सिर्फ सोकर जीतिए 13.7 लाख रुपये! क्या आपकी नींद इतनी अच्छी है कि आप बन सकते हैं विजेता?

क्या आपने कभी सोचा है कि आराम से सोना भी आपको लाखों रुपये दिला सकता है? जापान की एक मैट्रेस कंपनी ने कुछ ऐसा ही अनोखा कॉम्पिटिशन आयोजित करने का फैसला किया है। इसमें प्रतिभागियों को किसी खेल या परीक्षा में नहीं, बल्कि अच्छी नींद लेकर एक-दूसरे से मुकाबला करना होगा। खास बात यह है कि जीतने वाले को लाखों रुपये का कैश प्राइज भी मिलेगा।

सिर्फ सोना नहीं, नींद की क्वालिटी भी होगी मायने

यह अनोखी प्रतियोगिता 5 अक्टूबर 2026 को जापान के टोक्यो में आयोजित होगी। कार्यक्रम Share Green Minami Aoyama में होगा। प्रतियोगिता के विजेता को 2.22 मिलियन येन, यानी करीब 13.76 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।

90 मिनट तक बिस्तर पर दिखानी होगी बेहतरीन नींद

प्रतिभागियों को सोने के लिए कुल 90 मिनट का समय मिलेगा। इस दौरान सिर्फ जल्दी सो जाना ही काफी नहीं होगा। आयोजक यह भी देखेंगे कि प्रतियोगी कितनी जल्दी सोता है, उसकी नींद कितनी गहरी होती है और पूरी अवधि के दौरान उसकी नींद कितनी स्थिर रहती है। इसके लिए खास तरह के स्लीप-ट्रैकिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जाएगा, जो नींद से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

सोने से पहले करना होगा कुछ अलग

प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को सीधे बिस्तर पर जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें पहले कुछ एक्सरसाइज पूरी करनी होंगी। इसके बाद हर प्रतियोगी को सोने के लिए एक रैंडम स्लीप आइटम दिया जाएगा। यानी प्रतिभागियों को पहले से यह तय करने का मौका नहीं मिलेगा कि वे किस चीज के साथ या किस तरह सोएंगे।

पूरी रात जागकर आने की नहीं होगी इजाजत

इस प्रतियोगिता का मकसद सिर्फ किसी को थकाकर सुलाना नहीं है। आयोजक चाहते हैं कि प्रतियोगियों की नेचुरल स्लीप क्वालिटी को परखा जाए। इसलिए प्रतिभागियों को प्रतियोगिता से पहले जानबूझकर नींद पूरी न करने या पूरी रात जागने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा नींद लाने के लिए स्लीपिंग पिल्स या किसी दवा का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा। प्रतियोगिता के दौरान आयोजक कुछ अप्रत्याशित व्यवधान भी पैदा कर सकते हैं, ताकि यह देखा जा सके कि नींद कितनी स्थिर रहती है।

एक नहीं, कई तरह के मिलेंगे अवॉर्ड

इस अनोखी प्रतियोगिता में सिर्फ मुख्य विजेता को ही सम्मान नहीं मिलेगा। अलग-अलग तरह की नींद से जुड़े प्रदर्शन के लिए भी विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे। इनमें Deep Sleep Dive Award के अलावा अलग-अलग और असामान्य sleeping positions के लिए भी पुरस्कार शामिल हैं। यानी प्रतियोगिता में किस तरह सोते हैं, यह भी आपके लिए खास पहचान बन सकता है।

करीब 60 लोग ले सकते हैं हिस्सा

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए आवेदन निशुल्क है। आवेदन की अंतिम तारीख 16 सितंबर थी। आयोजकों के मुताबिक तीन अलग-अलग सेशन में करीब 20-20 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।

आखिर क्यों हो रहा है ऐसा कॉम्पिटिशन?

इस प्रतियोगिता के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान खींचने की कोशिश भी है। आयोजक जापान में नींद की कमी और बेहतर आराम की जरूरत को लेकर जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं।

15-15 करोड़ के मकान, लेकिन सड़कें सुनसान! NRI ने दिखाई अमेरिका की वो सच्चाई जिसे देखकर चौंक गए लोग

थाईलैंड और वियतनाम ही नहीं, ये अनोखा देश भी बना सकते हैं आपकी अगली ट्रिप यादगार!

दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने का प्लान बनाते समय थाईलैंड लंबे समय से लोगों की पसंद रहा है। खूबसूरत समुद्र तट, नाइटलाइफ, शॉपिंग और कई तरह के टूरिस्ट स्पॉट की वजह से यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन अब ट्रैवलर्स की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है और वियतनाम भी तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

वियतनाम की खास बात यह है कि यहां घूमने वालों को खूबसूरत प्राकृतिक नजारे, ऐतिहासिक जगहें, लोकल कल्चर और अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस एक साथ मिल जाता है। साथ ही, बजट में यात्रा करने वालों के लिए भी यह देश काफी अट्रैक्टिव नजर आता है। यही वजह है कि कई ट्रैवलर अब अगली छुट्टी के लिए थाईलैंड के बजाय वियतनाम को चुनने के बारे में सोच रहे हैं।

थाईलैंड और वियतनाम की तुलना करने के तरीके:

1. कीमत और ट्रिप का खर्च

बजट की बात करें तो वियतनाम थाईलैंड के मुकाबले सस्ता ऑप्शन माना जाता है। होटल, लोकल खाना, टैक्सी और रोजकी छोटी जरूरतों पर यहां कम पैसे खर्च हो सकते हैं। बैकपैकिंग या कम बजट में घूमने वाले ट्रैवलर के लिए वियतनाम अट्रैक्टिव है। लेकिन भारत से जाने वाले ट्रैवलर का पूरा बजट सिर्फ वहां के खर्च पर डिपेंड नहीं करता। फ्लाइट, वीजा, होटल और घूमने वाली जगहों के टिकट को मिलाकर कुल खर्च देखना ज्यादा सही रहेगा।

2. घूमने की जगहों में किसका पलड़ा भारी?

डेस्टिनेशन के मामले में किसी एक देश को बेहतर कहना सही नहीं है, क्योंकि दोनों की अपनी अलग खासियत है। थाईलैंड खूबसूरत समुद्र तटों, द्वीपों, रिसॉर्ट्स और नाइटलाइफ के लिए जाना जाता है। बैंकॉक जैसे बड़े शहरों में शॉपिंग, मनोरंजन और घूमने के कई ऑप्शन मिलते हैं। दूसरी तरफ, वियतनाम में पहाड़, समुद्र, पुराने शहर, नदियां और ग्रामीण इलाकों का अलग एक्सपीरियंस मिलता है। हनोई, सापा, हा लॉन्ग बे और मेकांग डेल्टा जैसी जगहें उन लोगों को पसंद आ सकती हैं जो नेचर के साथ हिस्ट्री और लोकल कल्चर को भी करीब से देखना चाहते हैं।

3. खाने के मामले में कौन बेहतर?

