मुझे धक्का लगा, टीम से ड्रॉप करने के बाद छलका सूर्यकुमार यादव का दर्द

Suryakumar Yadav


भारतीय टी-20 टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव ने माना कि जब उन्हें भारत की अंतरराष्ट्रीय टी-20 योजनाओं से बाहर किया गया तो वे हैरान रह गए थे। उन्होंने बताया कि वह 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक और उसी साल होने वाले अगले टी-20 विश्व कप में टीम की कप्तानी करने की तैयारी कर रहे थे। जून में आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम से बाहर करने से कुछ समय पहले ही चयनकर्ताओं ने सूर्यकुमार को इसकी जानकारी दी थी।

35 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि इस फैसले ने उन्हें पूरी तरह चौंका दिया, खासकर तब जब उन्होंने इस साल मार्च में घरेलू मैदान पर टीम को टी-20 विश्व कप का खिताब जिताया था। सूर्यकुमार यादव ने यूट्यूब पर आकाश चोपड़ा के शो ‘बैठ और बोल’ में कहा, “जब मैंने देखा कि मेरा नाम लिस्ट में नहीं है, तो मैं मुस्कुरा दिया। जब भी मैं दबाव वाली स्थितियों में रहा हूं या जब चीज़ें मेरे पक्ष में नहीं रही हैं, तो मैं हमेशा मुस्कुराया हूं और शांत रहा हूं। मैंने उन पलों को याद किया है और शुक्रगुजार रहा हूं। मैंने नहीं सोचा था कि 2026 में ऐसा होगा। मुझे लग रहा था कि मैं अगले दो सालों तक टीम को आगे ले जाने की तैयारी कर रहा हूं, ओलंपिक, एक और टी-20 विश्व कप और फिर आगे एक और चुनौती।”

उन्होंने कहा, “टीम के ऐलान से दो-तीन दिन पहले चयनकर्ताओं ने मुझे फ़ोन किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है।’ मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि यह मेरा स्वभाव नहीं है। जो भी फ़ैसला लिया गया, उस व्यक्ति को लगा होगा कि यह टीम के भले के लिए है। आपने फ़ैसला लिया, मुझे बताया, इसमें कोई बुराई नहीं है।” सूर्यकुमार ने खुद को भारत के प्रमुख टी-20 खिलाड़ियों में से एक के तौर पर स्थापित किया था। नवंबर 2022 में वे आईसीसी रैंकिंग में नंबर 1 पर भी पहुंचे थे। 2024 टी-20 विश्व कप के बाद रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय टी-20 से संन्यास लेने पर उन्होंने पूर्णकालिक कप्तानी संभाली।

उनकी कप्तानी में, भारत ने 50 पूरे हुए टी-20 मैचों में से 42 जीते और पुरुषों का टी-20 वर्ल्ड कप खिताब बचाने वाली और घरेलू ज़मीन पर इसे जीतने वाली पहली टीम बनी। हालांकि, न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मैच सूर्यकुमार का भारत के लिए आख़िरी मैच साबित हुआ। इसके बाद चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंप दी, जिससे उस दौर का अप्रत्याशित अंत हो गया जिसमें भारत दो साल तक टी-20 सीरीज में अजेय रहा था।


सूर्यकुमार ने कहा, “जिसे उन्होंने चुना है, उसके साथ मैंने बहुत क्रिकेट खेला है। मुझे पता है कि वह एक अच्छा खिलाड़ी, अच्छा इंसान और अच्छा कप्तान भी है। इसलिए, मुझे फ़ैसले से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन निराशा जरूर हुई क्योंकि हम दो साल से कोई सीरीज नहीं हारे थे, एशिया कप और टी-20 विश्व कप जीते थे – आप चाहते हैं कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहे। जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो, तो बदलाव क्यों।”

