मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण, आप भी एंजॉय करें 14D-360 डिग्री थिएटर में फिल्म

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण, आप भी एंजॉय करें 14D-360 डिग्री थिएटर में फिल्म

– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में साढ़े 4 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 14-डी सिनेमा थिएटर और वर्चुअल जंगल सफारी का किया लोकार्पण

– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रियों, महापौर, सांसद एवं स्कूली बच्चों के साथ देखी 14-डी व 360 डिग्री थिएटर में फिल्म

– मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने इंदौर प्राणी संग्रहालय में स्थापित साढ़े 4 करोड़ रुपए की लागत से पीपीपी मॉडल पर निर्मित 14-डी सिनेमा थिएटर एवं वर्चुअल जंगल सफारी का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इंदौर जो भी करता है, सबसे अच्छा करता है। इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

ALSO READ: ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से एमपी बनेगा आत्मनिर्भर, 15 हजार से अधिक रोजगार होंगे सृजित: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्चुअल जंगल सफारी आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे लोगों को जंगल और वन्यजीवों का आभासी अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से नगर निगम को आमदनी भी प्राप्त होगी।

 

मुख्यमंत्री ने ली तकनीकी जानकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों एवं स्कूली बच्चों के साथ 14-डी सिनेमा थिएटर में बैठकर फिल्म का आनंद लिया। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि दोनों फिल्में देखकर उन्हें अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने वर्चुअल जंगल सफारी का भी अवलोकन किया तथा सफारी की व्यवस्थाओं एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।

ALSO READ: पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा गंभीर मरीजों की जान बचाने में देश का सबसे सफलतम प्रयोग: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

तकनीक के माध्यम से प्रकृति को समझेंगे बच्चे

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट दबाकर फव्वारे का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्वेरियम में मौजूद रंगबिरंगी मछलियों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने प्राणी संग्रहालय में विकसित की गई इन नवीन सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे शहरवासियों, बच्चों और पर्यटकों को मनोरंजन के साथ वन्यजीवों एवं प्रकृति को नए तकनीकी माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा।

जहाज से दिखा सोता Polar Bear, शख्स ने बजाया हॉर्न और कर दी बड़ी गलती, अब देना पड़ा 4.5 लाख रुपये

नॉर्वे के स्वालबार्ड में एक शख्स को सो रहे ध्रुवीय भालू को जहाज का हॉर्न बजाकर जगाना भारी पड़ गया। तेज आवाज से भालू की नींद खुली और वह दूसरी जगह चला गया। अधिकारियों ने इस हरकत को जानबूझकर वन्यजीव को परेशान करने का मामला माना। इसके बाद शख्स पर 50,000 नॉर्वेजियन क्रोन यानी करीब 4.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। खास बात यह रही कि जहाज पर मौजूद अन्य लोगों ने खुद इस घटना की जानकारी अधिकारियों को दी। मामला सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि जंग

ली जानवरों को करीब से देखने की उत्सुकता में उन्हें परेशान करना कितना महंगा साबित हो सकता है। स्वालबार्ड में ध्रुवीय भालू प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में कुछ पल के मजाक के लिए बजाया गया जहाज का हॉर्न शख्स की जेब पर लाखों रुपये का बोझ डाल गया।

जहाज से दिखा आराम फरमाता भालू

घटना अगस्त में Svalbard के Lomfjorden, Hinlopenstretet इलाके में हुई। एक जहाज पर मौजूद लोगों की नजर जमीन पर आराम से सो रहे Polar Bear पर पड़ी। भालू अपने शांत माहौल में सो रहा था, लेकिन तभी जहाज पर मौजूद एक व्यक्ति ने कुछ ऐसा कर दिया, जिससे उसकी नींद टूट गई।

