दुनिया की एआई रेस अब सिर्फ टेक कंपनियों और सुपरपावर देशों की लड़ाई नहीं रही। इसकी कीमत निर्माण साइटों पर काम कर रहे वर्कर्स भी चुका रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास स्थित एबिलीन में बन रहा स्टारगेट डेटा सेंटर 500 अरब डॉलर (47.18 लाख करोड़ रुपए) का मेगा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसे ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे दिग्गज मिलकर बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसे अमेरिका की एआई ताकत का बड़ा दांव बता चुके हैं। मकसद है चीन को एआई रेस में पीछे छोड़ना। लेकिन टाइम की ग्राउंड पड़ताल इस चमकदार प्रोजेक्ट की दूसरी तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से निर्माण की इस अंधी दौड़ में मजदूरों की जान और सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रोजेक्ट साइट पर 8,000 मजदूरों के साथ कई हादसे सामने आए हैं। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था के मुताबिक 2025 में कई मजदूरों की टांगों में फ्रैक्चर हुआ। एक मजदूर एक्सकेवेटर के नीचे दबा। एक सीढ़ी से गिरा। एक पर 1,400 पाउंड वजन वाले कांच के पैनल गिर गए। एक मजदूर पोर्टा-पॉटी में मृत मिला। दिसंबर 2024 से साइट से 911 पर 14 इमरजेंसी कॉल दर्ज हुईं। इनमें चोट, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी शामिल थीं। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं दो ठेकेदार कंपनियों पर अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। ग्राउंड जीरो से खुलासा… वर्कर्स को पानी और पंखे तक के लिए ‘लग्जरी’ बता तरसाया गया वर्कर्स ने साइट के अंदर के हालात को काफी कठिन बताया। एक इलेक्ट्रिशियन ने आरोप लगाया कि टेक्सास की तेज गर्मी में भी साइट पर पीने का पानी आसानी से उपलब्ध नहीं है। वर्कर्स से कहा गया कि ठंडा पानी ‘लग्जरी’ है, अधिकार नहीं। पंखे भी वापस ले लिए गए। एक वर्कर्स के मुताबिक कूलिंग स्टेशन में ज्यादा समय बिताने पर लिखित चेतावनी दी गई। एक कर्मी ने कहा कि कई को पैनिक अटैक भी आ चुको हैं। निर्माण की स्पीड बनाए रखने में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। 3 मामलों से समझें… रफ्तार में नियम कैसे छूटे केस 1 – ट्रक ड्राइवर डेनियल गोंजालेज बिजली उपकरणों वाला कंक्रीट बॉक्स उतार रहे थे। शोर में कम्युनिकेशन कमजोर था, वॉकी-टॉकी नहीं थे। तभी ऊपर से फेंकी गई चेन उनके सिर पर लगी। वे बेहोश हो गए। उन्होंने मुकदमा दायर किया है। केस 2 – 23 मई 2025 को एक मजदूर मिनी एक्सकेवेटर को रास्ता दिखा रहा था। जरूरी सुरक्षा न होने से वह ट्रैक के नीचे दब गया। उसके टखने और रीड की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था ने पाया कि मजदूर को ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। केस 3 – एक कर्मचारी कांच के पैनल खोल रहा था। तभी 650 किलो वजन के तीन पैनल उसके पैर पर गिर पड़े। जांघ की हड्डी टूट गई और कई सर्जरी करानी पड़ी। जांच में माना गया कि उस कर्मी को काम जल्दी खत्म करने का दबाव था। गोपनीयता समझौते ताकि वर्कर शिकायत नहीं करें कई मजदूरों ने पहचान छिपाकर बात की, क्योंकि उनसे गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए थे। आरोप है कि ऐसे समझौते साइट की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोक रहे हैं। उन्हें डर रहता है कि खुलकर बोलने पर नौकरी जा सकती है या आगे काम मिलने में दिक्कत होगी। स्टारगेट – अमेरिकी एआई रेस में सबसे बड़ा हथियार स्टारगेट अमेरिका का मेगा एआई इंफ्रा प्रोजेक्ट है। यह सामान्य डेटा सेंटर नहीं, बल्कि एआई मॉडल चलाने और ट्रेन करने के लिए जरूरी विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे नाम जुड़े हैं। इसका लक्ष्य चीन से आगे रहने की क्षमता विकसित करना है। रेस जीतनी है, प्रोजेक्ट जल्दी बनाना होगा – ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प स्टारगेट को एआई रणनीति का बड़ा हिस्सा बता चुके हैं। ओपनएआई के सैम, ओरेकल के लैरी व सॉफ्टबैंक के सन के साथ इसकी घोषणा हुई थी। ट्रम्प ने कहा था कि रेस जीतनी है, इसे जल्दी बनाना होगा।
दुनिया भर में वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक अवैध वन्यजीव तस्करी का सबसे बड़ा ज्ञात ऑनलाइन बाजार बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Meta की कमजोर मॉडरेशन व्यवस्था और कंटेंट से कमाई (मॉनेटाइजेशन) की सुविधा इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रही है। ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (GI-TOC) के अध्ययन में अप्रैल 2024 से मार्च 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 20 हजार से अधिक विज्ञापन और 2.60 लाख से ज्यादा वन्यजीव उत्पादों की बिक्री के पोस्ट दर्ज किए गए। इनमें करीब 75% विज्ञापन फेसबुक पर मिले। रिपोर्ट के अनुसार, बिक्री के लिए पेश किए गए लगभग 84% वन्यजीव ऐसे थे जिनका अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार CITES संधि के तहत प्रतिबंधित है। इनमें आधे से अधिक प्रजातियां संकटग्रस्त या अत्यंत संकटग्रस्त हैं। शोधकर्ताओं ने इन उत्पादों का कुल विज्ञापित मूल्य 6.6 करोड़ डॉलर (करीब 560 करोड़ रुपए) से अधिक बताया है। रिपोर्ट में पैंगोलिन, गैंडे के सींग, चिंपैंजी और संरक्षित पक्षियों सहित कई वन्यजीवों और उनके अंगों की खुलेआम बिक्री के उदाहरण दिए गए हैं। शोधकर्ताओं का आरोप है कि Meta के विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन जैसे मॉनेटाइजेशन मॉडल ऐसे अकाउंट्स को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं, जिससे अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलता है। Meta ने आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर संकटग्रस्त प्रजातियों की बिक्री प्रतिबंधित है।
