क्या ईरान युद्ध में आएगा बड़ा ट्विस्ट, न्यूक्लियर डील से पीछे हटेंगे ट्रंप? होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका की क्या है नई स्ट्रैटेजी

Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं

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थाईलैंड के स्कूल में 8वीं के छात्र ने की फायरिंग, एक टीचर की मौत, खुद को भी मारी गोली, 15 घायल

Thailand School Shooting: थाईलैंड के बांग क्रूई जिले में शुक्रवार को एक स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र ने गोलीबारी कर दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में एक शिक्षक की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य लोग घायल हुए हैं। वहीं, घटना की खबर सामने आने के शुरुआती समय में न तो पीड़ितों की संख्या स्पष्ट थी और न ही उनसे जुड़ी कोई अन्य जानकारी मिल पाई थी। बाद में रॉयटर्स के हवाले से सामने आया कि अधिकारियों ने पुष्टि की कि गोलीबारी में मारे गए लोगों में एक शिक्षक भी शामिल है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल में फायरिंग करने के बाद हमलावर ने खुद को भी गोली मार ली। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

हमलावर निकला 8वीं कक्षा का छात्र 

बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, यह हमला नोंथाबुरी प्रांत के देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुआ। बताया जाता है कि यह प्रांत राजधानी बैंकॉक से मात्र 20 किलोमीटर दूर है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावर आठवीं कक्षा का छात्र है। उसने कथित तौर पर स्कूल भवन की तीसरी मंजिल पर खुद को बंद कर लिया था।

थाईलैंड के स्थानीय ब्रॉडकास्टर Thai PBS के अनुसार, जिस स्कूल से गोलीबारी की सूचना मिली है, वह काफी फेमस है।

‘पहले लगा की पटाखे फूट रहे हैं’

रॉयटर्स के अनुसार, 18 साल के एक युवक ने बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई, तो उसे लगा कि कहीं पटाखे फूट रहे हैं या कोई कुछ पीट रहा है।

उसने कहा, “पहले तो मुझे लगा ही नहीं कि यह बंदूक है। कई गोलियां चलीं: बैंग बैंग बैंग। फिर सन्नाटा छा गया। फिर आवाजें तेज हो गईं।”

बचाव कर्मियों ने शेयर की तस्वीरें

घटना के बाद आपातकालीन बचाव कर्मियों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में बैंकॉक के उत्तर-पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित देबसिरिन नोनथाबुरी स्कूल से छात्रों को बाहर निकलते हुए दिखाया गया है, जबकि एम्बुलेंस मौके पर मौजूद थीं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति एम्बुलेंस के बाहर स्ट्रेचर पर लेटा हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि एक अन्य व्यक्ति को पास ही मौजूद बचाव कर्मी द्वारा चिकित्सा सहायता दी जा रही है।

जिला अधिकारियों ने बताया कि 2025 के शैक्षणिक वर्ष में स्कूल में लगभग 3,100 छात्र और 147 शिक्षक नामांकित थे।

शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

थाईलैंड के शिक्षा मंत्री प्रसर्ट चंतारारुआंगथोंग ने स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना के बाद तुरंत कार्रवाई और मदद का भरोसा दिलाया और संवेदनशील जानकारी शेयर करने में सावधानी बरतने की अपील की। X पर उन्होंने कहा, “मैं अभी उबोन रत्चाथानी प्रांत में सरकारी काम से हूं और लगातार हालात पर नजर रखे हुए हूं। मैंने शिक्षा मंत्रालय के तहत सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित अधिकारियों और संगठनों के साथ मिलकर तेजी से काम करें ताकि स्थिति को जल्द सुलझाया जा सके, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा सके, और प्रभावित सभी लोगों की शारीरिक और मानसिक स्थिति का तुरंत आकलन करके उन्हें पूरी मदद और सहयोग दिया जा सके।”

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Donald Trump: ‘हमारे पास हथियारों की कमी नहीं’ ट्रंप ने अमेरिकी मिसाइलों की कमी की खबरों को किया खारिज, कहा- ईरान के साथ जल्द होगा समझौता

