Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Eternal Q1 results: जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल का प्रॉफिट 92 करोड़ रुपये रहा, एनालिस्ट्स के अनुमान से काफी कम

Eternal Q1 results: जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 92 करोड़ रुपये रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स के 335 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम है। तिमाही दर तिमाही आधार पर कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 47 फीसदी घटा है। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 174 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 20,211 करोड़ रुपये 

Eternal का प्रॉफिट जून तिमाही में साल दर साल आधार पर बढ़कर तीन गुना हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 25 करोड़ रुपये प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 20,211 करोड़ रुपये रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स के 19,850 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है। साल दर साल आधार पर कंपनी का रेवेन्यू जून तिमाही में दो गुना हो गया।

EBITDA 22  फीसदी बढ़कर 594 करोड़ रुपये

कंपनी का EBITDA जून तिमाही में तिमाही दर तिमाही आधार पर 22 फीसदी बढ़कर 594 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन में तिमाही दर तिमाही आधार पर मामूली इजाफा हुआ। यह 2.8 फीसदी से बढ़कर 2.9 फीसदी हो गया। कंपनी के फाउंडर दीपेंदर गोयल ने शेयरहोल्डर्स को भेजे लेटर में कहा है, “अगर ऐसा वक्त आता है जब हमें ग्रोथ के लिए मार्जिन से समझौता करना पड़े तो हम बिना झिझक ऐसा करेंगे।”

लंबी अवधि में बिजनेस के विस्तार पर फोकस

उन्होंने कहा, “हमने हमेशा शॉर्ट टर्म मार्जिन की जगह लॉन्ग टर्म मार्केट एक्सपैंशन को प्राथमिकता दी है। लेकिन, हमें कुछ ऐसा करने की जरूरत नहीं है।” जोमैटो लगातार यह कहती रही है कि उसे प्रतिद्वंद्वी कंपनी की कम प्राइस के फूड ऑफर करने की स्ट्रेटेजी में कोई फायदा नहीं दिखता। किफायती फूड के ग्राहकों को ध्यान में रख Swiggy ने Toing और Rapido ने Ownly लॉन्च किया है। लेकिन, जोमैटो का ऐसा करने का कोई प्लान नहीं है।

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जोमैटो के शेयर चढ़कर बंद हुए 

इटरनल का शेयर 22 जुलाई को 1.01 फीसदी चढ़कर 289.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों पर बड़ा दबाव देखने को मिला। निफ्टी 0.79 फीसदी यानी 191 अंक गिरकर 23,996 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.92 फीसदी यानी 715 अंक की कमजोरी के साथ 76,755 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.23 फीसदी की गिरावट आई।

Adani Power Q1 Results: अदाणी पावर को ₹4806 करोड़ का मुनाफा, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Adani Power Q1 Results: अदाणी ग्रुप की बिजली कंपनी Adani Power ने जून तिमाही में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट तीनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह देश में रिकॉर्ड बिजली मांग, ज्यादा बिजली बिक्री और बेहतर टैरिफ रही। नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।

मुनाफा और रेवेन्यू में दमदार बढ़त

अप्रैल-जून तिमाही में अदाणी पावर का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹3,385 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी 34% बढ़कर ₹18,902 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹14,109 करोड़ था। वहीं, EBITDA करीब 40% बढ़कर ₹7,948 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 40.3% से बढ़कर 42% हो गया।

भीषण गर्मी का फायदा मिला 

इस बार गर्मी ने बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। मई महीने में देश की पीक पावर डिमांड 270.8 गीगावॉट रही। वहीं, जून तिमाही में बिजली की कुल खपत 8.4% बढ़कर 485.4 बिलियन यूनिट हो गई।

इसका सीधा फायदा Adani Power को मिला। कंपनी ने इस तिमाही में 31 बिलियन यूनिट बिजली पैदा की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, बिजली की बिक्री 16.9% बढ़कर 28.8 बिलियन यूनिट रही।

