हैदराबाद में बनी Donald Trump Avenue, ट्रंप बोले- ऐसा सम्मान पाने वाला पहला अमेरिकी राष्ट्रपति

trump avenue hyderabad

Hyderabad Donald Trump Avenue: हैदराबाद में अमेरिकी दूतावास से सटी सड़क का नाम बदलकर डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैदराबाद में उनके नाम पर सड़क का नाम रखे जाने पर बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को इस तरह से सम्मानित नहीं किया गया। ALSO READ: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

 

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने 24 जून को इस सड़क का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था। ट्रंप एवेन्यू में कई अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनियां भी मौजूद हैं। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजॉन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'भारत के हैदराबाद में नया 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' इस तरह सम्मानित होने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद'। ट्रंप ने उद्घाटन समारोह की तस्वीर भी शेयर की है। ALSO READ: Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू

गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी इस सड़क को पहले US कॉन्सुलेट रोड के नाम से जाना जाता था। 

edited by : Nrapendra Gupta

Empty Show से India’s Got Latent तक। Avinash Agarwal | Indian Trump | The Better India Hindi

14 साल, सैकड़ों लाइव शो और कई बार सामने सिर्फ़ खाली कुर्सियां। फिर भी अविनाश अग्रवाल ने स्टेज नहीं छोड़ा।
उन्होंने मंज़िल का इंतज़ार नहीं किया, सफ़र को जिया। और एक दिन वही सफ़र उन्हें India’s Got Latent Season 2 तक ले गया, जहाँ उनकी Donald Trump मिमिक्री ने पूरे इंटरनेट का ध्यान खींच लिया।
कभी-कभी सफलता देर से मिलती है लेकिन जो सफ़र से प्यार कर लेता है, उसके लिए हर दिन एक जीत बन जाता है।
आपकी नज़र में सफलता का सबसे बड़ा राज़ क्या है?
कमेंट में बताएं।
@avinashtheagarwal

Avinash Agarwal, Samay Raina, Donald Trump Mimicry

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Trump vs Netanyahu: ‘यहूदी भी आपसे तंग आ चुके हैं…’; ट्रंप ने गाजा सीजफायर को लेकर नेतन्याहू को लगाई फटकार, नई किताब में बड़ा दावा

Trump vs Netanyahu: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सितंबर 2025 में फोन पर हुई एक कथित तीखी बातचीत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह दावा ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप (Regime Change: Inside The Imperial Presidency Of Donald Trump)’ नामक नई किताब में किया गया है। इस किताब को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान (Maggie Haberman और Jonathan Swan) ने लिखा है।

नई किताब में किए गए ये दावे अमेरिका और इज़राइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच पर्दे के पीछे मौजूद तनाव की तस्वीर पेश करते हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि गाजा सीजफायर को लेकर ट्रंप प्रशासन ने नेतन्याहू पर काफी दबाव बनाया था, भले ही दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि लंबे समय तक मजबूत सहयोगियों की रही हो।

किताब के अनुसार, गाजा में सीजफायर को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से नाराजगी जताते हुए कहा, “सब लोग तुमसे तंग आ चुके हैं, बिबी। सभी यहूदी भी तुमसे परेशान हैं। यहां तक कि इस कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे तंग आ चुके हैं।”

गाजा सीजफायर को लेकर बढ़ा था तनाव

किताब के मुताबिक, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच यह बातचीत सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान हुई थी। उस समय ट्रंप प्रशासन गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय शांति योजना पर काम कर रहा था।

बताया जा है कि ट्रंप को आशंका थी कि नेतन्याहू अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए सीजफायर समझौते से पीछे हट सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर नेतन्याहू पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि युद्ध बहुत लंबा खिंच चुका है और अब समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी है।

कॉल में मौजूद थे विटकॉफ और कुशनर

किताब में दावा किया गया है कि इस फोन कॉल में ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल थे। दोनों को डर था कि महीनों की बातचीत के बाद तैयार किया गया शांति प्रस्ताव इजरायल की अनिच्छा के कारण विफल हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी पक्ष नेतन्याहू से स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता था।

कतर में हमले के बाद बढ़ी नाराजगी

किताब के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर एक हवाई हमला किया था। उस समय सीजफायर को लेकर बातचीत जारी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई से कतर नाराज हो गया।

इतना ही नहीं कतर ने मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी रखने पर आपत्ति जताई। इससे युद्धविराम प्रयासों को झटका लगा। किताब का दावा है कि विटकॉफ और कुशनर को लगा कि उन्हें इजरायल की योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इससे अमेरिकी टीम के भीतर भी असंतोष पैदा हुआ।

ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया ‘कॉन मैन’

किताब के लेखकों के अनुसार ट्रंप ने निजी बातचीत में नेतन्याहू को ‘कॉन मैन’ (धोखेबाज या चालाक व्यक्ति) भी कहा था। किताब का दावा है कि ट्रंप की राजनीतिक शब्दावली में यह सबसे कठोर टिप्पणियों में से एक मानी जाती है। यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सार्वजनिक तौर पर ट्रंप और नेतन्याहू को लंबे समय तक करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है।

आखिरकार नेतन्याहू ने माना प्रस्ताव

किताब के मुताबिक, शुरुआती विरोध और तनाव के बावजूद नेतन्याहू ने आखिरकार अमेरिकी सीजफायर को स्वीकार कर लिया। किताब में दावा किया गया है कि दोहा हमले के लगभग 18 दिन बाद इजरायल इस समझौते पर सहमत हुआ। बाद में नेतन्याहू ने अपनी ओर से खेद भी जताया।

हालांकि, ये सभी दावे पत्रकारों की किताब में प्रकाशित डिटेल्स पर आधारित हैं। कथित फोन कॉल की कोई आधिकारिक रिकॉर्डिंग या सार्वजनिक ट्रांसक्रिप्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों और दावों को फिलहाल किताब में किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

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पहले दिया 60 दिनों का अल्‍टीमेटम, फिर दिखाई ईरान को हेकड़ी… ट्रंप ने दी होर्मुज में टोल लगाने की धमकी; क्‍या युद्ध का खर्चा निकालने की है प्‍लानिंग?

Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 100 दिनों के युद्ध के बाद समझौता हो गया है। समझौते की बाकी शर्तें किस तरह से पूरी होनी है, इसे लेकर अगले 60 दिनों में बात होगी। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सीजफायर के दौरान 60 दिनों तक होर

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‘अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दो, मेरी पर नहीं’, मेलोनी ने ट्रंप को दे दिया ये जवाब

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने दावा किया था कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी। इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मेलोनी ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी और ट्रंप की दोस्ती से इटली में उनकी लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को गलत बताया।

मेलोनी ने ट्रंप को दिया जवाब

विवाद बढ़ने के बाद ट्रंप ने फिर दावा किया कि जी-7 सम्मेलन में मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बार-बार अनुरोध किया था। ट्रंप का यह भी कहना था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन नहीं करने के बाद मेलोनी अपनी कथित गिरती लोकप्रियता को सुधारने के लिए अमेरिका और वॉशिंगटन के साथ रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि, मेलोनी ने ट्रंप के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

कही ये बात

जॉर्जिया मेलोनी ने डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों का कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सहयोगी देशों पर इस तरह बार-बार और बिना किसी ठोस वजह के निशाना साधना सही नहीं है। मेलोनी ने ईरान को लेकर अमेरिका के सैन्य अभियान में शामिल न होने के अपने फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि इटली ने जो फैसला लिया, वह देश के हितों और अपनी नीति के अनुसार लिया गया था। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक मैसेज में मेलोनी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप, आपके ये लगातार और बेवजह के हमले समझ से परे हैं। जहां तक मेरी लोकप्रियता का सवाल है, तो आपकी दोस्त होने से मुझे कोई फायदा नहीं मिला है। मेरी लोकप्रियता और राजनीतिक स्थिति आपके साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती।”

बढ़ा विवाद

मेलोनी ने अपने बयान में आगे कहा कि उनकी लोकप्रियता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इटली के हितों की कितनी अच्छी तरह रक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उनका हमेशा यही प्रयास रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों का जिक्र करते हुए कहा कि इटली में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के इस्तेमाल के लिए पहले से तय नियम और समझौते हैं। इटली ने हमेशा इन नियमों का पालन किया है और उनकी सरकार भी ऐसा ही करती रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, किसी भी तय नियम का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।

मेलोनी ने कहा, “इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, इसलिए हमारे फैसले देश के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।” उन्होंने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, “मेरी लोकप्रियता आपकी चिंता का विषय नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दें।”

“मैं बॉस हूं’ वाले बयान पर ट्रंप की सफाई, बोले- मैं मजाक कर रहा था, मेरी बात को गलत समझा गया

Donald Trump: G7 नेताओं से “मैं बॉस हूं” (I’m the boss) वाली बात कहने के बाद, जब यह टिप्पणी वायरल हो गई और समिट के दौरान दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा और लोगों को इस बात पर हंसी भी आई, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा, “मैं मजाक कर रहा था। मैं बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहा था।” ट्रंप ने यह बात The Axios Show पर एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने बताया कि उनकी टिप्पणी का मकसद मजाक करना था, लेकिन उसे गलत संदर्भ में लिया गया।

उस पल को याद करते हुए जब शो के होस्ट ने ट्रंप से पूछा, “आप कमरे में आए और कहा, ‘मैं बॉस हूं।’ उनमें से कितने लोगों ने इस बात पर यकीन किया होगा?”

इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि जब वह उस कमरे में पहुंचे, जहां पहले से ही दुनिया के कई बड़े नेता बैठे थे, तो उन्होंने माहौल हल्का करने के लिए मजाक में यह बात कही थी। उनका कहना है कि इस बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं थी, लेकिन यह तेजी से वायरल हो गया।

“मैं बॉस हूं…” G7 बैठक में बोले ट्रंप 

बता दें कि बुधवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने G7 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन बैठक में प्रवेश करते समय एक मजाकिया टिप्पणी की, जिस पर सब हंस पड़े।

जब वह तीन दिवसीय जी7 समिट के अंतिम दिन की सुबह की बैठक में पहुंचे, तो बाकी देश के नेता पहले से अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। उसी दौरान ट्रंप ने अंदर आते हुए कहा, “मैं बॉस हूं।”

इसी हंसी-मजाक के बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस टिप्पणी को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पूछा, “आप कैसे हैं?” ट्रंप ने जवाब दिया, “अच्छा हूं, धन्यवाद।”

G7 समिट का आयोजन कैसे होता है, और इसमें कितने देश शामिल हैं?

गौरतलब है कि G7 देश बारी-बारी से कार्यक्रमों की मेजबानी और आयोजन करते हैं। इस बार फ्रांस को पिछले साल के मेजबान कनाडा से G7 की अध्यक्षता मिली थी और 2027 में यह अमेरिका को सौंपी जाएगी।

वहीं, इस समूह का पहला शिखर सम्मेलन 1975 में फ्रांस के रैम्बौइलेट में हुआ था। इसमें छह देशों – फ्रांस, पश्चिमी जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका – के नेता एक साथ आए थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद आई सबसे बड़ी आर्थिक मंदी से उबरने की गति तेज करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया था। अगले साल कनाडा भी इसमें शामिल हो गया, जिससे यह G7 बन गया।

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अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।

चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन “पहले कभी न देखे गए” खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:

खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।

सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।

‘डीप स्टेट’ का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया

गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।

पीछे से घुमाई पूरी बाजी

बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।

“संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ”

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।

गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— “क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?” तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ

तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, “कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।”

गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट, ट्रंप चुराने चले फ्रांस के राष्ट्रपति की घड़ी! G7 समिट का हॉट माइक रह गया ऑन, नेताओं की सीक्रेट बातचीत हो गईं रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता जब एक बंद कमरे में मिलते हैं, तो हमें लगता है कि वहां सिर्फ युद्ध, व्यापार और दुनिया की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर ही चर्चा होती होगी। लेकिन फ्रांस में चल रहे G7 समिट (G7 Summit) के दूसरे दिन एक गजब का वाकया हुआ। यहां करीब 27 मिनट तक नेताओं का माइक गलती से चालू रह गया (Hot-Mic)। इस ‘ओपन माइक’ ने दुनिया के इन बड़े नेताओं के बीच की अनौपचारिक बातचीत, हंसी-मजाक, खेल और निजी जिंदगी के कई ऐसे दिलचस्प राज खोल दिए जो अमूमन सामने नहीं आते।

इटली की पीएम मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट

इस लीक हुई बातचीत में सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मेलोनी से अनौपचारिक बातचीत में पूछा कि क्या उन्होंने सुबह की सिगरेट पी ली है? इस पर मेलोनी ने सबको चौंकाते हुए बताया कि उन्होंने इसी साल 1 मई से सिगरेट पीना पूरी तरह छोड़ दिया है।

यह सुनते ही ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर समेत कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मजाक में अपने हाथ को पकड़ने का इशारा करते हुए पूछा, “क्या आप निकोटीन पैच (सिगरेट छुड़ाने वाली पट्टी) का इस्तेमाल कर रही हैं?” इस पर मेलोनी ने खुशी से दोनों हाथ उठाकर जश्न मनाया।

