CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

CJP protest ended: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‍डा और केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) ने शनिवार को प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। 

 

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। मंगलवार तक हमें लिखित गारंटी देगी सरकार। सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस लेगी। साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी तुरंत अपने घर चले जाएं।

 

केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्‍डा ने भी इस दौरान कहा कि सीजेपी की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार ने केस रद्द करने की मांग मान ली है साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की बात भी सरकार ने मांग ली है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। 

धरना स्थल पर जश्न का माहौल

नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारी नाचते-गाते, तिरंगा लहराते और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते नजर आए। 

CJP ने जंतर-मंतर पर धरना खत्म करने का किया ऐलान, सरकार के साथ इन तीन मांगों पर बनी सहमति

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के 37 दिन बाद भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं इस इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अब अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। सरकार के साथ बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी अच्छे विश्वास के साथ अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर लागू किए जाने के भरोसे पर यह फैसला लिया गया है।

धरना खत्म करने का ऐलान

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनकी दूसरी बड़ी मांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सभी बीजेपी शासित और बीजेपी समर्थित राज्यों में दर्ज मामलों पर लागू होगी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है और भरोसा दिया है कि सभी एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी।

सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी सहमति

सौरव दास ने बताया कि सरकार उन्हें दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी भी उपलब्ध कराएगी। उनके अनुसार, अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी कॉपी उन्हें सौंप दी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी ने सरकार को एक लिखित गारंटी का मसौदा भी दिया है। सरकार ने कहा है कि वह मंगलवार तक इस पर अपनी ओर से जवाब साझा करेगी। सौरव दास ने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक उन्हें एफआईआर वापस लेने और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को लेकर सरकार की लिखित गारंटी मिल जाएगी।

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं। हली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी मामलों को वापस लेने की थी, साथ ही भविष्य में उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करने की गारंटी देने की थी। तीसरी मांग उन परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी, जिन्होंने नीट परीक्षा नहीं होने के बाद अपने परिजनों को खो दिया। आशुतोष रंका ने कहा कि कुछ ही देर पहले धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी पहली मांग पूरी हो गई है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या? सोमवार को बड़ा कदम उठा सकती है सरकार, फुल डिटेल जानिए

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है। वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने जहां राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। वहीं इस बड़े घटनाक्रम के साथ ही दो एक सवाल तेजी से तैरने लगे हैं कि अब सरकार का अगला कदम क्या होगा। केंद्र सरकार सोमवार 27 जुलाई को एक और बड़े कदम की ओर बढ़ती दिख रही है।

ये विधेयक लाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए कानून का मकसद संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार यह विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है।

विधेयक में कड़ी सजा का प्रवधान 

विधेयक के मसौदे में पेपर लीक कराने या सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, इस कानून के तहत दर्ज मामलों का ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरा करने का भी प्रस्ताव है।

बनाए जाएंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रस्तावित विधेयक में यह भी कहा गया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक और परीक्षा में नकल जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके। इसके अलावा, सरकार विशेष जांच इकाइयां (स्पेशलाइज्ड एनफोर्समेंट यूनिट्स) बनाने का भी प्रस्ताव लेकर आई है। इनके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित कर सकेगी, जो इन मामलों की पूरी जांच की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर इस कदम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद से पास कराने की कोशिश करेगी। हालांकि, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मंत्रिमंडल को दी गई जानकारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई से जुड़े नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मौजूदा नियमों की तुलना में पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए और कड़ी सजा का प्रावधान करना है। इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार अगले सप्ताह संसद में ऐसा विधेयक पेश करेगी, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान होंगे।

पेपर लीक हुआ फिर पीछे पड़ गए कॉकरोच और अब देना पड़ा इस्तीफा! जानिए कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान

Who Is Dharmendra Pradhan: देश भर में नीट पेपर लीक विवाद और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलनों के भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज, शनिवार 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कभी खुद छात्र राजनीति के दौरान पेपर लीक और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले धर्मेंद्र प्रधान के लिए यह एक अजीब ऐतिहासिक मोड़ रहा। जिस राजनीति से वे उभरे थे, अंततः उसी तरह के एक बड़े छात्र आंदोलन ने उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

आइए आपको बताते हैं छात्र आंदोलन से से लेकर मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री तक के धर्मेंद्र प्रधान के सफर की पूरी कहानी।

कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान?

