SIP Calculator: महीने के 3000 के निवेश से भी 15 लाख का फंड बनाया जा सकता है, यहां समझें पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: अगर आप हर महीने 3000 रुपये का निवेश सिप से म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में करते हैं तो बड़ा फंड तैयार हो सकता है। यह पैसा आपके बच्चों के हायर एजुकेशन या उनकी शादी-विवाह के काम में आ सकता है। आप चाहें तो इस पैसे का इस्तेमाल रिटायरमेंट बाद के अपने खर्च के लिए भी कर सकते हैं।

निवेश में बरतना होगा अनुशासन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश में सबसे जरूरी अनुशासन है। अगर आप 3000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं और करीब 15 साल तक हर महीने निवेश करना जारी रखते हैं तो आप आसानी से 15 लाख रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश करने पर सालाना कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न आराम से मिल जाता है। कई बार इससे ज्यादा यानी 14 फीसदी या 16 फीसदी तक रिटर्न मिल जाता है। लंबी अवधि के निवेश में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का मिलता है।

लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा

कंपाउंडिंग का मतलब यह है कि निवेश के रिटर्न पर भी आपको रिटर्न मिलता है। इससे आपका पैसा तेजी से बढ़ता है। कंपाउंडिंग की वजह से छोटे अमाउंट के निवेश से भी लंबी अवधि में आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। जो इनवेस्टर कंपाउंडिंग के मैजिक को समझ जाते हैं वे निवेश में अनुशासन बनाए रखते हैं। इससे 10-15 साल में उनके लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

आइए एक टेबल की मदद से समझते हैं कि हर महीने 3000 रुपये के SIP निवेश से 15 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कितना समय लगेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न15 लाख का फंड तैयार होने में अनुमानित समय
12%15 साल कुछ महीने
14%14 साल कुछ महीने
16%13 साल कुछ महीने

अगर आप कम समय में बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं तो आप स्टेट-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्टेप-अप स्ट्रेटेजी में हर साल सिप का अमाउंट बढ़ा दिया जाता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आप निवेश की शुरुआत मंथली 3000 रुपये के निवेश से करते हैं। दूसरे साल आप निवेश का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। तीसरे साल भी आप SIP का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। इस स्ट्रेटेजी से कम समय में आपके लिए काफी बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है।

आइए समझते हैं कि स्टेप-अप सिप से 15 लाख रुपये का SIP तैयार करने में कितना समय लगेगा।

सामान्य SIP से 15 लाख10% स्टेप-अप SIP से 15 लाखसमय की बचतअनुमानित सालाना रिटर्न
15 साल कुछ महीने12 साल कुछ महीने3 साल12%
14 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने3 साल14%
13 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने2 साल16%

स्टेप-अप सिप के फायदे

स्टेप-अप सिप में हम देखते हैं कि हर महीने 3000 रुपये के SIP निवेश से 15 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कम समय लगता है। चूंकि, आप SIP अमाउंट हर साल सिर्फ 10 फीसदी बढ़ाते हैं, जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। लेकिन, आपके निवेश की अवधि काफी कम हो जाती है। इसकी वजह कंपाउंडिंग का मैजिक है।

यह भी पढ़ें: SIP Returns: एक जैसा SIP इन्वेस्टमेंट, फिर भी ₹2.85 करोड़ का अंतर! जानिए म्यूचुअल फंड में ‘रिटर्न की टाइमिंग’ का पूरा खेल

रिटर्न की गारंटी नहीं

यहां टेबल में 12 फीसदी, 14 फीसदी और 16 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाया गया है। इसका मतलब है कि हम तीन तरह के रिटर्न का अनुमान लगाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड के रिटर्न के बारे में पहले से कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, आम तौर पर यह देखा  गया है कि लंबी अवधि तक निवेश करने पर कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। ऊपर टेबल में दी गई जानकारी सिर्फ कैलकुलेशन के लिए है।

SIP Investment: म्यूचुअल फंड में ₹10 लाख का फंड बनाना है? जानें हर महीने कितने की करनी होगी SIP

SIP Investment Plan: नौकरीपेशा लोगों और युवाओं के बीच म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करने का ट्रेड चल रहा है। अगर आपका लक्ष्य भी आने वाले कुछ सालों में ₹10 लाख का फंड तैयार करना है, तो इसके लिए एक सही प्लानिंग और अनुशासन की जरूरत होती है।

एसआईपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपको एक साथ मोटी रकम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि आप हर महीने एक निश्चित राशि से शुरुआत कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि अलग-अलग समय सीमा के हिसाब से ₹10 लाख का फंड बनाने के लिए आपको हर महीने कितनी एसआईपी करनी होगी।

रिटर्न का अनुमान: 12% का औसत फॉर्मूला

लॉन्ग टर्म में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत सालाना रिटर्न करीब 12% मानकर चला जाता है। हालांकि, बाजार के जोखिमों के कारण यह कम या ज्यादा भी हो सकता है। इसी 12% के अनुमानित रिटर्न के आधार पर जानते हैं ₹10 लाख का फंड बनाने का गणित।