Donald Trump Statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ महीनों के टकराव के बाद अमेरिका के पास अहम मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना के पास हथियारों की पर्याप्त आपूर्ति है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हथियारों का स्टॉक “थोड़ा कम” हो गया है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के पास अभी भी हथियारों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ पांच महीने के संघर्ष के दौरान देश ने अपनी सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।

ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावों को किया खारिज

हथियारों की व्यापक कमी के दावों को खारिज करते हुए, उन्होंने माना कि कुछ तरह के हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”

हालांकि, उन्होंने बड़े स्तर पर हथियारों की कमी की खबरों को खारिज करते हुए माना कि हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका “बहुत अच्छी स्थिति” में है और जaर देकर कहा, “हमारे पास सचमुच भारी मात्रा में गोला-बारूद है।”

रक्षा कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रक्षा कंपनियां अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं, जिसमें पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलें बनाने के लिए नई सुविधाएं तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम हमेशा और ज्यादा चाहते हैं। हमारे पास और ज्याद होना चाहिए।”

वहीं, कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ चले युद्ध के दौरान पेंटागन ने अपनी वैश्विक मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया है। इनमें बेहद सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं।

ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा

ट्रंप ने भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। मुझे नहीं लगता कि वे इसे ज़्यादा देर तक खींच पाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे तेहरान के साथ बातचीत में शामिल हैं। “सब ठीक चल रहा है। जल्द ही कोई समझौता हो सकता है।”

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Donald Trump: ‘युद्ध जल्द खत्म होने वाला है’, ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता की चर्चा के बीच किया बड़ा ऐलान, जानें होर्मुज को लेकर क्या कहा

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी युद्ध जल्द खत्म होने वाला है। इस बात की घोषणा खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने की है।ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इसका ऐलान किया। इस युद्ध की वजह से दोनों देशों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति अब इसे खत

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US New Tariffs Row: भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का भारी विरोध, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा

US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।

Donald Trump: ‘वो हमला नहीं चाहता, लेकिन मेरे नजरिए से…’, ट्रंप ने फिर ईरान को दी बड़ी धमकी, कहा- ये आखिरी मौका है

अमेरिका और ईरान शांति वार्ता पर फिर से बातचीत करने वाले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई बातचीत का दावा किया है,हालांकि ईरान ने ट्रंप के इस दावे को एक बार भी सिरे से खारिज कर दिया है। मगर ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए साफ कह दिया है कि ये आखिरी मौका है, डील या फिर सरेंडर। अमे

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‘मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता’, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कैंसिल किए ‘भीषण हमले’, ईरानी मीडिया ने कस दिया तंज

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला टाल दिया है। उन्होंने अपने इस निर्णय को लेकर कहा कि ने निर्दोषों की जान नहीं लेना चाहते हैं। युद्ध में लोगों की मौत होती है और वे ऐसा नहीं चाहते। उन्होंने दावा किया कि इस बाबत उन्होंने सऊदी अरब के किंग और क्र

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Trump का बिजनेस आइडिया! हर महीने ₹9500000 के खर्च में Truth Social पर दिखेगी सबसे पहले पोस्ट, सांसदों ने की शिकायत

Trump Effect: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी ने एक नई पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत सब्सक्राइबर्स को ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर आने वाली पोस्ट्स, खासतौर से हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की पोस्ट्स, आम यूजर्स से पहले देखने की सुविधा मिलेगी। खास बात ये है कि इस सर्विस के लिए सब्सक्राइबर्स को हर महीने $1 लाख यानी करीब ₹95 लाख रुपये देने होंगे। हालांकि इसने ट्रंप की राजनीतिक भूमिका और उनके कारोबारी हितों के बीच कनफ्लिक्ट ऑफ इंटेरेस्ट यानी हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप मीडिया और एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (TMTG) ने शनिवार को Truth API नाम से सब्सक्रिप्शन-बेस्ड सर्विस शुरू की। इसके तुरंत बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी से इसकी जांच करने की मांग कर दी।