खाने की पसंद पूरी तरह व्यक्ति पर डिपेंड करती है, क्योंकि दोनों देशों का खाना अपने-अपने तरीके से खास है। थाईलैंड में पैड थाई, टॉम यम, करी और कई तरह का स्ट्रीट फूड आसानी से मिल जाता है। वहीं वियतनाम का फो, बान्ह मी, बन चा और वियतनामी कॉफी काफी लोकप्रिय हैं। थाई खाना ज्यादा मसालेदार और तीखा होता है, जबकि वियतनामी खाने में ताजी सब्जियों, हर्ब्स और हल्के स्वाद का इस्तेमाल ज्यादा देखने को मिलता है। आप स्ट्रीट फूड ट्राय करना पसंद करते हैं, तो दोनों देशों में आपके लिए काफी कुछ नया हो सकता है।

4. इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी

टूरिस्टों के लिए घूमने की फैसिलिटी के मामले में थाईलैंड को काफी एक्सपीरियंस हासिल है। बैंकॉक जैसे शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, होटल, टैक्सी और टूरिस्ट सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। वियतनाम में भी पिछले कुछ वर्षों में टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बेहतर हुआ है, लेकिन कुछ जगहों पर ट्रैफिक और लोकल ट्रांसपोर्ट नए ट्रैवलर के लिए थोड़ा अलग एक्सपीरियंस हो सकता है। दोनों देशों में सड़क पार करते समय, बाइक वाले इलाकों में और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सामान संभालकर रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।

5. वीजा और इमिग्रेशन

फॉरेन ट्रिप की प्लानिंग में वीजा सबसे जरूरी चीजों में से एक है और इसके रूल समय के साथ बदलते रहते हैं। 2026 में भारतीय ट्रैवलर के लिए थाईलैंड की एंट्री व्यवस्था आसान रही है, जबकि वियतनाम जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट होल्डर्स को ई-वीजा की जरूरत पड़ती है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले दोनों देशों की मौजूदा वीजा और एंट्री शर्तों को जरूर चेक कर लेना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व एशिया में घूमने के लिए हर देश की अपनी अलग खासियत है। किसी को समुद्र तट और आइलैंड पसंद आ सकते हैं, तो किसी को इतिहास, संस्कृति, पहाड़ या मॉडर्न शहर ज्यादा अट्रैक्ट कर सकते हैं। इस पूरे रीजन में टूरिस्म को आसान, बेहतर और ज्यादा टिकाऊ बनाने पर भी लगातार काम हो रहा है। इसलिए किसी एक देश को हर ट्रैवलर के लिए सबसे बेहतर कहना सही नहीं होगा। आप पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने जा रहे हैं, तो अपने बजट, पसंद और ट्रैवल के मकसद के हिसाब से डेस्टिनेशन चुनना ज्यादा अच्छा रहेगा। सही जगह चुनकर आपकी छुट्टी को सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि एक नया एक्सपीरियंस बना सकता है।

गाणपत्य मीमांसा और आधुनिक जीवनशैली

मुद्गल पुराण में गणेश के आठ अवतारों का वर्णन मिलता है, जो किसी असुर को मारने के लिए नहीं, बल्कि मानव मन के भीतर छिपे आठ मानसिक विकारों का शमन करने के लिए अवतरित हुए थे। वक्रतुण्ड, मत्सरासुर अर्थात मत्सर, ईर्ष्या के शमन हेतु अवतरित हुए थे, यह सोशल मीडिया पर दूसरों की प्रगति देखकर होने वाली हीनभावना के समान है।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी का महापर्व केवल एक धार्मिक कर्मकांड या उत्सव नहीं है, यह मानव चेतना को विक्षेप से विवेकानंद की ओर ले जाने वाली एक अत्यंत वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक उपचार पद्धति है। महा गणपति का संपूर्ण विग्रह, उनके सम्मुख की जाने वाली साधना और उनसे जुड़े शास्त्र वचन मूलतः स्थिर प्रज्ञा और मानसिक स्वास्थ्य के वे कालजयी सूत्र हैं, जिनकी आज की खंडित जीवनशैली को सबसे अधिक आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारी चित्त की वृत्तियों से है। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र के प्रारंभ में ही योग की परिभाषा देते हुए स्पष्ट किया है-

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।

-पातंजल योगसूत्र, समाधिपाद, सूत्र 2

चित्त की चंचल वृत्तियों का निरोध ही योग है, और इन वृत्तियों के नियमन के जो अधिष्ठाता देव हैं, वही गणपति हैं। उपनिषदों की दृष्टि में गणेश कोई बाह्य सत्ता नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अवस्थित मूलाधार चक्र की नियामक ऊर्जा हैं। गणेश अथर्वशीर्ष, जो माण्डूक्य उपनिषद के अंतर्गत आता है, में ऋषि इस सत्य को निर्विवाद रूप से स्थापित करते हैं-

त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्। त्वं शक्तित्रयात्मकः।

त्वाम्योगिनो ध्यायन्ति नित्यम्।।

-गणेशअथर्वशीर्ष, मंत्र 6

मनोविज्ञान की दृष्टि से मूलाधार चक्र मानव चेतना का वह आधारभूत केंद्र है, जो व्यक्ति को मानसिक सुरक्षा, जीवन के प्रति विश्वास और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है। जब किसी व्यक्ति का मूलाधार चक्र विक्षुब्ध होता है, तभी उसके भीतर भय, असुरक्षा की भावना और अनिश्चितता का जन्म होता है, जो आगे चलकर गंभीर अवसाद का रूप ले लेता है। गणपति का नित्य मूलाधार में स्थित होना यह सिद्ध करता है कि वे मानव मस्तिष्क और स्नायु तंत्र को स्थिरता प्रदान करने वाले आदि तत्व हैं। जो साधक गणेश तत्व का अनुसंधान करता है, उसका चित्त स्वतः ही बाह्य झंझावातों से अप्रभावित रहकर तटस्थ हो जाता है।

प्राचीन ग्रन्थों में अंकित गजास्य विग्रह अर्थात शारीरिक प्रतीकों का समीचीन अध्ययन से वहां आधुनिक जीवन प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के अंतर्निहित सूत्र प्रदीप्त हो उठते हैं। गणेश का मस्तक हाथी का है और धड़ मनुष्य का है, जो यह दर्शाता है कि श्रेष्ठ मानसिक स्वास्थ्य के लिए बौद्धिक विशालता और जैव संतुलन अनिवार्य हैं। आधुनिक युग की सबसे बड़ी मानसिक समस्या यह है कि लोग सुनना नहीं चाहते, हर व्यक्ति केवल अपनी बात थोपना चाहता है। इसके विपरीत, गणेश के सूप जैसे विशाल कान उत्कृष्ट श्रवण क्षमता के प्रतीक हैं। सनातन मनीषा कहती है कि ज्ञान और मानसिक शांति का प्रारंभ श्रवण से होता है। उपनिषदों में ऋषि प्रार्थना करते हैं-

भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः।

अर्थात- हे देवों! हम कानों से सदा भद्र अर्थात कल्याणकारी वचन ही सुनें।

जो व्यक्ति दूसरों को धैर्यपूर्वक सुनता है, उसका आधा मानसिक तनाव स्वतः ही समाप्त हो जाता है क्योंकि वह प्रतिक्रिया देने में जल्दबाजी नहीं करता। हाथी की आंखें अत्यंत छोटी होती हैं, किंतु उनकी दृष्टि अत्यंत दूरगामी और एकाग्र होती है। यह प्रतीक आधुनिक मनुष्य को सूक्ष्म विश्लेषण की सीख देता है। आज सोशल मीडिया के स्क्रॉलिंग कल्चर ने हमारी एकाग्रता की अवधि को न्यूनतम कर दिया है। गणेश जी की आंखें हमें सिखाती हैं कि बाह्य चकाचौंध से हटकर भीतर की ओर देखना और किसी भी परिस्थिति का सतही नहीं, बल्कि गहरा और एकाग्र अवलोकन करना ही मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

गणेश की वक्रतुण्ड अर्थात लम्बी और लचीली सूंड अत्यंत संवेदनशील और शक्तिशाली होती है। वह इतनी सूक्ष्म है कि जमीन पर गिरे छोटे से सिक्के को भी उठा सकती है और इतनी बलशाली है कि विशाल वृक्ष को भी उखाड़ सकती है। मानसिक स्वास्थ्य की भाषा में इसे भावनात्मक लचीलापन कहा जाता है। आधुनिक जीवनशैली में जो व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाता, वह मानसिक रूप से टूट जाता है। गणेश की सूंड हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में कब कोमल होना है और संकट के समय कब सुदृढ़ और कठोर हो जाना है।

लम्बोदर अर्थात विशाल पेट इस बात का दार्शनिक संकेत है कि संसार में मिलने वाली प्रशंसा और आलोचना, सुख और दुःख, सूचना और अपवाह, इन सबको पचाने की क्षमता मनुष्य के भीतर होनी चाहिए। आज के दौर में लोग छोटी सी आलोचना या असफलता को पचा नहीं पाते और आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। लम्बोदर का संदेश है- जीवन के हर कड़वे और मीठे सच को अपने भीतर समाहित करो, विचलित मत हो।

मनुष्य के जीवन में आने वाले संकट, असफलताएं और मानसिक तनाव ही वस्तुतः विघ्न हैं। सनातन मनीषा ने इन विघ्नों को केवल बाह्य बाधाएं नहीं माना, बल्कि उन्हें आंतरिक अशुद्धियों का प्रकटीकरण स्वीकार किया है। मुद्गल पुराण में गणेश के आठ अवतारों का वर्णन मिलता है, जो किसी असुर को मारने के लिए नहीं, बल्कि मानव मन के भीतर छिपे आठ मानसिक विकारों का शमन करने के लिए अवतरित हुए थे।

वक्रतुण्ड, मत्सरासुर अर्थात मत्सर, ईर्ष्या के शमन हेतु अवतरित हुए थे, यह सोशल मीडिया पर दूसरों की प्रगति देखकर होने वाली हीनभावना के समान है।

एकदन्त, मदासुर, मद, अहंकार के मर्दन के लिए अवतरित हुए थे, अपनी उपलब्धियों या पद-प्रतिष्ठा का अतिअभिमान जो पतन का कारण बनता है।

महोदर, मोहासुर अर्थात मोह,आसक्ति के मर्दन हेतु अवतरित हुए थे, जो किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति से अत्यधिक चिपकाव जो अवसाद लाता है।

गजानन, लोभासुर (लोभ, लालच) के शमन के लिए अवतरित हुए थे, जो अंतहीन भौतिक इच्छाएं और उपभोक्तावादी अंधी दौड़ है।

लम्बोदर, क्रोधासुर (क्रोध, गुस्सा) के दमन के लिए अवतरित हुए थे, यह है- आवेश में आकर विवेक खो देना और रिश्तों को नष्ट करना।

विकट का अवतरण कामासुर (काम, वासना) के दमन के लिए हुआ था, जो वासनाओं की अनियंत्रित ललक जो मानसिक एकाग्रता को भंग करती है।

विघ्नराज का अवतरण ममतसुर (ममता, मेरा-तेरा का भाव) के शसन के लिए हुआ था, जैसे- संकीर्ण दायरों में जीना और व्यापक समाज से कट जाना।

धूम्रवर्ण का अवतार अभिमानासुर (अभिमान, गर्व) आत्म मुग्धता के नाश के लिए हुआ था, जो व्यक्ति को सत्य से दूर ले जाती है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर विघ्नहर्ता की आराधना करते समय वास्तव में हम अपने भीतर के इन आठ असुरों को पहचानने और उनके शमन का संकल्प लेते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण अर्जुन को मानसिक व्याधियों से मुक्ति का जो मार्ग बताते हैं, वही मार्ग साक्षात गणपति का स्वरूप है-

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते।।

क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः।

स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।

-श्रीमद्भगवद्गीता 2/62-63

विषयों का निरंतर ध्यान करने से आसक्ति, काम, क्रोध और अंततः बुद्धि का नाश होता है। गणेश बुद्धि विधाता हैं, अर्थात वे बुद्धिनाश के इस चक्र को तोड़कर मनुष्य को व्यवसायात्मिका बुद्धि (निर्णयात्मक और स्थिर बुद्धि) प्रदान करते हैं।

ऋग्वेद का यह मंत्र चित्त की शुचिता और कल्याणकारी विचारों के आमंत्रण का उद्घोष करता है-

आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।

-ऋग्वेद 1/89/1

अर्थात- हमारे पास चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आएं जो किसी से दबे न हों और जो उन्नति करने वाले हों। जब मनुष्य डिजिटल स्क्रीन की आभासी दुनिया से कटकर सामूहिक उत्सव, कीर्तन और ध्यान में लीन होता है, तो उसके मस्तिष्क को वह आवश्यक विश्राम मिलता है जिसकी खोज में वह मनोचिकित्सकों के चक्कर काटता रहता है। उत्सव का उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि मन का रंजन (परिशोधन) होना चाहिए।

गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है। एक अत्यंत विशालकाय और बुद्धि के अधिष्ठाता देव का एक तुच्छ और छोटे से जीव को अपना वाहन चुनना, आधुनिक स्टेटस सिंबल और अहंकारवादी जीवनशैली पर सबसे करारा प्रहार है। आज के मनुष्य का मानसिक तनाव इस बात से तय होता है कि उसके पास कौन सी गाड़ी है, उसका मकान कितना बड़ा है और उसका समाज में क्या रूतबा है। वह अपनी पहचान बाह्य वस्तुओं से जोड़ लेता है, और यही उसकी मानसिक गुलामी की शुरुआत है। गणेश का मूषक वाहन सिखाता है कि विनम्रता ही मानसिक स्वास्थ्य का परम रक्षक है। जिसके भीतर अहंकार नहीं है, जो सबसे छोटे और उपेक्षित जीव को भी सम्मान देना जानता है, उसका मानसिक संतुलन कभी डगमगा नहीं सकता।