एक हॉर्न और टूट गई भालू की नींद

Governor of Svalbard के कार्यालय के मुताबिक, जहाज पर मौजूद व्यक्ति ने जानबूझकर शिप का हॉर्न बजाया। तेज आवाज सुनकर Polar Bear जाग गया और वहां से दूसरी जगह चला गया। शायद हॉर्न बजाने वाले को यह सिर्फ कुछ सेकंड का मजाक लगा हो, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।

साथियों ने ही कर दी शिकायत

इस मामले की खास बात यह रही कि जहाज पर मौजूद अन्य लोगों ने घटना की जानकारी बाद में Governor of Svalbard को दे दी। जांच के बाद अधिकारियों ने माना कि Polar Bear को जानबूझकर परेशान किया गया था।

मजाक पड़ा बेहद महंगा

अधिकारियों ने इस घटना को Polar Bear को परेशान करने यानी wildlife disturbance माना और व्यक्ति पर 50,000 नॉर्वेजियन क्रोन (NOK) का जुर्माना लगाया, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹4.5 लाख बैठता है। यानी कुछ पल के मनोरंजन के लिए बजाया गया एक हॉर्न जेब पर लाखों रुपये का बोझ डाल गया। यह मामला यह भी याद दिलाता है कि जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में परेशान करना सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है।

4 साल से हर बार खरीद रहे थे लॉटरी टिकट, लग गया ₹26 लाख का जैकपॉट! परदेस में खुली केरल के वॉचमैन की किस्मत

जानें क्यों Gen Z की पहली पसंद बन रहे हैं दुनिया के ये 10 शहर! जहां लाइफ, करियर और मस्ती का मिलेगा पूरा पैकेज

आज की जेन जी जनरेशन अपने रहने के लिए ऐसी जगह पसंद करती है, जहां काम और पढ़ाई के साथ घूमने-फिरने, एंटरटेनमेंट और सोशल लाइफ का भी अच्छा बैलेंस हो। उनके लिए किसी शहर की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों या अच्छे जॉब ऑप्शन से नहीं होती, बल्कि वहां का कल्चर, नाइटलाइफ, खाने-पीने की जगहें और रोज की जिंदगी भी काफी मायने रखती है।

इसी वजह से दुनिया के कुछ शहर जेन जी के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यहां किफायती लाइफस्टाइल, आसानी से घूमने की सुविधा और क्वालिटी ऑफ लाइफ जैसी कई चीजें युवाओं को अट्रैक्ट करती हैं। ‘टाइम आउट’ ने भी इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेन जी के लिए दुनिया के बेहतरीन शहरों की एक स्पेशल लिस्ट तैयार की है।

1. टोक्यो, जापान

1

टोक्यो इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। यहां सर्वे में शामिल सभी यूथ ने रोज खुश रहने की बात कही। शहर की तेज और आसान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, देर रात तक चलने वाली नाइटलाइफ, म्यूजिक बार और कई जगहों पर मुफ्त म्यूजियम एंट्री जैसी फैसिलिटी यूथ को काफी पसंद आती हैं। यहां काम, मनोरंजन और घूमने के लिए बहुत सारे ऑप्शन मिलते हैं।

2. वेलेंसिया, स्पेन

2

समुद्र के किनारे बसा वेलेंसिया अपने खूबसूरत मौसम और आरामदायक माहौल के लिए जाना जाता है। यहां रहने का खर्च कई बड़े यूरोपीय शहरों की तुलना में कम है। समुद्र तट, आउटडोर एक्टिविटीज और अच्छे लोगों की वजह से यहां की लाइफस्टाइल काफी सुकून भरी है। घर से काम करने वाले यूथ के लिए यह अच्छा शहर माना जाता है।

3. बैंकॉक, थाईलैंड

3

बैंकॉक अपनी चहल-पहल, स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और शानदार नाइटलाइफ के लिए यूथ के बीच काफी पॉपुलर है। यहां कम बजट में खाने, घूमने और एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिल जाते हैं। शहर का माहौल काफी एनर्जेटिक है, इसलिए यहां रहने वाले युवा काम के साथ घूमने और दोस्तों के साथ समय बिताने का मजा भी ले सकते हैं।

