Stocks to Watch: Sensex की मंथली एक्सपायरी; LIC, IRFC, Airtel और Delhivery समेत इन स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बीच आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 82.00 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,105.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 25 जून को सेंसेक्स (Sensex) 790.54 प्वाइंट्स यानी 1.04% के उछाल के साथ 76,991.22 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 197.55 प्वाइंट्स यानी 0.83% की बढ़त के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Embassy Developments

एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने लखनऊ में बड़े पैमाने पर कमर्शियल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक नॉन-बाइंडिंग एमओयू किया है। इस प्रोजेक्ट में लगभग ₹1,500 करोड़ का निवेश शामिल है।

LIC

सुनील अग्रवाल ने एलआईसी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 14 जुलाई से प्रभावी होगा।

NLC India

एनएलसी इंडिया की सब्सिडियरी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स ने ओडिशा में 1,000 MW के ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को सेटअप करने, चलाने और उनके रखरखाव के लिए ओरेडा के साथ एक जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है।

Bharti Airtel

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारती एयरटेल की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग को BBB से बढ़ाकर BBB+ कर दिया है। साथ ही इसने कंपनी के सीनियर अनसिक्योर्ड डेट की रेटिंग को भी BBB से बढ़ाकर BBB+ कर दिया है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार भारत और अफ्रीका के तेजी से बढ़ते बाजारों में डेटा की बढ़ती खपत से भारती एयरटेल की कमाई बढ़ेगी और कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी।

Indian Railway Finance Corporation (IRFC)

सरकार ने आईआरएफसी के ऑफर-फॉर-सेल (OFS) में 11.24 करोड़ इक्विटी शेयरों (0.86% होल्डिंग) तक ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह 13.06 करोड़ शेयरों (1% हिस्सेदारी) के बेस ऑफर साइज के अतिरिक्त है। ऐसे में अब कुल ऑफर साइज बढ़कर 24.3 करोड़ शेयर (1.86% हिस्सेदारी) तक हो जाएगा। यह इश्यू आज 25 जून को बंद होगा।

Jubilant Pharmova

जुबिलेंट फार्माोवा की सब्सिडियरी जुबिलेंट जेनेरिक्स को असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए एक सुधार आदेश यानी रेक्टिफिकेशन ऑर्डर मिला है, जिससे कुल टैक्स एडजस्टमेंट ₹107.89 करोड़ से घटकर ₹42.41 करोड़ रह गया है। जुबिलेंट जेनेरिक्स को यह राहत ट्रांसफर प्राइसिंग ऑफिसर ने दी, जिससे ₹65.48 करोड़ का टैक्स नुकसान वापस मिल गया है।

HCL Technologies

एचसीएलटेक ने नोकिया के साथ अपनी साझेदारी को बढ़ाने का ऐलान किया है। इसका मकसद एआई-आधारित नेटवर्क ऑटोमेशन और नेटवर्क ऑटोमेशन RAN एप्लिकेशन्स (rApps) के को-इनोवेशन के जरिए ऑटोनॉमस नेटवर्क को तेजी से अपनाना है। इसमें नोकिया के SMO मार्केटप्लेस पर होस्ट किए गए चार नए rApps भी शामिल हैं।

इसके अलावा नेस्ले ने भी अपने लॉन्ग-टर्म एआई पर आधारित एफिशिएंसी ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम के लिए एचसीएलटेक को स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर चुना है।

Garware Hi-Tech Films

गारवारे हाई-टेक फिल्म्स ने मोनिका गारवारे को 1 नवंबर, 2026 से 31 अक्टूबर, 2031 तक पांच साल के लिए वाइस चेयरपर्सन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्ति को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज ने 24 जून को अपना क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) इश्यू खोला, जिसका फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹613.69 तय किया गया।

ICICI Bank

आरबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में 2% तक की हिस्सेदारी और खरीद सकता है ताकि उसकी कुल हिस्सेदारी 50% से ऊपर बनी रहे।

