TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

TCS MHP Deal Porsche: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर में मंगलवार सुबह शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। पोर्शे की कंसल्टिंग सहायक कंपनी MHP के 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3573 करोड़ के अधिग्रहण के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने सतर्क रुख अपनाया है।

एनालिस्ट का मानना है कि इस डील से यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में TCS की पकड़ मजबूत होगी, लेकिन MHP के घटते रेवेन्यू और इंटीग्रेशन की चुनौतियों को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी चिंतित हैं।

आज 25 अगस्त, मंगलवार को मार्केट खुलने के साथ ही  TCS के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। शेयर NSE पर 0.7% गिरकर ₹2,268 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। साल 2026 में अब तक TCS का शेयर करीब 29.2% टूट चुका है।

डील में क्या-क्या है शामिल?

TCS ने जर्मन लग्जरी कार निर्माता पोर्शे की कंपनी MHP Management- und IT-Beratung GmbH की 100% हिस्सेदारी करीब ₹3573 करोड़ में खरीदी है। इस अधिग्रहण के साथ ही पोर्शे ने MHP और TCS के साथ 5 साल के लिए करीब ₹14000 करोड़ का रणनीतिक समझौता भी किया है।

ब्रोकरेज हाउसेस का क्या है कहना?

अधिग्रहण की खबर के बाद प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने TCS के शेयर पर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस जारी किए हैं:

सिटी ने TCS के शेयरों को बेचना की सलाह बरकरार रखी है, जो इसके करेंट भाव से करीब 20% की गिरावट का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि MHP का रेवेन्यू साल 2024 के 830 मिलियन यूरो से घटकर 2025 में 742 मिलियन यूरो रह गया है। गिरता रेवेन्यू TCS के लिए जोखिम बन सकता है। Citi का टारगेट प्राइस ₹1825 का है।

वहीं HSBC ने निवेशकों को TCS के शेयर होल्ड करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस डील से TCS की यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में मौजूदगी तो बढ़ेगी, लेकिन कंपनी के प्रति शेयर आय पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा। साथ ही दोनों कंपनियों का विलय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। HSBC का टारगेट प्राइस ₹2350 का है।

क्या करती है MHP कंपनी?

MHP एक ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग कंपनी है, जिसके पास 4,500 से अधिक कर्मचारी हैं। यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में काम करती है।

आईटी सेक्टर के लिए क्या हैं चुनौतियां?

यह डील ऐसे समय में हुई है जब पूरी भारतीय आईटी इंडस्ट्री टेक खर्च में सुस्ती और जेनेरिक एआई के कारण आ रहे बदलावों से जूझ रही है। MHP के कम वैल्युएशन पर मिलने की मुख्य वजह भी इसके घटते रेवेन्यू का रिस्क ही है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पोर्शे के साथ लंबी अवधि के सौदे से TCS को भविष्य में रेवेन्यू का सपोर्ट मिलेगा, लेकिन MHP के गिरते बिजनेस को वापस पटरी पर लाना और इसका TCS के साथ तालमेल बिठाना कंपनी प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दिल्ली में आफत की बारिश! जलभराव से बढ़ी परेशानी, पूरी राजधानी में रेड अलर्ट

दिल्ली में आफत की बारिश! जलभराव से बढ़ी परेशानी, पूरी राजधानी में रेड अलर्ट

delhi rain

Delhi Rain : दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार सुबह से भारी बारिश जारी है। कई इलाकों में जलभराव के बीच IMD ने पूरी दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं, बिजली और तूफान की चेतावनी के साथ लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। ALSO READ: Weather Forecast: 25 अगस्त को कौनसे राज्यों में होगी बारिश, IMD ने किन राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

 

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली के सभी जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। हवाओं की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और जरूरी न होने पर घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

 

कनॉट प्लेस से दक्षिणी दिल्ली तक जलभराव

सुबह से जारी मूसलाधार बारिश का असर दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में देखने को मिला। कनॉट प्लेस, एम्स और दक्षिणी दिल्ली के कई हिस्सों में सड़कें पानी से लबालब है। जलभराव के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। मौसम विभाग ने पहले दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश की तीव्रता बढ़ने के बाद इसे रेड अलर्ट में बदल दिया गया।

इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट

IMD के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नई दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, शाहदरा, साउथ दिल्ली, साउथ ईस्ट दिल्ली, साउथ वेस्ट दिल्ली और वेस्ट दिल्ली समेत सभी जिलों में रेड अलर्ट लागू किया गया है। ALSO READ: Delhi-NCR Rain: भारी बारिश से हाहाकार, 14 उड़ानें डायवर्ट; दिल्ली-गुरुग्राम में लंबा जाम

लोगों को क्या सावधानी बरतने की सलाह?

मौसम विभाग ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। बारिश के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने और कम दृश्यता वाले रास्तों पर गति नियंत्रित रखने की सलाह दी गई है। लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े होने, जलाशयों के आसपास जाने और कमजोर इमारतों या ढांचों के पास रुकने से बचने को कहा गया है। प्रशासन ने जल निकासी व्यवस्था पर भी ध्यान देने की सलाह दी है।

 

किसानों के लिए भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खेतों में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और कटी हुई फसल को खुले में न रखने को कहा गया है। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

Trading Plan: दायरे में फंसा बाजार, ICICI सिक्योरिटीज के जय ठक्कर से जाने निफ्टी-बैंक निफ्टी में कैसे होगी कमाई

Trading Plan: मार्केट एक्सपर्ट्स की राय है कि निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। बाजार को साफ दिशा पकड़ने के लिए सोमवार के ट्रेडिंग रेंज (24,150–24,300) से साफ तौर पर बाहर निकलना होगा। मंथली F&O एक्सपायरी से पहले बाजार में सावधानी का माहौल होने के बावजूद, मोमेंटम इंडिकेटर्स ने अंडरलाइंग मोमेंटम में कुछ सुधार के संकेत दिए हैं। अगर इंडेक्स 24,300 के ऊपर मजबूती दिखाता है तो यह 24,500 की ओर बढ़ सकता है। वहीं,अगर यह 24,150–24,100 के नीचे गिरता है तो 24,000 के स्तर की ओर गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।

उधर बैंक निफ्टी के 57,235 पर अपने 50-डे EMA को बनाए रखने की संभावना है,जो इस महीने क्लोजिंग बेसिस पर अच्छी तरह से टिका हुआ है। जानकारों के अनुसार,अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 57,000–56,700 की ओर जा सकता है,जबकि 57,900 के ऊपर जाने पर यह 58,250 की ओर बढ़ सकता है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

ICICI सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ डेरिवेटिव्स एंड क्वांट रिसर्च, जय ठक्कर का कहना है कि निफ्टी पिछले हफ्ते और इस हफ्ते के पहले दिन भी गिरावट के साथ बंद हुआ,जिससे पता चलता है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव है। बैंक निफ्टी ऊंचे स्तरों से तेजी से गिरा,जिसका असर निफ्टी पर भी पड़ा। निफ्टी का सबसे ज्यादा पुट बेस 24,000 के स्तर पर है,जो इसे निचले स्तरों पर एक अहम सपोर्ट बनाता है,जबकि 24500 का स्तर तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इसलिए,इंडेक्स के लिए निकट-अवधि की रेंज 24,000–24,500 है। जब तक इस रेंज से ब्रेकआउट नहीं होता,तब तक बाजार के साइडवेज रहने की संभावना है।

अब तक रोलओवर का स्तर ठीक-ठाक रहा है। पिछले शुक्रवार तक,पूरे मार्केट में रोलओवर 40 प्रतिशत था। जबकि सोमवार तक निफ्टी में गिरावट का रुख बना रहा। इससे पता चलता है कि FIIs शॉर्ट पोजीशन बढ़ा रहे हैं या उन्हें रोलओवर कर रहे हैं (कम से कम इंडेक्स में),क्योंकि हाल ही में नेट इंडेक्स शॉर्ट्स 1.5 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स से बढ़कर 2.10 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स हो गए हैं।