देश में सोने की कीमत में फिर से गिरावट दिख रही है। 29 जून की सुबह ज्यादातर शहरों में भाव लुढ़का है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 144090 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में भाव 143940 रुपये प्रति 10 ग्राम है। एक सप्ताह में देश में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 2510 रुपये तक फिसली है। वहीं 22 कैरेट गोल्ड का भाव 2300 रुपये तक नीचे आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,077.64 डॉलर प्रति औंस पर है।
इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अपील के बाद देश में 10 मई से अब तक सोना 13267 रुपये तक सस्ता हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के बढ़ते आयात बिल का जिक्र करते हुए 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की थी कि एक साल तक सोने की गैर-जरूरी खरीद करने से बचें, ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके।
देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट
दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144090 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132090 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131940 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143940 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 145850 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143940 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131940 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
| शहर | 22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) | 24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) |
| दिल्ली | 132090 | 144090 |
| मुंबई | 131940 | 143940 |
| अहमदाबाद | 131990 | 143990 |
| चेन्नई | 133690 | 145850 |
| कोलकाता | 131940 | 143940 |
| हैदराबाद | 131940 | 143940 |
| जयपुर | 132090 | 144090 |
| भोपाल | 131990 | 143990 |
| लखनऊ | 132090 | 144090 |
| चंडीगढ़ | 132090 | 144090 |
चांदी की कीमत
सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट है। 29 जून की सुबह कीमत फिसलकर 239900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक सप्ताह में भाव 10000 रुपये नीचे आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 59.12 डॉलर प्रति औंस पर है।
भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 बड़े समझौतों और विकास परियोजनाओं का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में हुए इन फैसलों से रक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा। सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि अब सेशेल्स में भी भारत की UPI आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू होगी। भारत ने अब तक 23 से अधिक देशों के साथ UPI को लेकर समझौते किए हैं। फिलहाल 9 देशों में UPI से भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा भारत, सेशेल्स को 1,250 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट (लोन) देगा, जिससे वहां की विकास परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि, नए राष्ट्रीय अस्पताल की तैयारी और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग जैसे अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, 10 यूटिलिटी वाहन, 5 नौकाएं, 6 एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। ये घोषणाएं ऐसे समय हुई हैं, जब दोनों देश राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… मोदी गोल्डन जुबली नेशनल डे में चीफ गेस्ट प्रधानमंत्री मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। उन्हें अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। मोदी आज सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे। इस दौरान भारतीय नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और नेवल बैंड भी परेड में शामिल होंगे। PM मोदी के सेशेल्स दौरे की 4 खास बातें 1. गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे। 2. 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल PS लेस्पवार सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को गिफ्ट किया। यह सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा। 3. नए समझौतों पर हस्ताक्षर भारत और सेशेल्स ने 19 अहम समझौतों और घोषणाओं का ऐलान किया। इसमें प्रत्यर्पण संधि, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान शुरू करने, डिजिटल भुगतान आदि शामिल थे। 4. मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स में ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है। कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं। प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद को संबोधित किया:बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता, 5 भारतीयों से हुई इसकी शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जनता से खास अपील की थी। उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने से बचे, ताकि विदेशी मुद्रा बचाया जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
कितना सस्ता हुए सोना-चांदी?
इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को जब प्रधानमंत्री ने यह अपील की थी, तब 24 कैरेट सोना 1,53,140 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी 2,62,350 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी।
अब 28 जून तक सोना 13,267 रुपये सस्ता होकर 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी 45,809 रुपये टूटकर 2,16,541 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है।
इस दौरान सरकार के कुछ फैसलों और वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली का असर भी कीमतों पर देखने को मिला।
पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?
10 मई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के बढ़ते आयात बिल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा जैसी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च टालें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।
प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर सोना, ईंधन और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं का आयात कम होगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी।
भारत में इसका असर क्यों ज्यादा पड़ता है?
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने और आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
जब सोने का आयात बढ़ता है, तो डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी बढ़ा दबाव
प्रधानमंत्री की अपील के कुछ दिन बाद सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी। इसके लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) में बढ़ोतरी की गई।
Senco Gold के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुवंकर सेन ने पहले Moneycontrol से कहा था कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ेगा। उनके मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से निकट भविष्य में सोने की मांग कम हो सकती है। साथ ही सोने का आयात 10% से 15% तक घटने का अनुमान है।
हालांकि, सरकार का मकसद कीमतें घटाना नहीं, बल्कि सोने के आयात पर लगाम लगाना था। लेकिन ऊंची ड्यूटी और कमजोर मांग की वजह से आने वाले समय में आयात पर असर पड़ सकता है।
Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹2510 तक सस्ता, चांदी ₹10000 लुढ़की
Stocks to Watch: सोमवार, 29 जून के कारोबार में कई शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने बड़े अधिग्रहण किए हैं, कुछ को नए ऑर्डर मिले हैं। ऐसे में इन 16 शेयरों में कारोबार के दौरान अच्छी हलचल देखने को मिल सकती है।
Persistent Systems
आईटी कंपनी Persistent Systems जर्मनी की Nagarro SE को खरीदेगी। यह डील 81 यूरो प्रति शेयर के भाव पर होगी। इसके बाद नई कंपनी का नाम Persistent-Nagarro Group होगा। कंपनी को उम्मीद है कि यह 2.9 अरब डॉलर की AI बेस्ड डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी बनेगी।
HDFC Bank
प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने कहा कि पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे में लगाए गए आरोपों की जांच दो स्वतंत्र कानूनी फर्मों से कराई गई। जांच में आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला।
Kotak Mahindra Bank
कोटक महिंद्रा बैंक नए CEO की तलाश शुरू करेगा। मौजूदा CEO अशोक वासवानी ने दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला किया है। CNBC-TV18 के मुताबिक, बैंक जल्द ही तीन उम्मीदवारों की सूची तैयार करेगा।
IRFC
सरकारी रेल कंपनी IRFC के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला। इसके चलते सरकार ने करीब 2,084 करोड़ रुपये जुटाए। साथ ही ग्रीनशू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया गया।
Transrail Lighting
पावर ट्रांसमिशन कंपनी Transrail Lighting को विदेशों से 459 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं। इसके साथ FY27 में कंपनी के कुल ऑर्डर 1,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गए हैं।
KEC International
इंजीनियरिंग और EPC कंपनी KEC International अब फिर से Power Grid के टेंडर में हिस्सा ले सकेगी। Power Grid ने तय समय से पहले कंपनी पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया है। इससे कंपनी के लिए नए ऑर्डर मिलने का रास्ता खुल गया है।
Power Grid
सरकारी पावर ट्रांसमिशन कंपनी Power Grid ने अपनी उधारी सीमा 1.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। हालांकि, इसके लिए AGM में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
Adani Ports
अदाणी ग्रुप की पोर्ट ऑपरेटर कंपनी Adani Ports ने बताया कि S&P Global Ratings ने उसकी लॉन्ग टर्म क्रेडिट रेटिंग BBB- से बढ़ाकर BBB कर दी है। साथ ही कंपनी के लिए Stable Outlook भी बरकरार रखा गया है।
Dr Reddy’s Laboratories
फार्मा कंपनी Dr Reddy’s Laboratories के हैदराबाद स्थित बायोलॉजिक्स प्लांट का USFDA ने प्री-लाइसेंस इंस्पेक्शन पूरा कर लिया है। निरीक्षण के दौरान 7 ऑब्जर्वेशन दिए गए हैं।
Aurobindo Pharma
फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि श्रीकाकुलम स्थित AuroActive Pharma प्लांट का USFDA निरीक्षण पूरा हो गया है। इस दौरान दो ऑब्जर्वेशन मिले हैं।
Hexaware Technologies
आईटी कंपनी Hexaware Technologies को Amazon Bedrock के लिए Anthropic का अधिकृत रीसेलर बनाया गया है। दुनिया की चुनिंदा कंपनियों को ही यह मंजूरी मिली है।
IIFL Finance
एनबीएफसी कंपनी IIFL Finance का बोर्ड इक्विटी और अन्य योग्य सिक्योरिटीज के जरिए 10,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। कंपनी ने ग्लोबल मीडियम टर्म नोट प्रोग्राम और उधारी सीमा बढ़ाने का भी फैसला किया है।
Waaree Energies
सोलर कंपनी Waaree Energies ने अमेरिकी कस्टम विभाग (CBP) की जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि जांच में यह नतीजा नहीं निकला है कि उसने चीन में बने सोलर सेल वाले मॉड्यूल अमेरिका भेजे थे।
Bajaj Healthcare
फार्मा कंपनी Bajaj Healthcare भारत की पहली कंपनी बन गई है, जिसे Cenobamate टैबलेट के निर्माण और बिक्री के लिए Subject Expert Committee (SEC) की सिफारिश मिली है।
Puravankara
रियल एस्टेट कंपनी Puravankara के बोर्ड ने अपनी सहायक कंपनी Purva Ruby Properties में 100% हिस्सेदारी 145 करोड़ रुपये में Prishal Office Parks III को बेचने की मंजूरी दे दी है।
Rajesh Exports
ज्वेलरी कंपनी Rajesh Exports ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी के ठिकानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई 25 जून को पूरी हो गई।
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Fuel Crisis News: फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर हड़कंप मच गया। होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।
भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है। ईंधन संकट की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत का 50% तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता था, जो अगले चार महीनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया।
संकट के बीच भारत ने दिखाया दम
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया। सरकार का दावा है कि करीब चार महीने तक आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद देश में कहीं भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राशनिंग लागू नहीं करनी पड़ी। इस दौरान ईंधन की उपलब्धता सामान्य बनी रही।
जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है भारत
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई। जबकि ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। एलपीजी के आयात में भी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार ने कई मोर्चों पर बनाई रणनीति
ईंधन संकट के शुरुआती दिनों में ही केंद्र सरकार ने नियंत्रण संबंधी आदेश जारी किए। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद तेज कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया कि वे बढ़ी हुई लागत का अधिकांश बोझ खुद वहन करें ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इस फैसले से केंद्र सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का त्याग करना पड़ा।
बीते एक दशक में मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा
सरकार का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का लाभ इस संकट के दौरान मिला। वर्ष 2014 में जहां देश में 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इसी अवधि में एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई।
इसके अलावा भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों को भी सप्लाई चेन में शामिल किया गया है। रूस और अमेरिका से भी आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने वैकल्पिक समुद्री रूट्स का भी इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई।
एथेनॉल मिश्रण से भी मिली राहत
सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। सरकार का कहना है कि इससे हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की बचत हो रही है।
तेल कंपनियों पर पड़ा भारी वित्तीय बोझ
सरकार के अनुसार, सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बावजूद कंपनियां एक समय प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अंडर रिकवरी का सामना कर रही थीं। यह बाद में घटकर करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। अनुमान है कि चालू तिमाही में तेल कंपनियों को 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आसमान छूती कीमतें और सरकार पर बढ़ता दबाव
होर्मुज होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत जो तेल $70 प्रति बैरल में खरीद रहा था, उसकी कीमत महज चार हफ्तों में $120 के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंच गया। दूसरी ओर, एलपीजी की कीमतों में 46% की भारी बढ़ोतरी हुई। इससे एक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की आयात लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई। जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी कई गुना बढ़ चुका था।
संकट के चक्रव्यूह को भारत ने कैसे तोड़ा?
