संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

Rahul Gandhi

संसद भवन परिसर के बाहर राजनीतिक पारा उस वक्त और चढ़ गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए पत्रकारों के रुख पर ही तीखे सवाल खड़े कर दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने मीडिया पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का सीधा आरोप लगाया।

1. “जब वे बोलते हैं तब आप चुप रहते हैं”— मीडिया पर तीखे सवाल
संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल पूछना शुरू किया, तो राहुल गांधी ने बीच में टोकते हुए मीडिया के रवैये पर आपत्ति जताई:

•    इंटरप्ट करने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि जब विपक्ष का कोई नेता बोलता है तो मीडिया उन्हें हर 24 घंटे टोकता (interrupt) है, लेकिन जब सत्ता पक्ष या गृह मंत्री बोलते हैं तो कोई सवाल नहीं पूछा जाता।

•    “चूहे की तरह खड़े हो जाते हैं”: राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “उनमें ऐसी क्या खास बात है कि पूरा मीडिया उनके सामने चुप होकर खड़ा हो जाता है? जब वे बोलते हैं तो आप उन्हें इंटरप्ट क्यों नहीं करते?”

•    डरने की जरूरत नहीं: देश भर में चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जब देश के युवा और छात्र सरकार से नहीं डर रहे हैं, तो मीडिया को भी डरने की जरूरत नहीं है।

2. अमित शाह पर निशाना: “गुब्बारे से हवा निकल चुकी है”
गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी और उनके सुरक्षा घेरे को लेकर राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया:
“सवाल यह नहीं है कि अमित शाह क्या कहते हैं, हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। समझने वाली बात यह है कि वे 20 दिनों तक गायब रहे। उनके घर के बाहर 30-30 गाड़ियां और हजारों पुलिसवाले तैनात रहते हैं ताकि कोई छात्र वहां न पहुंच सके। हवा भरे गुब्बारे से अब गैस निकल चुकी है और वे अंतिम समय में फिर से हवा भरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गुब्बारा फट चुका है।”
— राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष)
राहुल गांधी ने गृह मंत्री की हिम्मत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें सदन में आकर सीधी चर्चा का सामना करने का साहस नहीं है।

संसद के बाहर राहुल गांधी का यह बयान न केवल गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर सीधा हमला है, बल्कि भारत में मुख्यधारा मीडिया की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। विपक्ष लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार जनमुद्दों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का सामना करने से बच रही है।

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

rahul gandhi vs amit shah

जंतर मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में चर्चा और जवाब संबंधी पेशकश को खारिज करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनसे इस्तीफा मांग लिया। राहुल ने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? ALSO READ: क्या बिना संसद में परिसीमन बिल पास हुए बदल जाएंगी लोकसभा की सीटें? जानिए संविधान का वो नियम जो कोई नहीं बताता

 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देखिए सबसे पहले लापता और भाग गए हैं इस प्रकार की भाषा भारत की सर्वाजनिक जीवन में, संसदीय जीवन में अभी अभी सुनाई देती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है तबसे मैं लगातार संसद में आता हूं और अपने चैंबर में बैठा हूं चूंकि विपक्ष सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है सरकार की ओर से किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र आंदोलन के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार हैं और चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

 

उन्होंने कहा कि मेरी ओर से मैंने भी कह दिया कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं लेकिन वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। आज 3 बजे तक वो स्पीकर साहब को पत्र दें और कल 3 बजे तक हम सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार हैं मैं सदन में बैठूंगा और सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है। ALSO READ: सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में राहुल गांधी और अमित शाह, क्‍या मुलाकात हुई, कुछ बात हुई?

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं 'हम' कहता हूं, तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली किसने चलाई? कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? क्या हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। ALSO READ: झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सियासी संग्राम, संसद में NDA का प्रदर्शन; राहुल गांधी से मांगा जवाब

 

उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है, वे सदन में नहीं आ सकते। उन्होंने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? 

जिंदगी के हर मोड़ पर आएंगी काम, ये 6 किताबें सिखाएंगी जीने का हुनर!

