PAK-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी:7 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत; इस साल दोनों देशों के बीच हमलों में 1100 आम नागरिक मारे जा चुके

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर शनिवार को भारी गोलीबारी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए है। वहीं, पाकिस्तान ने दावा किया है कि जवाबी हमले में कई अफगान तालिबानी लड़ाके मारे गए और उनका एक सैन्य ठिकाना तबाह कर दिया गया। दोनों देशों के बीच यह झड़प विवादित डूरंड लाइन पर हुई। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक अफगानिस्तान में सीमा पार से होने वाली हिंसा के कारण 1100 से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई है। पाकिस्तान बोला- अफगान लड़ाकों ने गोलीबारी की शुरूआत की पाकिस्तान ने कहा कि अफगान सीमा रक्षकों ने उसके चेकपॉइंट्स पर बिना उकसावे के गोलीबारी की। वहीं, अफगान सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान पर संघर्ष शुरू करने और बिना अनुमति सीमा चौकियां बनाने की कोशिश का आरोप लगाया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सैनिकों को नुकसान पहुंचाने के दावे किए हैं। अफगान सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों ने पहले गोलीबारी की। उनके मुताबिक, अफगान बलों ने जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान ने इसके उलट कहा कि अफगान सीमा रक्षकों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तर-पश्चिमी कुर्रम जिले में उसके चेकपॉइंट्स पर गोली चलाई। पाकिस्तान का तालिबान ठिकाना नष्ट करने का दावा पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने शनिवार को हुई एक अलग गोलीबारी में कई अफगान तालिबान लड़ाकों को मारने का दावा किया। उन्होंने एक तालिबानी सैन्य बेस कैंप नष्ट करने की बात भी कही। इस्लामाबाद ने आरोप लगाया कि अफगान बलों ने आतंकियों को पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसाने में मदद के लिए गोलीबारी की। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच क्या विवाद है? पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले साल अक्टूबर में सीमा पर बड़ी झड़पों के बाद से कई बार सैन्य टकराव हो चुका है। विवाद की एक बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान का तालिबान प्रशासन TTP को पनाह देता है और उसके लड़ाके अफगान जमीन से सीमा पार हमलों की योजना बनाकर उन्हें अंजाम देते हैं। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता है। TTP, अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी है और दोनों एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया था, जिससे नाराज होकर TTP ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लड़ाई शुरू की। संगठन पाकिस्तान सरकार को इस्लाम के खिलाफ मानता है। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले भी किए। 17 दिन पहले पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक में बच्चों समेत 9 की मौत हुई थी पाकिस्तान ने 1 अक्टूबर को अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की थी। इन हमलों में 9 लोगों की मौत और 11 लोग घायल हुए। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया था कि इन हमलों में 3 घर तबाह हुए और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, पाकिस्तान ने कहा था कि उसने अफगानिस्तान में दो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें कम से कम 22 लड़ाके मारे गए। ——————– यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में राष्ट्रपति भवन से 400 मीटर दूर हिंसक प्रदर्शन: 143 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत जलाई; महंगाई के खिलाफ 8 लाख लोग सड़कों पर फ्रांस में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध में शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पूरी खबर पढ़ें…

PAK-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी:7 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत; इस साल दोनों देशों के बीच हमलों में 1100 आम नागरिक मारे जा चुके

