Dharmendra Pradhan: धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को भेजी इस्तीफे की चिट्ठी, जानिए क्या है मंत्री के इस्तीफे की संवैधानिक प्रक्रिया

Dharmendra Pradhan Resigns: देश भर में नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे भारी विरोध-प्रदर्शनों और छात्रों के उग्र आंदोलन के बीच अभी-अभी एक बड़ा अपडेट आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि ‘देशविरोधी ताकतों’ को भ्रम फैलाने और इस स्थिति का अनुचित फायदा उठाने से रोकने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने X पर क्या लिखा?

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नीट विवाद को लेकर जिस तरह से अफवाहें और भ्रम फैलाया जा रहा था, उससे छात्रों के भविष्य और देश की व्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि कोई भी अवांछित तत्व या देशविरोधी ताकतें इस स्थिति का फायदा उठाकर माहौल खराब करें, इसलिए उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए पद त्यागने का फैसला किया है।

अगर कोई केंद्रीय मंत्री इस्तीफा देता है, तो आगे क्या होती है प्रक्रिया?

भारतीय संविधान के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी भी मंत्री के इस्तीफे की एक तय संवैधानिक प्रक्रिया होती है। संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, मंत्री अपना त्यागपत्र सीधे प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए या उनके माध्यम से भेजते हैं। प्रधानमंत्री उस इस्तीफे की समीक्षा करते हैं। अगर प्रधानमंत्री उसे स्वीकार करने का निर्णय लेते हैं, तो वे इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन भेजते हैं।

भारत के राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्री का इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है।

मंत्री के हटने के बाद, प्रधानमंत्री या तो उस मंत्रालय का प्रभार खुद अपने पास रख लेते हैं या किसी अन्य कैबिनेट मंत्री को अतिरिक्त प्रभार सौंपते हैं। बाद में कैबिनेट फेरबदल के दौरान नए मंत्री की स्थायी नियुक्ति की जा सकती है।