इस अभूतपूर्व संकट के बीच भारत सरकार, तेल कंपनियों और कूटनीतिज्ञों ने मिलकर एक बहुआयामी रणनीति तैयार की, ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े:-
1. 10 साल की तैयारी आई काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड)
भारत पिछले 10 वसालों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर लगातार निवेश कर रहा था। साल 2014 में जहाँ देश में केवल 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई। इस वजह से एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन (2014) से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। इसने संकट के समय एक बड़े सुरक्षा कवच का काम किया.
2. नए देशों से दोस्ती और नए रास्ते की खोज
भारत ने केवल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय आक्रामक आपूर्ति की नीति अपनाई। साल 2014 में भारत जहां 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई। भारत ने लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया। साथ ही अमेरिका और रूस से तेल के आयात को और गहरा किया। नए समुद्री रास्तों की खोज की गई, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई।
3. घरेलू मोर्चे पर राहत और सरकारी खजाने पर बोझ
सरकार ने तुरंत डिमांड मैनेजमेंट (Demand-management) लागू किया और घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के ऊंचे स्तर ने एक बड़ा सहारा दिया। इससे हर साल भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात की बचत होती है।
सबसे बड़ा फैसला यह था कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डाला। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केवल 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी की। इस वजह से तेल कंपनियों को प्रति दिन करीब 650 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस तिमाही में उन्हें कुल 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा असर
सरकार का दावा है कि पूरे संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर बना रहा। चालू खाते का घाटा नियंत्रण में रहा। साथ ही खुदरा महंगाई भी भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा के भीतर रही। जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही।
दूसरे देशों से अलग रही भारत की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई देशों को पेट्रोल-डीजल की राशनिंग लागू करनी पड़ी। वहीं भारत ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। साथ ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी।
भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न तो ईंधन की राशनिंग लागू की गई और न ही स्कूल बंद करने या वर्किंग डे घटाने जैसे कदम उठाए गए। केवल कमर्शियल एवं थोक एलपीजी तथा डीजल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
अब सामान्य हो रही स्थिति
सरकार के अनुसार, होर्मुज फिर से खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का लगभग दो महीने का भंडार उपलब्ध है। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (ISPRL) की क्षमता बढ़ाने का काम भी जारी है। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि, खबर है कि अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।
Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।
निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।
बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।
डेट पोर्टफोलियो की रणनीति
प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।
रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी
रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।
बाजार की गिरावट में डेट का रोल?
डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।
बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड
बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Daily Voice : INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन में आया बदलाव है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। वह इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव हैं,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधान हैं। उनका मानना है कि पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इनका रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।
उनके मानना है कि बाजार के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग का स्तर वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस दौरान इनमें से किसी की भी गारंटी नहीं है। इसलिए,अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर अर्निंग अच्छी रहती है,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।
क्या आपको लगता है कि ग्लोबल AI स्टॉक्स में अभी भी काफी बढ़त की गुंजाइश है,या आप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया गिरावट को लेकर चिंतित हैं?
ग्लोबल AI में आसानी से मिलने वाले फायदे का ज्यादातर हिस्सा पहले ही हासिल किया जा चुका है। हाल की गिरावट (जिसमें सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैल्यूएशन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई और नैस्डैक में एक ही सेशन में जबरदस्त गिरावट देखी गई) असल में महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन का रीसेट है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव नजरिया है,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधानी की जरूरत है। पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इस सेक्टर का रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।
क्या निवेशकों को IT सर्विस कंपनियों और AI इकोसिस्टम में निवेश करने में जल्दबाजी से बचना चाहिए?
