दिल्ली में सोना 2 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा, चांदी एक दिन में 8500 रुपये उछली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली। सोने का भाव 1,900 रुपये के उछाल के साथ दो हफ्ते की ऊंचाई यानी 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। ग्लोबल मार्केट से पॉजिटिव संकेतों और स्ट्रॉन्ग डिमांड की वजह से कीमतों को सपोर्ट मिला। चांदी में भी जबर्दस्त तेजी दिखी।

चांदी एक दिन में 8500 रुपये चढ़ी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 जुलाई को चांदी 8,500 रुपये की तेजी के साथ 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी में यह तेजी का लगातार छठा सत्र था। ट्रेडर्स ने कहा कि सोने में भी यह तेजी का लगातार तीसरा सत्र था। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के पॉजिटिव संकेतों के साथ ही स्ट्रॉन्ग लोकल डिमांड और पिछले हफ्ते कीमतों में गिरावट के बाद अच्छी खरीदारी का असर कीमतों पर पड़ा।

फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “बुधवार को सोने में तेजी रही। इससे कीमतें दो हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गई। इसमें फिजिकल सोने की डिमांड में रिकवरी का भी हाथ है।” उन्होंने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी निवेश बढ़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया गिरावट के बाद सोने को लेकर सेंटिमेंट बदल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.16 फीसदी यानी 47 डॉलर के उछाल के साथ 4,125 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी में भी करीब 1 फीसदी की तेजी रही, जिससे यह 59.32 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। बीते कुछ हफ्तों में सोने और चांदी पर काफी दबाव देखने को मिला था।

क्रूड ऑयल 5 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंचा

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च के एवीपी कायनात चेनवाला ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन और क्रूड ऑयल की कीमतें पांच हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच जाने के बावजूद सोने और चांदी में तेजी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कूटनीति से मामले के समाधान के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका बातचीत शुरू करना चाहता है लेकिन चीन इसके लिए तैयार नहीं है। इससे इनवेस्टर्स ‘इंतजार करो और देखो’ की पॉलिसी अपना रहे हैं।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ेगी महंगाई

22 जुलाई को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल को पार गई। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है या लंबे समय तक कीमतें इस लेवल पर बनी रहती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। अमेरिका में फेडरल रिजर्व उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

 Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार हुआ बेहाल, जानिए आगे क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार हुआ बेहाल, जानिए आगे क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार बीमार नजर आ रहा है। कच्चा तेल 94 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। निफ्टी 200 अंक टूटकर 24000 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी में 800 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई है। बैंक निफ्टी 200 DEMA के नीचे फिसल गया है। ICICI, SBI और HDFC बैंक मेन विलेन रहे हैं। मिडकैप-स्मॉलकैप का हाल भी बेहाल है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX उछलकर 13 के पार चला गया है।

FMCG, ऑटो को छोड़कर सभी सेक्टर लाल निशान में दिख रहे हैं। रियल्टी शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली आई है। रियल्टी इंडेक्स करीब तीन फीसदी फिसला है। साथ ही सरकारी बैंक, IT और फाइनेंशियल इंडेक्स भी करीब 1.5 फीसदी गिरे हैं। वहीं चुनिंदा ऑटो शेयरों में अच्छी खरीदारी दिखी है। दमदार नतीजों के बाद Bajaj Auto और TVS Motor में जोरदार रफ्तार देखने को मिली है।

ट्रंप टैरिफ के डर से अब तक मजबूती दिखा रहे फार्मा सेक्टर के भी सेंटीमेंट खराब हुए हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। ऑरो फार्मा, जायडस लाइफ और ल्यूपिन में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

नतीजों के लिहाज से कल बेहद अहम दिन है। निफ्टी की तीन कंपनियां इंफोसिस, इंडिगो और सिप्ला Q1 रिजल्ट्स पेश करेंगी। इंफोसिस का Constant Currency रेवेन्यू 1.8% बढ़ सकता है। मार्जिन में भी हल्का सुधार संभव है। साथ ही एम्फैसिस, सोना BLW समेत वायदा के 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