4. कोपेनहेगन, डेनमार्क

4

कोपेनहेगन को अच्छी लाइफ क्वालिटी और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए पसंद किया जाता है। यहां साइकिल से घूमना काफी आसान है और शहर में हरियाली भी खूब देखने को मिलती है। साफ-सुथरा माहौल और पर्यावरण को लेकर जागरूक लाइफस्टाइल इसे उन युवाओं के लिए खास बनाती है, जो करियर के साथ अपनी सेहत और प्राइवेट लाइफ पर भी ध्यान देना चाहते हैं।

5. पोर्टो, पुर्तगाल

पोर्टो अपनी खूबसूरत पुरानी इमारतों, समुद्र तटों और मिलनसार लोगों के लिए जाना जाता है। यहां कम्युनिटी का माहौल काफी अच्छा है, जिससे नए लोगों के लिए घुलना-मिलना आसान हो जाता है। बाहर खाना-पीना भी कई दूसरे यूरोपीय शहरों की तुलना में कम खर्चीला है। शहर की संस्कृति और शांत माहौल युवाओं को काफी अट्रैक्ट करता है।

6. बर्लिन, जर्मनी

बर्लिन को युवा और क्रिएटिव लोगों का शहर कहा जा सकता है। यहां की नाइटलाइफ, आर्ट सीन, म्यूजिक और बड़े पार्क युवाओं को खूब पसंद आते हैं। शहर में मनोरंजन के कई बजट-फ्रेंडली ऑप्शन हैं। साथ ही स्टार्टअप और क्रिएटिव इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए भी यहां अच्छे मौके मिलते हैं।

7. न्यूयॉर्क, अमेरिका

न्यूयॉर्क अपनी तेज रफ्तार जिंदगी और हर समय एक्टिव रहने वाले माहौल के लिए मशहूर है। शहर में पैदल घूमना आसान है और यहां हर तरह के म्यूजियम, थिएटर, रेस्टोरेंट और कल्चरल इवेंट मिल जाते हैं। नौकरी और करियर के बहुत सारे मौके होने के कारण यह युवाओं को अट्रैक्ट करता है, लेकिन यहां रहना काफी महंगा हो सकता है।

8. शंघाई, चीन

शंघाई आधुनिक इमारतों, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के लिए जाना जाता है। यहां टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े करियर के कई मौके मिलते हैं। नए लोगों के लिए भी शहर में कई तरह की फैसिलिटीज हैं। यही वजह है कि करियर पर फोकस करने वाले युवा इसे एक अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

9. एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड

एडिनबर्ग अपनी पुरानी बिल्डिंग, इतिहास और खूबसूरत हरियाली के लिए खास है। यहां सुरक्षा अच्छी है और शहर में पैदल घूमना भी आसान है। इसके अलावा यहां की अनोखी नाइटलाइफ युवाओं को अट्रैक्ट करती है। काम और आराम के बीच अच्छा बैलेंस बनाने के लिए भी यह शहर पसंद किया जाता है।

10. मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया

मेलबर्न अपनी क्रिएटिविटी, कला और खाने-पीने के लिए मशहूर है। यहां अच्छे रेस्टोरेंट के साथ इंडी थिएटर, लाइव कॉमेडी और म्यूजिक जैसे एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिलते हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में कम बजट में खाने-पीने की जगहें भी मिल जाती हैं। यही वजह है कि करियर की शुरुआत करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेलबर्न अट्रैक्टिव सिटी है।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पर चढ़ा Sprite का रंग, पहली बार किसी ब्रांड के नाम से चलेगी ट्रेन

