Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SIP Calculator: ₹1000 की SIP से हर महीने ₹1 लाख की कमाई! जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

SIP Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित कमाई कौन नहीं चाहता? अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। अगर आप कम उम्र में छोटी SIP शुरू करें, हर साल उसे थोड़ा बढ़ाते रहें और लंबे समय तक निवेश जारी रखें, तो रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। इसके बाद उसी फंड से Systematic Withdrawal Plan (SWP) के जरिए हर महीने इनकम ली जा सकती है।

₹1 करोड़ का फंड कैसे बन सकता है?

अब मान लीजिए आपने 28 साल की उम्र में हर महीने ₹1,000 की SIP शुरू की। हर साल SIP में 10% की बढ़ोतरी करते रहे और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला, तो रिटायरमेंट तक अच्छा-खासा फंड तैयार हो सकता है। ऐसे में आपके निवेश की तस्वीर कुछ ऐसी दिखेगी।

  • निवेश की अवधि: 32 साल
  • कुल निवेश: ₹24.13 लाख
  • अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़
  • कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख

यानी आपने अपनी जेब से करीब ₹24 लाख लगाए, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से फंड ₹1 करोड़ से ज्यादा हो गया।

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हर साल SIP बढ़ाना क्यों जरूरी है?

इस रणनीति की सबसे बड़ी ताकत SIP स्टेप-अप है। नौकरी में ज्यादातर लोगों की सैलरी हर साल बढ़ती है। अगर उसी हिसाब से SIP भी बढ़ा दें, तो ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता और निवेश तेजी से बढ़ता रहता है।

अगर SIP की रकम पूरे 32 साल तक ₹1,000 ही रहे, तो ₹1 करोड़ का फंड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाना लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा करता है।

हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेगा?

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की जरूरत नहीं होती। यहीं SWP काम आता है। इसमें आप अपने म्यूचुअल फंड से हर महीने तय रकम निकालते रहते हैं। बाकी पैसा फंड में ही लगा रहता है और उस पर रिटर्न भी मिलता रहता है।

SIP 1

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद आपके पास ₹1.5 करोड़ का फंड है। इसे किसी डेट या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड में निवेश किया गया है। अगर इस पर 6% सालाना रिटर्न मिलता है और आप हर महीने ₹1 लाख निकालते हैं, तो करीब 12 साल तक नियमित इनकम मिल सकती है। इसका हिसाब कुछ ऐसा है।

  • शुरुआती निवेश: ₹1.5 करोड़
  • हर महीने निकासी: ₹1 लाख
  • निकासी की अवधि: 12 साल
  • कुल निकासी: ₹1.44 करोड़
  • निकासी के दौरान अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाख

यानी पैसा भी मिलता रहेगा और फंड भी एकदम से खत्म नहीं होगा।

निवेश से पहले ये बातें याद रखें

आपको ध्यान रखना चाहिए कि 12% और 6% का रिटर्न तय नहीं होता। बाजार के हिसाब से रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर अपने निवेश का रिव्यू जरूर करें। साथ ही महंगाई को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आज ₹1 लाख की जो कीमत है, आने वाले वर्षों में वह उतनी नहीं रहेगी।

अगर आप समय पर निवेश शुरू करें, हर साल SIP बढ़ाते रहें और रिटायरमेंट के बाद सही तरीके से SWP का इस्तेमाल करें, तो यही रणनीति आपको रिटायरमेंट के बाद भी नियमित इनकम देने में मदद कर सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

न म्यूचुअल फंड, न शेयर… 50 लाख कमाने वाला प्रोफेशनल आखिर कहां लगा रहा पैसा

आज के दौर में अच्छी सैलरी मिलने पर ज्यादातर लोग अपनी बचत को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या SIP के जरिए बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसे लंबे समय में संपत्ति बनाने का सबसे लोकप्रिय तरीका माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आई एक कहानी ने इस सोच को नई बहस में बदल दिया है। 50 लाख रुपये सालाना कमाने वाले एक प्रोफेशनल ने पारंपरिक निवेश के बजाय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खुद का कारोबार खड़ा करने में लगाने का फैसला किया। उसकी यह रणनीति अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है।

कुछ लोग इसे भविष्य के लिए साहसिक और समझदारी भरा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि शेयर बाजार की कंपाउंडिंग ताकत को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

