मोदी ने पायलट स्मित मच्छार से बात की

नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की इजराइल जा रही उड़ान में 174 लोगों की जान बचाने वाले भारत के जांबाज पायलट से शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की। पायलट स्मित मच्छार का अभी सऊदी अरब में इलाज चल रहा है। मोदी ने उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। करीब नौ मिनट की इस बातचीत में मोदी ने स्मित की जम कर तारीफ की। उन्होंने पहले स्मित मच्छार के परिवार के लोगों से भी बात की थी।

गौरतलब है कि स्मित ने बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान की हाइजैकिंग नाकाम की थी। ओमानी को पायलट ने उन्हें कॉकपिट में चाकू मार दिया था फिर भी स्मित ने प्लेन क्रैश नहीं होने दिया। उन्होंने न सिर्फ हाईजैक का अलर्ट भेजा, बल्कि कॉकपिट का दरवाजा भी खोल दिया, जिससे लोगों ने हमलावर पायलट को काबू में किया।

बहरहाल, शुक्रवार को बातचीत में मोदी ने स्मित से कहा, ‘पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा था और आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहा था। आपके साहस और सूझबूझ से कई लोगों की जान बची’। बातचीत के दौरान स्मित ने कहा, ‘मुझे पता था कि यह आखिरी मौका है। दरवाजा वहीं था और मैंने उसे खोल दिया। मैं मुश्किल समय में हनुमान चालीसा पढ़ता हूं और उस समय भी पढ़ रहा था। मुझे पता है कि भगवान ने ही हमें बचाया’।

बातचीत के दौरान मोदी ने कहा, ‘आपने इतना बड़ा काम किया है कि देश का हर नागरिक और दुनिया के लोग आपको देखना और आपसे बात करना चाहते हैं। आपने हनुमान चालीसा के बारे में जो बताया, उसके लिए मैं आपकी मां गीताबेन को प्रणाम करूंगा कि उन्होंने आपको ऐसे संस्कार दिए। मैं आपके पिता भूपेंद्रभाई को भी प्रणाम करूंगा’। मोदी ने कहा, ‘कल जब मेरी सोनलबेन से बात हुई तो मैं हैरान रह गया। वे इतनी शांति और हिम्मत से बात कर रही थीं। मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसी परिस्थिति में वे इतनी सहजता से बात कर पाएंगी’।

भारतीय कैप्टन पर हमला करने वाला पायलट सीरिया में रहा:कट्टरपंथी सोच के चलते ओमान में ट्रेनिंग से हटाया था; 8 महीने पहले फ्लाईदुबई जॉइन की

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल हमामी के तौर पर हुई है। वह ओमान का रहने वाला है। अल अरबिया इंग्लिश ने सूत्रों के हवाले से बताया कि आरोपी लंबे समय तक सीरिया में रहा था। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अल हमामी कट्टरपंथी विचारों का था। उसकी सोच के कारण उसे पिछले साल ओमान की नेशनल एयरलाइन में पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। बाद में उसे एयरलाइन में दूसरा काम दिया गया। वह पहले रॉयल एयर मैरोक के साथ भी काम कर चुका था। रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाईदुबई में उसे काम करते हुए करीब 8 महीने हुए थे। अल हमामी का जन्म यूएई में हुआ था। उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई हैं। उसने अपनी जिंदगी के कई साल यूएई में भी बिताए। आरोपी ने 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन मच्छर पर चाकू से हमला किया था। दावों के मुताबिक वह प्लेन क्रैश करवाना चाहता था। विमान तेजी से नीचे गिरने लगा। हालांकि घायल कैप्टन ने उससे मुकाबला करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर पहुंचकर को-पायलट को पकड़ा। इसके बाद सऊदी अरब में विमान की लैंडिंग हुई। आरोपी के पास से फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिलने का दावा आई24 न्यूज ने एक सूत्र के हवाले से दावा किया कि अल हमामी के पास से ‘फ्री फिलिस्तीन’ समूहों के पर्चे और अन्य फिलिस्तीन समर्थक सामान मिले थे। रिपोर्ट के मुताबिक, वह फिलिस्तीनियों के समर्थन और इजराइल के विरोध की बात करता था। जांच एजेंसियां इन दावों को उसके कट्टरपंथ और संभावित आतंकी मकसद की जांच के हिस्से के तौर पर देख रही हैं। हालांकि, हमले के मकसद और किसी संगठन से उसके संबंध की जांच अभी जारी है। यूएई के अटॉर्नी जनरल ने घटना के पीछे आतंकवादी गतिविधि या किसी पूर्व योजना से संबंध की जांच के आदेश दिए हैं। ओमानी पायलट को तेल अवीव की फ्लाइट में ड्यूटी कैसे मिली, इसकी जांच होगी ओमान और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि ओमान के नागरिक अल हमामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट की ड्यूटी कैसे मिली। सीएनएन के मुताबिक, इजराइल की शिन बेट, मोसाद, सेना और ट्रांसपोर्टेशन मिनिस्ट्री समेत कई एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। वे यह पता लगा रही हैं कि अल हमामी को इस रूट पर उड़ान भरने की मंजूरी किस प्रक्रिया के तहत दी गई थी। घटना के बाद सऊदी अरब में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग हुई। इसके बाद अल हमामी को यूएई भेज दिया गया, जहां उसके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े मामले की जांच की जा रही है। 174 लोगों को लेकर जा रहा था विमान, एक मिनट में 17,000 फीट नीचे आया घटना वाले दिन फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 लोग सवार थे, जिनमें ज्यादातर इजरायली यात्री थे। विमान में भारत और UAE के नागरिक भी मौजूद थे। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, चार यात्री अमेरिकी नागरिक थे। उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था। दोनों के बीच पहले हाथापाई हुई। इसके बाद आरोपी ने चाकू से हमला किया। इस दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा। फ्लाइटरडार24 के अनुसार, विमान करीब एक मिनट में 33,000 फीट से 17,000 फीट तक नीचे आ गया। UAE के अस्पताल में भर्ती हैं कैप्टन स्मित कैप्टन स्मित अभी UAE के अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें सऊदी अरब से एयरलिफ्ट करके अबू धाबी ले जाया गया है। UAE में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में कैप्टन स्मित और उनके परिवार से मुलाकात की थी। मित्तल ने कहा कि कैप्टन को अच्छा इलाज मिल रहा है और भारतीय दूतावास वहां के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। राजदूत ने कैप्टन स्मित को भारत का बहादुर बेटा बताया। उन्होंने कहा कि हवा में आपात स्थिति के दौरान उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बची और एक बड़ी दुर्घटना टल गई। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… कैप्टन स्मित ने पीएम से वीडियो कॉल पर बात की, बोले- घायल था पर हिम्मत नहीं हारी, हनुमान चालीसा पढ़ते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 174 जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छर से करीब 9 मिनट वीडियो कॉल पर बात की। स्मित ने दो दिन पहले दुबई से तेल अवीव जा रहे प्लेन की हाइजैकिंग नाकाम की थी। ओमानी को-पायलट ने उन्हें चाकू मारा। स्मित ने फिर भी प्लेन क्रैश नहीं होने दिया। पूरी खबर पढ़ें…