उन्होंने कहा, “कुछ हद तक उनकी अपनी फ़ॉर्म की वजह से, और साथ ही अगले दो साल के साइकल या अगले वर्ल्ड कप तक के समय को देखते हुए, हमें लगा कि आगे बढ़ने का यही सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने डेढ़ महीने तक मैं यही सोचता रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है? यह कैसे मुमकिन है। हमने अभी-अभी विश्व कप जीता है। हां, आईपीएल वैसा नहीं रहा जैसा मैं चाहता था। दोस्तों और परिवार ने मुझे समझाया कि यह ज़िंदगी का हिस्सा है। लेकिन जब वे चले जाते हैं, तो आप अपने परिवार के साथ अकेले रह जाते हैं। हम सोच रहे थे कि ऐसा कैसे हो सकता है।” टीम से बाहर किए जाने के बावजूद, सूर्यकुमार का खेल छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि वे भारत की योजनाओं में अपनी जगह दोबारा बना लेंगे और दूसरे मौके का इंतज़ार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मैं तैयार हूँ, मैं अभी भी खेल रहा हूं और आगे भी खेलता रहूंगा। जब भी आपको लगे कि सही समय है और हालात ठीक हैं, तो मुझे बुला लीजिएगा।”

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

पुणे की इस महिला ने 29 साल की उम्र में लिया रिटायरमेंट, वीडियो शेयर कर बताया 4-स्टेप मैजिकल फॉर्मूला

कॉर्पोरेट की भागदौड़ भरी जिंदगी से थककर, एक महिला ने 29 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया और अपने पिता के साथ मिलकर एक ‘फ़ार्म स्टे’ शुरू किया। पर्माकल्चर और फलों की खेती अपनाकर और काम के तनाव (बर्नआउट) के बजाय अपनी सेहत और खुशी पर ध्यान देकर, उन्होंने एक आत्मनिर्भर जीवनशैली बनाई। इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे ज़मीन खरीदकर और एक अच्छा इकोसिस्टम बनाकर उन्होंने अपनी मर्ज़ी की ज़िंदगी जी। उनका वायरल वीडियो अब तक हज़ारों लोगों को प्रेरित कर चुका है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में स्नेहा राजगुरु कहती हैं, “मैं 29 साल की उम्र में रिटायर हो गई। मैं आपको बताती हूं कैसे,” और फिर वे उन 4 स्टेप्स के बारे में बताती हैं जिनकी मदद से उन्होंने कॉर्पोरेट ज़िंदगी छोड़ दी।

स्टेप 1- ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदें। उसका कोई ऐसा नाम रखें जो आपके दिल के करीब हो, जैसे मैंने ‘बाब बेटी फ़ार्म’ रखा।

स्टेप 2- फलों के पेड़ लगाएं। वे आपके साथ-साथ बढ़ते हैं, उनमें सबसे कम मेहनत लगती है और वे सालों तक आपको फल देते रहेंगे।

स्टेप 3- अपना खाना खुद उगाना शुरू करें। ताकि अगर लॉकडाउन या युद्ध जैसी कोई स्थिति आए, तो आप किसी पर निर्भर न रहें। मेरा यकीन मानिए, सरकार पर भी नहीं।

स्टेप 4- अपनी ज़मीन को फूलों से भर दें। यकीन मानिए, जब आपका मन रोज़ सुंदरता देखता है, तो उसे अस्पतालों की ज़रूरत नहीं पड़ती। और सबसे ज़रूरी बात, ऐसी जगह बनाएँ जो सिर्फ़ आपके पेट को ही नहीं, बल्कि आपकी आत्मा को भी सुकून दे। क्योंकि रिटायरमेंट का मतलब उम्र से नहीं, बल्कि दबाव के बजाय शांति को चुनने से है।

उन्होंने इंस्टाग्राम वीडियो के कैप्शन में लिखा- “क्या आप भी ऐसी ज़िंदगी का सपना देखते हैं? साथ जुड़िए, आपकी यात्रा यहीं से शुरू हो सकती है,”। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे 4 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और कमेंट सेक्शन में लोगों की ढेरों प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

एक यूज़र ने लिखा, “मुझे फ़ार्म का नाम बहुत पसंद आया। यह मेरा भी सपना है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “मैं भी दबाव के बजाय शांति चुनना चाहता हूं।”तीसरे यूज़र ने लिखा, “वाह, यह सचमुच बहुत सुंदर है। उम्मीद है कि मैं भी कभी अपनी ऐसी जगह बना पाऊंगा। आप जो कर रही हैं, वह मुझे बहुत पसंद है।” एक और कमेंट करने वाले ने पूछा, “आप किस इलाके में रहती हैं? वहां ज़मीन की कीमत क्या है?”