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर शनिवार को भारी गोलीबारी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए है। वहीं, पाकिस्तान ने दावा किया है कि जवाबी हमले में कई अफगान तालिबानी लड़ाके मारे गए और उनका एक सैन्य ठिकाना तबाह कर दिया गया। दोनों देशों के बीच यह झड़प विवादित डूरंड लाइन पर हुई। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक अफगानिस्तान में सीमा पार से होने वाली हिंसा के कारण 1100 से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई है। पाकिस्तान बोला- अफगान लड़ाकों ने गोलीबारी की शुरूआत की पाकिस्तान ने कहा कि अफगान सीमा रक्षकों ने उसके चेकपॉइंट्स पर बिना उकसावे के गोलीबारी की। वहीं, अफगान सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान पर संघर्ष शुरू करने और बिना अनुमति सीमा चौकियां बनाने की कोशिश का आरोप लगाया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सैनिकों को नुकसान पहुंचाने के दावे किए हैं। अफगान सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों ने पहले गोलीबारी की। उनके मुताबिक, अफगान बलों ने जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान ने इसके उलट कहा कि अफगान सीमा रक्षकों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तर-पश्चिमी कुर्रम जिले में उसके चेकपॉइंट्स पर गोली चलाई। पाकिस्तान का तालिबान ठिकाना नष्ट करने का दावा पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने शनिवार को हुई एक अलग गोलीबारी में कई अफगान तालिबान लड़ाकों को मारने का दावा किया। उन्होंने एक तालिबानी सैन्य बेस कैंप नष्ट करने की बात भी कही। इस्लामाबाद ने आरोप लगाया कि अफगान बलों ने आतंकियों को पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसाने में मदद के लिए गोलीबारी की। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच क्या विवाद है? पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले साल अक्टूबर में सीमा पर बड़ी झड़पों के बाद से कई बार सैन्य टकराव हो चुका है। विवाद की एक बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान का तालिबान प्रशासन TTP को पनाह देता है और उसके लड़ाके अफगान जमीन से सीमा पार हमलों की योजना बनाकर उन्हें अंजाम देते हैं। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता है। TTP, अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी है और दोनों एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया था, जिससे नाराज होकर TTP ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लड़ाई शुरू की। संगठन पाकिस्तान सरकार को इस्लाम के खिलाफ मानता है। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले भी किए। 17 दिन पहले पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक में बच्चों समेत 9 की मौत हुई थी पाकिस्तान ने 1 अक्टूबर को अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की थी। इन हमलों में 9 लोगों की मौत और 11 लोग घायल हुए। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया था कि इन हमलों में 3 घर तबाह हुए और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, पाकिस्तान ने कहा था कि उसने अफगानिस्तान में दो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें कम से कम 22 लड़ाके मारे गए। ——————– यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में राष्ट्रपति भवन से 400 मीटर दूर हिंसक प्रदर्शन: 143 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत जलाई; महंगाई के खिलाफ 8 लाख लोग सड़कों पर फ्रांस में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध में शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

फ्रांस में महंगाई के खिलाफ येलो वेस्ट आंदोलन शुरू:प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक झड़प; राजधानी पेरिस में 25 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन में छात्र, शिक्षक, मजदूर, किसान और बुजुर्ग शामिल हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। देशभर में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने हिंसा के लिए वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने राजधानी पेरिस में करीब 25 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए हैं। इनमें राष्ट्रपति भवन, संसद व सरकारी कार्यालयों के आसपास के स्टेशन शामिल हैं। फ्रांस में प्रदर्शन से जुड़ीं 10 फोटोज… पुलिस से टकराव की 4 तस्वीरें आगजनी की 4 तस्वीरें… प्रतीकात्मक विरोध की 2 तस्वीरें स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के उत्तरी बाहरी इलाकों के स्कूलों में हुई थी। वहां शिक्षकों की गैरमौजूदगी और स्कूलों की खराब हालत को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। धीरे-धीरे यह विरोध पूरे देश में फैल गया। अब इसमें सामाजिक असमानता, सरकारी खर्च में कमी और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फ्रांस की प्रमुख मजदूर यूनियनों में शामिल सीजीटी ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। यूनियन ने ज्यादा वेतन और पेंशन, कम कीमतों और लोगों की जरूरतें पूरी करने वाली सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों की 4 अहम मांगें… 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोहराने की अपील प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर लोगों से 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोबारा शुरू करने की अपील की गई थी। इस आंदोलन में लोग पीले रंग की चमकदार जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरते थे। फ्रांस में गाड़ियों के ड्राइवरों के लिए ऐसी जैकेट रखना जरूरी होता है, ताकि सड़क पर गाड़ी खराब होने या किसी आपात स्थिति में वे दूर से दिखाई दे सकें। प्रदर्शनकारियों ने इसी जैकेट को विरोध का प्रतीक बना लिया। इसलिए इस आंदोलन को फ्रेंच भाषा में ‘गिले जॉन’ और हिंदी में ‘येलो वेस्ट’ यानी ‘पीली जैकेट वाला आंदोलन’ कहा जाने लगा। मैक्रों ने शांति बनाए रखने की अपील की राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को लोगों से शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति का सम्मान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना और अपनी बात रखना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ दूसरों का सम्मान करना भी जरूरी है।

