कांग्रेस को सहयोगियों का मैसेज

विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों ने कांग्रेस पार्टी को बहुत साफ शब्दों में मैसेज दिया है। यह कांग्रेस के ऊपर है कि वह उस मैसेज को किस रूप में लेती है और आगे का राजनीतिक रास्ता कैसे बनाती है। इस समय देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहा है उस संकट के बीच विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई थी। तभी कायदे से सभी पार्टियों को अपने रागद्वेष छोड़ कर उसमें शामिल होना चाहिए था। यह सबको पता है कि डीएमके ने किन परिस्थितियों में गठबंधन छोड़ा और पंजाब के चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ दिखना कितना मुश्किल है। इसके बावजूद एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त मनमानियों का मुद्दा पार्टियों के निजी लाभ हानि से बड़ा है। आप और डीएमके इस बात पर राजी भी हैं कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में कांग्रेस का साथ देंगे। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत कर चुकी है।

दोनों पार्टियां इस मुद्दे के महत्व को समझ रही हैं फिर भी बैठक में नहीं शामिल हुईं। सबसे हैरान करने वाला रवैया समाजवादी पार्टी का था। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक शामिल नहीं हुए। दिल्ली में पार्टी की सारी गतिविधियां संभालने वाले उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक में नहीं गए। यहां तक की अखिलेश के चचेरे भाई और कई बार के सांसद धर्मेंद्र यादव को भी अखिलेश ने बैठक में नहीं भेजा। सुबह के 11 बजे जिस समय बैठक शुरू हुई उसी समय अखिलेश यादव अपने चाचा रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह में काम करने वाले धनराज परिमल नाथवानी का राज्यसभा सीट के लिए नामांकन करा रहे थे। सोचें, नामांकन की आखिरी तारीख छह अक्टूबर है। लेकिन अखिलेश ने नामांकन के लिए वही दिन चुना, जिस दिन बैठक हो रही थी और समय भी वही चुना जब बैठक शुरू हुई। यह भी कहा गया कि लखनऊ में किसानों का एक सम्मेलन था, जिसमें अखिलेश को शामिल होना था। यह एक बहाना बना।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से जुड़े। जानकार सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने इशारों में कहा कि कांग्रेस को एकला चलो की नीति छोड़नी चाहिए। सहयोगी पार्टियों की दूरी का यही असली कारण है। कांग्रेस इन दिनों इस उत्साह में है कि उसका समय आ गया है और अब उसको किसी दूसरी पार्टी की जरुरत नहीं है। सोशल मीडिया में कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग बता रहे हैं कि भाजपा के बुरे दिन चल रहे हैं। हालांकि यह बात तब कही जा रही है, जब चार महीने पहले ही भाजपा पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में बड़ी जीत हासिल की और असम व पुडुचेरी में एनडीए की सत्ता बचाई है। फिर भी यह बात कही जा रही है और कांग्रेस इस पर यकीन भी कर रही है। कांग्रेस को यह भी यकीन हो गया है कि मुस्लिम और दलित तो उसके साथ आ गया है और अब बाकी बहुजन का आना बाकी है। उसने तय कर किया है कि उसको सामान्य जातियों का वोट नहीं चाहिए। कांग्रेस के इस एटीट्यूड से परेशान पार्टियों ने उसको मैसेज दिया है। यह समझाया है कि कांग्रेस को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलने की कोशिश करनी चाहिए। जैसे सीपीएम ने बताया कि कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बैठक का न्योता ही नहीं दिया। यह बता था कि उसके नेता नहीं आएंगे। लेकिन जब कांग्रेस संसद में आप के साथ तालमेल बनाती है तो इस बैठक के लिए भी न्योता देना चाहिए था।

निर्वाचन सदन को घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में बुधवार को बड़ा फैसला हुआ। बैठक में शामिल पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और इस्तीफा नहीं देने पर छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय यानी नई दिल्ली के अशोक रोड पर स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेंगी। इस बीच दो से आठ अक्टूबर के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी पार्टियां पूरे देश में मार्च निकालेंगी।

गौरतलब है कि बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें 19 पार्टियों के दो दर्जन से ज्यादा नेता शामिल हुए। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सीपीएम महासचिव एमए बेबी सहित कई बड़े नेता बैठक में शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से बैठक में शामिल हुए। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। समाजवादी पार्टी की ओर से दो सांसद बैठक में शामिल हुए।