26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता देबेंद्र प्रधान के पुत्र हैं। राजनीति उन्हें विरासत में जरूर मिली, लेकिन उनकी पहचान छात्र राजनीति से बनी। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ छात्र राजनीति की शुरुआत की और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने।

1997 का पेपर लीक आंदोलन

साल 1997 में ओडिशा की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान प्रश्नपत्र लीक विवाद हुआ था। तब ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में करीब 1,500 छात्रों ने भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री आवास के पास सचिवालय का घेराव किया था। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सख्त बल प्रयोग किया था, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान को गंभीर चोटें आई थीं और उनके शरीर में कई जगह फ्रैक्चर भी हुए थे। इस घटना ने उन्हें ओडिशा में छात्र राजनीति का एक बड़ा चेहरा बना दिया।

विधायक से सांसद: चुनावी राजनीति का सफर

धर्मेंद्र प्रधान ने साल 2000 में ओडिशा की पल्लहड़ा सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वे 2004 में ओडिशा की देवगढ़ सीट से पहली बार लोकसभा पहुंचे। उन्होंने बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। 2024 के आम चुनाव में वे ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से भारी मतों से जीतकर फिर से संसद पहुंचे।

मोदी सरकार में बढ़ा कद, संभाले कई बड़े मंत्रालय

2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई, तब से ही धर्मेंद्र प्रधान सरकार के सबसे भरोसेमंद और प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: 2014 में स्वतंत्र प्रभार मंत्री के रूप में उन्होंने इस महत्वपूर्ण आर्थिक मंत्रालय की कमान संभाली, जिसमें उन्होंने ‘उज्जवला योजना’ जैसे कई बड़े सुधार लागू किए।

कौशल विकास और इस्पात मंत्रालय: 2017 में उन्हें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का प्रभार मिला और 2019 में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने इस्पात मंत्रालय भी संभाला।

जुलाई 2021 में शिक्षा मंत्री की कमान और NEP का क्रियान्वयन

जुलाई 2021 में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के हटने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल का सबसे बड़ा काम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को जमीनी स्तर पर लागू करना रहा। शिक्षा मंत्री रहते हुए वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख और परीक्षाओं के प्रबंधन को लेकर लगातार चुनौतियों से घिरे रहे।

नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों के बाद विपक्षी दलों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) सहित कई छात्र युवा संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मोर्चा खोला हुआ था, जिसके बाद आज उन्होंने पीएम मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

Dharmendra Pradhan: धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को भेजी इस्तीफे की चिट्ठी, जानिए क्या है मंत्री के इस्तीफे की संवैधानिक प्रक्रिया

Dharmendra Pradhan Resigns: देश भर में नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे भारी विरोध-प्रदर्शनों और छात्रों के उग्र आंदोलन के बीच अभी-अभी एक बड़ा अपडेट आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि ‘देशविरोधी ताकतों’ को भ्रम फैलाने और इस स्थिति का अनुचित फायदा उठाने से रोकने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने X पर क्या लिखा?

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नीट विवाद को लेकर जिस तरह से अफवाहें और भ्रम फैलाया जा रहा था, उससे छात्रों के भविष्य और देश की व्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि कोई भी अवांछित तत्व या देशविरोधी ताकतें इस स्थिति का फायदा उठाकर माहौल खराब करें, इसलिए उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए पद त्यागने का फैसला किया है।

अगर कोई केंद्रीय मंत्री इस्तीफा देता है, तो आगे क्या होती है प्रक्रिया?