ऐसे में बाजार की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार के लिए आज बेहद खराब दिन रहा। निफ्टी,बैंक निफ्टी, IT, फार्मा सभी नीचे हैं। मिड और स्मॉल कैप में भी गिरावट है। बैंक निफ्टी ने 57,500 तोड़ते ही बड़ी गिरावट दी है। सुबह 57500 टूटने पर शॉर्ट करने का हमारा नजरिया भी था। अब 57,000 पर आखिरी बड़ा सपोर्ट है। निफ्टी भी इंट्रा डे में 24,000 के नीचे आया। अगर यहां टिका तो वापस 23,800 तक फिसलने का रिस्क खुलेगा। कच्चे तेल में उबाल सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। सुबह हमने बात की थी कि सभी बड़े सेक्टर्स अब थक रहे हैं।

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बाजार: अब क्या?

ये बाजार थकाने वाला है। ना ये चल रहा है और ना ही तेजी से टूट रहा है। एक ही रेंज में बार-बार दोनों तरफ के लेवल टेस्ट हो रहे हैं। बाजार में बड़ी रैली के लिए कच्चे तेल की तेजी थमनी जरूरी है। अगर कच्चे तेल में ऐसे ही तेजी रही तो 23,800 पर भी रिस्क रहेगा। बैंक निफ्टी में सबसे ज्यादा दिक्कत है। HDFC बैंक सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। बंधन बैंक के एक्सीडेंट से भी सेंटीमेंट खराब हुआ है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,850-23,950 पर सपोर्ट और 24,150-24,200 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 पर सपोर्ट और 57,500-57,800 पर रेजिस्टेंस है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पलटे भारत आ रहे 2 तेल टैंकर, लाल सागर में भी बढ़ा संकट!

Houthi Warning Saudi Arabia Red Sea: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच लाल सागर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Militia) द्वारा सऊदी अरब को दी गई ‘आंख के बदले आंख’ की खुली चेतावनी के बाद भारत और चीन आ रहे तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर यू-टर्न लेना पड़ा है।

पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉक के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में लाल सागर के इस अहम समुद्री मार्ग पर नया संकट गहराने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर भड़क सकती हैं। जानिए लाल सागर में क्या हुआ और इसका क्या असर हो सकता है।

किन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न?

रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक, जिन तीन तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला है, उनमें से दो सीधे भारत आ रहे थे:

Rodos (रोडोस): लगभग 7 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह टैंकर मंगलवार को लाल सागर में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की तरफ मुड़ गया।

Amazon (अमेजन): भारत की ओर आ रहा यह स्वेजमैक्स टैंकर भी हुथियों की धमकी के बाद वापस स्वेज की ओर लौट गया।

Xin Long Yang (सिन लोंग यांग): चीन जा रहे इस बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन इसने भी आगे बढ़ने के बजाय स्वेज का रास्ता चुन लिया।

हूती विद्रोहियों की ‘आंख के बदले आंख’ वाली चेतावनी क्या है?

यमन के हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब ने यमन पर ‘अन्यायपूर्ण और दमनकारी’ घेराबंदी की है, जिसके जवाब में उन्होंने ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत के तहत सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी तुरंत लागू कर दी है।

हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी है कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह से सामान लोड या अनलोड न करें। अगर कोई जहाज ऐसा करता है, तो उसे किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जाएगा।

जहाजों ने ट्रांसपोंडर बंद किए, बढ़ी हलचल

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद लाल सागर और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यानबू पोर्ट के आसपास नौवहन काफी जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार से लाल सागर में तैर रहे और यानबू पोर्ट पर लोडिंग कर रहे कई तेल टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने और हुथी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं।

