एक्टिविज्म करना है तो सजा के लिए तैयार रहें, नड्डा का खरगे पर पलटवार

JP Nadda statement Rajya Sabha: संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस कार्रवाई और माकपा कार्यालय में पुलिस के प्रवेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस पर पलटवार करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और स्पष्ट कहा कि अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है, तो उसे इस तरह की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाकर जोरदार हंगामा किया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने माकपा कार्यालय में दिल्ली पुलिस के दाखिल होने और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के प्रयास का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 2021 के एक मामले में सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने केवल इसलिए यह कार्रवाई की क्योंकि आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में भाग लिया था। ALSO READ: संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

खरगे का सरकार पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुसकर किसी को गिरफ्तार करने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है। क्या इससे लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ता? खरगे ने पुलिस टीम पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कदम देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात हैं।

केन्द्रीय मंत्री नड्डा का पलटवार

खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का मजबूती से समर्थन किया। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए नड्डा ने कहा कि ये बहुत ही सामान्य स्थिति है। मैं खुद स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। इमरजेंसी के दौरान मुझे कई बार क्लासरूम से उठाकर ले जाया गया, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है तो उसे ये सब झेलना ही पड़ेगा। ALSO READ: Priyanka Gandhi : प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में बवाल, प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी से मचा हंगामा, माफी की उठी मांग

 

नड्डा ने आगे कहा कि जब कोई कानून हाथ में लेता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। इसे गैर-जरूरी तरीके से सनसनीखेज बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद दो बार गिरफ्तारी झेली है, इसलिए छात्र राजनीति में ऐसी सजाओं के लिए तैयार रहना पड़ता है।

जब देश में गर्म है छात्रों की पिटाई का मामला तब बिहार की इस महिला अफसर की क्यों हो रही तारीफ? जानिए कौन हैं IPS शैलजा दास

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में पटना में छात्रों ने बिहार बंद बुलाया था। इसकी वजह से शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। इसी दौरान पटना पूर्वी की सिटी एसपी और 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक बयान चर्चा में है।

आईपीएस अधिकारी का बयान हो रहा वायरल

आईपीएस अधिकारी शैलजा ने कहा कि, “नागरिकों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। वे जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। जब तक वह हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक हम भी उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वारयल हो रहा है। लोग आईपीएस अधिकारी शैलजा की काफी तारीफ भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कौन है आईपीएस अधिकारी शैलजा दास

कौन है आईपीएस शैलजा दास

आईपीएस शैलजा दास बिहार कैडर की 2022 बैच की अधिकारी हैं और फिलहाल पटना पूर्वी में सिटी एसपी के पद पर तैनात हैं। आईपीएस शैलजा दास को एक संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा 2021 में उन्होंने 83वीं रैंक हासिल की थी, जिसमें इतिहास उनका वैकल्पिक विषय था। पटना में तैनाती से पहले वह नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। पटना में हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने धैर्य के साथ स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास किया।

सेंट स्टीफंस कॉलेज से की है पढ़ाई

शैलजा दास की शुरुआती शिक्षा अपने गृह नगर में हुई। उन्होंने वर्ष 2013 में बुद्धा पब्लिक स्कूल से दसवीं और बाद में दिल्ली पब्लिक स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय 83वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बनीं।

NEET प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! नाबालिगों की रिहाई का आदेश, छात्रों पर नहीं होगी दंडात्मक कार्रवाई

Supreme Court relief for NEET protesters: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 जुलाई) को उन छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे नीट पेपर लीक को लेकर हाल में देश भर में हुए आंदोलन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत संभालकर रखें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दिल्ली सरकार दर्ज की गई FIR की जांच जारी रख सकती है, लेकिन कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।”

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की पहली नजर में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए।

पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे। पीठ ने उन सभी राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और प्रदर्शन से जुड़े दूसरे डिजिटल सबूत संभालकर रखने का निर्देश दिया जहां प्रदर्शन हुए थे।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से संबंधित इकट्ठा किया गया कोई भी डिजिटल डेटा संभालकर रखा जाए। लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए। पीठ ने अधिकारियों को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया। साथ ही कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को सुरक्षा नहीं मिलेगी।