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी ‘सैन्य एयरलिफ्ट’ से मची हलचल

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी 'सैन्य एयरलिफ्ट' से मची हलचल

South Asia strategic defense

South Asia strategic defense: 18 से 20 अगस्त के बीच पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में देखी गई अभूतपूर्व सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशियाई सामरिक संतुलन पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले स्रोतों (OSINT) और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, चीन (Xi'an Y-20) और तुर्की (Airbus A400M) के भारी सैन्य परिवहन विमानों ने करीब 60 घंटे तक पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेसों पर दर्जनों उड़ानें भरीं और उतरते देखे गए।

 

यह कोई साधारण उड़ानों का अभ्यास नहीं था। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (GHQ के पास) और कराची के मस्रूर एयरबेस पर इन विमानों की आपात लैंडिंग ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। ALSO READ: क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

पाकिस्तान की ज़मीन पर क्या उतार रहे हैं चीन और तुर्की?

सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह भारी एयरलिफ्ट सिर्फ नियमित लॉजिस्टिक्स (Routine Logistics) का हिस्सा नहीं हो सकती। इस असामान्य हलचल के पीछे निम्नलिखित सैन्य आपूर्ति की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय लॉजिस्टिक ऑपरेशन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सैन्य सामग्रियों की डिलीवरी शामिल हो सकती है: 

  • सटीक मारक हथियार और उन्नत ड्रोन (UCAVs) : तुर्की के Bayraktar Akinci/TB2 और चीन के Wing Loong III ड्रोनों की नई खेप या उनके महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स। 
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) व राडार सिस्टम : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों और ग्राउंड-बेस्ड राडार के लिए एडवांस्ड स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) व सिग्नल्स इंटेलिजेंस उपकरण।
  • एयर-डिफेंस और मिसाइल स्पेयर-पार्ट्स : चीन से प्राप्त HQ-16 और HQ-9P मिसाइल रक्षा प्रणालियों के कलपुर्जे या त्वरित रिप्लेसमेंट हार्डवेयर। 
  • 'KAAN' 5th Gen फाइटर जेट कंपोनेंट्स : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट 'KAAN' में पाकिस्तान की साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) और राडार उपकरण : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) और अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट (AEW&C) के लिए आधुनिक जैमिंग उपकरण। 
  • सटीक मारक हथियार और स्पेयर पार्ट्स : जेएफ-17 ब्लॉक 3 (JF-17 Block 3) और जे-10सीई (J-10CE) फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स व गाइडेड म्यूनिशन्स। ALSO READ: पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारतीय रक्षा एजेंसियों के लिए यह त्रिगुट (China-Pakistan-Türkiye Axis) कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका समय और तीव्रता चिंता का विषय है:

  • त्वरित क्षमता निर्माण (Rapid Capability Replenishment) : किसी संभावित आपात स्थिति के लिए पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को तेजी से मजबूत करना।
  • त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन : हाल ही में सामने आए तुर्की, पाकिस्तान और रणनीतिक सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य समन्वय का यह एक व्यावहारिक प्रदर्शन हो सकता है। 
  • 'KAAN' फाइटर जेट प्रोजेक्ट : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में पाकिस्तान की भागीदारी के बाद तकनीकी ट्रांसफर और उपकरणों की आवाजाही। 

South Asia strategic defense

हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब द्वारा हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद इस तरह की भारी सैन्य एयरलिफ्ट का होना संकेत देता है कि क्षेत्र में एक नया सैन्य ब्लॉक आकार ले रहा है। 

 

चीन की तकनीकी व वित्तीय ताकत, तुर्की की आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा—यह त्रिकोण दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत की खुफिया एजेंसियां इस 60 घंटे के रहस्यमयी एयरलिफ्ट ऑपरेशन्स के हर विवरण पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

protest of cjp workers in jaipur

राजस्थान में जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में कॉकरोच जनता पार्टी के स्कूल दौरे का ग्रामीणों ने विरोध किया और कार्यकर्ताओं को बाहर निकाल दिया। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसे भाजपा प्रायोजित विरोध बताते हुए मारपीट का आरोप लगाते हुए स्कूल की बदहाली पर सवाल उठाए।

