दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और ‘सद्भावना दिवस’ का कनेक्शन

दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और 'सद्भावना दिवस' का कनेक्शन

Rajiv Gandhi

Rajiv Gandhi

भांति-भांति के धर्म, अनगिनत भाषाएं और ढेरों बोलियां—भारत की यही सतरंगी विविधता हमारी सबसे बड़ी पहचान है। लेकिन इस विविधता को एक सूत्र में पिरोकर रखना कोई आसान काम नहीं। इसी आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और प्रेम के धागे को मजबूत करने के लिए हर साल 20 अगस्त को देश में 'सद्भावना दिवस' मनाया जाता है। यह खास दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की जयंती की याद में समर्पित है, जिसका एकमात्र मकसद देश के कोने-कोने में अमन, शांति और सौहार्द का संदेश फैलाना है।

 

सद्भावना दिवस का मर्म और इसकी गहराई

इस दिन का बुनियादी फलसफा यही है कि किसी भी मुल्क की तरक्की सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतों या आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि वहां के लोगों के आपसी प्यार और समझ से तय होती है। अगर दिलों में दूरियां और भेदभाव की दीवारें होंगी, तो हर तरक्की अधूरी रह जाएगी।

 

वर्ष 1991 में राजीव गांधी के निधन के बाद, 1992 में कांग्रेस द्वारा 'राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार' की नींव रखी गई। राजीव गांधी का दृढ़ विश्वास था कि देश की असली ताकत उसकी युवा शक्ति है। उनका मानना था कि अगर युवा पीढ़ी को सही दिशा मिले और वे जात-पात या धर्म के बंधनों से ऊपर उठकर केवल इंसानियत के नाते एक-दूसरे को गले लगाएं, तो देश में एक नई सामाजिक क्रांति आ सकती है।

 

क्यों चुना गया राजीव गांधी की जयंती का दिन?

राजीव गांधी ने अपने दौर में भारत को डिजिटल क्रांति, आधुनिक शिक्षा और सूचना तकनीक के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ाया। लेकिन तकनीक के साथ-साथ उनका सबसे ज्यादा जोर इस बात पर था कि एक बहुसांस्कृतिक देश में शांति और भाईचारा हर हाल में कायम रहना चाहिए। उनका साफ मानना था कि हिंसा, वैमनस्य और नफरत किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। उनकी इसी दूरदर्शी और शांतिप्रिय सोच को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के मकसद से उनकी जयंती को 'सद्भावना दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

 

इस दिन क्या-क्या खास होता है?

20 अगस्त को देशभर के सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है:

 

सद्भावना की शपथ: लोग जात-पात और धर्म से ऊपर उठकर समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।

युवाओं की भागीदारी: स्कूलों-कॉलेजों में निबंध, भाषण और डिबेट कॉम्पिटिशन आयोजित किए जाते हैं ताकि नई पीढ़ी को राष्ट्रीय अखंडता का मतलब समझ आए।

सांस्कृतिक रंग: जगह-जगह ऐसे रंगारंग कार्यक्रम होते हैं जो 'विविधता में एकता' के भारत के मूल मंत्र को बयां करते हैं।

डिजिटल अवेयरनेस: आज के दौर में सोशल मीडिया पर भी भाईचारे और शांति के संदेशों की मुहिम चलाई जाती है।

 

आज के दौर में इसकी अहमियत क्यों बढ़ जाती है?

आज जब छोटी-छोटी बातों पर समाज में बिखराव और दूरियां देखने को मिलती हैं, तब सद्भावना दिवस की प्रासंगिकता और भी ज्यादा गहरी हो जाती है। यह दिन हमें आईना दिखाता है और याद दिलाता है कि भारत का असली वजूद उसकी एकजुटता में है। जब हम हर तरह के भेदभाव को भुलाकर एक भारतीय के रूप में साथ खड़े होते हैं, तभी हमारा देश दुनिया में सीना तानकर आगे बढ़ पाता है।

 

Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

“तुम अकेले बेटी नहीं पाल पाओगे”
ये बात विराज़ ने कई बार सुनी।
लेकिन उन्होंने जवाब शब्दों से नहीं दिया।
हर रात कुछ नया सीखा।
हर सुबह एक बेहतर पिता बनने की कोशिश की।
आज उनकी 6 साल की बेटी स्कूल से लौटकर सबसे पहले अपने पापा को ही ढूँढती है, क्योंकि उसके लिए वही उसकी सबसे सुरक्षित जगह हैं।