वैश्विक शिपब्रोकर क्लार्कसन्स (Clarksons) के अनुसार, अगर हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर लाल सागर के ट्रैफिक पर पड़ता है, तो कच्चे तेल के जहाजों के रास्तों में बड़ा फेरबदल होगा और यानबू से निकलने वाले तेल को यूरोप की तरफ डायवर्ट करना पड़ सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और सऊदी अरब से आता है। भारत आ रहे दो टैंकरों (Rodos और Amazon) के रास्ता बदलने से रिफाइनरियों तक क्रूड पहुंचने में देरी हो सकती है। लाल सागर में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल भाड़ा काफी बढ़ सकता है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा हो सकता है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से लगी आग, आपकी जेब पर भी पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 22 जुलाई को बड़ी तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 2.76 फीसदी चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.83 फीसदी की तेजी के साथ 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार और भारत की करेंसी रुपये पर भी पड़ा। निफ्टी में 0.76 फीसदी यानी 186 अंक की गिरावट दिखी, जबकि सेंसेक्स करीब 700 अंक क्रैश कर गया।

क्रूड में उछाल का असर रुपये पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले यह 11 पैसे गिरकर 96.36 के लेवल पर आ गया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल की वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई है। अमेरिकी ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमला जारी रखा। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशान बना रहा है। टेंशन बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही बाधित है। इससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं।

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन फिर बढ़ने से क्रूड की कीमतें चढ़ने लगी हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से जून तिमाही में भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा रहा। भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।

पहले ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस प्रति लीटर 102.12 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये पहुंच गया है। दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर से पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

महंगे पेट्रोल और डीजल से महंगाई बढ़ने का डर है। मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन खासकर डीजल महंगा होने से कई चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के लिए होता है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से फल-सब्जी सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती है। पहले से ही प्याज सहित कई चीजों की कीमतों में उछाल दिख रहा है। इससे परिवारों के बजट पर बोझ बढ़ गया है।

पाकिस्तान में पेट्रोल 4.93 और डीजल 7.15 रुपया महंगा:पेट्रोल 320.73 और हाई-स्पीड डीजल 367.21 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 22 जुलाई से लागू

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 4.93 रुपया प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में 7.15 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें 22 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 320.73 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 367.21 रुपया प्रति लीटर हो गई है। भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.88 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है। अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं: अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे। डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

Asian Market Today: सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी से कोस्पी 5% से ज्यादा उछला, जानें एशिया मार्केट में और कहां है आज हलचल

Asian Market Today: आज ग्लोबल बाजार में तेजी देखने को मिली। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में लगातार बढ़त की वजह से बुधवार को एशियाई मार्केट लगातार दूसरे सेशन में आगे बढ़े। यह तेजी तब आई जब US और ईरान के बीच लड़ाई में हालिया बढ़ोतरी के बाद वेस्ट एशिया में नए टेंशन के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ीं।

जापान का निक्केई 225 1.81% बढ़ा। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.45 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.85 फीसदी चढ़कर 45,050.66 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.86 फीसदी की गिरावट के साथ 24,901.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 5.24 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.41 फीसदी की बढ़त के साथ 3,880.99 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसमें नैस्डैक सबसे ज़्यादा बढ़त पर रहा, जिसे सेमीकंडक्टर शेयरों में तेजी से बढ़ावा मिला। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 385.38 पॉइंट्स या 0.74% बढ़कर 52,224.64 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 65.92 पॉइंट्स या 0.89% बढ़कर 7,509.20 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 329.13 पॉइंट्स या 1.29% बढ़कर 25,837.21 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक प्राइस में 1.97% की बढ़ोतरी हुई, AMD के शेयर 8.11% बढ़े, इंटेल के शेयर 8.64% बढ़े, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 12.17% बढ़े, ब्रॉडकॉम 2.21% बढ़ा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.13% गिरे, टेस्ला के स्टॉक प्राइस में 2.53% की बढ़ोतरी हुई और स्पेसएक्स के शेयर 3.08% बढ़े।

US-ईरान युद्ध

US मिलिट्री ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 11वें दिन हमला किया है, जिसमें ईरानी मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताएं, एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि US जल्द ही पिकैक्स माउंटेन के पास के इलाके को निशाना बनाएगा।

ट्रंप टैरिफ

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2028 से इम्पोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि 1 अगस्त से, US दो साल तक देश में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ लगाए रखेगा, जिसके बाद इसे एक साल के लिए 100% और उसके बाद 200% कर दिया जाएगा।

जापान ट्रेड डेफिसिट

कमजोर येन के बीच जून में जापान का ट्रेड डेफिसिट बढ़ गया। जून में वैल्यू के हिसाब से कुल एक्सपोर्ट में YoY 19.3% की बढ़ोतरी हुई। जून में इम्पोर्ट में एक साल पहले के मुकाबले 25.4% की बढ़ोतरी हुई। इस वजह से, जून में जापान का ट्रेड डेफिसिट 406.9 बिलियन येन ($2.49 बिलियन) रहा, जबकि डेफिसिट का अनुमान 120 बिलियन येन था।

जापानी बॉन्ड यील्ड

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सबसे लंबे समय के कर्ज की बिक्री से पहले महंगाई की चिंता बढ़ने से जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड बढ़ी। बेंचमार्क 10-साल की JGB यील्ड 2.5 bps बढ़कर 2.745% हो गई। पांच-साल की यील्ड 2 bps बढ़कर 1.960% हो गई और दो-साल की यील्ड 1.435% पर स्थिर रही। 40-साल के बॉन्ड पर यील्ड 3.89% पर बिना बदले रही।

क्रूड में उछाल

US के ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर हमले तेज करने के बाद सप्लाई में और रुकावट की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.22% बढ़कर $92.12 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.09% बढ़कर $85.26 प्रति बैरल हो गया।

आज का सोने का रेट

पिछले सेशन में लगभग 2% की तेज़ी के बाद सोने की कीमतों में बढ़त जारी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.1% बढ़कर $4,080.79 प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत $58.83 प्रति औंस पर स्थिर रही।

डॉलर

डॉलर एक हफ़्ते के हाई के पास रहा। US डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 101.20 पर था। येन के मुकाबले डॉलर 0.1% गिरकर 163.06 येन पर आ गया। यूरो आखिरी बार $1.1401 पर था, और स्टर्लिंग $1.3385 पर आ गया।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचा कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड $92 के पार, जानें वो वजह जिनके कारण बढ़ रही है कीमतें

Crude Oil Price: वेस्ट एशिया में मीडिएशन बातचीत में कोई खास प्रोग्रेस नहीं होने और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के भी इसकी उम्मीदों को कम आंकने और साथ ही और हमलों की धमकी देने के बाद, क्रूड ऑयल की कीमतों में रात भर और बुधवार, 22 जुलाई को एशिया के शुरुआती ट्रेडिंग में भी बढ़त जारी रही।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें $92 प्रति बैरल के लेवल को पार कर गईं, जो जून की शुरुआत में देखे गए लेवल तक पहुंच गईं। US क्रूड, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), अब $85 प्रति बैरल के लेवल के पास ट्रेड कर रहा है, जो लगातार चौथे सेशन में चढ़ रहा है।

यमन में हूतियों की इस धमकी के बाद कि अगर और हमले हुए तो वे रेड सी और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में शिपिंग को रोक देंगे, तेल की कीमतों में बढ़त जारी रही। उन्होंने सऊदी अरब पर मैरीटाइम बैन भी लगा दिया है, और शिप मालिकों को सऊदी पोर्ट्स पर न आने के लिए ईमेल भेजे हैं।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि अगर यमन रेड सी में ट्रैफिक को रोकने की कोशिश करता है तो US जवाब देगा। उन्होंने जल्द ही पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने की अपनी धमकी भी दोहराई, जिस पर US को शक है कि वह ईरान की न्यूक्लियर साइट है।

