चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की बात कही। चीन के मुताबिक, PM मोदी ने कहा कि भारत अपनी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा कि जिनपिंग और मोदी के बीच दिल्ली में हुई बैठक में सबसे अहम सहमति यह बनी कि चीन और भारत को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बने रहना चाहिए। वांग के मुताबिक, दोनों नेताओं ने सीमा से लगे इलाकों में शांति बनाए रखने पर भी सहमति जताई। दोनों नेताओं की यह बैठक 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स सम्मेलन से इतर हुई थी। वांग बोले- दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है वांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और लोगों के बीच संपर्क भी पहले से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत की 2.8 अरब से ज्यादा आबादी के लिए दोनों देशों के रिश्तों में सुधार अच्छी खबर है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। दोनों देशों के नेताओं की रणनीतिक दिशा में चीन-भारत संबंध धीरे-धीरे खराब दौर से बाहर निकले हैं। अब दोनों देशों के रिश्ते फिर से शुरू होने के बाद एक नए स्तर पर पहुंच रहे हैं। ‘सीमा विवाद को पूरे रिश्ते के संदर्भ में देखना चाहिए’ वांग ने कहा कि सीमा विवाद को चीन-भारत के पूरे रिश्ते के बड़े संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत और सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की मुख्य दिशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दोनों देशों से अपने विकास और राष्ट्रीय प्रगति को तेज करने की अपील की। साथ ही कहा कि चीन और भारत को मिलकर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और साझा समृद्धि में योगदान देना चाहिए। मोदी बोले- मतभेद विवाद न बनें भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, PM मोदी ने जिनपिंग से मुलाकात में रिश्तों को लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने रिश्तों को आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हित के तीन सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को संभालने के लिए रणनीतिक और लंबे समय का नजरिया जरूरी है। एयर कनेक्टिविटी और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा अरुणाचल में तनाव के बीच हुई बैठक PM मोदी और जिनपिंग की बैठक ऐसे समय हुई, जब अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज के तासिंग इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, जुलाई और अगस्त में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ था। तासिंग इलाका भारत-चीन सीमा के पास स्थित है और यहां दोनों देशों के सैनिकों की मौजूदगी को लेकर पहले भी तनाव रहा है। भारत और चीन पिछले कुछ समय से सीमा पर तनाव कम करने और आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने LAC पर अपनी सेना की तैनाती में कमी की है और कुछ इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाया गया है। लेकिन तासिंग में नए तनाव की खबरें दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की कोशिशों के लिए चुनौती मानी जा सकती हैं। ——————– यह खबर भी पढ़ें… वर्ल्ड मीडिया बोला- ब्रिक्स में भारत के लिए बड़ी कामयाबी BRICS समिट के दौरान जारी हुए नई दिल्ली घोषणापत्र पर वर्ल्ड मीडिया के रिएक्शन आ रहे हैं। रॉयटर्स ने इस समिट को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। पूरी खबर पढ़ें…
BRICS Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में हुए हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स समिट का समापन रविवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ के साथ हुआ, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। वहीं, इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। प्रधानमंत्री ने कम से कम 15 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियन शामिल थे। इन बैठकों के जरिए पीएम मोदी ने भारत के अहम सहयोगियों और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया, जिसमें उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच मजबूत संबंध बनाने और वैश्विक संस्थागत सुधारों की वकालत की। साथ ही, उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों को लाभ पहुंचाने के लिए कई पहल भी प्रस्तावित कीं।
पहला दिन: मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ बैठक
11 सितंबर को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को और पश्चिमी देशों के संबंध प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की रणनीतियां भी शामिल थीं। चर्चाओं में रक्षा, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात हुई।
इसके कुछ घंटों बाद, उन्होंने भारत मंडपम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की; यह दो हफ्तों में उनकी दूसरी बैठक थी। प्रधानमंत्री ने भारत के इस रुख को दोहराया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। पेजेश्कियान ने भी इस संघर्ष के बीच भारत से बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। गुटेरेस ने पीएम मोदी को ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता मिलने पर बधाई दी। दोनों नेताओं ने मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) के महत्व और UN सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
बैठकों के बाद PM मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन, व्यापार और आर्थिक सहयोग में इस समूह की बढ़ती मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच भारत ने अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार मजबूती और इनोवेशन को बनाया है।
दूसरा दिन: सबकी नजरें शी-मोदी पर
