अमेरिका के विस्कॉन्सिन में मंगलवार रात विमान हादसे में एक बच्चे समेत छह लोगों की मौत हो गई। हादसे से पहले पायलट ने पंखों पर बर्फ जमने की सूचना दी थी। छह सीटों वाला सिंगल-इंजन विमान केनोशा से मेनोमोनी जा रहा था। यह विमान रात करीब 10 बजे डेलोना टाउन में मिरर लेक स्टेट पार्क के पास जंगल में गिरा। हादसे के समय इलाके में बारिश हो रही थी और गरज-चमक वाला तूफान गुजर रहा था। विंग्स पर बर्फ जमना एविएशन (हवाई यात्रा) के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि बर्फ की एक पतली परत भी प्लेन को हवा में बनाए रखने में मुश्किल पैदा कर सकती है। पायलट ने 24,000 फीट ऊंचाई पर बर्फ जमने की जानकारी दी थी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के मुताबिक, पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को पंखों पर बर्फ जमने की जानकारी दी थी। उस समय पाइपर PA-46 विमान 24,000 फीट यानी 7,315 मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। पायलट ने विमान को नीचे लाने की अनुमति मांगी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान को नीचे आने की अनुमति दी। इसके बाद विमान दाईं ओर नीचे उतरने वाले मोड़ में गया। NTSB ने बताया कि यह मोड़ लगातार तेज होता गया। इसके बाद विमान से संपर्क और उसके डेटा की ट्रैकिंग बंद हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में जमीन पर मौजूद कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ। हादसे में कोई इमारत या अन्य ढांचा भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। विस्कॉन्सिन डेल्स में बड़ी संख्या में पर्यटक आते है हादसा विस्कॉन्सिन डेल्स से लगभग 10 मील (16 किलोमीटर) पश्चिम में हुआ था। यह शहर बड़ी संख्या में वॉटरपार्क्स होने की वजह से ‘दुनिया की वॉटरपार्क राजधानी’ कहलाता है। राज्य के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार, 2025 में इस इलाके में 50 लाख से ज़्यादा पर्यटक आए थे।
अमेरिका के विस्कॉन्सिन में मंगलवार रात विमान हादसे में एक बच्चे समेत छह लोगों की मौत हो गई। हादसे से पहले पायलट ने पंखों पर बर्फ जमने की सूचना दी थी। छह सीटों वाला सिंगल-इंजन विमान केनोशा से मेनोमोनी जा रहा था। यह विमान रात करीब 10 बजे डेलोना टाउन में मिरर लेक स्टेट पार्क के पास जंगल में गिरा। हादसे के समय इलाके में बारिश हो रही थी और गरज-चमक वाला तूफान गुजर रहा था। विंग्स पर बर्फ जमना एविएशन (हवाई यात्रा) के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि बर्फ की एक पतली परत भी प्लेन को हवा में बनाए रखने में मुश्किल पैदा कर सकती है। पायलट ने 24,000 फीट ऊंचाई पर बर्फ जमने की जानकारी दी थी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के मुताबिक, पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को पंखों पर बर्फ जमने की जानकारी दी थी। उस समय पाइपर PA-46 विमान 24,000 फीट यानी 7,315 मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। पायलट ने विमान को नीचे लाने की अनुमति मांगी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान को नीचे आने की अनुमति दी। इसके बाद विमान दाईं ओर नीचे उतरने वाले मोड़ में गया। NTSB ने बताया कि यह मोड़ लगातार तेज होता गया। इसके बाद विमान से संपर्क और उसके डेटा की ट्रैकिंग बंद हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में जमीन पर मौजूद कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ। हादसे में कोई इमारत या अन्य ढांचा भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। विस्कॉन्सिन डेल्स में बड़ी संख्या में पर्यटक आते है हादसा विस्कॉन्सिन डेल्स से लगभग 10 मील (16 किलोमीटर) पश्चिम में हुआ था। यह शहर बड़ी संख्या में वॉटरपार्क्स होने की वजह से ‘दुनिया की वॉटरपार्क राजधानी’ कहलाता है। राज्य के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार, 2025 में इस इलाके में 50 लाख से ज़्यादा पर्यटक आए थे।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।
जर्मनी के बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से 3 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल है। पुलिस ने हत्या के शक में 41 साल के एक रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। घटना मंगलवार तड़के हुई थी। आग लगने के बाद दमकलकर्मियों को दूसरी मंजिल के एक फ्लैट में तीनों के शव मिले। हादसे में 5 अन्य लोग धुएं की चपेट में आ गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।