हैं, धैर्य रखना सही रहेगा,लेकिन यह धैर्य भी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI साइकिल के एक मुश्किल दौर में हैं। AI से जुड़ी मांग बढ़ने और उसकी जगह लेने से पहले ही ऑटोमेशन की वजह से हर प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई कम हो जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए FY27 का कमजोर गाइडेंस (यानी ‘कांस्टेंट-करेंसी’के आधार पर कम सिंगल-डिजिट ग्रोथ) इसी बात को दिखाता है।
टेक्नोलॉजी कंपनियों को डील मिलने की रफ़्तार अच्छी बनी हुई है,लेकिन कीमतों का दबाव और प्रोडक्टिविटी में कमी की वजह से निकट भविष्य में अर्निंग्स की रफ़्तार सीमित रह सकती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखेंगे,लेकिन रिटर्न की उम्मीदों को कम रखने की सलाह होगी। यह सेक्टर ऐसा है जिसका साइकल बदल रहा है। ऐसे में अभी इसमें सोच समझकर निवेश बनाए रखना चाहिए और बहुत ज्यादा निवेश करने से बचाना चाहिए।
क्या आपको उम्मीद है कि अगले 6-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे?
ऐसा हो सकता है,लेकिन हमें इसे ‘बेस केस'(सबसे ज्यादा संभावित स्थिति) नहीं मानना चाहिए। निफ्टी अभी भी अपने पीक (उच्चतम स्तर)से काफी नीचे 24,000 के आसपास है और मोमेंटम इंडिकेटर पक्के भरोसे के बजाय दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं। नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग,वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस समय इसकी कोई गारंटी नहीं है।
अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास स्टॉक्स पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। हम रिकॉर्ड स्तर तक तेजी से पहुँचने की उम्मीद करने के बजाय,इस धीरे-धीरे होने वाले सुधार के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगे।
US-Iran के बीच संभावित डील से जुड़ी गतिविधियों के अलावा,आपको आगे चलकर मार्केट के लिए कौन सी बड़ी चुनौतियां दिखती हैं?
बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है, वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी। दूसरी,चुनौती बड़ी ग्लोबल टेक और AI सेक्टर में करेक्शन है। अगर विदेशी बाजारों में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आती है,तो विदेशी पैसा इमर्जिंग मार्केट (जिनमें भारत भी शामिल है) से बाहर निकल जाएगा। तीसरी चुनौती US में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार और डॉलर की मजबूती को लेकर अभी भी बनी अनिश्चितता है,जिसका सीधा असर FIIs पर पड़ता है।
चौथी चुनौती घरेलू अर्निंग की मजबूती है जहां मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड पॉलिसी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच कैसा समझौता होगा,इसको लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाजार में सावधानी बरतने की सलाह होगी।
क्या आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लंबे समय के लिए स्ट्रक्चरल निवेश के अच्छे मौके हैं?
ये स्ट्रक्चरल मौके तो हैं,लेकिन मैं इन्हें’सबसे अच्छे’कहने से बचने की जरूरत है। कई भारतीय प्लेटफॉर्म्स में मज़बूत नेटवर्क इफेक्ट और आगे बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है,फिर भी कई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इस वैल्यूएशन में यह मान लिया जाता है कि इनका काम बिना किसी गलती के होगा,जबकि इनके लिए मुनाफा,रेगुलेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा असल जोखिम बने हुए हैं।
हम उन्हें एक बड़े स्ट्रक्चरल बास्केट के हिस्से के तौर पर देखते हैं,जिसमें मैन्युफैक्चरिंग,बचत का फाइनेंशियलाइज़ेशन और प्रीमियम कंजम्पशन भी शामिल हैं । ये ऐसे थीम हैं जिनकी कमाई की संभावना आज ज्यादा साफ है। लेबल से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव करना। हम उन कुछ ऐसे प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करेंगे जो साफ तौर पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं और ग्रोथ के लिए किसी भी कीमत पर निवेश करने से बच रहे हैं।
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market Trend : वेव्स स्ट्रैटेजी एडवाइजर्स के फाउंडर और CEO आशीष क्याल को उम्मीद है कि मार्केट में अगले 2-3 कारोबारी सत्र में कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। इस दौरान निफ्टी के लिए 23,820 पर सपोर्ट और 24,200 पर रेजिस्टेंस रह सकता है। मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि निफ्टी के 24,200 के स्तर के ऊपर जाने से ऊपर की ओर 24,728 के गैन (Gann) लेवल की तरफ पॉजिटिव ट्रेंड की पुष्टि होगी।
जून की शुरुआत से 50 प्रतिशत से ज्यादा तेजी दिखाने के बाद,वैल्यूएशन के हिसाब से एजिस लॉजिस्टिक्स (Aegis Logistics) का भाव काफी बढ़ चुका है और नए निवेश के लिए रिस्क-रिवॉर्ड अब फायदेमंद नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि मौजूदा स्तरों पर इस स्टॉक को खरीदने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
वीकली चार्ट पर लगातार दो Doji कैंडलस्टिक बनने के बारे में आपकी क्या राय है? क्या आपको ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन की उम्मीद है?