दावा-भारतीय पायलट पर हमले का आरोपी अलकायदा से प्रभावित था:सीरिया में भी रहा; कट्टरपंथी विचारों के चलते ओमान एयर ने फ्लाइट से हटाया था

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल हमामी के तौर पर हुई है। वह ओमान का रहने वाला है। सऊदी अरब की न्यूज एजेंसी अल अरबिया इंग्लिश के मुताबिक, वह लंबे समय तक सीरिया में रहा था, जहां उसके कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होने की बात सामने आई है। इजराइल के चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को उसके अलकायदा की विचारधारा से प्रभावित होने के सबूत मिले हैं। आई24 न्यूज ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि पूछताछ में अल हमामी ने बताया कि वह विमान को इजराइल में क्रैश कराना चाहता था। हमले से पहले भी उसके रवैये को लेकर सवाल उठ चुके थे। सीएनएन के मुताबिक, 2024 में उसे ओमान की नेशनल एयरलाइन में पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। इसके बाद उसे एयरलाइन में दूसरी जिम्मेदारी दी गई। करीब 8 महीने पहले वह फ्लाईदुबई से जुड़ा था। 30 सितंबर को उसने फ्लाइट के कॉकपिट में कैप्टन मच्छर पर चाकू से हमला किया। हमले के बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा। गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छर ने हमलावर का मुकाबला करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर पहुंचकर को-पायलट को काबू किया। विमान की सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। सीरिया में रहने के दौरान कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होने का दावा अल अरबिया इंग्लिश के मुताबिक, अल हमामी ने ओमान से बाहर काफी समय बिताया था और सीरिया में भी लंबे समय तक रहा। सूत्रों का दावा है कि वहीं वह कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित हुआ। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में उसके कुछ धार्मिक लोगों से मुलाकात की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह किस तरह कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित हुआ। ओमान एयर ने 2024 में उड़ान से हटाया था फॉक्स न्यूज के मुताबिक, एक सूत्र ने दावा किया कि ओमान एयर ने 2024 में अल हमामी को उड़ान से हटा दिया था। उसके कट्टरपंथी इस्लामिक वेबसाइट्स देखने की जानकारी सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया था। सीएनएन के मुताबिक, उसे कथित कट्टरपंथी विचारों के कारण पायलट ट्रेनिंग से हटाया गया था। हालांकि, बाद में उसे एयरलाइन में दूसरी भूमिका दी गई। वह पहले रॉयल एयर मैरोक के साथ भी काम कर चुका था। आरोपी के सामान से फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिलने का दावा आई24 न्यूज ने एक अमीराती सूत्र के हवाले से बताया कि अल हमामी के सामान से ‘फ्री फिलिस्तीन’ समूहों के पर्चे और दूसरी फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह फिलिस्तीनियों के समर्थन और इजराइल के विरोध की बातें भी करता था। जांच एजेंसियां इन सामग्रियों और उसके बयानों को उसके कथित कट्टरपंथ और संभावित आतंकी मकसद की जांच के हिस्से के तौर पर देख रही हैं। दावा- विमान को इजराइल में क्रैश करने की योजना थी आई24 न्यूज ने जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया कि अल हमामी ने पूछताछ में विमान को इजराइल में क्रैश करने की बात कही। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या कैप्टन पर हमला विमान पर कब्जा कर उसे जानबूझकर गिराने की कोशिश का हिस्सा था। एक मिनट में 33 हजार से 17 हजार फीट नीचे आया विमान फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद अल हमामी ने कैप्टन मच्छर पर चाकू से हमला किया। फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, इस दौरान विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया। गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छर ने हमलावर का सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद क्रू मेंबर्स और यात्रियों ने आरोपी को काबू किया। दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान की कमान संभालने में मदद की। सऊदी अरब में हुई इमरजेंसी लैंडिंग हमले के बाद विमान की सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। घटना के समय विमान में 174 लोग सवार थे। इनमें ज्यादातर इजराइली यात्री थे। भारत और UAE के नागरिक भी विमान में मौजूद थे। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, चार यात्री अमेरिकी नागरिक थे। कैप्टन मच्छर गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें बाद में सऊदी अरब से एयरलिफ्ट करके अबू धाबी लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। तेल अवीव की फ्लाइट में ड्यूटी कैसे मिली, इसकी जांच जारी ओमान और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में जांच का एक अहम सवाल यह है कि अल हमामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट की ड्यूटी कैसे मिली। सीएनएन के मुताबिक, इजराइल की शिन बेट, मोसाद, सेना और ट्रांसपोर्टेशन मिनिस्ट्री समेत कई एजेंसियां इस पहलू की जांच कर रही हैं। वे यह पता लगा रही हैं कि पहले उठी चिंताओं के बावजूद अल हमामी फ्लाइट क्रू का हिस्सा कैसे बना। घटना के बाद अल हमामी को सऊदी अरब से UAE भेज दिया गया, जहां उसके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े मामले की जांच चल रही है। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… कैप्टन स्मित ने पीएम से वीडियो कॉल पर बात की, बोले- घायल था पर हिम्मत नहीं हारी, हनुमान चालीसा पढ़ते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 174 जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छर से करीब 9 मिनट वीडियो कॉल पर बात की। स्मित ने दो दिन पहले दुबई से तेल अवीव जा रहे प्लेन की हाइजैकिंग नाकाम की थी। ओमानी को-पायलट ने उन्हें चाकू मारा। स्मित ने फिर भी प्लेन क्रैश नहीं होने दिया। पूरी खबर पढ़ें…