कुछ कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि प्यार किसी रिश्ते का नाम नहीं, निभाने का नाम है।

क्या आपको लगता है कि Parenting किसी एक Gender की ज़िम्मेदारी है? कमेंट में बताइए।

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बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

विदेश से कुछ समय रहकर या घूमकर आने के बाद, हममें से ज्यादातर लोग अपने देश में साफ-सफाई की शिकायत जरूर करते हैं। लेकिन देखिए, बिहार के शुभम कुमार क्या कर रहे हैं?
वे सफाई का जिम्मा खुद उठा रहे हैं।
बिहार के शुभम हर रविवार घाट की सफाई करते है।
एक रविवार से शुरू हुई उनकी ये सफाई मुहिम, आज 1,100+ वॉलंटियर्स तक पहुँच चुकी है।
1.4 लाख किलो से ज्यादा प्लास्टिक हटाई गई।
2 लाख से ज्यादा बोतलें रीसायकल हुईं।
और 16,000+ लोगों की रोजी-रोटी इन सुधरे हुए इलाकों से जुड़ गई।
इस Independence Day, आइए देशभक्ति का एक अलग रूप celebrate करें।
द बेटर इंडिया लेकर आया है #CivicSenseHero—एक ऐसी पहल, जिसके जरिए हम उन आम भारतीयों को सम्मान देंगे, जो सिर्फ़ अपने देश से प्यार नहीं करते, बल्कि अपने कामों से उसकी बेहतर तस्वीर बनाते हैं।

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी Community के लिए कुछ अच्छा कर रहा है और बदलाव ला रहा है?

तो अपने #CivicSenseHero को Nominate करें और उनकी कहानी हम तक पहुंचाएं।

@beinghelperfoundation

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बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna | Civic Sense Hero

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मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन...

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा
ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म
दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई
करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की
रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया
पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वो इनके पिता का नाम तक नहीं जानती थीं। ये ग्रूमिंग गैंग्स पूरे ब्रिटेन में काम करते थे, लेकिन रोशडेल, रॉदरहैम और टेलफॉर्ड राज्यों में इन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को फंसाया।

एक गलती…और टूट गया 10 साल पुराना रिश्ता, पत्नी से धोखा मिलने के बाद पति ने खत्म किया रिश्ता, वायरल हुई कहानी

सोशल मीडिया पर एक महिला का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में महिला ने बताया की एक गलती की वजह से उसके पति ने 10 साल पुरानी शादी तोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या एक बार किया गया धोखा इतने सालों के रिश्ते, प्यार और साथ को खत्म करने के लिए काफी है, या फिर टूटे भरोसे के बाद रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। जानें क्या है पूरा मामला

महिला ने पति को दिया धोखा

X यूजर SamSiff ने एक महिला से जुड़ी पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि, महिला ने अपने पति को धोखा दिया, जिसके बाद पति ने उसे तलाक दे दिया। बताया गया कि तलाक से पहले दोनों की शादी को 10 साल हो चुके थे। कहानी शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “उसने सिर्फ एक बार धोखा दिया, लेकिन पति ने 10 साल पुरानी शादी खत्म करने का फैसला कर लिया। अब लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सिर्फ एक गलती की वजह से किसी रिश्ते के 10 साल को खत्म कर देना सही है?”

नहीं दिया सफाई का मौका

पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई थी, जिसमें महिला ने पूरे मामले को लेकर अपनी बात रखी थी। महिला ने दावा किया कि 10 साल की शादी में उसने सिर्फ एक बार पति को धोखा दिया, लेकिन पति ने उसे सफाई या रिश्ता सुधारने का मौका दिए बिना तलाक ले लिया। महिला ने अपनी बात रखते हुए लिखा, “मैंने शादी के 10 साल में सिर्फ एक बार अपने पति को धोखा दिया। यह मेरी एक गलती थी, लेकिन इसके बाद वह मुझसे पूरी तरह दूर हो गया, जैसे मैं उसके लिए सबसे बुरी इंसान हूं। उसने न तो मुझसे बात करने की कोशिश की, न रिश्ते को बचाने का कोई मौका दिया और न ही मेरी बात सुनी। इसके बजाय उसने तलाक के कागज मेरे सामने रख दिए।”