Lucknow-Delhi Tejas Express: लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस अब करीब तीन महीने के लिए ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित की जाती है। इसे भारत की पहली ‘प्राइवेटली ब्रांडेड’ ट्रेन बताया जा रहा है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि IRCTC ने ट्रेन की ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार M/s स्प्राइट को छह महीने की अवधि के लिए दिए हैं। इसके अनुसार, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे से कहा गया है कि वह 19 अगस्त और 11 नवंबर, 2026 के बीच ट्रेन 82501/82502 को ‘Sprite’ Tejas Express के रूप में घोषित करे।

खबरों के अनुसार, ट्रेन की ब्रांडिंग का यह अधिकार Letter of Acceptance (LOA) के जरिए दिया गया है। रेलवे सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों दिशाओं में यात्रा के दौरान इस प्राइवेट ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से अनाउंस किया जाएगा।

किसी ब्रांड के नाम पर रखी जाने वाली पहली ट्रेन

यह पहली बार है जब किसी ट्रेन का नाम किसी ब्रांड के नाम पर रखा जा रहा है। रिपोर्ट में बताए गए रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भले ही लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट ट्रेन कहा जाता है, लेकिन IRCTC रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैक और स्टेशन) के इस्तेमाल के लिए इंडियन रेलवे को पेमेंट करती है।

हालांकि, ब्रांडिंग का यह तरीका इंडियन रेलवे द्वारा ट्रेनों के रेगुलर ऑपरेशन से अलग है।

इस एडवरटाइजिंग मॉडल के तहत, प्राइवेट कंपनियां ट्रेन के बाहरी हिस्से और दूसरी तय जगहों पर अपने ब्रांड दिखा सकती हैं, जबकि रेलवे नेटवर्क जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता रहता है। यानी ट्रेन पर ब्रांड का नाम और विज्ञापन तो नजर आएगा, लेकिन इसका संचालन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क के जरिए ही होगा।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ

देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

IRCTC द्वारा चलाई जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से AC है और इसमें यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें ट्रेन के अंदर खाने-पीने की बेहतर सुविधा और मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल हैं।

IRCTC इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है। यानी कॉर्पोरेट मीटिंग, शादी या किसी अन्य कार्यक्रम के लिए यात्री पूरी AC चेयर कार कोच भी बुक कर सकते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं।

Sprite के साथ हुई नई ब्रांडिंग डील से इस सर्विस में एक नया कमर्शियल पहलू जुड़ गया है, जिससे यह देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जो विज्ञापन व्यवस्था के तहत आधिकारिक तौर पर किसी कमर्शियल ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर रही है।

यह भी पढ़ें: कल का मौसम: 14 अगस्त को इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट! छत्तीसगढ़, हिमाचल, उत्तराखंड, UP और दिल्ली में बरसेगी आफत

शहर की नौकरी छोड़ पहाड़ों में बसे पति-पत्नी! 4BHK मकान, फ्री पानी और ₹50 हजार के खर्च का ब्रेकडाउन वायरल

शहर की तेज रफ्तार जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच रहना सुनने में जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही दिलचस्प है यह जानना कि वहां रोजमर्रा की जिंदगी कितने खर्च में चलती है। हिमाचल प्रदेश के मनाली के पास रहने वाले दिव्या भट्ट और सौरभ यादव ने अपनी पहाड़ी जिंदगी की झलक सोशल मीडिया पर साझा की है। दोनों ने गजान गांव में अपना ठिकाना बनाया है और साथ ही होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने अपने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में रहते हुए उनका महीने का खर्च करीब ₹50 हजार आता है।

इस बजट में घर का राशन, बाहर खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च शामिल हैं। खास बात यह है कि आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती ही उनके लिए मनोरंजन का बड़ा जरिया है, इसलिए कई आउटिंग पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता। अब उनका यह सादा लेकिन खूबसूरत लाइफस्टाइल इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

मनाली के पास गांव में बसाया घर

दिव्या और सौरभ ने हिमाचल प्रदेश के गजान गांव को अपना ठिकाना बनाया है। यह गांव मनाली के पास हिमालयी इलाके में स्थित है। दोनों यहां रहते भी हैं और एक होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने इंस्टाग्राम पर ‘Living in the Mountains, Episode 1’ नाम से वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ों में अपनी जिंदगी और हर महीने होने वाले खर्च का हिसाब बताया।