हालांकि,India VIX निचले स्तरों पर ट्रेड कर रहा है,लेकिन पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन में इसमें इंट्राडे उछाल देखा गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में ग्लोबल इक्विटी के लिए एक निगेटिव फैक्टर बनी हुई हैं। जब तक कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं,महंगाई का जोखिम इंडेक्स पर ऊपरी स्तरों पर दबाव बनाए रखता है।

अहम रेजिस्टेंस: 24,500

अहम सपोर्ट: 24,000

रणनीति: 24,100 के आस-पास गिरावट आने पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें। स्टॉप-लॉस 23,950 के नीचे रखें और टारगेट 24,400 व 24,500 रखें।

बैंक-निफ्टी आउटलुक और रणनीति

जय ठक्कर का कहना है कि निफ्टी की तरह ही बैंक निफ्टी भी एक दायरे में फंसा हुआ है। ऊपर की तरफ,58,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा कॉल बेस है, जबकि स्विंग रेजिस्टेंस 58,500 पर है। नीचे की तरफ,57,000 स्ट्राइक पर सबसे ज़्यादा पुट ओपन इंटरेस्ट है,जिससे यह एक तत्काल सपोर्ट लेवल बन गया है, जबकि 56,000 अगला सपोर्ट लेवल है। ऐसे में इसका शॉर्ट-टर्म रेंज 57,000–58,000 है,जबकि मीडियम-टर्म रेंज 56,000–58,500 है। निफ्टी PSU बैंक नेगेटिव ट्रेंड के साथ ट्रेड कर रहे हैं और इनमें काफी संख्या में शॉर्ट पोजीशन बनी हैं। वहीं,पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन में प्राइवेट-सेक्टर बैंक इंडेक्स का प्रदर्शन PSU बैंक इंडेक्स से बेहतर रहा है। हालांकि एक्सिस बैंक और HDFC बैंक इसके अपवाद रहे हैं,क्योंकि बाकी ज्यादातर स्टॉक अपेक्षाकृत बेहतर ट्रेड कर रहे हैं। इसलिए,अगर बैंकिंग सेक्टर में शॉर्ट-कवरिंग होती है तो तेजी से ब्रेकआउट हो सकता है, जिससे इंडेक्स 60,000 और उससे ऊपर जा सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 58,000, 58,500

अहम सपोर्ट: 57,000

स्ट्रेटेजी: 58,000 के ऊपर बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,57,000 के नीचे स्टॉप-लॉस रखें और 60,000 का टारगेट रखें।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

टी20 लीग में रिंकू सिंह ने बल्ले से मचाया गदर, 414 के तूफानी स्ट्राइक रेट से ठोके इतने रन

भारत के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह इस दिनों यूपी टी20 लीग 2026 में खेल रहे हैं। यूपी टी20 लीग 2026 में मेरठ मेवरिक्स के कप्तान मेरठ मेवरिक्स के कप्तान रिंकू सिंह ने अपने तूफानी खेल से सबको चौंका दिया। मुकाबले में रिंकू सिंह ने महज 7 गेंदों पर 29 रन बनाए और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 414.29 रहा। रिंकू सिंह ने तूफानी पारी गोरखपुर लायंस के खिलाफ लीग के 16वें मैच में खेला। बारिश की वजह से मुकाबला 8-8 ओवर का कर दिया गया।

गोरखपुर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 91 रन बनाए। टारगेट का पीछा करने उतरी मेरठ की टीम ने सिर्फ 6.4 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए जीत दर्ज कर ली। इस मुकाबले में रिंकू सिंह की खेली गई पारी की काफी चर्चा हो रही है।

कैसा था मुकाबला

मेरठ मेवरिक्स की पारी के दौरान अक्षय दुबे पांचवें ओवर की तीसरी गेंद के बाद रिटायर्ड हर्ट होकर बाहर चले गए। इसके बाद कप्तान रिंकू सिंह ने मोर्चा संभाला। मेरठ को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 36 रन चाहिए थे, लेकिन रिंकू ने कुछ ही गेंदों में मैच का रुख बदल दिया। विशाल निषाद के छठे ओवर में उन्होंने तीन छक्के और दो चौके लगाकर 28 रन बटोर लिए। दूसरी ओर स्वास्तिक चिकारा भी शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्होंने 24 गेंदों में नाबाद 44 रन बनाए। रिंकू ने सिर्फ 7 गेंदों पर 29 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 3 छक्के और 2 चौके शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 414.29 रहा और इसी आक्रामक बल्लेबाजी से मेरठ ने लक्ष्य बेहद आसानी से हासिल कर लिया।