1. 3 साल में ₹10 लाख का फंड

अगर आप बहुत कम समय यानी अगले 3 साल में ही यह लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, तो आपको भारी-भरकम निवेश करना होगा।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹23,218 महीना

3 साल में कुल निवेश: ₹8.35 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹1.64 लाख

2. 5 साल में ₹10 लाख का फंड

मध्यम अवधि यानी 5 साल के लक्ष्य के लिए निवेश की राशि काफी कम हो जाती है, क्योंकि यहाँ कंपाउंडिंग को थोड़ा और समय मिलता है।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹12,244 महीना

5 साल में कुल निवेश: ₹7.34 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹2.65 लाख

3. 7 साल में ₹10 लाख का फंड

अगर आपके पास 7 साल का समय है, तो आप हर महीने एक सामान्य रकम बचाकर भी इस टारगेट को छू सकते हैं।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹7,500 महीना

7 साल में कुल निवेश: ₹6.30 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹3.70 लाख

4. 10 साल में ₹10 लाख का फंड

लॉन्ग टर्म यानी 10 साल की प्लानिंग करने वालों के लिए यह राह बेहद आसान है। यहाँ आपका ब्याज आपके मूलधन पर भारी पड़ने लगता है।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹4,347 महीना

10 साल में कुल निवेश: ₹5.21 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹4.78 लाख

‘स्टेप-अप SIP’ से काम होगा और आसान

अगर शुरुआत में आपके पास ₹12,000 या ₹7,000 की बड़ी एसआईपी करने का बजट नहीं है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आप स्टेप-अप एसआईपी का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी बढ़ने के साथ-साथ एसआईपी की रकम को भी 5% या 10% बढ़ा देते हैं।

मान लीजिए आप आज ₹3,000 से शुरुआत करते हैं और हर साल इसमें सिर्फ 10% की बढ़ोतरी करते हैं, तो आप सामान्य एसआईपी के मुकाबले बहुत पहले ही ₹10 लाख का फंड बना लेंगे।

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

1- एसआईपी के शुरुआती 2-3 सालों में फंड छोटा होने के कारण कंपाउंडिंग का जादू स्क्रीन पर तुरंत नहीं दिखता। असली वेल्थ क्रिएशन आखिरी के सालों में होती है जब आपका बेस बड़ा हो जाता है।

2- बाजार में गिरावट आने पर भी अपनी एसआईपी को कभी बंद न करें। मंदी के समय आपको सस्ती NAV पर ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स अलॉट होती हैं, जो बाद में बाजार चढ़ने पर बंपर मुनाफा देती हैं।

3- अपने वित्तीय सलाहकार से बात करके लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप या मिड-कैप फंड्स का एक सही पोर्टफोलियो चुनें।

नोट: यह गणना 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न पर आधारित है। म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले स्कीम के दस्तावेज जरूर पढ़ें।

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SIP Returns: एक जैसा SIP इन्वेस्टमेंट, फिर भी ₹2.85 करोड़ का अंतर! जानिए म्यूचुअल फंड में ‘रिटर्न की टाइमिंग’ का पूरा खेल

Same SIP Different Returns: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने वाले नए निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि ‘क्या मेरी SIP वाकई काम कर रही है?’ निवेश के शुरुआती दो-तीन सालों में जब बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तो पोर्टफोलियो में कोई जादुई ग्रोथ नहीं दिखती। ऐसे में लोग मान लेते हैं कि कंपाउंडिंग की बातें सिर्फ कागजी हैं।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप गलत हैं। SIP के शुरुआती साल दौलत बनाने के नहीं, बल्कि एक बड़ा बेस तैयार करने के होते हैं। आइए एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट के हेड निरंजन अवस्थी के इनपुट्स के साथ एक दिलचस्प उदाहरण से समझते हैं कि कैसे एक ही रकम की SIP करने के बावजूद दो लोगों के रिटर्न में ₹2.85 करोड़ का भारी अंतर आ सकता है।

एक जैसा निवेश, फिर भी रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर

मान लेते हैं कि दो अलग-अलग निवेशक A और B हैं। दोनों ही हर महीने ₹50,000 की SIP पूरे 20 साल के लिए करते हैं। दोनों का कुल निवेश बराबर है, लेकिन उन्हें मिलने वाले मार्केट रिटर्न की टाइमिंग अलग-अलग है:

निवेशक A (शुरुआत में बंपर रिटर्न): इसे शुरुआती 5 सालों में 24% का सालाना रिटर्न मिलता है, और आखिरी के 15 सालों में 12% का सालाना रिटर्न मिलता है।

निवेशक B (आखिरी सालों में बंपर रिटर्न): इसके साथ स्थिति बिल्कुल उल्टी है। इसे पहले 15 सालों तक 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, लेकिन आखिरी के 5 सालों में 24% का तगड़ा सालाना रिटर्न मिलता है।