‘बलपूर्वक कोई कार्रवाई न की जाए’

पीठ ने दिल्ली सरकार को दर्ज FIR के मामले में जांच जारी रखने की इजाजत दी। लेकिन कहा कि कार्रवाई लंबित रहने तक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बलपूर्वक कोई कार्रवाई न की जाए। अदालत ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से भी जवाब मांगा। चीफ जस्टिस ने कहा, “आरोपों की पहली नजर में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर विचार करने की जरूरत है, जिसमें 200 से ज्यादा घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं को भी दूर किया जाना चाहिए।”

पीठ ने कहा कि केंद्र और संबंधित राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति या विशेष जांच दल बनाने पर विचार करने से पहले अपने बयान रिकॉर्ड पर रखें। शुरुआत में, अदालत ने पूछा कि पुलिस की ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा, “जिसने भी ज्यादती की, कानून अपने हाथ में लिया, उसे सजा मिलनी चाहिए।”

‘जांच के लिए SIT गठित की जा सकती है’

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यहा भी कहा कि हालिया छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन होने पर कानून को अपना काम करना चाहिए।

नीट पेपर लीक होने को लेकर देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिंसा की कई घटनाओं का जिक्र किया।

सुनवाई के शुरुआत में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की सदस्यता वाली पीठ ने सवाल किया कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। वकीलों की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि विरोध कर रहे नीट छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

पीठ ने कहा, “अगर तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है, तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।” CJI सूयकांत ने कहा कि पीठ सभी आरोपों की स्वतंत्र, पारदर्शी और गहन जांच कराने पर विचार कर रही है। अदालत ने कहा कि 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि ये हमले छात्रों ने किए थे या कुछ उपद्रवी तत्वों ने।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्र पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ उपद्रवी इन घटनाओं में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस मामलों में वांछित उपद्रवी विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा की।

कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

Mohammad Irfan

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान एक चेहरा रातों-रात पूरे देश में छा गया—मोहम्मद इरफान। बिना किसी बड़े राजनीतिक दल या छात्र संगठन के बैनर तले आए इरफान ने अपने बेबाक बयानों, संविधान की समझ और जमीनी अनुभवों से सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया।

उनकी वायरल लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद दिल्ली की एक पुनर्वास बस्ती में स्थित उनके घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की।

कौन हैं मोहम्मद इरफान?
दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान एक आम दिहाड़ी मजदूर और फेरीवाले हैं। इरफान कभी स्कूल नहीं गए और मोबाइल पर टाइप करना भी नहीं जानते। वे रोज बर्फ बेचकर और मजदूरी करके लगभग 500 रुपये कमाते हैं।

तकनीक से लिया नॉलेज: भले ही उनके पास कोई औपचारिक डिग्री न हो, लेकिन उन्होंने गूगल के वॉयस सर्च, यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और मजदूरों के अधिकारों की गहरी समझ हासिल की है।

सामाजिक आंदोलनों से जुड़ाव: इरफान पहले भी कई जन-आंदोलनों में शामिल रहे हैं और 2024 की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान दिल्ली से कश्मीर तक की पदयात्रा में भी सहभागी बने थे।

जंतर-मंतर पर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात हो गए वायरल?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जब एक मीडिया चैनल ('द लल्लनटॉप') ने इरफान से बातचीत की, तो उन्होंने जो कहा उसने हर किसी को चौंका दिया:

संविधान की प्रस्तावना और समझ: बिना किसी कागज़ के उन्होंने संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का मर्म समझाया और कहा कि संविधान हर नागरिक की गरिमा की रक्षा करता है।

मजदूरों की बेआवाज़ आवाज़: उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों मजदूर सड़कों पर इसलिए नहीं उतर पाते क्योंकि एक दिन काम न करने का मतलब है घर में चूल्हा न जलना।

लोकतांत्रिक संवाद पर जोर: उन्होंने सरकार और जनता के बीच अहंकार छोड़कर बातचीत के रास्ते खुले रखने की वकालत की। उनका सादा पहनावा, निडर लहजा और ज्ञान देखकर उनका इंटरव्यू सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करने लगा।