बल्क डील्स

Delhivery

अल्फा वेव वेंचर्स एलपी ने डेल्हीवरी के 72.22 लाख शेयर ₹460.36 के भाव और 72.22 लाख शेयर ₹460.03 के भाव पर कुल 1.44 करोड़ (1.93% हिस्सेदारी) ₹664.7 करोड़ में बेचकर कंपनी से बाहर निकल गई।

Pine Labs

एक्टिस पाइनल लैब्स इंवेस्टमें होल्डिंग्स ने पाइन लैब्स में 2.08% हिस्सेदारी वाले 2.39 करोड़ इक्विटी शेयर ₹371 करोड़ में प्रति शेयर ₹155.17 के भाव पर बेच दिए। इससे पहले 19 जून को भी एक्टिस ने 0.85% हिस्सेदारी (98.28 लाख शेयर) हल्की की थी। इस महीने यह 2.93% होल्डिंग के बराबर शेयर बेच चुकी है, जबकि मार्च 2026 तक पाइन लैब्स में इसकी हिस्सेदारी 4.58% थी।

दूसरी तरफ एक्सिस म्यूचु्अल फंड ने कंपनी के 96.15 लाख शेयर (0.83%) ₹148.07 करोड़ में प्रति शेयर ₹154 के भाव पर खरीद लिए।

Shadowfax Technologies

मिरे एसेट लेट स्टेज अपॉर्च्यूनिटीज फंड ने शैडोफैक्स टेक में 0.97% हिस्सेदारी वाले 56.5 लाख शेयर ₹212 के भाव पर ₹119.78 करोड़ में बेच दिए। मार्च 2026 तक कंपनी में इस फंड की हिस्सेदारी 2.91% थी।

India Motor Parts & Accessories

प्रमोटर गीता राम ने इंडिया मोटर पार्ट्स एंड एक्ससेजरीज में 0.86% हिस्सेदारी वाले अतिरिक्त 71,559 शेयर ₹8.01 करोड़ में खरीदे। वहीं परी वाशिंगटन कंपनी ने परी वाशिंगटन इंडिया मास्टर फंड के जरिए 1.22 लाख शेयर (1.47% हिस्सेदारी) ₹13.72 करोड़ में बेच दी। मार्च 2026 तक इसकी कंपनी में हिस्सेदारी 4.49% थी। शेयरों की यह खरीद-बिक्री प्रति शेयर ₹1,120.1 के भाव पर हुई।

NDR INVIT Trust

एनडीआर वेयरहाउसिंग और एनडीआर यूनिवर्सल एंटरप्राइजेज ने इन्वेस्टकॉर्प इंडिया वेयरहाउसिंग आईएफएससी ट्रस्ट से एनडीआर एन्विट ट्रस्ट की 1.46 करोड़ यूनिट्स ₹200.36 करोड़ में प्रति यूनिट ₹137 के भाव पर खरीदी।

लिस्टिंग

आज एविएंस बॉयोमेडिकल्स की एनएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज इंडसइंड बैंक, एलआईसी, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स, अल्काइल एमाइन्स केमिकल्स,

एंथम बायोसाइंसेज, केयर रेटिंग्स, GIC हाउसिंग फाइनेंस, डॉ लाल पैथलैब्स, मवाना शुगर्स, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट, SJS एंटरप्राइजेज, सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स, सुप्रीम इंडस्ट्रीज, सिनजीन इंटरनेशनल, यूफ्लेक्स, वैभव ग्लोबल और विसाका इंडस्ट्रीज के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 25 जून को बढ़त के साथ शुरुआत करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 24,081.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

24 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। IT,रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,000 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं,जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 790.54 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 76,991.22 पर और निफ्टी 197.55 अंक या 0.83 प्रतिशत बढ़कर 24,021.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 87 अंक यानी 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 24,108.50 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 3.55 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.15 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.43 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 1.13 फीसदी की बढ़त है। कोस्पी 4.62 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.14 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