चूहा मूलतः मानव मन की चंचलता और इच्छाओं के कुतरने के स्वभाव का भी प्रतीक है। यदि मन की इस चंचलता को अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो यह जीवन के सारे सुख, चैन को कुतर डालती है। गणेश (विवेक) का उस पर बैठना यह दर्शाता है कि जब व्यक्ति के भीतर विवेक जाग्रत होता है, तो मन की चंचलता स्वतः ही उसके नियंत्रण में आ जाती है और वह उसका सही दिशा में उपयोग करना सीख जाता है।

गणेश चतुर्थी केवल बप्पा की मूर्ति लाकर नाच-गाकर विसर्जित कर देने का नाम मात्र नहीं है। यह अपने भीतर विघ्नहर्ता विवेक को स्थापित करने का महापर्व है। इस उत्सव पर समूचे वैश्विक समाज को अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए गणेश से सम्बंधित सूत्रों को जीवन में उतारना होगा। इसके लिए प्रतिदिन कम से कम कुछ समय अपनों को, परिवार को और मित्रों को बिना किसी पूर्वाग्रह के धैर्यपूर्वक सुनने के लिए समर्पित करें। प्रतिदिन कुछ क्षण शांत बैठकर गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ या ओंकार का ध्यान करें, ताकि सूचनाओं के बोझ से दबे मस्तिष्क को शांति मिल सके। मूर्ति विसर्जन के साथ-साथ अपने भीतर के कम से कम एक विकार अर्थात क्रोध, ईर्ष्या या सोशल मीडिया की लत को सदा के लिए विसर्जित करने का दृढ़ संकल्प लें।

समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति करुणा और विनम्रता का भाव रखें, क्योंकि महा गणपति वहीं वास करते हैं। जब मनुष्य का मानस स्वस्थ होगा, तभी एक स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। आइए, इस गणेश चतुर्थी पर हम अपनी बुद्धि और चित्त को महा गणपति के चरणों में अर्पित करते हुए प्रार्थना करें-सच्चिदानन्दरूपाय परब्रह्मणे नमः, सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलोगजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः।।

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ ने लंदन कॉन्सर्ट में किया बड़ा ऐलान, नवंबर में अहमदाबाद स्टेडियम में सिंगर करेंगे कॉन्सर्ट

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ अब अहमदाबाद आ रहे हैं। अपने ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ के तहत पंजाबी सिंगर-एक्टर ने शनिवार 12 सितंबर को लंदन के मशहूर वेम्बली स्टेडियम में एक जबरदस्त कॉन्सर्ट से दर्शकों का मनोरंजन किया। शो के दौरान दिलजीत ने एक चौंकाने वाला ऐलान किया, जिससे उनके फैन्स बहुत खुश हुए। उन्होंने बताया कि वह अगली बार अहमदाबाद में परफॉर्म करेंगे।

दिलजीत ने भारत के सबसे बड़े स्टेडियम अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम के बारे में बात की। उन्होंने वहां कोल्डप्ले (Coldplay) के सफल कॉन्सर्ट को भी याद किया। दिलजीत ने कहा, “सबसे बड़ा स्टेडियम भारत में है – नरेंद्र मोदी स्टेडियम। एक गोरे ग्रुप (कोल्डप्ले) ने वहां सारे टिकट बेच दिए थे। शो हाउसफुल रहा था। उनके लिए सम्मान है, बहुत-बहुत बधाई। भारत में स्टेडियम हो और वहां कोई पंजाबी न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता।”

बाद में उन्होंने अहमदाबाद कॉन्सर्ट की तारीख कन्फर्म की और वेम्बली में मौजूद भीड़ से कहा, “हम 21 नवंबर 2026 को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शो करेंगे,” जिसके बाद फैन्स खुशी से झूम उठे। यह ऐलान 2024 में उनके सफल ‘दिल-लुमिनाटी इंडिया टूर’ के बाद अहमदाबाद में दिलजीत की वापसी का संकेत है। नवंबर के शो के लिए टिकट कीमत और बुकिंग की जानकारी अभी घोषित की जानी बाकी है।

इस बीच दिलजीत दोसांझ ने शनिवार को लंदन के वेम्बली स्टेडियम में इतिहास रच दिया। वह इस मशहूर वेन्यू पर हेडलाइन करने वाले पहले पंजाबी सिंगर बन गए। “पंजाबी आ गए वेम्बली ओये!” के साथ अपने शो की शुरुआत करते हुए, दिलजीत ने खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद लोगों से कहा कि यह पल “इतिहास की किताबों में दर्ज हो जाएगा।” दो घंटे से ज़्यादा चले इस कॉन्सर्ट में उन्होंने G.O.A.T., Lover, Hass Hass और Born to Shine जैसे हिट गाने गाए।

90,000 लोगों की क्षमता वाले इस वेन्यू में अलग-अलग बैकग्राउंड के फैन्स एक साथ गाते और नाचते दिखे। दिलजीत ने दर्शकों से बातचीत करते हुए कुछ फैन्स को, जिनमें बच्चे और एक बुज़ुर्ग महिला भी शामिल थीं, स्टेज पर भी बुलाया। कॉन्सर्ट का एंड ‘मैं हूं पंजाबी’ गाने और आतिशबाजी के साथ हुआ।

Hunkkaar The Roar Trailer: बाप जी के खिलाफ खड़ी हुईं अनीत पड्डा, ‘हुंकार द रोअर’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज

Hunkkaar The Roar Trailer: एक आरोप….. जब जवान लड़की, जो चुप रहने से इंकार कर देती है और एक ताकतवर दुनिया जो कहानी को अपने हिसाब से मोड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देती है। जियोहॉटस्टार ने आज ‘हुंकार द रोअर’ का ट्रेलर जारी किया है। यह कहानी ‘मीनू’ की है—एक नए दौर की ऐसी नायिका जो किसी पीड़ित महिला वाली छवि में फिट होने से साफ मना कर देती है। निडर, पेचीदा और अप्रत्याशित, मीनू के फैसले दर्शकों को खुद से सवाल पूछने पर मजबूर करते हैं कि वे किस पर विश्वास करते हैं और क्या उनका यह विश्वास बदल सकता है।

ट्रेलर दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां सच की राह आसान नहीं है, बल्कि यह पावर, परसेप्शन और धारणाओं के बीच फंसी एक लड़ाई है। पुलिस जांच, कोर्टरूम और मीडिया ट्रायल तक फैली यह कहानी हर मोड़ पर एक नया सच और नया ड्रामा सामने लाती है। इस सीरीज़ में अनीत पड्डा, फातिमा शेक, मोहम्मद जीशान अय्यूब, अर्जुन माथुर, रघुबीर यादव और राम कपूर जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे। करण डी कपाड़िया, नित्या मेहरा और हीराज़ मारफतिया द्वारा निर्देशित इस शो के क्रिएटर करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा हैं।