हैरान करने वाला नतीजा

20 साल पूरे होने पर निवेशक B का कुल फंड ₹8.77 करोड़ हो जाता है, जबकि निवेशक A का फंड सिर्फ ₹5.92 करोड़ ही रह जाता है। दोनों ने हर महीने एक बराबर पैसा जमा किया, लेकिन रिटर्न की टाइमिंग के फेर के कारण दोनों के बीच ₹2.85 करोड़ का बड़ा फासला आ गया।

अगर यही SIP छोटी रकम यानी ₹10,000 महीना की भी होती, तब भी आखिरी सालों में बड़ा रिटर्न पाने वाला निवेशक करीब ₹57 लाख ज्यादा कमा लेता।

आखिर ऐसा क्यों होता है?

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि शुरुआत में ज्यादा रिटर्न मिलने पर पैसा बढ़ने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, इसलिए फंड बड़ा होना चाहिए। एकमुश्त निवेश में यह बात सही हो सकती है, लेकिन SIP का नियम अलग है।

जब आप SIP शुरू करते हैं, तो पहले कुछ सालों में आपका कुल जमा फंड बहुत छोटा होता है। अगर उस समय बाजार 24% की रफ्तार से भागता भी है, तो वह छोटी रकम पर ही काम करेगा।

15 साल तक लगातार निवेश करने के बाद आपका फंड बहुत बड़ा हो जाता है। अब इस बड़े फंड पर जब आखिरी सालों में 24% का रिटर्न मिलता है, तो रुपयों के मामले में होने वाला मुनाफा बहुत विशाल होता है।

इस पर निरंजन अवस्थी ने कहा कि, ‘शुरुआती साल अमीर बनने के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग कीमतों पर म्यूचुअल फंड यूनिट्स इकट्ठा करने और एक मजबूत बेस बनाने के लिए होते हैं। असली वेल्थ क्रिएशन बाद में होती है। निवेश में धैर्य रखना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि इसकी सबसे बड़ी खूबी है।’

लॉन्ग टर्म SIP में निवेशक कहां करते हैं गलती?

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग अपनी लॉन्ग टर्म SIP का मूल्यांकन बहुत जल्दी यानी 2-3 साल में ही करने लगते हैं। शुरुआत में आपकी अधिकांश किस्तें हाल ही में बाजार में गई होती हैं, इसलिए कंपाउंडिंग का जादू तुरंत स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट नहीं होता। जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे आपकी पुरानी यूनिट्स पर मिलने वाला ब्याज आपके फंड को रॉकेट की तरह आगे बढ़ाता है।

क्या हमें शुरुआत में खराब रिटर्न की दुआ करनी चाहिए?

बिल्कुल नहीं, इस उदाहरण का मकसद यह समझाना नहीं है कि शुरुआत में बाजार खराब चले तो अच्छा है। बाजार कब ऊपर जाएगा और कब नीचे, यह किसी के हाथ में नहीं है। मुख्य सीख यह है कि शुरुआती 2-3 साल का धीमा सफर यह तय नहीं करता कि आपकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी फेल हो गई है।

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कुल मिलाकर अगर आपकी SIP को अभी सिर्फ 2 या 3 साल ही हुए हैं और रिटर्न मामूली दिख रहा है, तो भरोसा मत खोइए। यह फेज सिर्फ अनुशासन के साथ बाजार में टिके रहने और ज्यादा से ज्यादा यूनिट्स बटोरने का है। कंपाउंडिंग पहले दिन से काम करती है, लेकिन उसका असली और बड़ा असर तभी दिखाई देता है जब आपके पास एक बड़ा इन्वेस्टमेंट बेस तैयार हो जाता है।

EPFO Big Update: ईपीएफओ ने पोर्टल पर बंद की UAN एक्टिवेशन की सुविधा, अब इस ऐप से होगा काम, जानें पूरा प्रोसेस

EPFO Discontinues UAN Activation on Portal: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरफ से एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। ईपीएफओ ने अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक्टिवेट करने की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

अब ईपीएफओ मेंबर्स को अपना UAN एक्टिवेट करने या नया यूएएन जेनरेट करने के लिए उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही अब इस प्रक्रिया के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि ईपीएफओ ने यह बदलाव क्यों किया है और अब आप उमंग ऐप के जरिए अपना यूएएन कैसे एक्टिवेट कर सकते हैं।

क्यों बंद हुई पोर्टल पर यह सुविधा?

ईपीएफओ ने सुरक्षा, विश्वसनीयता और यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 3 जुलाई को अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल को अपग्रेड किया है। इस अपग्रेड के बाद पोर्टल पर एक नोटिस जारी कर साफ कर दिया गया है कि वेबसाइट के जरिए होने वाला यूएएन एक्टिवेशन और डायरेक्ट यूएएन अलॉटमेंट अब बंद कर दिया गया है।

अब सुरक्षा को मजबूत करने और किसी भी तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन का रास्ता चुना है, जो सिर्फ उमंग ऐप पर उपलब्ध है।

UMANG App से UAN कैसे एक्टिवेट करें?