बुधवार को नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह टेक शेयरों में आई गिरावट थी। हालांकि,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस और ट्रैवल से जुड़े शेयरों को फायदा हुआ और डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 अंक या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया,जबकि S&P 500 में 7.24 अंक या 0.10% की गिरावट आई और यह 7,358.22 पर बंद हुआ। वहीं,नैस्डैक कम्पोजिट 110.40 अंक या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त पर खुल सकते है भारतीय बाजार

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को डॉलर तेजी से ऊपर चढ़ते हुए चार्ट रेजिस्टेंस के स्तर को पार कर गया। यह लगभग एक साल की अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि मज़बूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को सहारा देगी,साथ ही वे महंगाई के अहम आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.40% हो गई है। जबकि 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी पर भी दबाव बना हुआ है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

उधर मलेशियाई रिंगित 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे कारोबार कर रहा है। इसके बाद फिलीपीन पेसो का नंबर है, जिसमें 0.12 प्रतिशत की मजबूती आई है। थाई बाहत में 0.07 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जबकि, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में 0.03 प्रतिशत और 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।

कच्चे तेल में नरमी

गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और यह युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुच गया है। ईरान के साथ US इज़राइल युद्ध को खत्म करने के शुरुआती समझौते के बाद,फंसे हुए टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकल गए हैं,जिससे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हुईं है,इसका असर तेल कीमतों पर देखने को मिल रहा है। WTI क्रूड में 0.91 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 1.03 फीसदी की गिरावट आई है।

गोल्ड

गुरुवार को सोने की कीमतों में और गिरावट आई है और ये सात महीने से ज्यादा के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.38 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं,चांदी 0.39 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

Silver Demand: सोना महंगा होने से चांदी खरीद रहे ग्राहक? इंडस्ट्री बोली- त्योहार और शादी सीजन में बढ़ सकती है डिमांड

Silver Demand: चांदी की मांग में आने वाले महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Silver Emporium के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मेहता का कहना है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच आने वाला त्योहार और शादी का सीजन देश की सालाना चांदी खरीद का करीब आधा हिस्सा तय करता है।

उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय की कमजोरी के बाद मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि यह रिकवरी कितनी मजबूत होगी, यह काफी हद तक चांदी की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, जिसकी वजह से कई ग्राहक नई खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

बढ़ी है रिटेल मांग

हाल के हफ्तों में चांदी के डिनर सेट, गिफ्टिंग आइटम और शादी-ब्याह से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हालांकि इस खरीदारी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नई मांग नहीं है। कई ग्राहक अपनी पुरानी चांदी देकर नए सामान खरीद रहे हैं।

मेहता के मुताबिक, पिछले दो महीनों की तुलना में बिक्री की मात्रा करीब 30% बढ़ी है। इसके बावजूद कुल कारोबार अभी भी पिछले साल के मुकाबले 25-30% कम बना हुआ है।

महंगे सोने से चांदी को फायदा

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का फायदा अब चांदी को मिलता दिख रहा है। कई ग्राहक सोने की बजाय चांदी के गहनों की तरफ रुख कर रहे हैं क्योंकि यह सस्ता विकल्प है। यही वजह है कि कई गोल्ड ज्वेलर्स भी अब चांदी के कारोबार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राहुल मेहता के मुताबिक, पिछले छह महीनों में नए सिल्वर स्टोर खोलने की दिलचस्पी 300% से 400% तक बढ़ी है। इनमें से कई नए स्टोर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोले जा रहे हैं, जो महंगे सोने की वजह से चांदी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सप्लाई को लेकर चिंता नहीं

चांदी की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। राहुल मेहता का कहना है कि आयात पर कुछ प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा रिसाइक्लिंग भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी चांदी एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में चांदी की कोई कमी नहीं है और जरूरत हिसाब से कच्चा माल मौजूद है।

