा असर छोड़ना है कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं को युवाओं की आवाज सुनने के लिए मजबूर होना पड़े।’ न्यू हैंपशायर यूनिवर्सिटी के सर्वे में डीन को 3% समर्थन मिलता दिखा है, जो 15 वर्षीय निर्दलीय हाई स्कूल छात्र के लिए चौंकाने वाला आंकड़ा है। डीन पढ़ाई के साथ पैरेंट्स के पिज्जा रेस्त्रां में भी मदद करते हैं। सोशल मीडिया पर वे बेबाक और संतुलित विचारों के कारण तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। किसी एक विचारधारा से बंधने के बजाय वे मुद्दों के आधार पर राय रखते हैं। अरबपतियों की संपत्ति पर सीमा लगाने की बात करने वाले डीन बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सरकारी रोक के भी विरोधी हैं। डीन मानते हैं कि लोकप्रिय गवर्नर फिल स्कॉट को हराना मुश्किल है, पर उनकी उम्मीदवारी युवाओं की राजनीतिक भागीदारी व नई सोच का संकेत है। चुनाव के बाद कॉलेज जाएं या सक्रिय राजनीति में उतरें, इसका फैसला करने के लिए उनके पास अभी पर्याप्त समय है। चुनौती की तरह लिया शिक्षक का मजाक वरमोंट राज्य के संविधान में गवर्नर बनने के लिए न्यूनतम आयु की कोई बाध्यता नहीं है। 8वीं कक्षा में राज्य विधानसभा में इंटर्नशिप के दौरान जब एक शिक्षक ने मजाक में उनसे चुनाव लड़ने को कहा, तो डीन ने इसे चुनौती की तरह लिया। उन्होंने नियमों की पड़ताल की और मां चेसी के साथ पोस्ट ऑफिस के बाहर खड़े होकर लोगों से बात की। चुनाव लड़ने के लिए जरूरी 500 वोटर्स के साइन जुटाए।
पाकिस्तान के 79 साल के इतिहास में सिख समुदाय से पहले टेलीविजन एंकर और पत्रकार के तौर पर पहचान बनाने वाले हरमीत सिंह के डिजिटल स्टूडियो पर इस्लामाबाद पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमीत सिंह ने वीडियो जारी कर बताया, करीब दो दिन पहले पुलिस ने उनके स्टूडियो में रेड कर वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। पुलिस वाले सामान चुराकर ले गए। हरमीत सिंह ने पाकिस्तान सरकार, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा- टीवी से बैन और नौकरी जाने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से डिजिटल स्टूडियो खड़ा किया था, लेकिन अब पत्रकारिता जारी रखने के लिए उनके पास न नौकरी बची है और न जरूरी संसाधन। हालांकि हरमीत सिंह के आरोपों के बाद पुलिस का कोई बयान सामने नहीं आया। हरमीत सिंह सिख परिवार से हैं और 1947 को बंटवारे के समय हरमीत सिंह का परिवार पाकिस्तान में रह गया। इनके कई रिश्तेदार भारतीय पंजाब में रहते हैं। मौजूदा समय में वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चाकेसर (शांगला) शहर के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस की ओर से की गई बर्बरता को बताते हुए हरमीत सिंह ने क्या कहा, जानिए… टीवी से बैन के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया…6 बड़ी बातें… 1. टीवी स्क्रीन से बैन और नौकरी गई
31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो
टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया
हरमीत सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके दफ्तर पर 30 अगस्त को रेड की और वहां रखा सामान अपने साथ चुराकर ले गई। इसमें 5 कंप्यूटर सिस्टम, कैमरे, पॉडकास्ट माइक, स्टैंड, प्रॉम्प्टर और बैटरियां शामिल थीं। उनका आरोप है कि स्टूडियो में काम करने वाले मुल्तान निवासी सैफ और सहयोगी रजी ताहिर को हिरासत में लिया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व प्रताड़ना की गई। 4. हरमीत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी
हरमीत ने बताया कि उनकी सिख बिरादरी और परिवार के लोग उन्हें कोई दूसरा कारोबार करने या देश छोड़ने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता के कारण उनकी जान को खतरा है और परिवार की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा पाकिस्तान में रहकर काम करना पसंद किया। 6. मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील
हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2
ईरानी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि दक्षिणी ईरान में सोमवार को कई जगह धमाकों की खबर है। इनमें रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, चाबहार और केश्म द्वीप शामिल हैं। धमाकों को लेकर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर IRGC के हालिया हमलों की कोशिशों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद किए गए हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ट्रम्प बोइंग विमान खरीदने पर क्यों जोर देते हैं अमेरिका में बड़े यात्री विमान बनाने वाली मुख्य कंपनी बोइंग ही है। वहां दूसरी विमान कंपनियां भी हैं, लेकिन वे ज्यादातर सैन्य या छोटे विमानों के कारोबार में हैं। बड़े यात्री विमानों के मामले में बोइंग ही अमेरिका की बड़ी कंपनी है और उसका सबसे बड़ा मुकाबला यूरोप की एयरबस से है। ट्रम्प की व्यापार नीति का सबसे बड़ा मकसद ही यही है कि दूसरे देश अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदें। इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम हो सकता है और अमेरिकी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। यहां बोइंग बहुत काम आती है, क्योंकि एक यात्री विमान की कीमत ही करोड़ों डॉलर होती है। अगर कोई देश 50, 100 या 200 विमान खरीदने का सौदा करता है तो अमेरिका से होने वाली खरीद का आंकड़ा एक झटके में अरबों डॉलर बढ़ जाता है। इसका फायदा सिर्फ बोइंग को नहीं मिलता। इनके निर्माण से वहां की फैक्ट्रियों, इंजीनियरों और दूसरे कामगारों को रोजगार मिलता है। उदाहरण के लिए, व्हाइट हाउस ने दक्षिण कोरिया की 103 बोइंग विमानों की डील को करीब 36.2 अरब डॉलर का बताया और कहा कि इससे अमेरिका में करीब 1.35 लाख नौकरियों को मदद मिलेगी। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