ईपीएफओ द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, अब आपको अपने स्मार्टफोन के जरिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगा:

  1. ऐप डाउनलोड और लॉग-इन: सबसे पहले अपने फोन में उमंग ऐप डाउनलोड करें और अपने मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्टर या लॉग-इन करें।
  2. EPFO सर्विस चुनें: ऐप के होमपेज पर जाकर ‘EPFO Services’ के विकल्प को खोजें और उस पर क्लिक करें।
  3. फेस ऑथेंटिकेशन विकल्प: इसके बाद आपको ‘UAN Services Through Face Authentication’ का विकल्प चुनना होगा।
  4. यूएएन एक्टिवेशन: अब ‘UAN Activation’ पर टैप करें।
  5. डिटेल्स दर्ज करें: यहां अपना 12-डिजिट का UAN नंबर, अपना आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  6. सहमति दें: आधार ऑथेंटिकेशन के लिए नियम और शर्तों को स्वीकार करें।
  7. फेस स्कैन करें: अब स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपने फोन के फ्रंट कैमरे से अपना चेहरा स्कैन करें।
  8. कन्फर्मेशन: वेरिफिकेशन सफल होते ही आपका UAN एक्टिवेट हो जाएगा और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर इसका कन्फर्मेशन मैसेज आ जाएगा।

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इन बातों का रखें ध्यान

इस नए तरीके से यूएएन एक्टिवेट करने से पहले कुछ बातों का खास ख्याल रखें:

  • आपका आधार कार्ड एक एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए।
  • आपके आधार की डिटेल्स जैसे- नाम, जन्मतिथि ईपीएफओ के रिकॉर्ड से पूरी तरह मैच होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऐसा स्मार्टफोन होना चाहिए जिसका कैमरा और इंटरनेट कनेक्शन ठीक से काम कर रहा हो, ताकि फेस स्कैनिंग में कोई दिक्कत न आए।

अपग्रेड पोर्टल पर अब कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?

भले ही पोर्टल से यूएएन एक्टिवेशन की सुविधा हटा दी गई हो, लेकिन वेबसाइट पर कई अन्य जरूरी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। मेंबर्स अभी भी पोर्टल पर जाकर ‘Know Your UAN’ सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, डेथ क्लेम फाइल करने की सुविधा भी वेबसाइट पर चालू रहेगी। साथ ही, अगर कोई अपना यूएएन भूल गया है, तो उसे मोबाइल नंबर और पहचान वेरिफिकेशन के जरिए रिकवर करने की प्रक्रिया को और आसान बना दिया गया है।

ITR Filing 2026: ITR भरने में हो गई गलती? बिना किसी जुर्माने के मिलता है रिटर्न सुधारने का मौका, जानें पूरी डिटेल

How Many Times Can We Revise ITR Form: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय सही फॉर्म का चुनाव करना सबसे जरूरी स्टेप है। अगर आपने गलती से गलत आईटीआर फॉर्म चुन लिया है, तो आपकी रिटर्न डिफेक्टिव या इनवैलिड घोषित हो सकती है। इससे न केवल आपका रिफंड अटक सकता है, बल्कि टैक्स विभाग का नोटिस भी आ सकता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपसे फॉर्म चुनने में कोई गलती हो गई है, तो आयकर विभाग के नोटिस का इंतजार करने के बजाय खुद ही उसे जल्द से जल्द सुधार लें। आइए समझते हैं कि गलत फॉर्म को कैसे सुधारा जा सकता है, कितनी बार बदलाव की अनुमति है और बजट 2026 में समय-सीमा को लेकर क्या बड़ा बदलाव हुआ है।

क्या गलत आईटीआर फॉर्म को सुधारा जा सकता है?

हां, बिल्कुल सुधारा जा सकता है। अगर आपने अपनी ओरिजिनल रिटर्न फाइल और वेरिफाई कर दी है, तो आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत आप ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ दाखिल करके अपनी गलती सुधार सकते हैं।

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीन काकड़े बताते हैं, ‘कानूनन टैक्सपेयर्स रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए अपना आईटीआर फॉर्म बदल सकते हैं। रिवाइज्ड रिटर्न पूरी तरह से ओरिजिनल रिटर्न की जगह ले लेती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी को कैपिटल गेंस था जिसके लिए ITR-2 भरना था, लेकिन उसने गलती से ITR-1 भर दिया, तो वह सही फॉर्म चुनकर रिवाइज्ड रिटर्न भर सकता है।’

CA श्रेया गुप्ता गोयल के मुताबिक, अगर विभाग को पहले ही गलती का पता चल जाता है और वह धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस जारी कर देता है, तो आपको तय समय के भीतर उसका जवाब देना होगा। अगर आप नोटिस को नजरअंदाज करते हैं, तो मान लिया जाएगा कि आपने रिटर्न फाइल ही नहीं की थी।

कितनी बार रिवाइज कर सकते हैं अपना ITR?