निवेशकों का रुख अभी भी कमजोर

हालांकि निवेशकों की तरफ से मांग अभी कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में प्रीमियम में कोई बड़ी तेजी नहीं दिख रही है।

कई निवेशक अभी भी चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर असमंजस में हैं। वे कीमतों में ज्यादा स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही निवेश मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

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Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

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ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Rajesh Exports ED Raid: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी Rajesh Exports Ltd (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है।

यह कार्रवाई 23 जून से शुरू हुई थी। जांच के दौरान ED को कई ऐसी बातें मिली हैं, जिन पर अब विस्तार से जांच की जा रही है।

1. विदेशी लेन-देन के दस्तावेज नहीं मिले

ED का कहना है कि कंपनी अपने कई विदेशी लेन-देन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाई। इनमें आयात-निर्यात, विदेशों में किए गए निवेश और विदेशी कंपनियों से मिलने या उन्हें दिए जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड शामिल है।

एजेंसी के मुताबिक, दस्तावेज नहीं होने की वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि ये लेन-देन वास्तव में हुए भी थे या नहीं। ED ने यह भी कहा कि कंपनी अफ्रीका की खदानों में किए गए कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं दिखा पाई।

2. ₹3,000 करोड़ के लेन-देन पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स UAE और कुछ दूसरे देशों की कंपनियों के साथ अपने देनदार और लेनदार खातों को आपस में एडजस्ट कर रही थी। ED के मुताबिक, ऐसे करीब ₹3,000 करोड़ के लेन-देन मिले हैं।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया।

3. फैक्ट्री स्टॉक में 40% का अंतर

छापेमारी के दौरान ED ने फैक्ट्री में मौजूद माल का भी मिलान किया। जांच में पाया गया कि कंपनी के रिकॉर्ड में जितना स्टॉक दिखाया गया था, वास्तविक स्टॉक उससे करीब 40% कम या ज्यादा था।

यानी कागजों और जमीन पर मौजूद माल के बीच बड़ा अंतर मिला है। अब एजेंसी इसकी वजह तलाश रही है।

4. अधिकारियों की सैलरी बेहद कम

ED ने कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के CFO को साल 2020 के बाद से कोई वेतन नहीं मिला।

वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को सिर्फ करीब ₹17,000 महीने की सैलरी दी जा रही थी। ED के मुताबिक, यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि कॉर्पोरेट जगत में ऊंचे पदों पर इतनी कम सैलरी देने का चलन नहीं है। खासकर, अगर कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया होय़

5. शेयरों में हेरफेर का भी शक

ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और शेयरों में संभावित हेरफेर की ओर भी इशारा किया है।

एजेंसी के मुताबिक, इन सौदों में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की लीक रिपोर्ट्स में भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि NRI बेनामी खातों का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर की गई और ₹600 करोड़ से ज्यादा रकम भारत से बाहर भेजी गई।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Rajesh Exports की मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब हाल ही में SEBI ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया। रेगुलेटर का दावा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय को जिस तरह पेश किया, वह उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खासकर स्विट्जरलैंड की Valcambi SA का रेवेन्यू। रेगुलेटर को शक है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी के कारोबार का आकार असलियत से कहीं बड़ा दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों को किया है खारिज

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अगर कोई आंकड़ों में हेरफेर करना चाहे, तो वह मुनाफा बढ़ाकर दिखाएगा। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने से कोई खास फायदा नहीं होता।

इस बीच जांच की खबरों का असर शेयर पर भी दिखा। बुधवार को Rajesh Exports का शेयर करीब 5% गिरकर ₹102.85 पर बंद हुआ। इससे पहले स्टॉक कुछ ही कारोबारी सत्र में करीब 30% तक बढ़ गया था। फिलहाल ED और SEBI दोनों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

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Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

Gold Price Today: दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक?

