‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

View this post on Instagram

A post shared by Soha (@sohasyap)

Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

View this post on Instagram

A post shared by Soha (@sohasyap)

Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

MP-CG में Jio का जलवा! ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार, नए सस्ते Wi-Fi और TV कॉम्बो प्लान लॉन्च

jio

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ टेलीकॉम सर्किल में रिलायंस जियो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख के पार पहुंच गई है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, MP-CG सर्किल में जियोफाइबर और FWA आधारित जियोएयरफाइबर सेवाओं से 46 हजार से अधिक नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े हैं। इसी अवधि में एयरटेल के करीब 14 हजार नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े।
 

रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में सभी टेलीकॉम कंपनियों के कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें अकेले जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख से ज्यादा है। वहीं, मोबाइल सेवाओं में भी जियो का मजबूत प्रदर्शन जारी है और कंपनी के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 5.05 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

 

इस उपलब्धि के साथ जियोहोम ने डिजिटल मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट को हर घर तक पहुंचाने के लिए नए और बेहद किफायती सर्विस पैक पेश किए हैं। कंपनी ने विशेष रूप से टीवी मनोरंजन पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए ‘टीवी-ओनली’ पैक लॉन्च किया है।
 

‘टीवी-ओनली’ पैक

इस पैक के तहत ग्राहक प्रभावी रूप से मात्र 400 रुपये प्रति माह की लागत पर टीवी मनोरंजन का लाभ ले सकते हैं। यह पैक 2 महीने और 5 महीने की अवधि के विकल्पों में उपलब्ध है। इसके माध्यम से ग्राहक 1,000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों का आनंद ले सकते हैं। इनमें 200 से अधिक HD चैनल और 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल शामिल हैं।

‘वाई-फाई-ओनली’ पैक

इसी तरह, केवल इंटरनेट की सुविधा चाहने वाले ग्राहकों के लिए ‘वाई-फाई-ओनली’ पैक भी उपलब्ध हैं। 30 Mbps स्पीड वाला पैक 2,200 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 450 रुपये प्रति माह है। वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला पैक 3,000 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 600 रुपये प्रति माह है।

 

ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जियोहोम ने ऑल-इन-वन  विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। 3-इन-1 कॉम्बो पैक में 30 Mbps की इंटरनेट स्पीड, 1,000  लाइव टीवी चैनल और 12 OTT ऐप्स की सुविधा उपलब्ध है। यह पैक 2,222 रुपये में 4 महीने के लिए लिया जा सकता है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 555 रुपये प्रति माह है।वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला कॉम्बो पैक 2,122 रुपये में 3 महीने के लिए उपलब्ध है। इसकी प्रभावी मासिक लागत 707 रुपये प्रति माह है।

 

इन नए पैक्स के माध्यम से जियोहोम ग्राहकों को उनकी जरूरतों और बजट के अनुरूप टीवी, मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट के किफायती तथा सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध करा रहा है।

डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री पर योगी सरकार का फोकस, जेवर में बनेगा अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

CM Yogi Adityanath

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के पास विकसित होगा हाईटेक हब
  • एनिमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, एआई और एक्सआर तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

 

लखनऊ/नोएडा, 3 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब डिजिटल क्रिएटिव और उभरती प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों पर भी विशेष फोकस कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics एवं Extended Reality) पार्क विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार, निवेश और नवाचार को भी नई गति मिलेगी।

 

इंडस्ट्री फोकस सेक्टर के रूप में विकसित होगा एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

योगी सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) को प्रदेश के फोकस सेक्टर (Focus Sector) के रूप में चिह्नित किया है। इसी रणनीति के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट यह पार्क विकसित कर रहा है। सरकार का उद्देश्य इस उभरते उद्योग को अत्याधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराकर घरेलू और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाना तथा युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर सृजित करना है।

 

डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री का नया केंद्र बनेगा उत्तर प्रदेश

प्रस्तावित एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क को आधुनिक तकनीकों से लैस एकीकृत डिजिटल क्रिएटिव इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां देश-विदेश की कंपनियों, स्टार्टअप्स, कंटेंट क्रिएटर्स और तकनीकी विशेषज्ञों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उत्तर प्रदेश में डिजिटल मनोरंजन उद्योग, मीडिया एवं कंटेंट उत्पादन को नई ऊंचाई मिलेगी।

 

इन अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लैस पार्क

प्रस्तावित पार्क में कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें प्रमुख रूप से एनिमेशन स्टूडियो, विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) स्टूडियो, गेम डेवलपमेंट एवं गेम डिजाइन सेंटर, मोशन कैप्चर स्टूडियो, वर्चुअल प्रोडक्शन सुविधाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कंटेंट निर्माण केंद्र, एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर) व ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) लैब, डिजिटल मीडिया एवं इमर्सिव कंटेंट डेवलपमेंट सेंटर शामिल होंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से एनिमेशन फिल्म, वेब सीरीज, गेमिंग, विज्ञापन, डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल ट्रेनिंग और इमर्सिव मीडिया जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

 

जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी का मिलेगा लाभ

यह पार्क नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट विकसित किया जाएगा। इससे देश-विदेश के निवेशकों, स्टूडियो, प्रोडक्शन हाउस और तकनीकी कंपनियों को बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण मिलेगा। एयर कार्गो, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक सुविधाओं का लाभ भी इस परियोजना को मिलेगा। एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क के विकसित होने से हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। एनिमेशन, गेमिंग, ग्राफिक्स, विजुअल इफेक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ेगी। इससे स्टार्टअप संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