मृतकों की पहचान और भारत में उनके गृह राज्यों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सीढ़ियों से फैली आग, लोग नीचे नहीं उतर पाए आग मंगलवार सुबह करीब 4:15 बजे बोखुम के होफ्स्टेड इलाके की एक रिहायशी इमारत में लगी थी। आग इमारत की सीढ़ियों से ऊपर तक फैल गई, जिससे ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। दमकलकर्मियों ने बचाव के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। जर्मन न्यूज एजेंसी DPA के मुताबिक, दो लोगों को हाइड्रोलिक सीढ़ी और दो को पोर्टेबल सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। एक अन्य व्यक्ति को एयर कुशन की मदद से बचाया गया। तकनीकी खराबी से आग लगने की आशंका खारिज जांचकर्ताओं ने आग लगने की वजह तकनीकी खराबी होने की आशंका खारिज कर दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या दुर्घटनावश लगी। पुलिस आग लगने की वजह, तीनों की मौत के हालात और गिरफ्तार व्यक्ति की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। खबर अपडेट हो रही है…
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, सेना को इस बदलाव की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कनेक्टिविटी में रुकावट की पुष्टि की है। खास बात यह है कि मस्क यही स्टारलिंक सर्विस भारत में शुरू करना चाहते हैं। इसे लेकर हाल ही में उन्होंने भारत सरकार पर भेदभाव के आरोप लगाए थे। 160 की रफ्तार से तेज चलते ही इंटनेट धीमा जेलेंस्की के सलाहकार सेरही के मुताबिक अब 160 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलने पर स्टारलिंक का इंटरनेट धीमा हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह फैसला मौजूदा राजनीतिक हालात से जुड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। BBC ने यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने से सेना के सामान पहुंचाने, ड्रोन चलाने और हमले से जुड़े मिशनों में परेशानी आ रही है। स्पेसएक्स ने इस मामले पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस के ड्रोन रोकने में भी काम आता है स्टारलिंक स्टारलिंक अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देता है। यूक्रेनी सेना इसका इस्तेमाल सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखने और दूर बैठे ड्रोन चलाने के लिए करती है। इन ड्रोन से रूसी ठिकानों पर हमले किए जाते हैं। सलाहकार सेरही के मुताबिक, स्टारलिंक की मदद से ऐसे ड्रोन भी चलाए जाते हैं, जो रूस के नए जेट इंजन वाले ड्रोन को हवा में रोकने की कोशिश करते हैं। इससे पहले मस्क ने फरवरी में रूसी सेना के लिए स्टारलिंक बंद कर दिया था। इससे रूस को यूक्रेन में लड़ाई लड़ने में परेशानी हुई और उसके कमांडरों और सैनिकों के बीच तालमेल बिगड़ गया था। रूस के हमलों से 6 लाख लोग बिना बिजली के रहे राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन में कम से कम 6 लाख लोग बिजली के बिना रहने पर मजबूर हैं। रूस ने राजधानी कीव, उसके आसपास के इलाकों में बिजली से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, कीव में तीन लोगों की मौत हुई। यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में 39 मिसाइलें और 128 ड्रोन दागे। इनमें से चार मिसाइलों और 115 ड्रोन को मार गिराया गया। वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में रूस के अलग-अलग इलाकों में यूक्रेन के 902 ड्रोन मार गिराए गए। इनमें मॉस्को और क्रीमिया के ऊपर गिराए गए ड्रोन भी शामिल हैं। क्रीमिया पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था। ट्रम्प के सीजफायर के दावे के बाद भी हमले जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को दावा किया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। यह रोक तुरंत लागू होनी थी, लेकिन हमले जारी रहे। जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों और दूसरे ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक देगा, अगर रूस भी ऐसा करता है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि ट्रम्प प्रशासन ने सीजफायर पर सहमति नहीं बनने पर यूक्रेन को खुफिया जानकारी देना बंद करने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने मंगलवार को इस आरोप से इनकार किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन सीजफायर से राहत पाने का हकदार नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान यूरोपीय देश यूक्रेन को और हथियार दे सकते हैं। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। फिलहाल यूक्रेन का करीब 20% इलाका रूस के कब्जे में है। भारत में भी स्टारलिंक शुरू करना चाहते हैं मस्क यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड घटाने की खबर ऐसे समय आई है, जब मस्क भारत में भी यही इंटरनेट सर्विस शुरू करना चाहते हैं। स्टारलिंक की खासियत यह है कि यह जमीन पर बिछी इंटरनेट केबल या मोबाइल टावर के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से इंटरनेट देता है। इससे उन गांवों, पहाड़ी इलाकों और दूरदराज की जगहों पर इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है। मस्क भारत में सस्ते प्लान लाने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि नई कंपनी आने से इंटरनेट कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ेगा और इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा। भारत में स्टारलिंक का मुकाबला रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से होगा। ये कंपनियां पहले से कम कीमत पर इंटरनेट सेवाएं दे रही हैं। इसलिए भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह ग्राहकों को किस कीमत पर इंटरनेट देती है। भारत में सर्विस शुरू करने के लिए अभी मंजूरियां जरूरी भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जियो सैटकॉम, एयरटेल की सहयोगी कंपनी यूटेलसेट वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस दिए हैं। लेकिन सिर्फ लाइसेंस मिलने से सर्विस शुरू नहीं की जा सकती। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी मंजूरियां और सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देने में इस्तेमाल होने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी की कीमत तय होना भी जरूरी है। भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके प्लान कितने सस्ते होते हैं, नेटवर्क कितना अच्छा चलता है और कंपनी को कब तक सभी जरूरी मंजूरियां मिलती हैं। अंडमान और मणिपुर में मिले थे स्टारलिंक डिवाइस 2024 में भारतीय एजेंसियों को अंडमान-निकोबार में ड्रग्स तस्करी की जांच के दौरान और मणिपुर में सेना के एक ऑपरेशन के समय स्टारलिंक डिवाइस मिले थे। उस समय मस्क ने कहा था कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में कभी चालू ही नहीं हुई। उन्होंने दावा किया था कि मिले हुए उपकरण स्टारलिंक के सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। स्टारलिंक के उपकरणों में एक डिश, वाई-फाई राउटर, बिजली की केबल और डिश को लगाने के लिए स्टैंड होता है। इंटरनेट चलाने के लिए डिश को ऐसी जगह रखा जाता है, जहां से आसमान साफ दिखाई दे। कंपनी का मोबाइल ऐप इसे सेट करने और नेटवर्क की स्थिति देखने में मदद करता है। यूक्रेन में स्पीड रोकने से स्टारलिंक पर सवाल उठे यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड पर लगी रोक से यह सवाल उठा है कि जब सेना किसी निजी कंपनी की इंटरनेट सर्विस पर निर्भर हो, तो कंपनी के तकनीकी फैसलों का उसके काम पर कितना असर पड़ सकता है। भारत में स्टारलिंक का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंटरनेट की सुविधा से वंचित इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए हो सकता है। इसलिए यूक्रेन के मामले का यह मतलब नहीं है कि भारत में भी ऐसी ही स्थिति बनेगी। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि सैटेलाइट इंटरनेट देने वाली कंपनियों की तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के साथ उनके फैसलों का महत्व भी बढ़ जाता है।
होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराकर बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज डूब गया। जहाज में 2500 कंटेनर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह जानकारी दी। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, टक्कर के बाद जहाज में आग लग गई थी। जंग शुरू होने के बाद यह पहली बार है, जब बारूदी सुरंग से टकराकर कोई जहाज डूबा है। फिलहाल जहाज पर कितने लोग सवार थे और इस घटना में किसी की मौत हुई या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिली है। IRGC बोली- जहाज खतरनाक रास्ते से जा रहा था IRGC ने बुधवार को बताया कि जहाज होर्मुज के पास एक ऐसे रास्ते से गुजर रहा था, जिसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी और रास्ता खतरनाक था। ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई जहाज उसकी ओर से तय किए गए रास्ते से हटकर चलेगा, तो उसके परिणाम की जिम्मेदारी उसी की होगी। IRGC ने कहा- कंटेनरों से दूर रहें घटना के बाद IRGC ने स्थानीय जहाजों और मछुआरों को सावधान रहने को कहा है। उसने समुद्र में तैर रहे कंटेनरों से दूर रहने की अपील की है। ये कंटेनर दूसरे जहाजों के लिए खतरा बन सकते हैं और समुद्री रास्ते पर आवाजाही में रुकावट डाल सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरे सामान ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। इस इलाके में जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। होर्मुज में 2 जहाजों पर मंगलवार को हमला हुआ था ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा निगरानी एजेंसी UKMTO के मुताबिक, मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में दो व्यापारिक जहाजों पर अज्ञात चीजों से हमला हुआ। दोनों जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है। दोनों