आधी सैलरी, आधे कंपनी के शेयर

X पर राम नाम के एक यूजर ने अपने दोस्त की फाइनेंशियल प्लानिंग शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त का सालाना CTC 50 लाख रुपये है। इसमें 25 लाख रुपये सैलरी के रूप में मिलते हैं, जबकि बाकी 25 लाख रुपये कंपनी के शेयर हैं, जो चार साल में धीरे-धीरे मिलते हैं।

SIP छोड़ बिजनेस पर लगाया दांव

राम के मुताबिक, उनके दोस्त ने अतिरिक्त पैसे को म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगाने के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। पिछले साल उसने बैग्स का कारोबार शुरू किया और इस साल पुरुषों के कपड़ों का बिजनेस भी लॉन्च कर दिया।

हालांकि, वह पूरी तरह पारंपरिक निवेश से दूर नहीं है। वह PPF में निवेश करता है और हर साल करीब 1.2 लाख रुपये का LIC प्रीमियम भी भरता है। लेकिन उसका सबसे बड़ा फोकस अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है।

SIP या अपना बिजनेस?

राम ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या उनका दोस्त शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में मिलने वाले लंबे समय के कंपाउंडिंग रिटर्न से चूक रहा है? या फिर अपना सफल बिजनेस खड़ा करना भविष्य में इससे भी बड़ा फायदा दे सकता है?

यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया।

लोगों ने क्या दी राय?

कई यूजर्स का मानना था कि निवेश और बिजनेस, दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना सबसे अच्छा तरीका है। उनका कहना था कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहता है, जबकि अपने बिजनेस में फैसलों पर खुद का नियंत्रण होता है।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर किसी को अपने बिजनेस और उसकी संभावनाओं पर भरोसा है, तो अपने काम में निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति खुद अपने कारोबार को संभालता है, तो उसके पास बेहतर फैसले लेने और मुनाफा बढ़ाने का मौका होता है।

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Retirement Planning: मंथली ₹5,000 SIP और ₹12,500 PPF से कैसे बन सकता है ₹2 करोड़ का फंड?

क्या आपने रिटायरमेंट प्लानिंग की है? अगर नहीं की है तो इसे जल्द पूरा कर लें। लंबी अवधि में नियमित रूप से निवेश करने पर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है। कई लोग देर से निवेश शुरू करते हैं, जिससे उनके पैसे को बढ़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता है। आप हर महीने 5000 रुपये के सिप और 12,500 रुपये के पीपीएफ में निवेश से आसानी से 2 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।

पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद स्कीम

पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए काफी अट्रैक्टिव स्कीम है। इस स्कीम में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। टैक्स के लिहाज से यह स्कीम काफी फायदेमंद है। यह एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट की कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि न तो इसमें पैसा जमा करने पर टैक्स लगता है, न तो इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है और न ही मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगता है।

पीपीएफ में मैच्योरिटी पर भी नहीं लगता है टैक्स

मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया कि पीपीएफ के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। यह पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। यह स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। अगर आप हर महीने 12500 रुपये का निवेश इस स्कीम में करते हैं तो 15 साल में आप कुल 22,50,000 रुपये का निवेश करते हैं। इस पर आपको 18,18,209 रुपये इंटरेस्ट मिलेगा। इस तरह मैच्योरिटी पर आपको 40,68,209 रुपये मिलेंगे।

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 5000 का सिप

आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में सिप से हर महीने 5000 रुपये का निवेश 15 साल तक करना है। इस तरह आप 15 साल में कुल 9,00,000 रुपये का निवेश करेंगे। सालाना 12 फीसदी रिटर्न के हिसाब से 15 साल आपका पैसा बढ़कर 23,79,657 रुपये हो जाएगा। अगर इसमें पीपीएफ से मिले 40,68,209 रुपये को मिला दिया जाए तो कुल 64,47,866 रुपये हो जाते हैं। इस पैसे को आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त निवेश करना होगा।

ऐसे तैयार हो जाएगा 25 साल में 2 करोड़ का फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त 64,47,866 रुपये का निवेश 10 साल में बढ़कर 2,00,26,093 रुपये हो जाएगा। इस कैलकुलेशन के लिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अंदाजा लगाया गया है। इस तरह आपको सिर्फ 15 साल तक हर महीने पीपीएफ में 12,500 रुपये और सिप में 5000 रुपये का निवेश करना है। 15 साल बाद आपको दोनों निवेश से मिले पैसे को म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में 10 साल के लिए निवेश करना है। इस तरह आपको निवेश सिर्फ 15 साल करना है। लेकिन, 2 लाख रुपये का फंड 25 साल में तैयार होगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स भी चुकाना होगा