निफ्टी के वीकली चार्ट पर पिछले दो हफ्तों से लगातार’डोजी कैंडल’दिख रही है,लेकिन ऐसा लगता है कि यह ऊपर की ओर ब्रेकआउट से पहले का कंसोलिडेशन है। निफ्टी 23,070 के निचले स्तर से बढ़कर 24,100 के ऊपर पहुंच गया है। यह तेजी सिर्फ़ 5 ट्रेडिंग सेशन में आई और तब से इंडेक्स एक बड़े दायरे में घूम रहा है,जिससे’ओवरबॉट’पोजीशन कम हो रही है। यह अगली चाल से पहले फिर से हो रही खरीदारी का संकेत दे रहा है।
मार्केट में अगले 2-3 कारोबारी सत्र में कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। इस दौरान निफ्टी के लिए 23,820 पर सपोर्ट और 24,200 पर रेजिस्टेंस रह सकता है। निफ्टी के 24,200 के स्तर के ऊपर जाने से ऊपर की ओर 24,728 के गैन (Gann) लेवल की तरफ पॉजिटिव ट्रेंड की पुष्टि होगी।
आने वाले हफ्ते में आपकी रणनीति क्या होगी?
निफ्टी अभी बिना किसी खास ट्रेंड या एक तय दायरे (रेंज-बाउंड) में कारोबार कर रहा है। इससे डायरेक्शनल ट्रेडर्स के लिए माहौल मुश्किल हो गया है। ऐसे हालात में,सीधे तेजी या मंदी का दांव लगाने के बजाय,ट्रेडर्स को’नॉन-डायरेक्शनल ऑप्शन स्ट्रैटेजी'(जैसे शॉर्ट स्ट्रैंगल)पर फोकस करना चाहिए। इससे उन्हें’टाइम डिके'(समय बीतने के साथ ऑप्शन की कीमत में कमी) का फायदा मिल सकता है,क्योंकि अगले 2 दिनों में इंडेक्स के 23,820-24,200 के दायरे में रहने की उम्मीद है। 24,200 के ऊपर एक टिकाऊ ब्रेकआउट से फिर से तेजी आ सकती है।
क्या आपको लगता है कि बैंक निफ्टी का प्रदर्शन निफ्टी से बेहतर बना रहेगा?
निफ्टी के मुकाबले बैंक निफ्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून में बैंक इंडेक्स में 10 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि निफ्टी में सिर्फ़ 5 प्रतिशत की बढ़त हुई। साथ ही,कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट,डॉलर इंडेक्स में तेजी और कमोडिटीज़ में बिकवाली से महंगाई का दबाव कम हो सकता है,जिससे ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले सेक्टर के लिए अच्छा रुझान बन सकता है।
आने वाले हफ्तो में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर निफ़्टी से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके चलते बैंक निफ़्टी जल्द ही 60,000 के स्तर तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है। इसके लिए नीचे की तरफ 57,000 के आसपास सपोर्ट है।
अगले हफ्ते के लिए आपकी दो टॉप पिक्स कौन हैं?