गोरखपुर ने की तेज शुरुआत

गोरखपुर लायंस ने शुरुआत में तेज बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 63 रन बना लिए थे और टीम के 100 रन तक पहुंचने की उम्मीद दिख रही थी। लेकिन छठे ओवर में जीशान अंसारी ने लगातार दो विकेट लेकर गोरखपुर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने आर्यन जुयाल और हरदीप सिंह को आउट कर टीम को बड़ा झटका दिया। जीशान ने मैच में सिर्फ 2 ओवर गेंदबाजी की और 10 रन देकर कुल 4 विकेट अपने नाम किए।

टूर्नामेंट में मेरठ का शानदार प्रदर्शन

रिंकू सिंह की कप्तानी में मेरठ मेवरिक्स का यूपी टी20 लीग 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी है। टीम ने अब तक खेले अपने सभी 6 मैचों में जीत हासिल की है और 12 अंकों के साथ अंक तालिका में सबसे ऊपर है। वहीं दूसरे नंबर पर लखनऊ फाल्कन्स मौजूद है। लखनऊ को 6 मैच खेलने के बाद उसके खाते में सिर्फ 6 अंक हैं। यानी मेरठ मेवरिक्स ने अपने प्रदर्शन से बाकी टीमों पर मजबूत बढ़त बना रखी है।

घर की खूबसूरती और चूहों से बचाव, एक साथ दो काम करेंगे ये 3 खुशबूदार पौधे!

चूहे घर में तो आते ही हैं, इसके साथ ही बगीचे में इनका आना भी कोई नई बात नहीं है। यदि इनकी संख्या बढ़ जाए तो परेशानी भी बढ़ जाती है। कई बार चूहे पौधों और आसपास रखी चीजों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं और उनकी वजह से बगीचे की साफ-सफाई बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है।

यदि आप इस परेशानी को कम करना चाहते हैं, तो कुछ आसान घरेलू तरीके आजमा सकते हैं। थोड़ी-सी सावधानी और सही पौधों को बगीचे में जगह देकर चूहों को कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ ऐसे खुशबूदार पौधे भी हैं, जिनकी तेज खुशबू चूहों को बगीचे से दूर रखने में मदद कर सकती है। इन्हें लगाने के साथ बगीचे की साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप चूहों की परेशानी को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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1. रोजमेरी

रोजमेरी भी तेज खुशबू वाला पौधा है, जिसे बगीचे में लगाना कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। इसकी खुशबु चूहों को आसपास नहीं आने देती है। इसे बगीचे की किनारी, घर के बाहर या उन जगहों के पास लगाया जा सकता है जहां चूहों की आवाजाही नजर आती है। रोजमेरी सिर्फ बगीचे की हरियाली नहीं बढ़ाता, बल्कि इसकी पत्तियों का इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जाता है। यानी इसे लगाने से आपको हर्ब भी मिल जाती है और बगीचे में एक खुशबूदार पौधा भी।

2. लैवेंडर

लैवेंडर अपने खूबसूरत फूलों और मन को अच्छी लगने वाली खुशबू के लिए काफी पसंद किया जाता है। इसकी खुशबु बगीचे के आसपास के माहौल को चूहों के लिए कम अट्रैक्ट बनाने में कुछ मदद कर सकती है। आप इसे बगीचे की किनारी, घर के बाहर, बैठने वाली जगह या ऐसे हिस्सों में लगा सकते हैं, जहां चूहे सबसे ज्यादा आते है। लैवेंडर लगाने से बगीचे की सुंदरता भी बढ़ती है और आसपास अच्छी खुशबू बनी रहती है। इसे ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं होती और गमले में भी लगाया जा सकता है।