राहुल गांधी की मुलाकात: “इरफान जैसे युवा ही भारत की असली उम्मीद”
27 जुलाई को राहुल गांधी खुद सुरक्षा तामझाम के बीच सावदा जेजे कॉलोनी में इरफान के कच्चे/अधूरे मकान में उनसे मिलने पहुंचे। राहुल गांधी ने इरफान के परिवार से हाल-चाल पूछा, चाय पी और फोन पर अपनी बहन व कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से भी इरफान की बात कराई। इसके साथ ही उन्होंने इरफान के पूरे परिवार को संसद आने का न्योता दिया।

राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम और 'X' पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा: “संविधान की उसकी समझ, देश को देखने का उसका नजरिया और सीखने की उसकी ललक बताती है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। इरफान जैसे जिज्ञासु, संवेदनशील और अपने अधिकारों-कर्तव्यों के प्रति जागरूक युवा ही देश की असली उम्मीद हैं।”

मोहम्मद इरफान की कहानी यह साबित करती है कि लोकतंत्र की ताकत बड़ी-बड़ी डिग्रियों या अमीर घरानों में नहीं, बल्कि देश के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े आम नागरिक की चेतना में बसती है। एक दिहाड़ी मजदूर का बिना स्कूल गए संविधान की आवाज बनना इस दौर की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है।

जंतर-मंतर का नया व्याकरण, क्‍या ‘Gen-Z’ की गालियों से हो रहा संस्‍कारों का पतन, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

Gen-Z protest

दिल्‍ली का जंतर-मंतर हमेशा से देश की धड़कन रहा है—यहां कभी इंकलाब के नारे गूंजते हैं, तो कभी व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश का सैलाब उमड़ता है। लेकिन हाल ही में, नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जुटे 'Gen-Z' (नई पीढ़ी) के प्रदर्शन ने विरोध प्रदर्शनों के इतिहास में एक नया और तीखा अध्याय जोड़ दिया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा सिर्फ इसके मुद्दों को लेकर नहीं, बल्कि उस भाषा को लेकर है जो प्रदर्शनकारियों के मुंह से निकली। सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित करते हुए जिस खुलेपन और बेबाकी से फूहड़ और भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया, उसने सोशल मीडिया से लेकर ड्राइंग रूम तक भूचाल ला दिया है।

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यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।

साहित्यिक बिरादरी में छिड़ा घमासान: अभिव्यक्ति या पतन?
इस पूरी घटना के बाद वैचारिक गलियारों में एक तीखी खींचतान शुरू हो गई है। एक धड़ा ऐसा है जो इन गालियों को युवा पीढ़ी के घुटनभरे गुस्से और निराशा का स्वाभाविक विस्फोट मान रहा है। इनका तर्क है कि जब सिस्टम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है, जब उनकी डिग्रियां और सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ जाते हैं, तब शालीनता और व्याकरण के दायरे टूट जाते हैं। इस वर्ग का मानना है कि गालियां समाज का हिस्सा हैं और जब सत्ता बहरी हो जाती है, तो भाषा अपनी शालीनता छोड़कर आक्रामक हो जाती है। उनके अनुसार, यह Gen-Z का अपने गुस्से को बिना किसी फिल्टर के बयां करने का तरीका है।

दूसरी तरफ, पारंपरिक साहित्यकारों, विचारकों और वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इसे संस्कारों का गंभीर हनन और सभ्यता के पतन की शुरुआत मान रहा है। उनका कहना है कि विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक और शालीन तरीके सदियों से मौजूद रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर इस स्तर की भद्दी भाषा का प्रयोग न केवल राजनीतिक बहस के स्तर को गिराता है, बल्कि यह दिखाता है कि नई पीढ़ी के भीतर संवाद की संस्कृति खत्म हो रही है।

ओटीटी, सोशल मीडिया और 'मूक स्क्रीन' की देन : इस वैचारिक मंथन में एक और दिलचस्प पहलू पर बात हो रही है—वह है Gen-Z की भाषा का ताना-बाना। आज की पीढ़ी किताबों की दुनिया से दूर, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेब सीरीज, सोशल मीडिया के मीम्स और रील्स की ऐसी दुनिया में जी रही है जहाँ गालियों को 'कूल' और 'रॉ' (Raw) मानकर सामान्यीकृत कर दिया गया है। फिल्मों और सीरीज में एंटी-हीरो के मुंह से निकलने वाली गालियां अब युवाओं के दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन चुकी हैं।