 

भारत को वैश्विक एवीजीएक्स-एक्सआर हब बनाने की दिशा में अहम कदम

यीडा का यह पार्क भारत को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स तथा एक्सटेंडेड रियलिटी तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, तकनीकी और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नई पहचान देने के साथ-साथ राज्य को डिजिटल कंटेंट और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Friendship Day Special: प्यार दोस्ती है…., दोस्तों के साथ देखें ये 10 पुरानी यादें ताजा करने वाली फिल्में

Friendship Day Special: फ्रेंडशिप डे के मौके पर, जब हमारे करीबी दोस्त हमसे सैकड़ों मील दूर हों, तो हमें दोस्ती पर बनी कुछ खूबसूरत, गहरी और जिंदगी बदलने वाली फिल्में देखनी चाहिए। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, दोस्ती बनाए रखने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन आपको यह भी एहसास होता है कि अपनी जिंदगी के खास लोगों के संपर्क में रहना कितना जरूरी है। हाल की रिसर्च से पता चलता है कि करीबी दोस्त होने से तनाव कम होता है, आप सतर्क रहते हैं और ज्यादा समय तक जी रहे होते हैं।

शोले

शोले 1975 की एक शानदार बॉलीवुड फ़िल्म है। इस फ़िल्म की कामयाबी के पीछे कई वजहें थीं, जिनमें सबसे अहम थी इसकी बेहतरीन कास्ट, शैतान वीरू के रोल में धर्मेंद्र, हाजिर-जवाब जय के रोल में अमिताभ बच्चन, बदला लेने वाले ठाकुर बलदेव सिंह के रोल में संजीव कुमार, बातूनी बसंती के रोल में हेमा मालिनी, शांत विधवा राधा के रोल में जया भादुरी और कुख्यात गब्बर सिंह के रोल में अमजद खान।

मुन्ना भाई MBBS

‘मुन्ना भाई MBBS’ एक गैंगस्टर की कॉमेडी फ़िल्म है जो डॉक्टर बनना चाहता है। इस फ़िल्म में कॉमेडी और गंभीर, दोनों तरह के हिस्से हैं। यह एक मज़ेदार फ़िल्म है जिसमें मुन्ना भाई और सर्किट जैसे जाने-माने और पसंद किए जाने वाले किरदार हैं। ‘मुन्ना भाई MBBS’ असल में अपनी तरह की एक अलग फिल्म है। इसकी एक्टिंग और ह्यूमर इसे देखने लायक बनाते हैं, क्योंकि ज़्यादातर ड्रामैटिक सीन थोड़े ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं। जहाँ फ़िल्म के मज़ेदार हिस्सों के डायलॉग स्मार्ट और एंटरटेनिंग हैं, वहीं दुखद दृश्यों में डायलॉग बहुत खराब हैं।

सोनू के टिटू की स्वीटी

लव रंजन की फिल्मों को लैंगिक भेदभाव वाले कथानकों के लिए जाना जाता है, और सोनू के टिटू की स्वीटी भी इसका अपवाद नहीं है, बस फर्क इतना है कि इसमें दोस्ती बनाम रोमांस को मुख्य विषय बनाया गया है। सोनू के टिटू की स्वीटी दो पक्के दोस्तों, टिटू (सनी सिंह) और सोनू (कार्तिक आर्यन) की कहानी है, जो लगातार टिटू को गलत महिलाओं के चक्कर में पड़ने से बचाते रहते हैं। स्वीटी (नुसरत भरूचा) टिटू की जिंदगी में आती है और उसका प्यार टिटू की दुनिया को हिला देता है। हालांकि, सोनू को स्वीटी के साथ कुछ गड़बड़ होने का शक होता है और वह टिटू को दोबारा गलत हाथों में पड़ने से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करता है।

वीरे दी वेडिंग

सिर्फ़ महिलाओं पर आधारित फ़िल्में बनाने के पारंपरिक तरीके से हटकर, ‘वीरे दी वेडिंग’ ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी। ‘वीरे दी वेडिंग’ पारंपरिक महिला-केंद्रित सिनेमा से हटकर एक ‘असंस्कारी’ फ़िल्म है। इस फ़िल्म में अभिनेत्रियों के बीच गहरे और अटूट रिश्ते को दिखाया गया है। ‘वीरे दी वेडिंग’ भले ही हल्की-फुल्की फ़िल्म है, लेकिन इसकी कहानी के अलग-अलग पहलू इतनी खूबसूरती से बुने गए हैं कि वे बनावटी लगते हैं।

ये जवानी है दीवानी

यह हमारी नीरस जिंदगी में रंग भर देती है। सिनेमैटोग्राफी से लेकर संगीत, लेखन और कलाकारों तक, यह फिल्म दोस्ती का एक प्यारा उत्सव है। यह बॉलीवुड की अब तक की सबसे बेहतरीन दोस्ती पर आधारित फिल्मों में से एक है। यह वीडियो प्यार, विश्वास, क्षमा और मस्ती जैसे दोस्ती के आदर्शों को दर्शाता है।

दिल चाहता है

‘दिल चाहता है’ ताज़ी हवा में गहरी सांस लेने जैसा अनुभव देती है। यह दिखाती है कि किसी बिज़नेस में युवाओं को शामिल करना हमेशा एक अच्छी बात होती है। ‘दिल चाहता है’ बेहतरीन फ़िल्मों में से एक है। यह उन फ़िल्मों में से है जिन्हें पसंद न कर पाना मुश्किल है, खासकर इसलिए क्योंकि यह दिखाती है कि भारतीय सिनेमा के माध्यम का इस्तेमाल कैसे किया जाना चाहिए। फ़िल्म में बस कहीं भी गाना डाल देने के बजाय, निर्देशकों ने हर गाने को ऐसा बनाया है जो ज़रूरी लगे, देखने में दिलचस्प हो और कभी भी उबाऊ न लगे।