‘हनुमान चालीसा का कर रहा था पाठ, सबको मरने नहीं दे सकता था…’ स्मित मच्छार ने PM मोदी को सुनाई डरावने वक्त की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की। फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में को-पायलट के हमले में भारतीय स्मित मच्छार घायल हो गए हैं। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित काफी इमोशनल हो गए। पीएम मोदी ने पायलट की हिम्मत और धैर्य की तारीफ की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर के लोग उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं पीएम से बात करते हुए स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किल वक्त में संयम बनाए रखा।

पीएम से बात हुए इमोशनल हुए कैप्टन

PM मोदी के सामने घटना को याद करते हुए मच्छार इमोशनल हो गए और कहा कि, वह उस मुश्किल वक्त में वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा मुश्किल वक्त में हिम्मत देने का सहारा बनी। पीएम से बात करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने कहा, वह उनके सबसे बड़े आदर्श हैं और उनसे बात करना उनके लिए बहुत खास है। मच्छार ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का मौका मिलेगा। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित मच्छार काफी भावुक थे।

‘हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मच्छार ने पीएम से कहा, “मुझे बहुत चोटें आईं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने खुद को धक्का देकर कॉकपिट का दरवाजा खोला।” पीएम मोदी ने मच्छार से बातचीत के दौरान कहा कि, भारत को अपने उन लोगों पर गर्व है, जो किसी की जान लेने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालने का साहस रखते हैं। मच्छार ने बताया कि ‘जब मैं मुश्किल में होता हूं तो हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मुश्किल हालत का किया सामना

मच्छार ने बताया कि, जब भी वह मुश्किल में होते हैं, तो हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। फ्लाईदुबई विमान की घटना के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया। उनके को-पायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी और हालात को संभालने की कोशिश करते रहे। उन्होंने चोट लगने के बाद काफी कोशिश करके कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों ने आगे आकर स्थिति को काबू में किया। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई इस घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंड कराया गया। राहत की बात थी कि विमान में सवार सभी 174 लोगों की जान बच गई।

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महिला सुरक्षा : कानून के कागज़ और सड़क की सच्चाई !

भारत कानूनों की कमी से नहीं, उनके ईमानदार क्रियान्वयन की कमी से जूझ रहा है। दुनिया में कई ऐसे कई देश हैं जहाँ महिलाओं के प्रति अपराध पर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाती है जिससे उन देशों ऐसे अपराध नहीं होते। जब तक पुलिस राजनीति से मुक्त नहीं होगी और अदालतें वर्षों का इंतजार नहीं मिटाएँगी, अपराधी यह संदेश पाते रहेंगे कि शोर कुछ दिन का है, सजा अनिश्चित है।

भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराध कोई नई त्रासदी नहीं है। यह एक पुरानी बीमारी है जो हर कुछ वर्षों में किसी न किसी जघन्य घटना से राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोर देती है, फिर नारे लगते हैं, कानून सख्त होते हैं और कुछ महीनों बाद वही चक्र लौट आता है। एनसीआरबी के ताज़ा आँकड़े 2024 में महिलाओं के विरुद्ध दर्ज अपराधों में मामूली 1.5 प्रतिशत गिरावट दिखाते हैं, यानी करीब 4.41 लाख मामले। संख्या में यह ‘गिरावट’ सांत्वना नहीं देती।

इसका अर्थ है कि अभी भी लगभग हर 71 सेकंड में एक मामला सामने आता है। आंकड़ों के अनुसार 2024 में भारत में बलात्कार के 29,536 मामले दर्ज हुए। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में दिल्ली महानगरों में सबसे आगे है। आँकड़े गिरें या न गिरें, ये लेकिन सड़क, घर, अस्पताल और पार्क महिलाओं के लिए अभी भी सुरक्षित नहीं हैं।

ऐसे में पुरानी स्मृतियाँ आज भी ताज़ा हैं। दिसंबर 2012 का निर्भया कांड देश की उस पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बन गया जिसके विरोध प्रदर्शन के बाद कानून बदले, फास्ट ट्रैक अदालतें बनीं, निर्भया कोष बना, सजाएँ कठोर हुईं। फिर भी 2017 का उन्नाव मामला याद दिलाता है कि जब आरोपी सत्ता के निकट हो तो पीड़िता का परिवार कैसे टूटता है, सबूत कैसे कमजोर पड़ते हैं और न्याय कितना लंबा खिंचता है। 2020 का हाथरस कांड जाति, पुलिस की लापरवाही और शव के अंतिम संस्कार को लेकर उठे सवालों से भरा रहा। ये मामले सिर्फ अपराध नहीं थे; ये राज्य की मशीनरी की विश्वसनीयता की परीक्षा थे।

वहीं नए मामले पुरानी कहानी दोहराते हैं। अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ड्यूटी के बाद आराम कर रही युवा डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या ने पूरे चिकित्सा समुदाय को सड़कों पर ला दिया। एफआईआर में देरी, सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप, अस्पताल प्रशासन की कथित लीपापोती और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने जांच को और जटिल बना दिया। उच्च न्यायालय को जांच सीबीआई को सौंपनी पड़ी, सर्वोच्च न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना पड़ा। जून 2026 में बिहार के बेगूसराय में एक महिला पर उसी के घर में बर्बर हमला हुआ। सितंबर 2026 में दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास युवकों ने पुलिस होने का नाटक कर किशोरी से दुष्कर्म किया। उसी माह राजधानी में कई नाबालिगों से जुड़े मामले भी सामने आए। बिजनौर थाने में न्याय न मिलने की पीड़ा में एक युवती ने ख़ुद को आग लगा ली। ये घटनाएँ अलग-अलग राज्यों की हैं, पर इनका पैटर्न एक हैं; देरी, दबाव और पीड़िता का अकेला पड़ जाना।

उल्लेखनीय है कि इन मामलों में सबसे बड़ा अवरोध राजनीतिक हस्तक्षेप है। जब आरोपी किसी दल का कार्यकर्ता, विधायक या स्थानीय दबंग हो, तो पीड़िता द्वारा थाने में एफआईआर लिखवाना ही संघर्ष बन जाता है। गवाह मुकर जाते हैं, परिवार को समझौते का दबाव पड़ता है और मीडिया का शोर थमते ही फाइलें ठंडी पड़ जाती हैं। उन्नाव इसका जीवंत उदाहरण रहा। आरजी कर मामले में भी राज्य पुलिस की विश्वसनीयता पर अदालतों ने सवाल उठाए। राजनीति अपराध को ‘कानून-व्यवस्था बनाम विपक्ष’ के द्वंद्व में बदल देती है। पीड़िता केंद्र से हट जाती है; सत्ता का बचाव या हमला मुख्य कथानक बन जाता है। पुलिस स्वतंत्र एजेंसी नहीं रह पाती, वह सत्ता की छाया में काम करती दिखती है। जब तक अन्वेषण राजनीतिक रूप से ‘सुविधाजनक’ नहीं होता, निष्पक्षता संदिग्ध रहती है।