समिट में चढ़ा फुटबॉल और UFC का बुखार

दुनिया भर के बड़े संकटों के बीच नेताओं के सिर पर फुटबॉल का खुमार भी देखने को मिला। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होने वाले आगामी फीफा वर्ल्ड कप को लेकर नेताओं ने लंच के दौरान फुटबॉल पर लंबी बात की।

इसी बीच एक आवाज आई, “एले ले ब्लूज!” (फ्रांस की टीम का हौसला बढ़ाने वाला नारा)।

एक नेता ने पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) क्लब की चैंपियंस लीग में जीत की तारीफ की।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने केप वर्डे की टीम की वर्ल्ड चैंपियन स्पेन को 0-0 से ड्रॉ पर रोकने को बेहद हैरान करने वाला बताया।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत का रुख मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने अपने 80वें जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में रखी गई UFC इवेंट की यादें ताजा करते हुए इसके प्रेसिडेंट डाना व्हाइट की जमकर तारीफ की।

ट्रंप का ‘ग्रीनलैंड’ वाला रहस्यमयी कमेंट

इस रिकॉर्डिंग में डोनाल्ड ट्रंप का एक छोटा सा कमेंट खूब सुर्खियां बटोर रहा है। यूरोपीयन यूनियन के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से बात करते हुए ट्रंप ने धीरे से कहा, “तुम समझे?” और थोड़ा रुककर सिर्फ एक शब्द बोला- “ग्रीनलैंड।”

इसके आगे की बात सुनाई नहीं दी। लेकिन इस एक शब्द ने ही कौतूहल बढ़ा दिया है, क्योंकि ट्रंप पहले भी कई बार डेनमार्क के इस हिस्से (ग्रीनलैंड) को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं, जिससे यूरोपीय नेता नाराज भी हुए थे। ट्रंप यहां क्या कहना चाहते थे, यह अब भी एक रहस्य है।

जब मैक्रों की घड़ी चुराने चले ट्रंप!

एक हल्के-फुल्के पल में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने देखा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी घड़ी लंच टेबल पर ही भूल गए हैं। कार्नी ने मजाक में कहा, “वह अपनी घड़ी यहीं छोड़ गए हैं। हमारे हाथ उनकी घड़ी लग गई है।”

यह सुनते ही ट्रंप तुरंत मजे लेते हुए बोले, “अगर वह छोड़ गए हैं, तो वो घड़ी मुझे दे दो, मुझे दे दो।” ट्रंप की यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी नेता ठहाके मारकर हंस पड़े।

ट्रंप को मिले अनोखे तोहफे: साइकिल और ’47’ नंबर की जर्सी

इस समिट में नेताओं ने एक-दूसरे को गिफ्ट भी दिए। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने सभी G7 नेताओं को एक-एक कस्टमाइज्ड (खास तौर पर तैयार) साइकिल गिफ्ट की। यह तोहफा इसलिए मजेदार था, क्योंकि ट्रंप अक्सर गोल्फ के अलावा किसी भी तरह की एक्सरसाइज से बचने के लिए जाने जाते हैं और इस पर मजाक भी करते हैं।

वहीं, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रंप को जर्मनी की फुटबॉल टीम की एक जर्सी गिफ्ट की, जिस पर पीछे ‘TRUMP’ और ’47’ नंबर लिखा था (ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं)। ट्रंप ने इस जर्सी के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाईं। बाद में जर्मन चांसलर ने इस फोटो को इंटरनेट पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आखिरकार, हम सब एक ही टीम में हैं।”

Melodi का जलवा फिर बरकरार

तस्वीर खिंचवाने से ठीक पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के बीच भी बेहद गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई। दोनों ने एक-दूसरे का हंसकर स्वागत किया। मेलोनी ने पीएम मोदी से कहा, “आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा!”

सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरों और वीडियो के क्रेज का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने इस संक्षिप्त बातचीत के दौरान ‘इंस्टाग्राम’ का भी नाम लिया, जिसे सुनकर मेलोनी मुस्कुरा उठीं।

कुल मिलाकर, इस 27 मिनट के ‘ओपन माइक’ ने यह दिखा दिया कि भले ही ये दुनिया के सबसे ताकतवर नेता हों, लेकिन जब काम का दबाव थोड़ा कम होता है, तो ये भी आम इंसानों की तरह नींद की कमी, मौसम, खेल, सिगरेट और सोशल मीडिया पर मजेदार गप्पें लड़ाते हैं।

“सुधर जाओ, वरना फिर से सिर पर गिराएंगे बम”! G7 समिट में ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, डील से पहले दी खुली चेतावनी

 

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