प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया, जो सात साल बाद भारत की अपनी पहली यात्रा पर आएं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार के माहौल में हो रही है। शनिवार को ब्रिक्स समिट की भी औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें ग्लोबल गवर्नेंस, मल्टीलेटरलिज्म, आर्थिक सहयोग और ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद उसके भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ब्रिक्स समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं है। उन्होंने ऐसे समय में ज्यादा सहयोग की अपील की जब ‘ग्लोबल साउथ’ मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस संस्थानों में सुधार के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।
प्रधानमंत्री ने शी के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सीमा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चीन के साथ “अर्थपूर्ण बातचीत” के लिए तैयार है। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और उन्होंने वैश्विक मंच पर दोनों देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की। दोनों पक्षों ने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।
शी के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मलेशिया के अनवर इब्राहिम, यूएई के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के ले मिन्ह हंग के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं।
तीसरा दिन: ब्रिक्स समिट का समापन
ईरान और UAE के बीच तनाव के बावजूद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ पर पूरी सहमति बनने के बाद, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समिट के समापन की औपचारिक घोषणा की। ब्रिक्स की ‘फैमिली फोटो’ में उनके साथ पुतिन और शी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने इसे ब्रिक्स परिवार की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का एक सशक्त उदाहरण बताया।
अन्य नेताओं के भारत से रवाना होने के दौरान, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और मिस्र के अब्देल फतह अल-सिसी के साथ भी बैठकें कीं।
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दिल्ली में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा था। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आए थे। यह बहुत बड़ा घटनाक्रम था। दो साल पहले दिल्ली में हुए जी 20 शिखर सम्मेलन में ये दोनों नेता शामिल नहीं हुए थे। उसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत आए थे। इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग और पुतिन दोनों का आना बड़ी बात थी। उनके अलावा ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के नेता भी दिल्ली में मौजूद थे।
लेकिन उसी समय अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर दिल्ली छोड़ गए थे। सोचें, भारत आए कई नेता ऐसे भी थे, जिनके साथ अमेरिका के बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन सबसे बचते हुए सर्जियो गोर भारत के पूर्वोत्तर की यात्रा पर चले गए। उन्होंने पूर्वोत्तर की पहली यात्रा के लिए हिंसा से प्रभावित मणिपुर का चयन किया, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले सर्जियो गोर जम्मू कश्मीर भी गए थे, जहां उन्होंने कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया। इस पर पाकिस्तान बहुत नाराज हुआ था। बहरहाल, सर्जियो गोर मणिपुर गए और वहां से वीडियो, तस्वीरें आदि सोशल मीडिया में डालीं। क्या अमेरिका इस बहाने भी कोई मैसेज करना चाहता है?

नई दिल्ली। ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दूसरे सत्र में अपने अध्यक्षीय भाषण में दुनिया के देशों को नसीहत दी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना गलत है। मोदी ने कहा कि इससे दुनिया की तरक्की पर असर पड़ता है। मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में समावेशिता होनी चाहिए न कि किसी एक देश का एकाधिकार।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार की सुबह ब्रिक्स के नेता की ग्रुप फोटो सेशन के बाद ओपन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है और आज की आपस में जुड़ी दुनिया में एक जगह के तनाव का असर हर देश पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि दुनिया के देश एक दूसरे से जुड़े हैं। एक जगह आया संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।
मोदी ने ब्रिक्स देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया। इससे पहले भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दोनों ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए। इसके बाद अपने भाषण में मोदी ने कहा, ‘ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। दुनिया को अब ब्रिक्स से सिर्फ विचार और वादे नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद है। मुझे भरोसा है कि हम मिलकर इन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे’।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुए फैसलों की जानकारी देते हुए मोदी ने कहा कि ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ के जरिए लोगों को काम के लिए जरूरी स्किल सिखाने, रोजगार बढ़ाने और महिलाओं को ज्यादा काम के मौके देने पर काम किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि छोटे कारोबारों को मदद देने के लिए ‘ब्रिक्स एमएसएमई’ पोर्टल शुरू किया गया है। इससे छोटे कारोबारी नई जानकारी, पैसे और नए बाजार से जुड़ सकेंगे। उन्होंने बताया कि शहरों में आने जाने की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए भी ब्रिक्स देशों के बीच अनुभव साझा किए जाएंगे। उन्होंने सप्लाई चेन को और बेहतर बनाने के बारे में हुए विचार के बारे में बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के अगले सम्मेलन की मेजबानी चीन को सौंपी और इसके लिए उसको शुभकामनाएं दीं। मोदी ने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी नेताओं और उनकी टीमों की सराहना की। अंत में उन्होंने सभी को सुरक्षित और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समापन भाषण में कहा, ‘हम अब समापन की ओर बढ़ रहे हैं। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, मैं आप सभी की सक्रिय भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं’। मोदी ने आगे कहा, ‘सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी ने सम्मेलन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मेलन के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने ब्रिक्स के बीच सहयोग को व्यापकता और गहराई, दोनों प्रदान की हैं’।

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कई देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की। ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी की दोपक्षीय वार्ताएं शुरू हुईं, जो शाम तक जारी रहीं। मोदी ने रविवार को फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर के साथ दोपक्षीय बैठक की। उन्होंने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव के साथ भी दोपक्षीय बैठक की। इससे पहले शनिवार को उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा ईरान, मलेशिया, यूएई आदि देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की थी।
रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की एक अहम दोपक्षीय वार्ता दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा से हुई। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के शुरुआती पांच सदस्यों में से एक है। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल अल सीसी से भी दोपक्षीय वार्ता की। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच इस मुलाकात क अहम माना जा रहा है। मोदी ने युगांडा, नाइजीरिया और बुरूंडी के नेताओं के साथ भी दोपक्षीय वार्ता की।

नई दिल्ली। ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन के दूसरे दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ओपन सत्र में अपनी बात रखी। उन्होंने पश्चिम के देशों पर निशाना साधा। हालांकि शी ने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि वैश्विक स्थिति बदल रही है और अब ताकतवर के हिसाब से काम करने का नियम नहीं चलेगा। जिनपिंग ने अपने भाषण में ‘ताकत ही सही है’ के विचार की आलोचना की और कहा कि सभी देशों के संप्रभुता समान है।
अपने भाषण में जिनपिंग ने ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ का प्रस्ताव रखा है। गौरतलब है कि वे काफी समय से और देशों को ब्रिक्स में शामिल करने की वकालत करते रहे हैं। वे इसका आकार बढ़ा कर ग्लोबल साउथ के कुछ देशों को इसमें शामिल करना चाहते हैं। शी जिनपिंग ने अमेरिका या किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में ताकत का सिद्धांत नहीं चलेगा और सभी देशों को समानता मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का आकार, शक्ति या आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, वैश्विक समुदाय में सभी देशों को समान दर्जा मिलना चाहिए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ने ग्लोबल साउथ को एकजुट करने और ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए एआई ओपन सोर्स कम्युनिटी, डिजिटल इकोसिस्टम और इंजीनियर ट्रेनिंग एलायंस सहित पांच प्रमुख वैश्विक पहलों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को एकजुट करना होगा, अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक सक्रिय, स्थिर और सकारात्मक शक्ति बनना होगा और समस्त मानवता के कल्याण को आगे बढ़ाना होगा।
BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनी। वर्ल्ड मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी माना। खास बात यह रही कि BRICS अमेरिका-विरोधी गुट बनने के बजाय साझा मुद्दों पर साथ आया। समिट की रिपोर्टिंग में भारत की कूटनीति के साथ BRICS में भारत-चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ भी चर्चा में रही। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को कैसे देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हुए।
उनके अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी सम्मेलन के बाद वापस अपने देश रवाना हो जाने के कारण इस डिनर में मौजूद नहीं थे।
क्यों गायब रहे शी जिनपिंग? सामने आई यह वजह
चीनी राष्ट्रपति के डिनर में शामिल न होने का सटीक और आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शी जिनपिंग सम्मेलन के व्यस्त शेड्यूल के बाद आराम करने के लिए सीधे अपने होटल चले गए थे।
गौरतलब है कि शी जिनपिंग शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्रों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की थी।
पुतिन से लेकर कई दिग्गजों की रही मौजूदगी
शी जिनपिंग भले ही डिनर में मौजूद नहीं रहे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा आयोजित इस शाही भोज में शिरकत की। इस डिनर में केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए:
केंद्रीय मंत्री: अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान।
मुख्यमंत्री व नेता: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।
ये सभी केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री संसद भवन से दो बसों में सवार होकर डिनर के वेन्यू यानी भारत मंडपम पहुंचे थे।
डिनर के मेन्यू में क्या था खास?