 

दरअसल, CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका इसी स्कूल में पहुंचने वाले थे, लेकिन इससे पहले ग्रामीणों ने सीजेपी के कार्यकर्ताओं को धक्का देकर गांव से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ग्रामीण सीजेपी के विरोध में स्कूल के बाहर धरना पर बैठ गए हैं।

बच्चों को भैंसों में तबेले में चल रहा है स्कूल

आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'यह वहां के गांव वाले नहीं भाजपा के बुलाये हुए गुंडे है। इनका सरगना कमल प्रधान वहां गरीब लोगों की जमीन पर कब्जे का काम करता है। बच्चों को भैंसों में तबेले में पढ़ाया जा रहा है, और यह रोकने पर भाजपा अपने गुंडे भेज रही है क्या शर्मनाक स्थिति है।'

 

उन्होंने दावा किया कि रामपुरा, कंवरपुरा स्थित सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से भैंसों के तबेले में चल रहा है। मैं अभी वही पहुंच रहा हूं। लेकिन हमारी टीम के कुछ साथी जो वहां पहुचे हुए थे, उनकी टीम के साथियों के साथ भाजपा के गुंडों ने मारपीट की। भाजपा को हमारे बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंजूर है, लेकिन इन स्कूलों को अगर हम ठीक करवाने की कोशिश करें यह मंजूर नहीं है।

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

Can You Drink Rain Water

Can You Drink Rain Water: बादलों से बरसती बूंदें जितनी राहत देती हैं, उतनी ही मन में एक बड़ी उलझन भी छोड़ जाती हैं—क्या गिलास भरकर बारिश का यह पानी पिया जा सकता है? पहली नज़र में कांच सा साफ़ दिखने वाला यह पानी सीधा पीने के लिए मुफ़ीद नहीं होता।

 

क्यों नहीं पीना चाहिए सीधा बारिश का पानी?

हवा का ज़हर: बूंदें आसमान से ज़मीन तक पहुँचते-पहुँचते हवा में मौजूद धूल, धुएं, टॉक्सिक केमिकल्स और स्मॉग को अपने अंदर समेट लेती हैं।

बैक्टीरिया का घर: जब यह पानी छतों, नालियों या पाइपों से होकर बहता है, तो इसमें छिपे सूक्ष्मजीव और नुकसानदेह बैक्टीरिया आसानी से घुल जाते हैं।

एसिडिक कुदरत: वायुमंडलीय गैसों के संपर्क में आने से कई बार बारिश के पानी में एसिडिक यानी अम्लीयता की मात्रा बढ़ जाती है, जो सेहत पर भारी पड़ सकती है।

 

पीने लायक न सही, पर बेहद काम की हैं ये बूंदें

भले ही आप इसे सीधे गटक न सकें, लेकिन पानी की हर बूंद को कई स्मार्ट तरीकों से काम में लाया जा सकता है:

पौधों की सेहत का राज: यह पानी नेचुरल मिनरल्स का खजाना होता है। बागवानी में इसका इस्तेमाल आपके घर के पौधों को नई रंगत देता है।

चमकदार घर और गाड़ियां: फर्श पोंछने, खिड़कियों और बर्तन चमकाने से लेकर अपनी चमचमाती कार धोने तक, यह पानी पानी की बर्बादी रोकता है।

लॉन्ड्री और फ्लशिंग: कपड़े धोने से लेकर टॉयलेट फ्लश तक के भारी-भरकम इस्तेमाल में बारिश का पानी सबसे बेहतर विकल्प है।

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पानी सहेजने के तरीके और कुछ जरूरी सावधानियां

छत पर टैंक सेट करके या फिर प्लास्टिक के बड़े बैरल और ड्रम लगाकर आप इस बरसाती खजाने को आसानी से जमा कर सकते हैं। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान ज़रूर रखें:

  • जिस ड्रम या टैंक में पानी स्टोर कर रहे हों, उसे पहले अच्छी तरह साफ-सुथरा कर लें।
  • पानी जमा करते वक्त एक बुनियादी फिल्टर ज़रूर लगाएं ताकि पत्तियां या कचरा अंदर न जाए।
  • अगर किसी मजबूरी में इस पानी को लंबे समय तक इस्तेमाल या किसी काम में लेना पड़े, तो इसे अच्छी तरह उबाल लेना ही समझदारी है।
  • कुदरत की इस अमूल्य देन को सही तरीके से सहेजकर आप न सिर्फ अपने पानी का बिल घटा सकते हैं, बल्कि धरती को बचाकर एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़ भी निभा सकते हैं।