करीब तीन घंटे चली बैठक में तीन बातों पर सहमति बनी। विपक्षी पार्टियों ने तय किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया जाए। चुनाव आयोग से विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही नाम हटाने से पहले वोटर को नोटिस और अपील का मौका देने की मांग भी की गई। विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में 19 पार्टियां शामिल हुईं, जिनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

बैठक के बाद खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है। बैठक में ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को चोर और डाकू कहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा और जरुरत हुई तो चांद, तारों तक जाएगा। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। राहुल ने कहा, ‘हम एक गठबंधन हैं और देश में बड़ा बदलाव लाएंगे’। तेजस्वी यादव ने फॉर्म छह में किए गए बदलाव को विपक्ष की बड़ी जीत बताया।

विपक्ष की बैठक आज

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर हुए खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक बुधवार को होगी। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं की यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि बैठक से पहले विपक्ष का बिखराव भी साफ दिख गया है। कई पार्टियों के नेता इसमें नहीं शामिल हो रहे हैं।

पिछली बैठक की ही तरह इस बार भी डीएमके और आम आदमी पार्टी इस बैठक में नहीं शामिल होंगे। गौरतलब है कि इस बैठक के समन्वय का काम कांग्रेस पार्टी देख रही है और बताया जा रहा है कि उसने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं दिया। बहरहाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में नहीं शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहेंगे और पार्टी की ओर से कोई अन्य नेता शामिल होगा। उद्धव ठाकरे भी बैठक के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पिछले तीन साल में यह आठवीं बैठक है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह तीसरी बैठक है। लोकसभा के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक बैठक हुई थी। उसके दो साल बाद आठ जून 2026 को बैठक हुई थी। उसमें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। उसमें तय हुआ था कि दो महीन बाद अगस्त में हैदराबाद में बैठक होगी। लेकिन वह बैठक नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाने की पहल की।

बहरहाल, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को बताया गया कि अखिलेश यादव 30 सितंबर को लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात भी की है। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता के कारण नहीं आएंगे।

बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इसमें शामिल होंगे। राजद के तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार की पार्टी के भी बैठक में शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एमए बेबी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन उन्होंने केजरीवाल को बैठक का न्योता नहीं दिया क्योंकि यह काम कांग्रेस को करना है।

उद्धव और राज ठाकरे करेंगे प्रदर्शन

मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानियों और एसआईआर में गड़बड़ी के खिलाफ महाराष्ट्र में रविवार, चार अक्टूबर को एक बड़ा प्रदर्शन होगा। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मंगलवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। चुनाव आयोग के खिलाफ यह प्रदर्शन रविवार को भायखाला से शुरू होगा और बीएमसी मुख्यालय तक जाएगा। उद्धव ठाकरे की शिव सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बताया है कि इस प्रदर्शन की तैयारियों के कारण उद्धव बुधवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली नहीं जा रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़ेंगे।

विपक्ष क्या साझा आंदोलन करेगा?

विपक्षी पार्टियों को एक के बाद एक ऐसे मुद्दे मिल रहे हैं, जिन पर वह साझा आंदोलन करे तो सरकार के खिलाफ नाराजगी को दिशा दे सकता है। ताजा मामला चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हुए खुलासे का है। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर आयोग में एक राय नहीं है और इसे लेकर 10 महीने के अंदर दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई। नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में किए गए बदलाव को तो दो आयुक्तों ने अवैध और अनधिकृत तक बताया। ऐसे ही ईआरओ को चुनाव आयोग का सेंट्रल डाटा बेस इस्तेमाल करने से रोकने और नाम काटने व जोड़ने के उनके मूल अधिकार को ही कमतर करने का आरोप लगाया। यह बहुत बड़ा मुद्दा है और अभी तक विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जो आरोप लगाती थीं, इस रिपोर्ट से एक तरह से उनकी पुष्टि हुई है।