सालों में अपनी सबसे खराब तिमाही के बाद तेल की कीमतों में तेज़ी आई है, क्योंकि US और ईरान के बीच सीज़फ़ायर और होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफ़िक बढ़ाने के लिए MoU साइन करने के बाद ईरान युद्ध से हुई सारी कमाई खत्म हो गई थी। हालांकि, हाल के दिनों में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमलों और US सेना की लगातार 10 रातों तक बमबारी ने रिस्क प्रीमियम को वापस ला दिया है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूथी धमकियों के बाद मंगलवार को लाल सागर में तीन तेल टैंकरों ने यू-टर्न ले लिया। एक चीन के लिए दो मिलियन बैरल सऊदी क्रूड ले जा रहा था, दूसरा मैंगलोर के लिए 7,00,000 बैरल ले जा रहा था और फिर स्वेज़ नहर की ओर मुड़ गया, जबकि तीसरा पाकिस्तान जा रहा था और उसने भी अपनी यात्रा छोड़ दी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान US से मिलने के लिए बेताब है, लेकिन जब तक वे बात करने के लिए सही मायने में तैयार नहीं हो जाते, तब तक वे ऐसा करने में दिलचस्पी नहीं रखते। तेल की कीमतें और किस वजह से बढ़ रही हैं।

कीमतों में उछाल की ओर क्या है वजह

वेस्ट एशिया के अलावा, तेल की कीमतें और बढ़ने की एक और वजह यह है कि कज़ाकिस्तान को रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर अपने मेन एक्सपोर्ट टर्मिनल पर क्रूड भेजना बंद करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां कई हमले हुए हैं।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल सप्लाई लेना बंद करने वाला था क्योंकि कंपनियां अपने जहाज इस जगह पर भेजने से कतरा रही थीं।

कज़ाकिस्तान का लगभग 80% क्रूड एक्सपोर्ट इसी टर्मिनल से होता है। यह देश यूरोप को दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी है। यूक्रेन ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है।

क्रूड पर गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी

एनालिस्ट का मानना ​​है कि रेड सी के बंद होने से तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, क्योंकि होर्मुज की गैर-मौजूदगी में यह सऊदी अरब के लिए एक ज़रूरी एक्सपोर्ट रूट बन गया था और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इसके लिए एक ज़रूरी सोर्स के तौर पर काम करती थी।

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं, तो कच्चे तेल की कीमतें साल की चौथी तिमाही तक वापस $120 प्रति बैरल पर आ सकती हैं, लेकिन उनका बेस केस अभी इसी समय के दौरान कच्चे तेल के $80 पर रहने को ही मान रहा है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए इक्विटी इंडेक्स, जानिए 22 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 21 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के नीचे रहा। कारोबारी सेशन के अंत में सेंसेक्स 238.41 अंक या 0.31 प्रतिशत गिरकर 77,470.11 पर और निफ्टी 50.80 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 24,187.70 पर बंद हुआ। लगभग 2087 शेयरों में बढ़त हुई,1942 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी पर गिरने वाले प्रमुख शेयरों में HDFC बैंक,TCS,रिलायंस इंडस्ट्रीज,SBI और डॉ.रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस,बजाज फिनसर्व,HCL टेक्नोलॉजीज,आयशर मोटर्स और अल्ट्राटेक सीमेंट शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.3% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5% ऊपर बंद हुआ।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो FMCG,IT,ऑयल एंड गैस और PSU बैंक में 0.3-0.8% की गिरावट आई। जबकि ऑटो,मेटल और रियल्टी सेक्टर में 0.6-1% की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद,मज़बूत कॉर्पोरेट नतीजों की उम्मीद और मांग-आधारित बिजनेस अपडेट्स के कारण मिडकैप्स अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि लार्ज-कैप्स की तुलना में इस सेगमेंट का महंगा वैल्यूएशन सावधानी बरतने का संकेत देता है,लेकिन उम्मीद है कि इनकी बिजनेस की स्थिति कम से कम वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक अच्छी बनी रहेगी।

हालांकि,इस तेजी को बनाए रखने के लिए इनपुट कॉस्ट में हो रही बढ़ोतरी का थमना जरूरी है, क्योंकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में मांग में बढ़ोतरी सुस्त पड़ सकती है।