1BHK का किराया करीब ₹15 हजार

कपल जिस 4BHK प्रॉपर्टी में रहता है, उसका इस्तेमाल उनके होमस्टे से भी जुड़ा है। इसलिए उनका रहने का खर्च सामान्य किरायेदार से अलग है। दिव्या के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ रहने के लिए मनाली के पास घर किराए पर लेना चाहता है, तो 1BHK का किराया करीब ₹15,000 और 2BHK का करीब ₹25,000 तक हो सकता है।

घर का खाना, फिर भी ₹15 हजार का फूड बजट

पहाड़ों में रहने के बावजूद कपल खाने पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करता। दोनों ज्यादातर खाना घर पर ही बनाते हैं। दिव्या के मुताबिक, उनकी महीने की ग्रॉसरी करीब ₹10,000 आती है। इसके अलावा बाहर खाने-पीने पर करीब ₹5,000 खर्च हो जाते हैं।

छोटी दूरी के लिए गाड़ी नहीं, पैदल सफर

गांव में रहने का एक फायदा यह भी है कि रोजमर्रा के कई छोटे काम पैदल ही हो जाते हैं। दिव्या ने बताया कि दोनों स्थानीय स्तर पर ज्यादातर जगह पैदल जाते हैं। इसके बावजूद गाड़ी के ईंधन पर करीब ₹3,000 प्रति महीने खर्च हो जाता है।

पानी का बिल जीरो, बिजली करीब ₹1,000

यूटिलिटी खर्च की बात करें तो कपल के लिए पानी पर कोई मासिक खर्च नहीं है। दिव्या के अनुसार, पानी मुफ्त है। वहीं बिजली का बिल करीब ₹1,000 प्रति महीने आता है।

पहाड़ों में घूमना भी बजट में शामिल

पहाड़ों में रहने का सबसे बड़ा फायदा शायद यही है कि घूमने के लिए महंगी जगहों की जरूरत नहीं पड़ती। आसपास प्रकृति आसानी से उपलब्ध है, इसलिए कपल की ज्यादातर आउटिंग मुफ्त ही होती हैं। फिर भी अपने छोटे-मोटे माउंटेन एडवेंचर पर करीब ₹3,000 महीने का खर्च हो जाता है।

करीब ₹50 हजार में पूरा महीना

दिव्या के मुताबिक, ग्रॉसरी, बाहर का खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च जोड़ने पर दोनों का कुल मासिक खर्च करीब ₹50,000 बैठता है। हालांकि, उनका रहने का इंतजाम होमस्टे बिजनेस से जुड़ा है, इसलिए यह खर्च ऐसे व्यक्ति से अलग होगा जो सिर्फ अपने रहने के लिए घर किराए पर लेता है।

लोगों को पसंद आई पहाड़ों वाली जिंदगी

वीडियो सामने आने के बाद लोगों का ध्यान सिर्फ ₹50 हजार के बजट पर नहीं गया, बल्कि कपल की शांत जिंदगी ने भी खूब आकर्षित किया। एक यूजर ने पहाड़ों के नजारे को जिंदगी का ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ बताया। वहीं कई लोगों ने कहा कि असली लग्जरी पैसा नहीं, बल्कि ऐसी जगह मिलने वाला सुकून और शांति है।

दिल्ली में बंदर की खोपड़ी लेकर फ्लाइट पर चढ़ने की तैयारी में था ये शख्स! जब पकड़ा गया तो ये सब पता चला

छक्कों की हैट्रिक लगाकर DSP सिराज ने श्रीलंका को अभ्यास मैच में हराया (Video)