फिर भी ऐसा नहीं लग रहा है कि विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर इसके खिलाफ आंदोलन करेंगी। जंतर मंतर का प्रदर्शन हो या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला हो सभी पार्टियां अपनी राजनीति अलग कर रही हैं। राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे हैं तो अखिलेश यादव अपने राज्य के चुनाव में लगे हैं। ममता बनर्जी अपने राज्य में फंसी हैं तो तेजस्वी यादव को किसी बात से मतलब नहीं है। झारखंड में हेमंत सोरेन सत्ता में हैं तो उनकी चिंताएं अलग हैं। एमके स्टालिन गठबंधन से अलग हो गए हैं तो शरद पवार की पोजिशन स्पष्ट नहीं है कि वे इंडिया ब्लॉक में हैं या तटस्थ हैं और एनडीए में जाने की तैयारी कर रहे हैं। रही बात उद्धव ठाकरे की तो उनके पास बहुत ताकत नहीं बची है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के पास ताकत है और नैरेटिव बनाने की क्षमता भी है लेकिन उनको पंजाब में कांग्रेस से चुनाव लड़ना है और गोवा में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की राजनीति करनी है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि विपक्षी पार्टियों के साथ बात हो और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आई रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाए। मुश्किल यह है कि साझा आंदोलन का चेहरा कौन होगा? पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में जैसे राहुल गांधी अभियान चला रहे हैं उसी आधार पर कांग्रेस चाहेगी कि इस आंदोलन का चेहरा भी राहुल हों। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता चाहते हैं कि केजरीवाल आंदोलन का नेतृत्व करें। आप और ममता बनर्जी की पार्टी ने इस मामले में सबसे दो टूक स्टैंड लिया है। दोनों ने हाल के सभी चुनावों को रद्द करने और एसआईआऱ को भी रद्द करने की मांग की है। अगर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इन दो मांगों को लेकर एकजुट होती हैं और देशव्यापी आंदोलन शुरू होता है तो उसका बड़ा असर होगा। एसआईआर के बाद मसौदा सूची में 13 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं। हालांकि बाद में कुछ लोगों के नाम जुड़े लेकिन फिर भी करोड़ों लोगों के नाम कटे हैं। सो, एसआईआर को रद्द करना एक बड़े आंदोलन का मुद्दा हो सकता है। लेकिन मुश्किल यह है कि जून में बैठक के बाद ‘इंडिया’ ब्लॉक की फिर दोबारा बैठक नहीं हुई है। कौन बैठक की पहल करे, कौन एजेंडा तय करे, खर्च कौन जुटाए और कौन नेतृत्व करे ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं के पास नहीं है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि सब अपनी अपनी लड़ाई लड़ेंगे और संसद सत्र का इंतजार करेंगे कि उसमें इस मुद्दे को उठा कर जवाब मांगेंगे। सिर्फ संसद में विरोध प्रदर्शन करने की राजनीति से विपक्ष को कोई लाभ नहीं हो रहा है।

पूरे विपक्ष का ज्ञानेश पर हमला

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप दोहराए। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि समय आने पर किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे सबने ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की।

असल में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायरे से बाहर निकल कर फैसले करते हैं और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों में शामिल नहीं करते हैं। दोनों आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार इसकी शिकायत की है। दोनों आयुक्तों ने ‘अवैध और अनधिकृत’ काम करने का आरोप भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाया है। इस रिपोर्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने एक वीडियो में कहा है, ‘मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो’। कांग्रेस के सांसद और सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील अभिषेक सिंघवी ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि इस खुलासे के बाद ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने महाभियोग की भी मांग की।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा है, ‘सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है’।

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने अखबार की रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ईआरओ को है, फिर दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं’? महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बैलट पेपर का उपयोग करके फिर से चुनाव होने चाहिए’।

कांग्रेस से गठबंधन खत्म होने के बाद तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी में DMK, कनिमोझी ने ममता बनर्जी से की मुलाकात

डीएमके ने कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन टूटने के बाद अब INDIA bloc के प्रमुख घटक दलों के साथ मिलकर कांग्रेस-मुक्त तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। इसी सिलसिले में डीएमके की उप महासचिव व सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कोलकाता में ममता बनर्जी से उनके कालीघाट आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

TMC के एक नेता ने बताया, “कनिमोझी ने ममता बनर्जी के आवास पर उनके साथ बंद कमरे में बैठक की। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई।”

बता दें कि यह बैठक कनिमोझी की मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार के साथ बातचीत के कुछ दिनों बाद हो रही है।

गौरतलब है कि कनिमोझी की इन मुलाकातों ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है, जब DMK और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खिंचाव की खबरें हैं। वहीं, विपक्षी INDIA ब्लॉक में शामिल कई क्षेत्रीय दलों के बीच भी अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

TMC और कांग्रेस में टकराव

बता दें कि TMC और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच टकराव देखने मिला है।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया कि TMC ने अपने केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

 

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जनता दल यू का मतलब नीतीश कुमार है

बिहार में इन दिनों नाम बदलने की चर्चा जोरों पर है। एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानी हम के नेता व राज्य सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम बदल कर नीतीश पुर रख देने चाहिए। ध्यान रहे सुमन केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे हैं और सबको पता है कि मांझी को नीतीश कुमार ने नौ महीने के लिए मुख्यमंत्री बनवाया था। अब भी एनडीए में हम को नीतीश के करीब माना जाता है। सो, हम के नेता संतोष सुमन ने नीतीश के नाम से एक शहर का नाम रखने की मांग करके राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है।