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नोएल टाटा छोड़ेंगे Trent के चेयरमैन का पद, AGM में कहा- कंपनी के सबसे अच्छे साल आना अभी बाकी

नोएल टाटा ने ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके साथ ही ट्रेंट के साथ उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। वह 70 साल के होने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने 23 जून को ट्रेंट की 47वीं सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स से कहा कि चेयरमैन के तौर पर यह उनकी आखिरी सालाना आम बैठक है।

टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है, जबकि नॉन-इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल में रिटायर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर 75 की उम्र में रिटायर होते हैं। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

1998 से Trent के साथ

नोएल टाटा साल 1998 में ट्रेंट के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए थे। उस वक्त, जब उनकी मां सिमोन टाटा ने लैक्मे के डाइवेस्टमेंट के बाद कंपनी शुरू की थी। उन्होंने जून 1999 में ट्रेंट के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर चार्ज संभाला था। वित्त वर्ष 2026 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया। नोएल टाटा ने सालाना आम बैठक में कहा, “एक वेस्टसाइड स्टोर से 1,200 से ज्यादा स्टोर के नेटवर्क तक, हमारा सफर लगातार आगे बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में हमने अपने पोर्टफोलियो में पावरफुल ग्रोथ इंजन जोड़े हैं- खासकर जूडियो और स्टार, जो अब हमारे पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा हैं।”

नोएल टाटा का मानना है कि ट्रेंट के सबसे अच्छे साल अभी बाकी हैं। कंपनी अपनी विकास यात्रा के शुरुआती चरण में है। कंपनी के सामने मौके बहुत हैं और केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। आने वाले सालों में ट्रेंट अलग-अलग कैटेगरी में बढ़ेगी और नई जगहों पर भी पहुंचेगी।

नोएल टाटा ने कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का सोचा था। तब से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी रन रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। टाटा ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि हम जल्द ही उस माइलस्टोन तक पहुंच जाएंगे, जिसका मैंने जिक्र किया था।”

ट्रेंट का शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा उछला

24 जून को ट्रेंट के शेयर में 3.6 प्रतिशत की तेजी है। शेयर BSE पर 3255 रुपये पर बंद हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.73 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। जून की शुरुआत में शेयर ने एक्स-बोनस ट्रेड किया था। ट्रेंट ने अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर बोनस के तौर पर देने का ऐलान किया था। वहीं कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। रिकॉर्ड डेट 12 जून थी। ट्रेंट के शेयर के लिए मॉर्गन स्टेनली ने ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 3,151 रुपये प्रति शेयर दिया है।

LIC का फाइनल डिविडेंड पाना चाहते हैं तो आज, 24 जून को आखिरी मौका, 25 जून को शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

HSBC ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च ने ‘बाय’ रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3,460 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 3,500 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने ​’रिड्यूस’ रेटिंग दी है। लेकिन टारगेट बढ़ाकर 3,025 रुपये कर दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

Share Market Rally: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सीनेट में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव से झटका लगा जिससे अब ईरान पर हमला करने उनके लिए मुश्किल हो गया तो इसने मार्केट में काफी रौनक बढ़ा दी। ट्रंप को इस करंट से घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी 50 भी 24100 के काफी करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रिकवरी आई और शुरुआती गिरावट से उबरते हुए निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 ग्रीन हो गए।

सेक्टरवाइज मेटल शेयरों ने जोरदार वापसी की कोशिश की और निफ्टी मेटल करीब 1% की गिरावट से रिकवर करते हुए ग्रीन हुआ लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह फिर 0.40% की गिरावट के साथ बंद हुआ। आईटी सेक्टर और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मिलकर मार्केट में शानदार रौनक बिखेरी और इनके निफ्टी इंडेक्स करीब 2% मजबूत हुए। शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद पीएसयू बैंक में भी रिकवरी हुई और अब इसके निफ्टी इंडेक्स करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी 2% से अधिक मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 790.54 प्वाइंट्स यानी 1.04% के उछाल के साथ 76,991.22 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 197.55 प्वाइंट्स यानी 0.83% की बढ़त के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 989.69 प्वाइंट्स उछलकर 77,190.37 और निफ्टी 265.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,090.05 तक पहुंच गया था।