मोहम्मद सिराज श्रीलंका के खिलाफ उतरते साथ ही एक भिन्न गेंदबाज और एक भिन्न खिलाड़ी लगने लगते हैं। एशिया कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ आधा दर्जन विकेट निकालकर मेजबान टीम को 50 रनों पर समेटने में अहम भूमिका निभाने वाले सिराज ने कल अभ्यास मैच में 3 लगातार छक्के और एक चौका मारकर भारतीय टीम को श्रीलंका के खिलाफ 3 दिवसीय अभ्यास मैच में जीत दिला दी।

जीत के लिए 207 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 45 ओवर में चार विकेट पर 214 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम किया। सिराज ने महज 15 गेंदों में लगातार तीन छक्कों की मदद से नाबाद 32 रन ठोके।

पहली पारी में खाता खोले बिना आउट होने वाले जायसवाल ने दूसरी पारी में जोरदार वापसी की। उन्होंने केवल 46 गेंदों पर 61 रन की तेजतर्रार पारी खेली। लक्ष्य का पीछा करते हुए जायसवाल और गिल ने पहले विकेट के लिए 105 रन की आक्रामक साझेदारी कर भारत को तेज शुरुआत दिलाई। जायसवाल अर्धशतक पूरा करने के बाद रिटायर्ड हुए, ताकि टीम के अन्य बल्लेबाजों को भी अभ्यास का पर्याप्त मौका मिल सके।

अंगुली की चोट के कारण मैच के शुरुआती दो दिन मैदान से बाहर रहे कप्तान गिल ने वापसी करते हुए 44 रन बनाए। वह स्पिनर केशरा नुवांथा की गेंद पर आउट हुए। गिल की प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी भारत के लिए श्रीलंका के खिलाफ आगामी पहले टेस्ट से पहले बड़ी सकारात्मक खबर रही।

ध्रुव जुरेल ने 17 रन का योगदान दिया, जबकि ऋषभ पंत ने धैर्यपूर्ण 28 रन की पारी खेली। एक समय भारत का स्कोर तीन विकेट पर 155 रन हो गया था।निचले क्रम के बल्लेबाजों ने अंतिम सत्र में जीत की औपचारिकता पूरी की जहां सिराज के बल्ले से अंतिम ओवर में लगे लगातार तीन छक्कों ने भारतीय खेमे का पूरा मनोरंजन किया।

इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट एकादश ने अपनी दूसरी पारी 45 ओवर में छह विकेट पर 200 रन बनाकर घोषित कर दी थी और भारत के सामने 207 रन का लक्ष्य रखा था।सलामी बल्लेबाज निशान मदुश्का ने 73 गेंदों पर 63 रन की सर्वाधिक पारी खेली। पहली पारी में भी उन्होंने अर्धशतक लगाया था। निपुन धनंजया ने 46 और अंजला बंडारा ने 35 रन बनाए।

भारत की ओर से रवींद्र जडेजा और गुरनूर बराड़ ने दो-दो विकेट लिए, जबकि मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा को एक-एक सफलता मिली।इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट एकादश के आठ विकेट पर 363 रन घोषित करने के जवाब में भारत ने अपनी पहली पारी छह विकेट पर 357 रन बनाकर घोषित की थी।

‘खामोशी द म्यूजिकल’ के 30 साल हुए पूरे, इन 7 वजहों से संजय लीला भंसाली की फिल्म बनीं क्लासिक

रिलीज के तीन दशक बाद भी, खामोशी द म्यूजिकल को इंडियन सिनेमा की सबसे दिल को छूने वाली और इमोशनल फिल्मों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। सिर्फ़ एक क्रिटिक्स द्वारा सराही गई ड्रामा से कहीं ज़्यादा, यह संजय लीला भंसाली का डायरेक्टोरियल डेब्यू था, जिसने दर्शकों को एक ऐसे फिल्ममेकर से मिलवाया, जिसका कहानी कहने का पैशन इंडियन सिनेमा को फिर से डिफाइन करेगा। आज भी, यह फिल्म अनगिनत कारणों से पसंदीदा बनी हुई है।