जब यही पीढ़ी अपने वास्तविक जीवन में किसी बड़े संकट या अन्याय का सामना करती है, तो उनके पास विरोध की अपनी गढ़ी हुई कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं होती। वे अपनी उसी सिनेमैटिक और सोशल मीडिया वाली दुनिया की भाषा में प्रतिक्रिया देते हैं, जहां आक्रोश का मतलब ही तीखा और अमर्यादित होना है।

क्या यह लोकतंत्र की नई भाषा है?
सवाल यह है कि क्या जंतर-मंतर पर सुनाई दी यह भाषा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है या यह एक चेतावनी है? एक तरफ, भाषा की पवित्रता और सार्वजनिक जीवन की गरिमा का सवाल अपनी जगह बिल्कुल सही है। लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है, और जब वह मर्यादा तार-तार होती है, तो समाज की मूल संरचना खतरे में पड़ जाती है। दूसरी तरफ, यह भी सच है कि यह गुस्सा रातों-रात पैदा नहीं हुआ। युवाओं के भीतर सिस्टम के प्रति जो अविश्वास और लाचारी का भाव है, उसने इस अमर्यादित भाषा को जन्म दिया है।

अंत में, जंतर-मंतर की यह घटना सिर्फ नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है। यह इस बात का आईना है कि हमारी आने वाली पीढ़ी व्यवस्था से कितनी त्रस्त है और उनके गुस्से को व्यक्त करने के साधन कितने बदल चुके हैं। अब यह बहस सिर्फ इस बात की नहीं है कि गालियां दी जानी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात की है कि क्या हम उस समाज का निर्माण कर रहे हैं जहाँ युवाओं का गुस्सा केवल गालियों के शोर में ही दबकर रह जाए?

शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है

A picture of students protesting at Jantar Mantar against the education system and the NEET-UG exam

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,

कर्तव्य पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। — अटल बिहारी वाजपेयी

 

राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जब बात देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों विद्यार्थियों के हित की आती है, तब केवल और केवल राष्ट्र प्रथम का विचार ही सर्वोपरि रहता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परिपक्व राजनीति, नैतिक उच्चता और देश को अस्थिर करने व अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाली ताकतों को दिया गया मजबूत और करारा संदेश है।

 

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब जंतर-मंतर पर विभिन्न आंदोलनों और उपद्रवों की आड़ में देश को उद्वेलित करने और असंतोष फैलाने की साजिश रची जा रही थी, तब उन्होंने देश की युवाशक्ति के भविष्य को भ्रम और अनिश्चितता से बचाने के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

 

उन्होंने पहले ही दिन से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सीबीआई जांच सौंपी और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड जैसी व्यवस्थाएं लागू की। जब यह साफ दिखने लगा कि विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में देशविरोधी और असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का एजेंडा चला रहे हैं, तब उन्होंने पद त्याग कर विरोधियों की पूरी साजिश को एक झटके में नाकाम कर दिया। उनके इस कदम से सिद्ध हुआ कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए पद नहीं, बल्कि देश और विद्यार्थियों का हित ही सर्वोपरि है।

 

यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी पहले भी इस्तीफा दे सकते थे? लेकिन जैसे ही पेपर लीक का विषय सामने आया, उन्होंने जिम्मेदारियों से भागने के बजाय नीट-यूजी की परीक्षा का पुनः आयोजन पूर्ण पारदर्शिता के साथ करवाया।

उन्होंने नीट का परिणाम आने और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता से संपन्न होने के बाद ही अपना इस्तीफा सौंपा। यदि वे विवाद के शुरुआती दौर में इस्तीफा दे देते, जब पूरा विपक्ष और असामाजिक तत्व चील की तरह नज़रें गड़ाए बैठे थे, तो इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता था। अतः पूरी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के उपरांत ही इस्तीफा सौंपना अत्यंत व्यावहारिक, रणनीतिक और सही कदम था।