फिलहाल,ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला कारोबार हो रहा जो भू-राजनीतिक जोखिमों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच कम होते निवेश के कारण लार्ज-कैप्स के कमजोर प्रदर्शन को दिखाता है।

निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज के हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि लगातार दूसरे ट्रेडिंग सेशन में बेंचमार्क निफ्टी इंडेक्स 127 अंकों की सीमित रेंज में ही घूमता रहा। यह 10 जुलाई,2026 के बाद से इसकी सबसे छोटी डेली ट्रेडिंग रेंज रही। डेली चार्ट पर,इंडेक्स ने दोनों तरफ शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली कैंडल बनाई,जो मौजूदा लेवल पर अनिश्चितता और किसी स्पष्ट दिशा की कमी को दिखाती है।

आगे निफ्टी के लिए 24270-24300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना रहेगा। अगर यह लगातार इस रेजिस्टेंस बैंड के ऊपर बना रहता है तो शॉर्ट टर्म में मौजूदा पुलबैक 24450 के लेवल तक बढ़ सकता है। नीचे की तरफ,24100-24050 के जोन में स्थित 20-डे EMA एरिया तत्काल सपोर्ट का काम करेगा।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार के एक दायरे में रहने और कुछ खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की संभावना है। पहली तिमाही के नतीजे और मिडिल ईस्ट में हो रही गतिविधियां बाजार के सेंटीमेंट पर असर दिखाएंगी। जबकि कच्चे तेल की कीमतें एक अहम उतार-चढ़ाव वाला फैक्टर बनी रहेंगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च,वेल्थ मैनेजमेंट,सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव,ब्रेंट क्रूड में तेजी,रुपए की कमजोरी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच घरेलू इक्विटी बाजार के एक दायरे में ही रहने की उम्मीद है। हालांकि,पहली तिमाही के नतीजों के चलते कुछ खास शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है,लेकिन निवेशकों का मूड वेस्ट एशिया में हो रही घटनाओं और कच्चे तेल की चाल से प्रभावित होता रहेगा।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार का कहना है कि जुलाई में अब तक निफ्टी 24,530–23,800 के सीमित दायरे में ही घूमता रहा है। इस रेंज के अंदर,इंडेक्स अपने 50 डे EMA (24,000) और 200 डे EMA (24,430) के बीच बना हुआ है।

उनका मानना ​​है कि अगर यह 24,430 के ऊपर जाता है,तो यह जुलाई की कंसोलिडेशन रेंज के ऊपरी छोर (24,530–24,600 जोन) तक पहुंच सकता है। वहीं,अगर यह 24,000 से नीचे गिरता है,तो यह वापस 23,800 के लेवल पर आ सकता है। 23,800–24,600 के ऊपर की टिकाऊ बढ़त के लिए एक मजबूत ब्रेक की जरूरत है।

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बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी में रेजिस्टेंस जोन के पास बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे इंडेक्स 57,300–58,500 की बड़ी कंसोलिडेशन रेंज में बना रहा। इंडेक्स अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो बताता है कि बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव है। हालांकि,आगे और खरीदारी न होने से शॉर्ट-टर्म में अनिश्चितता का संकेत मिलता है।

बैंक निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 57,500–57,300 जोन में है,जबकि रेजिस्टेंस 58,500 के आसपास दिख रहा है। RSI न्यूट्रल जोन के पास फ्लैट बना हुआ है,जो मोमेंटम में कमजोरी दिखाता है। जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, ट्रेडर्स को सपोर्ट के पास गिरावट पर खरीदारी और रेजिस्टेंस के पास प्रॉफिट बुक करने की रणनीति अपनानी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाकिस्तान में पेट्रोल 35 पैसे सस्ता, डीजल 5.71 रुपया महंगा:पेट्रोल 315.80 और डीजल 360.06 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 21 जुलाई से लागू

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है, जबकि हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 5.71 रुपया लीटर बढ़ा दी है। नई दरें 21 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 315.80 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 360.06 रुपया प्रति लीटर हो गई है। भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.89 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है। अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं: अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे। डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।