1. इसने दुनिया को संजय लीला भंसाली के सिनेमैटिक विज़न से इंट्रोड्यूस कराया

खामोशी: द म्यूजिकल भंसाली की ज़बरदस्त कहानी कहने की कला की पहली झलक थी। इमोशन, म्यूजिक और शानदार विजुअल्स को मिलाने की उनकी काबिलियत उनकी पहली ही फिल्म से साफ़ थी, जिसने एक ऐसे फिल्ममेकिंग स्टाइल की नींव रखी जो बाद में आइकॉनिक बन गया।

2. एक कहानी जो आज भी टाइमलेस लगती है

असल में, खामोशी परिवार, प्यार, त्याग और हिम्मत के बारे में एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। एक सुनने वाली बेटी और उसके बहरे-गूंगे माता-पिता के बीच के रिश्ते को ईमानदारी और दया के साथ दिखाकर, भंसाली ने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसके इमोशन पीढ़ियों तक गूंजते रहेंगे।

3. म्यूज़िक जो एक इमोशनल भाषा बन गया

संजय लीला भंसाली के लिए, म्यूज़िक हमेशा मनोरंजन से कहीं ज़्यादा रहा है, यह कहानी कहने का ज़रिया है। खामोशी ने इस सोच को खूबसूरती से दिखाया, हर गाने ने कहानी को बेहतर बनाया और किरदारों के इमोशन को बढ़ाया। तीन दशक बाद भी, इसका साउंडट्रैक यादगार है।

4. भंसाली के सिग्नेचर विज़ुअल स्टाइल का जन्म

दर्शकों के देवदास या बाजीराव मस्तानी की शान देखने से पहले ही, खामोशी ने भंसाली की हर छोटी-बड़ी बात पर नज़र रखने की कला दिखाई। हर फ्रेम, हर रंग और हर कंपोज़िशन में वह विज़ुअल खूबसूरती झलकती थी जो बाद में उनका ट्रेडमार्क बन गई।

5. परफॉर्मेंस जो हमेशा असर छोड़ती हैं

भंसाली की अपनी कास्ट से गहरी इमोशनल परफॉर्मेंस निकलवाने की काबिलियत शुरू से ही साफ़ थी। फिल्म के किरदार अपनी असलियत, कमज़ोरी और इमोशनल गहराई की वजह से यादगार बने रहते हैं, जिससे खामोशी परफॉर्मेंस पर आधारित कहानी कहने के लिए एक बेंचमार्क बन जाती है।

6. अपने समय से आगे की फिल्म

इनक्लूसिविटी के बारे में बातचीत आम होने से बहुत पहले, खामोशी ने दिव्यांग किरदारों को अपनी कहानी के केंद्र में गरिमा, हमदर्दी और संवेदनशीलता के साथ रखा। भंसाली ने इस विषय को परंपरा के बजाय दया के साथ लिया, जिससे यह फिल्म आज भी उतनी ही रेलिवेंट है जितनी तीन दशक पहले थी।

7. एक असाधारण विरासत की शुरुआत

आज पीछे मुड़कर देखें तो, खामोशी: द म्यूजिकल एक शानदार डेब्यू से कहीं ज़्यादा है, यह भारत के सबसे महान फिल्ममेकर्स में से एक के जन्म की निशानी है। इस फ़िल्म ने संजय लीला भंसाली के शानदार सफ़र का रास्ता बनाया, जिसमें उन्होंने हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, गोलियों की रासलीला राम-लीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, गंगूबाई काठियावाड़ी और हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार जैसी फ़िल्में कीं। इन सालों में, भंसाली ने सात नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, कई फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, एक BAFTA अवॉर्ड नॉमिनेशन जीता है, और रिपब्लिक डे पर एक झांकी, भारत गाथा डिज़ाइन करने वाले पहले फ़िल्ममेकर बने, जो भारतीय सिनेमा के कर्तव्य पथ पर सफ़र का जश्न मनाती है, जिससे भारत के सबसे महान सिनेमाई दूरदर्शी लोगों में से एक के रूप में उनकी जगह और पक्की हो गई।