जहाज हमले के बाद भी अपना सफर जारी रखने में कामयाब रहे। एजेंसी ने यह नहीं बताया कि हमलों में किस चीज का इस्तेमाल किया गया था। समुद्री बारूदी सुरंग क्या होती है? समुद्री बारूदी सुरंग पानी में छिपाकर रखा गया एक तरह का बम होता है। कुछ सुरंगें जहाज के टकराने पर फटती हैं, जबकि कुछ जहाज के पास आने पर ही विस्फोट कर सकती हैं। टॉरपीडो या मिसाइलों के मुकाबले इन्हें बनाना और समुद्र में बिछाना बहुत आसान और सस्ता होता है। लेकिन एक बार बिछा दिए जाने के बाद इन्हें खोजना, पहचानना और समुद्र से बाहर निकालना (डिफ्यूज करना) बेहद मुश्किल, खर्चीला और जोखिम भरा काम होता है। इन्हें ढूंढने के लिए नौसेना सोनार, पानी के अंदर चलने वाले ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल करती है। जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी को आशंका थी कि होर्मुज में 80 से 150 तक सुरंगें बिछाई गई हो सकती हैं। हालांकि, अमेरिकी सेना का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तय रास्तों से ईरानी सुरंगें हटा दी गई थी। जंग के बाद होर्मुज से जहाजों की आवाजाही घटी अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर पाबंदियां लगाईं हैं और कई जहाजों पर हमले भी हुए। इसके चलते कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से जहाज भेजने से बच रही हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, 7 अक्टूबर को होर्मुज से सिर्फ 7 मालवाहक जहाज गुजरे थे। हालांकि, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है। कुछ जहाज अब भी गुजर रहे हैं, लेकिन युद्ध से पहले के मुकाबले इनकी संख्या काफी कम है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के पास जहाज पर ड्रोन हमला, 2 भारतीय लापता: भारत ने हमले रोकने को कहा होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय क्रू वाले जहाज एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर रविवार को ड्रोन से हमला हुआ। जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से 9 को बचा लिया गया, जबकि 2 अब भी लापता हैं। हमले के पीछे कौन है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
इजराइल जाने वाली उड़ानों में अब पाकिस्तान समेत 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक लगाई जा रही है। ये नियम उन देशों के पायलटों और क्रू पर लागू होते हैं, जिनके देश के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इनमें पाकिस्तान के अलावा ईरान, ओमान, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था। इसके बाद से इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस के पायलटों और क्रू की जांच सख्त कर दी। नियम पहले से थे लेकिन पालन नहीं हो रहा था रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नियम पहले से मौजूद थे, लेकिन इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा था। लागू नियमों के तहत राजनयिक संबंध न रखने वाले देशों के पायलट और केबिन क्रू इजराइल जाने वाली उड़ानों में ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। कुछ मामलों में दूसरी नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों पर भी रोक लग सकती है। इंडोनेशियाई पायलट के कारण फ्लाइट लौटानी पड़ी थी इजराइल के नियमों का असर मंगलवार को इथियोपियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट पर भी पड़ा। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में था, तभी इजराइली अधिकारियों ने उसे वापस लौटने को कहा। अधिकारियों को पता चला था कि विमान में इंडोनेशियाई पायलट मौजूद है। इंडोनेशिया के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बाद विमान इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा लौट गया। वहां पायलट को बदला गया और फिर विमान ने दोबारा उड़ान भरी। इसके बाद वह तेल अवीव पहुंचा। इथियोपियन एयरलाइंस ने इसे गलती बताया। कंपनी का कहना था कि उसे जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट इजराइल जाने वाली फ्लाइट नहीं उड़ा सकता। एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से दूसरी नागरिकता की जानकारी मांगी फ्रांस की राष्ट्रीय एयरलाइन एयर फ्रांस का कहना है कि उसने अपने कर्मचारियों को नियमों की जानकारी दे दी है। फ्रांस की वेबसाइट मेडियापार्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से यह भी पूछा है कि क्या उनके पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जानकारी छिपाने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस को नियमों की जानकारी भेजी इजराइल के चैनल N12 की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को इन नियमों की जानकारी दी थी। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से एयरलाइंस पर है। इजराइली अधिकारी हर उड़ान के क्रू की नागरिकता की नियमित जांच नहीं करते थे। इसी वजह से पाकिस्तान, ओमान, ईरान, इराक और लेबनान जैसे देशों के पायलट पहले भी तेल अवीव जाने वाली उड़ानें संचालित करते रहे। अब इजराइल इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहा है। फिलहाल एयर फ्रांस, यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स ने नियमों का पालन करने की बात कही है। ऐसे में इन एयरलाइंस को इजराइल जाने वाली उड़ानों के लिए पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी में बदलाव करना पड़ सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि कितनी और एयरलाइंस इन नियमों को लागू करेंगी। इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है जिनके पास किसी प्रतिबंधित देश के साथ-साथ दूसरे देश की नागरिकता भी है। ओमानी को-पायलट विमान को एयरपोर्ट से टकराना चाहता था 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला कर दिया था। UAE के मुताबिक को-पायलट विमान को हाइजैक करके उसे इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल से टकराना चाहता था। हमले के दौरान विमान करीब 1 मिनट में 16 हजार फीट नीचे आ गया था। घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल पाए इसके बाद यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू कर लिया। विमान में 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में कैप्टन स्मित के सम्मान में प्रस्ताव पारित: आतंकी हमले को नाकाम करने की तारीफ की अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में प्रस्ताव पास किया है। इसे दोनों पार्टियों ने समर्थन दिया है। इसमें 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले के दौरान कैप्टन मच्छर की बहादुरी की तारीफ की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
इजराइल जाने वाली उड़ानों में अब पाकिस्तान समेत 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक लगाई जा रही है। ये नियम उन देशों के पायलटों और क्रू पर लागू होते हैं, जिनके देश के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इनमें पाकिस्तान के अलावा ईरान, ओमान, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था। इसके बाद से इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस के पायलटों और क्रू की जांच सख्त कर दी। इंडोनेशियाई पायलट के कारण फ्लाइट लौटानी पड़ी थी इजराइल के नियमों का असर मंगलवार को इथियोपियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट पर भी पड़ा। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में था, तभी इजराइली अधिकारियों ने उसे वापस लौटने को कहा। अधिकारियों को पता चला था कि विमान में इंडोनेशियाई पायलट मौजूद है। इंडोनेशिया के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बाद विमान इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा लौट गया। वहां पायलट को बदला गया और फिर विमान ने दोबारा उड़ान भरी। इसके बाद वह तेल अवीव पहुंचा। इथियोपियन एयरलाइंस ने इसे गलती बताया। कंपनी का कहना था कि उसे जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट इजराइल जाने वाली फ्लाइट नहीं उड़ा सकता। एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से दूसरी नागरिकता की जानकारी मांगी फ्रांस की राष्ट्रीय एयरलाइन एयर फ्रांस का कहना है कि उसने अपने कर्मचारियों को नियमों की जानकारी दे दी है। फ्रांस की वेबसाइट मेडियापार्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से यह भी पूछा है कि क्या उनके पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जानकारी छिपाने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस को नियमों की जानकारी भेजी इजराइल के चैनल N12 की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को इन नियमों की जानकारी दी थी। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से एयरलाइंस पर है। इजराइली अधिकारी हर उड़ान के क्रू की नागरिकता की नियमित जांच नहीं करते थे। इसी वजह से पाकिस्तान, ओमान, ईरान, इराक और लेबनान जैसे मुस्लिम बहुल देशों के पायलट पहले भी तेल अवीव जाने वाली उड़ानें संचालित करते रहे। अब इजराइल इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहा है। फिलहाल एयर फ्रांस, यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स ने नियमों का पालन करने की बात कही है। ऐसे में इन एयरलाइंस को इजराइल जाने वाली उड़ानों के लिए पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी में बदलाव करना पड़ सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि कितनी और एयरलाइंस इन नियमों को लागू करेंगी। इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है जिनके पास किसी प्रतिबंधित देश के साथ-साथ दूसरे देश की नागरिकता भी है। ओमानी को-पायलट विमान को एयरपोर्ट से टकराना चाहता था 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला कर दिया था। UAE के मुताबिक को-पायलट विमान को हाइजैक करके उसे इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल से टकराना चाहता था। हमले के दौरान विमान करीब 1 मिनट में करीब15 हजार फीट नीचे आ गया था। घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल पाए इसके बाद यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू कर लिया। विमान में 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में कैप्टन स्मित के सम्मान में प्रस्ताव पारित: आतंकी हमले को नाकाम करने की तारीफ की अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में प्रस्ताव पास किया है। इसे दोनों पार्टियों ने समर्थन दिया है। इसमें 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले के दौरान कैप्टन मच्छर की बहादुरी की तारीफ की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल न होने से बांग्लादेश को नुकसान हुआ। हसीना ने PTI को दिए इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि रहमान के फैसले के चलते बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का मौका भी गंवा दिया। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट हुई थी। भारत ने रहमान को समिट में आने का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे। हसीना ने कहा कि अगर उनके भारत में रहने की वजह से तारिक रहमान भारत नहीं आए, तो यह दुख की बात है। दो देशों के रिश्ते किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक मतभेदों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए। हसीना बोलीं- बातचीत के रास्ते खोलना सरकार की जिम्मेदारी हसीना ने कहा कि BRICS सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं है। इसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल होती हैं। समिट में शामिल होकर बांग्लादेश दूसरे देशों से सीख सकता था। लेकिन सरकार ने यह मौका गंवा दिया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए दूसरे देशों से बातचीत और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए। रहमान के पिता के भारत दौरे का जिक्र किया हसीना ने 1979 में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति और तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान के भारत दौरे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह दिल्ली में रह रही थीं। हसीना के मुताबिक, 1980 में जब जियाउर रहमान लंदन गए, तब भी वह वहीं थीं। इसके बावजूद उनकी मौजूदगी ने जियाउर रहमान के दौरे में कोई रुकावट नहीं डाली। हसीना ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान समेत परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 3 नवंबर को ढाका की सेंट्रल जेल में चार बड़े नेताओं की भी हत्या हुई। हसीना ने जियाउर रहमान पर गलत तरीके से सत्ता में आने का आरोप लगाया। हसीना बोलीं- बांग्लादेश गंभीर संकट से गुजर रहा हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और विरोधी दलों को अपनी बात रखने के मौके नहीं मिल रहे हैं। बांग्लादेश लौटकर लोकतंत्र बहाल करना चाहती हैं हसीना हसीना ने बांग्लादेश लौटने की कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि वह देश लौटकर लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई में शामिल होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपनी पसंद की सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के मुताबिक, उनकी वापसी इस दिशा में एक अहम कदम होगी। मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटने से डर नहीं इंटरव्यू के दौरान हसीना ने माना कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहां की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह डरकर पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने 1975 में अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान, मां, भाइयों और परिवार के कई सदस्यों की हत्या का जिक्र किया। हसीना ने कहा कि 1981 में सैन्य शासन और धमकियों के बावजूद वह बांग्लादेश लौटी थीं। उन्होंने 21 अगस्त 2004 को हुए ग्रेनेड हमले और खुद पर हुए दूसरे हमलों का भी जिक्र किया। हसीना ने कहा कि उन्हें जेल और राजनीतिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि बांग्लादेश में न्याय व्यवस्था की स्थिति है। उन्होंने मौत की सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सजा सुनाना न्याय नहीं है। 78 साल की शेख हसीना अगस्त 2024 में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। तब से वह यहीं रह रही हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