दूसरा बड़ा अवरोध न्यायिक प्रक्रिया की मंद गति है। बलात्कार के मामलों में अदालतों में लंबितता करीब 90 प्रतिशत रही है। 2024 में हजारों मुकदमों में से केवल एक छोटे हिस्से का ही निपटारा हुआ; दोषसिद्धि दर पूर्ण हुए मुकदमों में भी लगभग एक-चौथाई के आसपास बताई गई। फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें कागज़ पर तो तेज़ हैं, पर देश भर में बलात्कार और पॉक्सो के ढाई लाख से अधिक मामले लंबित बताए गए हैं।

कई राज्यों में इन अदालतों की दोषसिद्धि दर चिंताजनक रूप से कम है। पीड़िता सालों तक अदालत के चक्कर काटती है, गवाह थक जाते हैं, सबूत कमजोर पड़ते हैं। ‘जस्टिस डिलेयड इज़ जस्टिस डेनियड’ यह महज़ एक मुहावरा नहीं, रोजमर्रा की सच्चाई है। कठोर सजा का डर तभी काम करता है जब सजा समय पर और निश्चित लगे। अनिश्चितता अपराधी को हिम्मत देती है।

इसका समाधान नारे से नहीं, व्यवस्था से आएगा। पहला कदम पुलिस की स्वायत्तता और जवाबदेही है। महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में एफआईआर दर्ज करने में देरी को स्वयं दंडनीय लापरवाही माना जाए। जिला स्तर पर स्वतंत्र पर्यवेक्षण और सीसीटीवी, फॉरेंसिक व डिजिटल साक्ष्य की अनिवार्य समयबद्धता जरूरी हो। दूसरा, अन्वेषण राजनीतिक नियंत्रण से बाहर हो। संवेदनशील मामलों में राज्य के बाहर की एजेंसी या विशेष स्वतंत्र इकाई तभी नहीं बुलाई जाए जब सड़कें गर्म हों, बल्कि मानक प्रक्रिया बने। तीसरा, फास्ट ट्रैक अदालतों को वास्तव में तेज़ बनाने के लिए न्यायाधीश, अभियोजक और फॉरेंसिक क्षमता भी बढ़े। एक साल की वैधानिक समय-सीमा कागज़ पर न रहे। चौथा, पीड़िता संरक्षण पर भी ज़ोर दिया जाए; सुरक्षित आवास, कानूनी सहायता, गवाह सुरक्षा और मुआवजा आदि मुकदमे के अंत तक सुनिश्चित हो, ताकि वो पारिवारिक समझौते या दबंगई के आगे न झुके।

शिक्षा और सामाजिक बदलाव की एक लंबी दौड़ है, पर तत्काल जरूरत निवारक दंड की निश्चितता की है। सार्वजनिक स्थानों, अस्पतालों, परिवहन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी को औपचारिकता न बनाया जाए। पुरुषों के समाजीकरण; घर, स्कूल और कार्यस्थल पर सहमति, गरिमा और जवाबदेही को नीति का हिस्सा बनाना होगा। राजनीतिक दल महिलाओं की सुरक्षा को चुनावी भाषण तक सीमित न रखें। किसी भी दल के नेता पर आरोप हो तो उसी कठोरता से कार्रवाई दिखे, जिससे जनता विश्वास करे कि कानून सबके लिए एक है।

भारत कानूनों की कमी से नहीं, उनके ईमानदार क्रियान्वयन की कमी से जूझ रहा है। दुनिया में कई ऐसे कई देश हैं जहाँ महिलाओं के प्रति अपराध पर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाती है जिससे उन देशों ऐसे अपराध नहीं होते। जब तक पुलिस राजनीति से मुक्त नहीं होगी और अदालतें वर्षों का इंतजार नहीं मिटाएँगी, अपराधी यह संदेश पाते रहेंगे कि शोर कुछ दिन का है, सजा अनिश्चित है। महिलाओं की सुरक्षा राष्ट्र की परीक्षा है। इसे और विफल नहीं होना चाहिए।

आज का एक्सप्लेनर:क्या वाकई 9/11 जैसी घटना होना तय था; उन 72 मिनटों की कहानी, खून से लथपथ कैप्टन स्मित ने कैसे बचाया