फुकरे

यह फ़िल्म आपको आपके कॉलेज के दिनों की याद दिला देगी। यह कहानी है चार ऐसे दोस्तों की जो जल्दी अमीर बनना चाहते हैं और अपने कॉलेज के दिनों का मज़ा लेना चाहते हैं। कॉलेज की लड़कियाँ और प्रॉम नाइट से लेकर इन लड़कों की हरकतों से सब कुछ गड़बड़ हो जाने तक, इस फ़िल्म में सब कुछ है।

छिछोरे

‘छिछोरे’ भावनाओं का एक उतार-चढ़ाव भरा सफ़र है, जो कॉलेज के दिनों की दोस्ती, प्यार, रैगिंग, बहस, मुक़ाबलों और अनगिनत यादों को सम्मान देता है। यह एक दिलचस्प कहानी के ज़रिए ज़रूरी संदेश देने वाली एक प्रासंगिक फ़िल्म है। ‘दंगल’ फ़िल्म के लिए मशहूर नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘छिछोरे’ एक ऐसी फ़िल्म है जिसमें बहुत कुछ है और यह बहुत मज़ेदार भी है; यह लंबे समय तक आपके ज़हन में बसी रहती है।

3 इडियट्स

राजकुमार हिरानी ने हमेशा किसी खास विषय पर बात की है और/या समाज की कमज़ोर मान्यताओं और नैतिकताओं पर खुलकर कटाक्ष किया है। यह वीडियो उस आम सोच पर आधारित है कि अगर आप साइंस के स्टूडेंट के तौर पर सफल होना चाहते हैं, तो आपको मेडिकल साइंस या इंजीनियरिंग में ही पढ़ाई करनी चाहिए। रैंचो, राजू और फरहान का सफ़र दर्दनाक और मज़ेदार दोनों है, और हमारा मन इससे कभी नहीं भरता। उनकी दोस्ती का सादगी भरा अंदाज़ हमारे दिलों को छू लेता है और हमें अपने कॉलेज के दोस्तों और उस एक अनोखे दोस्त की याद दिलाता है, जो हमेशा लीक से हटकर सोचने की हिम्मत रखता था।

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा

कल्की से शादी से पहले अभय देओल की बैचलर पार्टी के हिस्से के रूप में, तीन दोस्तों (ऋतिक, अभय देओल और फरहान अख्तर) का एक समूह स्पेन की रोड ट्रिप पर निकलता है। ऋतिक और फरहान दोनों ही निजी समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक शानदार लेखक की बदौलत इस साधारण सी कहानी को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया है। कलाकारों का अभिनय लाजवाब है। फिल्म में दीप्ति नवल और नसीरुद्दीन शाह भी हैं।

शादी और प्यार फिल्म के प्रमुख विषयों में से हैं। इसके बावजूद, बेहतरीन कॉमेडी आपको हर पल मनोरंजन देती है। हमें लगता है कि यह शानदार लेखन का प्रमाण है। दोस्ती के इस दिन, ला टोमाटीना उत्सव, स्पेन के समुद्र तट और कैटरीना कैफ, सभी देखने लायक हैं।

कुछ कुछ होता है

शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी की ये फिल्म आज भी लोगों की पसंदीदा बनी हुई है। फिल्में फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेशन काफी खूबसूरती से दिखाया गया है। वहीं फिल्म का डायलॉग प्यार दोस्ती है…आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

आगरा में बनेगा भव्य ‘शिव लोक थीम पार्क’, 8.81 करोड़ की लागत से होगा निर्माण; महाकाल लोक की तर्ज पर दिखेंगे भगवान शिव के 19 अवतार

योगी सरकार प्रदेश में बुनियादी ढांचे के साथ- साथ धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर आगरा के ऐतिहासिक बल्केश्वर पार्क को अब एक भव्य 'शिव लोक थीम पार्क' के रूप में विकसित किया जाएगा।

8.81 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जुलाई 2026 को किया था। शिलान्यास के बाद से इस कार्य में खासी तेजी आई है। आगरा नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग के फंड से इस पार्क को विकसित करने का पूरा लेआउट और विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है।

 

शिव के 19 अवतारों और शिव पुराण का सजीव चित्रण

यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन बल्केश्वर महादेव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बनने वाला शिव लोक थीम पार्क आस्था और आधुनिकता का एक अनूठा संगम होगा। इसका विजन भगवान शिव के 19 अवतारों पर आधारित एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य बनाना है। कुल 16,000 वर्ग मीटर में फैले बल्केश्वर पार्क के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालु शिव पुराण पर आधारित भगवान शिव की लीलाओं का सजीव चित्रण देख सकेंगे। पार्क के प्रवेश पर एक भव्य 'नंदी द्वार' का निर्माण होगा। इसके अलावा शिव स्तुति पर आधारित आकर्षक साउंड एंड लाइट शो और रंग-बिरंगे फव्वारे इस पार्क की दिव्यता में चार चांद लगाएंगे।

 