2 साल से मांद रही मांफी

महिला ने आगे बताया, “यह घटना दो साल पहले हुई थी। तब से मैं लगातार माफी मांगती रही, रोती रही और रिश्ता बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हमने साथ मिलकर 10 साल की जिंदगी बिताई और कई यादें बनाई थीं। मुझे समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतने सालों के रिश्ते और साथ को इतनी आसानी से कैसे भुला सकता है।” महिला का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि, रिश्ते की लंबी अवधि से ज्यादा जरूरी भरोसा होता है और एक बार विश्वास टूट जाने के बाद शादी को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं होता।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने महिला की आलोचना करते हुए लिखा, “बड़ी मेट्रो की लड़कियां और महिलाएं आखिर क्या उम्मीद कर रही हैं? एक बार धोखा देना हो या 20 बार, इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर स्थिति उलट होती और पति ऐसा करता, तो शायद वह भी अपनी पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर देता। उसे इस बात की गंभीरता समझनी चाहिए।”

एक और कमेंट करने वाले ने महिला पर कहानी को मैनिपुलेट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा, “एलीट लेवल की गैसलाइटिंग। जो कोई भी उसके पक्ष में बात करता है या उसका सपोर्ट करता है, वह सबसे बुरे लोग हैं।” एक यूजर ने लिखा, “कितनी ऊपरी सोच है.. यह सिर्फ एक गलती नहीं है बल्कि भरोसा टूटना है.. धोखा तो धोखा है… बस। माफ नहीं किया जा सकता।”

Shubhra Shetty: कौन हैं शुभ्रा शेट्टी? 20 साल छोटी गर्लफ्रेंड संग इस वहज से शादी नहीं कर पा रहे अनुराग कश्यप

Shubhra Shetty: शुभ्रा शेट्टी लगभग 11 सालों से फिल्ममेकर अनुराग कश्यप के साथ रिलेशनशिप में हैं। यह कपल अक्सर अपने रिश्ते को लाइमलाइट से दूर रखता है, लेकिन हाल ही में उन्होंने जेनिस सिकेरा के साथ बातचीत में अपनी लव स्टोरी, उम्र के अंतर और भविष्य की योजनाओं के बारे में खुलकर बात की।

शुभ्रा शेट्टी कौन हैं?

शुभ्रा पहले अनुराग कश्यप के प्रोडक्शन हाउस, ‘फैंटम फिल्म्स’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करती थीं। दोनों को पहली बार 2015 में साथ देखा गया था और कश्यप ने 2018 में सबके सामने अपने रिश्ते की बात मानी थी। शुभ्रा 30s में हैं, जबकि कश्यप 53 साल के हैं। यानी दोनों की उम्र में लगभग 20 साल का अंतर है। वह ज़्यादातर लाइमलाइट से दूर रही हैं और अपने फिल्ममेकर पार्टनर की तरह लोगों की नज़रों में ज़्यादा एक्टिव नहीं रही हैं।

शुभ्रा और अनुराग कश्यप का रिश्ता कैसे शुरू हुआ?

अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए शुभ्रा ने बताया कि कश्यप ने प्रपोज किया था। उन्होंने कहा कि कश्यप ने उनसे कहा था कि अपनी ज़िंदगी के अनुभवों की वजह से उन्हें पता था कि वह क्या महसूस कर रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने शुभ्रा को अपना समय लेने और ज़िंदगी का अनुभव करने की आज़ादी भी दी थी।

शुभ्रा ने बताया कि कश्यप चाहते थे कि वह अपने फ़ैसले खुद ले, न कि उनके रिश्ते की वजह से बंधा हुआ महसूस करें। उन्होंने शुभ्रा से कहा था कि वह बाहर जा सकती हैं, दुनिया देख सकती हैं और अगर चाहें तो वापस उनके पास आ सकती हैं। दोनों के बीच किताबें, फ़िल्में और फ़िल्म फ़स्टिवल के लिए एक जैसी पसंद की वजह से भी अच्छी बॉन्डिंग बनी। शुभ्रा ने बताया कि शुरुआती सालों में वे अपने रिश्ते को प्राइवेट रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आख़िरकार उनका रोमांस सबके सामने आ ही गया।

उम्र के फ़र्क़ के बारे में शुभ्रा ने क्या कहा है?