बिजली महंगी बिकी, कमाई बढ़ी

लॉन्ग टर्म PPA के तहत बिजली बिक्री 30% से ज्यादा बढ़कर 24.5 बिलियन यूनिट हो गई। इसके साथ ही औसत टैरिफ 8.5% बढ़कर ₹5.95 प्रति यूनिट पहुंच गया।

मर्चेंट और शॉर्ट टर्म मार्केट में भी कंपनी को बेहतर दाम मिले। यहां औसत टैरिफ 13.1% बढ़कर ₹7.04 प्रति यूनिट रहा। कंपनी ने कहा कि बुटीबोरी और मुतियारा (तूतीकोरिन) जैसे पहले बिना PPA वाले प्लांट्स को नए करार मिलने से भी बिजली बिक्री बढ़ी। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की कीमतें बढ़ने का फायदा भी कंपनी को मिला।

कोयला महंगा हुआ, फिर भी बढ़ा मुनाफा

ज्यादा बिजली उत्पादन और आयातित कोयले की ऊंची कीमतों की वजह से ईंधन लागत 30% बढ़कर ₹9,513 करोड़ हो गई। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बढ़ा। इसकी वजह बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और फाइनेंस कॉस्ट पर मजबूत नियंत्रण रहा।

इस तिमाही में कंपनी ने ₹1,386 करोड़ की पिछली अवधि की आय भी दर्ज की। वहीं, अतिरिक्त कोयला लागत के बदले ₹898 करोड़ के टैरिफ मुआवजे को भी रेवेन्यू में शामिल किया गया।

विस्तार पर बड़ा दांव

अदाणी पावर के बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। यह रकम QIP या दूसरे रास्तों से जुटाई जाएगी। साथ ही कंपनी ने अपनी उधारी सीमा ₹75,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी।

Adani Power ने हाल ही में दिवाला प्रक्रिया के तहत Jaiprakash Associates की कई बिजली परिसंपत्तियां भी खरीदी हैं। इनमें 180 मेगावॉट का Churk थर्मल पावर प्लांट, Jaiprakash Power Ventures में 24% हिस्सेदारी और Prayagraj Power Generation Company में 11.49% हिस्सेदारी शामिल हैं।

आगे की क्या है योजना?

अदाणी पावर के CEO एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि रिकॉर्ड EBITDA दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल मजबूत है। उन्होंने कहा कि Adani Power 45 गीगावॉट उत्पादन क्षमता के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही कंपनी हाइड्रो पावर में विस्तार कर रही है और भविष्य में न्यूक्लियर पावर सेक्टर के अवसरों पर भी नजर बनाए हुए है।

अदाणी पावर के शेयरों का हाल

Adani Power का शेयर बुधवार को शेयर 1.51% गिरकर ₹217.05 पर बंद हुआ। नतीजों के बाद ₹211.90 के निचले स्तर से उछलकर ₹221.70 के इंट्राडे हाई तक पहुंचा था। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 83.77% रिटर्न दिया है।

HFCL Q1 Results: घाटे से ₹229 करोड़ के मुनाफे में आई कंपनी, 6 महीने में 250% उछला स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Emami Paper Mills Share Price: निवेशक हुए मालामाल, Q1 में 6 गुना उछला मुनाफा, शेयर 20% के अपरसर्किट पर हुआ लॉक

Emami Paper Mills Share Price: पेपर सेक्टर की कंपनी इमामी पेपर मिल्स (Emami Paper Mills) के शेयरों ने अपने निवेशकों को मालामाल किया है। शेयर आज 20 फीसदी के अपरसर्किट पर लॉक हुआ है और यह अपने 10 महीने के सबसे ऊपरी स्तर 118.63 रुपये पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जून तिमाही) के लिए शानदार नतीजे जारी किए है । जिसके मुताबिक कंपनी का मुनाफा 6 गुना बढ़ा है।