 

राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को सौंपी है। वे एक बहुत ही अनुशासित, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के प्रखर राष्ट्रवादी संकल्प से हुई थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला व खान मंत्री के रूप में उन्होंने कई कठिन विधायकी कार्यों और संकटपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। वे अपने सख्त अनुशासन, प्रशासनिक पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों को बिना किसी गतिरोध के आगे बढ़ाने में वे पूरी तरह सक्षम हैं। 

 

एक घोर राष्ट्रवादी और दृढ़ नेतृत्व के हाथों में शिक्षा मंत्रालय आने से देश की शिक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होने की आशा है। फिर भी इन सबके बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुकी है।

आंदोलन के नाम पर अनशन, उग्र और अश्लील नारों तथा सनातन धर्म एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाने पर लेने का प्रयास किया गया। सोनम वांगचुक जैसे चेहरों की भूख हड़ताल को आगे रखकर व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने इस विघटनकारी सोच को अच्छी तरह समझ लिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने तथाकथित छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के दोहरे मापदंडों की भी पोल खोल दी है। जो खुद को छात्रों का रहनुमा बताते फिर रहे हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हुए पेपर लीक मामलों पर पूरी तरह खामोश बैठे हैं और मीडिया के सवालों से कतराते दिख रहे हैं।

लेकिन इन छात्र संगठनों और प्रवक्ताओं द्वारा वहां के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? यह चुप्पी साबित करती है कि यह आंदोलन छात्रों के हित में नहीं, बल्कि केवल भाजपा से राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्ष द्वारा प्रेरित था।

 

वहीं सरकार ने इस पूरे एजेंडे के जवाब में एक साथ कई बड़े रणनीतिक लक्ष्य साध लिए हैं। आंदोलन की आड़ में संसद का काम रोकने और देश का माहौल खराब करने का लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गया है।

विपक्षी पार्टियों की पोल खुली है कि उनके लिए देश से पहले पार्टी है। वहीं हिंसक गतिविधियों और उपद्रव में लिप्त तत्वों की पहचान हो चुकी है, जिससे अब कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, विपक्षी राज्यों में भी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वहां की सरकारों को घेरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

कहते हैं अधर्म और षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों को लगता है कि वे कुछ समय के लिए भ्रम फैला सकती हैं, लेकिन इतिहास साक्षी है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए चुनौतियों का सामना किया और अंततः रावण तथा कंस जैसी ताकतों का समूल नाश हुआ।

सनातन संस्कृति और देश को अस्थिर करने वाले अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं। उनका देश को नेपाल और बांग्लादेश बनाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है। सत्य और धर्म की राह में सामयिक चुनौतियां अवश्य आती हैं, किंतु जीत राष्ट्रहित की ही होती है। एक बार फिर सिद्ध हो चुका है कि भारत की नीतियां किसी दबाव या षड्यंत्र से तय नहीं होंगी, वे केवल और केवल राष्ट्रहित से ही संचालित होंगी।

Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

top news 27 july Photo : AI Generated

Top News 27 July : संसद में आज पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस। सोनम वांगचुक को आज अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड। 27 जुलाई की बड़ी खबरें :
 

संसद में पेपर लीक संशोधन बिल

मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे संसद में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होने के बाद संसद में सोमवार से विपक्ष युवाओं पर लाठीचार्ज के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाएगा। विपक्ष आज राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को भी सदन में उठा सकता है।

 

सोनम वांगचुक को मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। वह लद्दाख रवाना होने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट जाएंगे। नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक ने किया था 26 दिन का अनशन। 

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए ऐसे कंटेंट की पहचान कर संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

 

मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड, भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांता सिंह ने जीता रजत पदक। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया। 

जंतर-मंतर के बाद अब पंजाब में पेपर लीक पर हल्ला बोलेगी सीजेपी! अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को पंजाब में कथित पेपर लीक मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि संगठन इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी अगली योजनाओं की घोषणा करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिपके ने कहा, “हमारा विरोध प्रदर्शन अभी कल ही खत्म हुआ है। कृपया हमें थोड़ा समय दीजिए, इसके बाद हम आगे की योजना साझा करेंगे।”