उम्र के फ़र्क़ की वजह से इस कपल पर लोगों का ध्यान गया। कश्यप ने माना कि जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई और शुभ्रा काफ़ी कम उम्र की दिखने लगीं, उन्हें इस बात की ज़्यादा चिंता होने लगी। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब अपनी इनसिक्योरिटीज़ की वजह से उन्होंने शुभ्रा से दूरी बनाने की कोशिश की थी। हालाँकि, बाद में दोनों ने इस स्थिति को संभाला और अपना रिश्ता जारी रखा।

शुभ्रा ने इस बारे में भी बात की कि उनके माता-पिता ने उनके रिश्ते पर कैसी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि वह उनके माता-पिता की चिंताओं को समझती थीं, क्योंकि जब उन्होंने कश्यप को डेट करना शुरू किया था, तब वह 20s में थीं, जबकि कश्यप उनसे काफ़ी बड़े थे और उनकी दो बार शादी हो चुकी थी।

वहीं, उम्र को लेकर होने वाली आलोचना (age-shaming) पर अनुराग ने कहा, “हमारे बीच भी ऐसे पल आए हैं। हम थोड़े असहज (self-conscious) महसूस करते रहे हैं। मैं ज़्यादा असहज रहा हूँ… और सिर्फ़ असहज ही नहीं, एक समय तो मैं इतना ज़्यादा सोचने लगा था कि इसे नज़रअंदाज़ करने की पूरी कोशिश कर रहा था। असल में, उनके चेहरे से उनकी उम्र का पता नहीं चलता। वह आज भी वैसी ही दिखती हैं। अपनी उम्र की नहीं लगतीं। तो बात यह है कि जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ती गई और वह वैसी ही दिखती रहीं, तब मैं थोड़ा असहज महसूस करने लगा।”

शादी के बारे में शुभ्रा और अनुराग का क्या कहना है?

इस जोड़े ने शादी करने की योजना के बारे में भी बात की है। कश्यप ने बताया कि शुभ्रा शादी में यकीन नहीं रखतीं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ किया कि वह अपने रिश्ते से खुश हैं। उन्होंने कहा कि वह उनके साथ बने रहना चाहते हैं और जो रिश्ता उन्होंने मिलकर बनाया है, उसे खोना नहीं चाहते।

जब शादी की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो अनुराग ने जेनिस सिकेरा को बताया कि शुभ्रा शादी में यकीन नहीं रखतीं। उन्होंने कहा, “मैं उनके साथ बहुत खुश हूं। मैं उनके साथ रहना चाहता हूं। तो, इसके लिए जो भी करना पड़े, मैं करूंगा। ज़िंदगी में बहुत कुछ है। एक बूढ़े आदमी की इनसिक्योरिटी (असुरक्षा की भावना) क्या होती है? मैं इतना स्वस्थ रहना चाहता हूं कि जिन लोगों से मैं प्यार करता हूं, उनके बाद भी जीवित रहूं। क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उसके बाद क्या होगा? दुनिया का दस्तूर यही है। तो, मैं इस बारे में बहुत सोचता हूं। लेकिन मेरी बात यह है कि जब तक हमें वह मिल गया है जो अभी हमारे पास है, मैं किसी भी चीज़ से खुश हूं। मैं इसे खोना नहीं चाहता।”फ़िल्ममेकर और शुभ्रा अभी मुंबई छोड़कर बेंगलुरु में रह रहे हैं।

Govinda: ‘अब ज्यादा हो रहा है हद में रहिए…,’ सुनीता के ‘शुगर डैडी’ वाले तंज पर गोविंद का पलटवार

Govinda: गोविंदा और सुनीता आहूजा की मैरिड लाइफ में एक बार फिर दरार आ गई है, जब सुनीता आहूजा ने गोविंदा को प्रेमिका कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एयरपोर्ट पर देखा। सुनीता ने गोविंदा को कोमल का “शुगर डैडी” कहा, जबकि हीरो नंबर 1 अभिनेता ने अपनी पत्नी को कोई जवाब नहीं दिया और कहा, “अपनी हद में रहो।”