उधर जनता दल यू में यह बहस चल रही है कि क्या पार्टी का नाम बदल कर नीतीश के नाम पर किया जाए। पहले संजय झा ने यह बात कही। उसके बाद बहस चल निकली। कहा जा रहा है कि जनता दल यू का नाम बदल कर जनता दल नीतीश कर दिया जाए। गौरतलब है कि देश में बहुत सी पार्टियों के नाम नेताओं के नाम पर हैं। बिहार के पड़ोसी ओडिशा में बीजू जनता दल का नाम महान समाजवादी नेता बीजू पटनायक के नाम है। अब शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिव सेना में भी दोनों का नाम है। एक समय कांग्रेस के नाम में इंदिरा गांधी का नाम था। सो, नेता का नाम पार्टी के नाम में शामिल करना कोई हैरानी की बात नहीं है। बिहार के नेता कह भी रहे हैं कि जनता दल यू का मतलब नीतीश कुमार है। माना जा रहा है कि पार्टी के ऊपर उनके बेटे निशांत कुमार का उत्तराधिकार संपूर्ण रूप से स्थापित करने के लिए यह प्रस्ताव चर्चा में लाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा अब इस चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं।

Disha Salian Death Case: आदित्य ठाकरे से लेकर डिनो मोरिया और रिया चक्रवर्ती तक…दिशा सालियन मौत मामले में CBI की FIR में इन दिग्गजों के नाम

Disha Salian Death Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज की है। इस महीने की शुरुआत में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सालियान की मौत की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने छह साल तक FIR दर्ज नहीं करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसकी जांच से जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े होते हैं। पीठ ने छह साल तक मामले को केवल दुर्घटनावश मौत के रूप में देखने के लिए पुलिस की आलोचना की थी। जांच में स्पष्ट विसंगतियों की ओर इशारा किया था।

कैसे हुई थी सालियान की मौत?

राजपूत की मैनेजर के रूप में कुछ समय काम कर चुकीं दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने मामले में दुर्घटनावश मौत की रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी। राजपूत एक सप्ताह बाद 14 जून 2020 को अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। इसके बाद दोनों की मौत की घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर अटकलें लगने लगी थीं।

राजपूत की मौत के बाद मचे हंगामे के बीच महाराष्ट्र सरकार ने मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बाद में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल करते हुए कहा था कि राजपूत की मौत आत्महत्या से हुई थी। हालांकि, संबंधित अदालत ने अभी इस रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं की है।

CBI की FIR में इन दिग्गजों के नाम

अधिकारियों ने बताया कि दिशा सालियन की मौत के मामले में दर्ज FIR में शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया और रिया चक्रवर्ती के नाम शामिल हैं। यह घटनाक्रम बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश देने के लगभग दो सप्ताह बाद हुआ है। हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने और गलत जानकारी देने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक, इस FIR में कई दिग्गजों के नाम हैं जिनकी भूमिका की जांच की जानी है। इनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे के अलावा रोहन रॉय, एक्टर डिनो मोरिया और सूरज पंचोली, आदित्य के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम शामिल हैं। दस्तावेज में राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, कई पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं।

उद्धव ठाकरे का जिक्र

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI की FIR में कहा गया है, “तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (आदित्य ठाकरे के पिता) और अन्य लोगों ने साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में अहम भूमिका निभाई। संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए। उन पर केस के कागजात, फाइलें और अन्य सार्वजनिक रिकॉर्ड नष्ट करने या छिपाने, आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करने और गैर-कानूनी कामों एवं अपराधियों को बचाने के लिए सार्वजनिक धन, मैनपावर और पुलिस मशीनरी का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।”

CBI की FIR के अनुसार, आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और पोस्टमार्टम में देरी के लिए जिम्मेदार डॉक्टर एवं कर्मचारी उन लोगों में शामिल हैं जिनकी भूमिका की जांच जरूरी है। इससे पहले, केंद्रीय जांच एजेंसी ने जांच में मदद के लिए पुलिस को पत्र लिखकर दिशा सालियन की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे थे।