इनकम टैक्स एक्ट में इस बात पर कोई पाबंदी नहीं है कि आप कितनी बार अपनी रिटर्न को रिवाइज कर सकते हैं। अगर आपको बार-बार अपनी गलतियों का पता चलता है, तो आप तय समय-सीमा के भीतर कितनी भी बार रिवाइज्ड आईटीआर फाइल कर सकते हैं।

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वैसे भले ही रिवाइज करने की कोई लिमिट न हो, लेकिन सीए प्रवीन काकड़े सलाह देते हैं कि बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से बचना चाहिए। सभी सुधारों को एक ही बार में ठीक से चेक करके एक फाइनल रिवाइज्ड रिटर्न भरना बेहतर होता है, क्योंकि बार-बार रिवाइज करने से आपका केस टैक्स विभाग की नजरों में आ सकता है।

बजट 2026 में बढ़ गई डेडलाइन, लेकिन लगेगा जुर्माना!

बजट 2026 में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है, जिसे जानना बेहद जरूरी है:

विंडो को बढ़ाया गया: एसेसमेंट ईयर (AY 2026-27) के लिए रिवाइज्ड रिटर्न भरने की आखिरी तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर सीधे 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यानी अब आपको सुधार के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

31 दिसंबर 2026 तक फ्री: अगर आप अपनी रिटर्न में कोई भी सुधार 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले कर लेते हैं, तो आपको कोई अतिरिक्त फीस या पेनल्टी नहीं देनी होगी।

1 जनवरी के बाद ₹5000 की फीस: अगर आप इस बढ़ी हुई विंडो का फायदा उठाते हुए 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 के बीच रिवाइज्ड आईटीआर भरते हैं, तो आपको ₹5000 की फीस देनी होगी। हालांकि, अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से कम है, तो यह फीस ₹1000 होगी।

गलती न सुधारने पर क्या होगा नुकसान?

अगर आप गलत फॉर्म को समय रहते नहीं सुधारते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  1. अटक जाएगा रिफंड: फॉर्म गलत होने पर टैक्स रिफंड की प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
  2. लॉस कैरी फॉरवर्ड नहीं होगा: आप कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।
  3. ITR-U का आखिरी विकल्प: एक बार जब 31 मार्च की रिवाइज्ड विंडो भी बंद हो जाएगी, तो आपके पास केवल अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) भरने का रास्ता बचेगा, जिसमें आपको भारी ब्याज के साथ अतिरिक्त पेनल्टी टैक्स भी चुकाना पड़ेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Personal Loan: पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं? अप्लाई करने से पहले इन 6 बातों को नहीं जाना, तो भुगतना पड़ेगा भारी नुकसान

Personal Loan Checklist Before Applying: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो पर्सनल लोन सबसे आसान और तुरंत मिलने वाला जरिया नजर आता है। आजकल बैंक और डिजिटल लेंडर्स मिनटों में इंस्टेंट अप्रूवल और बिना किसी खास कागजी कार्रवाई के लोन ऑफर कर देते हैं। इस चक्कर में कई बार लोग बिना सोचे-समझे पहला ही ऑफर स्वीकार कर लेते हैं।

लेकिन पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, जिसकी ब्याज दरें काफी ऊंची होती हैं। इसलिए लोन के लिए हां कहने से पहले आपको इसकी कुल लागत, रीपेमेंट की शर्तों और अपनी मंथली ईएमआई (EMI) के गणित को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। आइए जानते हैं वो 6 जरूरी बातें, जिन्हें लोन लेने से पहले चेक करना बेहद जरूरी है।

1. लोन लेने का असली मकसद क्या है?

लोन अप्लाई करने से पहले खुद से यह सवाल जरूर पूछें कि आपको इन पैसों की जरूरत क्यों है? अगर आप किसी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या बहुत जरूरी काम के लिए लोन ले रहे हैं, तो यह समझ आता है। लेकिन अगर आप सिर्फ अपनी लग्जरी, महंगे गैजेट्स खरीदने या घूमने-फिरने के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं, तो यह आगे चलकर आपकी जेब पर भारी वित्तीय तनाव पैदा कर सकता है।

2. सिर्फ ब्याज दर न देखें, कुल लागत समझें

ज्यादातर लोग पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर की तुलना करते हैं। हालांकि कम ब्याज दर जरूरी है, लेकिन यह लोन की कुल लागत का सिर्फ एक हिस्सा है। आपको लोन लेते समय इन छिपे हुए खर्चों को भी देखना चाहिए:

  1. प्रोसेसिंग फीस: यह लोन अमाउंट का 1% से 3% तक हो सकती है।
  2. फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट चार्ज: समय से पहले लोन बंद करने पर लगने वाली पेनल्टी।
  3. लेट पेमेंट फीस: ईएमआई बाउंस होने पर लगने वाला भारी जुर्माना।