एक बात आपको ध्यान में रखना होगा कि म्यूचुअल फंड में निवेश से हुए मुनाफे पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस देना होगा। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि आपको 23,79,657 रुपये पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। यह टैक्स 2,97,457.125 रुपये बनेगा। इसे तीन लाख रुपये माना जा सकता है।

टैक्स चुकाने के बाद 25 साल कुछ महीने में तैयार होगा फंड

इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड में हर महीने 5000 रुपये निवेश करने पर टैक्स काटकर आपके हाथ में करीब 20,79,657 रुपये आएंगे। अब इसमें पीपीएफ से मिले पैसे को जोड़ देते हैं, क्योंकि पीपीएफ पर टैक्स नहीं लगता है। दोनों मिलकर 61,47,866 रुपये हो जाते है। इस पैसे को एकमुश्त निवेश करने पर 10 साल कुछ महीने में 2 करोड़ का फंड तैयार हो जाएगा।

Mutual Fund: ₹10000 की मंथली SIP से बन गए ₹97 लाख! इस धाकड़ म्यूचुअल फंड ने 16 साल में किया कमाल

Mirae Asset Large & Midcap Fund Return: म्यूचुअल फंड से पैसा बनाना अनुशासन और सब्र का खेल है। और जब ये दोनों मिल जाएं तो कैसी वेल्थ क्रिएट होती है, इसका एक जीता-जागता एक उदाहरण सामने आया है। मिराए एसेट लार्ज एंड मिडकैप फंड ने बाजार में अपने शानदार 16 साल पूरे कर लिए हैं।

फंड हाउस द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिन निवेशकों ने इस फंड की शुरुआत से ही हर महीने महज ₹10,000 की एसआईपी जारी रखी थी, उनका फंड 31 मई 2026 तक बढ़कर लगभग ₹97 लाख हो चुका है। आइए समझते हैं इस स्कीम के रिटर्न का पूरा रिपोर्ट कार्ड।

₹19 लाख निवेश पर मिले ₹97 लाख

मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के डेटा के अनुसार, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट ने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। 16 साल में ₹10,000 प्रति माह के हिसाब से निवेशक ने कुल ₹19 लाख जमा किए। 31 मई 2026 तक यह ₹19 लाख का निवेश बढ़कर ₹96.9 लाख हो गया। इस एसआईपी निवेश पर फंड ने 18.44% का जोरदार XIRR डिलीवर किया है।

लंपसम इन्वेस्टमेंट करने वाले भी हुए मालामाल

अगर किसी निवेशक ने 9 जुलाई 2010 को इस फंड के ‘रेगुलर प्लान-ग्रोथ’ ऑप्शन में सिर्फ ₹10,000 का एकमुश्त निवेश किया होता, तो वह रकम आज बढ़कर ₹1,50,690 हो चुकी होती। इसके मुकाबले, अगर यही पैसा इस स्कीम के बेंचमार्क में लगाया गया होता, तो वह सिर्फ ₹76,908 ही बनता।

बेंचमार्क और सेंसेक्स को पछाड़ा

पिछले 15 वर्षों के प्रदर्शन को देखें तो इस फंड ने अपने बेंचमार्क और इंडेक्स के मुकाबले काफी आउटपरफॉर्म किया है। पिछले 15 सालों में इस फंड ने 18.85% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है। इसके मुकाबले स्कीम के बेंचमार्क ‘Nifty LargeMidcap 250 TRI’ ने 14.60% का रिटर्न दिया। वहीं, एडिशनल बेंचमार्क ‘BSE Sensex TRI’ इस दौरान सिर्फ 11.22% का रिटर्न ही दे पाया।

₹42,000 करोड़ से ज्यादा का फंड मैनेजमेंट

यह स्कीम एक ओपन-एंडेड इक्विटी योजना है, जो मुख्य रूप से भारतीय लार्ज-कैप और मिड-कैप के शेयरों में पैसा लगाती है। 31 मई 2026 तक यह फंड ₹42,792.20 करोड़ के विशाल एसेट बेस को मैनेज कर रहा है। इस फंड की सफलता के पीछे इसके अनुभवी फंड मैनेजर नीलेश सुराना हैं, जो इसकी शुरुआत से ही इससे जुड़े हैं। जनवरी 2019 से अंकित जैन भी सह-फंड मैनेजर के रूप में उनके साथ कमान संभाल रहे हैं।

