चुनाव चिन्ह के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता

नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है। तृणमूल कांग्रेस का नाम और दो पत्तियां चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। उन्होंने अपनी याचिका में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पक्ष बनाया है। ममता की ओर से इस मामले में जल्दी सुनवाई की अपील की गई है।

गौरतलब है कि गुरुवार, 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को मूल नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोकते हुए अलग अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए थे। राज्य में दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग अलग नाम और चुनाव चिन्ह पर लड़ना है। आयोग ने ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चिन्ह मिला, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया।

असल में ममता बनर्जी की पार्टी में विवाद मई के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद शुरू हुआ। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना। स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दे दी। इसके बाद पार्टी में 28 साल में पहली बार टूट हो गई। विवाद बाद में संसद तक पहुंचा। 20 लोकसभा सांसदों ने काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग ग्रुप के रूप में खुद को पेश किया और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन किया। ये सभी 20 सांसद त्रिपुरा की पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गए।

रेजीनगर में लड़ेगा ममता का उम्मीदवार

कोलकाता। नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के चुनाव मैदान से हटने के बाद रेजीनगर सीट पर भी ममता के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी के मैदान से हटने की खबर आ रही थी लेकिन उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि वे चुनाव लड़ेंगे। हालांकि इसके साथ साथ उन्होंने यह भी कहा कि उनको खतरा है और सुरक्षा चाहिए।

इससे पहले शनिवार सुबह 10 बजे उन्होंने चुनाव से हटने का ऐलान किया, लेकिन करीब तीन घंटे बाद ही दोपहर एक बजे यूटर्न ले लिया। रबीउल ने सुबह हटने का ऐलान करते वक्त पार्टी का पुराना चुनाव चिह्न दो पत्तियां नहीं मिलने और नया चुनाव चिन्ह फुटबॉल प्लेयर मिलने को इसकी वजह बताया था। हालांकि, ममता बनर्जी से बातचीत के बाद रबीउल ने कहा, ‘मैं चुनाव लड़ूंगा’।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। रेजीनगर और नंदीग्राम सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होगा और नौ अक्टूबर को मतगणना होगी। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई है।

कांग्रेस से गठबंधन खत्म होने के बाद तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी में DMK, कनिमोझी ने ममता बनर्जी से की मुलाकात

डीएमके ने कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन टूटने के बाद अब INDIA bloc के प्रमुख घटक दलों के साथ मिलकर कांग्रेस-मुक्त तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। इसी सिलसिले में डीएमके की उप महासचिव व सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कोलकाता में ममता बनर्जी से उनके कालीघाट आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

TMC के एक नेता ने बताया, “कनिमोझी ने ममता बनर्जी के आवास पर उनके साथ बंद कमरे में बैठक की। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई।”

बता दें कि यह बैठक कनिमोझी की मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार के साथ बातचीत के कुछ दिनों बाद हो रही है।

गौरतलब है कि कनिमोझी की इन मुलाकातों ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है, जब DMK और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खिंचाव की खबरें हैं। वहीं, विपक्षी INDIA ब्लॉक में शामिल कई क्षेत्रीय दलों के बीच भी अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

TMC और कांग्रेस में टकराव

बता दें कि TMC और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच टकराव देखने मिला है।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया कि TMC ने अपने केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

 

यह भी पढ़ें: TMC नाम और चिन्ह फ्रीज करने के चुनाव आयोग के आदेश को ममता गुट ने बताया गैर-कानूनी, बागी गुट ने किया स्वागत

TMC Vs TMC: तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों पर चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, बंगाल उपचुनाव में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक

TMC Vs TMC: चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार (17 सितंबर) को एक अंतरिम आदेश में पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न (फूल और घास) के इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी। निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को शुक्रवार यानी 18 सितंबर की सुबह तक अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न सौंपने का निर्देश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि कल तृणमूल कांग्रेस के दोनों बागी खेमों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह मिल सकता है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों से कहा है कि वे पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिए आयोग द्वारा अधिसूचित कोई भी चुनाव चिह्न और पार्टी का कोई दूसरा नाम चुनें।

सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 3 बजे ऋतब्रत बनर्जी सहयोगी नेताओं के साथ चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे कल्याण बनर्जी सहयोगियों के साथ निर्वाचन आयोग से मिलेंगे। माना जा रहा है इसके बाद चुनाव आयोग शाम तक कोई अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से की मुलाकात

निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर पार्टी के ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों की अलग-अलग सुनवाई की। इसमें ममता गुट ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया। जबकि ऋतब्रत गुट ने पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न के संबंध में जल्द निर्णय लेने की मांग की। बागी गुट में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल ज़मान, अरूप रॉय और एक वकील शामिल हैं। उन्होंने आयोग के सभी सदस्यों से मुलाक़ात की तथा अपनी बात रखी।

सुनवाई के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “हमने अपना पक्ष रखा और हमसे पूछे गए सवालों के जवाब दिए।” उन्होंने कहा कि चुनाव चिह्न का मुद्दा इसलिए अहम हो गया है क्योंकि नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने वाले हैं और दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किये हैं। इसके बाद, ममता बनर्जी गुट के सदस्य डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने आयोग के सदस्यों से मुलाकात की।

ममता गुट ने किया विरोध

कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया है। ममता गुट का कहना है कि ऐसे निर्देश का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने कहा है कि कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए।” तृणमूल सांसद ने बागी नेताओं के 6 और 19 मई को पार्टी की बैठकों में शामिल होने और 3 जून को लोकसभा अध्यक्ष से मिलने का जिक्र किया, जब उन्होंने दावा किया था कि वे तृणमूल का हिस्सा हैं।

ये भी पढ़ें- Abhishek Sharma: अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास, सिर्फ 30 गेंदों में शतक जड़ रोहित शर्मा का तोड़ा रिकॉर्ड

उन्होंने कहा, “उस तारीख तक आपने पार्टी के अस्तित्व को माना था। अचानक 22 जून को आपने कह दिया कि तृणमूल कांग्रेस है ही नहीं। आप ये दोनों बात कैसे कह सकते हैं।” ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि आगामी उपचुनावों को देखते हुए वह जल्द निर्णय ले। उन्होंने कहा, “हमने आयोग से जल्द फैसला करने का अनुरोध किया है क्योंकि उपचुनाव नजदीक हैं। हम निर्वाचन आयोग का सम्मान करते हैं और उस पर विश्वास करते हैं।”