ये सभी चार्जेस मिलकर आपके लोन को काफी महंगा बना देते हैं।

3. अपनी रीपेमेंट क्षमता का आकलन करें

कोई लोन आज आपकी सैलरी के हिसाब से भले ही किफायती लग रहा हो, लेकिन भविष्य में वित्तीय उतार-चढ़ाव के कारण उसकी ईएमआई चुकाना भारी पड़ सकता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आपकी कुल मंथली इनकम का 50% से अधिक हिस्सा सभी लोन की ईएमआई चुकाने में नहीं जाना चाहिए। अपनी क्षमता से अधिक कर्ज लेना आपको डिफॉल्टर बना सकता है और मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

4. अपना क्रेडिट स्कोर जरूर जांचें

पर्सनल लोन अप्रूवल और उसकी ब्याज दरें काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती हैं। लोन अप्लाई करने से पहले अपना सिबिल स्कोर मुफ्त में ऑनलाइन जरूर चेक करें। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो आप बैंकों से कम ब्याज दरों और बेहतर शर्तों पर लोन के लिए मोलभाव कर सकते हैं। पहले से स्कोर चेक करने पर अगर उसमें कोई गड़बड़ी दिखती है, तो आप उसे समय रहते ठीक भी करवा सकते हैं।

5. लोन की अवधि को समझदारी से चुनें

लोन चुकाने की अवधि का सीधा असर आपकी ईएमआई और कुल ब्याज पर पड़ता है:

लंबी अवधि: इसमें आपकी हर महीने की ईएमआई तो छोटी हो जाएगी, लेकिन आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे लोन की कुल लागत बहुत बढ़ जाएगी।

कम अवधि: इसमें हर महीने जाने वाली ईएमआई बड़ी होगी, लेकिन आप जल्दी कर्जमुक्त हो जाएंगे और आपकी जेब से ब्याज के रूप में बहुत कम पैसा जाएगा। अपनी मंथली इनकम के बजट के हिसाब से ही सही अवधि का चुनाव करें।

6. लोन एग्रीमेंट के ‘नियम व शर्तें’ ध्यान से पढ़ें

लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों में लिखे नियम और शर्तों को पढ़े बिना कभी भी हस्ताक्षर या डिजिटल सबमिट न करें। इसमें लोन रीपेमेंट के नियम, पेनल्टी क्लॉज और छिपे हुए नियम लिखे होते हैं। एग्रीमेंट को अच्छी तरह समझ लेने से भविष्य में किसी भी तरह के धोखे या पछतावे से बचा जा सकता है।

सिर्फ ₹6000 की SIP से हर महीने पाएं ₹6 लाख की पेंशन, साथ में ₹2.64 करोड़ का बोनस! ये है सीक्रेट फॉर्मूला

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Mutual Fund SIP SWP Calculator: रिटायरमेंट के बाद ठाठ से जिंदगी जीना और हर महीने लाखों की पेंशन पाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको निवेश का सही और स्मार्ट तरीका पता होना चाहिए। आम निवेशक एक तय रकम की एसआईपी (SIP) शुरू करके उसे सालों-साल चलाते हैं, जिससे वे एक अच्छा फंड तो बना लेते हैं, लेकिन ‘स्मार्ट निवेशक’ अपनी बढ़ती आमदनी के साथ हर साल अपने निवेश को भी बढ़ाते हैं।

अगर आप 30 साल की उम्र में रोजाना महज ₹200 बचाकर ₹6000 की मंथली म्यूचुअल फंड एसआईपी शुरू करते हैं, तो रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹9 करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम फंड हो सकता है। इसके बाद एक खास ट्रिक के जरिए आप इसी फंड से ताउम्र ₹6 लाख महीना की पेंशन भी पा सकते हैं। आइए आसानी से समझते हैं इस ‘SIP + SWP’ कैलकुलेटर का पूरा गणित।

स्टेप-अप एसआईपी का जादू: ऐसे बनेगा ₹9 करोड़ का फंड

इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको ‘स्टेप-अप एसआईपी’ का इस्तेमाल करना होगा। इसका मतलब है कि आपको हर साल अपनी एसआईपी की रकम में अपनी इनकम के हिसाब से थोड़ी बढ़ोतरी करनी होगी। एसबीआई सिक्योरिटीज के म्यूचुअल फंड कैलकुलेटर के मुताबिक इसका गणित इस प्रकार है:

  • शुरुआती मंथली निवेश: ₹6000 प्रति माह
  • सालाना स्टेप-अप: 10%, यानी हर साल आपको एसआईपी की रकम में 10% की बढ़ोतरी करनी है। जैसे पहले साल ₹6000, तो दूसरे साल ₹6600 मंथली।
  • निवेश की अवधि: 30 वर्ष, मान लेते हैं आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र तक निवेश करते हैं।
  • अनुमानित सालाना रिटर्न: 15%, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में इतना रिटर्न मिलना मुमकिन है।
  • 30 साल बाद कुल मैच्योरिटी फंड: करीब ₹9.01 करोड़