विदेशी और देसी मेहमानों के लिए परोसे गए भोजन में भारतीय व्यंजनों का खास स्वाद देखने को मिला:
मेन कोर्स: खांडवी मिल-फॉय, खुंब गलोटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर-बीन्स पोरियल और मिलेट्स (बाजरा) पुलाव।
डेजर्ट (मीठा): पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने शनिवार को नई दिल्ली में BRICS समिट के डिनर के दौरान किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत…’ और मुकेश का गीत दोस्त दोस्त ना रहा… गाना गाकर सबका ध्यान खींचा। अनवर ने किशोर कुमार के जिस गाने को अपनी आवाज दी, वह 1965 की फिल्म ‘तीन देवियां’ का है। इसे किशोर कुमार ने गाया था। संगीत एसडी बर्मन ने दिया था। गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। मुकेश का गाया दोस्त दोस्त न रहा गाना ‘संगम’ मूवी का है। इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। गीत के बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। अनवर ने इस वीडियो को अपने X सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर भी किया। वीडियो करीब डेढ़ मिनट का है। इसमें वे पियानो की धुन पर एक दो स्टेंजा गाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- गुरु, थोड़ा सा गाने की इजाजत है? उनके गाने के 2 फोटो अनवर किशोर कुमार के फैन हैं, पहले भी यह गाना गुनगुना चुके मलेशिया के पीएम पहले भी किशोर कुमार के फैन होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 2024 में भारत में एक इंटरव्यू के दौरान भी यही गीत गुनगुनाया था। इसके अलावा, फरवरी 2026 में पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान उन्होंने एक आधिकारिक वीडियो मोंटाज साझा किया था। इसमें ‘कभी खुशी कभी गम’ का लोकप्रिय गाना ‘बोले चूड़ियां’ इस्तेमाल किया गया था। मलेशिया में 27 लाख लोग भारतीय मूल के, बॉलीवुड और तमिल मूवी लोकप्रिय डिप्टी पीएम भी रह चुके हैं अनवर अनवर इब्राहिम मलेशिया के 10वें प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2022 को पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे 1993 में मलेशिया के 7वें डिप्टी पीएम बने थे। 1998 में, अनवर को तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने सभी सरकारी पदों से हटा दिया गया था। उन्हें अप्रैल 1999 में भ्रष्टाचार और समलैंगिकता के आरोपों में जेल भेज दिया गया था और 2004 में उनकी सजा पलटने के बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अनवर 2008 से 2015 तक विपक्ष के नेता रहे। 2022 के आम चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री बने। ————— ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… मोदी–जिनपिंग बोले- मतभेद विवाद में न बदलें:आपसी संबंध लंबे चले; गलवान झड़प के बाद चीन से इम्पोर्ट दोगुना हुआ
पीएम मोदी ने दिल्ली में BRICS समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…
पूरी दुनिया की नजर इस समय राजधानी दिल्ली पर है। शनिवार 12 सितंबर को दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट की शुरुआत हो गई है। वहीं समिट के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत और चीन के रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा की। भारत की ओर से साफ किया गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में बदलने से बचना चाहिए। इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। वहीं, राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और शेयर विकास हासिल कर सकते हैं।
साथ मिलकर काम करने पर जोर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा मुश्किल अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत और चीन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में शामिल हैं और ग्लोबल साउथ के अहम सदस्य हैं। ऐसे में दोनों को अपने लोगों के हित और पूरी मानवता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना चाहिए। शी ने कहा कि BRICS के मंच के जरिए भारत और चीन को बेहतर और मजबूत सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को समानता और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया के साथ ऐसे आर्थिक वैश्वीकरण का समर्थन करना चाहिए, जिसमें सभी देशों को साथ लेकर चला जाए और सभी को फायदा मिले। इससे दुनिया में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
वहीं दोनों नेताओं ने मुलाकात के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच रिश्तों को लगातार मजबूत और बेहतर बनाने के लिए जरूरी आधार है।” बता दें कि, करीब सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले वह 2019 में भारत आए थे और उस दौरान तमिलनाडु के महाबलीपुरम गए थे। इसके बाद गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के कारण भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था।
#WATCH | Delhi: During the bilateral meeting with PM Narendra Modi, Chinese President Xi Jinping said, “In the face of a complex international landscape marked by intertwined changes and challenges, China and India, as the world’s two most populous countries and important members… pic.twitter.com/MZff4EpQ6F
— ANI (@ANI) September 12, 2026
बेहतर हो रहे भारत-चीन के रिश्तों
पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन रिश्तों में हो रही लगातार प्रगति का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को अपने रिश्तों को लंबे समय और रणनीतिक नजरिए से देखना चाहिए। नेताओं ने कहा कि आपसी मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत और चीन के रिश्ते आपसी सम्मान, एक-दूसरे की संवेदनशीलता को समझने और दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने चाहिए।
Prime Minister Narendra Modi met with Xi Jinping, President of the People’s Republic of China, on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi.
The two leaders welcomed the steady progress in India-China bilateral relations since their last meeting in Tianjin in August 2025.… https://t.co/NFbpehuKU9 pic.twitter.com/vAArPtGaRG
— ANI (@ANI) September 12, 2026
बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बॉर्डर से जुड़े मुद्दे का ऐसा समाधान निकालने पर सहमति जताई, जो दोनों देशों के लिए उचित हो और आपसी बातचीत से स्वीकार किया जा सके। दोनों नेताओं ने सीमा से जुड़े मामलों को बातचीत और समझदारी के साथ सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-चीन सीमा को लेकर को लेकर भी हुई बात
भारत-चीन सीमा को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने सीमा विवाद का ऐसा समाधान निकालने की इच्छा जताई, जो सही, व्यावहारिक और दोनों देशों को स्वीकार हो। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में SCO समिट के दौरान हुई थी। अब एक बार फिर हुई इस बैठक को भारत-चीन रिश्तों में सुधार और सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