 

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की ‘खाकी’ को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की 'खाकी' को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

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उत्तरप्रदेश पुलिस के पहले आधिकारिक एंथम ‘खाकी का सितारा’ का 6.5 मिनट का पूरा वीडियो यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। महानायक अमिताभ बच्चन ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पोस्ट को कोट ट्वीट करते हुए इस एंथम को अपने खास अंदाज में सलाम किया। अमिताभ बच्चन ने लिखा, 'कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं… कुछ ख़ाकी पहनकर ज़मीन पर। ख़ाकी का सितारा।'

 

‘खाकी का सितारा’ सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारियों और उसके कामकाज के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने की कोशिश है। एंथम में कानून-व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, तकनीक, आपदा एवं राहत कार्य, जनसेवा और रोजमर्रा की पुलिसिंग तक खाकी के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

 

खास बात यह है कि इस एंथम की शूटिंग एक-दो दिन में नहीं, बल्कि महाकुंभ 2025 से स्वतंत्रता दिवस 2026 तक अलग-अलग मौकों और परिस्थितियों में की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस के इस इन-हाउस क्रिएटिव प्रोडक्शन को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा। महाकुंभ की विशाल पुलिस व्यवस्था से लेकर अलग-अलग मौकों पर कानून-व्यवस्था संभालते पुलिसकर्मियों तक, कैमरे ने खाकी की ड्यूटी के कई पहलुओं को रिकॉर्ड किया।

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। ऐसे में ‘खाकी का सितारा’ के जरिए पुलिस की उसी भूमिका को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है। वीडियो में पुलिस को केवल कार्रवाई करने वाली एजेंसी के तौर पर नहीं, बल्कि संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली व्यवस्था के रूप में दिखाया गया है।

 

त्योहार हो या आपदा, भीड़ का दबाव हो या कानून-व्यवस्था की चुनौती- खाकी हर जगह मौजूद दिखाई देती है। यही इस एंथम का मूल संदेश है। वीडियो में वर्दी के पीछे के उस इंसान को भी दिखाने की कोशिश की गई है, जो अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर ड्यूटी करता है और कई बार बिना किसी पहचान या अपेक्षा के अपना कर्तव्य निभाता है।

 

इस एंथम को देश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी आवाज और प्रतिभा दी है। इसमें अमिताभ बच्चन की प्रभावशाली आवाज, पद्मश्री शंकर महादेवन का स्वर और संगीत तथा जाने-माने कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव के शब्द हैं। अभिनेता करण आनंद ने इसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है।

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14 अगस्त को लोक भवन में हुआ था लॉन्च

 

‘खाकी का सितारा’ का औपचारिक लॉन्च 14 अगस्त को लोक भवन, लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस मौके पर पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री नाना पाटेकर, गीतकार आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता करण आनंद सहित फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हुए।

 

लॉन्च के दौरान शंकर महादेवन ने ‘खाकी का सितारा’ से जुड़ने को अपने जीवन के खास पलों में से एक बताया। उन्होंने इस एंथम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार को समर्पित किया। उन्होंने गीत की पंक्तियां “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” और “हम डटे रहे, हम खड़े रहे, चट्टानों जैसे अड़े रहे” सुनाते हुए कहा कि संगीत के जरिए पुलिस की सेवा, साहस और संकल्प को आवाज देना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।

 

खाकी के कई रंग, एक ही संकल्प

 

‘खाकी का सितारा’ में पुलिस की सख्ती के साथ उसकी संवेदनशीलता को भी जगह दी गई है। कहीं कानून-व्यवस्था संभालते जवान नजर आते हैं, तो कहीं महिला सुरक्षा और जनसेवा में जुटी पुलिस दिखाई देती है। कहीं महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन की जिम्मेदारी है, तो कहीं आपदा और राहत के बीच लोगों तक पहुंचती खाकी।