वहीं अगर आप बिना स्टेप-अप के सीधे ₹6000 की सिंपल एसआईपी 30 साल तक चलाते, तो 15% रिटर्न के हिसाब से केवल ₹4.20 करोड़ ही जमा हो पाते। यानी सिर्फ 10% सालाना निवेश बढ़ाकर आपने अपने फंड को दोगुने से भी ज्यादा कर लिया।

पेंशन के लिए अपनाएं SWP फॉर्मूला: हर महीने मिलेंगे ₹6 लाख

जब आप 60 वर्ष की उम्र में ₹9 करोड़ का फंड जमा कर लेते हैं, तो अब आपको म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का सहारा लेना होगा। सीनियर सिटीजंस और रिटायर्ड लोगों के लिए SWP रेगुलर इनकम का सबसे बेहतरीन जरिया है।

SWP कैलकुलेटर का गणित

  • एसडब्ल्यूपी में कुल निवेश: ₹9 करोड़
  • पेंशन की अवधि: 25 वर्ष, 60 साल से लेकर 85 साल की उम्र तक
  • SWP पर अनुमानित रिटर्न: 7% (सुरक्षित या कंजर्वेटिव फंड्स के लिहाज से)
  • मंथली फिक्स्ड पेंशन: ₹6 लाख प्रति माह

बचा हुआ इमरजेंसी फंड: हर महीने ₹6 लाख की पेंशन निकालने के बाद भी 25 साल पूरे होने पर आपके पास ₹2.64 करोड़ का फंड अलग से बच जाएगा। इस रकम का इस्तेमाल बुढ़ापे में किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी के लिए किया जा सकता है।

30 साल बाद आखिर ₹6 लाख की पेंशन क्यों है जरूरी?

कई लोगों को लग सकता है कि ₹6 लाख महीने की पेंशन बहुत ज्यादा है, लेकिन इसके पीछे महंगाई का बड़ा रोल है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘आज के समय में एक लोअर-मिडिल क्लास सीनियर सिटीजन के लिए ₹50000 का मंथली खर्च काफी होता है।

₹4000 तक बढ़ेगी टेक-होम सैलरी, लेकिन रिटायरमेंट पर होगा ₹80 लाख का भारी नुकसान! एक्सपर्ट से समझिए नए EPF नियम का पूरा गणित

अगर हम स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित सालाना 8% की महंगाई दर को जोड़ें, तो आज के ₹50000 की वैल्यू 30 साल बाद बढ़कर करीब ₹5 लाख प्रति माह हो जाएगी। इसमें बुढ़ापे के अन्य मेडिकल खर्चों और फुटकर खर्चों को जोड़ दें, तो 30 साल बाद एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ₹6 लाख की मंथली पेंशन बिल्कुल सही और आदर्श मानी जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: मंथली 2000 रुपये की SIP से 10 लाख का फंड कितने समय में तैयार होगा? आसानी से समझें पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: कई लोग निवेश शुरू करन के लिए इनकम बढ़ने का इंतजार करते हैं। इनकम बढ़ने पर खर्च भी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वे निवेश शुरू करने के लिए सही मौके का इंतजार करते रह जाते हैं। सच यह है कि निवेश शुरू करने के लिए ज्यादा इनकम जरूरी नहीं है। आप कम इनकम से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। खासकर आप सिप से म्यूचुअल फंड की स्कीम में कम अमाउंट से निवेश शुरू कर बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। आइए यहां पूरा कैलकुलेशन समझते हैं।

निवेश में बरतना होगा अनुशासन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश में सबसे जरूरी अनुशासन है। अगर आप 2000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं और लंबी अवधि तक हर महीने निवेश करना जारी रखते हैं तो आप आसानी से बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश करने पर सालाना कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न आराम से मिल जाता है। कई बार इससे ज्यादा यानी 14 फीसदी या 16 फीसदी तक रिटर्न मिल जाता है। लंबी अवधि के निवेश में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का मिलता है।

लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा

कंपाउंडिंग का मतलब यह है कि निवेश के रिटर्न पर भी आपको रिटर्न मिलता है। इससे आपका पैसा तेजी से बढ़ता है। कंपाउंडिंग की वजह से छोटे अमाउंट के निवेश से भी लंबी अवधि में आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। जो इनवेस्टर कंपाउंडिंग के मैजिक को समझ जाते हैं वे निवेश में अनुशासन बनाए रखते हैं। इससे 10-15 साल में उनके लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

आइए एक टेबल की मदद से समझते हैं कि हर महीने 2000 रुपये के SIP निवेश से 10 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कितना समय लगेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न10 लाख का फंड तैयार होने में अनुमानित समय
12%15 साल कुछ महीने
14%14 साल कुछ महीने
16%13 साल कुछ महीने