भारतीय संविधान के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी भी मंत्री के इस्तीफे की एक तय संवैधानिक प्रक्रिया होती है। संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, मंत्री अपना त्यागपत्र सीधे प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए या उनके माध्यम से भेजते हैं। प्रधानमंत्री उस इस्तीफे की समीक्षा करते हैं। अगर प्रधानमंत्री उसे स्वीकार करने का निर्णय लेते हैं, तो वे इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन भेजते हैं।

भारत के राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्री का इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है।

मंत्री के हटने के बाद, प्रधानमंत्री या तो उस मंत्रालय का प्रभार खुद अपने पास रख लेते हैं या किसी अन्य कैबिनेट मंत्री को अतिरिक्त प्रभार सौंपते हैं। बाद में कैबिनेट फेरबदल के दौरान नए मंत्री की स्थायी नियुक्ति की जा सकती है।

क्या अब जंतर-मंतर पर नहीं दिखेंगे अभिजीत दिपके? अस्पताल से बोले- ‘सुबह-शाम चढ़ रही है आईवी ड्रिप, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान…’

Abhijeet Dipke Diagnosed With Typhoid: ‘रोजाना सुबह-शाम ड्रिप चढ़ रही है, पर हौसला अभी भी फुल चार्ज है…’ देशव्यापी नीट प्रदर्शन की कमान संभाल रहे अभिजीत दिपके ने जब X पर अपनी ब्लड रिपोर्ट शेयर की है। उन्हें टाइफाइड हो गया है। हालांकि, इसके बावजूद CJP संस्थापक ने हुंकार भरी है कि बीमारी उनके आंदोलन की रफ्तार नहीं धीमी कर सकती। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना हेल्थ अपडेट देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह छात्र आंदोलन बिना रुके जारी रहेगा।

X पर वीडियो मैसेज शेयर कर बताया हेल्थ अपडेट

अभिजीत दिपके ने आज शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने समर्थकों और छात्रों को अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, पिछले कुछ दिनों से मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। अब मेरी ब्लड रिपोर्ट आ गई है और मुझे टाइफाइड की पुष्टि हुई है। मेरा इलाज चल रहा है और मुझे रोजाना सुबह और शाम आईवी ड्रिप चढ़ाई जा रही है।’

दिपके ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए देश भर के छात्रों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, ‘मैं देश भर में शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे सभी ‘कॉकरोचों’ का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। आप लोगों ने इस आंदोलन को इतना सफल बनाया है।’

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर प्रदर्शन इसी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ेगा।

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, पर CJP का आंदोलन रहेगा जारी

सोनम वांगचुक द्वारा अपना 26 दिनों का भूख हड़ताल समाप्त करने पर दिपके ने राहत जताई। उन्होंने कहा, ‘हम अब बेहद खुश और टेंशन फ्री हैं कि सोनम सर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उनका जीवन इस देश के लिए बेहद कीमती है।’

वैसे उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक CJP का आंदोलन पूरे देश में पूरी ताकत के साथ चलता रहेगा।

‘इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल’- आशुतोष रांका

इस आंदोलन के नीतिगत रणनीति बनाने वाले CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सरकार को कड़ा संदेश दिया है। आशुतोष रांका ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल यानी जिस पर कोई समझौता नहीं होने वाला है। अगर सरकार इस पर ‘ना’ कहती है, तो आगे की बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता।’

CJP की सरकार के सामने 3 मुख्य मांगें

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्तें पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
  2. कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई (FIR/केस) न किए जाने का लिखित आश्वासन मिले।
  3. मुआवजे की मांग: नीट पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कल हुई थी बैठक, आज फिर चर्चा की उम्मीद

शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ हाई-लेवल बैठक की थी। केंद्रीय मंत्रियों ने पार्टी की मांगों का अध्ययन करने और सरकार का रुख तय करने का भरोसा दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आगे की वार्ता प्रस्तावित है।

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

-प्रो. संजय सिन्हा
neet exam controversy: पिछले कुछ दिनों में नीट परीक्षा को लेकर देश और प्रदेश में जो कुछ देखने को मिला, वह कई तरह के सवाल खड़े करता है। पहला तो यही कि क्या छात्रों की पढ़ाई-लिखाई या परीक्षा से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता संघर्ष का माध्यम बन गया है और इसी से जुड़ा सवाल यह भी है कि आखिर राजनीतिक दल क्यों इस आंदोलन को अराजकता की दिशा में ले जाना चाहते हैं? क्या यह वाकई अब छात्रों की लड़ाई रह गई है या फिर इसके बहाने मुद्दाविहीन विपक्ष द्वारा राजनीतिक जमीन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है? यह सवाल उद्वेलित करने वाले हैं। कोई संशय नहीं कि नीट पेपर का लीक होना एक आपराधिक घटना है, चिंता का विषय है लेकिन जब कोई संवेदनशील मुद्दा राजनीतिक मंच में बदल जाता है तो कहानी नया रंग ले लेती है।