यानी यह एंथम सिर्फ पुलिस की वर्दी का गीत नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की कहानी है जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस हर दिन निभाती है। “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” के संदेश के साथ ‘खाकी का सितारा’ योगी सरकार के उस कानून-व्यवस्था मॉडल की भी तस्वीर पेश करता है, जिसमें पुलिस को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता की सुरक्षा, सेवा और भरोसे की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

अमिताभ बच्चन के शब्दों में कहें तो कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं और कुछ खाकी पहनकर जमीन पर- ‘खाकी का सितारा’ इसी जमीन पर चमकने वाली खाकी को समर्पित है।

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

रितेश हिंडोचा को 3 साल की उम्र में Down Syndrome होने का पता चला। लेकिन उनके परिवार ने उन्हें कभी सीमाओं में नहीं बाँधा। Swimming, Speech Classes, Sports, लोगों से जुड़ना, हर कदम ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
45 साल की उम्र में भी रितेश उसी जोश के साथ ज़िंदगी जीते हैं। Covid के दौरान शुरू हुआ उनका Instagram आज लाखों लोगों तक मुस्कान और उम्मीद पहुँचा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में भी काम किया।
रितेश की कहानी याद दिलाती है कि सही साथ, प्यार और भरोसा किसी भी Diagnosis से बड़ा हो सकता है।

@riteshhindocha

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खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha

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Balochistan Independence Day: 11 अगस्त को ही आजादी सेलिब्रेट करने वाला था बलूचिस्तान, जानिए आज ही के दिन वहां क्या क्या हुआ

Balochistan Independence Day: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘आजादी दिवस’ मनाए जाने को लेकर एक बार फिर अलग देश की मांग तेज हो गई है। बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस मौके पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक मान्यता दी जाए।

बलोच नेता मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए। इस मौके पर बलूच नेता ने पाकिस्तान पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहंच गए हैं जहां हम सिर्फ अपनी आजादी का जश्न ही नहीं मनाते। बल्कि दुनिया से यह मांग भी करते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए। आजादी के इस पवित्र अवसर पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।”

भारत का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य दुनिया के और खासकर भारत के बहादुर मुख्यधारा के मीडिया, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, धार्मिक नेताओं, सांसदों और उन सभी भाइयों और बहनों का दिल से आभार व्यक्त करता है जिन्होंने बलोचिस्तान की आवाज को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया और हमारे लोगों की आवाज बने। बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन मिलना जारी रहना चाहिए ताकि हम अपनी जमीन, बलूचिस्तान से पाकिस्तान रूपी कैंसर को हटा सकें।”

50 हजार बलोच पाकिस्तान में कैद

बलूचिस्तान में आजादी को दबाने के पाकिस्तान के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मीर यार बलोच ने दावा किया कि 50 हजार से ज्यादा बलोच अभी भी पाकिस्तान की यातना कोठरियों में अमानवीय अत्याचार सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की आजादी की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों की वजह से मिली है।”

बलूचिस्तान में कुर्बानियों के मजबूत इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी हमलावरों को रोका है। उन्हें बलूचिस्तान से पीछे हटने पर मजबूर किया है। पाकिस्तान के पास भले ही हजारों टैंक, सैकड़ों लड़ाकू विमान, तोपखाने और एक बड़ी सेना हो, फिर भी शारीरिक, मानसिक और लड़ने की क्षमता के मामले में बलूचिस्तान की सेना पाकिस्तान की सेना से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और सफल है।

बलूचिस्तान की सेना एक मजबूत फोर्स है जो हर स्थिति का सामना करने में सक्षम है। दुनिया की पेशेवर सेनाओं से मुकाबला करने के लिए तैयार है। बलूचिस्तान के इलाके को देखते हुए एक बड़ी सेना की जरूरत है। इसलिए बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है।”

11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी ‘आजादी’ का दिन?