पर्यटन और आस्था का नया केंद्र बनेगा यह शिव लोक

इस शिव लोक थीम पार्क का हर हिस्सा इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह भक्ति, सौंदर्य और मनोरंजन का अद्भुत अनुभव प्रदान करे। इसके निर्माण से बल्केश्वर मंदिर में दर्शन और परिक्रमा करने आने वाले श्रद्धालुओं को विश्राम के लिए एक सुंदर और शांत वातावरण मिलेगा। साथ ही आगरा आने वाले पर्यटक अब ताजमहल के अलावा इस दिव्य शिव लोक का भी अनुभव कर सकेंगे। यह थीम पार्क ब्रज क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास में मील का प्रमुख पत्थर साबित होगा।

 

अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिव लोक थीम पार्क को 15वें वित्त आयोग के फंड से विकसित किया जा रहा है। 8.81 करोड़ रुपये के बजट से पुराने बल्केश्वर पार्क का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया जाएगा। हमारा उद्देश्य इसे एक अत्याधुनिक, सुंदर और शांतिपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

स्थानीय पार्षद मुरारी लाल अग्रवाल ने बताया कि आगरा नगर निगम

 

“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से बल्केश्वर क्षेत्र को यह बड़ी सौगात मिली है। इस शिव लोक थीम पार्क के निर्माण से न केवल बल्केश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और परिक्रमार्थियों को विश्राम का एक पवित्र स्थान मिलेगा, बल्कि इससे पूरे ब्रज क्षेत्र के पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। बल्केश्वर वासियों और पूरे आगरा के शिवभक्तों के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है। यह थीम पार्क हमारी धार्मिक आस्था को एक नई और भव्य पहचान देगा। 

बच्चे की परवरिश पर 1.39 करोड़ रुपये का दावा कर फंसे इन्फ्लुएंसर, लोगों ने लगा दी क्लास

क्या भारत में एक बच्चे की परवरिश पर करोड़ों रुपये खर्च हो सकते हैं? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी सवाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक कंटेंट क्रिएटर ने बच्चे की परवरिश का अनुमानित खर्च बताते हुए दावा किया कि माता-पिता को जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। हालांकि, उनके आंकड़ों से ज्यादा लोगों का ध्यान उस तुलना ने खींचा, जिसमें उन्होंने पैरेंटहुड की तुलना एक लग्जरी कार खरीदने से कर दी।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक गणना बताया, जबकि कई लोगों ने इस सोच को गलत और भावनाओं से परे करार दिया। आखिर इस वीडियो में ऐसा क्या कहा गया कि इंटरनेट पर बहस छिड़ गई और लोग दो हिस्सों में बंट गए? जानिए पूरा मामला।

क्यों चुना ‘Child-Free’ रहने का फैसला?

करीब 2.88 लाख फॉलोअर्स वाले विख्यात ने बताया कि उन्होंने खुद माता-पिता न बनने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्होंने बच्चे की परवरिश से जुड़े संभावित खर्चों का आकलन किया और इसी आधार पर अपनी सोच लोगों के सामने रखी।

गर्भावस्था से शुरू किया पूरा हिसाब

विख्यात ने सबसे पहले गर्भावस्था और डिलीवरी के खर्च का अनुमान लगाया। डॉक्टर की फीस, जांच, दवाइयां, मैटरनिटी कपड़े और निजी अस्पताल में डिलीवरी को मिलाकर उन्होंने करीब 3 लाख रुपये का खर्च बताया। इसके बाद उन्होंने बच्चे के शुरुआती दो साल में डायपर, दूध, टीकाकरण, खिलौने, किताबें, स्ट्रोलर, पालना और अन्य जरूरी सामान पर करीब 6 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया।

पढ़ाई बनी सबसे महंगी जिम्मेदारी

उनके अनुसार बच्चे की शिक्षा सबसे बड़ा खर्च है। प्री-स्कूल से लेकर स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल एक्टिविटीज को जोड़ते हुए उन्होंने करीब 33 लाख रुपये का अनुमान लगाया। उनका कहना था कि यह आंकड़ा दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के औसत खर्च के निचले स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

खाने से गैजेट्स तक, हर चीज का लगाया हिसाब

विख्यात ने 2 से 18 साल की उम्र तक खाने पर 15 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया। इसके अलावा ट्यूशन पर 9 लाख, इलाज और हेल्थकेयर पर 5.4 लाख, मनोरंजन पर 9 लाख, कपड़ों पर 7.2 लाख, गैजेट्स पर 4 लाख, खेल और अन्य गतिविधियों पर 8 लाख और ट्रांसपोर्ट पर भी करीब 8 लाख रुपये जोड़े।

बड़े घर का किराया भी जोड़ा

उन्होंने दावा किया कि बच्चे के लिए अतिरिक्त कमरे की जरूरत पड़ने पर बड़े घर का किराया भी बड़ा खर्च बन जाता है। इसी वजह से उन्होंने 18 साल में अतिरिक्त किराए के रूप में 32.4 लाख रुपये का अनुमान शामिल किया। विख्यात का कहना था कि इस हिसाब में कॉलेज की पढ़ाई, महंगाई और निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न को शामिल नहीं किया गया है। यानी वास्तविक खर्च इससे भी ज्यादा हो सकता है।

BMW से तुलना ने भड़का दिया इंटरनेट

अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने कहा कि बच्चे की परवरिश पर इतना पैसा खर्च करने के बजाय कोई व्यक्ति लगभग उसी रकम में BMW M4 Competition जैसी लग्जरी स्पोर्ट्स कार खरीद सकता है। यही तुलना लोगों को पसंद नहीं आई और वीडियो देखते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।

किसी ने कहा ‘गलत तुलना’, तो किसी ने बताया ‘बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया’

वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनके खर्च के अनुमान पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि बच्चे की परवरिश का खर्च हर परिवार के लिए अलग होता है और 1.39 करोड़ का आंकड़ा वास्तविकता से काफी दूर है। एक यूजर ने लिखा कि उसने अपने घर में छोटे बच्चे की परवरिश देखी है और इतना खर्च कभी नहीं हुआ।

‘बच्चे की मुस्कान की कोई कीमत नहीं’

कई लोगों ने इस बहस में भावनात्मक पक्ष भी रखा। एक यूजर ने लिखा कि उसके छह महीने के बेटे की एक मुस्कान किसी भी रकम से ज्यादा कीमती है और बच्चों की परवरिश को सिर्फ पैसों के तराजू में नहीं तौला जा सकता।

सोशल मीडिया पर जमकर हुई आलोचना

कई यूजर्स ने इन्फ्लुएंसर की सोच की आलोचना करते हुए कहा कि बच्चों की तुलना किसी लग्जरी कार से करना गलत है। कुछ लोगों ने इसे “बेकार तुलना” बताया, तो कुछ ने ऐसे कंटेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैरेंटहुड सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि भावनाओं, जिम्मेदारियों और खुशियों का भी नाम है।

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर जाने जीवन परिचय और 6 अनसुनी बातें

A photograph of Munshi Premchand, the titan of Indian literature

Munshi Premchand Biography: भारतीय साहित्य में जब भी यथार्थवाद, सामाजिक चेतना और आम आदमी के जीवन का जिक्र होता है, तो सबसे पहले मुंशी प्रेमचंद का नाम सामने आता है। हिंदी और उर्दू साहित्य के इस महान लेखक ने अपनी लेखनी से समाज की कुरीतियों, गरीबी, शोषण, जातिगत भेदभाव और ग्रामीण जीवन की सच्चाइयों को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। यही कारण है कि उन्हें 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है। हर वर्ष 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई जाती है। 

 

यहां जानें मुंशी प्रेमचंद जयंती 2026 पर हिंदी-उर्दू के महान साहित्यकार का जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, प्रमुख रचनाएं और उनसे जुड़े रोचक व अनसुने तथ्य।

 

मुंशी प्रेमचंद: संक्षिप्त जीवन परिचय

 

वास्तविक नाम- धनपत राय श्रीवास्तव

जन्म तिथि व स्थान- 31 जुलाई 1880, लमही (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

उपनाम/लेखन नाम- नवाब राय (उर्दू में), प्रेमचंद (हिंदी में)

माता-पिता- आनंदी देवी और अजायब राय (डाकघर में क्लर्क)

प्रमुख रचनाएं-

उपन्यास: गोदान, गबन, सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि

कहानी- ईदगाह, पूस की रात, दो बैलों की कथा, कफन

निधन- 8 अक्टूबर 1936, वाराणसी

 

मुंशी प्रेमचंद के जीवन से जुड़ी अनसुनी बातें

1. असली नाम 'धनपत राय' और पहला छद्म नाम 'नवाब राय'

बचपन में उनके चाचा उन्हें 'नवाब' कहते थे। जब उन्होंने उर्दू में लिखना शुरू किया, तो 'नवाब राय' नाम से ही अपनी रचनाएं प्रकाशित करवाते थे।

 

2. पहली किताब 'सोजे वतन'

1908 में उनका पहला कहानी संग्रह 'सोजे वतन' (देश का दर्द) उर्दू में छपा। इसमें देशभक्ति की भावना इतनी तीव्र थी कि ब्रिटिश सरकार ने इसे राष्ट्रद्रोही मानकर प्रतिबंधित कर दिया और इसकी सभी प्रतियां जला दीं। इसके बाद हमीरपुर के दरोगा ने उन्हें बिना सरकारी इजाजत न लिखने की सख्त चेतावनी दी।

 

3. 'प्रेमचंद' नाम कैसे पड़ा?

अंग्रेजी हुकूमत की बंदिशों से बचने के लिए उनके स्नेही मित्र और 'जमाना' पत्रिका के संपादक दयानारायण निगम ने उन्हें एक नया नाम सुझाया- 'प्रेमचंद'। इसके बाद उन्होंने इसी नाम से हिंदी में लिखना शुरू किया।

 

4. बाल-विवाह का विरोध और विधवा-विवाह

प्रेमचंद सामाजिक कुरीतियों के सख्त खिलाफ थे। अपनी पहली शादी के असफल होने के बाद, उन्होंने 1906 में समाज के विरोध की परवाह न करते हुए एक बाल-विधवा शिवरानी देवी से विवाह किया। शिवरानी देवी स्वयं एक लेखिका थीं और उन्होंने प्रेमचंद पर 'प्रेमचंद घर में' नाम से प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।

 

5. महात्मा गांधी के आह्वान पर सरकारी नौकरी छोड़ी

प्रेमचंद शिक्षा विभाग में डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। 1921 में जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया, तो प्रेमचंद ने अपनी स्थिर सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूर्णकालिक लेखन व देश सेवा में जुट गए।

 

6. 'मुंशी' शब्द कैसे जुड़ा?