जिओस्टार (स्ट्रीमिंग, टीवी और स्टूडियो) के हेड – हिंदी व इंग्लिश एंटरटेनमेंट बिजनेस, आलोक जैन ने कहा: “ऐसी कहानियां जो मानवीय अनुभवों से जुड़ी होती हैं और पूरी ईमानदारी के साथ बताई जाती हैं, वे मनोरंजन से परे जाकर गहरी बातचीत की शुरुआत करती हैं। ‘हुंकार: द रोअर’ एक ऐसी ही कहानी है, एक ऐसी पेचीदा कहानी जो एक युवा लड़की के सफर के जरिए पावर, विश्वास और सामाजिक सोच पर सवाल उठाती है। हमें विश्वास है कि यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी।”

एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर प्रियंका चोपड़ा जोनास ने कहा- “एक निर्माता के तौर पर मैं हमेशा ऐसी कहानियों का समर्थन करना चाहती हूं, जिनका कोई सामाजिक संदेश हो। ‘हुंकार द रोअर’ बिल्कुल वैसी ही है। मुझे नित्या और करण के विजन पर पूरा भरोसा है। मेरी प्रोडक्शन कंपनी ‘पर्पल पेबल पिक्चर्स’ का मुख्य मकसद ही उन फिल्म मेकर्स को मंच देना है, जो एक निडर सोच रखते हैं। मुझे इस पूरी टीम पर गर्व है और जियोहॉटस्टार, बिरला स्टूडियोज व एप्लॉज़ के साथ इसे पेश करते हुए बेहद खुशी हो रही है।”

मीनू रावत का किरदार निभा रहीं अनीत पड्डा ने कहा- “मीनू इस बात से तय नहीं होती कि उसके साथ क्या हुआ, बल्कि इससे तय होती है कि वह उसके बाद क्या रास्ता चुनती है। वह युवा है, पेचीदा है और उसे समझना हमेशा आसान नहीं होता, यही बात उसे असली बनाती है। उसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह चुप रहने से इंकार कर देती है।”

एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर दीपक सहगल ने कहा- “हुंकार: द रोअर उस हिम्मत की कहानी है जो दुनिया के चुप रहने के दबाव के बावजूद बोलने के लिए चाहिए होती है। आज की युवा पीढ़ी जो अपनी बात रखने से नहीं डरती, उसके लिए मीनू का सफर बेहद प्रासंगिक है।”

एसीपी जसलीन सिंह सोपनी के किरदार पर फातिमा शेख ने कहा- “जसलीन एक ऐसे केस की जांच करती है जहां कोई आसान जवाब नहीं हैं। पावर, प्रभाव और पब्लिक प्रेशर के बीच वह सच की तलाश करती है। यह किरदार मेरे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और खास रहा।”

भालेराव का किरदार निभा रहे मोहम्मद जीशान अय्यूब ने कहा- “भालेराव एक अंडरडॉग है। जब आपके खिलाफ पूरी ताकतवर व्यवस्था खड़ी हो, तब भी कानून के लिए लड़ना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वह इस कहानी की आत्मा है।” देखिए ‘हुंकार द रोअर’, 25 सितंबर से केवल जियोहॉटस्टार पर।

BB 20 Final List: मैरीकॉम, आम्रपाली से लेकर पंचायत के ‘दामाद जी’ तक… जानें इस बार बिग बॉस के घर का कौन-कौन बढ़ाएगा पारा

Bigg Boss 20: बिग बॉस 20 का आखिरकार इंतजार खत्म हुआ। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के रूप में एक बार फिर शो में वापसी की है। प्रीमियर एपिसोड में ही कंटेस्टेंट्स की एंट्री के साथ माहौल काफी रोमांचक नजर आया। शो के ग्रैंड प्रीमियर में सलमान खान काउबॉय लुक में नजर आए और उन्होंने अपने डांस से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। फैंस बेसब्री से इस सीजन का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, शो में शामिल होने वाले सभी कंटेस्टेंट्स की फाइनल लिस्ट भी सामने आ गई है। आइए जानते हैं इस बार बिग बॉस के घर में कौन-कौन से कंटेस्टेंट्स शामिल होने वाले हैं।

कनिका मान

‘बिग बॉस 20’ में सबसे पहले कनिका मान ने एंट्री ली। सलमान ने पानीपत की कनिका के काम की तारीफ की और बताया कि उनकी मां सलमा खान भी कनिका की फैन हैं। इसके बाद कनिका ने बिग बॉस के घर में कदम रखा और घर का जायजा लिया। बिग बॉस ने उन्हें कन्फेशन रूम में बुलाकर एक खास जिम्मेदारी दी। कनिका को ‘पपेट मास्टर’ बनाया गया है, जिसके तहत उन्हें घर में आने वाले कंटेस्टेंट्स पर एक खास ताकत इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

आसिफ खान

बिग बॉस 20 के घर में दूसरे प्रतियोगी के तौर पर अभिनेता आसिफ खान ने एंट्री ली। आसिफ खान को वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ और ‘पंचायत’ सीरीज से पहचान मिली थी। शो में सलमान खान ने उनका स्वागत किया। इस दौरान आसिफ ने बताया कि वह फिल्म ‘रेडी’ में सलमान खान के साथ जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। अपनी जिंदगी के इस सफर को याद करते हुए आसिफ भावुक हो गए और उन्होंने अपनी मां के लिए भी खास संदेश दिया।

काजी अबरार

बिग बॉस 20 के घर में तीसरे कंटेस्टेंट के तौर पर सिंगर काजी अबरार ने कदम रखा। उन्हें ‘अफगान जलेबी’ गाने के लिए जाना जाता है। शो में सलमान खान ने काजी का स्वागत किया, जिसके बाद उन्होंने बताया कि कई साल पहले कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में वह सलमान के साथ मंच शेयर कर चुके हैं। घर में एंट्री के बाद काजी काफी उत्साहित नजर आए और लगातार अपनी बात रखते रहे।

ईशा रिखी

बिग बॉस 20 में पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने चौथी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। शो में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और पति से अलगाव को लेकर खुलकर बात की। ईशा ने बिना नाम लिए बताया कि वह कभी अपने पति को हरे-भरे जंगल की तरह समझती थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि इस रिश्ते में उनकी खुद की पहचान कहीं पीछे छूट रही है। इस बारे में बात करते हुए वह भावुक भी हो गईं। सलमान खान ने जब उनसे पति का नाम बताने के बारे में पूछा तो ईशा ने साफ कहा कि वह उनका नाम नहीं लेंगी, क्योंकि वह उनकी जिंदगी का बीता हुआ हिस्सा है।