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने निफ्टी ऑटो इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसमें लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। जबकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स में लगभग 2.5 प्रतिशत की तेजी आई है। इससे इस स्टॉक की मजबूती और बेहतर प्रदर्शन का पता चलता है। साथ ही,पिछले 6-7 ट्रेडिंग सेशन में पहली बार यह स्टॉक पिछले दिन के हाई से ऊपर बंद हुआ है,जो एक अच्छा संकेत है।
₹3,200 के स्तर के ऊपर जाने पर ₹3,400 के आस-पास के पिछले स्विंग हाई की ओर नई रैली शुरू हो सकती है। यह नजरिया तब तक सही है जब तक कि स्टॉक ₹3,090 के स्तर से नीचे न चला जाए।
मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट ने ₹1,110 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर ब्रेकआउट की पुष्टि की है। इसके साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जबरदस्त उछाल आया है। आने वाले सेशन में यह तेजी ₹1,180 और उसके बाद ₹1,230 के लेवल तक जारी रह सकती है। जब तक स्टॉक ₹1,075 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहता है,तब तक पॉजिटिव आउटलुक बना रहेगा।
क्या आप इंटरग्लोब एविएशन को लेकर अभी भी बुलिश हैं,या आपको लगता है कि यह स्टॉक’ओवरबॉट’जोन के करीब पहुंच रहा है?
17 जून को ₹4,350 के निचले स्तर से इंटरग्लोब एविएशन में लगभग 25% की तेजी आई है। मोमेंटम अभी भी मज़बूत है,लेकिन बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड के लिए ₹5,320-₹5,250 के स्तर तक गिरावट आने पर इस स्टॉक को खरीदना चाहिए। डेली RSI 78 के स्तर के आसपास है,इसलिए नई पोजीशन लेने के लिए थोड़े समय के कंसोलिडेशन की जरूरत है। ऊपर की तरफ यह स्टॉक ₹5,600 तक जा सकता है,जो कि रेजिस्टेंस जोन है। जब तक स्टॉक 5,160 रुपये के ऊपर टिका हुआ है,तब तक गिरावट पर खरीदारी करना सही रणनीति रहेगी।
क्या आपको अगले हफ्ते संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर में और बढ़त की संभावना दिख रही है?
संवर्धन मदरसन ने हाल ही में वॉल्यूम में जबरदस्त उछाल के साथ एक छोटे से कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकलकर नया रिकॉर्ड हाई बनाया है। डेली RSI 68 के आस-पास है,जो बताता है कि ओवरबॉट जोन में जाए बिना भी मोमेंटम मजबूत बना हुआ है। जब तक क्लोजिंग के आधार पर ₹144 का स्तर बना रहता है,तब तक इस स्टॉक में ₹160 या उससे भी ऊंचे स्तरों तक जाने की उम्मीद बनी रहेगी।
ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर (OFSS) IT सेक्टर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में से एक बनकर उभरी है। डेली चार्ट पर इस स्टॉक ने’राउंडिंग बॉटम पैटर्न’से ब्रेकआउट की पुष्टि की है और 19 जून,2026 से लगातार’हायर हाइज़’और’हायर लो’बना रहा है। ह एक मजबूत तेजी के ट्रेंड को दिखाता है। जब तक यह स्टॉक ₹10,400 के लेवल से ऊपर बना रहता है,तब तक आने वाले समय में इसमें ₹12,000 या उससे ऊपर तक की और तेजी आने की संभावना बनी रहेगी।
क्या मौजूदा स्तरों पर एजिस लॉजिस्टिक्स (Aegis Logistics) ओवरबॉट दिख रहा है? अगर ऐसा है,तो क्या निवेशकों को इस स्टॉक में नई पोजीशन लेने से बचना चाहिए?
जून 2026 की शुरुआत से एजिस लॉजिस्टिक्स (Aegis Logistics) के शेयर में 50% से ज्यादा की तेजी आई है। हालांकि,इतनी तेजी के बाद यह रैली जरूरत से ज्यादा बढ़ी हुई लग रही है और नए निवेश के लिए रिस्क-रिवॉर्ड अब फायदेमंद नहीं है। RSI समेत ज्यादातर मोमेंटम इंडिकेटर ‘ओवरबॉट जोन’ में हैं,जिससे संकेत मिलता है कि जल्द ही प्रॉफ़िट बुकिंग या कंसोलिडेशन हो सकता है।
मौजूदा स्तर पर इस स्टॉक को खरीदने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय,इसके ₹1,010-₹1,000 के स्तर तक गिरने का इंतजार करना चाहिए। इसके बाद इसमें ₹1,250 के स्तर तक की तेजी आ सकती है।
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