'मुंशी' उनका नाम नहीं बल्कि एक सम्मानजनक उपाधि थी। जब वे 'हंस' पत्रिका का संपादन कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (K. M. Munshi) के साथ करते थे, तब कवर पेज पर 'मुंशी, प्रेमचंद' छपता था, जिसे बाद में लोगों ने एक साथ 'मुंशी प्रेमचंद' कहना शुरू कर दिया।

 

'साहित्य वही है जो हमारे अंदर सौंदर्य की भावना जगाए, हममें गति, शक्ति और बेचैनी पैदा करे, सुलाए नहीं।' – मुंशी प्रेमचंद

 

मुंशी प्रेमचंद केवल एक लेखक नहीं, बल्कि भारतीय समाज के संवेदनशील इतिहासकार और जनमानस के साहित्यकार थे। उनकी रचनाएं आज भी समाज को सोचने, बदलने और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती हैं। उनकी जयंती हमें यह याद दिलाती है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रभावशाली शक्ति भी है। उनकी जयंती के अवसर पर देशभर में साहित्यिक गोष्ठियां, संगोष्ठियां, पुस्तक प्रदर्शनियां और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

सेलेब्रिटीज के पीछे का सच काला भी!

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

आए दिन हमें यह देखने को मिलता है कि उद्योग जगत, मनोरंजन जगत, आध्यात्मिक संस्थाओं और खेल जगत के कुछ नामी-गिरामी हस्तियों के नाम बार-बार ‘मनी लॉन्ड्रिंग’, फर्जी सौदों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामलों में चर्चा में आते हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी मेहनत, प्रतिभा और लोकप्रियता से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीता है। फिर भी इनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी अच्छी छवि को दाव पर लगाकर काले धन के सौदों में उलझ जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल उनके व्यक्तिगत पतन का संकेत है, बल्कि पूरे समाज में भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत करती है।

गौरतलब है कि इन हस्तियों के पास पहले से ही करोड़ों की अपार संपत्ति, ब्रांड एंडोर्समेंट, फिल्मों या मैचों से की गई कमाई और सामाजिक प्रतिष्ठा होती है। फिर भी वे अवैध गतिविधियों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं? एक बड़ा कारण है लोभ। सफलता के बाद भी और अधिक धन और अधिक पावर की भूख कभी नहीं मिटती। कई बार वे सोचते हैं कि उनकी छवि इतनी मजबूत है कि कोई उन पर उंगली नहीं उठाएगा। कुछ लोग अपने व्यवसाय को ‘विविधीकरण’ का नाम देकर रियल एस्टेट, शेल कंपनियों, दान के नाम पर काले धन को सफेद करना या विदेशी खातों के जरिए धन छिपाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बनाई हुई प्रतिष्ठा एक सुरक्षा कवच लगती है, लेकिन असल में यह उनके गिरने का कारण बन जाती है।

कई मामलों में यह भी देखने को मिलता है कि ये लोग अपने सरकारी संपर्कों और प्रभावशाली लोगों से परिचित होने के कारण अत्यधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगी या मामला दबा दिया जाएगा। यह आत्मविश्वास अक्सर गलत साबित होता है, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है। लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो। फिर भी व्यवहार में कई बार प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच धीमी पड़ जाती है या सबूतों की कमी का हवाला देकर मामले कमजोर हो जाते हैं।

भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और अन्य एजेंसियां जब ऐसे मामलों की जांच करती हैं, तो अक्सर आरोपियों को सजा नहीं दिला पाती। इसके कई कारण हो सकते हैं; जटिल कानूनी प्रक्रियाएं, सबूतों की कमी, गवाहों का दबाव में आना या लंबी अदालती सुनवाई। कभी-कभी राजनीतिक प्रभाव या संसाधनों की कमी भी जांच को प्रभावित करती है। लेकिन ऐसे ‘जाहिर कारणों’ से बरी होना या मामला रुक जाना समाज में गलत संदेश देता है। आम आदमी सोचता है कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। यह धारणा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

इस स्थिति में अदालतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई करे, सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन करे और दोषियों को उचित सजा दे। विशेष अदालतें या फास्ट-ट्रैक प्रक्रियाएं मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराधों के लिए बनाई जा सकती हैं। अदालतें एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दे सकती हैं कि जांच में देरी न की जाए और कोई भी प्रभाव जांच को बाधित न करे। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके जांच को प्रभावित करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। न्याय तभी प्रभावी होगा जब वह बिना भेदभाव के लागू हो।

ज़रूरत है तो इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाना की। जनता को समझना चाहिए कि सेलेब्रिटीज की चमकदार जिंदगी के पीछे कई बार काले कारोबार की छाया होती है। मीडिया और जागरूक नागरिकों को ऐसे मामलों की लगातार निगरानी करनी चाहिए। एजेंसियों को चाहिए कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। शिकायत दर्ज होने के बाद प्रारंभिक जांच तुरंत शुरू होनी चाहिए और सबूतों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। यदि शिकायत में गंभीर आरोप हों और उसके ठोस प्रमाण भी संलग्न हों तो जांच एजेंसियों जिम्मेदारी हो कि शिकायतकर्ता की पहचान को गुप्त रखा जाए।

कानून के जानकार मानते हैं कि शिकायत दर्ज कराने के लिए ठोस सबूत जरूरी होते हैं।

सामान्य दस्तावेजी सबूतों में बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी दस्तावेज, कंपनी रजिस्ट्रेशन पेपर्स, इनकम टैक्स रिटर्न और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। डिजिटल सबूत आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण हैं; ऑडी-वीडियो रिकॉर्डिंग, ईमेल, व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप के चैट, सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल वॉलेट के लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन, क्लाउड स्टोरेज में सेव की गई फाइलें और सर्वर लॉग। ये सबूत समय-स्टैम्प के साथ उपलब्ध होने चाहिए और ‘चेन ऑफ कस्टडी’ बनाए रखते हुए पेश किए जाने चाहिए। इसके साथ ही गवाहों के बयान और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। शिकायतकर्ता को चाहिए कि वह सभी उपलब्ध जानकारी व्यवस्थित रूप से एजेंसी को सौंपे और जांच में सहयोग करे।