आम्रपाली दुबे

बिग बॉस 20 के घर में भोजपुरी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री आम्रपाली दुबे ने पांचवीं कंटेस्टेंट के रूप में एंट्री की। शो में पहुंचकर उन्होंने सलमान खान से बातचीत की और कहा कि वह यहां दर्शकों को अपना नया और बदला हुआ अंदाज दिखाने के लिए तैयार हैं। आम्रपाली के स्वागत के लिए भोजपुरी अभिनेता निरहुआ भी शो में पहुंचे।

रोहेड खान

बिग बॉस 20 में ऑस्ट्रिया के अभिनेता और मॉडल रोहेड खान ने भी बतौर कंटेस्टेंट एंट्री ली। रोहेड इससे पहले सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में उनके साथ नजर आ चुके हैं। वह बॉलीवुड के अलावा यूरोप और इंटरनेशनल सिनेमा में भी काम कर चुके हैं। ऑस्ट्रिया में जन्मे रोहेड जर्मन, अंग्रेजी, दारी, फारसी और हिंदी भाषाएं बोलते हैं।

लव गिल और मैरी कॉम

बिग बॉस 20 में पंजाबी अभिनेत्री लव गिल और पूर्व बॉक्सर मैरी कॉम ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। शो में मैरी कॉम नीली ड्रेस में नजर आईं और उन्होंने सलमान खान के साथ बातचीत करते हुए अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। इस दौरान सलमान ने उनके लिए अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का एक खास संदेश भी सुनाया। बता दें कि प्रियंका चोपड़ा फिल्म ‘मैरी कॉम’ में बॉक्सर मैरी कॉम का किरदार निभा चुकी हैं।

रैपर युंग DSA

बिग बॉस 20 में 22 साल के रैपर युंग DSA ने भी एंट्री ली। सलमान खान से बातचीत के दौरान युंग ने बताया कि वह यरवदा से आते हैं। यह सुनकर सलमान ने मजाकिया अंदाज में कहा, “मुझे ऐसे मत डरा।” इसके बाद सलमान ने युंग से पूछा कि क्या उनका किसी गैंग से कोई संबंध है। रैपर ने साफ किया कि वह किसी भी गैंग का हिस्सा नहीं हैं।

स्काउट

बिग बॉस 20 में गेमिंग की दुनिया के मशहूर चेहरा स्काउट ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। सलमान खान ने उनका परिचय कराते हुए उनसे उनके नाम से जुड़ी कहानी पूछी। स्काउट का असली नाम तन्मय है और सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है, इंस्टाग्राम पर उन्हें 4.4 मिलियन लोग फॉलो करते हैं।

सैय्यद अरिश्फा खान

सोशल मीडिया स्टार सैय्यद अरिश्फा खान ने भी कदम रखा। शो में सलमान खान से बातचीत के दौरान अरिश्फा ने बताया कि सोशल मीडिया पर उनके 29 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनकी इतनी बड़ी फैन फॉलोइंग सुनकर सलमान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें भी अरिश्फा से ज्यादा फॉलोअर्स हासिल करने का तरीका सीखना चाहिए। दोनों के बीच इस बातचीत ने शो में हल्का-फुल्का माहौल बना दिया।

अमन गांधी

टीवी अभिनेता अमन गांधी ने भी बिग बॉस 20 के घर में कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। सलमान खान ने उनका परिचय कराते हुए उन्हें टीवी का जाना-पहचाना और सफल चेहरा बताया। अमन को मशहूर धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में रितिक विरानी के किरदार से खास पहचान मिली थी। अब बिग बॉस के घर में उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होने वाली है।

उदिति सिंह

अभिनेत्री उदिति सिंह ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। उदिति ने बताया कि लोग अक्सर उनकी तुलना बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर से करते हैं, इसी बात पर सलमान ने मजाकिया अंदाज में उन्हें ‘करीना’ कहकर बुलाया। उदिति इससे पहले हिमेश रेशमिया के साथ ‘सुरूर’ में भी नजर आ चुकी हैं।

ऋति तिवारी

बिग बॉस 20 में ऋति तिवारी ने कंटेस्टेंट के तौर पर घर में कदम रखा। उनकी एंट्री के दौरान उनके पिता और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी भी शो में पहुंचे और अपने मशहूर गाने ‘रिंकिया के पापा’ पर परफॉर्म किया। सलमान खान ने मनोज से मजाक में पूछा कि क्या वह खुद भी इस बार बिग बॉस का हिस्सा बनने वाले हैं, जिस पर उन्होंने बताया कि वह सिर्फ अपनी बेटी को घर तक छोड़ने आए हैं। इसके बाद मनोज ने अपनी पहली शादी से हुई बेटी ऋति का स्वागत किया। वहीं, सलमान ने ऋति से मजाक करते हुए कहा कि वह घर में अंडे को लेकर कोई हंगामा न करें।

माही विज

बिग बॉस 20 के ग्रैंड प्रीमियर में अभिनेत्री माही विज ने आखिरी कंटेस्टेंट के तौर पर घर में कदम रखा। उन्होंने ‘छलिया’ गाने पर डांस करते हुए शो में एंट्री की। माही इससे पहले ‘मेहर’ में नजर आ चुकी हैं और हाल ही में पति जय भानुशाली से तलाक की खबरों को लेकर भी चर्चा में थीं।

Rapperiya Baalam: ‘दिल टूट गया है…’, रैपरिया बालम ने ‘मिर्जापुर’ में बिना इजाजत अपना गाना ‘शूरवीर’ इस्तेमाल किए जाने पर किया रिएक्ट

Rapperiya Baalam: ‘मिर्जापुर द मूवी’ शुक्रवार, 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन अब यह फ़िल्म एक गाने के इस्तेमाल को लेकर विवादों में घिर गई है। राजस्थानी कलाकार और रैपर रैपेरिया बालम ने आरोप लगाया है कि महाराणा प्रताप को समर्पित उनका गाना ‘शूरवीर’, बिना उनकी इजाजत या क्रेडिट दिए फ़िल्म के एक सीन में इस्तेमाल किया गया, जिसमें गैंगस्टर दिखाए गए हैं।

रैपेरिया बालम ने इंस्टाग्राम पर अपनी निराशा जाहिर की

उन्होंने कहा, “आज मेरा दिल टूट गया है। आप में से कुछ लोग पूछ सकते हैं कि मेरा दिल क्यों टूटा है। आप कह सकते हैं कि मुझे खुश होना चाहिए क्योंकि मेरा गाना ‘मिर्ज़ापुर’ में है। लेकिन ‘मिर्ज़ापुर’ की टीम ने मेरा गाना इस्तेमाल करने के लिए मुझसे इजाज़त नहीं ली। उन्हें इजाज़त किसने दी? मैंने तो बिल्कुल नहीं दी।”

कलाकार ने आगे कहा कि ‘शूरवीर’ गाना महाराणा प्रताप को सम्मान देने के लिए बनाया गया था और उन्होंने ऐसे सीन में इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाया, जो उनके मुताबिक फ़िल्म के गैंगस्टर्स का महिमामंडन करता है। उन्होंने कहा, “यह गाना महाराणा प्रताप जी को समर्पित है। हम इस गाने का इस्तेमाल फिल्म के विलेन को महिमामंडित करने के लिए कर रहे हैं। क्या यह सही है?”