30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट पर आ गया। रफ्तार भी 760 से बढ़कर 1110 किमी/घंटा हो गई। विमान में बैठे यात्री आखिरी प्रार्थना करने लगे। लेकिन कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ एक ‘हीरो’ की हिम्मत और जज्बे ने सभी 180 जानें बचा लीं। नाम है- कैप्टन स्मित मच्छर। इजराइल के पीएम नेतन्याहू, भारतीय पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कैप्टन स्मित की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने 9/11 जैसा बड़ा हादसा होने से बचा लिया। आखिर कौन हैं स्मित मच्छर, कॉकपिट में क्या हुआ और क्या वाकई 9/11 जैसा हादसा टला; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकपिट में क्या हुआ कि अचानक गिरने लगा था विमान? जवाबः ये फ्लाईदुबई एयरलाइन का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे प्लेन ने UAE के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित और एक को-पायलट मौजद था। फ्लाइट इजराइल के तेल अवीव शहर जा रही थी। करीब 8 बजे प्लेन 35,000 फीट की हाइट पर था। टेक ऑफ के करीब ढाई घंटे बाद तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा। प्लेन UAE के एयर स्पेस से निकलकर सऊदी अरब के आसमान पहुंचा। इसके बाद अचानक सब कुछ बदल जाता है…. सवाल-2: स्मित लहूलुहान थे, तो फ्लाइट कैसे सुरक्षित लैंड हुई? जवाबः पहले यात्री, जो कॉकपिट में दाखिल हुए, वो यानिव हायून थे। फ्लाइट FZ 1073 की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नेतन्याहू ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यानिव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर शाबाशी दी। पेशे से प्लंबर यानिव ने नेतन्याहू को बताया कि प्लेन में एक ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे। दोनों ने मिलकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कामयाब नहीं हुए। हालांकि बेहोश होने से पहले स्मित ने दरवाजा खोल दिया। तब अंदर पहुंचे यानिव ने बताया, ‘पायलट्स की दोनों सीटें खाली थीं। मैंने देखा एक पायलट फर्श पर लहूलुहान पड़ा था और दूसरा पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़ा था।’ यानिव ने को-पायलट की गर्दन पकड़कर उसे पीछे की तरफ कॉकपिट से बाहर घसीट लिया। नेतन्याहू के पूछने पर यानिव ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि वो कंट्रोल पैनल के साथ छेड़छाड़ करने या उसे डैमेज करने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने दूसरे यात्रियों को आवाज दी। सभी ने मिलकर आरोपी को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। को-पायलट को काबू करने वाले तीन इजराइली यात्रियों में शामिल त्जिका मानेस के मुताबिक, हमलावर पायलट को काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे। तीनों ने तार वाले हेडफोन से उसे बांध दिया। इसके बाद यानिव ने कंट्रोल स्टिक्स पकड़कर पीछे खींचे, ताकि विमान ऊपर उठ सके। नेतन्याहू ने पूछा, ‘क्या आपने वाकई ऐसा किया था?’ इस पर यानिव ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘हां मैंने स्टिक्स पूरी तरह पीछे खींच दी थीं। मैं प्लेन हादसों के इन्वेस्टीगेशन देखता रहता हूं।’ स्टिक्स खींचने के बाद विमान कुछ स्थिर होने लगा। यानिव के मुताबिक, केबिन में दो पायलट मौजूद थे। वो शुरू में सदमे में लग रहे थे। यानिव ने उनसे चिल्लाकर प्लेन का कंट्रोल लेने को कहा। एक पायलट ने कंट्रोल हाथ में ले लिया और जहाज को सऊदी अरब के ताबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया। 10:45 बजे प्लेन सुरक्षित एयर पोर्ट पर उतर गया। फ्लाइट में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने स्मित का शुरुआती इलाज किया। यानिव ने कहा, ‘हमने आखिरी तक उन्हें जीवित रखा।’ नेतन्याहू ने खून से सने कपड़े पहने यानिव से पूछा, ‘आपको पता है कि आप क्या रहे थे?’ यानिव ने जवाब दिया, ‘हम शेरों का देश हैं।’ दरअसल, यहूदियों की बाइबिल में यहूदियों की तुलना उठकर खड़े होते हुए शेर से की गई है। जून 2025 में ईरान पर हुए इजराइली हमले का नाम भी- ‘राइजिंग लायन’ था। ये पूरी कहानी फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा, इजराइली रिपोर्ट्स, सऊदी अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के आधार पर है। जांच अभी जारी है इसलिए घटनाओं के सीक्वेंस में बदलाव हो सकता है। नेतन्याहू ने यानिव से कहा, ‘तुम्हारे बिना यह एक और 9/11 हो सकता था। इस पर यानिव ने भी कहा कि उनके हिसाब से को-पायलट का यही इरादा था। सवाल-3: क्या वाकई 9/11 जैसी घटना हो सकती थी? जवाबः 11 सितंबर 2001 को आतंकी संगठन अलकायदा के 19 आतंकियों ने 4 घरेलू अमेरिकी विमान हाईजैक कर लिए थे। इनमें से दो को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर और एक को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की बिल्डिंग से टकराकर क्रैश करवा दिया था। चौथा प्लेन व्हाइट हाउस पर क्रैश होने वाला था, लेकिन यात्रियों की सूजबूझ से पेन्सिलवेनिया के खाली मैदान में क्रैश हुआ। करीब 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। यानिव और नेतन्याहू के अलावा कई इजराइली पत्रकारों और आम लोगों ने स्मित के को-पायलट को आतंकी कहा है। नेतन्याहू ने यानिव से बातचीत में कहा, ‘अगर विमान इजराइल पहुंच जाता, तो न जाने क्या होता।’ पीएम मोदी ने भी नेतन्याहू की 9/11 जैसा हमला टलने की बात दोहराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को-पायलट ओमान का नागरिक है। इसकी जांच हो रही है कि वह इजराइल आने वाली फ्लाइट का पायलट कैसे बना और क्या इसके लिए उसने ओमान के अलावा इजराइल या किसी और देश की नागरिकता भी हासिल की थी। इजराइली मीडिया सोर्सेज के मुताबिक, वह फ्लाईदुबई एयरलाइंस में एक साल से भी कम समय से काम कर रहा था। यानिव के मुताबिक, वो प्लेन के कंट्रोल्स से छेड़छाड़ कर रहा था। हालांकि फ्लाईदुबई ने हमले के पीछे को-पायलट की मंशा पर कोई बयान नहीं दिया है। उसे इलाज के बाद पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है। अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट जेफ गुजेटी के मुताबिक, ‘प्लेन 10 हजार फीट के नीचे चला जाता, तो उसे क्रैश होने से बचाना मुमकिन नहीं होता। इजराइल ने भी 9/11 जैसा हमला टालने के लिए प्लेन को हवा में ही मार गिराने की तैयारी कर ली थी।’ इजराइली न्यूज पोर्टल वाईनेट ग्लोबल के मुताबिक, इजराइली एयरफोर्स के पायलट जॉर्डन में तैनात थे। अगर प्लेन इजराइल सीमा के अंदर क्रैश होने वाला होता, तो उसे हवा में शूट कर दिया जाता। सवाल-4: कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर और अब उनकी हालत कैसी है? जवाबः मूलतः गुजरात के रहने वाले 39 साल के स्मित परिवार के साथ शुरुआत में मुंबई के घाटकोपर (ईस्ट) में रहते थे। स्मित के मुताबिक, पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था। परिवार का कपड़े का पुराना कारोबार है। स्कूली पढ़ाई के बाद स्मित ने कपड़े के व्यापार से जुड़ा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से BBA की डिग्री ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एविएशन सेमिनार अटेंड करने के दौरान उन्हें पायलट बनने का ख्याल आया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के एक इंस्टीट्यूट से पायलट ट्रेनिंग ली। इसमें करीब 17 लाख रुपए खर्च हुए। इस हादसे के बाद स्मित का 2025 का एक पॉडकास्ट चर्चा में है। इसमें स्मित बता रहे हैं कि पायलट बनने के फैसले से उनकी मां डर गई थीं, लेकिन पिता बिल्कुल शांत थे। 2011 में स्मित बतौर कमर्शियल पायलट मुंबई में स्पाइसजेट एयरलाइंस से जुड़े। स्मित के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई। ये एक बोइंग विमान था। स्मित ने 11 साल स्पाइसजेट के विमान उड़ाए। नवंबर 2020 में स्मित ट्रेनिंग कैप्टन बने। इसके बाद वो दूसरे पायलट्स को फ्लाइंग ट्रेनिंग देते थे। जून 2022 में स्मित UAE की एयरलाइंस फ्लाईदुबई से जुड़ गए। यहां वह कैप्टन की पोस्ट पर हैं। कमर्शियल फ्लाइट्स में कैप्टन को पायलट-इन-कमांड कहते हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन विमान की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी, उसका कंट्रोल और इमरजेंसी के समय आखिरी निर्णय कैप्टन ही लेता है। फिलहाल स्मित अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ दुबई में ही रहते हैं। अक्टूबर 2025 के पॉडकास्ट में स्मित ने फ्लाइट की सिक्योरिटी और विमान में डॉक्टर्स और क्रू मेंबर्स की अहमियत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, ‘जब हम ऊपर होते हैं और अगर कुछ हो जाए, तो आपको कौन बचाएगा? आप भाग्यशाली होंगे अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर मौजूद हो, वे आपकी जान बचा सकते हैं।’ स्मित ने एक और किस्सा बताया कि फ्लाइट के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया था। ऐसे में उन्होंने एक नजदीकी एयरपोर्ट ढूंढकर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। घायल होने के बाद स्मित बेहोश हो गए थे, उन्हें सऊदी के तबुक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन पर हमले के आरोपी को-पायलट को भी इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित की सर्जरी हुई है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया है कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से बात की है। ——— ये खबर भी पढ़िए… अभिनंदन ने वायुसेना छोड़कर प्राइवेट एयरलाइन क्यों जॉइन की; उन्हें छुड़ाने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें तान दी थीं मिग-21 से पाकिस्तानी F-16 गिराने वाले फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान ने प्राइवेट एयरलाइन जॉइन कर ली है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना छोड़ दी, जबकि सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था। अभिनंदन अब गोवा की प्राइवेट एयरलाइन कंपनी ‘FLY 91’ के लिए ATR विमान उड़ाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…