इमामी पेपर मिल्स ने Q1FY27 के लिए मजबूत ऑपरेशनल नतीजे दिए, जिसमें नेट प्रॉफ़िट Q1FY26 के ₹6.31 करोड़ से बढ़कर ₹38.61 करोड़ हो गया। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू साल-दर-साल 21.84 फीसदी बढ़कर ₹560.37 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹461.36 करोड़ था। खास बात यह है कि ऑपरेशनल रेवेन्यू में सालाना ₹100.40 करोड़ की बढ़ोतरी हुई।

Q1 FY26 में EBITDA ₹38 करोड़ से दोगुना होकर ₹83 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 660 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 14.82% हो गया, जो बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी को दिखाता है।

क्या करती है कंपनी

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार , इमामी पेपर मिल्स, इमामी ग्रुप का एक हिस्सा है, जो ओडिशा के बालासोर में पेपर बनाने की फैसिलिटी चलाता है। यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी न्यूज़प्रिंट बनाने वाली कंपनी है, जिसकी इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन कैपेसिटी हर साल 1.5 लाख टन है, जो इम्पोर्टेड ग्रेड के बराबर प्रीमियम-क्वालिटी न्यूज़प्रिंट बनाती है।

इसके अलावा, इमामी पेपर मिल्स की कंज्यूमर पैकेजिंग बोर्ड सेगमेंट में भी अच्छी पकड़ है, जिसकी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी हर साल 2 लाख टन है, जिसमें रीसायकल-ग्रेड और वर्जिन-ग्रेड बोर्ड शामिल हैं, जो पैकेजिंग की कई तरह की ज़रूरतों को पूरा करते हैं।

मार्च के निचले स्तर से 116% रिकवर हुआ शेयर

लंबी गिरावट झेलने के बाद इमामी पेपर मिल्स ने अप्रैल में 39% की बढ़त के साथ ज़बरदस्त रिकवरी की। अगले महीनों में रैली ने और रफ़्तार पकड़ी, मई में स्टॉक में 11% की और बढ़त हुई। जुलाई में अब तक, यह और 36% बढ़ चुका है।

लगातार रैली ने स्टॉक को अपना मल्टीबैगर स्टेटस वापस पाने में मदद की है, जिसके शेयर मार्च के निचले स्तर से 116% ऊपर चढ़ा हैं। तेज़ रिकवरी ने स्टॉक को कैलेंडर साल के लिए पॉज़िटिव ज़ोन में भी पहुंचा दिया है, जिसमें साल-दर-साल 36% की बढ़त हुई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हाहाकार, ₹4 लाख करोड़ स्वाहा, Sensex तीसरे दिन लाल, Nifty टूटकर 24000 के नीचे बंद

Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में कच्चे तेल में और उबाल आया तो मार्केट में आज भी इसकी आंच महसूस हुई। घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन फिसले। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24,000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी आज काफी दबाव दिखा और स्मॉलकैप स्पेस में तो थोड़ी अधिक ही। निफ्टी मिडकैप 100 में डेढ़ फीसदी से थोड़ी अधिक गिरावट आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 1% से अधिक टूटकर बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आज ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की लेकिन बाकी अहम सेक्टर्स के दबाव में घबराहट गायब नहीं हो पाई। निफ्टी एफएमसीजी आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ तो निफ्टी ऑटो भी बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं रियल्टी सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स ढाई फीसदी से अधिक, निफ्टी पीएसयू बैंक करीब 2%, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% से अधिक, निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी, और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक कमजोर हुआ। बिकवाली के इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गया यानी निवेशकों की दौलत ₹4 लाख करोड़ से अधिक कम हो गई।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के एक दिन पहले आज सेंसेक्स (Sensex) 715.06 प्वाइंट्स यानी 0.92% की कमजोरी के साथ 76,755.05 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 191.45 प्वाइंट्स यानी 0.79% की गिरावट के साथ 23,996.25 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 828.92 प्वाइंट्स टूटकर 76,641.19 और निफ्टी 226.30 प्वाइंट्स गिरकर 23,961.40 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹4.16 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 21 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,84,21,297.62 करोड़ था। आज यानी 21 जुलाई 2026 को यह घटकर ₹4,80,04,542.03 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹416,755.59 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 12 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से आज सिर्फ 12 ही ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज जोमैटो की एटर्नल, एचयूएल और पावरग्रिड में रही। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज इंडिगो, एक्सिस बैंक और इंफोसिस में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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114 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4418 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1473 शेयर आज मजबूत हुए तो 2762 में गिरावट रही जबकि 183 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 114 शेयर एक साल के हाई और 100 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Lohia Corp IPO: कल से खुलेगा लोहिया कॉर्प का ₹1101 करोड़ का आईपीओ, पैसा लगाने से पहले जान लें ब्रोकरेज की राय