बांग्लादेश में पिस्तौल लेकर ड्रग्स तस्करों को पकड़ने पहुंचे मंत्री:6 लोगों को पकड़ा, पुलिस बोली- उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं

बांग्लादेश में एक मंत्री का हाथ में पिस्तौल लेकर ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का वीडियो सामने आया है। मंत्री इशराक हुसैन राजधानी ढाका की एक बस्ती में अपने साथियों के साथ पिस्तौल लेकर घूमते, लोगों से बात करते दिख रहे हैं। उनके साथ के लोग स्थानीय निवासियों को पकड़ते और तिरपाल से बनी झोपड़ियां तोड़ते दिख रहे हैं। यह घटना शनिवार को गेंडारिया इलाके में हुई। मंत्री और उनके लोगों ने 6 लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। वीडियो सामने आने के बाद मंत्री के ऐसा करने को लेकर आलोचना हो रही है। पुलिस ने भी साफ किया है कि छापेमारी का अधिकार कानून लागू करने वाली एजेंसियों के पास है। मंत्री की कार्रवाई से जुड़े 3 फुटेज… मंत्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया बांग्लादेश के राज्य मंत्री इशराक हुसैन ने बाद में अपने फेसबुक पेज पर कार्रवाई का वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 6 लोगों को पकड़ा गया। हालांकि, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मलिक अहसान उद्दीन सामी ने बताया कि पुलिस 10 लोगों को गेंडारिया थाने लेकर गई। उनके मुताबिक, मंत्री ने कुछ लोगों को पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने जांच के बाद उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि छापेमारी करने का अधिकार केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों को है। हालांकि, बांग्लादेश में कोई भी नागरिक अपराध के संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले कर सकता है। गेंडारिया थाने के प्रभारी मोनिरुज्जमान मोनिर ने बताया कि पकड़े गए लोगों के पास से सफेद पाउडर जैसा पदार्थ मिला है। लेकिन यह ड्रग्स है या नहीं, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला में जांच के बाद ही होगी। अपनी पार्टी के लोगों को भी चेतावनी दी इशराक ने कहा कि ड्रग्स की वजह से देश के युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले 6 महीने से इस मामले में जानकारी जुटा रहे थे। मंत्री ने कहा कि अगर उनकी अपनी पार्टी का कोई व्यक्ति ड्रग्स के कारोबार में शामिल पाया गया, तो उसे और कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह उनकी कार्रवाई का सबसे अहम राजनीतिक पहलू है। उन्होंने कहा, ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान मेरे निर्वाचन क्षेत्र से शुरू हुआ है। यह पूरे बांग्लादेश में फैलेगा। देश में कहीं भी ड्रग्स के लिए जगह नहीं होगी। मंत्री ने कहा कि जो लोग बाहर से आकर ड्रग्स की सप्लाई करने वालों को पकड़ने में मदद करेंगे, उन्हें वे सम्मान देंगे। लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की गुहार लगाई खबर के मुताबिक, पकड़े गए लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की अपील की। इस पर मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कोई उन्हें मारेगा नहीं। उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। मंत्री ने कहा, “कोई तुम्हें हाथ नहीं लगाएगा और न ही तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा। तुम्हें थाने ले जाया जाएगा और पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी। हम यहां तुम्हें पीटने नहीं आए हैं। देश कानून से चलेगा। तुम्हारा मुकदमा चलेगा और न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलेगी।”