3. पुदीना

पुदीना अपनी तेज और ताजी खुशबू के लिए जाना जाता है और इसे बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी महक चूहों को बगीचे के आसपास आने से रोकती है। खासतौर पर जब इसकी पत्तियों को छुआ या हल्का-सा मसल दिया जाता है, तो खुशबू और ज्यादा फैलती है। इसलिए इसे बगीचे की उन जगहों पर लगाया जा सकता है, जहां चूहे ज्यादा ज्यादा दिखाई देते है। पुदीना लगाने का एक फायदा यह भी है कि इसका उपयोग चटनी, चाय और कई दूसरी चीजों में किया जा सकता है। इसे आप जमीन में लगाने के साथ गमले में भी आसानी से उगा सकते हैं।

चूहों को दूर रखने के दूसरे तरीके

सिर्फ खुशबूदार पौधे लगाने से चूहों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। अगर बगीचे में उन्हें खाने के लिए चीजें और छिपने की जगह आसानी से मिलती रहे, तो वे बार-बार वहां आ सकते हैं। इसलिए कूड़ेदान को हमेशा ढककर रखें और खाने के बचे हुए टुकड़ों को खुले में न छोड़ें। घर या बगीचे के आसपास खाना गिर जाए, तो उसे तुरंत साफ कर दें और कचरे को सही जगह पर डालें।

बगीचे में सूखे पत्ते, लकड़ियां, गत्ते, पुराने डिब्बे और बेकार सामान जमा न होने दें, क्योंकि चूहे इनमें आसानी से छिप सकते हैं। दीवार, दरवाजे, पाइप या बाउंड्री के आसपास छोटे छेद और दरारें दिखें, तो उन्हें बंद कर दें। साथ ही, घास और झाड़ियों को समय-समय पर काटते रहें, ताकि चूहों को छिपने के लिए कम जगह मिले। इन आसान बातों का ध्यान रखने से बगीचे को चूहों के लिए कम आकर्षक बनाया जा सकता है।

ध्यान रखें

पुदीना, लैवेंडर और रोजमेरी जैसे खुशबूदार पौधे बगीचे में लगाने से चूहों को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, बगीचे की सफाई रखना, खाने की चीजें खुले में न छोड़ना और चूहों के छिपने की जगह हटाना भी जरूरी है। यदि चूहों की समस्या ज्यादा बढ़ गई है या वे घर के अंदर आने लगे हैं, तो सिर्फ इन घरेलू उपायों पर डिपेंड न रहें और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल की मदद लें।

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

Video: कचरे में पड़ी एक्सपायर्ड चाकलेट, टॉफी के लिए मची लूट, बैग में भर-भरकर ले गए लोग

कानपुर के पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में डंपिंग साइट के पास फेंकी गईं चॉकलेट-टॉफियां बटोरने के लिए भीड़ जुट गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। बताया जा रहा है कि ये एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री थी। घटना ने सुरक्षित निस्तारण और लोगों की सेहत को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

ram rahim parole

“तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख…” फिल्म दामिनी में Sunny Deol का यह संवाद केवल अदालत की सुस्ती पर व्यंग्य नहीं था, बल्कि उस भारतीय व्यवस्था का आईना था जहां कानून की किताब सबके लिए एक जैसी दिखती है, लेकिन उसका इस्तेमाल सबके लिए बराबर नहीं होता।

 

आज यह संवाद फिर प्रासंगिक लगता है— क्योंकि एक तरफ देश की जेलों में हजारों विचाराधीन कैदी सालों तक सुनवाई का इंतजार करते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी करार दिया गया Gurmeet Ram Rahim Singh बार-बार पैरोल और फरलो पाकर जेल से बाहर आता है, सत्संग करता है, गाने लॉन्च करता है, वीडियो संदेश देता है और राजनीतिक मौसम के साथ उसकी “आध्यात्मिक सक्रियता” भी अचानक बढ़ जाती है।

 

सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जहां “सजा” और “सुविधा” के बीच की रेखा रसूख देखकर तय होती है।

 

जेल या वीआईपी वेटिंग लाउंज?