जब बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, तो ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एम्बेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने कहा, “1947 में जब अंग्रेज भारत से गए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं थे। लेकिन बलूचिस्तान मौजूद था। उसने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी का ऐलान किया था। अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। इसे विश्व शांति की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान की ज़मीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है। अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है, तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। आज 56 से ज्यादा देश बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक ऐसा दौर जिसमें टकराव और जबरदस्ती से अब कोई नतीजा नहीं निकलता।”

दुनिया भर में मनाया गया आजादी का जश्न

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

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मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

Colombia Earthquake: कोलंबिया में सबसे शक्तिशाली भूकंप से अब तक 132 मौतें, 570 से ज्यादा लोग घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Colombia Earthquake: सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचाई है। देश का सबसे गरीब विभाग चोको और मशहूर कॉफी एक्सिस इलाके इस भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बता दें कि इस भयानक आपदा से अब तक कम से कम 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

वहीं, भूकंप के तेज झटकों से दर्जनों इमारतें ढह गई हैं और मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल, राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

कोलंबिया की जियोलॉजिकल सर्विस के मुताबिक, यह 21वीं सदी में देश में दर्ज किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।

1. कोलंबिया का सबसे गरीब इलाका चोको, एक बड़ी बचाव चुनौती का सामना कर रहा है

भूकंप का केंद्र चोको विभाग के सैन जोस डेल पालमार के पास था। चोको कोलंबिया के सबसे गरीब इलाकों में से एक है, जहां दो-तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इस इलाके में सड़क संपर्क बेहद सीमित है और कई गांव दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे हैं। ऐसे में राहत और बचाव टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से रेस्क्यू और राहत अभियान की परेशानी और बढ़ गई है।

2. कॉफी उत्पादन वाले इलाके में भारी तबाही

कोलंबिया के कॉफी उत्पादन वाले इलाके के बीचों-बीच स्थित रिसराल्डा (Risaralda) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। यहां के परेरा (Pereira) में सबसे ज्यादा 60 लोगों की मौत हुई है, जबकि डॉस्क्यूब्राडास (Dosquebradas) में भी भारी तबाही हुई है। अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन कर रहे हैं और बचाव टीमें गिरी हुई और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच काम कर रही हैं।

3. 1,500 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त

राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने बताया कि 1,577 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें से 37 पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। 60 से ज्यादा इमारतें ढह गई हैं, जबकि 18 स्वास्थ्य केंद्र और 52 स्कूल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, पांच राजधानी शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

4. बचावकर्मी बचे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं, अस्पतालों को भी नुकसान

भूकंप ने कई शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कैली में यूनिवर्सिटी अस्पताल का एक हिस्सा ढह गया, जिससे मरीज अंदर फंस गए। अस्पताल के बुनियादी ढांचे का लगभग 30% हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, जिसमें बच्चों के इलाज (पीडियाट्रिक्स), इंटरनल मेडिसिन और नवजात शिशु इकाई (नियोनेटल यूनिट) वाले हिस्से शामिल हैं। मलबे से कम से कम चार लोगों को बचाया गया, जबकि अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

5. बचाव दल ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन

गिरी हुई इमारतों के मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए प्रभावित इलाकों में पुलिस, फायरफाइटर, सैनिक और वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है। कैली में, बचावकर्मियों ने गिरी हुई एक इमारत से दो महिलाओं और दो बच्चों को जिंदा बाहर निकाला है। अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों को ढूंढना और उन्हें बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

6. तबाही से जूझ रहे कोलंबिया की मदद के लिए आगे आए कई देश

भूकंप से हुई भारी तबाही के बीच कई देशों ने कोलंबिया की मदद के लिए रेस्क्यू टीम, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरण भेजने की पेशकश की है। इक्वाडोर ने 47 बचावकर्मियों, खोजी कुत्तों और ऐसे उपकरणों की पेशकश की है, जो करीब सात दिनों तक बिना बाहरी मदद के काम कर सकते हैं। इसके अलावा, अल साल्वाडोर और मैक्सिको ने भी सहायता की पेशकश की है। जबकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे कोलंबिया की मदद के लिए तैयार हैं।

बता दें कि यह भूकंप सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 7:34 बजे आया। US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इसका केंद्र चोको (Chocó) में सैन होज़े डेल पालमार के पास ज़मीन से 107 किलोमीटर की गहराई में था। बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही, अधिकारी पश्चिमी और मध्य कोलंबिया में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और साथ ही टूटी हुई सड़कों, ठप पड़े संचार और ज़रूरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं से भी निपट रहे हैं।

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