इजराइली PM बोले- भारतीय पायलट की बहादुरी को सलाम:वह असली हीरो, 174 लोगों की जान बचाई; चाकू हमले के बावजूद विमान क्रैश रोका

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विमान क्रैश रोकने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। नेतन्याहू ने X पर पोस्ट में लिखा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने हमलावर का सामना किया। वह सच्चे हीरो हैं। इजरायली PM ने कहा- कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिससे यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू कर लिया। कैप्टन की वजह से 174 लोगों की जान बची। इनमें इजरायली नागरिकों के साथ दूसरे देशों के लोग भी शामिल थे। दरअसल, बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लायदुबई की फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दौरान भारतीय पायलट स्मित पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला कर दिया। फिर विमान का कंट्रोल हाथ में लेकर इसे क्रैश कराने की कोशिश की। लेकिन, पायलट स्मित ने हार नहीं मानी और संघर्ष करते हुए साजिश को नाकाम कर दिया। ट्रम्प बोले- प्लंबर ने भी बचाई लोगों की जान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी भारतीय पायलट स्मित मच्छार की तारीफ की। उन्होंने कहा- घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई। इके बाद एक यात्री भी कॉकपिट में पहुंचा। ट्रम्प के मुताबिक, वह पेशे से प्लंबर था और उसने कभी विमान नहीं उड़ाया था। यात्री ने को-पायलट को सीट से खींचकर पीछे किया। इसके बाद दूसरे यात्रियों ने मिलकर उसे काबू किया। ट्रम्प ने बताया कि इस यात्री ने टीवी शो ‘एयर डिजास्टर्स’ देखकर विमान उड़ाने की कुछ बातें सीखी थीं। हालांकि, ट्रम्प ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नेतन्याहू और कुछ अन्य सूत्रों से मिली है। उन्होंने कहा कि वह इन बातों की खुद पुष्टि नहीं कर सकते। चाकूबाजी से पहले दोनों पायलटों में हाथापाई हुई थी फ्लाईदुबई की फ्लाइट में यह घटना बुधवार सुबह करीब 9 बजे हुई। विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल थे। ज्यादातर इजराइली पैसेंजर्स थे। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले से पहले दोनों पायलटों के बीच हाथापाई हुई थी। इसके बाद को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला किया। इस दौरान विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से अचानक 17 हजार फीट नीचे आ गया। एक यात्री और क्रू मेंबर किसी तरह कॉकपिट तक पहुंचने में कामयाब हुए। इसके बाद दूसरे क्रू मेंबर भी कॉकपिट में पहुंचे और विमान की सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि यात्री और क्रू मेंबर फ्लायदुबई के कॉकपिट में कैसे घुसे, क्योंकि कॉकपिट के दरवाजे जबरन खोलने की कोशिशों को रोकने के लिए मजबूत बनाए जाते हैं। आमतौर पर उड़ान के दौरान कॉकपिट का दरवाजा सुरक्षा कारणों से लॉक रहता है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद यह विमान सुरक्षा का नियम बन गया। दोनों पायलट घायल, कैप्टन स्मित की हालत स्थिर एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पायलट घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कैप्टन स्मित की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं। एक वीडियो में विमान तेजी से हिलता दिखा। वहीं दूसरे वीडियो में हमलावर पर काबू पाने के बाद विमान में बैठे पैसेंजर्स ताली बजाकर खुशी मनाते दिखे। इजराइली अधिकारियों ने बताया कि जिस साथी पायलट ने स्मित पर हमला किया, वह ओमान का नागरिक था। इजराइल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पायलट की हिम्मत ने बड़ी घटना टाल दी। वरना 2001 में हुए अमेरिका के 9/11 जैसी घटना हो सकती थी। इजराइली डेंटिस्ट ने कैप्टन स्मित की मदद की विमान में सवार यात्रियों को कुछ देर के लिए लगा कि वे जिंदा नहीं बचेंगे। एक यात्री ने AFP को बताया कि, “सभी को लगा कि अब हम मरने वाले हैं।” विमान में मौजूद कुछ लोगों ने भी सूझबूझ दिखाई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। विमान में सिविल ड्रेस में 2 रिलीफ पायलट मौजूद थे जिन्होंने बाद में प्लेन को संभाला। जबकि यात्रियों ने हमलावर को कॉकपिट से दूर करने में मदद की। वहीं कैप्टन स्मित की मदद विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट ने की। उन्होंने घायल पायलट का विमान में ही इलाज किया और उनकी जान बचाई। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। इसके अलावा वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे। पॉडकास्ट बताया- पढ़ाई के दौरान पायलट बनने का ख्याल आया पिछले साल अक्टूबर में कैप्टन स्मित ने CS जलक मेहता नाम के यूट्यूब चैनल के साथ पॉडकास्ट किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, स्कूलिंग के बाद फैमिली बिजनेस संभालने के लिए मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। लेकिन इसी दौरान मैं एविएशन से जुड़े एक सेमिनार में गया, वहीं मैंने पहली बार पायलट बनने का सोचा। आगे उन्होंने बताया, ‘मेरी पहली कमर्शियल फ्लाइट बेंगलुरु से दिल्ली के लिए थी।’ 10 पॉइंट्स में जानिए विमान में क्या-क्या हुआ ———————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल जा रही फ्लाइट क्रैश कराने की कोशिश: पायलट को चाकू मारा, 17 हजार फीट नीचे आया विमान; फाइटर जेट की निगरानी में इमरजेंसी लैंडिंग दुबई से तेल अवीव जा रही एक फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की कोशिश हुई। पूरी खबर पढ़ें…