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। तभी हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ सकेंगे जहां प्रतिष्ठा और धन किसी को कानून से ऊपर न रख सकें। काले धन और अवैध सौदों का चक्र तभी टूटेगा जब हर नागरिक, हर संस्था और हर अदालत अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।

भीषण गर्मी और जंगल की आग से झुलसता यूरोप, 40 डिग्री के पार हो सकता है तापमान

Europe Fire Calamity


यूरोप के कई देश इस समय अपने यहाँ भीषण गर्मी के कारण जंगलों में लगी आग (दावानल) की रोकथाम करने और आसपास के शहरों एवं बस्तियों को उनसे बचाने में लगे हैं।

दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के अटलांटिक तट पर के जंगलों में लगभग एक सप्ताह से आग धधक रही है। अधिकारी हालांकि स्थिति को कुछ हद तक स्थिर बता रहे हैं, लेकिन यह चिंता भी बनी हुई है कि आग एक बार फिर बेकाबू हो सकती है।

 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने, वहाँ के बोर्दो (Bordeaux) शहर की ओर बढ़ रही आग की भयावह घटनाओं को “दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सबसे भीषण जंगल की आग” (दावानल) बताया। बोर्दो की उनकी यात्रा के समय आग, शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर रह गई थी।

टूरिस्ट इलाकों को खाली कराया गया

सरकारी अधिकारी बोर्दो के उत्तर-पश्चिम में स्थित कैंपिंग की जगहों, हॉलिडे रिसॉर्ट और मनोरंजन पार्क खाली करवा रहे हैं। इस आदेश से आस-पास के इलाके में लगभग 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं, हालांकि प्रसिद्ध समुद्र तटीय रिसॉर्ट इसमें शामिल नहीं है। मौसम में संभावित परिवर्तन को देखते हुए सावधानी के तौर पर लोगों को हटाया जा रहा है।

 

22 जुलाई के बाद से, आग ने बोर्दो के पास के प्रभावित इलाके में लगभग 42,000 हेक्टेयर (42,000 वर्ग मीटर) ज़मीन को तबाह कर दिया है— अब तक 2,20,000 से ज़्यादा स्थानीय लोगों और टूरिस्टों को वहाँ से हटा कर सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया है।

तापमान फिर से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की आशंका

राष्ट्रपति माक्रों को भरोसा है कि “हम लोगों की सुरक्षा की यह लड़ाई जीतेंगे।” बोर्दो के पास के इलाके में लगभग 2,500 अग्निशमन कर्मी (फायरफाइटर्स) तैनात हैं, उनकी मदद के लिए करीब 1,500 सैनिक भी वहाँ भेजे गए हैं। जर्मनी ने फ्रांस के इस संकटग्रस्त इलाके में सामान आदि पहुँचाने के लिए दो परिवहन हेलीकॉप्टर और एक परिवहन विमान भेजा है।

 

कई अन्य यूरोपीय देश भी संकट की इस घड़ी में फ्रांस की सहायता कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता तपती लू की भावी लहर को लेकर है। मौसम विभाग 'मेटियो-फ़्रांस' के अनुसार, देश के बड़े हिस्सों में तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस या अधिक तक पहुँच सकता है। आपातकालीन टीमों ने बोर्दो के पास के जंगल में 100 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी 'फ़ायरब्रेकर' (आग को फैलने से रोकने वाली खाली जगह) बनाई है; इस उपाय का उद्देश्य आग की लपटों को दूसरे इलाकों में फैलने से रोकना है।

आग अभी तक काबू में नहीं

अग्निशमन कर्मी 29 जुलाई तक आग के फैलाव को रोकने में किसी हद तक सफल रहे हैं। इस बीच, पास के बिस्कारोस इलाके में रहने वाले लगभग 15,000 लोग अपने घरों को लौट पाए हैं, हालाँकि आग अभी तक पूरी तरह से काबू में नहीं आई है। एक अधिकारी ने बताया कि इस भीषण आग को पूरी तरह बुझाने में “कई हफ़्ते या महीने भी” लग सकते हैं।

 

आमतौर पर गर्मियों के महीनों और छुट्टियों के मौसम में गिरोंद (Gironde) नाम के इलाके में सबसे ज़्यादा पर्यटक आते हैं, लेकिन यह इलाका भी जंगल की आग से प्रभावित हुआ है। क्षेत्रीय प्रशासन ने छुट्टियां मनाने आए लोगों और यात्रियों से इस इलाके में न जाने की अपील की है और हॉलिडे कैंप, स्काउट कैंप और दिव्यांगों के लिए खास कैंपों का संचालन रोक दिया है। पूरे इलाके में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई है।

स्पेन में ख़तरा फिर से बढ़ने की आशंका

बढ़ते तापमान से स्पेन के अविला (Ávila) प्रांत में—जो राजधानी मैड्रिड के पश्चिम में है—और मैड्रिड व तोलेदो के आस-पास के इलाकों में हालत फिर से बिगड़ने की आशंका है। इन इलाकों में जंगल की आग से अब तक 80,000 हेक्टेयर (वर्ग मीटर) से ज़्यादा जंगलों और झाड़ियों वाला इलाका जलकर खाक हो चुका है। सावधानी के तौर पर लगभग 90,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है।

 

मैड्रिड में संकट प्रबंधन समिति की एक बैठक के बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कहा, “हमें आशा की किरण दिखाई दे रही है।” उन्होंने कहा कि सरकार तब तक सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगी “जब तक आग की आखिरी लपट बुझ न जाए।” 