 

दिल्ली की सड़कों और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करते हैं कि छात्रों की शिकायत को चेहरा बनाकर कुछ पार्टियां खासतौर पर सपा व कांग्रेस अपना खोया जनाधार हासिल करना चाहती हैं। विपक्षी दलों के बीच इस आंदोलन का नेतृत्व करने की होड़ मची है और इसका प्रमाण यह है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक धरना आयोजित हुआ, तो उसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने एक समानांतर प्रदर्शन खड़ा कर दिया। छात्रों के एक प्रतिनिधि आंदोलन पर राजनीतिक दल यह साबित करने की कोशिश में जुट गए कि उस पर उनका नेतृत्व है। इस बात की चिंता भी नहीं कि उनकी यह कोशिश उनकी प्राथमिकता को उजागर कर देगी कि उनके लिए महत्वपूर्ण क्या है, छात्रों का हित या राजनीतिक मंच। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा कांग्रेस के धरने पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया जाना इस बात का प्रमाण है कि विपक्षी खेमे में भी इस मुद्दे को लेकर आंतरिक कलह व खींचतान शुरू हो चुकी है।

प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय

इस प्रकरण के एक और पहलू को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ वीडियो में कई छात्र व अभिभावक यह बयान देते नजर आए कि वे नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में आए थे, लेकिन धरनास्थल पर उपस्थित राजनेताओं ने बातचीत का रुख अन्य दिशाओं में मोड़ दिया। जब किसी छात्र आंदोलन के भीतर से ऐसी आवाज़ें उठने लगें कि मूल मुद्दे से हटकर बातें हो रही हैं, तो यह प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय बनना चाहिए। एक आंदोलन जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा की पवित्रता बचाने के लिए शुरू हुआ था, अगर वह अलग-अलग राजनीतिक नारों और असंबद्ध विवादों में उलझने लगे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों को होगा, जिनके नाम पर यह सब खड़ा किया गया।

 

संसद परिसर के आसपास सुरक्षा को लेकर उपजी चिंता भी एक गंभीर विषय है। किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार बुनियादी है, लेकिन जब भीड़ किसी संवैधानिक संस्थान की सुरक्षा-सीमा के करीब पहुंचने की स्थिति पैदा करे, तो यह प्रशासन और आयोजकों दोनों के लिए एक गंभीर उत्तरदायित्व का प्रश्न बन जाता है। ऐसी स्थितियों में जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भीड़ को संयमित रखे, न कि उसे और उकसाए। लेकिन सपा व कांग्रेस नेता अराजकता को बढ़ावा देते दिखाई दिए। यदि आंदोलन को समर्थन देने वाले दलों ने सुरक्षा जोखिम की आशंका के बावजूद मार्च को प्रोत्साहित करना जारी रखा, तो यह सवाल वाजिब है कि क्या उनके लिए राजनीतिक लाभ, बच्चों की सुरक्षा से ऊपर है।

 यह कोई नई घटना नहीं

अब बात करते हैं मूल मुद्दे की। पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी निस्संदेह एक वास्तविक और गंभीर समस्या है। लेकिन, यह कोई नई घटना नहीं है। बीते वर्षों में विभिन्न राज्यों में, चाहे किसी भी दल का शासन रहा हो, प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अचरज की बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों के शासनकाल में बार-बार भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं, वही आज स्वयं को नैतिकता का सबसे बड़ा प्रहरी सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती, अधीनस्थ सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अनेक विवाद सामने आए। चयन आयोगों में जाति विशेष के लोगों को प्रमुख बनाने पर सवाल खड़े हुए। भाई-भतीजावाद व रिश्वतखोरी के मामले भी सामने आए। सपा आज तक इन आरोपों पर बगलें झांकने लगती है।

 