भारतीय जेल व्यवस्था का सिद्धांत कहता है कि पैरोल एक मानवीय राहत है — परिवार में मृत्यु, बीमारी, सामाजिक संकट या मानसिक पुनर्वास जैसे कारणों के लिए। लेकिन जब पैरोल बार-बार मिलने लगे, उसकी टाइमिंग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक दिखने लगे, और जेल से बाहर आकर दोषी व्यक्ति सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन करने लगे, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि:

 

क्या पैरोल सुधार का माध्यम है या प्रभावशाली लोगों के लिए “कानूनी छुट्टी पैकेज”?

भारत की जेलों में ऐसे लाखों कैदी हैं जिन्हें मामूली जमानत तक नहीं मिलती। कई लोग उस अपराध की अधिकतम संभावित सजा से भी ज्यादा समय विचाराधीन कैदी के रूप में काट देते हैं। उनके लिए कानून धीमा है, कठोर है, और लगभग बहरा है। लेकिन कुछ लोगों के लिए वही कानून आश्चर्यजनक रूप से लचीला हो जाता है।

 

कानून की आंखों पर पट्टी है… या चयनात्मक दृष्टि?

भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत यह मानी जाती है कि कानून “अंधा” होता है — यानी सबको बराबर देखता है। लेकिन वास्तविकता में भारतीय जनता का अनुभव कुछ और कहता है।

 

आम नागरिक के लिए:

  • अदालत = इंतजार
  • पुलिस = दबाव
  • जेल = दंड

 

लेकिन रसूखदार के लिए:

  • अदालत = प्रक्रिया
  • कानून = व्याख्या
  • जेल = अस्थायी व्यवधान

 

यही वह बिंदु है जहां लोकतंत्र धीरे-धीरे “कानूनी समानता” से “कानूनी विशेषाधिकार” की ओर खिसकने लगता है।

फ्रांसीसी दार्शनिक Michel Foucault ने लिखा था: “कानून केवल न्याय का उपकरण नहीं होता, वह सत्ता का प्रदर्शन भी होता है।” भारत में यह प्रदर्शन अब बेहद आम दृश्य हो चुका है।

 

जब अपराधी ‘इन्फ्लुएंसर’ बन जाए

सबसे विचित्र बात यह नहीं कि पैरोल मिली। सबसे विचित्र बात यह है कि जेल से बाहर आने के बाद एक दोषी व्यक्ति सार्वजनिक मंचों पर लगभग सेलिब्रिटी की तरह सक्रिय रहता है।

  • वीडियो संदेश।
  • भक्तों की भीड़।
  • राजनीतिक संकेत।
  • यूट्यूब संस्कृति।
  • डिजिटल ब्रांडिंग।

यह सब उस देश में हो रहा है जहां पीड़ितों को अक्सर अपनी पहचान छिपानी पड़ती है। भारत का सामाजिक मनोविज्ञान भी यहां कटघरे में खड़ा है। हम अपराध और प्रसिद्धि के बीच की रेखा खो चुके हैं। टीआरपी, सोशल मीडिया और राजनीतिक लाभ ने “दोषी” को भी “प्रभावशाली” बना दिया है।

 

क्या न्याय अब सिर्फ प्रक्रिया बनकर रह गया है?

भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा संकट देरी नहीं है। सबसे बड़ा संकट है — जनता का घटता भरोसा।

जब लोग देखते हैं कि:

 

  • गरीब जमानत के लिए वर्षों भटकता है।
  • किसान कर्ज के लिए जेल जाता है।
  • छात्र सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार हो जाता है।
  • लेकिन प्रभावशाली दोषी बार-बार राहत पा लेते हैं।

 

तब संविधान की किताब से ज्यादा असर जनता की निराशा करती है।

लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं चलता। लोकतंत्र इस विश्वास पर चलता है कि कानून सबके लिए समान है। और जब यह विश्वास टूटने लगता है, तब नागरिक कानून का सम्मान नहीं, बल्कि उससे दूरी बनाना शुरू कर देते हैं।

 

भारत को किस तरह की न्याय व्यवस्था चाहिए?