तीस साल बाद, खामोशी: द म्यूज़िकल सिर्फ़ एक पसंदीदा फ़िल्म नहीं है, बल्कि यह संजय लीला भंसाली की असाधारण विरासत की नींव है। जैसे-जैसे दर्शक उनकी अगली फ़िल्म, लव एंड वॉर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, यह इंतज़ार ही उस भरोसे और तारीफ़ का सबूत है जो भंसाली ने तीन दशकों में बनाया है। अगर खामोशी ने एक जीनियस के जन्म को दिखाया, तो लव एंड वॉर एक ऐसे फिल्ममेकर के शानदार सफ़र में एक और मील का पत्थर साबित होगी, जो इंडियन सिनेमा का भविष्य बना रहा है।

‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

View this post on Instagram

A post shared by Soha (@sohasyap)

Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

‘लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं’

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

‘विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ कमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

‘कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

View this post on Instagram

A post shared by Soha (@sohasyap)

Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

‘लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं’

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

‘विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ कमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

‘कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

MP-CG में Jio का जलवा! ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार, नए सस्ते Wi-Fi और TV कॉम्बो प्लान लॉन्च

jio

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ टेलीकॉम सर्किल में रिलायंस जियो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख के पार पहुंच गई है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, MP-CG सर्किल में जियोफाइबर और FWA आधारित जियोएयरफाइबर सेवाओं से 46 हजार से अधिक नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े हैं। इसी अवधि में एयरटेल के करीब 14 हजार नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े।
 

रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में सभी टेलीकॉम कंपनियों के कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें अकेले जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख से ज्यादा है। वहीं, मोबाइल सेवाओं में भी जियो का मजबूत प्रदर्शन जारी है और कंपनी के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 5.05 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

 

इस उपलब्धि के साथ जियोहोम ने डिजिटल मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट को हर घर तक पहुंचाने के लिए नए और बेहद किफायती सर्विस पैक पेश किए हैं। कंपनी ने विशेष रूप से टीवी मनोरंजन पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए ‘टीवी-ओनली’ पैक लॉन्च किया है।
 

‘टीवी-ओनली’ पैक

इस पैक के तहत ग्राहक प्रभावी रूप से मात्र 400 रुपये प्रति माह की लागत पर टीवी मनोरंजन का लाभ ले सकते हैं। यह पैक 2 महीने और 5 महीने की अवधि के विकल्पों में उपलब्ध है। इसके माध्यम से ग्राहक 1,000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों का आनंद ले सकते हैं। इनमें 200 से अधिक HD चैनल और 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल शामिल हैं।

‘वाई-फाई-ओनली’ पैक

इसी तरह, केवल इंटरनेट की सुविधा चाहने वाले ग्राहकों के लिए ‘वाई-फाई-ओनली’ पैक भी उपलब्ध हैं। 30 Mbps स्पीड वाला पैक 2,200 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 450 रुपये प्रति माह है। वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला पैक 3,000 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 600 रुपये प्रति माह है।

 

ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जियोहोम ने ऑल-इन-वन  विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। 3-इन-1 कॉम्बो पैक में 30 Mbps की इंटरनेट स्पीड, 1,000  लाइव टीवी चैनल और 12 OTT ऐप्स की सुविधा उपलब्ध है। यह पैक 2,222 रुपये में 4 महीने के लिए लिया जा सकता है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 555 रुपये प्रति माह है।वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला कॉम्बो पैक 2,122 रुपये में 3 महीने के लिए उपलब्ध है। इसकी प्रभावी मासिक लागत 707 रुपये प्रति माह है।

 

इन नए पैक्स के माध्यम से जियोहोम ग्राहकों को उनकी जरूरतों और बजट के अनुरूप टीवी, मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट के किफायती तथा सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध करा रहा है।