आज पैप से बात करते हुए, गोविंदा ने सुनीता आहूजा के कमेंट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, “देश के सभी बड़े कलाकारों ने उन सभी लड़कियों के साथ काम किया है, जो यंगस्टर्स राही हैं। आप एक भी कसार नहीं छोड़ रही हैं कि मैं लोगों के दिलों से उतर जाऊं। शोहरत, इज्जत, दौलत सब मिली हुई हैं।” ऊपरवाले ने दी है। इसका मतलब ये नहीं कि जिसके पास नहीं है, आप जलील करें।

गोविंदा और कोमल के बार-बार साथ दिखने पर सुनीता आहूजा ने कहा, “फिल्म बननी भी तो चाहिए। फिल्म बनने के बाद ही प्रमोशन होता है। क्या कहें… अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ घूम रहे हैं, उन्हें थोड़ी शर्म आनी चाहिए। और कुछ तो स्टैंडर्ड होना चाहिए। तुम्हारा ‘शुगर डैडी’ इतना अमीर है, तो ढंग के कपड़े तो पहनो। हमें देखो, हम कितने स्टाइल में चलते हैं। बहुत बुरा है, उनका दिमाग खराब हो गया है।”

इससे पहले, ANI से बात करते हुए गोविंदा ने सुनीता के उन दावों पर बात की जिनमें उनके कथित अफेयर की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “वह मुझे बहुत प्यार से डांटती-फटकारती हैं, और मैं उसे प्यार से स्वीकार कर लेता हूं। मुझे लगता है कि लोग जहां भी हों और भगवान ने उन्हें जो भी भूमिका दी हो, या जो भी खास जगह उन्हें मिली हो, उनके बिना हम सफलता हासिल नहीं कर पाते।

हम आज जो हैं, वो नहीं हो पाते। हमारे परिवार के जो बच्चे अब बड़े हो गए हैं, उन पर उनका पूरा हक है। उन्होंने उनके साथ भी बहुत अच्छा व्यवहार किया।” गोविंदा और सुनीता की शादी 11 मार्च 1987 को एक निजी समारोह में हुई थी और उन्होंने अपनी शादी की बात तब तक गुप्त रखी जब तक कि उनकी पहली संतान, टीना आहूजा, का जन्म नहीं हो गया।

Independence Day 2026: तेरी मिट्टी से लेकर संदेशे आते हैं तक…, देशभक्ति से भरपूर हैं हिंदी सिनेमा के ये गाने

Independence Day 2026: भारत इस साल अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। और इस मौके को मनाने का देशभक्ति गीतों से बेहतर तरीका क्या हो सकता है? आज़ादी के बाद के इतिहास में, देश ने ऐसे शानदार गाने दिए हैं जो हर भारतीय के अपने देश के प्रति प्यार और सम्मान को ज़ाहिर करते हैं।

अपनी देशभक्ति की भावना को जगाने के लिए इन गानों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाएं। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे क्लासिक गानों से लेकर ए.आर. रहमान और सुखविंदर सिंह के दिल को छू लेने वाले गाने ‘देश मेरे देश’ तक, ये गाने देश के प्रति आपके प्यार को ज़ाहिर करने के लिए एकदम सही हैं।

ऐ मेरे वतन के लोगों

भारतीय देशभक्ति गीतों की कोई भी प्लेलिस्ट लता मंगेशकर के इस क्लासिक गाने के बिना पूरी नहीं हो सकती। 1962 के भारत-चीन युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों के सम्मान में लता मंगेशकर ने इसे पहली बार 1963 में लाइव गाया था। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को सी. रामचंद्र ने कंपोज़ किया था और कवि प्रदीप ने लिखा था।

देश मेरे देश

जब हम ‘द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह’ फ़िल्म की बात करते हैं, तो सबसे पहले यही गाना याद आता है। ए.आर. रहमान का बनाया यह दिल को छू लेने वाला गाना सुखविंदर सिंह ने गाया है। ए.आर. रहमान ने ‘माँ तुझे सलाम’ जैसे कई देशभक्ति वाले गाने बनाए हैं, लेकिन देश की आज़ादी के लिए अपनी जान देने वालों को सम्मान देने के लिए ‘देश मेरे देश’ एक बेहतरीन गाना है।