भोपाल के तालाब पर टिन के डिब्बे पर लगाती थीं निशाना, उधार की बंदूक से शुरू की प्रैक्टिस! गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा की कहानी

नागोया। हरियाणा के जींद की रहने वाली नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह इंडिविजुअल शॉटगन में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। लेकिन उनकी इस कामयाबी की शुरुआत काफी साधारण तरीके से हुई थी।

नीरू ने अपने चचेरे भाई लक्ष्य शेरॉन की कामयाबी से इंस्पायर होकर शूटिंग शुरू की। 2019 में भोपाल आने के बाद उनकी किस्मत बदली। उन्हें मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग एकेडमी से मुफ्त बंदूक और गोलियां मिलीं। नीरू के पिता किसान हैं, इसलिए परिवार के लिए महंगे शॉटगन खेल का खर्च उठाना आसान नहीं था। एकेडमी की मदद से ही वह इस खेल में टिक पाईं। इस साल उन्होंने लोनाटो, इटली में वर्ल्ड कप मेडल भी जीता था।

चुनौतियों के बीच खुद को ऐसे किया तैयार

एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू की तबीयत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वह पूरा ट्रेनिंग कैंप भी नहीं कर पाईं और पांच दिनों तक कुछ नहीं खाया। इस दौरान कोच मनशेर सिंह उनके कांटेक्ट में रहे और उन्हें फोकस बनाए रखने के लिए मोटिवेट करते रहे। नागोया में बारिश और ठंड के कारण बंदूक की ग्रिप पर भी असर पड़ा, लेकिन नीरू ने खुद से बात करके अपना कंसंट्रेशन बनाए रखा।

मुकाबले से पहले नीरू ने अपनी तैयारी का रूटीन नहीं बदला। क्वालिफिकेशन में 95 स्कोर के साथ टॉप करने के बाद उन्होंने खाने और नींद का खास ध्यान रखा। नागोया में उन्हें दाल और रोटी पसंद थी, जिसे वह एक बांग्लादेशी रेस्टोरेंट से मंगाती थीं।

गोल्ड जीतकर जवानों को किया याद

गोल्ड जीतने के बाद नीरू ने अपना मेडल भारतीय सेना के जवानों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सैनिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान देते हैं। उन्होंने यह मेडल पूर्व एशियन गेम्स चैंपियन राजा रंजीत सिंह को भी समर्पित किया, जिनका इस साल निधन हो गया।

नीरू को उम्मीद है कि उनकी इस जीत से भारत के युवा शॉटगन शूटर्स को बड़े सपने देखने की हिम्मत मिलेगी।

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में उत्तर प्रदेश की ताकत दिखाई दे रही है। यहां उत्तर प्रदेश में निर्मित तमाम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें गोरखपुर के टेराकोट उत्पाद भी शामिल हैं। रविवार को वहां 1.5 लाख से अधिक लोग आए, सोमवार को भी भारी भीड़ उमड़ी है। इस ट्रेड शो में 90 देशों के खरीदार पहुंचे हैं, जो यूपी की सामर्थ्य दिखाता है। शो में शिल्पकारों के उत्पादों की बिक्री और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भी उत्तर प्रदेश के पास सामर्थ्य था, लेकिन नेतृत्व के पास इच्छाशक्ति नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप यूपी बीमारू और बदनाम प्रदेश बनकर रह गया था। इसे देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। किंतु, बीते साढ़े नौ सालों में सम-विषम परिस्थितियों में नेतृत्व के जूझने और अनथक प्रयास का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू की छवि से उबरकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

चुनौतियों से जूझकर किए हर क्षेत्र में रिफॉर्म

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कई चुनैतियां थीं। बाहर के लोग यूपी का नाम सुनकर चौंकते थे। पहचान का संकट ऐसा था कि युवाओं के लिए राज्य, देश या विदेश में नौकरी नहीं थी। कर्फ्यू-दंगे प्रदेश की नियति बन गए थे। पुलिस में दो लाख पद खाली थे तो कानून व्यवस्था कैसे ठीक रहती। सरकार में आने के बाद हमने हर क्षेत्र में रिफॉर्म किए। युवाओं के हित में सरकार ने न केवल भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, बल्कि प्रशिक्षण और इससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी आगे बढ़ाया। साढ़े नौ सालों में प्रदेश सरकार ने शुचिता व पारदर्शिता के साथ 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। इसमें अकेले यूपी पुलिस में 2 लाख 30 हजार नौकरियां दी गईं। 

कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होकर तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। कभी बीमारू के तमगे वाला प्रदेश अब देश की टॉप-थ्री इकॉनमी में है। कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होने के बाद यूपी तेज प्रगति की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति का ग्रोथ इंजन कहला रहा है। यूपी वही है, लेकिन प्रयास से परिणाम की यात्रा में बदलाव हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा। 2017  से पहले राज्य में सिर्फ 130 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। 