यह बहस किसी एक बाबा, एक पार्टी या एक केस की नहीं है। यह उस बड़े प्रश्न की बहस है: क्या भारत में न्याय व्यवस्था व्यक्ति की सामाजिक-राजनीतिक ताकत से प्रभावित हो रही है? अगर जवाब “नहीं” है, तो फिर हर बार वही चेहरे विशेष राहत क्यों पाते हैं? और अगर जवाब “हां” है, तो फिर लोकतंत्र की नैतिक नींव कितनी सुरक्षित बची है? लेखक George Orwell ने Animal Farm में लिखा था: “All animals are equal, but some animals are more equal than others.

 

भारतीय लोकतंत्र का सबसे खतरनाक क्षण वह होगा जब जनता यह मान ले कि यह पंक्ति अब केवल व्यंग्य नहीं, बल्कि वास्तविकता है।

 

अंतिम सवाल

जब जेल से बाहर आने वाला दोषी व्यक्ति खुद कानून से ज्यादा शक्तिशाली दिखने लगे, तो फिर असली कैद में कौन है? वह व्यक्ति… या भारत का न्यायबोध?

 

दिल्ली-NCR में दूसरे दिन भी बारिश का कहर, गुरुग्राम में कर्मचारियों को WFH की सलाह

Delhi-NCR Weather: दिल्ली-एनसीआर में सोमवार, 24 अगस्त को हुई तेज बारिश से राजधानी और आसपास के इलाकों में लोगों को काफी परेशानी हुई। भारी बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया था और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम के कई हिस्सों में भी पानी भरने से लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत हुई। वहीं आज मंगलवार, 25 अगस्त को भी दिल्ली में तेज बारिश का दौर देखने को मिला। इससे राजधानी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी दिल्ली में मौसम बदलने और बारिश होने की संभावना जताई है।

आज दिल्ली में दिन भर होगी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में आज आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और दिन के अलग-अलग समय पर बारिश होने की संभावना है। सुबह से दोपहर के बीच बारिश हो सकती है, जबकि दोपहर बाद या शाम को भी कुछ इलाकों में बारिश देखने को मिल सकती है। इस दौरान राजधानी का अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है, वहीं न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

हवाई सेवाओं पर भी पड़ा असर

सोमवार को दिल्ली में तेज बारिश और खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं और सड़कों पर साफ दिखाई दिया। आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कम से कम 15 उड़ानों को दूसरे शहरों के लिए भेजना पड़ा, जबकि कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ रद्द भी की गईं। राजधानी के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या सामने आई।

दिल्ली में कहां पर कितनी हुई बारिश

दिल्ली में इस साल अगस्त में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। 24 अगस्त तक सफदरजंग में 246.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से करीब 29 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं आयानगर में 266.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से लगभग 66 प्रतिशत अधिक है। भारी बारिश के दौरान जनकपुरी में 70 मिमी, आयानगर में 69.1 मिमी, पालम में 58.2 मिमी, रिज में 43.2 मिमी, लोदी रोड में 41.7 मिमी और सफदरजंग में 34.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

दिल्ली ने इन जगहों पर भरा पानी

दिल्ली में भारी बारिश के बाद कई प्रमुख सड़कों और अंडरपास में पानी भर गया, जिससे यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। कनॉट प्लेस, आईटीओ, भैरों मार्ग, मथुरा रोड, सराय काले खां और जखीरा अंडरपास में जलभराव की वजह से लोगों को परेशानी हुई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में संगम विहार में छात्र पानी से होकर गुजरते नजर आए। इसके अलावा सदर बाजार, कमला नगर, बुराड़ी, सीआर पार्क और अलकनंदा जैसे इलाकों में भी बारिश का पानी भरने की खबर सामने आई। राजधानी के कई हिस्सों में लोगों को आने-जाने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। यहां करीब 38 मिमी बारिश दर्ज की गई। राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, इफको चौक और नरसिंहपुर के आसपास सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। सोहना रोड पर कुछ स्कूल बसें और एंबुलेंस भी पानी में फंस गईं। खराब मौसम को देखते हुए गुरुग्राम प्रशासन ने मंगलवार को कॉर्पोरेट कंपनियों से कर्मचारियों को घर से काम कराने की अपील की। वहीं स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए।