इसी तरह बिहार में शिक्षक नियुक्तियों और अन्य परीक्षाओं को लेकर प्रश्न उठे। राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा ही हुआ। पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। ऐसे उदाहरणों के बाद जनता छात्र आंदोलन में घुसे विपक्षी दलों से यह पूछने का अधिकार रखती है कि जब वे सत्ता में थे तब ऐसी घटनाओं को रोकने में क्यों विफल रहे। यदि पेपर लीक एक व्यवस्थागत समस्या है, जो अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग सरकारों के दौर में सामने आती रही है, तो इसका समाधान भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर खोजा जाना चाहिए।

 

यूपी में जहां 2017 से पहले की सरकारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं को संगठित माफिया के हवाले कर दिया था और नियुक्तियों को भाई-भतीजावाद तक सीमित कर रखा था, योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक के जरिये इन अनियमितताओं को दूर करने का प्रयास किया, जिसके तहत कड़े कानूनी प्रावधान किए गए। इनमें एक करोड़ रुपये तक जुर्माना व उम्रकैद तक शामिल है। छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना, और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना। यह किसी एक दल की नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है। जब कोई सरकार पेपर लीक के मामलों में जांच एजेंसियों को सक्रिय करती है, दोषियों पर कार्रवाई करती है, और नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रस्ताव लाती है, तो इसे स्वीकार करने के बजाय केवल विरोध के लिए विरोध करना, समस्या के समाधान में बाधा ही उत्पन्न करता है। जनता यह अपेक्षा करती है कि जब कोई गंभीर मुद्दा सामने आए, तो सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की दिशा में काम करें, न कि उसे चुनावी लाभ की दृष्टि से देखें।

 

पेपर लीक प्रकरण देश की शिक्षा व्यवस्था और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। इसे राजनीतिक क्रेडिट की लड़ाई में बदलना छात्रों के साथ अन्याय होगा। ज़रूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अधिक सुरक्षित और अधिक जवाबदेह बनाया जाए सभी राजनीतिक दलों की साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से। जब तक यह मूल उद्देश्य राजनीतिक बयानबाज़ी के शोर में दब कर रह जाएगा, तब तक न तो छात्रों को न्याय मिलेगा और न ही व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार संभव हो पाएगा। सपा और कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वे वास्तव में छात्रों के भविष्य की चिंता में खड़े हैं, या केवल एक अवसर की तलाश में सड़कों पर उतरे हैं। (लेखक श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल में डीन, स्किल फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च हैं)

 

कॉकरोच जनता पार्टी की इन दो शर्तों पर सरकार की सहमति! सामने आई ये बड़ी बात

Cockroach Janta Party Protest: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है। वहीं शुक्रवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सीजेपी के डेलिगेशन सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी दो मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है और बातचीत का दौर अभी जारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और इस मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार जल्द ही प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक करेगी, ताकि बाकी मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ाई जा सके।

जेपी नड्डा से बैठक में CJP ने रखीं चार मांगें

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में संगठन ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नीट परीक्षा विवाद के कारण कथित तौर पर अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।

करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं। इसके अलावा, देश की परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। जेपी नड्डा ने कहा, “बैठक करीब दो घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव हमारे सामने रखे। हमने उनसे कहा है कि कल दोपहर फिर बैठक होगी। तब तक सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

CJP ने  गारंटी की भी मांग की

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उनके अनुसार, केंद्र ने नीट परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है। सौरव दास ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ आगे कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए। साथ ही, सरकार लिखित रूप में यह भरोसा दे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।

वहीं, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने भी कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग पर केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। आशुतोष रंका ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ पहले से दर्ज एफआईआर वापस लेने तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि सरकार लिखित गारंटी दे कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

NEET Paper Leak Row: NTA के 47 अफसर बर्खास्त, पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्श

राजधानी दिल्ली में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, बर्खास्त अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ केस भी दर्ज किया जा सकता है। मुताबिक यह कदम NTA में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के तहत उठाया गया है। NTA में सुधार के लिए जल्द ही और एक्शन लिए जाएंगे। एक दिन पहले सरकार ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था