अगर आप कम समय में बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं तो आप स्टेट-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्टेप-अप स्ट्रेटेजी में हर साल सिप का अमाउंट बढ़ा दिया जाता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आप निवेश की शुरुआत मंथली 2000 रुपये के निवेश से करते हैं। दूसरे साल आप निवेश का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। तीसरे साल भी आप SIP का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। इस स्ट्रेटेजी से कम समय में आपके लिए काफी बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है।

आइए समझते हैं कि स्टेप-अप सिप से 10 लाख रुपये का SIP तैयार करने में कितना समय लगेगा।

सामान्य SIP से 10 लाख10% स्टेप-अप SIP से 10 लाखसमय की बचतअनुमानित सालाना रिटर्न
15 साल कुछ महीने12 साल कुछ महीने3 साल12%
14 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने3 साल14%
13 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने2 साल16%

स्टेप-अप सिप के फायदे

स्टेप-अप सिप में हम देखते हैं कि हर महीने 2000 रुपये के SIP निवेश से 10 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कम समय लगता है। चूंकि, आप SIP अमाउंट हर साल सिर्फ 10 फीसदी बढ़ाते हैं, जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। लेकिन, आपके निवेश की अवधि काफी कम हो जाती है। इसकी वजह कंपाउंडिंग का मैजिक है।

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रिटर्न की गारंटी नहीं

यहां टेबल में 12 फीसदी, 14 फीसदी और 16 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाया गया है। इसका मतलब है कि हम तीन तरह के रिटर्न का अनुमान लगाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड के रिटर्न के बारे में पहले से कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, आम तौर पर यह देखा  गया है कि लंबी अवधि तक निवेश करने पर कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। ऊपर टेबल में दी गई जानकारी सिर्फ कैलकुलेशन के लिए है।

ICICI प्रूडेंशियल के चिंतन हरिया से जानें वेल्थ क्रिएशन के मंत्र, बाजार में अब कहां से निकलें और कहां बढ़ाएं निवेश

बाजार में आज तेजी का मोमेंटम बढ़ा है,निफ्टी 150 अंक से ज्यादा चढ़कर 7 मई के बाद पहली बार 24300 के पार निकला है। ICICI BANK, HDFC BANK, BHARTI और टाटा स्टील ने जोश भरा है। आज बैंक निफ्टी भी चला है। लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% से ज्यादा फिसलकर 12 के नीचे आ गया है। रियल्टी,मेटल और फार्मा में आज सबसे ज्यादा खरीदारी आई है। तीनों सेक्टर इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। साथ ही IT में लगातार दूसरे दिन तेजी है। आईटी इंडेक्स 1.5 फीसदी चढ़ा। वहीं दूसरी ओर सरकारी बैंकों में आज दबाव है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला है। बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक 3 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं।

निवेशक चाहें तो कर सकते हैं लार्जकैप में एकमुश्त निवेश

ऐसे में बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए ICICI प्रूडेंशियल AMC के प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चिंतन हरिया ने कहा कि 2 साल से भारतीय बाजार और रुपये ने अंडरपरफॉर्म किया है। RBI के कदमों से रुपया काफी संभला है। कच्चे तेल के दाम युद्ध से पहले के भाव पर आ गए हैं। कमजोर मॉनसून से भी ज्यादा चिंता नहीं है। ऐसे में लार्जकैप में अच्छे मौके बन रहे हैं। निवेशक चाहें तो लार्जकैप में एकमुश्त निवेश कर सकते हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें, लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें

चिंतन हरिया ने आगे कहा कि लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप ने आउटपरफॉर्म किया है। मिडकैप और स्मॉलकैप के वैल्युएशन अभी भी सस्ते नहीं हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप की ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल है। मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें। लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें।

हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव

उन्होंने आगे कहा कि जून तिमाही के नतीजों में कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव है। FCNB डिपॉजिट का फायदा बैंकों को मिलेगा। बैंकिंग सेक्टर अच्छा लग रहा है। एनर्जी सेक्टर भी पसंद है। इस सेक्टर कोकच्चे तेल की कीमतें घटने का फायदा मिलेगा। वहीं, डिफेंस और मेटल शेयर काफी चल चुके हैं। अब इनमें मुनाफावसूली संभव है।

चिंतन हरिया का मानना है कि लंबी अवधि में ऑटो सेक्टर अच्छा कर सकता है। ऑटो सेक्टर को एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी का भी फायदा मिलेगा। निवेशकों के लिए लार्जकैप एक्टिव और पैसिव फंड्स में निवेश करने का मौका है। मल्टी एसेट बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश कर सकते हैं। किसी भी फ्लैक्सीकैप फंड्स में SIP कर सकते हैं। आज जो निवेश करेंगे उसका फायदा 3-5 साल में मिलेगा।

 

 

Market Insight : अगले 6-8 हफ्ते में निफ्टी में देखने को मिल सकता है 25500 का लेवल, IT में 10-15% रिकवरी की उम्मीद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।