₹1.86 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,59,448.771 करोड़ था। आज यानी 23 जून 2026 को यह बढ़कर ₹4,76,45,817.53 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,86,368.759 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 23 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 23 स्टॉक्स ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और टेक महिंद्रा में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट एनटीपीसी, टाटा स्टील और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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147 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4430 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2215 शेयर आज मजबूत हुए तो 2034 में गिरावट रही जबकि 181 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 147 शेयर एक साल के हाई और 63 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

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ITR Filing 2026: फॉर्म 16 नहीं मिला? फिर भी आसानी से भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग Form 16 का इंतजार करने लगते हैं। यह दस्तावेज ITR फाइल करने का काम काफी आसान बना देता है। लेकिन कई बार नौकरी बदलने, कंपनी बंद हो जाने, कम सैलरी होने या किसी दूसरी वजह से Form 16 नहीं मिल पाता। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अब ITR भरना मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपके पास Form 16 नहीं है, तब भी आप आसानी से अपना ITR फाइल कर सकते हैं। बस आपको अपनी कमाई, टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जुटानी होंगी।

Form 16 आखिर होता क्या है?

Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है। इसमें सालभर की सैलरी, TDS, टैक्स छूट और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

हालांकि Form 16 ITR भरने में मदद करता है, लेकिन ITR दाखिल करने के लिए इसका होना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी है कि बिना Form 16 के रिटर्न नहीं भरा जा सकता।

बिना Form 16 के ITR कैसे भरें?

सबसे पहले सैलरी स्लिप जुटाएं

अगर Form 16 नहीं मिला है, तो सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की सैलरी स्लिप निकाल लें। इन स्लिप्स में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरी भुगतान संबंधी जानकारी होती है।

अगर आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी स्लिप साथ रखें। इससे कुल आय निकालना आसान हो जाएगा।

AIS और TIS जरूर चेक करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें।

AIS में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयरों से हुई कमाई, TDS और कई दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिल जाती है। इससे आपको अपनी कुल आय का सही हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।

Form 26AS को नजरअंदाज न करें

ITR भरने से पहले Form 26AS जरूर देखें। इसमें आपके PAN पर कटे TDS और जमा किए गए टैक्स का पूरा रिकॉर्ड होता है।

अगर आपकी कंपनी या बैंक ने TDS काटा है, तो वह यहां दिखाई देगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि आपके नाम पर कितना टैक्स जमा किया गया है।

सिर्फ सैलरी नहीं, दूसरी आय भी जोड़ें

कई लोग ITR भरते समय सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय को भूल जाते हैं।

ऐसी गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है। इसलिए AIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर सभी आय को जोड़ना जरूरी है।

टैक्स छूट का फायदा लेना न भूलें

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन रहे हैं, तो 80C, 80D, NPS, होम लोन और दूसरी उपलब्ध कटौतियों को जरूर शामिल करें।

अपने निवेश और खर्च से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।

नौकरी बदली है तो ये गलती न करें

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो सभी कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर कुल आय निकालें।

कई बार नया नियोक्ता पुरानी नौकरी की आय को अपने टैक्स कैलकुलेशन में शामिल नहीं करता। ऐसे में ITR भरते समय सही आंकड़ा खुद जोड़ना जरूरी होता है। वरना बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

ITR भरने से पहले एक बार सब मिलान कर लें

रिटर्न फाइल करने से पहले AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी हर आय उसमें शामिल हो।

अगर आपकी कमाई के कई स्रोत हैं या मामला थोड़ा जटिल है, तो किसी टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

ITR Filing 2026: क्या FY 2025-26 की कमाई पर भरने होंगे 2 ITR? नए टैक्स कानून के कंफ्यूजन पर आयकर विभाग ने दिया ये जवाब

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