Lohia Corp IPO GMP and Details: प्राइमरी मार्केट में निवेशकों को पैसा बनाने का एक और जबरदस्त मौका मिलने जा रहा है। टेक्निकल टेक्सटाइल और वोवन प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए मशीनरी बनाने वाली कंपनी लोहिया कॉर्प लिमिटेड का करीब ₹1,101 करोड़ का आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल रहा है।

बाजार में एंट्री से पहले ही ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने भी इस इश्यू को लंबी अवधि के लिए ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह दी है। आइए जानते हैं इस आईपीओ का प्राइस बैंड, जीएमपी, जरूरी तारीखें, कंपनी की वित्तीय सेहत और ब्रोकरेज की राय।

Lohia Corp IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹404 से ₹425 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,875
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित है। इश्यू का साइज ₹1,101.28 करोड़ है जिसमें प्रमोटर्स 2.59 करोड़ शेयरों की बिक्री कर रहे है। चूंकि यह पूरी तरह से OFS है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स को जाएगी, कंपनी के खाते में कोई फंड नहीं आएगा।

कंपनी का बिजनेस मॉडल और वित्तीय सेहत

लोहिया कॉर्प टेक्निकल टेक्सटाइल और Raffia इंडस्ट्री के लिए मशीनरी और इक्विपमेंट बनाने वाली ग्लोबल दिग्गज है। यह सीमेंट, उर्वरक, केमिकल्स, फूड ग्रेंस और बैग्स की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक और बोरे बनाने की मशीनें बनाती है।

वित्त वर्ष 2025 में भारतीय वोवन राफिया मशीनरी बाजार में कंपनी की 40.7% की हिस्सेदारी थी, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी हिस्सेदारी 15.4% है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 64.16% बढ़कर ₹193.45 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹117.84 करोड़ था। इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 24.70% बढ़कर ₹1,717 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

InvestorGain के आंकड़ों के मुताबिक, 22 जुलाई को लोहिया कॉर्प का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹40 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसका अपर प्राइस बैंड ₹425 है इस हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग प्राइस: ₹465 प्रति शेयर (₹425 + ₹40) रह सकता है। इस GMP पर निवेशकों को करीब 10% का लिस्टिंग गेन मिलने की संभावना है।

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ब्रोकरेज की राय क्या है?

ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी ने इस आईपीओ को ‘Subscribe for Long Term’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालांकि कंपनी का राजस्व मुख्य रूप से एक ही सेगमेंट पर निर्भर है, लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मजबूत पकड़ और ग्रोथ क्षमता को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता है, लेकिन कीमत काफी कम होती है। रीडर्स व निवेशकों के लिए टिप्स फार्मा निवेशकों के लिए: अगले 2 साल तक भारतीय कंपनियों पर सीधा वित्तीय असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 0% टैरिफ लागू रहेगा। हालांकि, लॉन्ग टर्म में कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेटअप करने की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। स्टॉक मार्केट वॉच: सिप्ला, डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी US एक्सपोजर वाली कंपनियों की अगली तिमाही की कमेंट्री पर नजर रखें।