पिता ने की थी CBI जांच की अपील

पिछले हफ्ते सालियन के पिता सतीश सालियन ने अपनी बेटी की मौत की जांच के सिलसिले में CBI के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। अपने बयान में सतीश सालियन ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे और शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों ने कथित साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में अहम भूमिका निभाई।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को CBI जांच का आदेश दिशा सालियन के पिता की याचिका पर दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि जून 2020 में अपनी बेटी की मौत की जांच में मुंबई पुलिस ने लापरवाही बरती थी। कोर्ट ने छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि मौत के छह साल बाद भी सालियन के परिवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और ADR की कॉपी नहीं दी गई थी।

‘मैं आपके साथ हूं’, TMC और उद्धव सेना के बागी सांसदों से बोले PM मोदी

संसद के मानसून सत्र के बीच दिल्ली में शुक्रवार की सुबह विपक्ष से अलग होकर NDA के साथ आए सांसदों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाश्ते पर मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सांसदों को भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। जानकारी के अनुसार, संसद के मानसून सत्र के दौरान बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्ष छोड़कर एनडीए में आए नेताओं के स्वागत के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा, “आपके बारे में कौन क्या कह रहा है, इसकी चिंता मत कीजिए। घबराने की कोई जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं।”

पीएम मोदी की बैठक में क्या हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस नाश्ता बैठक में करीब 45 सांसद शामिल हुए। इनमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर हाल ही में एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसद, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के सात पूर्व सांसद (जिनमें से छह अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के 20 सांसद और अजित पवार गुट की एनसीपी के दो सांसद मौजूद थे। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के सांसदों से कहा कि वे लोगों के बीच अपनी मौजूदगी और संपर्क को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की के लिए पश्चिम बंगाल का विकास भी बहुत जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में हर सांसद को उनके सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ाव से जुड़ी जानकारी का एक प्रिंटआउट दिया गया। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों से ज्यादा से ज्यादा जुड़ें और अपनी पहुंच बढ़ाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “जब पश्चिम बंगाल आगे बढ़ता है, तो पूरा भारत आगे बढ़ता है।” उन्होंने सांसदों से कहा कि राज्य में विकास के लिए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए बेहतर सड़क, रेल और अन्य सुविधाओं के साथ तेज़ विकास पर काम करना होगा। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को हर साल अपनी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बड़े काम करने हैं, इसलिए सभी का स्वस्थ और फिट रहना बहुत जरूरी है।

बैठक के दौरान चाय पर कुछ हल्के-फुल्के और मजेदार पल भी देखने को मिले। जब मेहमानों को माचा चाय परोसी गई, तो बीजेपी सांसद शताब्दी रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके बारे में बताया और कहा कि यह चाय पश्चिम बंगाल में भी मिलती है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिर कहा कि पश्चिम बंगाल को एक बार फिर देश के विकास की ताकत बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पहले बंगाल तरक्की करता था, तब पूरे देश को उसका फायदा मिलता था।

बातचीत के बीच माहौल उस समय और हल्का हो गया, जब वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने मजाक करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आसपास कई ऐसे नेता हैं, जो पहले फिल्म और टीवी की दुनिया में काम करते थे और अब राजनीति में हैं। इनमें शताब्दी रॉय, सयोनी घोष, जून मालिया और रचना बनर्जी के नाम शामिल हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि इन सभी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रधानमंत्री को भी पूरी तरह फिट रहना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के पूर्व सांसदों से मराठी में बातचीत की। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर आए नेताओं से भी उन्होंने गर्मजोशी से मुलाकात की। इससे इन नेताओं की अयोग्यता की आशंका और अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों की नाराज़गी जैसी चिंताएं काफी हद तक कम होती दिखीं। बैठक में इन नेताओं को खास महत्व भी दिया गया। एनसीपीआई की अध्यक्ष और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) काकोली घोष दस्तीदार, जो कभी ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी रही हैं, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सबसे आगे की पंक्ति में बैठने की जगह दी गई।

संसद में संख्या बढ़ाने पर बीजेपी का जोर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) संसद में अपने गठबंधन की ताकत बढ़ाने में जुटी है, ताकि उसे दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत मिल सके। यह बहुमत बड़े संवैधानिक संशोधन पास करने के लिए जरूरी माना जाता है। इनमें परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने जैसे अहम विधेयक भी शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष छोड़कर आए ज्यादातर सांसद इस बैठक में शामिल हुए, लेकिन मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद क्षेत्र से एनसीपीआई के तीन सांसद—अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान—एनडीए की बड़ी बैठक में नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं की नाराज़गी और राजनीतिक माहौल को देखते हुए दूरी बनाए रखी। हालांकि, इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के साथ विकास कार्यों और अन्य मुद्दों पर अलग से चर्चा की।