रैपेरिया बालम ने आगे कहा कि अगर मेकर्स ने उनसे सीधे संपर्क किया होता तो उन्हें साथ काम करने में खुशी होती। उन्होंने कहा, “अगर मिर्ज़ापुर की टीम ने मुझसे संपर्क किया होता और कहा होता, ‘रैपेरिया भाई, हम आपका गाना इस्तेमाल करना चाहते हैं,’ तो हम उन्हें 10 आइडिया देते। लेकिन बिना इजाज़त के गाना लेना सही नहीं है।”

उन्होंने फ़िल्म में गाने को शामिल करने के पीछे कॉपीराइट और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि आपको ये अधिकार किसने दिए या आपने इन्हें किससे हासिल किया। जिसने भी आपको अधिकार दिए हैं, मैं चाहूंगा कि आप उनसे पूछें- क्या आपके पास कोई कॉपीराइट है?”

गाने के इस्तेमाल को राजस्थान और महाराणा प्रताप का अपमान बताते हुए गायक ने कहा, “बुरा क्यों नहीं लगेगा? यह राजस्थान का अपमान है। यह महाराणा प्रताप जी का अपमान है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” निराशा के बावजूद, रैपेरिया बालम ने उन सुनने वालों के उत्साह को माना जिन्होंने फिल्म में यह गाना सुना।

उन्होंने कहा, “गाने का कंपोज़र और गायक होने के नाते, और लाखों लोगों को इसे सुनते हुए देखकर, ज़ाहिर है कि आपके उत्साह से बहुत सारे मैसेज आते हैं। मुझे DM में हज़ारों मैसेज आए हैं जिनमें कहा गया है, ‘भाई, आपका गाना मिर्ज़ापुर में है।’ लेकिन, मिर्ज़ापुर टीम, आपको यह ठीक से करना चाहिए था। आपको मुझसे बात करनी चाहिए थी।”

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि वह जो भी ज़रूरी कदम उठाना होगा, वह उठाएंगे। उन्होंने कहा, “खैर, जो भी कदम उठाने की ज़रूरत है, वह उठाए जाएंगे।”इस बीच, कई इंटरनेट यूज़र्स ने रैपेरिया बालम का समर्थन किया है और सोशल मीडिया पर उनके पक्ष में आवाज़ उठाई है।

एक यूज़र ने लिखा, “यह देखकर दुख होता है कि मेवाड़ के महान वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी को समर्पित गाना ‘शूरवीर’ मिर्ज़ापुर फ़िल्म में काल्पनिक गैंगस्टर्स की महिमा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इतिहास का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि सस्ते मनोरंजन के लिए उसे क्राइम ड्रामा के साथ मिलाया जाना चाहिए। एक राजस्थानी होने के नाते, मैं कहना चाहता हूँ: कृपया हमारे नायकों के बलिदान का मज़ाक न उड़ाएँ। राजस्थानी संस्कृति को गलत तरीके से दिखाना बंद करें।” फिलहाल, ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ के मेकर्स ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बच्चों के हाथ में मोबाइल सुविधा या खतरा! स्क्रीन टाइम से संस्कार तक बच्चों को डिजिटल दुनिया में ऐसे रखें सुरक्षित

बच्चे को स्मार्टफोन देना आजकल कई पैरेंट्स के लिए जरूरत बनता जा रहा है। पढ़ाई, ऑनलाइन क्लास, दोस्तों से बात या किसी जरूरी काम के लिए फोन काफी मददगार हो सकता है। लेकिन फोन बच्चे के हाथ में देने से पहले यह सोचना जरूरी है कि वह इसका सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए तैयार है या नहीं।

सिर्फ फोन खरीदकर बच्चे को दे देना काफी नहीं है। उसे स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन सेफ्टी और अपनी प्राइवेट इन्फॉर्मेशन को सेफ रखने के बारे में भी समझाना जरूरी है। साथ ही घर में कुछ आसान रूल पहले से तय कर लें, ताकि बच्चा स्मार्टफोन को मनोरंजन के साथ-साथ जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी सीखे।

chilg phoe

 

1. बच्चे की उम्र नहीं समझदारी देखें

स्मार्टफोन देने का फैसला सिर्फ बच्चे की उम्र देखकर न लें। पहले देखें कि वह रूल को समझता है या नहीं, अपनी चीजों का ध्यान रखता है और इंटरनेट के सही-गलत इस्तेमाल को समझने की कैपेसिटी रखता है या नहीं। बच्चा बिना समझे फोन का इस्तेमाल कर सकता है, तो पहले उसे डिजिटल सेफ्टी के बारे में समझाना जरूरी है।

 

 

2. फोन देने से पहले पैरेंटल कंट्रोल लगाएं

बच्चे को फोन देने से पहले उसमें जरूरी पैरेंटल कंट्रोल जरूर सेट करें। स्क्रीन टाइम की लिमिट, ऐप डाउनलोड करने की परमिशन और उम्र के हिसाब से कंटेंट फिल्टर जैसी सेटिंग पहले से कर सकते हैं। इससे बच्चा अनजाने में ऐसी चीजें देखने या डाउनलोड करने से बच सकता है, जो उसके लिए सही नहीं हैं।

 

 

 

3. नो-फोन जोन के स्ट्रिक्ट रूल

बच्चे को फोन देने से पहले घर के कुछ साफ नियम बना लें। जैसे पढ़ाई या होमवर्क के समय फोन का इस्तेमाल नहीं होगा, खाने की टेबल पर फोन नहीं आएगा और रात में फोन बेडरूम में नहीं रखा जाएगा। साथ ही यह भी तय करें कि बच्चा फोन का इस्तेमाल कितने समय तक और किन कामों के लिए कर सकता है। रूल जितने साफ होंगे, बच्चे के लिए उन्हें समझना उतना ही आसान होगा।

 

 

 

4. प्राइवेसी और ऑनलाइन सेफ्टी समझाएं

बच्चे को बताएं कि इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए। घर का पता, फोन नंबर, स्कूल की इंफॉर्मेशन, लाइव लोकेशन या प्राइवेट फोटो किसी अनजान व्यक्ति को भेजने से बचना चाहिए। सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेम में कोई परेशान करे, धमकाए या गलत बात करने की कोशिश करे, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत माता-पिता को बताना चाहिए।

 

 

 

5. साइबर बुलिंग बताएं

बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि ऑनलाइन भी किसी के साथ गलत बिहेव नहीं करना चाहिए और कोई उसके साथ ऐसा करता है, तो उसे चुप रहने की जरूरत नहीं है। उसे समझाएं कि इंटरनेट पर शेयर की गई चीजें आगे फैल सकती हैं, इसलिए फोटो, कमेंट या मैसेज भेजने से पहले सोच लेना चाहिए। कोई परेशानी होने पर ब्लॉक, रिपोर्ट करने और माता-पिता से बात करने का तरीका भी बताएं।