बांग्लादेश के रिजॉर्ट में आग, 10 की मौत:इनमें 6 लोग एक ही परिवार के; बिना फायर सेफ्टी लाइसेंस के रिजॉर्ट चल रहा था

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में शनिवार सुबह समुद्र किनारे बने एक रिजॉर्ट में आग लगने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक ही परिवार के 6 सदस्य शामिल हैं। आग सुबह करीब 7:25 बजे टुपटुप रेस्टो एंड रिजॉर्ट में लगी। तीन मंजिला लकड़ी की इमारत आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। रिजॉर्ट के पास आग से बचाव के इंतजामों की मंजूरी नहीं थी। जून में चेकिंग के दौरान अधिकारियों ने इसे लेकर चेतावनी भी दी थी। शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने की आशंका बांग्लादेश के अखबार प्रोथोम आलो ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। इसके बाद यह आग एयर कंडीशनर में लगी। गैस सिलेंडर में विस्फोट के बाद आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की असली वजह का पता चल सकेगा। आग लगने के समय रिजॉर्ट में करीब 30 लोग मौजूद थे। इनमें से 4 से 5 लोग किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे। बाकी लोगों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। दूसरी मंजिल से कूदकर जान बचाई, पत्नी समेत 5 लोग जल गए तीन मंजिला रिजॉर्ट बांस और लकड़ी से बना था। यह कॉक्स बाजार के लोकप्रिय समुद्र तटीय इलाके कोलातोली के बाहरी हिस्से में स्थित था। यह जगह राजधानी ढाका से करीब 410 किलोमीटर दूर है। रिपोर्ट के मुताबिक अशिकुल इस्लाम अपने परिवार के साथ रिजॉर्ट में छुट्टियां मनाने आए थे। आग लगने पर उन्होंने दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। हालांकि, उनकी पत्नी इसरत जहां मलिहा और परिवार के पांच और लोगों की मौत हो गई। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक जिन 10 मृतकों की पहचान हुई है, उनमें इसरत जहां मलिहा (30), मिलिता मेहेजाबीन अल्वी (23), लैला जहां नाबिला (27), नफिस्ता मीम (27), फरिहा कबीर (33) और पांच साल का फैजान अहमद शामिल हैं।

नवाज शरीफ की तरह देश छोड़ सकते हैं इमरान खान:विपक्षी नेता का दावा- सरकार ने ऑफर दिया, समझौता करने का दबाव बना रहे

पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व PM इमरान खान भी पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह देश छोड़ सकते हैं। विपक्षी नेता महमूद खान अचकजई ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यहा दावा किया। अचकचई ने कहा कि सरकार इमरान पर समझौते के लिए दबाव बना रही है। वे नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो की तरह देश छोड़कर जा सकते हैं। अचकचई पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (PKMP) के अध्यक्ष और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता हैं। नवाज-बेनजीर ने क्यों छोड़ा था पाकिस्तान? अचकजई ने अपने दावे के समर्थन में पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के पुराने मामलों का हवाला दिया। नवाज शरीफ: 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज सरकार को हटा दिया था। नवाज को जेल में डाल दिया गया। इसके बाद 2000 में सऊदी अरब और लेबनान के नेताओं की मध्यस्थता से हुए समझौते के तहत वे पाकिस्तान छोड़कर चले गए। समझौते की शर्तों के मुताबिक, नवाज को 10 साल तक पाकिस्तान से बाहर रहना था और राजनीति से दूर रहना था। बेनजीर भुट्टो: 1997 में तत्कालीन राष्ट्रपति फारूक लेघारी ने बेनजीर को भ्रष्टाचार के आरोप में प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। इसके बाद 1997 के आम चुनाव में उन्हें हार मिली। इसके बाद बेनजीर भुट्टो ने देश छोड़ दिया। वह 9 साल तक ब्रिटेन और दुबई में रहीं। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। तोशाखाना क्या है और इमरान खान का मामला क्या है? तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का सरकारी भंडार है। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों को विदेशों से मिले कीमती तोहफे जमा किए जाते हैं। इनमें घड़ियां, गहने, पेंटिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। इमरान खान से जुड़े विवाद इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्हें कई महंगे विदेशी तोहफे मिले। आरोप है कि कुछ तोहफों की जानकारी और उनकी बिक्री से मिली रकम की पूरी जानकारी नहीं दी गई। इससे जुड़े तीन मामले… 1. तोहफों की जानकारी छिपाने का आरोप 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान को तोहफों की जानकारी गलत तरीके से घोषित करने का दोषी माना और उन्हें अयोग्य ठहराया। 2. तोशाखाना का पहला मामला इमरान पर आरोप था कि उन्होंने कुछ महंगे तोहफे तय कीमत देकर अपने पास रखे और बाद में बेच दिए। अगस्त 2023 में उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई। बाद में सजा निलंबित हो गई। 3. तोशाखाना-2 मामला इसमें 2021 में सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले बुल्गारी ज्वेलरी सेट का मामला है। अभियोजन के मुताबिक इसकी कीमत करीब 8 करोड़ पाकिस्तानी रुपए थी, जबकि इसे करीब 29 लाख रुपए में रखने का आरोप है। इमरान खान के प्रमुख केस की वर्तमान स्थिति 1. तोशाखाना केस 2023 में इमरान खान को तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा हुई थी। बाद में यह सजा निलंबित हुई। हालांकि, बाद में तोशाखाना से जुड़े एक अन्य मामले में दिसंबर 2025 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह सजा महंगे सरकारी तोहफों की कथित कम कीमत पर खरीद से जुड़े मामले में है। 2. साइफर केस इमरान खान को साइफर/स्टेट सीक्रेट्स केस में मिली 10 साल की सजा हाईकोर्ट ने पलट दी थी। जून 2024 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया। 3. इद्दत निकाह केस फरवरी 2024 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 7-7 साल की सजा मिली थी। जुलाई 2024 में दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया। 4. अल-कादिर ट्रस्ट/£190 मिलियन केस यह मामला इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते हुए ब्रिटेन से पाकिस्तान लौटाए गए करीब £190 मिलियन और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है।17 जनवरी 2025 को इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई गई। मई 2026 में इस सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। उनकी मुख्य अपील पर सुनवाई जारी है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया:सिंध में भी झटके महसूस हुए; इतनी ही तीव्रता का भूकंप फरवरी में भी आया था

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को 5.7 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र खुझदार शहर से 48 किलोमीटर दूर था। इसी साल फरवरी में यहां इतनी ही तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप के झटके सिंध में भी महसूस किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें खुझदार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। जिले में राहत-बचाव दल, अस्पताल और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल, भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई हैं। फरवरी में भी भूकंप आया था इससे पहले फरवरी में बलूचिस्तान में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया था। यह सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर आया था और इसका केंद्र जमीन से 13 किलोमीटर की गहराई में था। उस समय भूकंप का केंद्र खुझदार शहर से 86 किलोमीटर दूर था। भूकंप के झटके बलूचिस्तान के झल मगसी, जाफराबाद और नसीराबाद में महसूस किए गए थे। पड़ोसी सिंध प्रांत के सुक्कुर, कंबर, शहदादकोट और दादू जिलों में भी झटके महसूस हुए थे। बलूचिस्तान में पहले भी खतरनाक भूकंप आ चुके हैं बलूचिस्तान के क्वेटा में 1935 में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसमें करीब 35 हजार लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 1945 में मकरान तट के पास 8.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिससे समुद्र में सुनामी भी उठी थी। 2005 के भूकंप में 74 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं पाकिस्तान में अब तक के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक 8 अक्टूबर 2005 को आया था। इस भूकंप में 74 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों – अरबियन, यूरेशियन और भारतीय प्लेट- के संपर्क वाले क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों की हलचल के कारण देश में अक्सर भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में छात्रों ने मंदिर के सामने गोमांस पकाया: आज यूनिवर्सिटी में गाय काटने की तैयारी बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में 12 अक्टूबर को मंदिर के पास गोमांस पकाने को लेकर विवाद हो गया। इसके दो दिन बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में पशु काटने से बचने का नोटिस जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