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता है, लेकिन कीमत काफी कम होती है। रीडर्स व निवेशकों के लिए टिप्स फार्मा निवेशकों के लिए: अगले 2 साल तक भारतीय कंपनियों पर सीधा वित्तीय असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 0% टैरिफ लागू रहेगा। हालांकि, लॉन्ग टर्म में कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेटअप करने की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। स्टॉक मार्केट वॉच: सिप्ला, डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी US एक्सपोजर वाली कंपनियों की अगली तिमाही की कमेंट्री पर नजर रखें।

IndiaMART Shares: 7% टूटकर शेयर एक साल के निचले स्तर पर, इन दो वजहों से धड़ाम, अब आगे ये है रुझान

IndiaMART Share Price: कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में आज इंडियामार्ट इंटरमेश के शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही के कारोबारी नतीजे उम्मीद के मुताबिक रही लेकिन लगातार तीसरी तिमाही में पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट और कलेक्शन ग्रोथ में सुस्ती से सेंटिमेंट प्रभावित हुआ और शेयर फिसल गए। शेयर 7% से अधिक टूटकर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए और अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 4.63% की गिरावट के साथ ₹1830.35 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.51% फिसलकर एक साल के निचले स्तर ₹1,775.00 पर आ गया था। पिछले साल 25 अगस्त 2025 को यह एक साल के हाई ₹2686.55 पर था।

IndiaMART के शेयरों को क्यों लगा झटका

जून 2026 तिमाही में ऑनलाइन बी2बी मार्केटप्लेस इंडियामार्ट का कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12.2% बढ़कर ₹172.2 करोड़ और ऑपरेशनल रेवेन्यू 11.4% बढ़कर ₹414.4 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 9.4% बढ़कर ₹145.9 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 35.8% से 35.4% पर आ गया। सालाना आधार पर कंपनी का कस्टमर कलेक्शंस 8% बढ़ गया जोकि पांच तिमाहियों में सबसे सुस्त ग्रोथ। इससे पहले चार तिमाहियों में यह हर तिमाही 10%-17.5% की रफ्तार से बढ़ा था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी ने ₹163 करोड़ का कैश जेनेरेट किया।

निवेशकों के लिए एक मुख्य चिंता पेइंग सब्सक्राइबर्स की संख्या में लगातार गिरावट है। मार्च तिमाही में इसके 2.20 लाख सब्सक्राइबर्स थे, जो घटकर जून तिमाही के आखिरी तक 2.18 लाख रह गए। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब इसमें गिरावट आई। हालांकि पेइंग सप्लायर्स में बेहतर कमाई के चलते ARPU (औसतन रेवेन्यू प्रति यूजर) सालाना आधार पर 7.8% बढ़कर ₹69,000 पर पहुंच गया। इसके अलावा बोर्ड ने रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी इंडियामार्ट फाइनेंस बनाने को मंजूरी दी है जो बिजनेस यूजर्स को शॉर्ट-टर्म वर्किंग कैपिटल को लेकर मदद करेगी।

इंडियामार्ट पर ब्रोकरेजेज क्यों है बेयरेश?

नए पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट के चलते नोमुरा ने इंडियामार्ट को रिड्यूस रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,810 फिक्स किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मीडियम से लॉन्ग टर्म में इन्हें आकर्षित करने के लिए प्रोडक्ट इवॉल्यूशन बहुत ज़रूरी है। नोमुरा का कहना है कि शेयरों में जोरदार तेजी के जरूरी है कि नए सब्सक्राइबर्स की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

एक और ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंडियामार्ट पर बेयरेश रुझान अपनाया है और इसे ₹1650 के टारगेट प्राइस के साथ अंडरपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पेड सप्लायर बेस में गिरावट कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका है। जेफरीज का कहना है कि सब्सक्राइबर जोड़ने में लगातार कमजोरी से इसके नेटवर्क इफेक्ट पर असर पड़ सकता है जिसका फ़ायदा इस प्लेटफॉर्म को पहले मिलता रहा है।

18% टूटे Medplus के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद यह बात पड़ी भारी

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।