 

 

6. फोन एंटरटेनमेंट नहीं जिम्मेदारी है समझाएं

बच्चे को यह बताएं कि स्मार्टफोन सिर्फ एंटरटेनमेंट की चीज नहीं है, बल्कि इसे जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना भी जरूरी है। बच्चा तय नियमों का पालन करता है, तो धीरे-धीरे उसे ज्यादा आजादी दी जा सकती है। जैसे-जैसे उसकी समझ और जिम्मेदारी बढ़े, वैसे-वैसे फोन से जुड़े नियम भी बदले जा सकते हैं।

 

 

7. बच्चे से खुलकर बात करते रहें

बच्चे के फोन की हर चीज पर छिपकर नजर रखने के बजाय उसके साथ खुलकर बात करना ज्यादा बेहतर है। समय-समय पर पूछें कि वह फोन पर क्या देखता है, किन ऐप्स का इस्तेमाल करता है और ऑनलाइन कोई उसे परेशान तो नहीं कर रहा। बच्चे को यह भरोसा दें कि अगर इंटरनेट पर उसके साथ कुछ गलत होता है, तो वह बिना डरे आपसे बात कर सकता है।

 

 

बच्चे के लिए स्मार्टफोन कई तरह से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे सही समय और सही तरीके से देना ज्यादा जरूरी है। पैरेंट्स का भरोसा, समझ और गाइडेंस बच्चे को टेक्नोलॉजी के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है।

Mirzapur The Movie X Review: पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु ने जीता फैंस का दिल, रवि किशन के मुरीद हुए दर्शक

Mirzapur The Movie X Review: कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया अपना खास जलवा दिखाने के लिए वापस आ गए हैं! इस बार बड़े पर्दे पर! लंबे इंतजार के बाद, ‘मिर्जापुर द मूवी’ आखिरकार आज (4 सितंबर) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु जैसे मशहूर कलाकार अमेजन प्राइम वीडियो की सुपरहिट वेब सीरीज वाले अपने किरदारों में ही नजर आ रहे हैं। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म फैन्स को काफी पसंद आ रही है। लोग इसके जबरदस्त पलों और मिर्जापुर के उस पुराने क्रेज की वापसी की तारीफ कर रहे हैं।

सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘मिर्जापुर द मूवी’

पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु की वापसी के साथ, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ कहानी को अपने खास अंदाज में आगे बढ़ाती है। रवि किशन भी इस फिल्म की कास्ट में शामिल हुए हैं, जबकि जितेंद्र कुमार, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुगल, हर्षिता गौर और अन्य कलाकार शो वाले अपने किरदारों में ही वापस आए हैं।

Screenshot 2026-09-04 125538

भारत में पहली बार एक लोकप्रिय शो को फीचर फिल्म में बदला गया है ताकि फैन्स को बड़े पर्दे का वह अनुभव मिल सके जिसका वे बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जबरदस्त चर्चा और शानदार एडवांस बुकिंग के बीच यह फिल्म आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ‘मिर्जापुर द मूवी’ के रिव्यू आ गए हैं और शुरुआती रिएक्शन से पता चलता है कि फैन्स फिल्म से काफी प्रभावित हैं।

एक यूजर ने ट्वीट किया, “कहानी के अच्छे सेटअप के साथ पहला हाफ ठीक-ठाक है। एक अच्छी बात यह है कि हर किरदार को डेवलप होने में समय दिया गया है। इंटरवल से पहले का हिस्सा इतना अच्छा था कि आप अच्छी उम्मीदों के साथ दूसरे हाफ की ओर बढ़ते हैं।”

एक और रिव्यू में कहा गया- “#मिर्जापुर इस रॉ और जबरदस्त फ्रैंचाइजी को बड़े पैमाने पर मनोरंजन करने वाली एक बड़ी फिल्म में बदल देती है। कालीन_भैया और मुन्ना_भैया का एक साथ सबसे बेरहम और दमदार परफॉर्मेंस दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ेगा।”

एक पोस्ट में लिखा था, “मनोरंजन के मामले में ‘मिर्जापुर द मूवी’ कहीं भी पीछे नहीं रहती। पंकज त्रिपाठी का जलवा और बब्बुवा यादव के तौर पर रवि किशन की एंट्री कहानी में तुरंत नई जान डाल देती है, जिससे कहानी को जरूरी पंच और एनर्जी मिलती है।”

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबी हुई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूर्व से पहले शहर की धड़कनों में भक्ति का उल्लास और गहरा होता जा रहा है। मंदिरों की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और गलियों-चौराहों पर गूंजते राधे-कृष्णा के जयकारों के बीच आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।

 

शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को मनोहारी छटा दिखाई दी, मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु और स्थानीय लोग देर तक कलाकारों की प्रस्तुतियों में रमते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े तो मानो ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत सड़कों पर जीवंत हो उठी।

 

ढोल-मृदंग की थाप, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और कलाकारों के मनमोहक नृत्य ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। संगीत की लय बढ़ी तो श्रद्धालुओं के कदम भी थिरकने लगे। कोई हाथ उठाकर जयकारे लगा रहा था तो कोई कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच भक्ति में झूमता नजर आया। पूरे मार्ग पर बार-बार 'राधे-राधे' और 'श्रीकृष्ण' के जयघोष गूंजते रहे।

 

सड़कें बनीं ब्रज संस्कृति का मंच

 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान से आगे बढ़ी शोभायात्रा के दौरान ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा।

 

जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनता दिखाई दिया। भक्ति और संस्कृति के इस मिलन ने शोभायात्रा को महज धार्मिक आयोजन न रहकर ब्रज की जीवंत विरासत का उत्सव बना दिया।

 

जन्माष्टमी के लिए सज रही कृष्ण की नगरी

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रमुख मंदिरों, बाजारों और मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रात होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए शहर का दृश्य देखते ही बन रहा है।

 

हर तरफ कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता है, मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारियां चल रही हैं तो बाजार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से शहर का माहौल लगातार भक्तिमय होता जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट

 

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वृंदावन पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन और जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि जन्माष्टमी के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

 

हर ओर बस कृष्ण भक्ति का रंग

 

मथुरा में जन्माष्टमी का उल्लास अब केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक हर जगह कृष्ण भक्ति की छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा ने इस उत्साह को नई ऊंचाई दे दी।

 

ब्रज की लोक संस्कृति से सजे कलाकार, ढोल-मृदंग की थाप पर थिरकते श्रद्धालु और गूंजते जयकारों के बीच ऐसा लगा मानो पूरी मथुरा नगरी स्वयं कान्हा के स्वागत में निकल पड़ी हो। जन्माष्टमी से पहले ही कान्हा की नगरी में उत्सव का रंग गहरा हो चुका है, हर ओर भक्ति है, हर कदम पर उल्लास है और हर जुबां पर बस एक ही नाम है..श्रीकृष्णा, श्रीकृष्णा।