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एक्सपर्ट नोट: हालांकि इस फंड का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है, लेकिन फंड हाउस का कहना है कि यह स्कीम किसी भी प्रकार के गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करती है। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Investment: बाजार गिरा, फिर भी लोग SIP में क्यों लगा रहे पैसा? मोतीलाल ओसवाल ने बताई बड़ी वजह

SIP Investment: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। इसके बावजूद रिटेल निवेशक SIP के जरिए लगातार निवेश कर रहे हैं। AMFI के ताजा आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान भी SIP का फ्लो मजबूत बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि निवेशकों की आदत बन चुका है।

मार्केट टाइमिंग नहीं, लंबी अवधि पर फोकस

Motilal Oswal Asset Management Company के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि अब लोग SIP को लंबी अवधि की बचत का जरिया मान रहे हैं। पहले की तरह सिर्फ शॉर्ट टर्म रिटर्न के लिए निवेश नहीं किया जा रहा।

उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू संपत्ति का सिर्फ 6% हिस्सा इक्विटी में निवेश है। अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 48% है। इसका मतलब है कि भारत में इक्विटी निवेश बढ़ने की अभी काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सेक्टरों में वैल्यूएशन ऊंचे हैं। लेकिन पूरे बाजार में ओवरवैल्यूएशन जैसी स्थिति नहीं दिख रही।

स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में क्यों आ रहा पैसा?

पिछले कुछ वर्षों में स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड में निवेश लगातार बढ़ा है। वैल्यूएशन की चिंता के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

सालस्मॉलकैप फंडथीमैटिक फंड
2023₹43,291 करोड़₹31,744 करोड़
2024₹34,874 करोड़₹1,76,915 करोड़
2025₹52,321 करोड़₹38,145 करोड़

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि निवेशक इन फंड्स के जरिए तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि वैल्यूएशन का आकलन पूरी कैटेगरी के बजाय हर शेयर और सेक्टर के आधार पर करना चाहिए।

छोटे शहरों से बढ़ रहे नए निवेशक

टियर-2 और टियर-3 शहरों से नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स को तेजी से अपना रहे हैं।

अखिल चतुर्वेदी का कहना है कि SIP अब सिर्फ तेजी वाले बाजार का निवेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की आदत बनता जा रहा है।

शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

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SBI Funds Management की नजरें म्चूअल फंड्स की पहुंच बढ़ाने पर, कंपनी ने बताया फ्यूचर प्लान

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई को आ रहा है। यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) है। इंडिया में म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी का बड़ा प्लान है। इसे पेरेंट कंपनी और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का सपोर्ट हासिल है। मनीकंट्रोल ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के फ्यूचर प्लान के बारे में जानने के लिए इसके एमडी एवं सीईओ देबाशीष मिश्रा, ज्वाइंट सीईओ डीपी सिंह और डिप्टी सीईओ डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स से बातचीत की।

रिटेल बेस बढ़ाने पर कंपनी का फोकस

देबाशीष मिश्रा ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता रिटेल इनवेस्टर्स का बेस बढ़ाना है। लोगों तक पहुंच के मामले में भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अभी शुरुआती अवस्था में है। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के करीब 53 करोड़ कस्टमर्स हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स के यूनिक इनवेस्टर्स की संख्या सिर्फ करीब 55 लाख है। यह कस्टमर बेस का 1 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा है। अगले दो से तीन सालों में रिटेल पार्टिसिपेशन बढ़ाना और लोगों तक पहुंच का विस्तार करना हमारी पहली प्राथमिकता होगी।

पीएमएस, एआईएफ और SIF पर भी कंपनी की नजरें

उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड बिजनेस के अलावा कंपनी पीएमएस, एआईएफ, SIF और गिफ्ट सिटी में अपनी मौजूदी बढ़ा रही है। अमुंडी के सपोर्ट से हमारा इंटरनेशनल बिजनेस करीब 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हम इसे अगले दो से तीन सालों में दोगुना करना चाहते हैं। हर ग्रोथ सेगमेंट में हमारी कोशिश स्ट्रॉन्ग रिसोर्सेज, स्ट्रेटेजी और पार्टनरशिप के जरिए लीडरशिप बनाने की है। हमारा प्लान हर जगह से इनवेस्टमेंट लेने का है।

एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का मिलेगा फायदा

डीपी सिंह ने कहा कि एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को सबसे ज्यादा फायदा एसबीआई के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का है। उन्होंने कहा कि हमारी मंथली सिप बुक करीब 4,000 करोड़ रुपये की है। इसमें से करीब 1300 करोड़ रुपये यानी करीब एक-तिहाई एसबीआई नेटवर्क के जरिए आता है। हमारे इंटरमीडियरी बिजनेस की भी करीब इतनी ही हिस्सेदारी है। एसबीआई का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क हमारी सबसे ब़ड़ी ताकत है। एसबीआई के 53 करोड़ कस्टमर बेस को देखते हुए हमें उम्मीद है कि हमारे लिए सिप बुक दोगुना करने की काफी गुंजाइश है।

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सेविंग्स इकोनॉमी से इनवेस्टमेंट इकोनॉमी बन रहा भारत

डेनिस डी कैम्पिग्नेल्स ने कहा कि दुनिया के कई देशों में बैंकिंग और म्यूचुअल फंड एक दूसरे के साथ चलते हैं। भारत में हमारे लिए मौके और भी ज्यादा हैं, क्योंकि देश अब सेविंग्स इकोनॉमी से इननवेस्टमेंट इकोनॉमी के रूप में बदल रहा है। SIP से लोगों में निवेश में अनुशासन की आदत बनी है। लोग छोटी अवधि के निवेश की जगह लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं। भविष्य में इंडस्ट्री की ग्रोथ म्यूचुअल फंड्स से आगे निकल रिटायरमेंट सॉल्यूशंस, अल्टरनेटिव्स और वेल्थ मैनेजमेंट तक जाएगी।

EPF Interest Credit: 15 जुलाई तक PF खाताधारकों के अकाउंट में आएगा ब्याज, जानें ₹10, 50 लाख और 1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई

EPFO Credit FY26 Interest Update: अगर आप भी अपने पीएफ खाते में ब्याज का पैसा ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज का पैसा 15 जुलाई तक देश के करीब 34 करोड़ खाताधारकों के अकाउंट में क्रेडिट करने जा रहा है।

आमतौर पर पीएफ का ब्याज अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता था, लेकिन इस बार नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम की बदौलत यह काम काफी पहले होने जा रहा है। इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ब्याज राशि बांटी जा रही है। वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने ही 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दी है, जो लगातार तीसरे साल भी बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से आपको कितने रुपये का फायदा होने वाला है।

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

8.25% की ब्याज दर सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन असल में आपके खाते में कितने रुपये आएंगे? इसे आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

ध्यान दें: यह गणना इस अनुमान पर आधारित है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पीएफ बैलेंस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। असल में पीएफ ब्याज की गणना हर महीने के रनिंग बैलेंस पर की जाती है, जो आपके मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन या विड्रॉल के हिसाब से बदल सकती है।

बिना किसी रिस्क के बंपर और टैक्स-फ्री कमाई

इस कैलकुलेशन से साफ है कि पीएफ पर मिलने वाला फायदा बेहद शानदार है। उदाहरण के लिए, जिस कर्मचारी के खाते में ₹50 लाख का कॉर्पस है, उसे बिना किसी मार्केट रिस्क और बिना एक भी रुपया निकाले सीधे ₹4 लाख से ज्यादा की कमाई होगी। वहीं, ₹1 करोड़ का बैलेंस रखने वालों को ₹8.25 लाख का ब्याज मिलेगा, जो कई लोगों की शुरुआती सालाना सैलरी से भी कहीं ज्यादा है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाला निवेश है।

KYC अपडेट रखें, वरना फंस सकता है पैसा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका केवाईसी डिटेल्स जैसे पैन या बैंक अकाउंट की जानकारी पुरानी या अधूरी है, तो उसे तुरंत ठीक कर लें। पीएफ ब्याज का पैसा अटकने या क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह अधूरा केवाईसी ही होती है। आप ईपीएफओ पोर्टल या उमंग ऐप के जरिए इसे चेक कर सकते हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे चेक करें अपना ईपीएफ बैलेंस?