सांचेज़ सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं

27 जुलाई के बाद से स्पेन में आग को और अधिक फैलने से रोक दिया गया है। आपातकालीन टीमें पूर्वी स्पेन के कास्तेयों प्रांत में जंगल की आग बुझाने में अभी भी जुटी हुई हैं; वहां लगभग 16,000 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

 

स्पेन में भी तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस तक या उससे भी अधिक पहुंचने की आशंका है। स्पेन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इससे पूरे देश में आग लगने का ख़तरा बहुत ज़्यादा या चरम स्तर तक बढ़ जाएगा। इस अनुमान को देखते हुए, प्रधानमंत्री सांचेज़ ने देश भर के सभी नागरिकों से “बहुत ज़्यादा सावधानी बरतने और हर संभव एहतियात अपनाने” की अपील की है।

 

पड़ोसी देश पुर्तगाल में भी, 27 जुलाई से 1,000 से ज़्यादा अग्निशमन कर्मी तैनात किए गए हैं। देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों के जंगलों में भी आग लग गई है। उत्तर में ब्रागा और ब्रागांका के आस-पास के इलाके तथा मध्य पुर्तगाल में संतारम के पास के इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ज़्यादा तापमान के कारण, लगभग पूरे देश में आग लगने का ख़तरा अधिकतम या बहुत ही ऊँचे स्तर पर है। मौसम एजेंसी के अनुसार, तटीय इलाकों में यह खतरा थोड़ा कम है।

फ्रांस में पहली बार देखी गई एक दुर्लभ प्रघटना

धुएं और राख के कई किलोमीटर ऊंचे बादल, बिजली का कड़कना और अनिश्चित हवाएं: दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी आग एक ऐसी प्राकृतिक प्रघटना को जन्म दे रही है जो आग बुझाने वालों के साहस की परीक्षा ले रही है।

 

जंगल की आग से पैदा हुआ एक ऐसा तूफ़ान जो खुद ही मौसम तंत्र (वेदर सिस्टम) वाला बेहद गर्म बादल बनाता है— पायरोक्यूम्यलोनिम्बस (pyrocumulonimbus)—उसे फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में लगी विनाशकारी आग के दौरान पहली बार देखा गया है। यह बादल, जिसे क्यूम्यलोनिम्बस फ्लेमजेनिटस (cumulonimbus flammagenitus) भी कहा जाता है, तब बनता है जब ज़मीन के पास की हवा इतनी ज़्यादा गर्म हो जाती है कि

 

वह बहुत तेज़ी से ऊपर उठने लगती है—अपने साथ धुआं, जलवाष्प और राख ले जाती है—और अक्सर कई किलोमीटर ऊपर के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) तक पहुँच जाती है। वहाँ, यह मिश्रण ठंडी हवाओं के संपर्क में आता है और अपना खुद का ऐसा मौसम तंत्र बनाता है, जिसमें आग को और अधिक भड़काने वाली तेज़ हवाएँ चलती हैं। इस बादल से ज़मीन पर अक्सर बिजली भी गिरती है और साथ में गड़गड़ाहट की आवाज़ भी होती है।

NASA उसे “आग उगलने वाले ड्रैगन्स” कहता है

“आग उगलने वाले ड्रैगन्स” को—जैसा कि NASA इन्हें कहता है— पहले मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में ज्वालामुखी पर्वत फटने और बड़े पैमाने पर लगी आग के दौरान देखा गया है। उन इलाकों में यह घटना बार-बार होती है, लेकिन फ्रांस में यह “अभूतपूर्व” है।

 

आमतौर पर इस तरह की 'आग के तूफ़ान' (firestorm) को बुझाना या काबू में करना संभव नहीं होता, क्योंकि आग उगलती हवाएं लगातार अपनी दिशा बदलती रहती हैं।

 

नतीजा यह होता है कि आग हर दिशा में फैलती है और कई जगहों पर आग की लपटें एक साथ उठने लगती हैं, जिससे स्थिति का अंदाज़ा लगाना पूरी तरह से मुश्किल हो जाता है। 

निपटने के दो ही संभावित तरीके

इससे निपटने के केवल दो ही संभावित तरीके ज्ञात हैं। या तो बरसात शुरू हो जाए—हालांकि इसके लिए तीन दिनों तक भारी वर्षा होनी चाहिए—या फिर आग को ऐसी जगह की ओर मोड़ने का कोई तरीका मिले कि वह खुद ही बुझ जाए, जैसा कि बड़वानल वाली आग के समय समुद्रों में होता है।

 

दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी भीषण आग के प्रसंग में कहा जाता है कि कि दमकलकर्मियों के पास पीछे हटने के अलावा कोई चारा नहीं था। “हमें यह मानना होगा कि प्रकृति की यह ताकत हमारे नियंत्रण से बाहर है। यह युद्ध जैसी स्थिति है, जहां हम लगातार आग की चपेट में हैं और हर किसी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है।” 

 

ऐसी स्थिति में केवल “धैर्य और संयम” ही काम आता है। आग बुझाने की सीधी कोशिशों के अलावा दमकलकर्मी यही कर सकते हैं कि वे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा करें और जानवरों को आग की लपटों से दूर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचायें। इस बीच स्पेन से लेकर इटली, ग्रीस और तु्र्की तक के कई देश अपने जंगलों में लगी आग से जूझ रहे हैं। नदियां सूख रही हैं और 30 जुलाई के दिन, पश्चिमी यूरोप में आँधी और तूफ़ान आने की भविष्यवाणी आग में घी पड़ने का काम कर सकती है।