इजराइली कंपनी के विज्ञापनों के जरिए जासूसी की कोशिश:बिना क्लिक के डिवाइस में घुस सकता है मालवेयर; UN और नाटो के नेटवर्क तक पहुंच

टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच में खुलासा हुआ है कि इजराइली कंपनी डिस्कवर टेक के विज्ञापनों के जरिए मोबाइल और कंप्यूटर में जासूसी मालवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके लिए यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत भी नहीं थी। जांच में 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप पर ऐसे विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिले। इनमें संयुक्त राष्ट्र (UN) और नाटो के नेटवर्क तक विज्ञापन पहुंचने की बात भी सामने आई है। रिकॉर्ड में भारत में इस्तेमाल होने वाले ट्रूकॉलर, एमएक्स प्लेयर और लूडो स्टार जैसे ऐप भी शामिल हैं। मोबाइल नंबर जुटाने की भी कोशिश जांच में ‘डार्क कार्टोग्राफर’ नाम के एक अन्य समूह का भी पता चला। यह समूह विज्ञापनों के जरिए 30 से ज्यादा देशों में लोगों के मोबाइल नंबर पता लगाने की कोशिश कर रहा था। भास्कर एनालिसिस: 6 पॉइंट में समझें, कैसे होती थी जासूसी 1. निशाना कैसे बनाते थे? हैकिंग करने वाले सामान्य विज्ञापनों के जरिए फोन और कंप्यूटर तक पहुंचने की कोशिश करते थे। इसके लिए यूजर का विज्ञापन पर क्लिक करना जरूरी नहीं था। कुछ मामलों में विज्ञापन स्क्रीन पर दिखाई दिए बिना भी कोड डिवाइस तक पहुंच सकता था। 2. डिवाइस की पहचान कैसे करते थे? विज्ञापन से जुड़े कोड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होती थी कि कौन-सा व्यक्ति किस ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहा है। डिवाइस से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाती थी। 3. जासूसी सॉफ्टवेयर कैसे पहुंचता था? पहले जुटाई गई जानकारी के आधार पर चुनिंदा डिवाइस को निशाना बनाया जाता था। विज्ञापन के जरिए उन डिवाइस तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश होती थी। यूजर को इसकी जानकारी नहीं होती थी। 4. कितने बड़े पैमाने पर हुई कोशिश? जांच के मुताबिक, डिस्कवर टेक ने 161 देशों में विज्ञापन दिखाने की कोशिश की। कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से ज्यादा संभावित यूजर्स के रिकॉर्ड मिले। इन यूजर्स के डिवाइस तक कोड पहुंचाने की व्यवस्था थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क का दायरा इससे भी बड़ा हो सकता है। 5. हमले पकड़ में क्यों नहीं आए? विज्ञापन सामान्य दिखाई देते थे और हर यूजर को एक जैसा कोड नहीं भेजा जाता था। चुनिंदा डिवाइस को ही निशाना बनाए जाने से इस गतिविधि का पता लगाना मुश्किल हो सकता था। 6. गूगल ने क्या कार्रवाई की? रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब के खुलासे के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया। ये आंकड़े विज्ञापनों के रिकॉर्ड से जुड़े हैं। सीधे हैक हुए डिवाइस या जासूसी के शिकार यूजर्स की संख्या नहीं है। बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स और रक्षा एजेंसियों तक पहुंचे विज्ञापन जांच में बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, सीबीसी और याहू जैसी वेबसाइटों पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड मिले। इनके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक भी विज्ञापन पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के नेटवर्क पर भी ऐसे विज्ञापन दिखे। कई देशों के सरकारी कार्यालयों और चुनावों की निगरानी करने वाली संस्थाओं के नेटवर्क भी इनके निशाने पर रहे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका: बोले-इसमें अमेरिका का फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। पूरी खबर यहां पढ़ें…