36 दिनों से चल रहा थी आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में संगठन की स्थापना की थी। यह कदम उस समय उठाया गया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस संगठन की शुरुआत की। 6 जून को अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे और नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया। इस दौरान संगठन ने उन 20 छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी परिस्थितियों के बाद आत्महत्या कर ली थी। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने घोषणा की कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहेंगे। वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन और गति मिली।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहा था प्रदर्शन

शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर 36 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह फैसला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया गया। मंत्री का इस्तीफा संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल था, जिसे लेकर सीजेपी लगातार आंदोलन कर रही थी। कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में की थी। संगठन की शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस मंच का गठन किया।आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया, जिसके बाद इस आंदोलन को देशभर में और अधिक समर्थन मिलने लगा।

 

‘ हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी …’, परीक्षा रिफॉर्म पर PM मोदी का बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों के लिया बड़ा फैसला किया है। पीएम मोदी ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल भेजे जा चुके हैं और ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट भी बनाई गई हैं। उन्होंने बताया कि नंदन नीलेकणी की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार संसद में एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि आने वाली सभी परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकें।

कौन हैं नंदन निलेकणि

नंदन निलेकणि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज उद्यमी हैं। उन्हें इन्फोसिस के सह-संस्थापक और आधार कार्ड के जनक के रूप में जाना जाता है। वो 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के CEO और MD रहे। बाद में 2017 में कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी लौटे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 में नंदन नीलेकणि को UIDAI प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। UIDAI को ‘डिजिटल इंडिया’ को आकार देने में एक अहम कदम माना जाता है। आज, आधार को दुनिया भर में सबसे बड़े बायोमेट्रिक सिस्टम के तौर पर पहचाना जाता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी कितनी है? सरकारी बंगला और सुरक्षा के साथ-साथ मिलती हैं ये सुविधाएं

नीट पेपर लीक मामले को लेकर कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव के बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं और भत्ते दिए जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य होने के साथ-साथ सांसद भी होते हैं। ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित वेतन, विभिन्न प्रकार के भत्ते और कई आधिकारिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

आइए जानते हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने 1 लाख रुपये बेसिक सैलरी मिलती है।

इसके अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते भी दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: अपने संसदीय क्षेत्र में जनता से संपर्क और क्षेत्रीय कामकाज के लिए हर महीने 70,000 रुपये।
  • कार्यालय भत्ता: कार्यालय चलाने, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए हर महीने 60,000 रुपये।
  • दैनिक भत्ता: संसद या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने पर 2,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

  • सरकारी आवास: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में सरकारी बंगला दिया जाता है। इस आवास के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। इसके रखरखाव और अन्य जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी सरकार उठाती है।
  • सरकारी गाड़ी और सुरक्षा: आधिकारिक कामकाज के लिए मंत्री को सरकारी कार, ड्राइवर और ईंधन की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन के आधार पर उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत के अनुसार पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ), एस्कॉर्ट वाहन और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं।
  • यात्रा की सुविधा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सरकारी काम के लिए पूरे देश में यात्रा करने की सुविधा मिलती है। इसमें हवाई यात्रा के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास और ट्रेन में फर्स्ट एसी से सफर करने की व्यवस्था शामिल होती है। सरकारी नियमों के अनुसार, पात्र परिवार के सदस्यों को भी यात्रा से जुड़ी कुछ सुविधाएं मिल सकती हैं।
  • चिकित्सा सुविधा: केंद्रीय मंत्री और उनके आश्रित परिवार के सदस्य सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत इलाज की सुविधा प्राप्त करते हैं। इस योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • कार्यालय और संचार सुविधाएं: सरकार मंत्री की मदद के लिए निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट), सचिव और अन्य सहयोगी कर्मचारी उपलब्ध कराती है। इसके अलावा सरकारी आवास और कार्यालय में टेलीफोन, इंटरनेट तथा सरकारी कामकाज के लिए जरूरी अन्य संचार सुविधाएं भी दी जाती हैं।