ऐ वतन

आलिया भट्ट की फ़िल्म ‘राज़ी’ में पाकिस्तान में मौजूद एक भारतीय जासूस की कहानी दिखाई गई थी। ‘ऐ वतन’ गाने ने फ़िल्म के मुख्य विषयों—देश के लिए त्याग और प्रेम—को बखूबी दर्शाया है।

तेरी मिट्टी

मनोज मुंतशिर के लिखे और बी प्राक के संगीतबद्ध किए गए गाने ‘तेरी मिट्टी’ को सुनकर इस स्वतंत्रता दिवस पर आपकी आँखों में ज़रूर आँसू आ जाएँगे। यह गाना उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह गाना 2019 की फ़िल्म ‘केसरी’ का हिस्सा था।

‘ये जो देश है तेरा’

फिल्म ‘स्वदेश’ के इस गाने में ए.आर. रहमान की आवाज़ और जावेद अख्तर के बोलों ने लोगों के अपने देश के लिए प्यार और लगाव को बखूबी दिखाया है। बैकग्राउंड में बजती शहनाई गाने में पुरानी यादों का एहसास जगाती है। ‘ये जो देश है तेरा’ गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस की प्लेलिस्ट का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है।

संदेशे आते हैं – बॉर्डर

फिल्म ‘बॉर्डर’ का ‘संदेशे आते हैं’ आज भी लोगों के दिलों में बसा है। ये देशभक्ति गानों की लिस्ट में खास जगह रखता है। गाने में सैनिकों और उनके परिवारों के बीच की भावनाओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। इसे बॉर्डर 2 में रीक्रिएट भी किया गया है।

तो, इस स्वतंत्रता दिवस पर आप अपनी प्लेलिस्ट में कौन से गाने शामिल कर रहे हैं?

Kartik Aaryan: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘एट होम रिसेप्शन’ के लिए कार्तिक आर्यन को किया इनाइट

Kartik Aaryan: बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में होने वाले खास ‘एट होम रिसेप्शन’ में शामिल होने के लिए बुलाया है। ‘भूल भुलैया 3’ के एक्टर, 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस खास कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।

खास बात यह है कि कार्तिक बॉलीवुड के इकलौते एक्टर हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया है और वे खास मेहमानों में शामिल होंगे, जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि ‘एट होम रिसेप्शन’ भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम होता है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां-जैसे राष्ट्रीय नेता, सेना के जवान, खिलाड़ी, कलाकार और खास उपलब्धियां हासिल करने वाले लोग—एक साथ इकट्ठा होते हैं।

कार्तिक को यह निमंत्रण तब मिला है जब उन्हें हाल ही में कबीर खान की खूब पसंद की गई स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनकी एक्टिंग के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट एक्टर’ का अवॉर्ड मिला है। जुलाई में, जब नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले के तौर पर कार्तिक के नाम का ऐलान हुआ, तो उन्होंने सोशल मीडिया पर परिवार के साथ एक खास पल शेयर किया था।

उन्होंने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे अपने परिवार के साथ नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स की लाइव घोषणा देखते हुए नजर आ रहे हैं। जैसे ही ‘चंदू चैंपियन’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ के तौर पर उनके नाम की घोषणा हुई, कार्तिक खुशी से चिल्ला पड़े। वीडियो में आगे कार्तिक के माता-पिता को अपने बेटे को गले लगाकर और उनकी इस नई कामयाबी पर बधाई देते हुए, इस गर्व भरे पल को उनके साथ साझा करते हुए दिखाया गया है।

कार्तिक की मां ने खुशी के उस पल में प्यार से उनके गाल पर किस भी किया।

अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कार्तिक ने फ़ोटो-शेयरिंग ऐप पर लिखा, “अभी भी यकीन नहीं हो रहा… कुछ पल शब्दों से कहीं बड़े होते हैं, और यह उन्हीं में से एक है। बरसों से देखा गया मेरा सपना आखिरकार सच हो गया है। हमेशा विनम्र, हमेशा आभारी… बेस्ट एक्टर नेशनल अवॉर्ड #ChanduChampion”