NTA से 47 अधिकारी हटाए गए

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसी के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने शुक्रवार को 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार एजेंसी के भीतर जवाबदेही तय करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है।

बताया जा रहा है कि आने वाले समय में एनटीए में और भी बड़े सुधार किए जा सकते हैं। यह कार्रवाई एजेंसी में व्यापक बदलाव की योजना का हिस्सा है। हाल के दिनों में परीक्षा पेपर लीक के विवादों के बाद एनटीए पर सवाल उठे थे। अब सरकार एजेंसी का पूरी तरह से पुनर्गठन करने की तैयारी में है, जिसे अगले महीने लागू किया जा सकता है।

एनटीए के आउटसोर्सिंग सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का सबसे बड़ा फोकस राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के आउटसोर्सिंग मॉडल में बदलाव करना है। परीक्षा से जुड़े कई काम बाहरी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं। अब इन प्रक्रियाओं में बदलाव कर निगरानी बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और परीक्षा आयोजित करने में सामने आई कमियों को दूर करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि ये बदलाव एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित हो।

लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली बनाने की तैयारी

पेपर लीक के मामलों को लेकर हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार अब पूरी परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य ऐसी लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की गुंजाइश न रहे। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव किए जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

ये सुधार नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद सामने आए सवालों को देखते हुए किए जा रहे हैं। इस मामले ने देशभर में नाराजगी पैदा की थी और सुरक्षित व भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की मांग तेज हो गई थी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से एनटीए के काम करने का तरीका पूरी तरह बदलेगा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) देशभर में जेईई, नीट, सीयूईटी समेत 15 से 20 राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाएं आयोजित करती है।

CJP का बड़ा दावा: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने मांगा एक दिन का वक्त, कल होगा बड़ा फैसला!

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी का बीते 20 जून से प्रदर्शन जारी है। वहीं इस प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक हुई। इसमें सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP की तरफ से सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।

बैठक के बाद CJP के प्रवक्ताओं ने कहा,’हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। दो घंटे की बातचीत में CJP ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के 5 सुझाव रखे हैं।’

 सरकार के सामने सीजेपी ने रखे तीन मांग

वहीं बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी सबसे बड़ी मांग, यानी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि सबसे पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।

सौरव दास ने कहा कि पार्टी ने उन परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की है, जिन्होंने नीट परीक्षा विवाद के बाद अपने बच्चों को खो दिया। इसके अलावा, जुलाई में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी मामला दर्ज न करने की मांग की गई है। अगर पहले से ऐसे मामले दर्ज हैं, तो उन्हें वापस लेने की भी मांग की गई है।

सीजेपी ने किया ये दावा

सीजेपी का दावा है कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इनमें नीट विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों व युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने की मांग शामिल है। हालांकि, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फैसला लेने के लिए थोड़ा और समय मांगा है। सौरव दास ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार के साथ विस्तार से बातचीत हुई है। सरकार ने इस पर जवाब देने के लिए कल तक का समय मांगा है। अगर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो हमारा आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

जानें केंद्र सरकार ने क्या कहा

केंद्र सरकार ने अभी तक सीजेपी की ओर से बैठक के बाद किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह बैठक नई दिल्ली के विठ्ठल पटेल हाउस में हुई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका शामिल हुए। सीजेपी का कहना है कि वह बातचीत के लिए तब तैयार हुई, जब सरकार ने उसकी दो अहम शर्तों पर सहमति जताई। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना और परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना शामिल है। हालांकि, पार्टी ने साफ कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

शनिवार को फिर होगी बातचीत

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान सीजेपी की मांगों और देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझावों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह बातचीत शनिवार को भी जारी रहेगी। जेपी नड्डा ने कहा, “सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल हमसे मिलने आया था। हमने उनकी सभी बातें ध्यान से सुनीं और कई मुद्दों पर चर्चा की। अब शनिवार दोपहर फिर बैठक होगी, जिसमें बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए। जेपी नड्डा ने कहा, “करीब दो घंटे तक बैठक चली। हमने प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि शनिवार दोपहर फिर मुलाकात होगी। तब तक सरकार इन मांगों और सुझावों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”