यह जांचने के लिए कि आपके खाते में ब्याज का पैसा आया है या नहीं, आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट होना चाहिए। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:

स्टेप 1: सबसे पहले ईपीएफओ के ‘Member Passbook’ पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपना UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, उसे दर्ज कर अपनी पहचान वेरिफाई करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आपको अपना लेटेस्ट पीएफ बैलेंस और वित्त वर्ष 2025-26 का क्रेडिट हुआ ब्याज दिख जाएगा।

SIP Magic: हर महीने ₹2000 बचाकर भी खड़ा कर सकते हैं ₹1 करोड़ का फंड, जानें निवेश का ये धांसू फॉर्मूला

SIP Magic: हर महीने ₹2000 बचाकर भी खड़ा कर सकते हैं ₹1 करोड़ का फंड, जानें निवेश का ये धांसू फॉर्मूला

How to Become Crorepati through SIP: क्या छोटी सी बचत से कोई करोड़पति बन सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जो हर मिडिल क्लास इंसान के मन में कभी न कभी जरूर आता है। इसका सीधा और सटीक जवाब है, हां, यह बिल्कुल मुमकिन है! अगर आप हर महीने सिर्फ ₹2,000 की एसआईपी (SIP) करते हैं, तो लंबी अवधि में आप आसानी से ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। बशर्ते, आप निवेश में अनुशासन बनाए रखें और ‘कंपाउंडिंग’ को अपना काम करने दें। आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा गणित।

कितने साल में तैयार होगा ₹1 करोड़?

आपका ₹2,000 का निवेश कितने सालों में ₹1 करोड़ बनेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके म्यूचुअल फंड पर सालाना कितना रिटर्न मिल रहा है। आइए अलग-अलग रिटर्न के हिसाब से समझते हैं:

कितने साल में तैयार होगा ₹1 करोड़?

नोट: ये अनुमान इस आधार पर हैं कि आप बिना रुके हर महीने लगातार निवेश जारी रखते हैं।

कंपाउंडिंग का जादुई असर

शुरुआती सालों में आपको लगेगा कि आपका फंड बहुत धीरे-धीरे बढ़ रहा है, क्योंकि तब ग्रोथ सिर्फ आपके जमा किए गए पैसों पर मिलती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, असली जादू शुरू होता है।

अब आपके द्वारा कमाए गए रिटर्न पर भी रिटर्न मिलने लगता है। यही वजह है कि आखिरी के सालों में आपकी वेल्थ बहुत तेजी से रॉकेट की तरह बढ़ती है। इसलिए, जो निवेशक 20 से 25 साल की उम्र में ही नौकरी की शुरुआत के साथ निवेश शुरू कर देते हैं, उन्हें कंपाउंडिंग का सबसे ज्यादा फायदा मिलता है।

स्मार्ट चॉइस: कौन सा म्यूचुअल फंड रहेगा बेस्ट?

लॉन्ग-टर्म गोल्स के लिए फाइनेंशियल प्लानर हमेशा इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP करने की सलाह देते हैं। फंड का चुनाव आप अपने रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से कर सकते हैं:

स्मॉल-कैप फंड्स (Small-Cap Funds): ऐतिहासिक रूप से इन्होंने लंबी अवधि में सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है, लेकिन इनमें जोखिम और उतार-चढ़ाव सबसे अधिक होता है।

मिड-कैप फंड्स (Mid-Cap Funds): ये फंड्स मजबूत ग्रोथ और मध्यम-से-उच्च जोखिम का एक अच्छा कॉम्बिनेशन ऑफर करते हैं।

लार्ज-कैप फंड्स (Large-Cap Funds): ये देश की सबसे बड़ी और स्थापित कंपनियों में पैसा लगाते हैं। इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है, लेकिन इनका रिटर्न स्मॉल और मिड-कैप के मुकाबले थोड़ा कम हो सकता है।

टारगेट को समय से पहले हासिल करने का ‘सीक्रेट मंत्र’

अगर आप 30 या 35 साल तक इंतजार नहीं करना चाहते और जल्दी करोड़पति बनना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट्स की इस एक सलाह एसआईपी स्टेप-अप को गांठ बांध लें।

जैसे-जैसे हर साल आपकी आमदनी या सैलरी बढ़े, अपनी ₹2,000 की SIP राशि में भी थोड़ी बढ़ोतरी जैसे- 10% का इजाफा करते जाएं। सालाना थोड़ा-सा भी स्टेप-अप आपके ₹1 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंचने के समय को कई साल कम कर सकता है।

वैसे सिर्फ ₹2,000 की मासिक एसआईपी से करोड़पति बनने का सफर भले ही तीन से चार दशक ले सकता है, लेकिन निरंतरता, धैर्य और कंपाउंडिंग की ताकत से इस वित्तीय लक्ष्य को हासिल करना शत-प्रतिशत संभव है।

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