जिंदगी की बड़ी सीख किसी एक्सपीरियंस से नहीं मिलती। कई बार रोज की छोटी-छोटी बातें, लोगों से मिलना, रिश्ते और घटनाएं भी बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कुछ किताबें ऐसी ही आम जिंदगी और छोटे पलों की कहानियां बताती हैं, जिनसे खुशी, रिश्तों, उम्मीद और खुद को समझने की सीख मिलती है।

 

 

द हाउस ऑन मैंगो स्ट्रीट – सैंड्रा सिस्नेरोस

THE HOUSE ON MANGO STREET by CISNEROS, SANDRA: (1983) | JOHN LUTSCHAK BOOKS

सैंड्रा सिस्नेरोस की यह किताब एस्पेरांजा नाम की एक लड़की की कहानी है। जो बड़ी हो रही है और धीरे-धीरे खुद को समझने की कोशिश करती है। उसके आसपास रहने वाले लोग, परिवार और रोज होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं उसके सोच को बदलती हैं। कहानी यह समझाती है कि जिस जगह और माहौल में इंसान बड़ा होता है, उसका असर उसकी सोच और पहचान पर पड़ता है।

 

 

ऐन ऑफ ग्रीन गेबल्स – एल.एम. मोंटगोमरी

Anne of Green Gables Vintage Illustrated Hardcover Book - Etsy Australia

एल.एम. मोंटगोमरी की यह कहानी ऐन शर्ली नाम की एक बहुत ही कल्पनाशील लड़की की है। ऐन को लंबे समय तक ऐसा लगता है कि उसे कोई नहीं चाहता, लेकिन बाद में उसे एक घर और अपनेपन का एहसास मिलता है। वह छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी ढूंढ लेती है। प्रकृति, दोस्ती और रोज के अनुभव उसके लिए खास बन जाते हैं। यह किताब सिखाती है कि खुशी सिर्फ बड़ी चीजों से नहीं मिलती। सही सोच, उम्मीद, दया और छोटी खुशियों की कद्र करने से भी जिंदगी खूबसूरत बन सकती है।

 

 

अ मैन कॉल्ड ओवे – फ्रेडरिक बैकमैन

A Man Called Ove: The global bestselling phenomenon : Buy Online at Best Price in KSA - Souq is now Amazon.sa: Backman, Fredrik, Koch, Henning: Books

फ्रेडरिक बैकमैन की यह कहानी ओवे नाम के एक अकेले और थोड़े गुस्सैल व्यक्ति की है। ओवे को जिंदगी में बदलाव बिल्कुल पसंद नहीं होता। लेकिन जब उसके नए पड़ोसी उसके जीवन में आते हैं, तो धीरे-धीरे उसकी दुनिया बदलने लगती है। उसके व्यवहार के पीछे छिपी अच्छाई सामने आने लगती हैं। कहानी बताती है कि कई बार कठोर दिखने वाले लोगों में भी प्यार और अपनापन छिपा होता है।

 

 

द स्टोरीड लाइफ ऑफ ए.जे. फिक्री – गैब्रिएल जेविन

गैब्रिएल जेविन की यह किताब ए.जे. फिक्री नाम के एक बुकस्टोर मालिक की कहानी है। वह अकेला रहता है और उसकी जिंदगी बहुत शांत तरीके से चल रही होती है।लेकिन अचानक होने वाली घटनाओं से उसका नजरिया बदलने लगता है। धीरे-धीरे उसे रिश्तों, दोस्ती और अपनेपन की अहमियत समझ आती है। यह कहानी बताती है कि जिंदगी में नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती।

 

 

द लिटिल प्रिंस – एंटोनी डी सेंट एक्सुपरी

एंटोनी डी सेंट-एक्सुपरी की ‘द लिटिल प्रिंस’ देखने में बच्चों की कहानी लगती है, लेकिन इसमें बड़ों के लिए भी बहुत सी जरूरी बातें छिपी हैं। कहानी में लिटिल प्रिंस अलग-अलग लोगों से मिलता है और उनके जरिए प्यार, दोस्ती, जिम्मेदारी और अकेलेपन को समझता है। यह किताब बताती है कि बड़े होने के बाद भी जिंदगी में छोटी चीजों को लेकर उत्सुकता और खुशी बनाए रखनी चाहिए।

 

 

ट्यूजडेज विद मॉरी -मिच एल्बम

मिच एल्बम की यह किताब राइटर और उनके पुराने प्रोफेसर मॉरी श्वार्ट्ज के बीच होने वाली मुलाकातों पर बेस्ड है। मॉरी बताते हैं कि लोग कई बार पैसा, काम और सफलता पाने की दौड़ में उन चीजों को भूल जाते हैं जो सच में खुशी देती हैं। वह रिश्तों को समय देने और अपने परिवार के साथ प्यार से रहने की बात करते हैं। इस किताब में जिंदगी की बड़ी सीख को आम बातचीत से समझाया गया है।

 

 

रोज की जिंदगी से सीख

इन सभी किताबों की कहानियां अलग हैं, लेकिन इनका मेसेज काफी हद तक एक जैसा है। जिंदगी की खुशी हमेशा बड़ी सफलता या बड़ी घटना में नहीं होती। परिवार के साथ बिताया समय, दोस्ती, किसी की मदद करना, छोटी खुशियों को महसूस करना और मुश्किल समय में उम्मीद बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।