DK Shivakumar-Adani meeting: कर्नाटक में अदाणी-शिवकुमार की मुलाकात को लेकर सियासी घमासान! BJP ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड को लेकर साधा निशाना

DK Shivakumar-Adani meeting: दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी ने रविवार 24 अगस्त को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के साथ मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा।

सूत्रों के अनुसार, अदाणी ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ गए थे। एयरपोर्ट लौटते समय सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर शिवकुमार से मिले। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया। यह मुलाकात हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना के बीच हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है। हालांकि, टेंडर को अभी आधिकारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

यह तत्काल पता नहीं चल सका कि शिवकुमार और अदाणी के बीच बातचीत में सुरंग सड़क परियोजना का मुद्दा उठा या मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रही। शिवकुमार ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार था जब वह (अदाणी) यहां मुझसे मिलने आना चाहते थे। वे यहां कई कारोबार कर रहे हैं। वह शिष्टाचारवश मुझसे मिलने आए थे।”

BJP हुई हमलावर

इस बीच, BJP के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने इस मुलाकात की आलोचना करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिवकुमार को अदाणी से मिलने की अनुमति दी थी। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अशोक ने कहा, “कांग्रेस दिल्ली में अदाणी का विरोध करती है, जबकि कर्नाटक में उसके पक्ष में है। क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?” उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने अदाणी के लिए ‘लाल कालीन बिछा दी’ है।

अशोक ने शिवकुमार से राहुल गांधी को यह बताने को कहा कि अदाणी एक कारोबारी हैं। वह केवल कारोबार कर रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर तंज कसते हुए अशोक ने उनसे बेंगलुरु आने और लालबाग या सैंकी टैंक में किसी पेड़ को गले लगाने को कहा जो प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना से प्रभावित होंगे। BJP सुरंग सड़क परियोजना का विरोध कर रही है। भगवा पार्टी के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है।

प्रियांक खड़गे की आई सफाई

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सीएम डीके शिवकुमार की गौतम अदाणी के साथ हुई मीटिंग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह उद्योगपति राज्य सरकार के लिए सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्टर है। टेंडर प्रोसेस पर कोई असर नहीं डाला गया है। खड़गे ने पत्रकारों से कहा, “हमारे लिए अदाणी एक कॉन्ट्रैक्टर हैं। वे कुछ प्रोजेक्ट्स में सबसे कम बोली लगाने वाले हैं। ये कर्नाटक सरकार के लिए अहम प्रोजेक्ट्स हैं। हमने टेंडर प्रोसेस को प्रभावित नहीं किया है। कोई भी L1 बन सकता है।”

BJP से पूछा सवाल

उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप पर कांग्रेस का राजनीतिक रुख नहीं बदला है। लेकिन साथ ही कहा कि राजनीतिक मतभेदों से यह तय नहीं हो सकता कि सरकारी टेंडर की प्रक्रिया कैसे होगी। खड़गे ने कहा, “अगर अदाणी कानूनी तरीके से टेंडर हासिल करते हैं, तो ठीक है।” उन्होंने टनल रोड प्रोजेक्ट पर बीजेपी के रुख पर भी सवाल उठाया। साथ ही पूछा कि क्या विपक्ष अब भी इसका विरोध करेगा, जब अदाणी ग्रुप की एक कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है।

राज्य सरकार द्वारा बताई गई बोली की जानकारी के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज ने 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यह बोली सरकार की शुरुआती अनुमानित प्रोजेक्ट लागत 17,698 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

वहीं, शिवकुमार की अदाणी से मुलाकात पर कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, “हमने साफ तौर पर कहा है कि हम एकाधिकार के खिलाफ हैं। हम किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम हमेशा कहते हैं कि अगर किसी एक उद्योगपति का एकाधिकार हो जाए, तो यह देश के लिए अच्छा नहीं है।”