कविता सुनाकर बोले सीएम- प्रयास से ही मिलेगी मंजिल

समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षक व अभिभावक की तरह समझाते हुए सीएम योगी ने कहा कि किसी प्रतियोगिता में पदक जीतने से पहले सबसे महत्वपूर्ण प्रतिभाग करना है। उन्होंने महान कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता, ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ सुनाते हुए कहा कि सबसे जरूरी है प्रयास करना, क्योंकि प्रयास ही मंजिल तक पहुंचाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भी उदाहरण दिया। कहा कि डॉ. कलाम फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन फेल होने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार में कम साधन होने के बावजूद वह भारत के मिसाइल मैन बने। राष्ट्रपति बनने के पहले उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला। सीएम ने विद्यार्थियों को सीख दी कि वे अपने हौसलों को कभी कमजोर न होने दें। जो ठान लेता है, वही करके भी दिखाता है। इसलिए जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारना है। 

500 खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती अगले सप्ताह से

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में भी बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप के साथ ही खेलों को भी बढ़ावा दे रही है। ओलंपिक, एशियाड, कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता को खूब नकद पुरस्कार देने साथ ही उन्हें सीधे सरकारी नौकरी दी जा रही है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले सप्ताह 500 और खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती शुरू होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थितजन को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, यातायात नियमों के पालन और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओपी सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Shweta Tripathi: ‘मिर्जापुर 4’ को लेकर आया बड़ा अपडेट, गोलू उर्फ श्वेता त्रिपाठी बोली- काम शुरू हो चुका है

Shweta Tripathi: ‘मिर्जापुर’ स्टारर श्वेता त्रिपाठी ने सीरीज के फैन्स के लिए एक बहुत जरूरी अपडेट शेयर किया। उन्होंने बताया कि सीजन 4 की स्क्रिप्ट लिखने का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एक्ट्रेस ने ऑफिशियली तौर पर कन्फर्म कर दिया है कि पार्ट 4 जल्द ही लोगों का मनोरंजन करेगा।

एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “अच्छी बात ये है कि सीजन 4 की स्क्रिप्टिंग शुरू हो चुकी है। हम एक्टर्स भी फैन्स ही हैं। हम भी अगले सीजन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ‘मिर्जापुर द मूवी’ में जो कुछ भी हुआ है, वह सब सीजन वन से जुड़ा है। इसलिए जब सीजन 4 की बात आएगी तो ये सब भूल जाना होगा। मिर्जापुर हमारे लिए सबसे अच्छा इन्वेस्टमेंट है। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जो हमेशा कुछ न कुछ देता रहता है। गोलू का सफर अभी मेरे लिए खत्म नहीं हुआ है।”

मिर्जापुर में मशहूर किरदार ‘गोलू’ के अलग-अलग रंग

इसके अलावा, श्वेता त्रिपाठी ने बताया कि मिर्जापुर फ्रैंचाइजी में अपने किरदार ‘गोलू’ के लिए वह किन चीजों की शुक्रगुजार हैं, जिसके साथ उन्होंने अब नौ साल बिताए हैं। गोलू के साथ यह सफर नौ सालों में बहुत रोमांचक रहा है। वह सबसे मजबूत और हिम्मत वाली लड़कियों में से एक है, जिनसे मैं मिली हूं।

मुझे उम्मीद है कि किसी की जिंदगी वैसी न हो जैसी उसकी है। उसकी जिंदगी कॉलेज के चुनावों से शुरू हुई थी और अब वह ‘बाहुबली’ बन चुकी है। एक एक्टर के तौर पर हम जो भी किरदार निभाते हैं, उसका एक हिस्सा हमारे साथ रह जाता है और एक हिस्सा किरदार के साथ चला जाता है। मैंने उससे बहुत कुछ सीखा है, उनमें से एक है फिटनेस।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इसे जिंदगी में देर से शुरू किया। अगर कोई लड़की बंदूक उठा रही है, तो फिजिकल और मेंटल हेल्थ जरूरी है। मिर्जापुर में जब मैं ऐसा किरदार निभाती हूं, तो मुझे क्रिएटिव संतुष्टि मिलती है, खासकर महिला किरदारों को निभाते हुए। उन्हें आम तौर पर ऐसे नहीं लिखा जाता है। इसलिए आप शुक्रगुजार महसूस करते हैं। जब कोई मौका मिलता है तभी आप कुछ कर पाते हैं, इसलिए वह मौका बहुत जरूरी है।”

श्वेता त्रिपाठी के बारे में

उन्होंने डिज्नी चैनल के टीन सिटकॉम ‘क्या मस्त है लाइफ’ (2009) से स्क्रीन पर डेब्यू किया था। उसके बाद ‘द सूट लाइफ ऑफ करण एंड कबीर’ (2012) में एक छोटा सा रोल (कैमियो) किया। उनकी फीचर फिल्म की शुरुआत 2011 में रिलीज हुई फिल्म ‘तृष्णा’ से हुई। उन्हें बड़ी पहचान नीरज घायवान की 2015 की फिल्म ‘मसान’ से मिली, जहां उन्हें विक्की कौशल के साथ लीड एक्ट्रेस के तौर पर काफी शोहरत और पहचान मिली। विक्की कौशल ने भी इसी फिल्म से डेब्यू किया था। उन्होंने नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ 2017 की फिल्म ‘हरामखोर’ में अपनी जबरदस्त एक्टिंग से गहरी छाप छोड़ी।

समय के साथ श्वेता त्रिपाठी ने अपने काम का दायरा बढ़ाया और कई अलग-अलग प्लैटफॉर्म और भाषाओं में काम किया। उनके कुछ अन्य मशहूर प्रोजेक्ट्स में ‘जू’ (2018), ‘गॉन केश’ (2019), ‘मेहंदी सर्कस’ (2019, तमिल), ‘द इलीगल’ (2021) और ‘रात अकेली है’ (2020) शामिल हैं। उनके OTT प्रोजेक्ट्स में ‘TVF ट्रिपलिंग’ (2016), ‘लाखों में एक’ (2017), ‘मेड इन हेवन’ (2019), ‘द गॉन गेम’ (2020-2022), ‘एस्केप लाइव’ (2022) और ‘ये काली काली आंखें’ (2022-2024) शामिल हैं।

मार्च 2025 में उन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर अपने पहले प्रोजेक्ट की घोषणा की – संजय नाग के निर्देशन में बनी एक ‘क्वीर लव स्टोरी’ (समलैंगिक प्रेम कहानी), जिसका नाम है ‘मुझे जान न कहो मेरी जान’। इसमें वह तिलोत्तमा शोम के साथ नजर आएंगी। इसकी रिलीज की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।