क्या है पेड सर्विस की खास बात

ट्रंप मीडिया ने ट्रुथ एपीआई नाम से सब्सक्रिप्शन सर्विस पेश किया है। कंपनी के अंतरिम सीईओ केविन मैकगर्न (Kevin McGurn) का कहना है कि इसके जरिए बिजनेसेज को मार्केट पर असर डालने वाली अहम जानकारियां आम लोगों से पहले तुरंत ही मिल जाएंगी। इसके तहत ट्रेडिंग फर्म्स और अन्य सब्सक्राइबर्स को आम यूजर्स से पहले जानकारी मिल जाएगी और इसके लिए उन्हें हर महीने $1 लाख तक की फीस देनी होगी।

क्यों हो रहा विरोध

अब इसे लेकर विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सर्विसेज होने के बावजूद ट्रंप के चलते ट्रुथ सोशल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। ट्रंप ट्रुथ सोशल के सबसे प्रभावशाली यूजर होने के साथ-साथ इसकी पैरेंट कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर भी हैं। वह अकसर इसी के जरिए अहम सरकारी नीतियों, टैरिफ, आर्थिक फैसलों और अन्य बड़े मुद्दों पर ऐलान करते हैं जिसका मार्केट पर सीधा असर पड़ता है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर कुछ लोगों को ट्रंप की पोस्ट पहले देखने को मिल जाए तो बाकी लोगों की तुलना में उन्हें अनुचित बढ़त मिल जाएगी। उनके बयानों पर मार्केट में काफी तेज मूवमेंट दिखता है।

क्या कहना है Trump Media का

अमेरिकी सांसदों ने एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने एसईसी के चेयरमैन पॉल एटकिन्स (Paul Atkins) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर बाजार को प्रभावित करने वाली जानकारी कुछ चुनिंदा कंपनियों को पहले मिलती है, तो क्या यह बाजार के नियमों का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने इसे राष्ट्रपति के पद का व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए गंभीर दुरुपयोग बताया। वहीं ट्रंप मीडिया का कहना है कि बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सर्विसेज की तरह ट्रुथ एपीआई एक कमर्शियल डेटा प्रोडक्ट की तरह है। बता दें कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप मीडिया के शेयरों में 70% से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इससे कंपनी के शेयरहोल्डर्स की दौलत में अरबों डॉलर की कमी आई है।

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Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

Donald Trump : ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद बोले- ‘करारा जवाब देंगे’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस हमले का 'करारा जवाब' देगा। अमेरिकी सेना ने इस हमले को ईरान की ओर से किया गया 'अचानक हमला करने का प्रयास' बताया है, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने सभी आने वाली मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही सफलतापूर्वक मार गिराया। ट्रंप ने कहा, “हम उन्हें कड़ा सबक सिखाएंगे। हम उन पर पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई करेंगे।”

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CENTCOM ने किया हमले को नाकाम करने का दावा

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।

 

ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी बलों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ मिनट ही थे, लेकिन उन्होंने तेजी से कार्रवाई करते हुए मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उस अभियान का वीडियो देखा, जिसमें अमेरिकी सैनिक वास्तविक समय में मिसाइलों की स्थिति बताते हुए उन्हें इंटरसेप्ट कर रहे थे।

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जॉर्डन ने भी पांच मिसाइलें मार गिराने का दावा किया

 

इस बीच, जॉर्डन की सेना ने भी बुधवार को कहा कि उसने देश की ओर दागी गई पांच मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि इन मिसाइलों का निशाना जॉर्डन का मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय था।

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ईरान समर्थित मिलिशिया पर भी कार्रवाई

इससे पहले CENTCOM ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त अभियान चलाकर हवाई हमले किए। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई इराक सरकार के समन्वय से की गई और ईरान समर्थित मिलिशिया को “दुनिया के लिए कैंसर” बताया। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी सरकार ईरान समर्थित अन्य समूहों को भी कड़ी चेतावनी देने पर विचार कर रही है।